ऑयली और डल स्किन से छुटकारा, समर में ऐसे रखें चेहरा फ्रेश और जवान

नई दिल्ली । जैसे ही तापमान चढ़ता है त्वचा की परेशानी भी बढ़ने लगती है। तेज धूप पसीना और उमस मिलकर स्किन को बेजान चिपचिपी और थकी हुई बना देते हैं। ऑयली स्किन और ज्यादा ऑयली हो जाती है जबकि ड्राई स्किन रूखी और खिंची खिंची महसूस होने लगती है। अगर आप चाहते हैं कि गर्मियों में भी आपकी त्वचा दमकती और जवां दिखे तो अब समय है अपना स्किनकेयर रूटीन बदलने का। सही देखभाल से न सिर्फ टैन और पिंपल्स से बचाव होगा बल्कि नेचुरल ग्लो भी बरकरार रहेगा। क्लींजिंग है सबसे पहला और जरूरी कदम गर्मियों में चेहरे पर धूल पसीना और एक्स्ट्रा ऑयल जल्दी जमा हो जाता है। इसलिए दिन में दो बार माइल्ड पीएच बैलेंस्ड और अल्कोहल फ्री फेस वॉश से चेहरा साफ करें। ऑयली स्किन वालों के लिए जेल बेस्ड क्लींजर बेहतर रहते हैं जबकि ड्राई स्किन वालों को नॉन फोमिंग क्लींजर चुनना चाहिए। इससे पोर्स साफ रहते हैं और मुंहासों का खतरा कम होता है। क्रीम नहीं जेल और वॉटर बेस्ड प्रोडक्ट्स चुनें गर्मियों में भारी क्रीम त्वचा को और चिपचिपा बना सकती हैं। ऐसे में हल्के जेल बेस्ड या वॉटर बेस्ड मॉइश्चराइज़र का इस्तेमाल करें। दिन में दो बार क्लींजिंग टोनिंग और मॉइश्चराइजिंग CTM रूटीन फॉलो करने से स्किन फ्रेश और हेल्दी बनी रहती है।एंटीऑक्सिडेंट सीरम से बढ़ाएं नैचुरल ग्लो अपने समर रूटीन में एंटीऑक्सिडेंट सीरम जरूर शामिल करें। विटामिन C जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं कोलेजन को बढ़ावा देते हैं और स्किन को ब्राइट बनाते हैं। साथ ही डाइट में खट्टे फल हरी पत्तेदार सब्जियां और ग्रीन टी शामिल करना भी फायदेमंद रहेगा। हाइड्रेशन है सबसे बड़ी कुंजी गर्मी में शरीर और त्वचा दोनों को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और जरूरत हो तो हाइड्रेटिंग फेस मिस्ट या एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करें। रात में सोने से पहले हाइड्रेटिंग फेस मास्क लगाने से स्किन को एक्स्ट्रा नमी मिलती है और सुबह चेहरा फ्रेश दिखता है।हफ्ते में दो बार करें एक्सफोलिएशन स्किन से डेड सेल्स हटाने के लिए हफ्ते में एक या दो बार हल्के स्क्रब से एक्सफोलिएट करें। इससे पोर्स साफ रहते हैं और चेहरा साफ सुथरा दिखता है। ध्यान रखें ज्यादा स्क्रबिंग से स्किन को नुकसान भी हो सकता है। सनस्क्रीन कभी न भूलें गर्मियों में यूवी ए और यूवी बी किरणें स्किन को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। घर से बाहर निकलते समय SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन जरूर लगाएं। घर के अंदर रहते हुए भी सनस्क्रीन लगाना फायदेमंद होता है क्योंकि धूप की किरणें खिड़कियों से भी अंदर आ सकती हैं।हल्का मेकअप और सही टोनर का इस्तेमाल भारी मेकअप से बचें क्योंकि यह पोर्स को बंद कर सकता है और पिंपल्स बढ़ा सकता है। एलोवेरा या खीरा बेस्ड टोनर का उपयोग करें जो त्वचा को ठंडक और ताजगी देता है।
ईरान में तबाही: खामनेई की मौत के बाद अयातुल्ला आराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर, अमेरिका-इजराइल पर ईरानी पलटवार

नई दिल्ली। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के अगले दिन ही देश के राजनीतिक और धार्मिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया। 67 वर्षीय अयातुल्ला अलीरेजा आराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आराफी लंबे समय से ईरान की धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वे असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष हैं और गार्जियन काउंसिल के सदस्य रह चुके हैं। वर्तमान में वे ईरान की सेमिनरी प्रणाली का नेतृत्व कर रहे हैं। अब असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स स्थायी सुप्रीम लीडर का चयन करेगी। खामनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिन की छुट्टी घोषित की गई। ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि देश ने एक महान नेता खो दिया है। वहीं, ईरानी सेना ने खतरनाक अभियान की चेतावनी दी और अमेरिकी ठिकानों पर हमले की योजना बनाई। अमेरिका-इजराइल ने किया आक्रमण इजराइल और अमेरिका ने संयुक्त हमले में ईरान पर 24 घंटे में 1,200 से अधिक बम गिराए। इस हमले में सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत हुई। उनके ऑफिस कॉम्प्लेक्स पर 30 मिसाइलों से हमला हुआ। हमले में उनके परिवार के सदस्य और 40 कमांडर्स भी मारे गए। इजराइल के पीएम नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने खामनेई की मौत की पुष्टि की। इस हमले में 200 से अधिक लोग मारे गए और 740 से ज्यादा घायल हुए। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 148 छात्राओं की मौत हो गई। ईरान का जवाबी हमला ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हमलों का जवाब देते हुए 9 देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया। इसमें इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागी गईं। इसके अलावा कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब, UAE में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। दुबई में पाम होटल एंड रिसॉर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमला हुआ। पृष्ठभूमि और विवाद ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच विवाद के मुख्य कारण हैं: न्यूक्लियर प्रोग्राम पर शक, बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास, क्षेत्रीय अस्थिरता और मिडिल ईस्ट में राजनीतिक दखल। अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। इसके जवाब में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज करने और कठोर बयान देने जैसे कदम उठाए। अयातुल्ला अली खामनेई का जीवन खामनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को मशहद में हुआ। उन्होंने 1963 में शाह के खिलाफ भाषण दिया और गिरफ्तार हुए। 1979 की इस्लामी क्रांति में वे प्रमुख आंदोलनकारी बने। 1981 में उन पर बम हमले हुए, उसी वर्ष वे ईरान के राष्ट्रपति बने। 1989 में खोमैनी की मौत के बाद उन्हें सुप्रीम लीडर बनाया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक कट्टर शासन का आरोप लगाते हैं।
वन विभाग का हड़कंप: खैर लकड़ी से भरा ट्रक पकड़ा, तस्कर पथराव करके भाग निकले

नई दिल्ली। ग्वालियर के पहाड़गढ़ क्षेत्र में खैर (खेर) की अवैध लकड़ी की तस्करी रोकने के लिए वन विभाग ने रात्रि गश्त के दौरान बड़ी कार्रवाई की। 28 फरवरी की मध्यरात्रि, सुमावली क्षेत्र के विरुगा गांव के पास वन विभाग की टीम ने खैर की लकड़ी से भरे एक ट्रक (क्रमांक HR 55/AL/3852) को पकड़ने का प्रयास किया। जानकारी के अनुसार, ट्रक चालक और तस्कर वन विभाग की टीम को देखकर ट्रक की रफ्तार बढ़ाकर भागने लगे। वन विभाग की टीम ने उनका पीछा किया और ट्रक को रोकने के लिए लकड़ी से उस पर पथराव करना पड़ा। इस घबराहट में तस्कर ट्रक को बीच रास्ते में छोड़कर अंधेरे में भाग निकले। वन विभाग ने ट्रक को जौरा वन क्षेत्र कार्यालय में जब्त कर आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंप दिया है। यह क्षेत्र लंबे समय से खैर की लकड़ी की तस्करी के लिए जाना जाता है और वन विभाग ने इससे पहले भी कई बार तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की है। जौरा रेंजर आर. प्रजापति ने बताया कि पहाड़गढ़ के जंगलों में खैर की लकड़ी की भारी तस्करी हो रही है और अपराधी अक्सर वन विभाग की नाक के नीचे भी अवैध कार्य करते हैं। उन्होंने कहा, “हमारी टीम ने ट्रक को रोकने के लिए रात्रि में कार्रवाई की, ट्रक तस्करों को छोड़कर भागना पड़ा। ट्रक जब्त कर लिया गया है और कार्रवाई जारी है।” वन विभाग की इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि जंगलों में अवैध लकड़ी तस्करी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आने वाले समय में भी टीम सतर्क रहेगी।
सूदखोरी का 'खूनी' जाल: नर्मदापुरम में व्यापारी के सुसाइड के 30 दिन बाद पिता-पुत्र समेत 3 पर FIR

नर्मदापुरम (सोहागपुर)। कर्ज की किश्तें तो खत्म हो गईं, लेकिन सूदखोरों की भूख शांत नहीं हुई; अंततः एक हंसता-खेलता कारोबारी सिस्टम प्रताड़ना की बलि चढ़ गया। सोहागपुर के रेडीमेड कपड़ा व्यापारी कैलाश आसवानी आत्महत्या मामले में पुलिस ने एक महीने की लंबी जांच के बाद बड़ी कार्रवाई की है। सुसाइड नोट और पुख्ता सबूतों के आधार पर पुलिस ने तीन रसूखदार व्यापारियों के खिलाफ ‘आत्महत्या के लिए उकसाने’ (Abetment to Suicide) का संगीन मामला दर्ज किया है। अपमान की वो आग जिसने जान ले लीकैलाश आसवानी अपने रेडीमेड कपड़ों के व्यवसाय को विस्तार देने के लिए कुछ स्थानीय व्यापारियों के संपर्क में आए थे। पुलिस जांच के अनुसार: सोहागपुर के व्यापारी छबलदास तोलानी, उनका पुत्र हितेश तोलानी और इटारसी का व्यापारी वीरेंद्र जैन। प्रताड़ना की इंतहा: कैलाश लगातार ब्याज और मूल राशि चुका रहे थे, लेकिन आरोपी उनसे ‘मनमाना और अवैध’ ब्याज मांग रहे थे। पैसा न दे पाने की स्थिति में उन्हें सार्वजनिक जगहों पर बेइज्जत किया जाता था। इसी सामाजिक अपमान और मानसिक दबाव ने कैलाश को भीतर से तोड़ दिया। लॉज के कमरा नंबर 107 में खौफनाक अंतबीते 28 जनवरी को कैलाश बिना किसी को बताए घर से निकले और माखननगर स्थित ‘राधे-राधे लॉज’ पहुँच गए। अगले दिन जब उन्होंने दरवाजा नहीं खोला, तो होटल प्रबंधन की सूचना पर पुलिस पहुँची। कमरे के अंदर का दृश्य विचलित करने वाला था; बिस्तर पर कैलाश का निर्जीव शरीर पड़ा था और पास ही सल्फास की खाली डिब्बी मिली। उनके पास से बरामद एक भावुक सुसाइड नोट ने उन चेहरों को बेनकाब कर दिया, जो उनकी मौत की पटकथा लिख रहे थे। पुलिस की कार्रवाई: 30 दिन बाद कसा शिकंजाथाना प्रभारी उषा मरावी के नेतृत्व में पुलिस ने एक महीने तक सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग और गवाहों के बयानों का बारीकी से मिलान किया।शनिवार रात पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। पुलिस अब यह भी जांच रही है कि इन सूदखोरों ने और कितने व्यापारियों को अपनी गिरफ्त में ले रखा है।यह घटना एक कड़वा सबक है कि अवैध ब्याजखोरी का धंधा केवल पैसा नहीं, बल्कि इंसान का मानसिक सुकून और अंततः उसकी सांसें भी छीन लेता है। 30 दिन बाद हुई यह कानूनी कार्रवाई पीड़ित परिवार के लिए इंसाफ की पहली किरण है।
इश्क का 'खूनी' स्टेटस: 350 KM स्कूटी चलाकर प्रेमिका के पास पहुँचा युवक, सीने में गोली मार कर दी जान

उज्जैन। जो इल्ज़ाम बाकी रह जाए, मेरे कफ़न पर लिख देना और कल खेल खत्म मेरा सोशल मीडिया पर ये आखिरी शब्द लिखकर बैतूल के एक युवक ने मौत का ऐसा खौफनाक रास्ता चुना जिसने सबको सुन्न कर दिया। उज्जैन की बंगाली कॉलोनी में शनिवार शाम 21 साल के निखिल आहके ने अपनी प्रेमिका के जीजा के घर पहुँचकर खुद को गोली मार ली। यह आत्महत्या एकतरफा जुनून और टूटते रिश्तों के बीच छिपे मानसिक अवसाद की गवाही दे रही है। बैतूल से उज्जैन: मौत का लंबा सफरनिखिल मूल रूप से बैतूल जिले के सारणी का रहने वाला था। वह घर का इकलौता बेटा था, जिसके पिता की मौत पहले ही एक हादसे में हो चुकी थी। फरवरी से लापता: निखिल फरवरी में काम का बहाना बनाकर घर से निकला था। उसने परिवार के सभी सदस्यों को ब्लॉक कर दिया था ताकि कोई उसकी लोकेशन न जान सके। 350 KM की यात्रा: अपनी प्रेमिका से मिलने की जिद में वह स्कूटी चलाकर करीब 350 किलोमीटर दूर उज्जैन पहुँचा। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से दोनों के बीच बातचीत बंद थी, जिससे निखिल गहरे तनाव में था। वारदात: पलक झपकते ही खत्म हो गई जिंदगीशनिवार शाम जब निखिल अपनी प्रेमिका के रिश्तेदार के घर पहुँचा, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि उसके पास हथियार है। घर के अंदर जाते ही उसने अचानक अपनी छाती पर बंदूक तानी और ट्रिगर दबा दिया। गोली चलने की गूँज सुनते ही इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुँची पुलिस को युवक का शव और उसके आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट मिले, जो उसने सुसाइड से ठीक पहले अपलोड किए थे। तबाही के पीछे का सच: इकलौता बेटा और बेबस माँनिखिल की मौत ने उसके परिवार को सड़क पर ला खड़ा किया है। घर की आर्थिक स्थिति पहले ही ठीक नहीं थी; दादी की पेंशन और परिजनों की मेहनत से घर चलता था। इकलौते बेटे की इस सनक भरी मौत ने उसकी माँ को पूरी तरह तोड़ दिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि युवक के पास अवैध हथियार कहाँ से आया और क्या उसे उकसाने में किसी और की भी भूमिका थी। पुलिस की जांच और CCTVनीलगंगा थाना पुलिस ने घटनास्थल के पास लगे CCTV फुटेज कब्जे में लिए हैं, जिसमें निखिल की आखिरी गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। पुलिस उसके मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट्स को खंगाल रही है ताकि इस आत्मघाती कदम के पीछे की कड़ियों को जोड़ा जा सके। यह घटना याद दिलाती है कि रिश्तों का टूटना दुखद हो सकता है, लेकिन अपनी जान लेना समाधान नहीं; निखिल ने 350 KM का सफर अपनी मोहब्बत पाने के लिए तय किया था, पर अंत में उसने अपने परिवार को कभी न खत्म होने वाला दर्द दे दिया।
ग्वालियर में कोहरे की मार खत्म, बरौनी मेल और सुमावली मेमू फिर पटरी पर, यात्रियों को बड़ी राहत

नई दिल्ली। कोहरा हटते ही ग्वालियर रूट पर ट्रेनों की रफ्तार लौटी, बरौनी मेल और सुमावली मेमू पुराने शेड्यूल पर सर्दियों में घने कोहरे के कारण प्रभावित हुई रेल सेवाएं अब पटरी पर लौट आई हैं। मौसम सामान्य होते ही रेलवे प्रशासन ने ग्वालियर से संचालित कई ट्रेनों के अस्थायी रूप से कम किए गए फेरे बहाल कर दिए हैं। इससे यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। कोहरे के चलते बरौनी मेल के फेरे सप्ताह में दो दिन सोमवार और गुरुवार के लिए कम कर दिए गए थे। इस कारण यह ट्रेन ग्वालियर से केवल पांच दिन ही संचालित हो रही थी। अब रेलवे ने इसे फिर से नियमित शेड्यूल पर चलाने का निर्णय लिया है। ग्वालियर से बिहार जाने वाले यात्रियों के लिए बरौनी मेल अहम कड़ी है। बरौनी के लिए यह एकमात्र सीधी ट्रेन मानी जाती है, जिससे हजारों यात्री नियमित सफर करते हैं। फेरे कम होने से यात्रियों को या तो वैकल्पिक ट्रेनों का सहारा लेना पड़ रहा था या यात्रा स्थगित करनी पड़ रही थी। इसी तरह ग्वालियर-सुमावली रूट पर चलने वाली मेमू ट्रेन का एक फेरा भी अस्थायी रूप से घटाया गया था। इस ट्रेन से रोजाना करीब एक हजार यात्री सफर करते हैं। फेरा कम होने के कारण अन्य ट्रेनों में भीड़ बढ़ गई थी और यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। अब इस मेमू का पूरा संचालन भी पूर्ववत कर दिया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार मौसम की स्थिति की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है। सभी संबंधित ट्रेनों को निर्धारित समय और आवृत्ति के अनुसार चलाया जा रहा है। यात्रियों से अपील की गई है कि यात्रा से पहले ट्रेन का समय एक बार अवश्य जांच लें। रेलवे को उम्मीद है कि ट्रेनों के फेरे बहाल होने से न केवल यात्रियों की परेशानी कम होगी, बल्कि राजस्व में भी वृद्धि होगी।
बॉलीवुड की होली स्पेशल हिट्स, ‘रंग बरसे’ से लेकर ‘होली के दिन’ तक, आज भी हैं एवरग्रीन

नई दिल्ली: होली का त्योहार बस आने ही वाला है और हर तरफ उत्सव का माहौल है। रंग, गुलाल और मिठाईयों के बीच बॉलीवुड के एवरग्रीन होली गाने इस त्योहार को और भी खास बना देते हैं। ये गाने सिर्फ संगीत नहीं बल्कि यादों का हिस्सा बन गए हैं और दशकों से दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए हैं। आज हम बात करेंगे ऐसे 5 गानों की, जो हर होली को जश्न में बदल देते हैं। सबसे पहले आते हैं नरगिस दत्त और राजकुमार पर फिल्माए गए गीत ‘होली आई रे’ की। 1950 में रिलीज हुए इस गाने को शकील बदायूनी ने लिखा था। यह गाना बॉलीवुड के इतिहास में होली के सबसे बेहतरीन और कालजयी गीतों में से एक माना जाता है। आज भी जब यह गाना बजता है, त्योहार की खुशियाँ दोगुनी हो जाती हैं। 1975 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ का गाना ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं’ भी हर होली पर सुना और गाया जाता है। हेमा मालिनी और धर्मेंद्र पर फिल्माया गया यह गाना आनंद बक्शी के लिखे शब्दों और मस्त धुन के कारण हमेशा लोकप्रिय रहा। यह गाना इस त्योहार की मस्ती और उमंग का सबसे बेहतरीन प्रतीक बन चुका है। बॉलीवुड की क्लासिक फिल्मों में ‘सिलसिला’ का गाना ‘रंग बरसे’ कभी पीछे नहीं रहता। अमिताभ बच्चन और रेखा पर फिल्माया गया यह गीत त्रिकोणीय प्रेम कहानी की पृष्ठभूमि में बेहद लोकप्रिय हुआ। इस गाने के बोल हरिवंश राय बच्चन ने लिखे थे और आज भी यह गाना होली पार्टीज़ और उत्सवों में सबका फेवरेट बना हुआ है। 1990 के दशक की यादों में बसे जूही चावला और शाहरुख खान के फिल्म ‘डर’ का गाना ‘अंग से अंग लगाना’ भी होली की धूम में अपना खास स्थान रखता है। इस गीत को आनंद बक्शी ने लिखा और विनोद राठौड़, अल्का याग्निक और सुदेश भोसले ने अपनी आवाज दी। शाहरुख का नेगेटिव रोल और जूही के साथ उनकी केमिस्ट्री इसे आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाती है। और अंत में, अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया गाना ‘होली खेले रघुबीरा’ हमेशा होली के रंगों में चार चाँद लगा देता है। इसकी धुन और गीतकार की कला इसे हर होली पार्टी में बजाने योग्य बनाती है। ये पांच गाने सिर्फ संगीत का आनंद नहीं देते, बल्कि हर बार होली का जश्न और उत्साह दोगुना कर देते हैं। चाहे यह पुरानी फिल्में हों या आधुनिक पार्टीज़, इन गानों की धुन और बोल हर उम्र के लोगों के लिए होली के त्योहार को और रंगीन बना देते हैं। इस होली, इन गानों को सुनकर आप भी अपने घर और दोस्तों के साथ त्योहार का मजा दोगुना कर सकते हैं।
ग्वालियर में ट्रक ने कार को घसीटते हुए पहुंचाया सड़कों पर हड़कंप, चार लोग सुरक्षित

ग्वालियर । ग्वालियर के एनएच-44 पर बझेरा से कल्याणी तिराहे के बीच सोमवार को एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि एक ट्रक ने कार को जोरदार टक्कर मारने के बाद लगभग एक किलोमीटर तक घसीटा। कार में चार लोग सवार थे और भाग्यवश सभी सुरक्षित हैं। हालांकि घटना के दौरान हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास के ग्रामीणों ने पूरी घटना का वीडियो बनाया जो इंटरनेट और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस हादसे ने एनएच-44 पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वाहन चालकों और राहगीरों के लिए यह घटना चेतावनी की तरह है कि हाईवे पर वाहन चालकों की सतर्कता और सुरक्षा मानकों का पालन कितना आवश्यक है। स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारी घटनास्थल का मुआयना कर रहे हैं और ट्रक ड्राइवर की पहचान कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की तैयारी में हैं। पुलिस ने यात्रियों और आम लोगों से अपील की है कि वे हाईवे पर सावधानी बरतें और तेज गति से वाहन चलाने से बचें। वायरल वीडियो में ट्रक और कार के बीच टक्कर का पूरा घटनाक्रम दिखाई दे रहा है जिससे सुरक्षा उपायों और हाईवे पर निगरानी की कमी पर सवाल उठते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए हाईवे पर नियमित चेकिंग स्पीड लिमिट का पालन और बेहतर सड़क सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है। यह हादसा एक बार फिर साबित करता है कि सड़क सुरक्षा में थोड़ी भी लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। कार सवार चारों लोग घायल नहीं हुए लेकिन इस घटना ने हाईवे पर सतर्कता और नियमों का पालन करने की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।
ग्वालियर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: डबरा में 1 करोड़ की सरकारी जमीन अतिक्रमण से मुक्त

ग्वालियर । ग्वालियर जिले में सरकारी जमीनों पर कब्जा हटाने की मुहिम तेज हो गई है। इसी क्रम में रविवार को जिला प्रशासन ने डबरा के ग्राम सहराई में बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग एक करोड़ रुपए मूल्य की शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। कार्रवाई कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर की गई। राजस्व विभाग की टीम ने ग्राम सहराई में खसरा नंबर 127 और 320 पर स्थित कुल 1.07 हेक्टेयर जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। जानकारी के अनुसार कुछ किसानों ने इस सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था और जेसीबी मशीन की मदद से मेड़ बनाकर सीमांकन कर लिया था। प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी से बनाई गई मेड़ को हटवाया और जमीन को पुनः शासकीय नियंत्रण में लिया। कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस बल तैनात रहा। डबरा नगर पालिका का अमला भी मौके पर मौजूद रहा। अतिक्रमण हटाने के बाद मुक्त कराई गई भूमि को विधिवत रूप से डबरा नगर पालिका को सौंप दिया गया। प्रशासन के अनुसार इस जमीन का अनुमानित बाजार मूल्य करीब एक करोड़ रुपए है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार की मंशा के अनुरूप जिलेभर में शासकीय भूमि की सुरक्षा और अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा न करें, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
थलापति विजय और संगीता विवाद: त्रिशा कृष्णन का पुराना वीडियो फिर वायरल

नई दिल्ली: थलापति विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम ने तलाक के लिए अर्जी दी है संगीता ने अपनी याचिका में विजय पर किसी एक्ट्रेस के साथ अवैध (illicit) संबंध होने का गंभीर आरोप लगाया हालांकि याचिका में किसी का नाम साफ तौर पर नहीं लिखा गया इंटरनेट यूजर्स ने तुरंत इस मामले को विजय और त्रिशा कृष्णन के पुराने रिश्तों की अफवाहों से जोड़ दिया विजय-संगीत के विवाद के बीच त्रिशा का एक पुराना वीडियो फिर से वायरल हो रहा है यह वीडियो पिछले साल दुबई में हुए साइमा अवॉर्ड्स का है वहाँ त्रिशा ने विजय को उनकी नई पारी के लिए बधाई देते हुए कहा ‘वह जो भी सपना देखें वह पूरा हो क्योंकि वह इसके हकदार हैं’ इस बयान ने फैंस में उत्सुकता बढ़ा दी लेकिन दोनों ने हमेशा अफवाहों का खंडन किया त्रिशा और विजय का नाम एक साथ जुड़ने की सबसे बड़ी वजह उनकी शानदार ऑन-स्क्रीन बॉन्डिंग है ‘घिल्ली’ और ‘थिरुपाची’ जैसी फिल्मों ने इस जोड़ी को तमिल सिनेमा की सबसे पसंदीदा जोड़ी बना दिया था फिल्म ‘घिल्ली’ के दौरान इंडस्ट्री में चर्चाएं थीं कि दोनों के बीच दोस्ती से बढ़कर कुछ है ‘कुरुवी’ के बाद दोनों ने लगभग 15 साल तक साथ काम नहीं किया जिससे इन अटकलों को और हवा मिली उस समय खबरें भी आई थीं कि विजय के परिवार ने उन्हें त्रिशा से दूरी बनाए रखने की सलाह दी थी हालांकि दोनों कलाकारों ने हमेशा इन बातों को नकारा और खुद को सिर्फ अच्छे दोस्त बताया साल 2023 में जब फिल्म ‘लियो’ में जोड़ी दोबारा पर्दे पर आई तो फैंस की पुरानी यादें ताजा हो गई इस रीयूनियन ने उत्साह बढ़ाया और पुरानी गॉसिप्स को भी फिर से जिंदा कर दिया थलापति विजय और संगीता की शादी 1999 में हुई थी और उनके दो बच्चे हैं विजय हमेशा अपनी निजी जिंदगी को लाइमलाइट से दूर रखते आए हैं फिलहाल इस पूरे मामले पर उनकी या त्रिशा की तरफ से कोई आधिकारिक official बयान नहीं आया इस विवाद ने सोशल मीडिया पर काफी हलचल मचा दी है और फैंस लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं इस पूरे मामले ने यह दिखाया कि सेलिब्रिटी जीवन में निजी विवाद कैसे जल्दी ही अफवाहों और वायरल वीडियो का हिस्सा बन जाते हैं लेकिन वास्तविकता सिर्फ उन पर ही निर्भर करती है और अभी तक कोई स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है