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425 करोड़ के बजट के साथ ‘लव एंड वॉर’ बनी भंसाली की सबसे महंगी फिल्म, स्टार्स की फीस अलग

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के भव्य फिल्मकार संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित फिल्म लव एंड वॉर लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। जैसे-जैसे फिल्म से जुड़े अपडेट सामने आ रहे हैं वैसे-वैसे इसकी भव्यता और पैमाना और भी बड़ा होता जा रहा है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म का बजट अब 400 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है और यह करीब 425 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि इस भारी-भरकम बजट में फिल्म के तीनों लीड सितारों की फीस शामिल नहीं है। फिल्म में आलिया भट्ट रणबीर कपूर और विकी कौशल मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। इन तीनों सितारों की मौजूदगी ने फिल्म को पहले ही चर्चा का केंद्र बना दिया था लेकिन अब इसका बढ़ता बजट इसे इंडस्ट्री की सबसे महंगी फिल्मों की कतार में खड़ा कर रहा है। बताया जा रहा है कि शुरुआत में फिल्म को लगभग 350 करोड़ रुपये में पूरा करने की योजना थी मगर बार-बार प्रोडक्शन शेड्यूल बढ़ने विशाल सेट्स और तकनीकी स्तर पर बड़े पैमाने पर काम होने के कारण लागत तेजी से बढ़ती चली गई। भंसाली अपनी परफेक्शन के लिए मशहूर हैं। वे तब तक संतुष्ट नहीं होते जब तक हर फ्रेम उनके विजन के अनुरूप न हो। यही कारण है कि फिल्म की शूटिंग अवधि भी बढ़ा दी गई। पहले इसे 120 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य था लेकिन अब यह शेड्यूल बढ़कर लगभग 175 दिनों का हो गया है। इसमें भव्य डांस सीक्वेंस बड़े एरियल एक्शन सीन और भारी-भरकम विजुअल इफेक्ट्स शामिल हैं। हाई-एंड वीएफएक्स पर काम होने के कारण पोस्ट-प्रोडक्शन में भी अधिक समय लग रहा है जिससे रिलीज में देरी हो रही है। दिलचस्प पहलू यह है कि फिल्म के बजट में तीनों सितारों की पारंपरिक फीस शामिल नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार रणबीर आलिया और विकी ने प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल अपनाया है। यानी वे फिल्म की कमाई से हिस्सा लेंगे। इससे शुरुआती लागत का बड़ा हिस्सा सीधे प्रोडक्शन वैल्यू पर खर्च किया गया है। हालांकि मेकर्स ने रिलीज से पहले ही अच्छी रिकवरी कर ली है। फिल्म के डिजिटल राइट्स Netflix को लगभग 130 करोड़ रुपये में बेचे गए हैं जबकि सैटेलाइट राइट्स से करीब 80 करोड़ रुपये हासिल हुए हैं। इस तरह लगभग 200 करोड़ रुपये पहले ही सुरक्षित कर लिए गए हैं जिससे प्रोजेक्ट को वित्तीय मजबूती मिली है। रिलीज डेट को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन खबरों के मुताबिक फिल्म 2026 में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। रणबीर कपूर के व्यस्त रिलीज शेड्यूल को भी देरी की एक वजह माना जा रहा है क्योंकि उनकी बड़ी फिल्म रामायण पार्ट 1 भी इसी वर्ष दिवाली पर रिलीज होने वाली है। लव एंड वॉर की एक और खास बात यह है कि रणबीर और विकी इससे पहले संजू में साथ नजर आ चुके हैं जबकि आलिया और विकी राज़ी में साथ काम कर चुके हैं। रणबीर और आलिया की जोड़ी ब्रह्मास्त्र पार्ट 1: शिवा में दर्शकों को पसंद आई थी। अब पहली बार ये तीनों सितारे एक साथ बड़े पर्दे पर दिखाई देंगे जिससे उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।

PM’S ISRAEL VISIT: इजरायल में पीएम मोदी को रिसीव करने भगवा ड्रेस पहनकर गईं नेतन्याहू की पत्नी

PM’S ISRAEL VISIT: तेलअवीव। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय इजरायल दौरे पर हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ उन्हें रिसीव करने पहुंचे। इस दौरान एक बेहद दिलचस्प नजारा देखने को मिला। असल में नेतन्याहू की पत्नी भी भगवा ड्रेस पहनकर आई हुई थीं। वह पीएम मोदी से हाथ मिलाकर उनका स्वागत कर रही थीं। इसी दौरान नेतन्याहू ने अपनी पत्नी सारा के ड्रेस के कलर की तरफ पीएम मोदी का ध्यान दिलाया। साथ ही पीएम मोदी की सदरी के पॉकेट पर लगे कपड़े के रंग की तरफ भी इशारा किया। यह देखते ही पीएम मोदी भी खुश हो गए और हंसते हुए बोले-दोनों का रंग भगवा ही है। इजरायल की दूसरी यात्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो दिन की इजरायल यात्रा पर बुधवार को तेल अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे पहुंचे। यहां पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। हवाई अड्डे पर पीएम मोदी का पारंपरिक स्वागत किया गया। उनके पहुंचने पर नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहाकि इजरायल में आपका स्वागत है , मेरे प्रिय मित्र नरेन्द्र मोदी। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल की यह दूसरी यात्रा है। इससे पहले वह 2017 में इजरायल गए थे। इजरायली संसद को भी करेंगे संबोधित प्रधानमंत्री का दो दिन की यात्रा के दौरान नेतन्याहू के साथ द्विपक्षीय वार्ता के अलावा इजरायली संसद नेसेट को भी संबोधित करने का कार्यक्रम है। वह भारतीय समुदाय के लोगों से भी बात करेंगे। उनका इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से भी शिष्टाचार भेंट करेंगे। इससे पहले पीएम मोदी ने सुबह रवाना होने से पहले कहा था कि उनकी इजरायल यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे। साथ ही साझा विजन से दोनों देशों का भविष्य खुशहाल होगा। उन्होंने कहाकि भारत और इजरायल के बीच मजबूत और कई तरह की रणनीतिक साझेदारी है, जिसमें हाल के सालों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी और तेजी देखी गई है। पीएम मोदी ने कहाकि मैं प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ अपनी बातचीत का इंतज़ार कर रहा हूं। इसका मकसद विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि, जल प्रबंधन, प्रौद्योगिकी, रक्षा और सुरक्षा, व्यापार तथा निवेश के साथ ही लोगों के बीच संबंधों सहित अलग-अलग क्षेत्रों में हमारे सहयोग को और मजबूत करना है। हम आपसी फायदे क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा करेंगे।

पाकिस्तान में न्यायपालिका पर सवाल: फर्जी डिग्री के आधार पर फैसले सुनाते रहे जज, पद से हटाए गए

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने नियुक्तियों की पारदर्शिता और डिग्री सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तारिक महमूद जहांगीरी नामक जज को कथित तौर पर फर्जी कानून की डिग्री के आधार पर वर्षों तक पद पर बने रहने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई इस्लामाबाद हाई कोर्ट के 116 पन्नों के विस्तृत फैसले के बाद की गई, जिसमें अदालत ने मामले को “गंभीर संस्थागत धोखाधड़ी” बताया। डिग्री शुरू से ही अवैध पाई गई अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि जहांगीरी की लॉ डिग्री वैध नहीं थी, इसलिए उनकी न्यायिक नियुक्ति भी कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं मानी जा सकती। कोर्ट के अनुसार, किसी भी न्यायिक पद के लिए शैक्षणिक योग्यता की प्रामाणिकता अनिवार्य है, और इस मामले में वही मूल आधार ही संदिग्ध पाया गया। विश्वविद्यालय रिकॉर्ड से हुआ खुलासा मीडिया रिपोर्ट, विशेषकर डॉन में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, अदालत को कराची विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार से आधिकारिक रिकॉर्ड प्राप्त हुए। इन दस्तावेजों ने प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों को पूरी तरह फर्जी साबित कर दिया। जांच में यह भी सामने आया कि: 1988 में जहांगीरी ने कथित तौर पर फर्जी नामांकन संख्या के साथ परीक्षा दी। परीक्षा के दौरान नकल करते पकड़े गए और उन पर तीन वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया। बाद में उन्होंने दंड स्वीकार नहीं किया और किसी अन्य छात्र के एनरोलमेंट नंबर का इस्तेमाल कर दोबारा परीक्षा देने का प्रयास किया। कॉलेज में प्रवेश का कोई रिकॉर्ड नहीं सुनवाई के दौरान संबंधित लॉ कॉलेज प्रशासन ने अदालत को बताया कि जहांगीरी ने संस्थान में कभी औपचारिक प्रवेश ही नहीं लिया था। अदालत ने उन्हें मूल दस्तावेज पेश करने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया, लेकिन वे ऐसा करने में असफल रहे। सुनवाई टालने की कोशिशें भी खारिज जहांगीरी ने फुल बेंच से सुनवाई की मांग, चीफ जस्टिस को मामले से अलग करने की अपील और कार्यवाही स्थगित कराने जैसे कई प्रयास किए। अदालत ने इन कदमों को “मामले को लंबा खींचने की रणनीति” बताते हुए खारिज कर दिया। अदालत की सख्त टिप्पणी कोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत कर चुका था, तब संबंधित जज की जिम्मेदारी थी कि वह अपनी डिग्री की वैधता सिद्ध करें। ऐसा न कर पाने पर उन्हें पद से हटाना आवश्यक हो गया। पाकिस्तान में छिड़ी नई बहस यह मामला अब पाकिस्तान में न्यायिक नियुक्तियों की पारदर्शिता, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन और संस्थागत जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस का कारण बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद नियुक्ति प्रक्रिया की जांच और कड़े सत्यापन तंत्र की मांग तेज हो सकती है।

Delhi: लाल किला बम ब्लास्ट मामले में NIA ने 2 और आतंकियों को दबोचा, अब तक 11 गिरफ्तार

Delhi: नई दिल्ली। एनआईए (NIA) ने दिल्ली (Delhi) के लाल किला (Red Fort) के पास हुए बम ब्लास्ट (Bomb Blast) के मामले में दो और आतंकियों (Two Another Terrorists) को दबोचा है। इन आतंकियों के नाम जमीर अहमद और तुफैल अहमद हैं। इसके साथ ही इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 11 हो गई है। जांच में सामने आया है कि इन दोनों ने मुख्य आरोपी उमर उन नबी को हथियार और गोला-बारूद सप्लाई किए थे। ये दोनों अंसार गजवत-उल-हिंद संगठन के सक्रिय सदस्य हैं। दोनों कई आतंकी साजिशों में शामिल रहे हैं। शाजिश में शामिल थे दोनों आरोपी एनआईए की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि जमीर अहमद अहंगर गांदरबल का रहने वाला है जबकि तुफैल अहमद भट श्रीनगर का निवासी है। आरोप है कि दोनों दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ी साजिश में एक्टिव रूप से शामिल थे। इन आरोपियों ने मामले के मुख्य आरोपी डॉ. उमर को हथियार सप्लाई किए थे। अंसार गजवत-उल-हिंद के गुर्गे हैं दोनों आरोपी पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली में लाल किला के पास हुए कार बम धमाके में कई लोग मारे गए थे और कई लोग घायल हुए थे। मुख्य आरोपी उमर उन नबी भी इस धमाके में मारा गया था। एनआईए इस हमले की जांच कर रही है। एनआईए ने अपनी जांच में पाया कि जमीर और तुफैल अंसार गजवत-उल-हिंद आतंकी संगठन के सक्रिय गुर्गे हैं। दिल्ली ब्लास्ट के साथ कई आतंकी साजिशों का रहे हैं हिस्सा बयान में कहा गया है कि एनआईए जम्मू-कश्मीर पुलिस, हरियाणा पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ कोऑर्डिनेशन के तहत काम कर रही है। जांच में यह भी पता चला है कि जमीर और तुफैल विस्फोट की साजिश के साथ कई अन्य आतंकी साजिशों का भी हिस्सा थे। आरोपी जुटा रहे थे गोला बारूद बयान में कहा गया है कि एनआईए ने व्यापक जांच और सबूतों की गहराई से छानबीन की। एनआईए ने पाया कि दोनों ही आरोपी देश के खिलाफ इस्तेमाल के लिए हथियारों और गोला-बारूद के संग्रह में लगे हुए थे। डॉ. उमर के साथ ये भी रहे हैं शामिल एनआईए ने कहा कि राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी एजेंसी की जांच से यह बात सामने आई कि दिल्ली बम विस्फोट की साजिश डॉ. उमर ने अन्य आरोपियों मुजम्मिल गनई, शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान, अदील अहमद राथर के साथ मिलकर रची थी। उसने कहा कि इसके अलावा 5 अन्य ने भी साजिशकर्ताओं को पनाह और रसद संबंधी सहायता प्रदान की थी। इन नौ लोगों को जम्मू-कश्मीर और हरियाणा के विभिन्न स्थानों से पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

ED’S INVESTIGATION: मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई… अनिल अंबानी के मुम्बई स्थित घर ‘अबोड’ को किया जब्त

ED’S INVESTIGATION: मुम्बई। प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून (Anti-Money Laundering Laws – PMLA) के तहत बड़ी कार्रवाई की है। रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने अनिल अंबानी (Anil Ambani) के मुंबई स्थित घर ‘अबोड’ को जब्त कर लिया है। जब्त घर की कीमत 3,716 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ईडी के अनुसार, अनिल अंबानी और उनके ग्रप की कंपनियों के खिलाफ अब तक कुल अटैचमेंट की कार्रवाई 15000 करोड़ से अधिक हो चुकी है। बता दें कि 23 फरवरी को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी को झटका देते हुए एकल न्यायाधीश पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनके एवं रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के बैंक खातों को ‘धोखाधड़ी’ वाला वर्गीकृत करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम ए अंखड की खंडपीठ ने बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और ऑडिटर बीडीओ इंडिया एलएलपी की याचिका पर पारित किया। पीठ ने ‘उल्टे’ और ‘गैर-कानूनी’ अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया और अंबानी की इसके अभियान पर रोक लगाने के निवेदन को भी ठुकरा दिया। पीठ ने कहा, “जैसा कि हम पहले ही सुन चुके हैं कि 24 दिसंबर, 2025 का अंतरिम फैसला गैर-कानूनी है और इस प्रक्रिया में गड़बड़ी है इसलिए अगले कुछ सप्ताह के लिए इस आदेश के लागू होने पर रोक लगाने का निवेदन गैर-कानूनी आदेश को जारी रखने और गैर-कानूनी काम को जारी रखने के बराबर होगी। इसलिए अनिल अंबानी की तरफ से इस फैसले के लागू होने पर रोक लगाने के निवेदन को खारिज किया जाता है।” दिसंबर 2025 में जब अनिल अंबानी के खिलाफ मामला विचाराधीन था, न्यायमूर्ति मिलिंद एन जाधव की एकल न्यायाधीश पीठ ने उनको कुछ समय के लिए राहत दी। इस आदेश ने तीनों बैंकों की सभी कार्रवाइयों पर रोक लगा दी और उन्हें कारण बताओ नोटिस और धोखाधड़ी आदेश पर आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे उन्हें दो-जजों की पीठ के सामने अपील करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

American Supreme Court: ट्रंप टैरिफ अमान्य होने के बाद आयातकों ने की रिफंड की मांग… निचली अदालतों में 1500 से ज्यादा केस दायर

American Supreme Court: वाशिंगटन। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (American Supreme Court) द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) के ग्लोबल टैरिफ (Global Tariff) को अमान्य घोषित करने के बाद, इन शुल्कों को चुनौती देने वाले व्यवसायों ने निचली अदालतों में कानूनी कार्यवाही फिर से शुरू करने का अनुरोध किया है ताकि वे सरकार से रिफंड पाने की प्रक्रिया शुरू कर सकें। मंगलवार को, उन चुनौतियों को देने वालों के वकीलों, जिन्होंने न्यायालय के समक्ष सफलतापूर्वक मुकदमा लड़ा था, यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट से अनुरोध किया कि वह पिछले साल के अपने उस फैसले को औपचारिक रूप दे, जिसमें ट्रंप के तथाकथित “पारस्परिक” टैरिफ को अवैध घोषित किया गया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट के बहुमत ने 20 फरवरी को बरकरार रखा था। इसके बाद यह मामला यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में वापस जाएगा, जहाँ अगले कदम तय होंगे, जिसमें यह भी शामिल होगा कि क्या आयातकों को उनका पैसा वापस मिलना चाहिए। रिफंड प्रक्रिया शुरू करने की मांग छोटे व्यवसायों के समूह के वकीलों ने ट्रेड कोर्ट में तीन जजों के पैनल से एक नया निषेधाज्ञा जारी करने का अनुरोध दाखिल किया, जो प्रशासन को टैरिफ नीति लागू करने से रोके और रिफंड प्रक्रिया शुरू करे। ब्लूमबर्ग न्यूज के विश्लेषण के अनुसार, अब तक 1,500 से अधिक रिफंड मुकदमे दायर किए जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश मुकदमे उन आयातकों ने दायर किए थे, जब सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर में मामले की सुनवाई की थी, और ट्रेड कोर्ट ने उन्हें तब तक रोक दिया था जब तक जज फैसला नहीं दे देते। त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता बुधवार को, उन अन्य कंपनियों के वकीलों ने जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करते हुए रिफंड मुकदमे दायर किए थे, ट्रेड कोर्ट से इस सप्ताह या जल्द से जल्द सुनवाई आयोजित करने का अनुरोध किया। उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए तर्क दिया कि “वादी को और नुकसान और मुकदमेबाजी की जटिलता से बचा जा सके, जो हर गुजरते दिन के साथ बढ़ती जाती है।” पिछले साल लिखित दस्तावेजों में, न्याय विभाग के वकीलों ने ट्रेड कोर्ट को बताया था कि अगर मुकदमा जीत जाते हैं तो उन्हें ब्याज सहित रिफंड मिलेगा। ट्रंप के बयान से पैदा हुई अनिश्चितता सुप्रीम कोर्ट के फैसले की घोषणा के तुरंत बाद, ट्रंप ने ऐसी टिप्पणी की जिससे संकेत मिला कि सरकार रिफंड का भुगतान करने का विरोध कर सकती है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस पर मुकदमा चलाना होगा,” और यह भी अनुमान लगाया कि इस मुद्दे को सुलझने में वर्षों लग सकते हैं। लिबर्टी जस्टिस सेंटर के वरिष्ठ वकील जेफरी श्वाब ने कहा कि राष्ट्रपति के बयानों ने “चीजों को थोड़ा धुंधला कर दिया है,” इसलिए वे ट्रेड कोर्ट से जल्द से जल्द स्पष्टता की उम्मीद कर रहे हैं। व्यापक प्रभाव की संभावना छोटे व्यवसायों के वकीलों ने मंगलवार को ट्रेड कोर्ट को बताया कि इस मामले में अपनाई गई कोई भी रिफंड प्रक्रिया दावा करने वाली बाकी कंपनियों के लिए “जल्दी राहत प्रदान करने का खाका” बन सकती है। ट्रेड वकीलों का मानना है कि प्रशासन के लिए रिफंड का विरोध करना कानूनी रूप से कठिन होगा, क्योंकि न्याय विभाग ने न केवल मूल वादियों को भुगतान किए जाने की बात कही थी, बल्कि यह भी कहा था कि सरकार अन्य मामलों में रिफंड से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति जताएगी। नए टैरिफ की चुनौतियां सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट के तहत अवैध रूप से टैरिफ लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की घोषणा के तुरंत बाद, ट्रंप ने एक अलग प्राधिकरण – 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत वैश्विक टैरिफ का एक नया दौर लगाने वाली घोषणा पर हस्ताक्षर किए। कानूनी विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की है कि प्रशासन को उन शुल्कों को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

US President Donald Trump: ट्रंप ने अपने सबसे लंबे संबोधन में बोले 5 बड़े झूठ… US के मीडिया ने ही किया फैक्ट चेक

US President Donald Trump: वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन (State of the Union Address) में सबसे लंबा भाषण देकर इतिहास रच दिया। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से 8 जंगें रुकवाने का दावा किया तो वहीं अर्थव्यवस्था, टैरिफ वॉर समेत कई मसलों पर बढ़-चढ़कर दावे किए। डोनाल्ड ट्रंप दावे करने में आगे रहे हैं, लेकिन अकसर गलत तथ्य दे देते हैं। ऐसा ही मंगलवार की रात को भी हुआ, जब उन्होंने जनता के सामने कई गलत तथ्य रख दिए। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के बोले गए झूठ ज्यादातर देर तक टिक नहीं सके। अमेरिका के ही कई अखबारों ने उनका फैक्ट चेक कर दिया है। अर्थव्यवस्था, नौकरी और निवेश पर क्या गलत दावा डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हमारी इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी दुनिया में हॉटेस्ट है। उनका दावा था कि हमारे पास काफी नौकरियां हैं। पहले के मुकाबले अमेरिका में सबसे ज्यादा लोगों के पास जॉब्स हैं। यह इतिहास में सबसे अधिक है। लेकिन डेटा कुछ और कहता है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार 2025 में अमेरिका में नौकरी पाने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। यह आंकड़ा कोरोना काल के किसी भी साल के मुकाबले कम रहा है। अमेरिकी लेबर ब्यूरो के अनुसार 2025 में अमेरिका में सिर्फ 1 लाख 81 हजार ही नई नौकरियां जुड़ीं। एरिना के कत्ल में प्रवासी शख्स के शामिल होने का दावा, क्या सच अमेरिकी लीडर ने यह दावा भी किया कि एरिना जारुस्का का कत्ल एक प्रवासी ने किया था। उनका कहना कि एक खूंखार अपराधी ने इस कांड को अंजाम दिया, जो खुली सीमाओं से आ गया था। वह यहां मुक्त होकर घूम रहा था। लेकिन उनका यह फैक्ट भी गलत निकला। एरिना के कत्ल में गिरफ्तार डिकार्लोस ब्राउन जूनियर कोई प्रवासी नहीं है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका में बाहर से आने वाले लोग ही ज्यादातर हिंसा के जिम्मेदार रहे हैं। बिजली की कीमत कम होने की बात निकली गलत अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका में की कीमतें घट रही हैं। इतनी कमी आई है कि यकीन नहीं होता। लेकिन सच्चाई कुछ और है। अमेरिका में प्रति परिवार ऊर्जा का बिल बीते एक साल में 6.7 पर्सेंट तक बढ़ गया है। वह लगातार कहते रहे हैं कि देश में बिजली की कीमत कम हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सच्चाई यह है कि डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद से कई यूटिलिटी कंपनियों ने मांग की है कि रेट बढ़ाए जाएं। यह इजाफा हुआ भी है। कहा जा रहा है कि 2035 तक 18 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी। गैस वाला बयान भी ट्रंप का झूठा ही साबित हुआ ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में गैस की कीमत अब 1.99 डॉलर प्रति गैलन तक हो गई है। लेकिन बीते कुछ दिन पहले पर्यावरण को लेकर लगी पाबंदियों के चलते इसमें इजाफा होने की चर्चा है। इससे स्पष्ट है कि आने वाला समय रेट बढ़ने का रहेगा। यही नहीं कुछ राज्यों में अब भी कीमत 4.60 डॉलर प्रति गैलन है। इस तरह ट्रंप का दावा यहां भी गलत निकला है। 8 जंगें रुकने का दावा भी झूठा, गाजा में अब भी हो रहीं मौतें अब बात करते हैं, डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध वाले दावों की। उन्होंने एक बार फिर से कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती 10 महीनों में 8 जंगें रुकवा दीं। अब इस मामले में भी सच्चाई यह है कि अमेरिका का दखल 6 जंगों में ही रहा है। अन्य दो युद्ध ऐसे रहे हैं, जिसमें उसका कोई रोल नहीं रहा। इसके अलावा कई लोगों ने तो इन 6 में भी उसे कोई क्रेडिट नहीं दिया है। ट्रंप ने गाजा में सीजफायर का दावा किया है, लेकिन वहां अब भी इजरायल के हमले जारी हैं और हर दिन ही कुछ मारे जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन (State of the Union Address) में सबसे लंबा भाषण देकर इतिहास रच दिया। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से 8 जंगें रुकवाने का दावा किया तो वहीं अर्थव्यवस्था, टैरिफ वॉर समेत कई मसलों पर बढ़-चढ़कर दावे किए। डोनाल्ड ट्रंप दावे करने में आगे रहे हैं, लेकिन अकसर गलत तथ्य दे देते हैं। ऐसा ही मंगलवार की रात को भी हुआ, जब उन्होंने जनता के सामने कई गलत तथ्य रख दिए। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के बोले गए झूठ ज्यादातर देर तक टिक नहीं सके। अमेरिका के ही कई अखबारों ने उनका फैक्ट चेक कर दिया है। अर्थव्यवस्था, नौकरी और निवेश पर क्या गलत दावा डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हमारी इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी दुनिया में हॉटेस्ट है। उनका दावा था कि हमारे पास काफी नौकरियां हैं। पहले के मुकाबले अमेरिका में सबसे ज्यादा लोगों के पास जॉब्स हैं। यह इतिहास में सबसे अधिक है। लेकिन डेटा कुछ और कहता है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार 2025 में अमेरिका में नौकरी पाने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। यह आंकड़ा कोरोना काल के किसी भी साल के मुकाबले कम रहा है। अमेरिकी लेबर ब्यूरो के अनुसार 2025 में अमेरिका में सिर्फ 1 लाख 81 हजार ही नई नौकरियां जुड़ीं। एरिना के कत्ल में प्रवासी शख्स के शामिल होने का दावा, क्या सच अमेरिकी लीडर ने यह दावा भी किया कि एरिना जारुस्का का कत्ल एक प्रवासी ने किया था। उनका कहना कि एक खूंखार अपराधी ने इस कांड को अंजाम दिया, जो खुली सीमाओं से आ गया था। वह यहां मुक्त होकर घूम रहा था। लेकिन उनका यह फैक्ट भी गलत निकला। एरिना के कत्ल में गिरफ्तार डिकार्लोस ब्राउन जूनियर कोई प्रवासी नहीं है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका में बाहर से आने वाले लोग ही ज्यादातर हिंसा के जिम्मेदार रहे हैं। बिजली की कीमत कम होने की बात निकली गलत अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका में की कीमतें घट रही हैं। इतनी कमी आई है कि यकीन नहीं होता। लेकिन सच्चाई कुछ और है। अमेरिका में प्रति परिवार ऊर्जा का बिल बीते एक साल में

INCOME TAX DEPARTMENT : करदाता को अब बताना होगा मकान मालिक से उसका क्या रिश्ता है…1 अप्रैल से बदलेंगे नियम

INCOME TAX DEPARTMENT : नई दिल्ली। सरकार (Government) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 (New Income Tax Act, 2025) के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। सरकार (Government) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 (New Income Tax Act, 2025) के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। नया आयकर अधिनियम एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा। सरकार ने हितधारकों के लिए नियमों का मसौदा एवं फॉर्म जारी किए हैं। इसके आधार पर अंतिम नियम एवं फॉर्म अगले महीने अधिसूचित किए जाएंगे। नियमों के मसौदे के मुताबिक, नए फॉर्म 124 में करदाता को यह बताना होगा कि वह जिस मकान मालिक को किराया दे रहा है, उससे उसका कोई पारिवारिक या कोई अन्य संबंध तो नहीं है। फिलहाल एचआरए का दावा करते समय कर्मचारी अपने नियोक्ता को किराये का अनुमानित विवरण देता है, लेकिन मकान मालिक के साथ संबंध का खुलासा करना अनिवार्य नहीं है। फर्जी किराया दावों पर लगाम लगेगी कर विशेषज्ञों का मानना है कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच के संबंधों का खुलासा अनिवार्य किए जाने से फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए किराया दावों पर अंकुश लगेगा। नांगिया ग्लोबल एडवाइजर्स फर्म में साझेदार संदीप झुनझुनवाला ने कहा, ‘यह प्रावधान वास्तविक व्यवस्थाओं को प्रभावित किए बगैर कृत्रिम दावों की पहचान में मदद करेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुचित दावों को खारिज करना आसान होगा।’ किन्हें देनी होगी जानकारी? अगर आप सालाना एक लाख रुपए से ज्यादा किराया किसी मकान मालिक को देते हैं, तो आपको फॉर्म 124 में मकान मालिक के साथ अपना रिश्ता बताना होगा। यह नियम उन मामलों पर लागू होगा, जहां किराया पति या पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन या दूसरे रिश्तेदारों को दिया जा रहा है। कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी? एचआरए क्लेम करते समय वेतन पर काम करने वाले करदाताओं को मकान मालिक की ये जानकारी देनी होगी -नाम, पता, पैन, मकान मालिक से संबंध। इसका मकसद यह पक्का करना है कि रिश्तेदारों को दिए गए किराए के लिए एचआरए दावा असली और सत्यापित हो। परिवार को किराया देना अब भी मान्य नए नियम में परिवार के सदस्य को किराया देने पर रोक नहीं है। आप एचआरए छूट का दावा कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है – वैध किराया अनुबंध, किराया नगद की बजाय बैंक ट्रांसफर के जरिए देना होगा। मकान मालिक की तरफ से उस किराये की आय को अपने आयकर रिटर्न में दिखाना होगा। जानकारी न देने पर क्या होगा? अगर कोई टैक्सपेयर रिश्तेदारी की जानकारी नहीं देता या फर्जी दावा करता है, तो इसे आय की गलत रिपोर्टिंग माना जा सकता है। इसके लिए आयकर अधिनियम 2025 की धारा 439 के तहत टैक्स चोरी की राशि के 200% तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा भुगतान या मकान मालिक की आय में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस भी मिल सकता है। ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई नियमों के मसौदे में विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के खुलासे के लिए ऑडिटर के साथ कंपनियों की भी जवाबदेही बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के लिए प्रस्तावित फॉर्म 44 में ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई है। अब चार्टर्ड अकाउंटेंट को विदेशी टैक्स कटौती प्रमाणपत्र, भुगतान का प्रमाण, विनिमय दर रूपांतरण और कर संधि की पात्रता की स्वतंत्र जांच करनी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उन मामलों में चुनौतीपूर्ण हो सकता है जहां विदेशी देशों में एकीकृत कर विवरण जारी होते हैं या कर को अलग वित्त वर्ष में अदा किया जाता है। कंपनियों के लिए सख्त पैन आवेदन प्रक्रिया मसौदा प्रस्ताव में कंपनियों के लिए पैन आवेदन प्रक्रिया भी सख्त की गई है। अब आवेदन करते समय यह घोषणा देना अनिवार्य होगा कि कंपनी के पास पहले से से कोई पैन नहीं है। शाखाओं, परियोजना कार्यालयों या पूर्ववर्ती इकाइयों के नाम पर पहले से पैन होने की स्थिति में दोहराव से बचने के लिए आंतरिक जांच जरूरी होगी। झुनझुनवाला ने कहा कि यह प्रावधान डेटाबेस की शुचिता मजबूत करेगा, लेकिन आवेदकों की जिम्मेदारी भी बढ़ाएगा। ऑडिटर की आपत्ति का असर बताना होगा नए कर ऑडिट फॉर्म 26 में यह अनिवार्य किया गया है कि वैधानिक ऑडिटर की रिपोर्ट में यदि कोई प्रतिकूल टिप्पणी, अस्वीकरण या पात्रता है तो उसका आय, हानि या बुक प्रॉफिट पर प्रभाव स्पष्ट किया जाए। उदाहरण के लिए, यदि राजस्व मान्यता, शेयर मूल्यांकन या प्रावधान में कमी पर आपत्ति दर्ज होती है, तो कर ऑडिटर को देखना होगा कि इससे कर-योग्य आय को कम करके तो नहीं दिखाया गया। इसके अलावा, कर ऑडिट रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, क्लाउड या सर्वर का विवरण, आईपी पता, डेटा भंडारण का देश और भारत में स्थित बैकअप सर्वर का पता भी बताना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रावधानों से अनुपालन की लागत बढ़ सकती है लेकिन इससे पारदर्शिता और जवाबदेही में मजबूती आने की संभावना है।

MEGHALAYA ASSEMBLY: मोदी की इजरायल यात्रा पर कांग्रेस का हमला, नेतन्याहू से मुलाकात को बताया …

PM ISRAEL VISIT: नई दिल्ली। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इजरायल यात्रा को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी ने कहा कि ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायली नेतृत्व की आलोचना हो रही है, तब भारतीय प्रधानमंत्री की यह यात्रा कई नैतिक सवाल खड़े करती है। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री की इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू से प्रस्तावित मुलाकात को लेकर भी आपत्ति जताई और गाजा की स्थिति पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। MEGHALAYA ASSEMBLY: मेघालय विधानसभा में अनोखा दृश्य: विधायक पत्नी ने CM पति से ही पूछ लिया हिसाब जयराम रमेश ने ऐतिहासिक रुख का दिलाया हवाला कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत का इतिहास फिलिस्तीनी मुद्दे पर संतुलित और सिद्धांत आधारित रहा है, लेकिन मौजूदा कूटनीतिक रुख उस परंपरा से अलग दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गाजा में भारी तबाही और वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार जैसे मुद्दों पर भारत को अधिक स्पष्टता दिखानी चाहिए।रमेश ने भारत के पुराने रुख की याद दिलाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 1960 के गाजा दौरे और बाद के दशकों में फिलिस्तीन के समर्थन से जुड़े निर्णयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने 1988 में फिलिस्तीन को औपचारिक मान्यता देकर वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र नीति का परिचय दिया था। प्रियंका गांधी ने गाजा का मुद्दा उठाने की अपील की कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के दौरान इजरायली संसद नेसेट को संबोधित करते हुए गाजा पट्टी की मानवीय स्थिति का जिक्र करेंगे और निर्दोष नागरिकों के लिए न्याय की बात उठाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत का ऐतिहासिक दायित्व रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति, न्याय और मानवीय मूल्यों की वकालत करता रहे। सरकार का फोकस: रणनीतिक और द्विपक्षीय सहयोग प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापार सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से हो रही है। 2017 में मोदी की पहली इजरायल यात्रा के दौरान संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया गया था, जिसके बाद कृषि, रक्षा तकनीक, जल प्रबंधन और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।राजनीतिक बनाम कूटनीतिक बहस इस मुद्दे ने एक बार फिर भारत की पश्चिम एशिया नीति को लेकर घरेलू राजनीतिक बहस तेज कर दी है—एक तरफ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देने की दलील है, तो दूसरी ओर मानवीय और ऐतिहासिक दृष्टिकोण को बनाए रखने की मांग उठ रही है।

MEGHALAYA ASSEMBLY: मेघालय विधानसभा में अनोखा दृश्य: विधायक पत्नी ने CM पति से ही पूछ लिया हिसाब

MEGHALAYA ASSEMBLY: नई दिल्ली। मेघालय विधानसभा में उस समय दिलचस्प स्थिति बन गई, जब सत्तारूढ़ नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) की विधायक मेहताब चांदी ए संगमा ने प्रश्नकाल के दौरान अपने ही पति और मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा से विकास योजनाओं की प्रगति पर सीधे सवाल कर दिए।सदन में नीतिगत मुद्दे पर हुई यह औपचारिक बहस चर्चा का विषय बन गई और इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही का अनोखा उदाहरण माना जा रहा है। पशुपालन और मत्स्य शिक्षा परियोजनाओं पर उठाए सवाल गांबेग्रे क्षेत्र की विधायक ने वर्ष 2022 में स्वीकृत पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों की प्रगति पर जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि प्रस्तावित एक वेटरनरी कॉलेज, दो फिशरीज कॉलेज और एक डेयरी कॉलेज की स्थापना में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने राज्य के पशु चिकित्सा प्रशिक्षण केंद्रों में कर्मियों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे पशुधन आधारित आजीविका प्रभावित हो रही है। मुख्यमंत्री ने बताई देरी की वजह मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि परियोजनाएं राज्य के पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं, लेकिन भूमि चयन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और मानव संसाधन योजना जैसी प्रक्रियाओं के कारण समय लगा। उन्होंने बताया कि: वेटरनरी कॉलेज की स्थापना पर लगभग 334 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। इसके लिए किर्डेमकुलाई (री-भोई जिला) में करीब 800 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। संस्थान में 19 विभाग प्रस्तावित किए गए हैं। सरकार का भरोसा—अब तेज होगी प्रक्रिया मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि 2022 में स्वीकृत इन संस्थानों की स्थापना की प्रक्रिया को अब गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी पशुपालन और इससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है, इसलिए इन परियोजनाओं का समय पर पूरा होना अत्यंत आवश्यक है। मानव संसाधन की कमी को लेकर भी उन्होंने रिक्त पदों को शीघ्र भरने और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने का भरोसा दिलाया। जवाबदेही की मिसाल बना घटनाक्रम सदन में यह मामला इसलिए सुर्खियों में रहा क्योंकि एक विधायक ने निजी संबंधों से अलग हटकर सरकार से सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा और संस्थागत जवाबदेही का सकारात्मक संकेत बताया है।