NASA का मून मिशन स्थगित, मार्च में होने वाला था लांच, जानिए क्या रही वजह?

नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने बहुप्रतीक्षित मून मिशन को फिलहाल स्थगित कर दिया है। एजेंसी मानवयुक्त फ्लाइबाइ मिशन आर्टेमिस-2 को मार्च में लॉन्च करने की तैयारी में थी, लेकिन ऐन वक्त पर सामने आई तकनीकी समस्या के कारण रॉकेट और यान दोनों को लॉन्च पैड से हटा लिया गया। जानकारी के अनुसार रॉकेट में हीलियम लीक की समस्या पाई गई, जिसके चलते मिशन को टालने का निर्णय लिया गया। नासा के प्रमुख जेरेड आइजैकमैन ने शनिवार को बताया कि स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) में हीलियम रिसाव का पता चला है। इस तकनीकी खामी के कारण अब मार्च में मिशन की लॉन्चिंग संभव नहीं होगी। उन्होंने स्वीकार किया कि इस फैसले से पूरी टीम निराश है, क्योंकि मिशन की तैयारी में लंबे समय से कड़ी मेहनत की जा रही थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बड़े और महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों में सावधानी सर्वोपरि होती है। 1960 के दशक में भी जब नासा ने ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की थीं, तब कई चुनौतियों और देरी का सामना करना पड़ा था। रॉकेट सिस्टम में हीलियम की अहमियतकिसी भी रॉकेट प्रणाली में हीलियम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यह प्रोपेलेंट टैंक में आवश्यक दबाव बनाए रखने और इंजन के संचालन में मदद करता है। हीलियम में आई गड़बड़ी को देखते हुए अब एसएलएस रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान को मरम्मत के लिए व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में ले जाया जाएगा, जहां विस्तृत जांच और सुधार का काम किया जाएगा। क्या था मिशन का उद्देश्यआर्टेमिस-2 मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री शून्य-गुरुत्वाकर्षण में एक छोटे केबिन में काम करने वाले थे। पृथ्वी की निचली कक्षा में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की तुलना में अधिक रेडिएशन का सामना करना पड़ता, हालांकि इसे सुरक्षित दायरे में माना गया था। मिशन की योजना के अनुसार वापसी के दौरान अंतरिक्ष यात्री वायुमंडल से गुजरते हुए एक चुनौतीपूर्ण रिएंट्री का अनुभव करते और अमेरिका के पश्चिमी तट से दूर प्रशांत महासागर में लैंडिंग करते। गौरतलब है कि इसके बाद लक्ष्य चंद्रमा पर इंसानों की स्थायी मौजूदगी सुनिश्चित करना है। आगे चलकर आर्टेमिस-4 और आर्टेमिस-5 मिशनों के जरिए ‘गेटवे’ नामक एक छोटा स्पेस स्टेशन स्थापित किया जाएगा, जो चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा करेगा। उल्लेखनीय है कि नासा ने आखिरी बार 1960 और 1970 के दशक में अपोलो कार्यक्रम के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजा था। अब आर्टेमिस कार्यक्रम के जरिए एजेंसी चंद्रमा पर दीर्घकालिक और स्थायी उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, हालांकि फिलहाल तकनीकी अड़चन ने उसकी रफ्तार पर अस्थायी विराम लगा दिया है।
Braj Holi Celebration: फूलों की होली से गूंजा मथुरा, भक्तिमय रंग में रंगी ब्रजभूमि

नई दिल्ली।ब्रजभूमि में होली का रंग अब पूरी तरह चढ़ने लगा है। उत्तर प्रदेश के Mathura स्थित Raman Reti Ashram में 21 फरवरी से भव्य होली महोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। यहां पारंपरिक अंदाज में फूलों और गुलाल के साथ होली खेली जा रही है। देश-विदेश से आए श्रद्धालु, स्थानीय भक्त और पर्यटक इस आयोजन का हिस्सा बनकर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव का आनंद ले रहे हैं। फूलों की होली बनी आकर्षण का केंद्ररमणरेती आश्रम में आयोजित होली महोत्सव की सबसे बड़ी खासियत है फूलों की होली। यहां रंगों के साथ-साथ पुष्पवर्षा की जाती है, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय और रंगीन वातावरण में डूब जाता है। हल्के गुलाल की बौछार और रंग-बिरंगे फूलों की बारिश के बीच भजन-कीर्तन का आयोजन माहौल को और भी आध्यात्मिक बना देता है। श्रद्धालु भगवान के जयकारों के साथ रंगों में सराबोर हो रहे हैं। ढोल, मंजीरे और भजनों की धुन पर पूरा आश्रम होली के उल्लास में झूमता नजर आ रहा है।ब्रज में 40 दिनों तक चलता है रंगोत्सवब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव करीब 40 दिनों तक मनाया जाता है। इसकी शुरुआत बसंत पंचमी से ही हो जाती है। ब्रज मंडल के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में यह पर्व केवल रंगों का नहीं बल्कि भक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। इसी कड़ी में मथुरा का रमणरेती आश्रम हर साल विशेष होली महोत्सव आयोजित करता है, जहां श्रद्धालु रंगों के साथ आध्यात्मिक आनंद का अनुभव करते हैं। आने वाले दिनों में बरसाना और नंदगांव में लठमार होली जैसे आयोजन भी उत्साह को चरम पर पहुंचाएंगे। श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़21 फरवरी से शुरू हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। सुबह से ही आश्रम परिसर में भक्तों की भीड़ दिखाई दे रही है। आरती, भजन और रंग-गुलाल के बीच श्रद्धालु उत्सव का आनंद ले रहे हैं। सुरक्षा और व्यवस्थाएंआयोजन को देखते हुए आश्रम प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए हैं। आगंतुकों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई है ताकि उत्सव की गरिमा बनी रहे। ब्रज की यह होली केवल रंगों का उत्सव नहीं बल्कि श्रद्धा, प्रेम और परंपरा का अद्भुत संगम है। आने वाले दिनों में ब्रज की गलियां और अधिक रंगों और उल्लास से भर उठेंगी।
नई दिल्ली डिक्लेरेशन: 88 देशों ने एआई के भविष्य के लिए किए हस्ताक्षर, भारत की ऐतिहासिक जीत

नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में आयोजित पांच दिवसीय इंडिया एआई इम्पैक्ट शुक्रवार को एक ऐतिहासिक मोड़ पर संपन्न हुआ, जब 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन एआई इम्पैक्ट’ पर हस्ताक्षर किए। इस घोषणापत्र ने न केवल एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के भविष्य को दिशा देने का काम किया, बल्कि भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव को भी वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया। भारत की बड़ी कूटनीतिक जीतभारत के लिए यह समझौता एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। पिछले साल पेरिस में हुए ‘एआई एक्शन समिट’ में अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने यूरोपीय नियामक दृष्टिकोण का हवाला देते हुए घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। लेकिन नई दिल्ली में भारत ने इन सभी देशों को एक मंच पर लाने में सफलता हासिल की। भारत का मुख्य उद्देश्य एआई का “लोकतंत्रीकरण” करना है, ताकि यह तकनीक केवल कुछ बड़ी कंपनियों या व्यक्तियों के हाथों में न रहे, बल्कि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। नई दिल्ली डिक्लेरेशन के मुख्य पहलूइस घोषणापत्र के माध्यम से हस्ताक्षर करने वाले देशों ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर सहमति जताई है, जो एआई के प्रभाव और उपयोग को वैश्विक स्तर पर बेहतर और सुरक्षित बनाएंगे: डेमोक्रेटिक डिफ्यूजन चार्टर:इस चार्टर के तहत एआई के बुनियादी संसाधनों तक सभी की पहुंच को बढ़ावा दिया जाएगा, साथ ही स्थानीय नवाचारों को भी समर्थन मिलेगा। ग्लोबल एआई इम्पैक्ट कॉमन्स:यह एक व्यावहारिक मंच होगा जो एआई के सफल उपयोगों को विभिन्न क्षेत्रों में अपनाने और पुनरावृत्त करने में मदद करेगा। ट्रस्टेड एआई कॉमन्स:एआई प्रणालियों की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी संसाधनों, बेंचमार्क और सर्वोत्तम प्रथाओं का साझा संग्रह बनाया जाएगा। इंटरनेशनल नेटवर्क ऑफ एआई फॉर साइंस इंस्टीट्यूशन्स:वैज्ञानिक अनुसंधान में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर के संस्थानों को जोड़ा जाएगा। समाज के उत्थान के लिए एआई का उपयोगइस घोषणापत्र में इस बात को स्वीकार किया गया है कि एआई समाज के सभी वर्गों के उत्थान की क्षमता रखता है। इसके लिए सोशल एम्पॉवरमेंट प्लेटफॉर्म बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे विभिन्न सामाजिक वर्गों को एआई के लाभ मिल सकें। साथ ही, एआई के कारण बदलते रोजगार स्वरूप को ध्यान में रखते हुए, ‘रीस्किलिंग’ और कार्यबल विकास के लिए स्वैच्छिक मार्गदर्शक सिद्धांतों पर भी सहमति बनी है। आगे की चुनौतियाँ और कार्यान्वयनहालांकि 88 देशों ने इस डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इन वादों को वास्तविकता में बदलना होगी, क्योंकि ये सभी प्रतिबद्धताएं स्वैच्छिक प्रकृति की हैं। कुछ सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) ने शुरुआत में इस घोषणापत्र के कुछ अंशों पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि वे संयुक्त राष्ट्र के (UN) चार्टर से मिलते-जुलते थे। हालांकि, भारत को एक महत्वपूर्ण व्यापारिक सहयोगी मानते हुए, यूरोपीय संघ अंततः इस पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हो गया।
MP में फरवरी में चौथी बार बारिश का अलर्ट, 7 जिलों में संभावना, तापमान में होगी बढ़ोतरी

भोपाल । मध्य प्रदेश में फरवरी में मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। इस महीने चौथी बार मौसम विभाग ने बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम के जानकारों के मुताबिक, मंडला, डिंडौरी समेत 7 जिलों में कल, यानी 23 फरवरी को बारिश हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, सोमवार को दिन के तापमान में वृद्धि होने की संभावना है, और पारा 3 से 4 डिग्री तक बढ़ सकता है। बीते 24 घंटे में कई जिलों में बारिशपिछले 24 घंटे में भोपाल, सागर, जबलपुर, धार, इंदौर, खंडवा, रायसेन, रतलाम, उज्जैन सहित 15 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। इस असामान्य मौसम के लिए साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) और ट्रफ लाइन की एक्टिविटी जिम्मेदार बताई जा रही है। भोपाल और आसपास के क्षेत्रों का मौसमभोपाल में शनिवार को सुबह बादल रहे, लेकिन दिन में तेज धूप के कारण तापमान में वृद्धि देखी गई। दिन के दौरान पारा ऊपर चढ़ा, जबकि दक्षिण-पूर्वी हिस्से के छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा और मऊगंज में हल्की बूंदाबांदी हुई। ग्वालियर में मौसम सामान्य रहा, और तापमान में कोई खास बदलाव नहीं आया। रविवार सुबह ग्वालियर में 15 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इंदौर में शनिवार की सुबह मौसम ठंडा था, लेकिन दिनभर गर्मी ने जोर पकड़ा। तापमान 7 डिग्री बढ़कर 31 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया। रात के समय हल्की ठंड महसूस की गई और तापमान गिरकर 13 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं, रविवार सुबह हल्की ठंड के बाद दिनभर तेज धूप रही और ठंड का असर लगभग खत्म हो गया। भविष्य का मौसम और आगामी बदलावआज यानी 22 फरवरी को भोपाल में आसमान साफ है और धूप खिली हुई है। 9 बजे तक तापमान 24°C रिकॉर्ड किया गया है, और हवा की गति 4 mph है। आज बारिश की कोई संभावना नहीं है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज का अधिकतम तापमान 31°C और न्यूनतम तापमान 17°C रहने की संभावना है। फरवरी में तीन बार बारिश का दौरइस साल फरवरी की शुरुआत में ही प्रदेश में ओले, बारिश और आंधी का दौर देखा गया, जिससे फसलों को नुकसान हुआ। सरकार ने इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे भी किया। इसके बाद 18 फरवरी से तीसरी बार बारिश का मौसम बना। 19, 20 और 21 फरवरी को भी बारिश ने अपना असर दिखाया था। अब चौथी बार बारिश का दौर आने वाला है, और 23 फरवरी को फिर से बारिश की संभावना जताई जा रही है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस और आगामी बारिशमौसम विभाग ने 22 फरवरी को पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) का अलर्ट जारी किया था, लेकिन यह प्रणाली अब आगे बढ़ चुकी है। हालांकि, इससे लगातार बारिश की संभावना तो नहीं है, लेकिन कुछ जिलों में बारिश हो सकती है। जिन जिलों में बारिश की संभावना जताई जा रही है, उनमें छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर जिले शामिल हैं।
मंगल का कुंभ राशि में महागोचर: ग्रहों के अनूठे संयोग से चमकेगी इन 4 राशियों की किस्मत, बरसेगा धन और वैभव

नई दिल्ली/भोपाल। अंतरिक्ष में ग्रहों की चाल एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। आगामी 23 फरवरी 2026 को सुबह 7:27 बजे ऊर्जा, साहस और पराक्रम का कारक माना जाने वाला मंगल ग्रह कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंभ राशि में पहले से ही ग्रहों का एक दुर्लभ जमावड़ा लगा हुआ है। वर्तमान में यहाँ सुख-वैभव के प्रदाता शुक्र, बुद्धि के देवता बुध और छाया ग्रह राहु विराजमान हैं। ऐसे में मंगल का आगमन न केवल ‘अंगारक योग’ जैसी स्थितियां बनाएगा, बल्कि शुक्र और मंगल की युति आर्थिक समृद्धि के द्वार भी खोलेगी। ज्योतिष में मंगल की ऊर्जा और शुक्र के ऐश्वर्य का मिलन भौतिक सुखों में वृद्धि करने वाला माना जाता है। इस गोचर का सबसे सकारात्मक प्रभाव मिथुन राशि के जातकों पर देखने को मिलेगा। मिथुन राशि वालों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है। इन्हें न केवल परिवार का भरपूर सहयोग मिलेगा, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी नए और सुनहरे अवसर प्राप्त होंगे। धन आवक के नए स्रोत खुलने से बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी होगी और प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी। हालांकि, इन जातकों को सलाह दी गई है कि वे अति उत्साह में अपनी सेहत को नज़रअंदाज न करें और व्यर्थ के विवादों से दूरी बनाए रखें। वहीं, वृश्चिक राशि के जातकों के लिए मंगल का यह परिवर्तन कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता लेकर आ रहा है। नौकरीपेशा लोगों को अपने वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा और पदोन्नति मिल सकती है। प्रोफेशनल लाइफ में आपका दबदबा बढ़ेगा और सामाजिक दायरे में भी विस्तार होगा। इस दौरान बनने वाले नए संपर्क भविष्य में बड़े आर्थिक लाभ का कारण बन सकते हैं। दोस्तों की मदद से आपके रुके हुए कठिन कार्य भी आसानी से पूरे हो जाएंगे। मकर राशि के जातकों के लिए यह गोचर आत्मविश्वास और जोश का संचार करने वाला साबित होगा। विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए यह समय बेहद अनुकूल है, उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में आशातीत सफलता मिलेगी। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर आपका झुकाव बढ़ेगा। शिक्षा या ट्रेनिंग के सिलसिले में की गई यात्राएं सुखद और परिणामी रहेंगी। कुल मिलाकर मकर राशि वालों के लिए यह सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समय है। अंततः, चूंकि यह गोचर कुंभ राशि में ही हो रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों को इसका सीधा और सर्वाधिक लाभ मिलना तय है। कारोबारियों के लिए नए व्यावसायिक समझौते लाभकारी सिद्ध होंगे और समाज में आपकी प्रतिष्ठा में चार चांद लगेंगे। मान-सम्मान की प्राप्ति के साथ-साथ आपका स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहेगा। हालांकि, मंगल की तप्त ऊर्जा को संतुलित करने के लिए ज्योतिषियों ने कुंभ राशि वालों को पर्याप्त जल सेवन करने की सलाह दी है। ग्रहों का यह अद्भुत मेल अगले कुछ दिनों तक इन चार राशियों के जीवन में खुशहाली और सफलता की नई इबारत लिखेगा।
ढुण्ढिराज चतुर्थी 2026: बाधाओं के नाश और मनोकामना पूर्ति का पावन दिन, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

नई दिल्ली । फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाने वाली ढुण्ढिराज चतुर्थी इस वर्ष 21 फरवरी 2026 शनिवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार यह तिथि भगवान श्री गणेश को समर्पित है जिन्हें विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है। मत्स्य पुराण में इस चतुर्थी को ‘मनोरथ चतुर्थी’ के नाम से भी वर्णित किया गया है क्योंकि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। कहा जाता है कि जीवन में आ रही बाधाओं रुकावटों और मानसिक अशांति को दूर करने के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी होता है। इस बार ढुण्ढिराज चतुर्थी का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इस दिन शुभ योगों का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन शुभ शुक्ल और रवि योग का निर्माण हो रहा है जो धार्मिक कार्यों और पूजन-अर्चन के लिए अत्यंत अनुकूल माने जाते हैं। ऐसे शुभ संयोग में भगवान गणेश की आराधना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और साधक के जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। पूजा के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त रहेंगे। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 13 मिनट से 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगा जो साधना और जप के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 28 मिनट से 3 बजकर 14 मिनट तक रहेगा जिसमें किए गए कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 13 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक रहेगा जो पूजन के लिए शुभ है। वहीं निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 9 मिनट से 1 बजे तक रहेगा जो विशेष साधना और मंत्र जप के लिए उत्तम माना गया है। ढुण्ढिराज चतुर्थी के दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा की जाती है। गणपति को लाल पुष्प दूर्वा मोदक और सिंदूर अर्पित करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से दूर्वा और मोदक भगवान को अत्यंत प्रिय हैं। पूजा के दौरान ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जप या गणेश स्तोत्र का पाठ करने से बुद्धि विवेक और सफलता की प्राप्ति होती है। श्रद्धा और एकाग्रता के साथ की गई आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलने लगती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से न केवल आर्थिक समृद्धि आती है बल्कि पारिवारिक सुख-शांति भी बनी रहती है। विद्यार्थी वर्ग के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है क्योंकि भगवान गणेश को बुद्धि और विद्या का देवता कहा गया है। जो व्यक्ति सच्चे मन से इस दिन उपवास रखकर पूजा-अर्चना करता है उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और अधूरे कार्य पूर्ण होने लगते हैं। ढुण्ढिराज चतुर्थी केवल एक व्रत नहीं बल्कि आत्मविश्वास और आस्था को मजबूत करने का अवसर भी है। शुभ योगों से युक्त इस पावन दिन पर भगवान गणेश की आराधना कर अपने जीवन से विघ्नों को दूर करने और सफलता की ओर कदम बढ़ाने का यह श्रेष्ठ अवसर है।
होंठों के कालेपन का कारण चाय या कुछ और? विशेषज्ञों ने बताया असली सच…

नई दिल्ली।भारत में चाय केवल एक पेय नहीं बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली का हिस्सा है सुबह की शुरुआत से लेकर ऑफिस ब्रेक और शाम की थकान तक कई लोग दिन में तीन से चार बार या उससे भी अधिक चाय पीते हैं ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या ज्यादा चाय पीने से होंठ काले हो जाते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसका सीधा जवाब नहीं है चाय में मौजूद कैफीन और टैनिन हल्का दाग छोड़ सकते हैं खासकर दांतों पर लेकिन ये तत्व सीधे तौर पर होंठों को स्थायी रूप से काला नहीं करते असली समस्या तब शुरू होती है जब व्यक्ति बहुत अधिक गर्म चाय बार बार पीता है गर्म पेय का लगातार संपर्क होंठों की नाजुक त्वचा को प्रभावित करता है इससे त्वचा की ऊपरी परत सूखने लगती है और धीरे धीरे पपड़ी बनती है लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो होंठों का रंग गहरा दिखाई देने लगता है विशेषज्ञ बताते हैं कि होंठों के कालेपन के पीछे कई जीवनशैली से जुड़े कारण जिम्मेदार होते हैं शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन एक बड़ा कारण है जब शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होता तो होंठ सूखकर बेजान हो जाते हैं और उनका प्राकृतिक गुलाबी रंग फीका पड़ने लगता है धूम्रपान या तंबाकू सेवन भी होंठों की रंगत बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है निकोटीन और अन्य रसायन पिगमेंटेशन को बढ़ाते हैं जिससे होंठ धीरे धीरे काले हो सकते हैं इसी तरह बिना सुरक्षा के लंबे समय तक धूप में रहना भी हानिकारक है सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें त्वचा में मेलानिन का स्तर बढ़ा सकती हैं जिससे होंठों का रंग गहरा हो जाता है लिप केयर की अनदेखी भी एक बड़ी वजह है बार बार होंठ चाटना सस्ते या घटिया गुणवत्ता वाले लिप प्रोडक्ट्स का उपयोग करना या रात में मॉइस्चराइज न करना होंठों की सेहत पर असर डालता है कुछ मामलों में एलर्जी या हार्मोनल बदलाव भी रंग में परिवर्तन का कारण बन सकते हैं स्वास्थ्य संबंधी सामान्य मार्गदर्शन के अनुसार संतुलित जीवनशैली और नियमित देखभाल से इन समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है वैश्विक स्तर पर भी त्वचा और होंठों की सुरक्षा को दैनिक स्वास्थ्य देखभाल का हिस्सा माना गया है जैसा कि World Health Organization अपने स्वास्थ्य संरक्षण के व्यापक सिद्धांतों में त्वचा सुरक्षा पर जोर देता है अगर आप होंठों की प्राकृतिक रंगत बनाए रखना चाहते हैं तो कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं दिनभर पर्याप्त पानी पिएं SPF युक्त लिप बाम का उपयोग करें अत्यधिक गर्म चाय या कॉफी से बचें धूम्रपान से दूरी रखें और सोने से पहले होंठों पर अच्छा मॉइस्चराइजर लगाएं यदि होंठों का रंग अचानक बहुत ज्यादा गहरा हो जाए जलन सूजन या दर्द महसूस हो तो त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतर होता है क्योंकि कभी कभी यह किसी आंतरिक स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है