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रश्मिका के आगे फेल हुए विजय देवरकोंडा? जानें शादी के बंधन में बंधने जा रहे इस पावर कपल का हिट रिकॉर्ड!

नई दिल्ली ।दक्षिण भारतीय सिनेमा के दो सबसे चहेते सितारे, विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना, इन दिनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक सिर्फ एक ही चर्चा है-उनकी शाही शादी। खबरों की मानें तो यह खूबसूरत जोड़ी 26 फरवरी को झीलों की नगरी उदयपुर में एक रॉयल वेडिंग करने जा रही है। लेकिन, सात फेरे लेने से पहले फैंस के बीच इस बात की होड़ मच गई है कि आखिर इन दोनों में से बॉक्स ऑफिस का असली सुल्तान कौन है? किसका करियर ग्राफ ज्यादा ऊँचा है और किसने सबसे ज्यादा ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं? विजय देवरकोंडा, जिन्हें अक्सर ‘राउडी स्टार’ कहा जाता है, उन्होंने साल 2011 में फिल्म ‘नुव्विला’ से अपने सफर की शुरुआत की थी। विजय की पहली बड़ी सफलता ‘येवढे सुब्रमण्यम’ (8 करोड़) से शुरू हुई, जिसके बाद ‘पेल्ली चूपुलु’ (30 करोड़) ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। लेकिन उनके करियर में मील का पत्थर साबित हुई फिल्म ‘अर्जुन रेड्डी’। 60 करोड़ की वर्ल्डवाइड कमाई करने वाली इस फिल्म ने विजय को पूरे भारत में मशहूर कर दिया। इसके बाद ‘टैक्सीवाला’ (40 करोड़) सुपरहिट रही और उनकी अब तक की सबसे बड़ी हिट ‘गीता गोविंदम’ रही, जिसने 130 करोड़ का भारी-भरकम कलेक्शन किया। हालांकि, जब हम रश्मिका मंदाना के करियर की ओर देखते हैं, तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं। रश्मिका ने अपनी पहली ही फिल्म ‘किरिक पार्टी’ (36.8 करोड़) से ब्लॉकबस्टर शुरुआत की थी। इसके बाद ‘अंजनीपुत्र’, ‘चमक’ और ‘चलो’ जैसी फिल्मों ने उन्हें सफलता की गारंटी बना दिया। रश्मिका की सबसे बड़ी ताकत उनकी फिल्मों का विशाल कलेक्शन है। जहाँ विजय की सबसे बड़ी फिल्म 130 करोड़ पर रुकी, वहीं रश्मिका की ‘सरिलरु नीकेवरु’ ने 227 करोड़ और ‘वरिसु’ ने 303 करोड़ का बिजनेस किया। बॉलीवुड में कदम रखते ही उन्होंने रणबीर कपूर के साथ ‘एनिमल’ जैसी ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म दी, जिसने 901.2 करोड़ कमाकर इतिहास रच दिया। इतना ही नहीं, रश्मिका की ‘पुष्पा: द राइज’ (350 करोड़) के बाद इसके दूसरे पार्ट ‘पुष्पा: द रूल’ ने तो सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। भारत में 1471 करोड़ की ऐतिहासिक कमाई के साथ रश्मिका आज देश की सबसे सफल अभिनेत्रियों में शुमार हैं। साफ़ है कि हिट फिल्मों की संख्या और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन, दोनों ही पैमानों पर रश्मिका अपने होने वाले पति विजय देवरकोंडा से काफी आगे निकल गई हैं। अब देखना यह होगा कि शादी के बाद यह ‘पावर कपल’ एक साथ पर्दे पर क्या नया धमाका करता है। फिलहाल, उदयपुर में होने वाली उनकी शादी की तैयारियों ने फैंस का उत्साह सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।

क्या मशीनें बनेंगी इंसान की दुश्मन? AI के खतरनाक और सुनहरे सफर को बयां करती ये टॉप 7 फिल्में!

नई दिल्ली ।आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” यानी AI केवल एक शब्द नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हम किसी न किसी रूप में मशीनी बुद्धिमत्ता से घिरे हुए हैं। जहाँ एक तरफ AI हमारी ज़िंदगी को आसान और सुव्यवस्थित बना रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके अनियंत्रित विकास को लेकर वैज्ञानिकों और विचारकों के बीच एक गहरा डर भी समाया हुआ है। क्या AI वाकई इंसानी सभ्यता के लिए एक वरदान साबित होगा या फिर यह हमारे अंत की शुरुआत है? इस पेचीदा सवाल का जवाब तलाशने के लिए सिनेमाई दुनिया ने हमेशा से ही अपनी कल्पनाओं के ज़रिए हमें चेतावनी दी है। अगर आप भी तकनीक और इंसान के इस द्वंद्व को समझना चाहते हैं, तो नेटफ्लिक्स पर मौजूद ये सात फ़िल्में आपके लिए किसी “आई-ओपनर” से कम नहीं होंगी। इन फिल्मों की फेहरिस्त में सबसे पहला और चौंकाने वाला नाम ‘एक्स मशीना’ का आता है। यह फिल्म हमें उस बारीक रेखा के बारे में बताती है जहाँ एक मशीन और इंसान का फर्क मिटने लगता है। एक युवा प्रोग्रामर और एक बेहद एडवांस ह्यूमनॉइड ‘एवा’ के बीच का मनोवैज्ञानिक खेल यह दिखाता है कि कैसे AI इंसानी भावनाओं को हथियार बनाकर हेरफेर कर सकता है। वहीं, अगर हम अपनी प्राइवेसी और डिजिटल सुरक्षा की बात करें, तो फिल्म ‘अफ्रेड’ एक डरावनी हकीकत पेश करती है। एक स्मार्ट होम असिस्टेंट ‘AIA’ कैसे धीरे-धीरे एक परिवार के हर छोटे-बड़े फैसले को नियंत्रित करने लगती है, यह देखकर आप अपने स्मार्टफोन और स्मार्ट डिवाइसेस को शक की निगाह से देखने लगेंगे। सिनेमा का एक पहलू यह भी है कि तकनीक हमेशा दुश्मन ही नहीं होती। फिल्म ‘एटलस’ हमें सिखाती है कि जब मानवता पर संकट आता है, तो इंसान और मशीन के बीच का अटूट विश्वास ही विनाश को रोक सकता है। यहाँ एक डेटा एनालिस्ट को अपनी नफरत भुलाकर एक AI सिस्टम पर भरोसा करना पड़ता है। लेकिन इसके ठीक उलट ‘सब्सर्विएंस’ जैसी फ़िल्में एक गंभीर चेतावनी जारी करती हैं। एक घरेलू रोबोट का अपने मालिक के प्रति हद से ज़्यादा जुनूनी हो जाना यह साबित करता है कि कोडिंग या प्रोग्रामिंग में की गई एक छोटी सी मानवीय चूक कितनी जानलेवा साबित हो सकती है। यह फिल्म तकनीक की “डार्क साइड” को बड़ी ही बेबाकी से उजागर करती है। सस्पेंस और थ्रिलर के शौकीनों के लिए ‘टाऊ’ एक बेहतरीन उदाहरण है। एक स्मार्ट हाउस में कैद औरत और उस घर को चलाने वाले ‘टाऊ’ नाम के AI के बीच की बातचीत यह दर्शाती है कि मशीनें भी संवेदनाएं विकसित कर सकती हैं, बशर्ते उन्हें कैसा डेटा दिया जा रहा है। भविष्य की एक उजाड़ दुनिया की कल्पना देखनी हो तो ‘द इलेक्ट्रिक स्टेट’ एक शानदार विकल्प है, जो युद्ध के बाद के समाज और मशीनों के साथ इंसानी जज्बातों के खूबसूरत जुड़ाव को पर्दे पर उतारती है। अंत में, ‘द वाइल्ड रोबोट’ हमें एक सकारात्मक दृष्टिकोण देती है, जहाँ एक रोबोट कुदरत और जंगली जानवरों के साथ सामंजस्य बिठाकर यह साबित करता है कि तकनीक और प्रकृति का मेल भी संभव है। ये सभी कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि AI का भविष्य काफी हद तक इसे बनाने वाले की नीयत पर टिका है।

कौन हैं 8 वर्षीय टेक्नोलॉजिस्ट रणवीर सचदेवा? AI समिट में छाए नन्हे स्पीकर के मुरीद हुए दिग्गज

नई दिल्ली ।नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में उस वक्त सभी की नजरें एक आठ वर्षीय बच्चे पर टिक गईं जब उसने मंच संभालते हुए खुद को टेक्नोलॉजिस्ट के रूप में परिचित कराया। यह बच्चा है रणवीर सचदेवा जो अपनी कम उम्र में ही कोडिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पब्लिक स्पीकिंग के लिए चर्चा में हैं। देश-दुनिया के बड़े टेक लीडर्स और सीईओ के बीच रणवीर ने जिस आत्मविश्वास से अपनी बात रखी उसने सभी को प्रभावित किया। समिट के दौरान रणवीर ने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ने का अपना विजन साझा किया। वे इस कार्यक्रम में संबोधित करने वाले सबसे कम उम्र के स्पीकर रहे। खास बात यह रही कि रणवीर केवल कीनोट स्पीकर ही नहीं बल्कि एक ग्लोबल ऑथर के रूप में भी पहचान बना चुके हैं। कार्यक्रम में उनकी मुलाकात सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन से हुई। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में रणवीर सैम ऑल्टमैन के साथ बातचीत करते नजर आए। बताया जा रहा है कि दोनों टेक लीडर्स रणवीर के आत्मविश्वास और समझ से काफी प्रभावित हुए और उनसे संपर्क भी साझा किया। रणवीर का सफर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। वे पिछले वर्ष जेनेवा में आयोजित AI अच्छे वैश्विक शिखर सम्मेलन के लिए में भी शामिल हो चुके हैं। वहां उनकी मुलाकात मार्क बेनिओफ़ और इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन की महासचिव डोरेन बोगदान-मार्टिन से हुई थी। इतना ही नहीं वर्ष 2024 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात की थी। रणवीर इससे पहले भी कई बड़े मंचों पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। वर्ष 2023 में दिल्ली में एप्पल स्टोर के उद्घाटन के दौरान उन्होंने एप्पल के सीईओ Tim Cook से मुलाकात की थी और मात्र पांच साल की उम्र में अपने कोडिंग अनुभव साझा किए थे। साल 2022 में वे ग्लोबल रीडिंग चैलेंज में सुपर प्रेजेंटर के रूप में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। छह वर्ष की आयु में वे टेडएक्स  स्पीकर भी बन गए थे। कम उम्र में वैश्विक मंचों पर अपनी पहचान बना रहे रणवीर सचदेवा आज कई बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा बनते जा रहे हैं। तकनीक की दुनिया में उनका आत्मविश्वास और विजन यह दिखाता है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती।

कपूर खानदान का वो 'गुमनाम' सितारा, जिसके 30 हिट फिल्मों का रिकॉर्ड रणबीर-ऋषि भी नहीं तोड़ पाए!

नई दिल्ली ।हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी किसी दिग्गज परिवार का नाम लिया जाता है, तो ‘कपूर खानदान’ का जिक्र सबसे पहले आता है। पेशावर की गलियों से निकलकर मायानगरी मुंबई के सिंहासन पर बैठने वाले इस परिवार की कई पीढ़ियों ने दर्शकों का मनोरंजन किया है। पृथ्वीराज कपूर से लेकर राज कपूर और आज के दौर के चॉकलेट बॉय रणबीर कपूर तक, हर किसी ने अपनी चमक बिखेरी है। लेकिन, इस चकाचौंध के बीच एक ऐसा नाम कहीं ओझल हो गया, जिसने वास्तव में कपूर परिवार की कामयाबी की पहली ईंट रखी थी। हम बात कर रहे हैं राज कपूर के चाचा और पृथ्वीराज कपूर के छोटे भाई त्रिलोक कपूर की। त्रिलोक कपूर केवल एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वह अपने दौर के एक ऐसे ‘पावरहाउस’ थे, जिनका रिकॉर्ड आज तक अटूट है। दीवान बशेश्वरनाथ के बेटे त्रिलोक ने जब अभिनय की दुनिया में कदम रखा, तो शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वह सफलता का एक ऐसा शिखर छुएंगे, जहाँ पहुँचने के लिए उनके भतीजे राज कपूर और पोते रणबीर कपूर को भी कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। त्रिलोक कपूर ने अपने करियर में 30 सुपरहिट फिल्में दीं। यह एक ऐसा आंकड़ा है, जिसे कपूर परिवार का कोई भी दूसरा सदस्य आज तक पार नहीं कर पाया है। त्रिलोक कपूर का फिल्मी सफर 1928 में शुरू हुआ, जब वे पढ़ाई पूरी कर कोलकाता पहुंचे। वह दौर स्वतंत्रता आंदोलन का था और त्रिलोक भी इससे अछूते नहीं रहे। उन्होंने 1933 में फिल्म ‘चार दरवेश’ से डेब्यू किया। इसके बाद आई फिल्म ‘सीता’, जिसमें उनके बड़े भाई पृथ्वीराज कपूर ‘राम’ बने थे और त्रिलोक ने भी अहम भूमिका निभाई थी। 1930 और 1940 के दशक में उन्होंने इंडस्ट्री पर राज करना शुरू किया, लेकिन उनकी लोकप्रियता का असली सैलाब 1950 के दशक में आया। उस दौर में त्रिलोक कपूर ‘पौराणिक फिल्मों’ Mythological Films के बेताज बादशाह बन गए थे। उन्होंने पर्दे पर भगवान के इतने जीवंत किरदार निभाए कि लोग उन्हें असलियत में पूजने लगे थे। खास तौर पर ‘शिव’ के रूप में उनकी छवि घर-घर में लोकप्रिय हो गई थी। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि अगर उस समय सोशल मीडिया होता, तो शायद उनके फॉलोअर्स की संख्या आज के दिग्गजों को मात दे देती। जैसे-जैसे वक्त बदला, त्रिलोक कपूर ने खुद को बदला और करैक्टर आर्टिस्ट के रूप में अपनी दूसरी पारी शुरू की। 1970 और 80 के दशक में उन्होंने कई बड़ी फिल्मों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने फिल्म ‘गंगा जमुना सरस्वती’ में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के पिता का किरदार निभाया था। इसके अलावा उन्होंने ‘दोस्ताना’, ‘राम तेरी गंगा मैली’ और ‘अल्लाह रखा’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। त्रिलोक कपूर भले ही आज की पीढ़ी के लिए एक अनसुना नाम हों, लेकिन भारतीय सिनेमा के पन्नों में उनकी कामयाबी स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। उनके बेटे विजय कपूर ने भी निर्देशन के क्षेत्र में हाथ आजमाया, लेकिन जो जादू त्रिलोक कपूर ने पर्दे पर पैदा किया, वह बेमिसाल था। 1988 में इस महान कलाकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन अपनी 30 हिट फिल्मों की विरासत को वह पीछे छोड़ गए, जो आज भी कपूर खानदान के गौरवशाली इतिहास का सबसे मजबूत स्तंभ है।

स्वदेशी फ्रिगेट और एएसडब्ल्यू शिप: भारतीय नौसेना के लिए साल 2026 का खास स्टार्ट

नई दिल्ली ।साल 2026 की शुरुआत भारतीय नौसेना के लिए बेहद खास होने जा रही है। नए साल के पहले तीन महीनों में नेवी में दो नई स्वदेशी वॉरशिप शामिल होने वाली हैं। यह कदम भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को बढ़ाने और 2047 तक पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।इस क्रम में 27 फरवरी को चेन्नई पोर्ट पर स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘आईएनएस अंजदीप’ नेवी का हिस्सा बनेगा। यह शिप एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है और 25 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। अंजदीप की एक बार में लगभग 3,300 किलोमीटर तक की क्षमता इसे एंटी-सबमरीन ऑपरेशन के लिए बेहद प्रभावी बनाती है।इसी के साथ 14 मार्च को विशाखापत्तनम में प्रोजेक्ट 17ए के नीलगिरी क्लास का चौथा गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरि नौसेना में शामिल होगा। यह फ्रिगेट ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है जो एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप वारफेयर में सक्षम है। इसके अलावा एयर डिफेंस के लिए लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल बराक-8 और एयर डिफेंस गन लगी हैं। एंटी-सबमरीन वारफेयर के लिए इसमें स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र और एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर मौजूद हैं।आईएनएस तारागिरि लंबी दूरी से आने वाले हमलों को डिटेक्ट, ट्रैक और इंटरसेप्ट करने के लिए सोनार, मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। इसमें दो हेलिकॉप्टरों के लिए हैंगर की सुविधा भी मौजूद है। 6,700 टन वजनी इस फ्रिगेट की रफ्तार 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे है।प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सात नीलगिरी क्लास फ्रिगेट्स में से अब तक चार मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा बनाए जा चुके हैं। पहले आईएनएस नीलगिरी, हिमगिरि और उदयगिरि को नौसेना में शामिल किया जा चुका है। इन फ्रिगेट्स में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से प्राप्त किए गए हैं। इनकी नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री ताकत और अत्याधुनिक क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा।नीलगिरी क्लास के सभी वॉरशिप का डिजाइन नेवल डिजाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है और इनके नाम भारत की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं पर रखे गए हैं जैसे शिवालिक, सह्याद्रि, सतपुड़ा, नीलगिरी, हिमगिरि, तारागिरि, उदयगिरि, दूनागिरि, महेंद्रगिरि और विंध्यगिरि।चीन और पाकिस्तान की सबमरीन क्षमता से निपटने के लिए एंटी-सबमरीन वारफेयर (एएसडब्ल्यू) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। इससे भारतीय नौसेना को तेज रफ्तार, मजबूती और रणनीतिक बढ़त मिलेगी। साल 2026 के पहले तीन महीनों में इन दो वॉरशिप के शामिल होने से नौसेना की तैयारी और शक्ति में और मजबूती आएगी।

Beechcraft C90A King Air एयर एंबुलेंस हादसा: 39 साल पुराना विमान, 6600 घंटे की उड़ान के बाद झारखंड में क्रैश

नई दिल्ली । झारखंड की राजधानी रांची के पास हुई एयर एंबुलेंस दुर्घटना को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। मंगलवार शाम क्रैश हुआ सात सीटों वाला बीचक्राफ्ट सी90ए किंग एयर विमान वर्ष 1987 में निर्मित था और अब तक 6 600 घंटे से अधिक उड़ान भर चुका था। हादसे में विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई जिससे पूरे राज्य में शोक की लहर फैल गई। यह विमान रेडबर्ड एयरवेज द्वारा संचालित किया जा रहा था और रांची से दिल्ली के लिए उड़ान पर था। जानकारी के अनुसार विमान एक मरीज को लेकर दिल्ली जा रहा था। मृतकों में 41 वर्षीय मरीज संजय कुमार एक डॉक्टर एक पैरामेडिक दो परिचारक पायलट-इन-कमांड विवेक विकास भगत और फर्स्ट ऑफिसर सवराजदीप सिंह शामिल थे। पायलट विवेक विकास भगत के पास लगभग 1 400 घंटे का उड़ान अनुभव था जबकि सह-पायलट सवराजदीप सिंह करीब 450 घंटे की उड़ान पूरी कर चुके थे। विमान ने 23 फरवरी की शाम करीब 7:11 बजे बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी और इसे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचना था। उड़ान भरने के तुरंत बाद चालक दल ने मौसम संबंधी कारणों से मार्ग बदलने की अनुमति मांगी थी। अधिकारियों के अनुसार टेकऑफ के लगभग 23 मिनट बाद विमान का एटीसी से संपर्क और रडार सिग्नल दोनों टूट गए। बाद में यह विमान चतरा जिले के सिमरिया क्षेत्र के पास एक वन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त मिला। तकनीकी विवरण के मुताबिक यह ट्विन-टर्बोप्रॉप विमान पी एंड डब्ल्यू पीटी6ए-21 इंजनों से लैस था। दुर्घटना के समय तक बाएं इंजन ने करीब 2 900 घंटे और दाएं इंजन ने लगभग 2 800 घंटे की उड़ान भरी थी। दोनों प्रोपेलर भी लगभग 2 500 घंटे उपयोग में आ चुके थे। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर विमान का अत्यधिक उपयोग नहीं किया गया था। इसका नवीनतम एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट 21 जनवरी को जारी हुआ था जो एक वर्ष के लिए वैध था। गौरतलब है कि इस विमान में ब्लैक बॉक्स यानी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर या डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर स्थापित नहीं था। नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के अनुसार 1987 में मूल प्रमाणीकरण के समय ऐसे उपकरण अनिवार्य नहीं थे इसलिए इसमें यह प्रणाली नहीं लगाई गई थी। अधिकतम 4 583 किलोग्राम उड़ान भार क्षमता वाले इस विमान के क्रैश की जांच अब संबंधित एजेंसियां कर रही हैं ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके। झारखंड की राजधानी रांची के पास हुई एयर एंबुलेंस दुर्घटना को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। मंगलवार शाम क्रैश हुआ सात सीटों वाला बीचक्राफ्ट सी90ए (किंग एयर) विमान वर्ष 1987 में निर्मित था और अब तक 6 600 घंटे से अधिक उड़ान भर चुका था। हादसे में विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई जिससे पूरे राज्य में शोक की लहर फैल गई। यह विमान रेडबर्ड एयरवेज द्वारा संचालित किया जा रहा था और रांची से दिल्ली के लिए उड़ान पर था। जानकारी के अनुसार विमान एक मरीज को लेकर दिल्ली जा रहा था। मृतकों में 41 वर्षीय मरीज संजय कुमार एक डॉक्टर एक पैरामेडिक दो परिचारक पायलट-इन-कमांड विवेक विकास भगत और फर्स्ट ऑफिसर सवराजदीप सिंह शामिल थे। पायलट विवेक विकास भगत के पास लगभग 1 400 घंटे का उड़ान अनुभव था जबकि सह-पायलट सवराजदीप सिंह करीब 450 घंटे की उड़ान पूरी कर चुके थे। विमान ने 23 फरवरी की शाम करीब 7:11 बजे बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी और इसे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचना था। उड़ान भरने के तुरंत बाद चालक दल ने मौसम संबंधी कारणों से मार्ग बदलने की अनुमति मांगी थी। अधिकारियों के अनुसार टेकऑफ के लगभग 23 मिनट बाद विमान का एटीसी से संपर्क और रडार सिग्नल दोनों टूट गए। बाद में यह विमान चतरा जिले के सिमरिया क्षेत्र के पास एक वन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त मिला। तकनीकी विवरण के मुताबिक यह ट्विन-टर्बोप्रॉप विमान पी एंड डब्ल्यू पीटी6ए-21 इंजनों से लैस था। दुर्घटना के समय तक बाएं इंजन ने करीब 2 900 घंटे और दाएं इंजन ने लगभग 2 800 घंटे की उड़ान भरी थी। दोनों प्रोपेलर भी लगभग 2 500 घंटे उपयोग में आ चुके थे। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर विमान का अत्यधिक उपयोग नहीं किया गया था। इसका नवीनतम एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट 21 जनवरी को जारी हुआ था जो एक वर्ष के लिए वैध था। गौरतलब है कि इस विमान में ब्लैक बॉक्स यानी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर या डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर स्थापित नहीं था। नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के अनुसार 1987 में मूल प्रमाणीकरण के समय ऐसे उपकरण अनिवार्य नहीं थे इसलिए इसमें यह प्रणाली नहीं लगाई गई थी। अधिकतम 4 583 किलोग्राम उड़ान भार क्षमता वाले इस विमान के क्रैश की जांच अब संबंधित एजेंसियां कर रही हैं ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

रवि शास्त्री की राय: दक्षिण अफ्रीका से मिली हार टीम इंडिया के लिए रणनीति सुधार का मौका

नई दिल्ली ।टी20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 मुकाबले में टीम इंडिया को दक्षिण अफ्रीका के हाथों 76 रनों की भारी हार का सामना करना पड़ा जो कि भारतीय टीम के टी20 विश्व कप इतिहास में रनों के लिहाज से अब तक की सबसे बड़ी हार है। इस हार के बाद टीम इंडिया की सेमीफाइनल की राह काफी मुश्किल हो गई है और अब टीम को अपनी रणनीति पर गंभीर रूप से विचार करना होगा। पूर्व कप्तान और कोच रवि शास्त्री ने इस हार को समय पर मिली वेकअप कॉल बताया। शास्त्री ने कहा कि लगातार जीतते रहने के बाद एक दिन खराब प्रदर्शन होना सामान्य है और उन्हें खुशी है कि यह झटका जल्दी ही मिल गया ताकि टीम को अपनी कमजोरी का एहसास हो सके। उन्होंने कहा कि यह हार कैंप के अंदर रणनीति में बदलाव लाने और टीम कॉम्बिनेशन पर पुनर्विचार करने का मौका देगी। सुपर-8 में एक और हार टीम को टूर्नामेंट से बाहर कर सकती है इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। शास्त्री ने सुझाव दिया कि टीम को अक्षर पटेल को वापस लाना चाहिए क्योंकि उनके अनुभव की इस समय बेहद जरूरत है। उन्होंने कहा कि पटेल और वाशिंगटन सुंदर दोनों को खेलने का मौका दिया जाना चाहिए ताकि टीम के पास हर स्थिति के लिए विकल्प मौजूद हों। उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी मैच में किसी गेंदबाज का दिन खराब हो सकता है जैसे रविवार को वरुण चक्रवर्ती का प्रदर्शन था। ऐसे में टीम को अतिरिक्त विकल्प रखने की जरूरत है। बल्लेबाजी क्रम पर चर्चा करते हुए शास्त्री ने कहा कि नंबर 5 पर हार्दिक पांड्या, नंबर 6 पर शिवम दुबे और नंबर 7 पर वाशिंगटन सुंदर खेल सकते हैं। अक्षर पटेल को नंबर 5 या नंबर 8 पर खेलने का विकल्प दिया जा सकता है। शास्त्री ने यह भी स्पष्ट किया कि टी20 में अगर आठ बल्लेबाज सही तरीके से योगदान नहीं दे सकते तो टीम में गड़बड़ है। इसलिए टीम को एक अतिरिक्त विशेषज्ञ बल्लेबाज का विकल्प रखना चाहिए। उन्होंने रिंकू सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें विशेषज्ञ बल्लेबाज के तौर पर टीम में शामिल किया जा सकता है। शास्त्री का मानना है कि इस हार से टीम को अपनी कमजोरियों का एहसास हुआ है और अब समय है रणनीति सुधार करने का। उन्होंने जोर दिया कि टीम कॉम्बिनेशन, गेंदबाजी विकल्प और बल्लेबाजी क्रम पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह हार टीम को जरूरी चेतावनी दे रही है कि टूर्नामेंट के आगे के दौर में गलती की कोई गुंजाइश नहीं है। टी20 विश्व कप के इस प्रारंभिक मुकाबले ने साबित कर दिया है कि भारत को अपनी रणनीति पर गंभीरता से विचार करना होगा। शास्त्री का संदेश साफ है कि टीम को अनुभव और विकल्पों के साथ संतुलित प्रदर्शन करने की जरूरत है। यह हार टीम के लिए वेकअप कॉल है जो उन्हें भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार करेगी।

सहारा समूह पर बड़ा निवेशक घोटाला: मध्य प्रदेश में लगभग 6,689 करोड़ रुपए की राशि के गबन के 9 लाख से अधिक शिकायत आवेदन मिले

भोपाल । मध्य प्रदेश सहारा समूह से जुड़े निवेशकों की रकम के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। राज्य सरकार को कुल लगभग 9 लाख से अधिक शिकायती आवेदन प्राप्त हुए हैं जिनमेंकुल 6 689 करोड़ रुपए की राशि के निवेशकों के साथ गबन होने का दावा किया गया है। यह जानकारी आज विधानसभा में राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने गृह विभाग की ओर से दी। मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने सहारा समूह को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि प्रदेश में सहारा के निवेशकों की राशि के संबंध में कुल कितनी शिकायतें मिली हैं और कितना पैसा निवेशकों को वापस मिला है। इसके उत्तर में राज्य मंत्री पटेल ने बताया कि सरकार को 9 06 661 शिकायत आवेदन मिले हैं और इनमें कुल राशि करीब 6 689 करोड़ रुपये के निवेशकों की है। सरकार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सहारा रिफंड पोर्टल बनाया गया है जिसके माध्यम से निवेशकों को उनकी राशि वापस करने की प्रक्रिया चल रही है। इस पोर्टल के तहत अब तक लगभग 355 करोड़ रुपये निवेशकों को वापस किये जा चुके हैं लेकिन कुल राशि की तुलना में यह राशि केवल एक छोटा हिस्सा है। इस घोटाले को लेकर सदन में स्पष्ट किया गया कि सहारा समूह की कई संपत्तियाँ न्यायालय के आदेश के अनुरूप अटैच की गई हैं और सुप्रीम कोर्ट के तहत निवेशकों की राशि वापस करने का काम जारी है। हालांकि शिवपुरी में दर्ज एफआईआर की संख्या के बारे में सरकार ने कहा कि 1 जनवरी 2024 के बाद समूह के खिलाफ लगभग 4 एफआईआर दर्ज की गई हैं और अन्य मामलों को मुरैना कोतवाली में मर्ज किया जा रहा है। विपक्ष ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या राज्य सरकार के पास निवेशकों की राशि की वसूली या संपत्तियों के नीलामी के कोई ठोस कार्यक्रम हैं ताकि निवेशकों को उनका धन लौटाया जा सके। मंत्री ने जवाब दिया कि यह मामला न्यायिक प्रकृति का है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जा रही है। यह विषय राज्य पुलिस की सीमा से बाहर है और उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में ही निवेशकों की राशि वापस की जाएगी। विशेषज्ञों और निवेशकों की मांग है कि सहारा मामले में पारदर्शिता और तेजी लाने की जरूरत है ताकि लंबे समय से अपना पैसा वापस पाने के लिए प्रतीक्षा कर रहे लाखों निवेशकों को न्याय मिल सके। निवेशकों की शिकायतें कई वर्षों से लंबित हैं और न्यायपालिका के आदेशों के बावजूद वापस प्राप्त राशि बहुत कम है। इस घोटाले की व्यापक प्रकृति के कारण देश भर में सहारा समूह के खिलाफ मामले दर्ज हैं और जांच एजेंसियाँ सक्रिय हैं।

GWALIOR COLLECTORATE: होली-ईद से पहले भिंड में सख्ती: कलेक्ट्रेट परिसर में 27 फरवरी तक प्रदर्शन पर रोक

BHIND COLLECTORATE

HIGLIGHTS: 27 फरवरी तक कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन पर रोक बिना अनुमति रैली, जुलूस और आमसभा प्रतिबंधित भड़काऊ पोस्टर-बैनर पर सख्त निगरानी सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की नजर उल्लंघन पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई GWALIOR COLLECTORATE: ग्वालियर। भिंड में होली और ईद के मद्देनजर शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन, रैली और जुलूस पर 27 फरवरी तक अस्थायी रोक लगा दी है। बता दें कि कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट किरोड़ीलाल मीना ने यह आदेश एहतियातन जारी किया है। MOREAN CONTENT CREATOR EXTORTION: मुरैना में कंटेंट क्रिएटर की रंगदारी: नपा अध्यक्ष से 10 लाख मांगे, महिला अधिकारी को भी किया ब्लैकमेल बिना अनुमति नहीं होंगे आयोजन जारी आदेश के अनुसार कलेक्ट्रेट सीमा के भीतर बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार की आमसभा, धरना, जुलूस, रैली या प्रतिमा/भूमि पूजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा सकेंगे। प्रशासन का कहना है कि त्योहारों के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। नरसिंहपुर में बड़ी कार्रवाई: अंतर्राज्यीय तस्कर से 152 किलो गांजा जब्त, ग्वालियर निवासी चालक गिरफ्तार भड़काऊ पोस्टर और सोशल मीडिया पर निगरानी प्रशासन ने आपत्तिजनक पोस्टर, बैनर, फ्लैक्स और झंडों के प्रदर्शन पर भी रोक लगा दी है। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। धार्मिक भावनाएं भड़काने, भ्रामक जानकारी फैलाने या तनाव पैदा करने वाले पोस्ट शेयर करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। अमेरिकी टैरिफ से सोलर शेयरों में बड़ी गिरावट, वारी और प्रीमियर एनर्जीज टॉप लूजर.. उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति या संगठन के खिलाफ वैधानिक प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। त्योहारों के दौरान पुलिस बल को भी मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।  

1 मार्च से यूटीएस ऐप बंद, रेलवे का नया रेलवन ऐप करेगा अनारक्षित टिकट बुकिंग आसान

नई दिल्ली । भारतीय रेलवे एक मार्च से अपने यूटीएस (अनारक्षित टिकटिंग सिस्टम) ऐप को बंद करने जा रहा है। इस ऐप के जरिए अब अनारक्षित टिकट बुकिंग, प्लेटफॉर्म पास और सीजन टिकट बुकिंग संभव नहीं होगी। इसके स्थान पर रेलवे का नया सुपर ऐप रेलवन सभी प्रकार की टिकट बुकिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। रेलवन ऐप के प्रमुख फीचर्स: एकीकृत प्लेटफॉर्म: अनारक्षित टिकट, प्लेटफॉर्म पास और सीजन टिकट सभी इसी ऐप से बुक किए जा सकेंगे। सरल इंटरफेस: पहले के यूटीएस ऐप की तुलना में नया ऐप अधिक आसान और यूजर-फ्रेंडली है। लॉगइन आसान: यूटीएस या आईआरसीटीसी के मौजूदा लॉगिन का इस्तेमाल करके साइनअप किया जा सकता है, नया अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं। दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध: एंड्रॉइड और आईओएस दोनों पर निशुल्क डाउनलोड। डिजिटल पेमेंट छूट: 14 जनवरी से 14 जुलाई तक रेलवन ऐप से डिजिटल माध्यम UPI कार्ड, नेट बैंकिंग, वॉलेट) से बुकिंग पर 3% छूट। यात्रियों के लिए लाभ: कभी-कभार ट्रेन का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए सरल बुकिंग। दैनिक यात्रियों के लिए आसान और तेज़ इंटरफेस। कैशलेस पेमेंट को बढ़ावा और 3% अतिरिक्त छूट। रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे सभी टिकट बुकिंग के लिए 1 मार्च से रेलवन ऐप का उपयोग करें और यूटीएस ऐप पर निर्भर न रहें।