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इस कंपनी ने 4000 कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता… 25% उछले शेयर

वाशिंगटन। ट्विटर के को-फाउंडर (Twitter Co-Founder) जैक डोर्सी (Jack Dorsey) की कंपनी ब्लॉक इंक (Blockchain Inc) ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने 4,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला किया है। गुरुवार, 26 फरवरी को आई इस खबर के बाद कंपनी के शेयरों में वॉल स्ट्रीट पर 25% की जबरदस्त उछाल देखी गई। कंपनी का कहना है कि यह कटौती उसके कुल कर्मचारियों की संख्या को 10,000 से घटाकर लगभग 6,000 कर देगी। डोर्सी ने क्या कहा? ‘यह फैसला मुश्किल है, लेकिन जरूरी’शेयरधारकों को लिखे एक पत्र में जैक डोर्सी ने इस फैसले को “बेहद मुश्किल” बताया। कंपनी की सीएफओ अमृता आहूजा के मुताबिक, यह कदम कंपनी को लंबी अवधि की वृद्धि के अगले चरण के लिए तैयार करेगा। दिसंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, ब्लॉक में कुल 10,205 कर्मचारी कार्यरत थे। प्रभावित कर्मचारियों को मिलेगा यह मुआवजा पैकेजडोर्सी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अलग से बताया कि नौकरी जाने से प्रभावित लोगों को 20 सप्ताह का वेतन और कंपनी में बिताए हर साल के लिए एक अतिरिक्त सप्ताह का वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा, उन्हें मई के अंत तक के लिए इक्विटी, छह महीने का स्वास्थ्य बीमा, कंपनी के डिवाइस और संक्रमण में मदद के लिए 5,000 डॉलर की अतिरिक्त राशि भी प्रदान की जाएगी। कंपनी पर कितना पड़ेगा खर्च?छंटनी के इस पूरे अभियान के चलते ब्लॉक पर लगभग 500 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त खर्च आएगा। इसमें ज्यादातर राशि विच्छेद भुगतान, कर्मचारी लाभ और कुछ गैर-नकद खर्च शामिल हैं, जिसका असर अगली तिमाही के वित्तीय नतीजों में देखने को मिलेगा। AI का बढ़ता प्रभाव: क्या यही है बड़ी वजह?ब्लॉक के सह-सीईओ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला कंपनी के संकट में होने की वजह से नहीं लिया गया है। डोर्सी ने लिखा, “हम पहले से ही देख रहे हैं कि हम जो इंटेलिजेंस टूल (AI) बना और इस्तेमाल कर रहे हैं, वे छोटी टीमों के साथ मिलकर काम करने का एक नया तरीका सक्षम कर रहे हैं। यह मूल रूप से बदल रहा है कि किसी कंपनी को बनाने और चलाने का क्या मतलब है, और यह बदलाव तेजी से हो रहा है।” उनका कहना है कि अन्य कंपनियां भी इसी तरह अपने कार्यबल में बदलाव कर सकती हैं क्योंकि ये AI उपकरण उनके लिए दक्षता में बढ़ोतरी ला रहे हैं। AI के चलते छंटनी करने वाली कंपनियों की लिस्ट में शामिल हुआ ब्लॉकब्लॉक, जो एक वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी है, अब उन कंपनियों की सूची में शामिल हो गई है, जिन्होंने AI के कारण अपने कार्यबल में बदलाव का हवाला देते हुए छंटनी की घोषणा की है। इससे पहले Pinterest, CrowdStrike और Chegg जैसी कंपनियां भी इस सूची में शामिल हो चुकी हैं। कंपनी ने यह घोषणा अपने चौथी तिमाही के नतीजों के साथ की, जो काफी हद तक उम्मीदों के अनुरूप रहे।

इस देश में खुलेआम किस करने पर दो महिलाएं गिरफ्तार… यहां समलैंगिकता है जघन्य अपराध!

कंपाला। दुनिया में आज भी कई ऐसे देश हैं, जिनमें समलैंगिकता (Homosexuality) को जघन्य अपराध माना जाता है। अफ्रीकी देश युगांडा (African Country Uganda) भी उन्हीं देशों में से एक है। यहां पर दो युवा महिलाओं (Two Young Women) को खुले आम प्यार का इजहार करना महंगा पड़ गया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, दोनों महिलाओं को किस करते हुए देखा गया, चूंकि यह देश के कानून के खिलाफ है, इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के बयान के मुताबिक एक महिला की उम्र करीब 22 साल है, जबकि दूसरी की उम्र करीब 21 साल है। दोनों को देश के अरुआ शहर से गिरफ्तार किया गया है, जहां पर वह खुले आम किस करने और असामान्य कृत्यों में संलिप्त थीं, जिन्हें यौन प्रकृति का माना जाता है। आपको बता दें, युगांडा में वर्ष 2023 में एंटी होमोसेक्सुएलिटी एक्ट लागू किया गया है। देश की सरकार द्वारा लागू किए गए इस कानून का पश्चिमी देशों ने भरपूर विरोध किया था लेकिन यहां की सरकार सबसे कठोर एलजीबीटीक्यू विरोधी कानून लागू करने पर लगी हुई है। इस कानून के तहत समलैंगिक संबंध रखने वाले लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है, जबकि गंभीर मामलों में मृत्युदंड का भी प्रावधान है। बार-बार पकड़े जाने पर मृत्युदंड का प्रावधानसमलैंगिक संबंधों को लेकर युगांड़ा का कानून सबसे ज्यादा कठोर है। 2023 में पारित किए गए कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति बार-बार समलैंगिक संबंध बनाते पकड़ा जाता है, या ऐसा समलैंगिक संबंध जिससे लाइलाज बीमारी फैलती हो, नाबालिग, बुजुर्ग या दिव्यांग व्यक्ति के साथ समलैंगिक संबंध बनाने पर व्यक्ति को मृत्युदंड दिया जा सकता है। गौरतलब है कि युगांडा पूर्वी अफ्रीका का एक रूढ़िवादी और मुख्यतः ईसाई बहुल देश है। इस कानून के कारण मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में व्यापक आक्रोश फैल गया था और संयुक्त राष्ट्र तथा पश्चिमी देशों ने इसकी निंदा की थी। विश्व बैंक ने देश को दी जाने वाली वित्तीय सहायता निलंबित कर दी थी, हालांकि 2025 के मध्य में इसे फिर से बहाल कर दिया गया। इस महीने की शुरुआत में, एक युगांडा अदालत ने “गंभीर समलैंगिकता” श्रेणी के तहत आरोपित पहले व्यक्ति के खिलाफ मामला खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि लंबी न्यायिक हिरासत के कारण उसकी मानसिक स्थिति अस्थिर हो गई थी।

RUSSIA VS UKRAINE: US से वार्ता के बीच रूस का यूक्रेन पर भयंकर हमला… रातभर में बरसाए 420 ड्रोन और 39 मिसाइल…

RUSSIA VS UKRAINE: कीव। जिनेवा (Geneva) में अमेरिका (America) और यूक्रेन (Ukraine) के बीच चल रही वार्ता के बीच रूस ने कीव पर भयंकर हवाई हमला किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (President Volodymyr Zelensky) ने गुरुवार को कहा कि रूस (Russia) ने रात भर में यूक्रेन पर 420 ड्रोन और 39 मिसाइलों से हमला किया। यह हमला अमेरिकी और यूक्रेनी दूतों द्वारा जिनेवा में युद्ध समाप्त करने के लिए और अधिक बातचीत करने से कुछ घंटे पहले हुआ, जो अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। जेलेंस्की ने बताया कि इस हमले में 11 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं और यूक्रेन के आठ क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे तथा आवासीय इलाकों को निशाना बनाया गया। अधिकारियों के अनुसार, बच्चों सहित दर्जनों लोग घायल हुए हैं, हालांकि मृतकों की सटीक संख्या की तुरंत पुष्टि नहीं की गई। जेलेंस्की ने बुधवार देर रात कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की और शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में उनके प्रयासों तथा भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया। अमेरिका की मध्यस्थता में मॉस्को और कीव के बीच वार्ता जारी है, लेकिन रूस द्वारा दावा किए गए यूक्रेनी क्षेत्र के मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है। जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शिखर सम्मेलन की मांग की है और कहा है कि आमने-सामने की बैठक किसी समझौते तक पहुंचने में निर्णायक साबित हो सकती है। हालांकि, क्रेमलिन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, सिवाय यूक्रेनी राष्ट्रपति को मॉस्को आमंत्रित करने के, जिसे जेलेंस्की ने ठुकरा दिया। ट्रंप के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने वार्ता में हिस्सा लिया। ये दोनों जिनेवा में ईरान के साथ परमाणु वार्ता पर विचार करने के बाद यूक्रेन युद्ध पर चर्चा के लिए पहुंचे थे। उन्होंने यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के प्रमुख रुस्तम उमेरोव से मुलाकात की। वे जेलेंस्की के साथ ट्रंप की बातचीत में भी शामिल हुए। उमेरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि दूतों के साथ यूक्रेन को आर्थिक सहायता, पुनर्निर्माण, निवेश आकर्षित करने के तरीकों और दीर्घकालिक सहयोग के ढांचे पर चर्चा हुई। उनके अनुसार, बैठक में रूस को शामिल करके त्रिपक्षीय वार्ता के अगले दौर की तैयारियों पर भी विचार किया गया, साथ ही कैदियों के संभावित आदान-प्रदान पर भी बात हुई। जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने पोल्टावा क्षेत्र में गैस बुनियादी ढांचे तथा कीव और ड्नीप्रो क्षेत्रों में बिजली सबस्टेशनों पर हमला किया। राजधानी कीव सहित पांच अन्य क्षेत्रों में आपातकालीन दल मौके पर पहुंचे। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली ने रूस की अधिकांश मिसाइलों को मार गिराया और पश्चिमी सहयोगियों को समय पर अतिरिक्त वायु रक्षा हथियारों की आपूर्ति के लिए धन्यवाद दिया। रूस की बड़ी सेना के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के लिए यूक्रेन को विदेशी मदद की सख्त जरूरत है। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने सहयोगी देशों से अधिक सैन्य सहायता देने की अपील की। उन्होंने विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर पोस्ट में कहा कि जब पूरी दुनिया मॉस्को से इस व्यर्थ युद्ध को रोकने की मांग कर रही है, तो पुतिन और अधिक आतंक, हमलों और आक्रामकता पर उतारू हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी वायु रक्षा ने रात भर में कई रूसी क्षेत्रों के साथ-साथ काला सागर और आज़ोव सागर के ऊपर 17 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। यूक्रेन के स्वदेशी लंबी दूरी के ड्रोन ने रूस के अंदरूनी इलाकों में तेल रिफाइनरियों, ईंधन डिपो और सैन्य रसद केंद्रों पर हमले किए हैं। रूस और यूक्रेन ने सैनिकों के शवों का किया आदान-प्रदान गौरतलब है कि पिछली वार्ताओं में रूसी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख व्लादिमीर मेदिंस्की ने गुरुवार को बताया कि रूस ने 1000 शहीद यूक्रेनी सैनिकों के शव यूक्रेन को सौंपे और बदले में अपने 35 शहीद सैनिकों के शव वापस लिए। उन्होंने यह नहीं बताया कि यह आदान-प्रदान कब हुआ। बाद में यूक्रेन के युद्धबंदियों के समन्वय मुख्यालय ने शवों की वापसी की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने कहा कि रूसी पक्ष की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ये यूक्रेनी रक्षकों के हो सकते हैं।

Chinese military pilots: US में F-35 का रिटायर्ड पायलट गिरफ्तार, चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त प्रशिक्षण देने का आरोप

Chinese military pilots: वाशिंगटन। अमेरिका (America) से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पर पूर्व अमेरिकी वायु सेना (American Air Force) के एलीट फाइटर पायलट और एफ-35 प्रशिक्षक (F-35 Trainer) गेराल्ड एडी ब्राउन जूनियर को चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त रूप से लड़ाकू प्रशिक्षण देने के गंभीर आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि उन्हें शस्त्र निर्यात नियंत्रण अधिनियम (AECA) के उल्लंघन के तहत आरोपित किया गया है। उन्हें 26 फरवरी 2026 को इंडियाना के दक्षिणी जिले में मजिस्ट्रेट जज के समक्ष पेश किया जाना है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन ए आइजेनबर्ग ने कहा कि अमेरिकी वायु सेना ने मेजर ब्राउन को एक विशिष्ट लड़ाकू पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया था और राष्ट्र की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी थी। अब उन पर चीनी सैन्य पायलटों को प्रशिक्षण देने का आरोप है। न्याय विभाग के अनुसार, 24 वर्ष से अधिक समय तक अमेरिकी वायु सेना में सेवा देने वाले पूर्व एफ-35 प्रशिक्षक पायलट ब्राउन ने कथित तौर पर अगस्त 2023 से चीनी सैन्य पायलटों (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स – PLAAF) को लड़ाकू विमान प्रशिक्षण प्रदान करने की साजिश रची। यह प्रशिक्षण अंतर्राष्ट्रीय शस्त्र व्यापार विनियम (ITAR) के तहत रक्षा सेवा माना जाता है, जिसके लिए स्टेट डिपार्टमेंट से लाइसेंस जरूरी था, जो ब्राउन के पास नहीं था। ब्राउन के सैन्य करियर में संवेदनशील इकाइयों का नेतृत्व, युद्ध अभियानों का संचालन और एफ-4, एफ-15, एफ-16, ए-10 तथा एफ-35 जैसे विमानों पर लड़ाकू पायलट एवं सिम्युलेटर प्रशिक्षक के रूप में सेवा शामिल थी। 1996 में सक्रिय सेवा छोड़ने के बाद उन्होंने वाणिज्यिक पायलट और अमेरिकी रक्षा ठेकेदारों के लिए अनुबंध सिम्युलेटर प्रशिक्षक के तौर पर काम किया। दिसंबर 2023 में ब्राउन चीन गए, जहां उन्होंने PLAAF पायलटों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। शिकायत के मुताबिक, पहले दिन उन्होंने अमेरिकी वायु सेना के बारे में तीन घंटे तक सवालों के जवाब दिए, दूसरे दिन खुद के बारे में प्रस्तुति दी, और फरवरी 2026 की शुरुआत तक अमेरिका लौटने तक सिम्युलेटर एवं उड़ान प्रशिक्षण संचालित किया। उन्होंने अमेरिकी वायु सेना के अभियानों पर विस्तृत जानकारी भी साझा की। एफबीआई के काउंटरइंटेलिजेंस और जासूसी प्रभाग के सहायक निदेशक रोमन रोजहाव्स्की ने कहा कि ब्राउन ने कथित तौर पर अपने देश के साथ विश्वासघात किया, क्योंकि उन्होंने चीनी पायलटों को उन लोगों के खिलाफ लड़ने का प्रशिक्षण दिया जिनकी रक्षा करने की उन्होंने शपथ ली थी। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ है। यह गिरफ्तारी 2017 में अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के पूर्व पायलट डैनियल एडमंड डुग्गन के खिलाफ इसी तरह के आरोपों के बाद हुई है। न्याय विभाग ने जोर दिया कि चीन अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए नाटो और सहयोगी देशों के वर्तमान एवं पूर्व सैन्य कर्मियों को निशाना बनाना जारी रखे हुए है।

AMERICA VS IRAN: अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दागी नई बैलिस्टिक मिसाइल

AMERICA VS IRAN: वॉशिंगटन/तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने नई सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है। ‘खैबर’ नाम की इस चौथी पीढ़ी की मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 2000 किलोमीटर बताई जा रही है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार मिसाइल का प्रक्षेपण एक गोपनीय स्थान से किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्रीय सुरक्षा हालात संवेदनशील बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच सैन्य तथा कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। अमेरिका की ओर से खाड़ी क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की खबरें भी सामने आती रही हैं। परमाणु वार्ता का तीसरा दौर शुरू इसी बीच दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता का तीसरा दौर जेनेवा में शुरू हुआ। यह बातचीत ओमान की मध्यस्थता में हो रही है। वार्ता का उद्देश्य परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कम करना और कूटनीतिक समाधान तलाशना है। ईरान ने परमाणु हथियार बनाने से किया इनकार ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि उनका देश परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में काम नहीं कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई पहले ही परमाणु हथियारों के विकास पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। MP: लाड़ली बहना योजना से 5.77 लाख बहनों के नाम कटने पर विधानसभा में हंगामा पेजेशकियन के अनुसार, “जब सर्वोच्च नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु हथियार नहीं बनाए जाएंगे, तो ईरान उसी नीति पर कायम है।” पुराना विवाद, नई कोशिश गौरतलब है कि 2000 के दशक की शुरुआत में खामेनेई ने एक धार्मिक आदेश (फतवा) जारी कर परमाणु हथियारों के निर्माण को प्रतिबंधित बताया था। इसके बावजूद अमेरिका लगातार ईरान पर परमाणु क्षमता हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाता रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, एक ओर जहां मिसाइल परीक्षण शक्ति प्रदर्शन का संकेत है, वहीं दूसरी ओर जारी कूटनीतिक वार्ता इस बात का संकेत देती है कि दोनों देश टकराव से बचते हुए समाधान की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं।

Telangana Salary Pension: इस राज्य में गवर्नर-IAS से भी ज्यादा कर्मचारियों की सैलरी

Telangana Salary Pension: हैदराबाद। दक्षिणी राज्य तेलंगाना में सफाईकर्मियों की तन्ख्वाह जानकर आप दंग रह जाएंगे। बार-बार होने वाले वेतन बढ़ोत्तरी के बाद अब इस राज्य के सीनियर सफाईकर्मी दो लाख रुपये प्रति महीना वेतन उठा रहे हैं, जबकि चीफ इंजीनियर की सैलरी बढ़ते-बढ़ते 7 लाख प्रति माह हो चुकी है। राज्य के मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव ने खुलासा किया है कि तेलंगाना में पिछले एक दशक के दौरान सरकारी वेतन और पेंशन का बोझ तेजी से बढ़ा है। यह खर्च 2014 में राज्य गठन के समय लगभग 1,500 करोड़ रुपये प्रतिमाह था, जो अब बढ़कर करीब 6,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यानी यह खर्च 2014 के मुकाबले अब लगभग चार गुना हो गया है। राव ने सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड सोशल स्टडीज द्वारा आयोजित 16वें फाइनेंस कमीशन की सिफारिशों पर एक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि जब 2014 में आंध्र प्रदेश से तेलंगाना अलग हुआ था, तब राज्य का खर्च 1,500 करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि तब से, सैलरी और पेंशन का खर्च 300% बढ़ गया है, क्योंकि चुनाव के समय लगातार पे रिवीजन हुए, जिससे फिक्स्ड खर्च में भारी उछाल आया है। गवर्नर से भी ज्यादा सैलरी बकौल राव, स्थिति यह है कि कुछ सार्वजनिक उपक्रमों में वेतन संरचना इतनी ऊंची हो गई है कि वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों और यहां तक कि राज्यपाल के वेतन से भी अधिक हो गई है। SMA टाइप-2 से ग्रसित 3 साल की बच्ची के इलाज के लिए क्राउड फंडिंग में जुटी जनता, 9 करोड़ का महंगा इंजेक्शन बाकी उदाहरण के तौर पर, बिजली विभाग के मुख्य अभियंता का वेतन 7 लाख रुपये तक पहुंच रहा है, जबकि लंबे समय से कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी करीब 2 लाख रुपये मासिक तक कमा रहे हैं। नगर निगम स्तर पर भी वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। जहां नए कर्मचारियों का शुरुआती वेतन लगभग 28,000 रुपये है, वहीं 30 वर्षों की सेवा के बाद ड्राइवर या सफाईकर्मी 1 लाख रुपये से अधिक मासिक वेतन पा सकते हैं। ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम में नियमित किए गए कुछ सफाईकर्मियों का औसत वेतन 70,000 रुपये प्रतिमाह से अधिक है। सरकारी नौकरी के लिए भीड़ बढ़ीTOI को मुख्य सचिव ने यह भी बताया कि वेतन निर्धारण सरकार द्वारा गठित वेतन संशोधन आयोगों के माध्यम से किया जाता है, जिसमें “फिटमेंट” प्रतिशत लागू कर मूल वेतन और महंगाई भत्ते में वृद्धि की जाती है। उच्च वेतन के कारण सरकारी नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा भी बेहद बढ़ गई है। हाल ही में ग्रुप-1 की 563 नौकरियों के लिए लगभग 799 उम्मीदवार प्रति पद के हिसाब से आवेदन आए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि युवाओं में सरकारी नौकरी को लेकर आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। तेलंगाना की विकास दर लगभग 11% हालांकि, राज्य ने इस बढ़ते खर्च को अपनी मजबूत आर्थिक वृद्धि के बल पर संभाला है। तेलंगाना ने लगभग 11% की विकास दर दर्ज की है और राजस्व स्रोतों में भी स्थिर वृद्धि हुई है। सरकार ने डिजिटल सिस्टम के जरिए सब्सिडी वितरण को भी बेहतर बनाया है और ‘रायथु बंधु’ योजना के तहत 7,000 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। आंकड़ों के अनुसार, राज्य गठन के बाद पहले 10 वर्षों में कुल 15 लाख करोड़ रुपये का खर्च हुआ, जिसमें से करीब 12 लाख करोड़ रुपये वेतन, पेंशन और कर्ज चुकाने में खर्च हुए, जबकि केवल 3 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय पर खर्च किए गए। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य की वित्तीय प्राथमिकताएं मुख्यतः राजस्व खर्च पर केंद्रित रही हैं, जिससे भविष्य में वित्तीय संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

YOUTUBER ANVESH: हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी करने वाले यूट्यूबर अन्वेश के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी

YOUTUBER ANVESH: हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी में धार्मिक भावनाओं से जुड़े विवादित बयान के मामले में पुलिस ने सख्त कदम उठाया है। पंजागुट्टा थाना पुलिस ने यूट्यूबर अन्वेश के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई हिंदू देवी-देवताओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े मामले में की गई है। पुलिस के अनुसार, दिसंबर 2025 में अभिनेत्री और भाजपा नेता कराटे कल्याणी की शिकायत पर अन्वेश के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्होंने हिंदू समाज, धार्मिक मान्यताओं, पूजनीय देवी-देवताओं, संस्कृति और परंपराओं के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ टिप्पणियां कीं, जिससे सांप्रदायिक तनाव फैलने की आशंका बनी।जांच अधिकारियों का कहना है कि यह विवाद एक वीडियो के बाद शुरू हुआ। वीडियो में अन्वेश ने अभिनेत्रियों के पहनावे को लेकर तेलुगु अभिनेता शिवाजी की आलोचना की थी। इसी दौरान उन्होंने पौराणिक पात्रों सीता और द्रौपदी को लेकर भी टिप्पणी की, जिस पर विभिन्न संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन किया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। फिलहाल अन्वेश के देश से बाहर होने की जानकारी मिली है, जिसके चलते उनकी लोकेशन ट्रैक करने और भारत लौटने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Sanjay Raut Defamation Case: संजय राउत को राहत, मानहानि मामले में कोर्ट ने किया बरी

Sanjay Raut Defamation Case: मुंबई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत को मानहानि के एक मामले में बड़ी राहत मिली है। मुंबई की सत्र अदालत ने उनकी पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए भाजपा नेता किरिट सोमैया की पत्नी मेधा सोमैया द्वारा दायर शिकायत में उन्हें बरी कर दिया। इससे पहले पिछले वर्ष मजिस्ट्रेट अदालत ने राउत को भारतीय दंड संहिता की मानहानि से जुड़ी धारा के तहत दोषी ठहराते हुए 15 दिन के कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, सजा पर रोक लगा दी गई थी ताकि वे उच्च अदालत में आदेश को चुनौती दे सकें। इसके बाद राउत ने सत्र अदालत में अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी गईं। सुनवाई कर रहे न्यायाधीश महेश जाधव ने इस महीने की शुरुआत में अंतिम बहस पूरी होने के बाद राउत की याचिका मंजूर कर ली। राउत की ओर से अधिवक्ता मनोज पिंगले ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने किसी व्यक्ति विशेष की मानहानि करने का उद्देश्य नहीं रखा था। वहीं, मेधा सोमैया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता लक्ष्मण कनाल ने कहा कि जिस कथित घोटाले का आरोप लगाया गया, जांच में उसका कोई आधार नहीं मिला, इसलिए सार्वजनिक आरोप मानहानिकारक थे। दरअसल, विवाद उस समय शुरू हुआ जब राउत ने मीडिया से बातचीत में मीरा-भायंदर नगर निगम क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय निर्माण परियोजना में 100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया था और इसमें सोमैया दंपत्ति के जुड़े होने की बात कही थी।शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, वर्ष 2007 में निविदा प्रक्रिया के जरिए यह काम पांच गैर-सरकारी संगठनों को सौंपा गया था, जिनमें से एक संस्था सोमैया परिवार से संबंधित थी। परियोजना की कुल लागत लगभग 22 करोड़ रुपये बताई गई, जिससे 100 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा तथ्यात्मक रूप से संभव नहीं बताया गया। मजिस्ट्रेट अदालत ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि मेधा सोमैया एक शिक्षित और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं तथा आरोपों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और मानसिक पीड़ा हुई। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई थी कि एक सांसद होने के नाते सार्वजनिक बयान देते समय राउत पर उच्च स्तर की जिम्मेदारी होती है। अब सत्र अदालत के फैसले के बाद राउत को इस मामले में राहत मिल गई है।

ऑपरेशन ‘सिंदूर 2.0’ पर सख्त संदेश: जमीन, समुद्र और हवा-हर मोर्चे पर जवाब को तैयार सेना

नई दिल्ली। भारत ने सीमा पार से किसी भी उकसावे की स्थिति में पहले से अधिक कठोर प्रतिक्रिया देने के संकेत दिए हैं। भारतीय सेना की पश्चिमी कमान ने स्पष्ट किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ के तहत सैन्य तैयारियों को व्यापक रूप से मजबूत किया गया है और भविष्य की कार्रवाई बहु-आयामी हो सकती है। यह बयान पठानकोट में आयोजित एक ऑपरेशनल क्षमता प्रदर्शन के दौरान सामने आया, जहां वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने सेना की तैयारी और रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया। 2 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग राजेश पुष्कर ने कहा कि पिछले वर्ष चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल भारतीय सैन्य क्षमता का सीमित उदाहरण था। उनका कहना था कि चार दिनों के भीतर ही पाकिस्तान को संघर्षविराम की अपील करनी पड़ी थी, जबकि मौजूदा चरण में कहीं अधिक बड़े स्तर की तैयारी की गई है। किसी भी मोर्चे पर जवाब की तैयारी अधिकारियों ने संकेत दिया कि भविष्य की सैन्य प्रतिक्रिया परिस्थितियों पर निर्भर करेगी, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई जमीन, समुद्र या हवा—तीनों क्षेत्रों में एक साथ की जा सकती है। सेना का उद्देश्य अब केवल जवाब देना नहीं, बल्कि प्रतिरोध क्षमता को निर्णायक स्तर तक ले जाना है। “न्यूक्लियर ब्लफ” पर भी सख्त रुख पश्चिमी कमान के प्रमुख मनोज कुमार कटियार ने पाकिस्तान की ओर से बार-बार दिए जाने वाले परमाणु संकेतों को “न्यूक्लियर ब्लफ” करार देते हुए कहा कि भारत अब ऐसे दबावों में आने वाला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहबाज शरीफ भारत को कड़ी कार्रवाई से रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारतीय सेना हर परिस्थिति के लिए तैयार है। पिछले साल हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन जानकारी के अनुसार, मई 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी, के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सटीक सैन्य कार्रवाई की गई थी। रणनीति अब और आक्रामक सेना के ताजा संकेतों से स्पष्ट है कि भारत ने अपनी सैन्य रणनीति, समन्वित युद्धक क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को पहले से अधिक सशक्त बनाया है। किसी भी संभावित उकसावे की स्थिति में इस बार जवाब अधिक तीव्र, व्यापक और बहु-क्षेत्रीय हो सकता है।

ASSAM ELECTION: असम विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज, NDA में सीट बंटवारे पर 10 मार्च तक अंतिम मुहर

ASSAM ELECTION: गुवाहाटी। असम में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गठबंधन के फार्मूले को अंतिम रूप देने के लिए नई तारीख 10 मार्च तय की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सहयोगी दलों के साथ चर्चा जारी है और कुछ बिंदुओं पर सहमति बननी बाकी है। उन्होंने कहा कि बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ बातचीत एक-दो दिन में पूरी होने की उम्मीद है, जबकि असम गण परिषद के साथ 9–10 मार्च तक सभी मुद्दों पर सहमति बन जाएगी। इसके बाद गठबंधन औपचारिक रूप से सीट बंटवारे की घोषणा करेगा। कुछ दलों से सहमति, कुछ से बातचीत जारी सरमा के अनुसार, राभा हासोंग जौथा संग्राम समिति के साथ सीटों को लेकर समझौता पहले ही हो चुका है। देरी की एक वजह हाल में हुए राज्यसभा चुनाव भी बताए गए, जिनके कारण सहयोगी दल रणनीतिक रूप से सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। असम में एनडीए के प्रमुख घटक दलों में भारतीय जनता पार्टी असम गण परिषद यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट शामिल हैं। इसके अलावा जनशक्ति पार्टी भी गठबंधन का हिस्सा है, हालांकि वर्तमान विधानसभा में उसका प्रतिनिधित्व नहीं है। पहले कई बार बदली समयसीमा मुख्यमंत्री इससे पहले भी सीट बंटवारे को लेकर अलग-अलग समयसीमाएं घोषित कर चुके थे। फरवरी और जनवरी में भी समझौते की बात कही गई थी, लेकिन अंतिम सहमति टलती रही। अब 10 मार्च को निर्णायक तारीख माना जा रहा है। परिसीमन के बाद बदला चुनावी गणित 2023 के परिसीमन के बाद राज्य के कई निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदली हैं। कुछ सीटें सामान्य से आरक्षित श्रेणी में गई हैं, जबकि कुछ आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी में परिवर्तित किया गया है। इससे दलों के बीच सीट समायोजन और अधिक जटिल हो गया है। वर्तमान विधानसभा की स्थिति 126 सदस्यीय असम विधानसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि उसके सहयोगी दल भी सत्ता संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। विपक्षी खेमे में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) शामिल हैं, जिनके पास सीमित संख्या में विधायक हैं। चुनाव से पहले ताकत का संतुलन साधने की कवायद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिसीमन के बाद बदले सामाजिक और भौगोलिक समीकरणों को देखते हुए एनडीए सहयोगियों के बीच सीटों का संतुलन साधना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। 10 मार्च की प्रस्तावित घोषणा को राज्य की चुनावी राजनीति का निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है।