डाइट पर बचपन, 9 करोड़ की उम्मीद: अनिका की जिंदगी के लिए समाज से गुहार

नई दिल्ली। इंदौर की तीन साल दो महीने की अनिका शर्मा दुर्लभ जेनेटिक बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 से जूझ रही है और उसके इलाज के लिए समय के खिलाफ जंग जारी है। डॉक्टरों के अनुसार यह बीमारी रीढ़ की हड्डी की मोटर नर्व कोशिकाओं को धीरे-धीरे नष्ट करती है, जिससे मांसपेशियां कमजोर पड़ती जाती हैं और बैठने-चलने से लेकर सांस लेने तक में दिक्कत होने लगती है। अनिका के इलाज के लिए जीन थेरेपी का एक विशेष इंजेक्शन जरूरी है, जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपए बताई गई है। यह दवा स्विट्जरलैंड की फार्मा कंपनी Novartis बनाती है और इसे तय वजन सीमा के भीतर लगाना आवश्यक होता है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि इंजेक्शन 13.5 किलो वजन से पहले लगना चाहिए। फिलहाल अनिका का वजन लगभग 10.5 किलो है। इसी कारण पिछले तीन महीनों से परिवार डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उसका नियंत्रित आहार दे रहा है, ताकि वजन सीमा पार न हो और इलाज का अवसर बना रहे। परिवार का कहना है कि उम्र से जुड़ी एक समयसीमा निकल चुकी है, इसलिए अब वजन की शर्त ही आखिरी उम्मीद है। इलाज के लिए बड़े पैमाने पर धनराशि की जरूरत है। परिजन अब तक क्राउड फंडिंग और दान के जरिए करीब 5 करोड़ 60 लाख रुपए जुटा चुके हैं, जबकि लगभग 3 करोड़ 40 लाख रुपए अभी और चाहिए। अनिका के माता-पिता अलग-अलग शहरों में जाकर लोगों से मदद की अपील कर रहे हैं। सांस लेने में दिक्कत और संक्रमण के खतरे के बावजूद बच्ची इलाज की उम्मीद में संघर्ष कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार SMA एक दुर्लभ बीमारी है, जिसमें जीन थेरेपी के जरिए शरीर में दोषपूर्ण जीन को बदलने या उसकी भरपाई करने की कोशिश की जाती है। चूंकि मरीजों की संख्या कम होती है और रिसर्च व ट्रायल की लागत बहुत अधिक होती है, इसलिए दवा महंगी है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज मिल जाए तो बीमारी की प्रगति को रोका जा सकता है, लेकिन देर होने पर नष्ट हो चुकी कोशिकाओं को वापस नहीं लाया जा सकता। अब अनिका की जिंदगी समाज के सहयोग और समय पर जुटने वाली राशि पर टिकी है। हर गुजरता दिन परिवार के लिए उम्मीद और चिंता, दोनों साथ लेकर आ रहा है।
बिकिनी पहनी दो महिलाओं के बीच लेटे दिखे स्टीफन हॉकिंग

वॉशिंगटन। अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के एक नए बैच के सार्वजनिक होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर बहस छिड़ गई है। इन दस्तावेजों के साथ सामने आई एक तस्वीर में प्रख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग दिखाई दे रहे हैं, जिससे सोशल मीडिया और मीडिया जगत में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। तस्वीर में हॉकिंग दो महिलाओं के बीच लेटे हुए नजर आते हैं। दोनों महिलाओं ने स्विमवियर पहन रखा है और उनकी पहचान छिपाने के लिए चेहरों को काले रंग से ढका गया है। तीनों के हाथों में पेय पदार्थ दिखाई दे रहे हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि फोटो कब और किस संदर्भ में ली गई थी। अमेरिकी मीडिया, जिनमें New York Post भी शामिल है, ने इस तस्वीर का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी पृष्ठभूमि और परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। परिवार ने आरोपों को बताया निराधारहॉकिंग के परिवार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रोफेसर हॉकिंग ने 20वीं सदी में भौतिकी के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया और वे मोटर न्यूरॉन बीमारी से दशकों तक जूझते रहे। बयान में किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार के संकेतों को “पूरी तरह गलत” बताया गया। स्टीफन हॉकिंग का 2018 में 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। वे लंबे समय तक गंभीर बीमारी के बावजूद वैज्ञानिक अनुसंधान और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे। 2006 के सम्मेलन से जुड़ा संदर्भरिपोर्ट्स के अनुसार, हॉकिंग उन वैज्ञानिकों के समूह में शामिल थे जिन्होंने मार्च 2006 में कैरिबियन क्षेत्र के सेंट थॉमस द्वीप पर आयोजित एक सम्मेलन में भाग लिया था। यह कार्यक्रम एपस्टीन द्वारा वित्तपोषित बताया जाता है और उस समय हुआ था जब उनके खिलाफ बाद में सामने आए आपराधिक आरोप सार्वजनिक नहीं हुए थे। पुराने आरोपों का भी हुआ जिक्रदस्तावेजों में अमेरिकी नागरिक वर्जीनिया गिउफ्रे के पूर्व आरोपों का भी उल्लेख मिलता है, जिनमें उन्होंने एपस्टीन नेटवर्क से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों पर सवाल उठाए थे। हालांकि, हॉकिंग के खिलाफ किसी भी आपराधिक कृत्य का आधिकारिक आरोप कभी सिद्ध नहीं हुआ।
विदेश नीति पर फोकस, इजरायल यात्रा के अनुभव साझा करते हुए पीएम का बड़ा संदेश

नई दिल्ली। दो दिवसीय इजरायल दौरे से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत–इजरायल साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत होगी। उन्होंने दौरे की झलकियों वाला एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से स्वागत, भारतीय समुदाय से मुलाकात, सांस्कृतिक कार्यक्रम और इजरायली संसद में उनके संबोधन के दृश्य शामिल हैं। संसद में संबोधन से लेकर सर्वोच्च सम्मान तकवीडियो में इजरायली संसद में पीएम के स्वागत, तालियों की गूंज और दोनों देशों के बीच हुए अहम समझौतों के हस्ताक्षर के पल दिखाए गए। प्रधानमंत्री ने लिखा, “इजरायल की खास यात्रा की कुछ खास बातें… अच्छी बातचीत और मजबूत सहयोग। हमारी पार्टनरशिप आगे बढ़ती रहे!” रक्षा, तकनीक और व्यापार में नई गतिदौरे के दौरान रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) और भारत-इजरायल-यूएई-यूएसए (आई2यू2) पहल को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। अहम एमओयू: खनिज, समुद्री विरासत और यूपीआईखनिज अन्वेषण में उन्नत जियोफिजिकल और एआई तकनीक के उपयोग पर सहयोग के लिए समझौता हुआ। गुजरात के लोथल स्थित नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के विकास को लेकर भी सहमति बनी, जिससे साझा समुद्री विरासत को बढ़ावा मिलेगा। डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में बड़ी पहल के तहत एनपीसीआई इंटरनेशनल और इजरायल की एमएएसएवी के बीच यूपीआई को लागू करने पर समझौता हुआ। इससे दोनों देशों के बीच सीमा-पार रेमिटेंस को आसान बनाने की दिशा में कदम बढ़ेगा। कृषि, शिक्षा और वित्तीय सहयोगभारत-इजरायल इनोवेशन सेंटर फॉर एग्रीकल्चर की स्थापना के लिए आईसीएआर और एमएएसएचएवी के बीच समझौता हुआ। मत्स्य पालन और जलीय कृषि में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। वित्तीय क्षेत्र में International Financial Services Centres Authority और Israel Securities Authority के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इसके अलावा एआई आधारित शिक्षा, वाणिज्यिक मध्यस्थता और विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग को लेकर भी कई समझौते हुए, जिनमें Nalanda University और Hebrew University of Jerusalem के बीच एमओयू प्रमुख है।
सरकारी दफ्तरों में अधिकारी कर्मचारियों की गैरहाजिरी, समयपालन पर सवाल

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के सरकारी दफ्तरों में अधिकारी और कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति अब भी चुनौती बनी हुई है। प्रदेश सरकार ने आदेश जारी किया है कि सभी सरकारी कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुले रहेंगे और अधिकारी-कर्मचारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। इस आदेश का पालन कराने और वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए लल्लूराम डॉट काम और न्यूज 24 एमपी सीजी की टीम ने शुक्रवार को प्रदेशभर के कई जिलों में औचक निरीक्षण किया। शिवपुरी में सुबह 10 बजे तक कलेक्ट्रेट कार्यालय में ताले लगे मिले जबकि कलेक्टर डिप्टी कलेक्टर और अन्य विभागों के अधिकारी व कर्मचारी अनुपस्थित थे। सीहोर में महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय 10.10 बजे तक बंद था और कई कर्मचारी सीधे फील्ड में चले गए। वहीं मंदसौर में अधिकारियों ने समय पालन की दिशा में सुधार दिखाया और सुबह 10 बजे तक कार्यालयों में उपस्थिति सुनिश्चित की। सीतामऊ जनपद पंचायत में भी मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी आदेशों के अनुसार अधिकारी समय पर पहुंचते नजर आए। धार में मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में कुछ ही कर्मचारी सुबह 10 बजे उपस्थित थे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी अनीता सेंगर ने बताया कि सभी कर्मचारियों को समय पर आने के लिए लगातार निर्देश दिए जाएंगे। शाजापुर में जिला पंचायत कार्यालय और इसके शाखाओं में 10.05 बजे तक ताले लगे रहे लेकिन कुछ कर्मचारी समय पर काम करते दिखाई दिए। नर्मदापुरम में फाइलों पर धूल जमी मिली और कर्मचारियों की कुर्सियां खाली पाईं गईं। दतिया में सुबह 10 बजे तक कोई भी अधिकारी या कर्मचारी कार्यालय में मौजूद नहीं था। श्योपुर में महिला एवं बाल विकास और खाद आपूर्ति विभाग के कार्यालय 10 बजे तक बंद मिले। नर्मदापुरम में अधिकांश कार्यालयों में कुर्सियां खाली थीं और लोग फरियादी अधिकारियों का इंतजार करते रहे। इछावर तहसील और जिला मुख्यालय में भी अधिकारी और कर्मचारी समय पर उपस्थित नहीं हुए। उज्जैन में जिला मलेरिया विभाग में 10.20 बजे तक केवल 3 कर्मचारियों की उपस्थिति थी और विभागीय अधिकारी दिनेश्वर सिंह सिसोदिया अनुपस्थित थे। विभागीय कर्मचारियों ने फील्ड कार्य का हवाला दिया। कुल 63 पदस्थ कर्मचारियों में से सुबह 10.30 बजे तक केवल 4 कर्मचारी कार्यालय में दिखाई दिए। सिंगरौली में महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय सुबह 10 बजे बाद भी नहीं खुला। परियोजना अधिकारी से संपर्क करने के प्रयास में कॉल रिसीव नहीं हुई जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठे। मऊगंज जिले में तीन प्रमुख कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया गया जहां सन्नाटा और अधिकारियों की अनुपस्थिति देखने को मिली। प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सभी कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य है। समयपालन में लगातार हो रही लापरवाही से शासन की छवि प्रभावित हो रही है और सुधारात्मक कदमों की आवश्यकता बढ़ गई है।
दिल्ली शराब नीति केस में बड़ा फैसला, केजरीवाल–सिसोदिया को मिली राहत

नई दिल्ली। दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति मामले में शुक्रवार को बड़ा मोड़ आया। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को सीबीआई केस में राऊज एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया। अदालत ने इस मामले में नामजद सभी 23 आरोपियों को भी राहत देते हुए अभियोजन पक्ष की दलीलों को पर्याप्त आधारहीन माना। फैसले के दौरान दोनों नेता अदालत में मौजूद थे, जबकि कुछ अन्य आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: जांच में कमियांराऊज एवेन्यू कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सीबीआई की चार्जशीट में गंभीर खामियां हैं और कथित साजिश के समर्थन में ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए गए। अदालत ने टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष अनुमान के आधार पर कहानी गढ़ता नजर आया, जो न्यायिक कसौटी पर टिक नहीं सकी। जज जीतेंद्र सिंह ने सीबीआई द्वारा कथित कबूलनामे की कॉपी दाखिल न करने पर नाराजगी जताई। साथ ही चार्जशीट में ‘साउथ लॉबी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति दर्ज की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि आबकारी नीति के निर्माण में किसी बड़ी आपराधिक साजिश या दुर्भावनापूर्ण इरादे के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। क्या था पूरा मामला?यह केस दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा था, जिस पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगे थे। दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद Central Bureau of Investigation ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। 26 फरवरी 2023 को मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया था, जबकि 21 मार्च 2024 को प्रवर्तन निदेशालय ने अरविंद केजरीवाल को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया। बाद में सीबीआई ने भी उन्हें हिरासत में लिया था। राजनीतिक असर और आगे की राहइस फैसले को आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। हालांकि यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना रहेगा। अदालत के फैसले के बाद अब निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या जांच एजेंसियां ऊपरी अदालत में चुनौती देती हैं या नहीं।
पाकिस्तान के हवाई हमलों के जवाब में अफगानिस्तान की जवाबी कार्रवाई, 15 चौकियां कब्जे में लेने का दावा

नई दिल्ली। पाकिस्तान द्वारा कथित हवाई हमलों के बाद अफगानिस्तान ने सीमा क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने बयान जारी कर कहा कि गुरुवार रात शुरू किए गए अभियान में दुश्मन की 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है। उनके मुताबिक इस कार्रवाई में कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि कुछ को जिंदा पकड़ने का भी दावा किया गया है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। डूरंड लाइन पर ऑपरेशन, रणनीतिक बढ़त का दावाअफगान पक्ष का कहना है कि डूरंड लाइन के आसपास तैनात विशेष इकाइयों ने अत्याधुनिक उपकरणों के साथ अभियान चलाया। बयान में कहा गया कि रात के अंधेरे में दुश्मन की गतिविधियों को निशाना बनाया जा रहा है और सीमा पर रणनीतिक बढ़त हासिल की जा रही है। क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बताए जा रहे हैं। पहले हुए थे हवाई हमले, नागरिक हताहततनाव की पृष्ठभूमि में हालिया हवाई हमलों की घटना है। United Nations Assistance Mission in Afghanistan (यूएनएएमए) ने पुष्टि की थी कि पाकिस्तान के सैन्य हमलों में अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में 13 नागरिकों की मौत हुई। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, जबकि सात अन्य घायल हुए थे। ये हमले 21-22 फरवरी की दरमियानी रात नंगरहार के बेहसूद और खोगियानी जिलों में किए गए बताए गए। स्कूल और मस्जिद भी निशाने परस्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पक्तिका के बरमल क्षेत्र में एक स्कूल और मस्जिद को निशाना बनाया गया, जबकि ओर्गुन जिले में एक रिहायशी घर पर भी एयर स्ट्राइक की गई। इन घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी सीमा विवाद और अधिक गहरा गया है। आधिकारिक पुष्टि का इंतजारअफगानिस्तान के दावों और पाकिस्तान की चुप्पी के बीच स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। स्वतंत्र स्रोतों से 15 चौकियों पर कब्जे की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात नहीं संभले तो क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
टी20 विश्व कप 2026: आलोचना से आक्रामकता तक, तिलक वर्मा का दमदार जवाब

नई दिल्ली। टी20 विश्व कप 2026 में अपनी धीमी बल्लेबाजी को लेकर आलोचना झेल रहे युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा ने जिम्बाब्वे के खिलाफ विस्फोटक पारी खेलकर सभी को करारा जवाब दिया। टीम मैनेजमेंट ने इस मुकाबले में उन्हें तीसरे नंबर की बजाय छठे स्थान पर उतारा और तिलक ने इस भूमिका को पूरी तरह भुनाया। 16 गेंदों में 44 रन, मैच का रुख बदलाबाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने महज 16 गेंदों में नाबाद 44 रन ठोक दिए, जिसमें 4 छक्के और 3 चौके शामिल रहे। उनकी इस ताबड़तोड़ पारी ने भारत के स्कोर को 256 रन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। तेज फिनिशिंग ने न सिर्फ टीम का मनोबल बढ़ाया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि तिलक परिस्थिति के मुताबिक खुद को ढालने में माहिर हैं। “हर गेंद पर हिट के लिए तैयार”मैच के बाद तिलक ने कहा कि जब ओपनर मजबूत शुरुआत देते हैं तो उसका आत्मविश्वास मध्यक्रम तक पहुंचता है। उन्होंने माना कि टीम की रणनीति साफ थी-पावरप्ले में विकेट गिरने के बावजूद आक्रामक रवैया बनाए रखना। उनका कहना था कि विरोधी गेंदबाजों में यह डर बैठाना जरूरी है कि भारतीय बल्लेबाज हर गेंद पर बड़ा शॉट खेलने को तैयार हैं। रोल बदला, इरादा नहींतिलक ने अपने बदले बल्लेबाजी क्रम पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि टीम को जहां जरूरत हो, वह वहां खेलने के लिए तैयार हैं। आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए भी वह इसी तरह की भूमिका निभा चुके हैं और भारतीय टीम में भी अलग-अलग स्थानों पर खेल चुके हैं। उनका मानना है कि विकेट गिरने के तुरंत बाद दबाव तोड़ने के लिए आक्रामक शॉट जरूरी होते हैं। 250 के पार जाने का लक्ष्यतिलक ने साफ किया कि टीम का इरादा सिर्फ बड़ा स्कोर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि 250 के आंकड़े को लगातार पार करने का है। उन्होंने बताया कि मैच से पहले टीम ने पिछले साल की अपनी टी20 बल्लेबाजी के वीडियो देखे, जिससे आत्मविश्वास बढ़ा। अब यही आक्रामक सोच आगे के मुकाबलों में भी जारी रखने की तैयारी है। युवा बल्लेबाज का यह आत्मविश्वास साफ संकेत देता है कि भारतीय टीम सिर्फ जीतने नहीं, बल्कि दबदबा बनाने के इरादे से मैदान में उतर रही है।
OTT पर दबकर रह गई सिराई, जय भीम जैसा टॉर्चर और इंसाफ की लड़ाई हिला देगी अंदर तक

नई दिल्ली । ओटीटी की भीड़ में कई बार बेहतरीन फिल्में चुपचाप आकर निकल जाती हैं। साल 2026 में ZEE5 पर रिलीज हुई तमिल फिल्म सिराई भी कुछ ऐसी ही फिल्म है जो बड़े स्टार्स की फिल्मों के शोर में दब गई। कहा जा रहा है कि धुरंधर की चर्चा के बीच इस फिल्म पर कम लोगों की नजर पड़ी लेकिन कंटेंट के मामले में यह किसी से कम नहीं। IMDb पर 8.2 की दमदार रेटिंग के साथ सिराई उन फिल्मों में गिनी जा रही है जो सिस्टम की सच्चाई को बेधड़क सामने रखती हैं। फिल्म में लीड रोल निभाया है विक्रम प्रभु ने। उनके साथ कई अनुभवी तमिल कलाकार नजर आते हैं जो कहानी को मजबूत आधार देते हैं। यह फिल्म तमिल में बनी है लेकिन अच्छी बात यह है कि ओटीटी पर यह हिंदी में भी उपलब्ध है इसलिए भाषा दर्शकों के लिए रुकावट नहीं बनती। सिराई का अर्थ है जेल या कैद और फिल्म का मूल भी इसी विचार के इर्द-गिर्द घूमता है। कहानी एक ईमानदार पुलिस अधिकारी की है जिसे एक हाई-प्रोफाइल कैदी को एक जेल से दूसरी जेल में ट्रांसफर करने की जिम्मेदारी मिलती है। शुरुआत में यह एक सामान्य ड्यूटी लगती है लेकिन सफर के दौरान उसे पता चलता है कि जिस कैदी को वह ले जा रहा है वह असल में निर्दोष है। उसे कुछ ताकतवर लोगों ने अपने फायदे के लिए फंसाया है। यहीं से कहानी में असली संघर्ष शुरू होता है। एक तरफ सिस्टम का दबाव और वर्दी की जिम्मेदारी दूसरी तरफ इंसानियत और अंतरात्मा की आवाज। क्या वह आदेश का पालन करेगा या सच का साथ देगा? फिल्म इसी नैतिक दुविधा को बेहद सधे हुए अंदाज में पेश करती है। इस फिल्म की खास बात यह है कि इसमें मसाला एंटरटेनमेंट वाला ओवर-द-टॉप एक्शन नहीं है। यहां सब कुछ रियलिस्टिक है पुलिसिया पूछताछ मानसिक दबाव सत्ता का खेल और कानून की खामियां। यही यथार्थवाद फिल्म को असरदार बनाता है। अगर आपको जय भीम और विसरानई जैसी फिल्में पसंद आई थीं तो सिराई भी आपको जरूर प्रभावित करेगी। यह सिर्फ पुलिस और कैदी की कहानी नहीं है बल्कि यह न्याय व्यवस्था की परतें खोलती है और सवाल पूछती है कि सच की कीमत आखिर कितनी भारी होती है। विक्रम प्रभु ने अपने किरदार में गजब की गंभीरता दिखाई है। उनके चेहरे के भाव आंखों की बेचैनी और भीतर चल रहे द्वंद्व को उन्होंने बारीकी से निभाया है। फिल्म आपको अंत तक बांधे रखती है और सोचने पर मजबूर करती है।
बजट के बाद वेबिनार में पीएम का विजन: ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की रफ्तार और तेज करने का आह्वान

नई दिल्ली। केंद्रीय बजट के बाद आयोजित वेबिनार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार और वित्त” विषय पर देश को स्पष्ट संदेश दिया-बजट कोई तात्कालिक लाभ का दस्तावेज नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय रोडमैप है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधन में उन्होंने कहा कि बजट के बाद वेबिनार की परंपरा अब मजबूत हो चुकी है और इससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में गति मिलती है। शॉर्ट टर्म नहीं, लॉन्ग टर्म विजन का दस्तावेजप्रधानमंत्री ने कहा कि बजट को शेयर बाजार की चाल या आयकर प्रस्तावों के चश्मे से देखना अधूरा आकलन है। असल मायने में बजट इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, क्रेडिट की सुगमता, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, पारदर्शिता और जीवन को आसान बनाने वाली नीतियों का समग्र खाका होता है। उन्होंने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि हर बजट उसी लंबी यात्रा का एक चरण है। टेक्नोलॉजी आधारित गवर्नेंस पर जोरपीएम ने कहा कि बीते दशक में भारत ने जो लचीलापन दिखाया है, वह सुधारों का परिणाम है। प्रक्रियाओं का सरलीकरण, टेक्नोलॉजी आधारित शासन और संस्थागत मजबूती ने अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। उन्होंने एआई, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और गति बढ़ाने की बात कही। साथ ही शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत कर जमीनी असर सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इंफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश, निजी क्षेत्र को संकेतप्रधानमंत्री ने बताया कि 11 वर्ष पहले सार्वजनिक पूंजीगत व्यय लगभग 2 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि यह विशाल निवेश निजी क्षेत्र के लिए स्पष्ट संकेत है कि वह भी नई ऊर्जा के साथ आगे आए। परियोजना स्वीकृति, लागत-लाभ विश्लेषण और लाइफ साइकल कॉस्टिंग को मजबूत कर देरी और अपव्यय रोकने की आवश्यकता बताई। बॉन्ड मार्केट और विदेशी निवेश को बढ़ावाउन्होंने कहा कि दीर्घकालिक वित्त को मजबूत करने के लिए बॉन्ड बाजार को अधिक सक्रिय और तरल बनाना जरूरी है। बॉन्ड की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को सरल किया जा रहा है और निवेशक-अनुकूल ढांचा तैयार किया जा रहा है। वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाकर वित्तीय तंत्र को अधिक पूर्वानुमेय बनाने पर भी बल दिया गया। ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ का प्रस्तावप्रधानमंत्री ने सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और अकादमिक जगत के बीच एक स्पष्ट ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि नीति की सफलता घोषणाओं से नहीं, बल्कि उत्कृष्ट क्रियान्वयन से तय होती है। अब चर्चा का समय नहीं, बल्कि बजट को जमीन पर तेजी से लागू करने का समय है।
LAILA MURDER CASE: जलन, लालच और शक की आग में बुझ गया सितारा: लैला खान हत्याकांड का पूरा सच

LAILA MURDER CASE: नई दिल्ली । मायानगरी मुंबई की चकाचौंध के बीच साल 2011 में एक ऐसी घटना घटी, जिसने फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। यह मामला था बॉलीवुड अभिनेत्री लैला खान और उनके परिवार की रहस्यमयी गुमशुदगी का। लैला ने सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ फिल्म वफा में काम किया था और अपनी खूबसूरती व अदाकारी के कारण चर्चा में रहती थीं। लेकिन अचानक उनका और उनके परिवार के पांच अन्य सदस्यों का यूं गायब हो जाना एक बड़े रहस्य में बदल गया। मुंबई के एक पॉश इलाके से लैला, उनकी मां सेलिना, तीन भाई बहन और एक चचेरी बहन के लापता होने की खबर ने सनसनी फैला दी। करीब एक साल तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला। पुलिस की जांच जारी रही, लेकिन परिवार का कोई अता पता नहीं था। मामला तब और पेचीदा हो गया जब शक की सुई लैला के सौतेले पिता की ओर घूमी। पूछताछ के दौरान जो सच सामने आया, उसने सबको झकझोर दिया। सौतेले पिता ने कबूल किया कि उसने ही इगतपुरी नासिक के पास स्थित अपने फार्महाउस पर परिवार के सभी छह सदस्यों की हत्या कर दी और शवों को वहीं दफना दिया। हत्या की वजह थी शक, जलन और संपत्ति को लेकर डर। उसे संदेह था कि लैला की मां का किसी और से संबंध है और वह बच्चों के साथ दुबई बसने की योजना बना रही है। उसे भय था कि परिवार उससे अलग होकर उसे संपत्ति से बेदखल कर देगा। बताया गया कि फार्महाउस पर किसी बात को लेकर तीखी बहस हुई। गुस्से में आरोपी ने पहले सेलिना पर हमला किया और फिर एक एक कर सभी को मौत के घाट उतार दिया। अपने अपराध को छिपाने के लिए उसने फार्महाउस के अहाते में गड्ढा खोदकर सभी शवों को दफना दिया और ऊपर से आग लगाकर सबूत मिटाने की कोशिश की। यह वारदात इतनी निर्मम थी कि जिसने भी इसके बारे में सुना, सन्न रह गया। मामला वर्षों तक अदालत में चलता रहा। पुलिस ने सबूत जुटाए, गवाह पेश हुए और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार 2024 में अदालत ने आरोपी सौतेले पिता को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई। करीब 13 साल बाद न्याय मिला, लेकिन तब तक एक उभरती अभिनेत्री और उसका पूरा परिवार इस दुनिया से जा चुका था। लैला खान हत्याकांड ने यह साबित कर दिया कि शक और लालच जब रिश्तों पर हावी हो जाते हैं, तो अंजाम बेहद खौफनाक होता है। ग्लैमर की दुनिया की एक चमकती जिंदगी, पारिवारिक साजिश और निर्ममता की भेंट चढ़ गई। यह मामला आज भी याद दिलाता है कि अपराध चाहे जितना छिपाया जाए, सच एक दिन सामने जरूर आता है।