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Kerala Name Changed : केरल का नया नाम ‘केरलम’! मोदी कैबिनेट ने दिया ऐतिहासिक मंजूरी, राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नया सम्मान

Kerala Name Changed : नई दिल्ली। केरल अब आधिकारिक तौर पर ‘केरलम’ के नाम से जाना जाएगा। मोदी कैबिनेट ने मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को इस ऐतिहासिक फैसले पर मुहर लगा दी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि केरल का नाम बदलने की मांग लंबे समय से राज्य और स्थानीय भाषा प्रेमियों के बीच उठती रही है, और अब इस पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हरी झंडी दे दी है। इस कदम को राज्य विधानसभा में अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह संविधान की आठवीं अनुसूची में भी शामिल कर दिया जाएगा। केरल विधानसभा ने इस प्रस्ताव को पारित करने का रास्ता पहले ही साफ कर दिया था। 24 जून, 2024 को विधानसभा ने आम सहमति से केंद्र सरकार को राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रारंभिक प्रस्ताव में कुछ तकनीकी सुधार सुझाए थे। इसके बाद दूसरी बार प्रस्ताव पारित किया गया और अब केंद्र ने इसे मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में राज्य के हित में यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि यह नाम न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि मलयालम भाषा के महत्व को भी उजागर करेगा। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी राज्य का नाम बदलने का लंबे समय से समर्थन किया था। उनका कहना था कि ‘केरलम’ नाम मलयालम भाषा और स्थानीय संस्कृति की गहनता को दर्शाता है और इससे राज्य की पहचान और गौरव बढ़ेगा। भाजपा के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी इस साल के शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य का आधिकारिक नाम बदलने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि ‘केरलम’ नाम स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करता है और राज्य की असली पहचान को दर्शाता है। नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित इस बैठक में केरल का नाम बदलने के अलावा भी कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इस कदम से राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक और सांस्कृतिक माहौल में भी एक नया उत्साह देखा जा रहा है। नाम परिवर्तन न केवल औपचारिकता है, बल्कि यह राज्यवासियों के लिए सांस्कृतिक गर्व और भाषाई सम्मान का प्रतीक है। केरल का यह नाम परिवर्तन देश के अन्य राज्यों में भी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूकता बढ़ा सकता है। राज्य में स्थानीय भाषा, परंपराएं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए यह एक मजबूत संदेश है। अब केरलम के नाम से राज्य की पहचान और भी व्यापक होगी, और यह राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। संक्षेप में कहा जाए तो मोदी कैबिनेट द्वारा केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की मंजूरी राज्य की भाषाई, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान को मजबूत करने वाला निर्णय है। अब इसे अंतिम रूप देने के लिए राज्य विधानसभा में विधेयक पेश किया जाएगा, जिसके बाद यह नाम संविधान की आठवीं अनुसूची में भी दर्ज होगा। इस कदम से केरलम की सांस्कृतिक विरासत को एक नई पहचान मिलेगी और राज्यवासियों में गर्व की भावना और बढ़ेगी।

मंगल दोष के प्रभाव कम करने के उपाय: मंगलवार को हनुमान उपासना और दान का विशेष महत्व

नई दिल्ली।वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को पराक्रम, ऊर्जा, साहस और भूमि का कारक माना गया है। यदि कुंडली में मंगल की स्थिति प्रतिकूल हो, तो इसे मंगल दोष या कुज दोष कहा जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार मंगलवार का दिन मंगल ग्रह की शांति और अनुकूलता के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन हनुमान उपासना, व्रत, दान और संयमित जीवनशैली को प्रभावी उपाय माना गया है। मंगल ग्रह को अनुकूल बनाने के धार्मिक उपायज्योतिषीय मान्यता है कि मंगलवार को श्रद्धा और नियमपूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, बाधा और मानसिक अशांति में कमी आती है। प्रातः स्नान कर स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें और भगवान हनुमान की पूजा करें। दीप प्रज्वलित कर सिंदूर, चोला तथा गुड़-चना का भोग अर्पित करना मंगल ग्रह के शुभ फल को बढ़ाने वाला माना गया है। मंगलवार का व्रत भी विशेष फलदायी बताया गया है। इस दिन सात्विक आहार ग्रहण करें और यथासंभव नमक का त्याग करें। दिनभर संयम, धैर्य और सेवा भाव बनाए रखना धार्मिक दृष्टि से मंगल शांति का साधन माना जाता है। दान और सेवा का महत्वधार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान और सेवा मंगल कृपा प्राप्ति का श्रेष्ठ मार्ग है। जरूरतमंदों को लाल मसूर की दाल, गुड़, शहद या लाल वस्त्र दान करना पुण्यदायी माना गया है। गौ सेवा भी मंगल शांति के उपायों में शामिल है। विशेषकर मंगलवार को गौमाता को गुड़ और रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन आने की मान्यता है। तांबा और मंत्र जापज्योतिष परंपरा में तांबा मंगल ग्रह की धातु मानी जाती है। इसलिए तांबे के पात्र का उपयोग करना या तांबे का कड़ा अथवा चेन धारण करना पारंपरिक उपायों में शामिल है। इसके साथ ‘ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः’ या ‘ॐ अंग अंगारकाय नमः’ मंत्र का नियमित जप मंगल ग्रह की शांति और कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना गया है। नियमित जप से मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास में वृद्धि होने की भी मान्यता है। मंगल दोष शांति के विशेष उपाययदि कुंडली में मंगल दोष अधिक प्रबल हो, तो विवाह से पूर्व विशेष पूजा-अनुष्ठान कराने की परंपरा है। योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में मंगल शांति अनुष्ठान, पीपल पूजन या मंगल यंत्र की स्थापना कर पूजा की जाती है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करना भी मंगल के संतुलन का प्रतीक माना गया है। हालांकि, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अनुभवी ज्योतिषाचार्य से परामर्श करना उचित माना जाता है। आध्यात्मिक संदेशधार्मिक दृष्टि से ग्रहों की शांति केवल अनुष्ठानों से नहीं, बल्कि आचरण से भी जुड़ी मानी जाती है। संयमित जीवन, सेवा भाव, परिवार के प्रति सद्भाव और ईश्वर स्मरण जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। श्रद्धा, नियम और सत्कर्म ही मंगल की कृपा का सच्चा आधार माने गए हैं।

मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल

भोपाल! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य खाद्यान्न, दलहन तथ तिलहन फसलों के उत्पादन में शीर्ष तीन राज्यों में शामिल रहा है। मध्यप्रदेश ने कुल खाद्यान्न उत्पादन में 46.63 मिलियन टन उत्पादन के साथ देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया, जो राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 13.04 प्रतिशत है। राज्य कुल दलहन फसल उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर हैं। तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कृषकों की आय को बढ़ाने एवं उनके समग्र कल्याण के उद्देश्य से वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। खाद्यान्न उत्पादन में देश में दूसरा स्थान गेहूं उत्पादन में राज्य ने 24.51 मिलियन टन उत्पादन किया और लगभग 20.78 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में दूसरा स्थान हासिल किया। राज्य मक्का उत्पादन में भी अग्रणी रहा, 6.64 मिलियन टन उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश का राष्ट्रीय हिस्सेदारी में लगभग 15.30 प्रतिशत योगदान रहा, जिससे यह देश का प्रमुख उत्पादक राज्य बना। मोटे अनाज (न्यूट्री/कोर्स सीरियल्स) के उत्पादन में भी राज्य ने 7.78 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 12.17 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की और देश में तृतीय स्थान हासिल किया। दलहन उत्पादन शीर्ष स्थान बरक़रार दलहन क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल दलहन उत्पादन में 5.24 मिलियन टन उत्पादन किया और 20.40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में पहला स्थान प्राप्त किया। चना उत्पादन में राज्य 2.11 मिलियन टन उत्पादन और लगभग 19.01 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष तीन राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी राज्य तिलहन क्षेत्र में भी राज्य की स्थिति मजबूत रही। कुल तिलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश ने 8.25 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 19.19 प्रतिशत राष्ट्रीय हिस्सेदारी दर्ज की एवं देश से दूसरा स्थान हासिल किया। विशेष रूप से सोयाबीन उत्पादन में राज्य ने 5.38 मिलियन टन उत्पादन किया, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 35.27 प्रतिशत है और इसे देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में स्थापित करता है। राज्य में मूंगफली का उत्पादन 1.55 मिलियन टन रहा जो कि देश के कुल उत्पादन का 12.99 प्रतिशत रहा। मूंगफली उत्पादन में राज्य देश में तीसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश में केंद्र एवं राज्य सरकार की कृषि विकास योजनाओं रासायनिक उर्वरकों का वितरण, पौध संरक्षण कार्यक्रम, मांग आधारित कृषि के लिए फसलों का विविधीकरण, एक जिला-एक उत्पाद योजना, मध्यप्रदेश राज्य मिलेट मिशन, कृषि उत्पादक संगठनों का गठन एवं संवर्धन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भावांतर भुगतान, रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना आदि का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया। परिणामस्वरूप राज्य को कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है। कुल उत्पादन में वृद्धि हुई है। कृषि आधारित नीतियों के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण राज्य के रूप में स्थापित है।

चंद्र ग्रहण की वजह से होली को तिथि को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति, नोट कर लें होलिका दहन और रंग खेलने की सही डेट

नई दिल्ली । Holi 2026: इस बार रंगों की होली और होलिका दहन को लेकर कंफ्यूजन देखने को मिल रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण। वाराणसी के प्रसिद्ध हृषिकेश पंचांग और जाने माने ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार इस ग्रहण ने होली की गणित को थोड़ा पेचीदा बना दिया है। अगर आप भी इसी उलझन में हैं कि होलिका दहन कब होगा सूतक कब लगेगा और रंग कब खेला जाएगा तो जानिए यहां सबकुछ। 2 मार्च: भद्रा पुच्छ में ही होगा होलिका दहन वैदिक पंचांग के अनुसार 2 मार्च 2026 सोमवार को चतुर्दशी तिथि शाम 5:18 बजे तक रहेगी उसके तुरंत बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। शास्त्रों का नियम है कि होलिका दहन हमेशा पूर्णिमा तिथि में ही किया जाता है लेकिन इस बार पूर्णिमा के साथ ही भद्रा का आगमन भी हो रहा है। भद्रा का लंबा साया 2 मार्च की शाम 5:18 बजे से लेकर पूरी रात और अगले दिन 3 मार्च की भोर सुबह 4:56 बजे तक भद्रा का वास रहेगा। शास्त्रों में भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है क्योंकि इससे राज्य और व्यक्ति पर अशुभ प्रभाव पड़ते हैं। शुभ मुहूर्त का चयन ऐसी स्थिति में जब पूरी रात भद्रा हो तो शास्त्रों में भद्रा पुच्छ भद्रा का पूंछ वाला भाग में कार्य करने का विधान है। पं. नरेंद्र उपाध्याय जी के अनुसार इस साल दहन का सबसे शुभ समय यह रहेगा शुभ मुहूर्त: रात 12:50 बजे से रात 02:02 बजे तक अवधि: 1 घंटा 12 मिनट इसी समय में दहन करना शास्त्रीय दृष्टि से सबसे उत्तम और कल्याणकारी है। 3 मार्च: होली पर चंद्र ग्रहण का पहरा 3 मार्च मंगलवार को पूर्णिमा तिथि के दिन ही साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा इसलिए इसका धार्मिक प्रभाव सूतक भी पूरे देश में मान्य होगा। ग्रहण की टाइमिंग भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण दोपहर लगभग 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा। इस ग्रहण के दौरान ब्लड मून का नजारा भी देखने को मिल सकता है। सूतक काल और नियम चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। इसका मतलब यह है कि 3 मार्च को सुबह 06:20 बजे से ही सूतक लग जाएगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। इस दौरान पूजा पाठ मूर्ति स्पर्श और खाना पीना वर्जित होता है। सूतक और ग्रहण के साये में होली का डंडा या रंग गुलाल खेलना अशुभ माना जाता है इसलिए 3 मार्च को रंग वाली होली नहीं मनाई जाएगी। 4 मार्च: रंगों की होली धुलेंडी का असली उत्सव 3 मार्च की शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद शुद्धिकरण और स्नान किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 4 मार्च 2026 बुधवार को सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि रहेगी। शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार ग्रहण और सूतक से मुक्त होने के बाद इसी दिन पूरे देश में धूम धाम से धुलेंडी और रंगों का त्योहार मनाया जाएगा। होली 2026: पूरा कैलेंडर 2 मार्च सोमवार होलिका दहन रात 12:50 बजे से 02:02 बजे तक 3 मार्च मंगलवार चंद्र ग्रहण दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक 3 मार्च मंगलवार सूतक काल सुबह 06:20 बजे से शुरू 4 मार्च बुधवार रंग वाली होली सुबह से धुलेंडी का असली दिन ग्रहण के दौरान सावधानियां और उपाय तुलसी का प्रयोग सूतक लगने से पहले 3 मार्च सुबह दूध दही और पके हुए खाने में तुलसी के पत्ते जरूर डाल दें। गर्भवती महिलाएं ग्रहण के समय बाहर न निकलें और न ही किसी नुकीली चीज़ सुई कैंची का इस्तेमाल करें। स्नान और दान ग्रहण खत्म होने के बाद 3 मार्च शाम 7 बजे के बाद स्नान करें और सफेद वस्त्र चावल या चीनी का दान करें। इससे ग्रहण का अशुभ प्रभाव कम होता है। मंत्र जाप ग्रहण के दौरान ॐ नमः शिवाय का जाप करना होली पर कई गुना फलदायी होता है।

24 फरवरी 2026 पंचांग: अभिजीत और अमृत काल में करें शुभ कार्य, जानें ग्रह-नक्षत्र की स्थिति

नई दिल्ली।24 फरवरी 2026, मंगलवार का दिन विशेष खगोलीय संयोगों के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि प्रातः 7:01 बजे तक प्रभावी रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आज का दिन सामाजिक प्रतिष्ठा, प्रशासनिक कार्यों और व्यक्तिगत निर्णयों के लिहाज से प्रभावशाली रह सकता है। ग्रहों की स्थिति और नक्षत्र प्रभावआज सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और राहु का कुंभ राशि में संयोग बना हुआ है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह ग्रह स्थिति सामूहिक प्रयासों, सार्वजनिक जीवन और सरकारी गतिविधियों में सक्रियता बढ़ाने वाली मानी जाती है। वहीं चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहेगा और कृत्तिका नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। कृत्तिका नक्षत्र को ऊर्जा, स्पष्ट सोच और साहस का प्रतीक माना जाता है। पंचांग विशेषज्ञों का मानना है कि यह नक्षत्र अधूरे कार्यों को पूरा करने और नई योजनाओं को गति देने के लिए अनुकूल समय प्रदान करता है। योग और शुभ मुहूर्तदिन की शुरुआत इन्द्र योग से होगी, जो प्रातः 7:24 बजे तक प्रभावी रहेगा। इन्द्र योग को मान-सम्मान और सफलता प्रदान करने वाला योग माना जाता है। इसके पश्चात वैधृति योग प्रारंभ होगा। इस योग में धैर्य, संतुलन और सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है। आज का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:12 बजे से 12:57 बजे तक रहेगा। इस अवधि को विशेष रूप से शुभ कार्यों, सरकारी प्रक्रियाओं और महत्वपूर्ण शुरुआत के लिए अनुकूल माना गया है। इसके अतिरिक्त अमृत काल दोपहर 12:51 बजे से 2:22 बजे तक रहेगा। यह समय नए कार्य आरंभ करने, अनुबंध करने और सकारात्मक निर्णय लेने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। राहुकाल और सावधानियांपंचांग के अनुसार राहुकाल सायं 3:26 बजे से 4:52 बजे तक रहेगा। इस दौरान निवेश, विवाद या बड़े निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जाती है। यमगण्ड और गुलिकाल के समय भी पारंपरिक रूप से सावधानी बरतने की परंपरा रही है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इन समयों का पालन केवल धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि मानसिक अनुशासन और समय प्रबंधन का भी एक हिस्सा है। सूर्योदय और चंद्रमा से जुड़ी जानकारीआज सूर्योदय प्रातः 6:51 बजे और सूर्यास्त सायं 6:18 बजे होगा। चंद्रोदय 10:58 बजे और चंद्रास्त अगले दिन 1:40 बजे निर्धारित है। यह जानकारी विशेष रूप से व्रत, पूजन और दैनिक धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। पंचांग का व्यापक महत्वज्योतिष विश्लेषकों का कहना है कि पंचांग केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर समय का सदुपयोग, निर्णय की दिशा और कार्यों की योजना बनाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।

Guna Protest: केदारनाथ धाम बंद होने से आहत श्रद्धालु, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

GUNA SADHU SANTS

HIGHGLIGHTS: महोदरा पंचायत स्थित केदारनाथ धाम 3 साल से बंद चट्टान खिसकने और दरार के चलते रोके गए दर्शन साधु-संतों व नागरिकों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन वैकल्पिक रास्ता बनाकर दर्शन शुरू करने की मांग धाम को वन विभाग से मुक्त करने की भी उठी मांग Guna Protest:  गुना। जिले की महोदरा पंचायत स्थित प्रसिद्ध केदारनाथ धाम को श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोलने की मांग को लेकर मंगलवार को साधु-संतों, स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। बता दें कि प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए धाम में जल्द से जल्द दर्शन और पूजा प्रारंभ कराने की मांग की। GUNA SUICIDE CASE: गुना के सकतपुर में मजदूर ने की आत्महत्या: पोर्च में फंदे से लटका मिला शव, सूत्रों की माने तो प्रशासन ने करीब तीन साल पहले पहाड़ी की एक चट्टान खिसकने और उसमें दरार आने के कारण मंदिर परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। तब से आम श्रद्धालुओं के दर्शन और पूजा बंद हैं। शिवपुरी में बेखौफ गुंडागर्दी: सरकारी शौचालय बचाने गई नपा टीम पर हमला, FIR न होने से पुलिस पर सवाल धार्मिक महत्व का हवाला प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन में बताया कि यह स्थल प्राचीन धार्मिक आस्था का केंद्र है और इसे महाभारत कालीन देव स्थल माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां प्रकृति स्वयं भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करती है। MORENA KERNI SENA: मुरैना के पोरसा में करणी सेना–पुलिस आमने-सामने: NH-552 पर जाम की कोशिश, जिलाध्यक्ष समेत 15 पर केस धाम परिसर में स्थित पवित्र कुंड में अस्थि विसर्जन भी किया जाता था। लोगों का कहना है कि क्षेत्र के लिए यह स्थान प्रयागराज और सोरोजी की तरह ही धार्मिक महत्व रखता है। जानिए प्रमुख मांगें? ज्ञापन में मांग की गई है कि खिसकी हुई चट्टान को हटाकर मंदिर तक सुरक्षित मार्ग बनाया जाए। साथ ही महंत और पुजारी को पूजा के लिए नीचे जाने की अनुमति दी जाए। प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि केदारनाथ धाम परिसर को वन विभाग के नियंत्रण से मुक्त किया जाए, ताकि धार्मिक गतिविधियां सुचारु रूप से संचालित हो सकें।

बिहार विधानसभा में सीएम नीतीश कुमार और भाई वीरेंद्र के बीच तीखी नोकझोंक, चौकीदारों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर हंगामा

नई दिल्ली । पटना बिहार विधानसभा में आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र आमने सामने आ गए। दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हुई। दरअसल सदन की कार्यवाही शुरू होते ही आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने कल चौकीदारों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया। विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी की। आरजेडी विधायकों ने लाठी गोली की सरकार नहीं चलेगी नहीं चलेगी का नारा लगाया। आरजेडी विधायकों को जवाब देने के लिए मंत्री विजय चौधरी उठे। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चलेगी तो चौकीदारों की सुनेगा कौन। नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए विपक्षी विधायक इतने में सीएम नीतीश भी खड़े हो गए। उन्होंने भाई वीरेन्द्र को कहा कि आप बैठिए। आपकी संख्या कितनी कम है। आप लोगों ने कभी कोई काम नहीं किया है। नीतीश जब बोल रहे थे तो आरजेडी विधायक सर्वजीत भी खड़े हो गए। फिर राजद विधायक वेल की तरफ आ गए और नारे लगाने लगे। मार्शल ने विधायकों के हाथ से तख्तियां ले ली। सरकार ने दिया विपक्ष के आरोपों का जवाब आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने चौकीदारों पर लाठीचार्ज को क्रूर बताया। आरजेडी विधायकों ने सदन में हंगामा किया। संसदीय मामलों के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन चौकीदारों और दफादारों की चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने कहा कि उसने चौकीदार के विरोध को दबाने की कोशिश नहीं की है और उनकी मांगों की जांच करेगी। मांगों को लेकर किया था प्रदर्शन बता दें कि बिहार पुलिस के चौकीदारों ने सोमवार को अपने मानदेय में बढ़ोतरी और सर्विस में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन किया और बैरिकेड तोड़ दिए जिसके बाद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया। पुलिस की कार्रवाई में कई चौकीदार घायल हो गए। बिहार पुलिस के चौकीदारों ने पटना के बीच में जेपी गोलंबर पर प्रदर्शन किया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और डाक बंगला क्रॉसिंग की ओर बढ़ने की कोशिश की।

YOUTH CONGRESS: यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदयभानु की गिरफ्तारी से भड़के सांसद पप्पू यादव, ‘गलगोटिया वालों की…’

  YOUTH CONGRESS: नई दिल्ली । भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदयभानु चिब को पटियाला हाउस कोर्ट ने चार दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा है. एआई समिट में हुए विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में उदयभानु को गिरफ्तार किया गया था. उनकी गिरफ्तारी के बाद बीजेपी पर विपक्षी दल निशाना साध रहे हैं. बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने भी हमला बोला है. सांसद पप्पू यादव ने मंगलवार 24 फरवरी, 2026 को अपने एक्स से पोस्ट किया. कांग्रेस नेता की इस गिरफ्तारी के विरोध में सांसद पप्पू यादव ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी का जिक्र किया. एआई समिट में गलगोटिया की ओर से पेश किए गए रोबोडॉग के मामले में उन्होंने सवाल उठाया कि गलगोटिया वालों की गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई? अपने एक्स पोस्ट में पप्पू यादव ने क्या लिखा? अपने एक्स पोस्ट में पप्पू यादव ने लिखा है, AI समिट में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदयभानु जी और यूपी यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष आदि कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने वालों से एक सवाल AI समिट में देश का नाम डुबाने वाले गलगोटिया वालों की गिरफ्तारी क्यों नहीं की… क्या इसलिए कि वह BJP का लंगोटिया है? एआई समिट पर पहले भी हमला कर चुके हैं पप्पू यादव यह पहली बार नहीं है जब सांसद पप्पू यादव ने एआई समिट को लेकर बीजेपी को घेरा है. इसके पहले वे पीएम मोदी तक का नाम लेकर निशाना साध चुके हैं. एक पोस्ट में पप्पू यादव ने लिखा है मोदी जी AI का मतलब ए आइ मां समझे रहे थे. उनकी सरकार ने AI का मतलब All Insult कराना समझ लिया. क्या है गलगोटिया का मामला? एआई समिट में एक रोबोडॉग को दिखाते हुए गलगोटिया यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर नेहा सिंह ने मीडिया को बताया कि इसे यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में छात्रों द्वारा विकसित किया गया है. सोशल मीडिया पर लोगों ने तुरंत पहचान लिया कि यह रोबोट वास्तव में चीन की कंपनी का मॉडल है जो ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध है. विवाद बढ़ने पर समिट आयोजकों ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी का स्टॉल बंद करवा दिया.

GUNA SUICIDE CASE: गुना के सकतपुर में मजदूर ने की आत्महत्या: पोर्च में फंदे से लटका मिला शव,

GUNA KISAN SUICIDE

HIGHLIGHTS: सकतपुर इलाके में 35 वर्षीय मजदूर ने की आत्महत्या पोर्च के एंगल पर रस्सी से लगाई फांसी पत्नी और तीन बच्चे बाहर सो रहे थे सुबह 4 बजे पत्नी ने देखा तो फंदे पर लटके मिले पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की GUNA SUICIDE CASE: ग्वालियर। गुना जिले के कैंट थाना क्षेत्र अंतर्गत सकतपुर गांव में एक मजदूर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बता दें कि मृतक की पहचान दौलतराम पटेलिया (35) पुत्र पूनम सिंह के रूप में हुई है। कैसे नक्सल मुक्त हुआ मध्य प्रदेश? DGP कैलाश मकवाना ने खोला रणनीति का राज, इन नेताओं को दिया श्रेय जानकारी के अनुसार, दौलतराम अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ रहते थे। उनके माता-पिता गुजरात में मजदूरी करने गए हुए हैं। वह स्वयं उमरी क्षेत्र में मजदूरी का कार्य करते थे। टी20 में टीम इंडिया का जिम्बाब्वे के खिलाफ शानदार रिकॉर्ड, सुपर-8 मुकाबले से पहले आंकड़े सोमवार शाम वह रोज की तरह काम से घर लौटे। परिवार के साथ भोजन करने के बाद सभी सो गए। देर रात दौलतराम घर के पोर्च में गए और एंगल पर रस्सी बांधकर फंदा बना लिया। सुबह पत्नी ने देखा रात करीब 4 बजे पत्नी की नींद खुली तो पति बिस्तर पर नहीं मिले। तलाश करने पर पोर्च में उनका शव फंदे से लटका मिला। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। MORENA KERNI SENA: मुरैना के पोरसा में करणी सेना–पुलिस आमने-सामने: NH-552 पर जाम की कोशिश, जिलाध्यक्ष समेत 15 पर केस पत्नी ने अपने पिता खदान सिंह को सूचना दी। इसके बाद कैंट पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतरवाकर जिला अस्पताल भिजवाया, जहां पोस्टमार्टम किया गया। जांच में जुटी पुलिस मृतक के ससुर का कहना है कि दौलतराम ने कभी किसी परेशानी की बात नहीं बताई थी। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आत्महत्या के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।

शिवपुरी में बेखौफ गुंडागर्दी: सरकारी शौचालय बचाने गई नपा टीम पर हमला, FIR न होने से पुलिस पर सवाल

शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटना सामने आई है। देहात थाना क्षेत्र की महल सराय आदिवासी बस्ती में शासकीय शौचालय को तोड़कर अतिक्रमण किए जाने की सूचना पर पहुंची नगर पालिका टीम पर बदमाशों ने हमला कर दिया। कर्मचारियों के साथ न केवल धक्का-मुक्की की गई बल्कि जमकर मारपीट भी की गई। घटना के बाद से नगर पालिका अमले में आक्रोश है और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार महल सराय आदिवासी बस्ती में बने सरकारी शौचालय को कुछ लोग तोड़कर उस पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। शिकायत मिलने पर नपा अतिक्रमण दस्ता प्रभारी अशोक खरे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि मौके पर कुछ लोग शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे। जब टीम ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो आरोपियों ने अचानक हमला कर दिया। कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई और उन्हें मौके से खदेड़ने की कोशिश की गई। घटना के बाद घायल कर्मचारियों ने देहात थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दी। पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में स्पष्ट रूप से मारपीट और हंगामा दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद अब तक आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज न किए जाने की बात सामने आ रही है जिससे देहात थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर पालिका कर्मचारियों का कहना है कि जब शासकीय संपत्ति को बचाने गए कर्मचारियों पर खुलेआम हमला होता है और उसके बाद भी त्वरित कार्रवाई नहीं होती तो इससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद होते हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने फिलहाल केवल आवेदन लिया है लेकिन प्रकरण दर्ज करने में देरी की जा रही है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में ऐसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और कर्मचारियों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जाएं।