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भोपाल में संगठित गिरोह का खुलासा: बेबी सिटर की नौकरी के बहाने युवतियों को जाल में फंसाने का आरोप

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कथित तौर पर सक्रिय एक संगठित गिरोह पर युवतियों को नौकरी का झांसा देकर शोषण और देह व्यापार में धकेलने के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िताओं के मुताबिक आफरीन और अमरीन नाम की दो बहनें इस नेटवर्क की मास्टरमाइंड बताई जा रही हैं जो कथित रूप से बेबी सिटर की नौकरी का लालच देकर लड़कियों को अपने संपर्क में लाती थीं। पीड़िताओं में 30 वर्षीय सलोनी बदला हुआ नाम और 22 वर्षीय श्रीधी बदला हुआ नाम सामने आई हैं। सलोनी ने बताया कि वह दो बच्चों की मां है और आर्थिक तंगी के कारण काम की तलाश में भोपाल आई थी। इवेंट कैटरिंग का काम अस्थायी था इसलिए उसे स्थायी नौकरी की जरूरत थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात आशिमा मॉल में आफरीन से कराई गई जहां उसे बच्ची की देखरेख के नाम पर नौकरी की पेशकश की गई। सलोनी का आरोप है कि शुरुआत में कम वेतन पर काम कराया गया फिर घर में रहने का दबाव बनाया गया। कुछ समय बाद उसे पार्टियों में ले जाया जाने लगा जहां एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर पेय पदार्थ में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया और उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता का कहना है कि इस घटना का वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया गया और देह व्यापार के लिए मजबूर किया गया। इसी तरह श्रीधी को भी कथित तौर पर बेहतर कमाई और सुविधाओं का लालच देकर जोड़ा गया। आरोप है कि उसे अलग-अलग शहरों में भेजा गया और जबरन संबंध बनाने के लिए दबाव डाला गया। पीड़िताओं का दावा है कि आरोपित महिलाएं उन्हें धार्मिक गतिविधियों के लिए भी प्रेरित करती थीं और विश्वास में लेने की कोशिश करती थीं। सलोनी के अनुसार इस नेटवर्क में कई अन्य लड़कियां भी फंसी थीं लेकिन बदनामी और सामाजिक दबाव के कारण सामने नहीं आ पा रहीं। आरोप है कि यह गिरोह कॉलेज छात्राओं से लेकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की युवतियों को निशाना बनाता था। करीब एक साल पहले दोनों बहनों के अहमदाबाद शिफ्ट होने की जानकारी सामने आई। बाद में पीड़िताओं ने हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। बाग सेवनिया थाने में एफआईआर दर्ज होने से पहले कई दिनों तक पूछताछ और प्रक्रिया चली। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संभावित मानव तस्करी ब्लैकमेल और दुष्कर्म के पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल पुलिस आधिकारिक रूप से जांच जारी होने की बात कह रही है। 

उत्तराखंड का रहस्यमयी धर्मेश्वर महादेव मंदिर जहां मृत्यु के बाद लगती है यमराज की अदालत

नई दिल्ली। भारतीय परंपराओं में यह मान्यता प्रचलित है कि मृत्यु के बाद हर मनुष्य को अपने कर्मों का हिसाब देना होता है। जीवन में किए गए अच्छे और बुरे कर्म ही उसके अगले जन्म और भाग्य का निर्धारण करते हैं। लेकिन उत्तराखंड में एक ऐसा प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर मौजूद है जिसके बारे में कहा जाता है कि मृत्यु के बाद यहीं यमराज की अदालत लगती है और मनुष्य के कर्मों का लेखा जोखा किया जाता है। हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड स्थित Dharmeshwar Mahadev Temple की जो चौरासी मंदिर परिसर के भीतर स्थित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह स्थान केवल एक शिव मंदिर नहीं बल्कि कर्मों के अंतिम निर्णय का प्रतीक स्थल माना जाता है। यहां गर्भगृह में मटके के आकार का शिवलिंग स्थापित है जिसे भगवान शिव का धर्मराज स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि यही रूप मृत्यु के बाद जीवात्मा के कर्मों का निर्णय करता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति जीवनकाल में इस मंदिर के दर्शन नहीं करता उसे मृत्यु के बाद यहां आकर भगवान धर्मेश्वर महादेव का सामना करना पड़ता है। इसीलिए कई श्रद्धालु मानते हैं कि जीते जी यहां दर्शन करने से कर्मों के बोझ से मुक्ति मिल सकती है। विशेष रूप से भाई दूज के अवसर पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है। बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु और सुख समृद्धि की कामना के लिए विशेष पूजा अर्चना करती हैं। स्थानीय कथाओं के अनुसार भगवान शिव यहां साक्षात यमराज के रूप में विराजित हैं और उनके साथ चित्रगुप्त भी उपस्थित रहते हैं जो मनुष्यों के कर्मों का लेखा जोखा तैयार करते हैं। मंदिर के पीछे एक स्थान चित्रगुप्त को समर्पित माना जाता है जहां एक काली शिला और पत्थर पर बनी लकीरें दिखाई देती हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यही प्रतीकात्मक व्यवस्था यह तय करती है कि आत्मा को स्वर्ग प्राप्त होगा या नर्क। मंदिर से कुछ दूरी पर ढाई पौड़ी नामक एक स्थान भी स्थित है। मान्यता है कि जिन लोगों की अकाल मृत्यु होती है उन्हें अपने शेष जीवन काल का समय यहीं व्यतीत करना पड़ता है। इसलिए धर्मेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन करने वाले भक्त इन तीनों स्थलों के दर्शन को पूर्ण तीर्थ माना करते हैं। मंदिर के इतिहास को लेकर भी अनेक कथाएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि इसी स्थान पर महाराज कृष्ण गिरि ने कठोर साधना की थी और इसे एक पवित्र तीर्थस्थल के रूप में स्थापित किया। समय के साथ यह स्थान आस्था और रहस्य का केंद्र बन गया। धर्मेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि कर्म और न्याय की उस अवधारणा का प्रतीक है जो भारतीय संस्कृति की गहराई में रची बसी है। यहां आने वाले श्रद्धालु जीवन के कर्मों पर चिंतन करते हैं और सद्कर्म की प्रेरणा लेकर लौटते हैं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जैसलमेर एयरबेस पर स्वदेशी ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में भरी उड़ान, 25 मिनट का मिशन पूरा

जैसलमेर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार 27 फरवरी 2026 को राजस्थान के जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर HAL Prachand प्रचंड में उड़ान भरकर भारतीय वायुसेना की क्षमताओं का अनुभव किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह उड़ान राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराने वाली रही। राष्ट्रपति इससे पहले वर्ष 2023 में सुखोई Su-30MKI और 2025 में डसॉल्ट राफेल में भी उड़ान भर चुकी हैं। यह मिशन दो एलसीएच लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर के फॉर्मेशन में संचालित किया गया। राष्ट्रपति ने पहले विमान में ग्रुप कैप्टन नयन शांतिलाल बहुआ के साथ उड़ान भरी जबकि दूसरे विमान में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और ग्रुप कैप्टन ए. महेंद्र सवार थे। लगभग 25 मिनट तक चले इस मिशन में राष्ट्रपति ने गडिसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से उड़ान भरी। अभ्यास के दौरान एक टैंक लक्ष्य पर आक्रमण का प्रदर्शन भी किया गया। उड़ान के बाद राष्ट्रपति ने आगंतुक पुस्तिका में लिखा भारत के स्वदेशी रूप से विकसित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरना मेरे लिए एक समृद्ध अनुभव रहा है। इस उड़ान ने मुझे राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराया है। मैं भारतीय वायु सेना और वायु सेना स्टेशन जैसलमेर की पूरी टीम को इस उड़ान के सफल आयोजन के लिए बधाई देती हूं। राष्ट्रपति शाम को जैसलमेर में आयोजित भारतीय वायु सेना के वायु शक्ति अभ्यास का भी अवलोकन करेंगी। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार स्वदेशी रक्षा उपकरणों के साथ राष्ट्रपति की यह उड़ान आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की बढ़ती सामरिक क्षमता का प्रतीक है।

जामनगर में अर्जुन तेंदुलकर के प्री वेडिंग फंक्शन शुरू, नीता मुकेश अंबानी ने की मेजबानी, भावुक हुए सचिन

नई दिल्ली। दिग्गज क्रिकेटर Sachin Tendulkar के बेटे अर्जुन तेंदुलकर की शादी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अर्जुन जल्द ही अपनी मंगेतर सानिया चंडोक के साथ विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं। शादी से पहले जामनगर में प्री वेडिंग समारोह आयोजित किया गया जिसकी मेजबानी देश के जाने माने उद्योगपति Mukesh Ambani और Nita Ambani ने अपने निवास पर की। इस खास मौके पर दोनों परिवारों के करीबी सदस्य और मित्र मौजूद रहे। अर्जुन और सानिया की शादी 5 मार्च को मुंबई में आयोजित की जाएगी लेकिन उससे पहले जामनगर में हुए इस आयोजन की झलकियां सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। समारोह में सचिन अपनी पत्नी अंजलि और बेटे अर्जुन के साथ पहुंचे। दुल्हन बनने जा रहीं सानिया चंडोक का परिवार भी इस खास अवसर पर शामिल हुआ। कार्यक्रम के दौरान नीता अंबानी ने स्वागत भाषण देते हुए नवयुगल को नए जीवन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जामनगर को अपने परिवार के लिए बेहद खास स्थान बताया और कहा कि यहां कई यादगार पारिवारिक अवसर जुड़े रहे हैं। अंबानी परिवार ने पूरे स्नेह और गर्मजोशी के साथ मेहमानों का स्वागत किया। समारोह में Anant Ambani और Radhika Merchant के साथ ही Akash Ambani और Shloka Mehta भी मौजूद रहे। इस खास शाम का सबसे भावुक पल तब आया जब सचिन तेंदुलकर ने अपने बेटे के लिए मंच से संबोधन दिया। उन्होंने अंबानी परिवार के आतिथ्य के लिए आभार जताते हुए कहा कि इससे बेहतर आशीर्वाद देने वाले लोग और जगह मिलना मुश्किल है। अपने बेटे के बारे में बात करते हुए सचिन भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि जब बेटा किसी लड़की को घर लाकर परिवार से मिलवाता है तब एहसास होता है कि वह बड़ा हो गया है। यह पल उनके लिए गर्व और भावनाओं से भरा हुआ था। सचिन ने आगे कहा कि अर्जुन और सानिया एक दूसरे से बेहद प्यार करते हैं और उन्हें इस बात की खुशी है कि उनके बेटे ने जीवनसाथी के रूप में एक खास और समझदार साथी चुना है। समारोह में मौजूद मेहमानों ने तालियों के साथ इस पल का स्वागत किया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में समारोह की भव्यता साफ नजर आ रही है। नीता अंबानी पारंपरिक साड़ी और हीरलूम ज्वेलरी में दिखीं जबकि सानिया सिल्वर साड़ी में सादगी और गरिमा के साथ नजर आईं। सचिन और अर्जुन कढ़ाईदार बंदगला में बेहद आकर्षक लग रहे थे। बताया जा रहा है कि इससे पहले सचिन तेंदुलकर ने प्रधानमंत्री को भी बेटे की शादी का व्यक्तिगत निमंत्रण दिया था जिससे इस शादी को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं। अब सभी की नजरें 5 मार्च को होने वाली भव्य शादी पर टिकी हैं जहां खेल और उद्योग जगत की कई बड़ी हस्तियां शामिल हो सकती हैं।

भोपाल में 27 क्विंटल मावा जब्त: टोल प्लाजा पर खाद्य सुरक्षा टीम की बड़ी कार्रवाई, मिलावट की आशंका

भोपाल। भोपाल के खजूरी सड़क स्थित टोल प्लाजा के पास खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शुक्रवार को एक वाहन से लगभग 27 क्विंटल मावा जब्त किया। इस कार्रवाई के दौरान विभाग ने मावा के साथ 45 किलो पनीर भी बरामद किया। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि मावा और पनीर में मिलावट की आशंका है, इसलिए इसे आगे की जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया है। इसकी बाजार कीमत लगभग 6 लाख रुपये आंकी गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग की यह कार्रवाई होली के त्योहार से पहले की गई है। त्योहार के चलते मिठाई और डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में विभाग ने होटलों, रेस्टोरेंट और डेयरी संचालकों पर विशेष निगरानी रखी हुई है। विभाग के अमले ने लगातार दुकानों, वाहनों और गोदामों में छापेमारी कर नमूने इकट्ठा किए हैं। इस दौरान मावा और पनीर के पांच-पांच नमूने राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद मिलावट पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य आम जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है। अधिकारियों के अनुसार पिछले एक महीने में विभाग की टीम ने भोपाल के विभिन्न इलाकों में नमकीन, मिठाई, पनीर, तेल, मैदा, बेसन सहित अन्य खाद्य पदार्थों के कुल 234 नमूने लिए हैं। इन नमूनों की जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे संदिग्ध या मिलावटयुक्त खाद्य पदार्थों की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें। विभाग ने कहा कि त्योहारों के दौरान गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। मावा और पनीर जैसे डेयरी उत्पादों में मिलावट होने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। भोपाल में यह कार्रवाई विभाग की सतर्कता और त्योहारों से पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के प्रति जागरूकता को दर्शाती है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे समय पर मिलावट रोकने के लिए नियमित जांच और वाहन चेकिंग जरूरी है। साथ ही, टोल प्लाजा जैसी संवेदनशील जगहों पर कार्रवाई से अवैध व्यापारियों पर भी नियंत्रण रखा जा सकता है। इस बड़ी बरामदगी के साथ ही विभाग ने चेतावनी दी है कि मिलावट और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का व्यापार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता से आग्रह किया गया है कि वे अपने बच्चों और परिवार की सुरक्षा के लिए केवल प्रमाणित और भरोसेमंद उत्पाद ही खरीदें।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत रत्न नानाजी देशमुख की पुण्य तिथि पर किया नमन

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राष्ट्रसेवक और महान समाज सुधारक नानाजी देशमुख की पुण्य तिथि पर उन्हें विनम्र नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि भारत रत्न से सम्मानित स्वर्गीय नानाजी देशमुख ने देश की प्रगति के लिए ग्रामीण विकास शिक्षा और गरीब कल्याण को आधार बनाया। उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की धारा पहुंचाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नानाजी देशमुख का कृतित्व उनके विचार और दूरदर्शी दृष्टिकोण राष्ट्र के नव निर्माण की दिशा में सदैव प्रेरणादायी रहेंगे। उन्होंने ग्रामोदय से राष्ट्रोदय की परिकल्पना को साकार करने के लिए जो कार्य किए वे आज भी प्रासंगिक हैं और आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देते रहेंगे।डॉ. यादव ने ईश्वर से प्रार्थना की कि हम सभी नानाजी देशमुख के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।

2 मार्च से प्रदेशभर में बसें थमने को तैयार: सुगम लोक परिवहन सेवा के विरोध में 29 हजार ऑपरेटरों की हड़ताल, होली में यात्रियों की मुश्किलें बढ़ेंगी

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में 2 मार्च से लगभग 29 हजार बसों के संचालन पर संकट गहरा गया है। मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा की योजना के विरोध में प्रदेश भर के बस ऑपरेटर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने वाले हैं। उज्जैन में ही करीब 5 हजार बसें बंद रहने की संभावना है। यह हड़ताल विशेष रूप से होली की छुट्टियों के समय हो रही है, जब बड़ी संख्या में लोग अपने घर जाने के लिए बस सेवा पर निर्भर होते हैं, जिससे यात्रियों की परेशानियां बढ़ सकती हैं। बस संचालकों ने अपनी मांगों के समर्थन में बसों पर हड़ताल के पोस्टर लगाए हैं। मप्र बस ऑनर्स एसोसिएशन ने सरकार को पहले भी कई बार अपनी चिंताएं और विरोध पत्र सौंपे हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा लागू होने पर ऑपरेटरों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और कई लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसके अलावा, यदि नई नीति लागू होती है तो बस किराया लगभग 35 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जिससे आम यात्रियों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ेगा। प्राइम रूट बस संगठन के अध्यक्ष पंडित गोविंद शर्मा ने स्पष्ट किया कि सरकार ने 24 दिसंबर को मोटर अधिनियम के तहत नई कंपनी बनाकर बस संचालन की घोषणा की है। नई नीति के अनुसार, जो भी कंपनी टेंडर में अधिक राशि देगी, वही बस सेवा का संचालन करेगी। यह कदम ऑपरेटरों के लिए अनुचित और अस्तित्व संकट का कारण बन सकता है। अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो 2 मार्च से प्रदेश भर में बसों के पहिए थम जाएंगे। हालांकि, सरकार का दावा है कि अप्रैल में नई कंपनी के तहत बसों का संचालन शुरू होगा। इसके लिए बसों को अनुबंधित (लीज पर लेने) किया जाएगा और संचालन चरणबद्ध तरीके से होगा। इंदौर संभाग में बस संचालन एआइसीटीएसएल के हाथ में रहेगा, जबकि अन्य संभागों में अलग-अलग सहायक कंपनियां जिम्मेदारी संभालेंगी। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से यात्रियों को सुरक्षित, अनुशासित और नियमित बस सेवा मिलेगी, और ऑपरेटरों की आय भी मौजूदा व्यवस्था से बेहतर होगी। बस ऑपरेटरों और सरकार के बीच यह टकराव यात्रियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञ और यात्री संगठन हड़ताल से पहले वैकल्पिक परिवहन के लिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। निजी वाहन या ट्रेन के जरिए यात्रा की संभावना बढ़ सकती है। विशेषकर होली के समय यह हड़ताल लाखों यात्रियों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है। इस पूरे मामले से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में परिवहन नीति लागू करने से पहले सरकार और ऑपरेटरों के बीच संवाद और समाधान जरूरी है। दोनों पक्षों को साझा समाधान निकालना होगा ताकि यात्रियों की परेशानियां कम से कम हों। हड़ताल से आम जनता पर भारी असर पड़ सकता है, इसलिए प्रशासन को भी यातायात व्यवस्था के वैकल्पिक इंतजाम करने की आवश्यकता है। यदि बस ऑपरेटरों की मांगें नहीं मानी गईं तो 2 मार्च से प्रदेशभर में बस संचालन ठप रह सकता है, जिससे होली के समय यात्रा करने वालों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। यात्रियों को अपने यात्रा प्लान में बदलाव करने और वैकल्पिक साधनों के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा रही है।

1 मार्च से सख्ती: सिम कार्ड के बिना नहीं चलेंगे WhatsApp और Telegram? सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से किया इनकार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सिम बाइंडिंग नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। 1 मार्च से लागू होने जा रहे इन नए प्रावधानों के तहत यदि मोबाइल फोन में वह सक्रिय सिम कार्ड मौजूद नहीं है जिससे मैसेजिंग ऐप रजिस्टर है तो WhatsApp Telegram और Signal जैसे ऐप्स का उपयोग सीमित या बंद हो सकता है। सरकार का कहना है कि यह कदम साइबर फ्रॉड फर्जी नंबरों और डिजिटल धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा पहले की नीति के तहत सिम बाइंडिंग नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी।क्या होगा बड़ा बदलाव? नए नियमों के अनुसार: जिस सिम से अकाउंट रजिस्टर है उसका मोबाइल में सक्रिय रहना जरूरी होगा। यदि सिम मौजूद नहीं है तो ऐप की सेवाएं बाधित हो सकती हैं। WhatsApp Web या कंप्यूटर लॉगिन हर 6 घंटे में स्वतः लॉगआउट हो जाएगा। दोबारा उपयोग के लिए QR कोड स्कैन करना होगा। भारत में करोड़ों यूजर्स एक ही नंबर से कई डिवाइस पर WhatsApp चलाते हैं। ऐसे में जिन यूजर्स ने अलग अलग डिवाइस पर अकाउंट एक्टिव कर रखा है या जो बार बार सिम बदलते रहते हैं वे सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। छोटे कारोबारियों पर असर विशेषज्ञों का अनुमान है कि 60–80% तक छोटे व्यवसाय जो WhatsApp आधारित संचार और ऑर्डर मैनेजमेंट पर निर्भर हैं उन्हें शुरुआती दिनों में ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर वे बिजनेस जो एक नंबर को कई सिस्टम पर चलाते हैं उन्हें हर कुछ घंटों में दोबारा लॉगिन की प्रक्रिया अपनानी होगी। सिर्फ WhatsApp नहीं व्यापक असर यह बदलाव केवल एक ऐप तक सीमित नहीं है। Telegram Signal और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म भी इसके दायरे में बताए जा रहे हैं। यानी यह डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम में एक बड़ा नीतिगत परिवर्तन साबित हो सकता है। फिलहाल सरकार अपने फैसले पर अडिग नजर आ रही है। 1 मार्च की डेडलाइन को लेकर टेक कंपनियों और करोड़ों यूजर्स की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नियमों का क्रियान्वयन किस स्तर पर और किस सख्ती से किया जाता है और आम यूजर्स के डिजिटल अनुभव में कितना बदलाव आता है।

Child Drowns In Well: घर के बाहर खेल रहा था मासूम, कुएं में गिरने से 2 साल के बच्चे की मौत

Ashoknagar Child Drowns In Well Accident

HIGHLIGHTS: अशोकनगर के पीपलखेड़ा गांव में हादसा घर के बाहर खेलते समय कुएं में गिरा 2 साल का बच्चा तलाश के दौरान कुएं में मिला मासूम जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया गांव में मातम का माहौल Child Drowns In Well: अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में गुरुवार शाम एक दर्दनाक हादसे में दो साल के मासूम बच्चे की कुएं में डूबने से मौत हो गई। घटना बहादुरपुर थाना क्षेत्र के पीपलखेड़ा गांव की है, जहां बच्चा घर के बाहर खेलते समय अचानक लापता हो गया और बाद में पास के कुएं में मिला। BHIND HIGHWAY ENCROACHMENT: भिंड में सड़क सुरक्षा पर सख्ती: शहर में 60 किमी/घंटा स्पीड लिमिट, हाईवे होंगे अतिक्रमण मुक्त खेलते-खेलते कुएं में गिरा जानकारी के अनुसार, रुद्राक्ष यादव (2) पुत्र शिवेंद्र यादव अपने घर के बाहर खेल रहा था। खेलते-खेलते वह घर से कुछ दूरी पर स्थित खुले कुएं के पास पहुंच गया और असंतुलित होकर उसमें गिर गया। 315 एमवीए ट्रांसफॉर्मर से बदली औद्योगिक तस्वीर, जापानी प्रतिनिधिमंडल ने सराहा प्रोजेक्ट काफी देर तक नहीं दिखा तो शुरू हुई तलाश जब परिजनों को काफी देर तक बच्चा दिखाई नहीं दिया, तो उन्होंने आसपास तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान परिजनों ने पास के कुएं में झांका, जहां रुद्राक्ष पानी में पड़ा मिला। उसे तुरंत बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों के लिए बड़ी खुशखबरी, रेलवे में मिलेगा रोजगार और द्वितीय करियर का अवसर अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया परिजन बच्चे को तुरंत निजी वाहन से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। देर शाम पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। बताया गया है कि परिवार गांव से दूर खेतों पर रहता है और घर के पास ही वह कुआं स्थित है, जहां यह हादसा हुआ। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है।

3 साल की अनिका के लिए समय से दौड़: 13.5 किलो से पहले लगना है 9 करोड़ का इंजेक्शन, अब भी चाहिए 3.40 करोड़

इंदौर। तीन साल दो महीने की मासूम अनिका शर्मा इन दिनों जिंदगी की सबसे कठिन जंग लड़ रही है। वह दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप 2 से पीड़ित है। डॉक्टरों ने साफ कहा है कि उसे 9 करोड़ रुपए का विशेष इंजेक्शन 13.5 किलो वजन होने से पहले लगना जरूरी है। फिलहाल उसका वजन 10.5 किलो है। अगर वजन तय सीमा से ऊपर चला गया तो इलाज का यह आखिरी मौका भी हाथ से निकल सकता है। अनिका के माता पिता पिछले तीन महीनों से उसका वजन नियंत्रित रखने के लिए सख्त डाइट फॉलो करवा रहे हैं। मां सरिता शर्मा बताती हैं कि बच्ची को रोटी चावल या वजन बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ नहीं दिए जा रहे। उसे पपीता सीमित फ्रूट जूस चाय बिस्किट और मखाना बादाम अखरोट से बना हलवा दिया जाता है ताकि पेट भी भरे और वजन भी न बढ़े। कई बार अनिका सुबह से शाम तक भूखी रह जाती है क्योंकि वह रोज एक जैसा खाना खाकर परेशान हो चुकी है। इलाज के लिए जो इंजेक्शन लगना है वह अमेरिकी कंपनी बनाती है और बेहद महंगा है। दिल्ली स्थित AIIMS से मिले प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार इलाज के दो मापदंड थे पहला दो साल की उम्र से पहले इंजेक्शन लगना चाहिए था जो निकल चुका है; दूसरा 13.5 किलो वजन से पहले इंजेक्शन लगना अनिवार्य है। अब यही अंतिम उम्मीद बची है। परिवार नवंबर से क्राउड फंडिंग अभियान चला रहा है। अब तक 5 करोड़ 60 लाख रुपए जुटाए जा चुके हैं लेकिन 3 करोड़ 40 लाख रुपए अभी और चाहिए। अनिका के पिता प्रवीण शर्मा बताते हैं कि इंदौर के अलावा रतलाम बदनावर बड़नगर में कैंप लगाकर सहयोग मांगा गया है और अब खंडवा व उज्जैन में अभियान की तैयारी है। कई लोगों और हस्तियों ने भी वीडियो संदेश जारी कर मदद की अपील की है। बीमारी की गंभीरता समझाते हुए एमजीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. हेमंत जैन बताते हैं कि एसएमए एक दुर्लभ न्यूरो मस्क्यूलर जेनेटिक बीमारी है जिसमें रीढ़ की हड्डी की मोटर नर्व सेल्स धीरे धीरे नष्ट होने लगती हैं। दिमाग से मांसपेशियों तक सिग्नल नहीं पहुंच पाते जिससे बच्चा शरीर पर नियंत्रण खोने लगता है। समय के साथ बैठना चलना निगलना और सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी की पहचान गर्भावस्था में भी संभव है। समय रहते इलाज मिल जाए तो स्थिति बेहतर हो सकती है लेकिन देरी होने पर नष्ट हुई कोशिकाएं दोबारा जीवित नहीं की जा सकतीं। इंजेक्शन केवल नई कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करता है। अनिका की मां कहती हैं अगर उसका वजन बढ़ गया तो हमारी सारी मेहनत बेकार हो जाएगी। परिवार को अब भी समाज से उम्मीद है कि शेष राशि जुटाकर मासूम की जिंदगी बचाई जा सके।