इस सप्ताह का राशिफल: 1 मार्च – 7 मार्च 2026, मौका और सतर्कता दोनों साथ
साप्ताहिक राशिफल 1 मार्च से 7 मार्च 2026यह सप्ताह मिश्रित परिणाम लेकर आया है। आर्थिक और करियर के मामलों में कुछ जातकों के लिए सफलता के योग हैं, जबकि स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों में सतर्कता जरूरी है। धैर्य और समझदारी से उठाए गए कदम लाभकारी रहेंगे। मेष (Aries)स्वास्थ्य में गिरावट संभव है, सतर्क रहें। आर्थिक दृष्टि से लाभ के योग हैं और व्यापार या नौकरी में सफलता मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में नई साझेदारियों और अवसरों के संकेत हैं। लव लाइफ में संवाद पर ध्यान दें, मतभेद को बिगड़ने न दें। वृषभ (Taurus)स्वास्थ्य में गिरावट और मानसिक तनाव संभव है। आर्थिक उतार-चढ़ाव रहेंगे, खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है। कार्य में बदलाव और अधिक परिश्रम आवश्यक है। लव लाइफ में मतभेद हो सकते हैं, समझदारी से समाधान करें। मिथुन (Gemini)स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आर्थिक लाभ और प्रॉपर्टी या शेयर निवेश में फायदा हो सकता है। करियर में नई जिम्मेदारियां और पदोन्नति के योग हैं। लव लाइफ में पार्टनर का सहयोग मिलेगा, यात्रा और सरप्राइज की संभावना है। कर्क (Cancer)स्वास्थ्य अच्छा है, योग और व्यायाम लाभकारी रहेंगे। आर्थिक दृष्टि से लाभ और व्यापार में वृद्धि संभव है। करियर में नए अवसर और विस्तार मिल सकते हैं। लव लाइफ और पारिवारिक तालमेल अच्छा रहेगा। सिंह (Leo)मानसिक तनाव और शारीरिक कष्ट के योग हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य, बड़े रिस्क न लें। करियर में विरोधियों के बावजूद मेहनत जरूरी है। लव लाइफ में झगड़े से बचें और धैर्य रखें। कन्या (Virgo)स्वास्थ्य पर सतर्क रहें, बड़ी बीमारी का जोखिम है। आर्थिक लाभ कम है, व्यर्थ खर्चों पर नियंत्रण रखें। करियर में प्रतीक्षा आवश्यक, परिश्रम जारी रखें। लव लाइफ में मतभेद हो सकते हैं, व्यवहार सुधारें। तुला (Libra)स्वास्थ्य पर यात्रा और काम के दबाव से सतर्क रहें। निवेश में सोच-समझकर निर्णय लें। करियर में स्थिरता से लाभ और बड़ी सफलता संभव है। लव लाइफ में पार्टनर का सहयोग मिलेगा, समय आनंदमय रहेगा। वृश्चिक (Scorpio)स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, पुरानी बीमारियों में राहत मिलेगी। आर्थिक लाभ और निवेश में वृद्धि संभव है। कार्यक्षेत्र में प्रदर्शन और सम्मान प्राप्त होगा। लव लाइफ में पार्टनर के साथ समय व्यतीत करें और निर्णय साझा करें। धनु (Sagittarius)स्वास्थ्य अच्छा, परिवार का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। व्यापार और अन्य क्षेत्रों से लाभ संभव है। करियर में नई सफलता और अवसर मिल सकते हैं। लव लाइफ में मतभेद हैं, समझदारी से संभालें। मकर (Capricorn)मानसिक तनाव के योग हैं, सतर्क रहें। आर्थिक गिरावट संभव, खर्चों पर नियंत्रण रखें। करियर में अधिक परिश्रम की आवश्यकता है, सफलता धीरे मिलेगी। लव लाइफ में मतभेद खत्म होंगे, समय व्यतीत करें। कुंभ (Aquarius)स्वास्थ्य में सुधार और अच्छा समय। आर्थिक लाभ और बड़े निर्णय सफल होंगे। करियर में नई शुरुआत और सफलता संभव है। लव लाइफ में तालमेल अच्छा रहेगा, यात्रा और आनंद के योग हैं। मीन (Pisces)स्वास्थ्य सतर्कता मांगता है, तनाव से स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। आर्थिक चुनौतियों से सावधान रहें। करियर में समर्थन मिलेगा, सफलता संभव है। लव लाइफ में मतभेद बढ़ सकते हैं, संवाद से समाधान करें। यह सप्ताह संतुलन, समझदारी और धैर्य से कदम उठाने का है। आर्थिक और करियर के क्षेत्र में अवसर हैं, पर स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों में सतर्कता जरूरी है।
ग्वालियर बाजार में होली की धूम, स्मोक शॉट और इलेक्ट्रिक पिचकारियों ने बच्चों और युवाओं को किया मंत्रमुग्ध

ग्वालियर । ग्वालियर में होली का त्योहार करीब आते ही बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। हर्बल रंग, अबीर-गुलाल और नई डिज़ाइन की पिचकारियों की लंबी रेंज दुकानों पर सज चुकी है। ग्राहक परिवार के साथ खरीदारी करने पहुंच रहे हैं और दुकानों पर भीड़ लगातार बढ़ रही है। दुकानदार विकास गुप्ता के मुताबिक इस बार बाजार में कई नए और आकर्षक आइटम आए हैं। ग्राहक इन नए कलेक्शन को काफी पसंद कर रहे हैं। स्मोक शॉट और इलेक्ट्रिक पिचकारियां इस बार सबसे बड़ा आकर्षण हैं। स्मोक शॉट से रंग आसमान में फैलते हैं, वहीं इलेक्ट्रिक शॉट गन पानी में डालते ही रंगीन पानी भर देती है। इसके अलावा हनुमान जी की गदा, परशुराम का फरसा और भगवान राम के धनुष-बाण की डिजाइन वाली पिचकारियां भी बच्चों और युवाओं में खास लोकप्रिय हो रही हैं। बाजार में रंग-बिरंगी ड्रेस की भी मांग बढ़ी है। सफेद शर्ट, कुर्ती, कुर्ता-पायजामा, जयपुरी जूती, पगड़ी और ब्लैक गॉगल की बिक्री में इजाफा हुआ है। छोटे बच्चे रंग-बिरंगे कपड़ों और एक्सेसरीज़ के साथ खरीदारी कर रहे हैं। शहर की कई कॉलोनियों और सोसायटियों में होली के दिन सामूहिक कार्यक्रम होंगे। लोग निर्धारित समय पर डीजे और पारंपरिक पकवानों के साथ त्योहार का आनंद लेंगे। कलेक्टर रुचिका चौहान ने होली के अवसर पर 4 मार्च को जिले में शासकीय अवकाश घोषित किया है। सभी सरकारी कार्यालय 5 मार्च से फिर से खुलेंगे।
ईरान संकट: खामेनेई की मौत के बीच भोपाल में शिया समुदाय ने दी श्रद्धांजलि, जोहर नमाज़ के बाद विशेष कार्यक्रम

भोपाल। भोपाल के शिया समुदाय ने आज शिया मस्जिद में जोहर की नमाज़ के बाद सम्मान और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़े पैमाने पर लोगों ने भाग लिया। इस सभा में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके जीवन, संघर्ष और योगदान पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम शांतिपूर्वक आयोजित किया गया और आयोजकों ने समुदाय के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। क्या हुआ — घटना और पुष्टि:28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों और राज्य‑स्तरीय घोषणाओं में आ चुकी है। संयुक्त आक्रमण में कई वरिष्ठ अधिकारियों व सैन्य नेतृत्व को भी निशाना बनाया गया था। ईरानी सरकारी मीडिया ने खामेनेई की मौत की पुष्टि की और 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। खामेनेई का राजनीतिक व धार्मिक सफरखामेनेई ने 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद तेजी से राजनीतिक उभरते हुए नेतृत्व में खुद को स्थापित किया।1981‑88 के दौरान उन्होंने राजनीतिक भूमिकाएँ निभाईं और 1989 में ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) बने।इस पद पर रहते हुए उन्होंने देश की राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक नीतियों को 35 से अधिक वर्षों तक नियंत्रित किया। ईरानी शासन व्यवस्था के मुताबिक सुप्रीम लीडर के पद के लिए ‘अयातुल्ला’ का धार्मिक दर्जा आवश्यक है, जो बताता है कि यह पद सिर्फ एक उच्च धार्मिक नेता को ही मिल सकता है। अमेरिका और इजरायल का संघर्षअमेरिका और इजरायल ने ईरान पर पिछले कुछ महीनों से लगातार दबाव बनाया था, विशेष रूप से परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल विकास और मध्य पूर्व में प्रभाव विस्तार के मद्देनजर। ईरान पर यह हमला उस तनाव का हिस्सा माना जा रहा है जिसने क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। क्या आगे हो सकता है?खामेनेई की मौत न केवल ईरान की आंतरिक राजनीति में विघटन का संकेत है, बल्कि इससे मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव भी आने की आशंका जताई जा रही है। संभावित नेतृत्व संकट और विद्रोही आंदोलन दोनों ही इस क्षेत्र में बढ़ सकती हैं।
भोपाल में होली मेला: ऑर्गेनिक गुलाल, महुआ के लड्डू और रोजगार का रंगीन संगम

नई दिल्ली। भोपाल में होली के अवसर पर डीबी मॉल के पास भोपाल हाट में 21 फरवरी से 2 मार्च तक आयोजित होली मेला अपने आप में खास रहा। इस मेले का उद्देश्य आजिविका समूहों की महिलाओं को बाजार उपलब्ध कराना, उनके हाथों से बने उत्पादों को पहचान दिलाना और लोगों को शुद्ध, घरेलू सामान उपलब्ध कराना है। 15 से 20 जिलों की दीदियां आईंभोपाल, भिंड, मुरैना, इंदौर, सीहोर, सागर, सीधी, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, सिंगरौली, सतना, दमोह, छतरपुर, निवाड़ी, धार, झाबुआ, मंदसौर, खरगोन, बैतूल, विदिशा और बुरहानपुर से आजीविका दीदियां अपने उत्पाद बेचने आईं। ऑर्गेनिक गुलाल और पारंपरिक व्यंजनबालाघाट की दीदियों ने ऑर्गेनिक गुलाल बनाया: अरारोट और पलाश के फूल सुखाकर, हल्दी, बेसन और चुकंदर जैसी प्राकृतिक सामग्री से रंग तैयार किया गया।सीधी से महुआ के लड्डू: जोड़ों के दर्द, कमजोरी और सांस की तकलीफ में मददगार।अनूपपुर के कोदो बिस्किट: किसानों से सीधे लेकर, बिना मिलावट के हाथों से तैयार।शुद्ध मसाले, खोया और पारंपरिक गुजिया भी उपलब्ध। रंगों के साथ रोजगार का उत्सवयह मेला केवल खरीद-बिक्री का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता और हुनर का प्रदर्शन है। आजीविका मार्ट के माध्यम से महिलाओं को अपनी कला और मेहनत दिखाने का मंच मिला।धर्मेंद्र सेठ ने बताया कि मेला इस लिहाज से खास है कि घर का बना शुद्ध सामान लोगों को मिल रहा है, जिससे भरोसे के साथ खरीदारी संभव हो रही है।होली के रंगों के साथ यह मेला आजीविका का संगम न केवल त्योहार को खास बना रहा है, बल्कि ग्रामीण बहनों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
युद्ध की आशंका के बीच अमेरिका-इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला, तनाव चरम पर!

नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को एक संयुक्त सैन्य हमला शुरू किया, जिसे कोड‑नेम “Operation Epic Fury / Lion’s Roar” कहा जा रहा है। इस बड़े ऑपरेशन में दोनों देशों ने ईरान के कई शहरों और सैन्य‑रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें तेहरान, इस्फ़हान, नतांज़ और फ़ोर्डो सहित कई प्रमुख लक्ष्य शामिल थे। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरानी जनता से अपील की कि वे “अपने भाग्य की बागडोर अपने हाथ में लें” और **1979 से शासन कर रहे इस्लामी नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह करें।” इस हमले को उन्होंने “आगामी खतरों को ख़त्म करने” और ईरान की सैन्य क्षमता को क्षतिग्रस्थ बनाने का लक्ष्य बताया। हमले की मौजूदा स्थितिसंयुक्त हमले में 200 से अधिक लक्ष्य पर हमला किया गया, और ईरानी सुरक्षा नेतृत्व के कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए या प्रभावित हुए हैं। ईरान की ओर से जवाबी मिसाइलें दागी गईं, जिसमें मिसाइल और ड्रोन हमले शामिल हैं और कई देशों में (जैसे अरब अमीरात, कुवैत, बहरैन और कतर) सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय कर दी गई है। ईरानी नागरिकों में भय और पैनिक फैल चुका है; लोगों ने राजधानी से बाहर भागने और पेट्रोल आदि सामान जमा करने जैसे हालात देखे जा रहे हैं। नागरिक असर और क्षेत्रीय तनाव बड़े पैमाने पर विस्फोटों और हमलों के कारण ईरान में भारी जनहानि और जन‑जीवन प्रभावित हुआ है, और कई देशों ने अपने नागरिकों को सावधानी बरतने की चेतावनी जारी की है। इस तनाव के चलते कई देशों का एयरस्पेस भी अस्थायी रूप से बंद हुआ है और यात्रियों की उड़ानों में व्यवधान आया है। ये हमला एक मध्य पूर्व में सबसे बड़े सैन्य संघर्षों में से एक माना जा रहा है, जो पहले की 12‑दिन की जंग के बाद क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा रहा है।
खामेनेई के निधन के बाद ईरान में सत्ता संकट, सेना में भ्रम; नए सुप्रीम लीडर की जल्द नियुक्ति की मांग तेज

नई दिल्ली । ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन की पुष्टि के बाद देश की सत्ता और सैन्य ढांचे में गहरा संकट उभर आया है। ईरानी मीडिया में आई खबरों के अनुसार खामेनेई के 47 साल लंबे प्रभावशाली नेतृत्व का अंत होते ही इस्लामिक गणतंत्र की चेन ऑफ कमांड में अस्थिरता और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। अब सत्ता के शीर्ष पद पर नए नेतृत्व की नियुक्ति को लेकर अंदरूनी हलचल तेज हो गई है। रिपोर्टों के मुताबिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। सूत्रों का दावा है कि IRGC कानूनी प्रक्रिया से हटकर जल्द से जल्द नए नेता को तख्त पर बैठाने के पक्ष में है। सामान्यतः सुप्रीम लीडर का चुनाव संवैधानिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स द्वारा किया जाता है लेकिन जारी हवाई हमलों और अस्थिर सुरक्षा हालात के कारण उसका सत्र बुलाना मुश्किल बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि IRGC का बचा हुआ कमांड ढांचा 1 मार्च की सुबह तक नए नेतृत्व पर अंतिम निर्णय चाहता है। सूत्रों का कहना है कि खामेनेई की मौत के बाद सुरक्षा और सैन्य तंत्र में तालमेल की कमी साफ दिख रही है। आदेशों के प्रवाह में बाधा आ रही है और कुछ हिस्सों में कमांड संरचना लगभग बिखर गई है। इससे संकट प्रबंधन और जमीनी स्तर पर फैसले लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कुछ सैन्य कमांडर और निचले रैंक के कर्मी अपने बेस पर रिपोर्ट नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति ने IRGC की चिंता और बढ़ा दी है। आशंका जताई जा रही है कि रविवार सुबह तक देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग सड़कों पर उतर सकते हैं और विरोध प्रदर्शनों का नया दौर शुरू हो सकता है। राजनीतिक अनिश्चितता और संभावित जन असंतोष ने हालात को और जटिल बना दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ईरान पर हालिया हमले विफल कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम थे। अधिकारी के अनुसार अमेरिका ने ईरान को स्थायी रूप से मुफ्त परमाणु ईंधन देने की पेशकश की थी लेकिन तेहरान ने यूरेनियम संवर्धन की अपनी क्षमता छोड़ने से इनकार कर दिया। अमेरिका इसे परमाणु हथियार विकसित करने की संभावित कोशिश के रूप में देखता रहा है। साथ ही ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय उग्रवादी समूहों के समर्थन जैसे मुद्दों पर भी बातचीत से दूरी बनाए रखी। खामेनेई की मौत ऐसे समय में हुई है जब ईरान पहले से ही बाहरी सैन्य दबाव और आंतरिक असंतोष का सामना कर रहा है। नेतृत्व का यह खालीपन न केवल राजनीतिक बल्कि सैन्य और वैचारिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव ला सकता है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ईरान संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नया सुप्रीम लीडर चुनेगा या IRGC के दबाव में कोई त्वरित और असाधारण फैसला लिया जाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ताला: ईरान के फैसले से तेल सप्लाई पर संकट, दुनिया में बढ़ी युद्ध की आशंका

नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते टकराव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का कदम उठाया है। रिपोर्टों के अनुसार अब इस जलडमरूमध्य से किसी भी जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं दी जा रही। यह फैसला अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हालिया हमलों के जवाब में लिया गया बताया जा रहा है। हालांकि तेहरान ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है लेकिन समुद्री सुरक्षा एजेंसियों को मिले संदेशों ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। यूरोपीय संघ की नौसैनिक मिशन ऑपरेशन एस्पाइड्स के एक अधिकारी के मुताबिक शनिवार को होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को वीएचएफ रेडियो पर चेतावनी संदेश मिला कि जलडमरूमध्य से कोई भी पोत पार नहीं हो सकता। ये संदेश कथित तौर पर इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की ओर से प्रसारित किए गए। इसी बीच यूके मारिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने भी जहाजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। अमेरिका ने अपने व्यावसायिक जहाजों को खाड़ी क्षेत्र से दूर रहने की चेतावनी जारी की है ताकि किसी संभावित हमले से बचा जा सके। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी है। सऊदी अरब ईरान इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का निर्यात इसी मार्ग से होकर ओमान की खाड़ी और अरब सागर तक पहुंचता है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में अगर यह मार्ग बाधित होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है जिसका असर ईंधन परिवहन और महंगाई दर पर पड़ेगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले ही अस्थिरता से जूझ रही है ऐसे में यह घटनाक्रम नई चुनौती बनकर उभरा है। तनाव की जड़ हालिया सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है। अमेरिका और इजरायल ने कथित तौर पर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरान पर बड़े हमले किए। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के कार्यालय के पास हमलों की खबरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन कार्रवाइयों को मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस बताया। जवाब में ईरान ने ट्रुथफुल प्रॉमिस 4 अभियान चलाते हुए इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। कतर यूएई सऊदी अरब और जॉर्डन जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों को भी निशाना बनाए जाने की खबरों ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। तेहरान में धमाके और तेल अवीव में सायरन इस संघर्ष की गंभीरता को दर्शा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान लंबे समय तक जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं रख पाएगा क्योंकि इससे उसके अपने तेल निर्यात और अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। फिर भी यह कदम एक रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है तो घरेलू बाजार में ईंधन महंगा हो सकता है जिससे महंगाई और व्यापार संतुलन पर दबाव बढ़ेगा। कुल मिलाकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा यह तनाव न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है।
जलालाबाद में पाकिस्तानी फाइटर जेट क्रैश, पायलट जिंदा पकड़ा गया अफगानिस्तान-पाक संघर्ष ने लिया खतरनाक मोड़

नई दिल्ली । अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सैन्य टकराव शनिवार सुबह उस समय और भड़क उठा जब पूर्वी अफगानिस्तान के शहर जलालाबाद में एक पाकिस्तानी लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अफगान सैन्य और पुलिस सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी AFP ने दावा किया है कि विमान का पायलट जिंदा पकड़ा गया है और उसे अफगान सेना ने बंदी बना लिया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष को एक निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंचा दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों और एएफपी के पत्रकारों के मुताबिक शनिवार सुबह शहर खासकर हवाई अड्डे के आसपास दो जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी। धमाकों से ठीक पहले आसमान में तेज रफ्तार से उड़ते जेट की गड़गड़ाहट सुनाई दी थी। कुछ ही मिनटों में विमान के क्रैश होने की खबर फैल गई। रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम जलालाबाद जो नंगरहार प्रांत की राजधानी है और काबुल से पाकिस्तानी सीमा को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित है अब इस संघर्ष का नया केंद्र बनता दिख रहा है। यहां हुआ यह घटनाक्रम सीधे तौर पर पाकिस्तान की सैन्य सक्रियता और अफगानिस्तान के कड़े प्रतिरोध का संकेत माना जा रहा है। इस बीच पाकिस्तान सरकार ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। पाकिस्तान के राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने एक टीवी कार्यक्रम में स्पष्ट कहा कि जब तक तालिबान अपनी गुरिल्ला मानसिकता नहीं छोड़ता पाकिस्तान की नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा यह युद्ध हम जीतेंगे और इसका अंत तय है। अगर यह सीधे रास्ते से हल नहीं हुआ तो हम कठोर दृष्टिकोण अपनाकर इसे पूरी तरह समाप्त करेंगे। उनके इस बयान ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। एक ओर सीमा पर तोपों और विमानों की गड़गड़ाहट सुनाई दे रही है वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान कूटनीतिक मोर्चे पर भी सक्रिय हो गया है। अफगान विदेश मंत्रालय के दूसरे राजनीतिक निदेशक जाकिर जलाली के अनुसार अफगानिस्तान वैध और जिम्मेदार सैन्य अभियान के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपनी स्थिति से अवगत करा रहा है। अफगान अधिकारियों ने तुर्किये कतर और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से विस्तृत परामर्श किया है। तालिबान प्रशासन इन देशों के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है कि उसकी सैन्य कार्रवाई केवल पाकिस्तानी घुसपैठ के जवाब में की जा रही रक्षात्मक कार्रवाई है। शुक्रवार को तालिबान वायुसेना द्वारा इस्लामाबाद के नजदीक किए गए हमलों के बाद शनिवार को जलालाबाद में पाकिस्तानी विमान का गिरना और पायलट का पकड़ा जाना पाकिस्तान के लिए बड़ा सैन्य और कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच संवाद लगभग टूट चुका है और हालात सीमाई झड़प से आगे बढ़कर व्यापक युद्ध की शक्ल लेते दिख रहे हैं। जलालाबाद और आसपास के इलाकों में आम नागरिकों के बीच भय और अनिश्चितता का माहौल है। लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन को मजबूर हैं जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस तेजी से बिगड़ते घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
आखिरी ओवर में टूटा सपना: कप्तान दसुन शनाका ने फैंस से मांगी माफी, बताई बाहर होने की वजह

नई दिल्ली । टी20 विश्व कप 2026 में श्रीलंका का सफर बेहद नाटकीय लेकिन निराशाजनक अंदाज में खत्म हुआ। सुपर 8 के अपने आखिरी मुकाबले में पाकिस्तान के खिलाफ मिली रोमांचक हार ने टीम को सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर कर दिया। मैच इतना करीबी था कि आखिरी दो गेंदों तक श्रीलंका जीत की दहलीज पर खड़ा था लेकिन बाज़ी पाकिस्तान के पक्ष में पलट गई। इस हार के बाद श्रीलंकाई कप्तान दसुन शनाका ने न सिर्फ अपनी निराशा जाहिर की बल्कि देश के फैंस से माफी भी मांगी। पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में शनाका ने स्वीकार किया कि वे मैच को फिनिश कर सकते थे लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह बेहद करीबी मुकाबला था और वे जिम्मेदारी लेते हैं कि आखिरी क्षणों में टीम जीत दर्ज नहीं कर सकी। उन्होंने पाकिस्तान के तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने दबाव के क्षणों में शानदार गेंदबाजी की जिसने मैच का रुख बदल दिया। पूरे टूर्नामेंट पर नजर डालें तो यह श्रीलंका के लिए कठिन अभियान रहा। टीम ने अपने सात में से चार मैच गंवाए जिनमें सुपर 8 के तीन मुकाबले शामिल थे। अपनी सरजमीं पर खेलने के बावजूद टीम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। शनाका ने साफ कहा कि चोटों ने टीम का संतुलन बिगाड़ दिया। प्रमुख खिलाड़ियों की अनुपस्थिति ने संयोजन और रणनीति दोनों को प्रभावित किया जिसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। खास तौर पर वानिंदु हसरंगा और मथीशा पथिराना के टूर्नामेंट से बाहर होने को कप्तान ने बड़ा झटका बताया। शनाका ने कहा कि ये दोनों सिर्फ खास गेंदबाज नहीं बल्कि टीम की रणनीतिक ताकत थे। वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर ऐसे खिलाड़ियों की कमी साफ महसूस होती है। उनके अनुसार अगर टीम पूरी तरह फिट होती तो सेमीफाइनल तक पहुंचना असंभव नहीं था। आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए शनाका ने आत्ममंथन का संकेत दिया। उन्होंने माना कि एक खिलाड़ी होने के नाते दबाव महसूस होता है और कभी कभी प्रतिक्रिया भावनात्मक हो सकती है। उन्होंने फैंस से माफी मांगते हुए कहा कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था और वे भविष्य में इस बात का विशेष ध्यान रखेंगे। उनका यह भावुक संदेश साफ करता है कि हार ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया है। हालांकि निराशा के बीच उन्होंने भविष्य की उम्मीद भी दिखाई। युवा बल्लेबाज पवन रथनायके की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि वे लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और क्रीज का शानदार उपयोग कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने वेलालगे जैसे उभरते खिलाड़ियों को श्रीलंकाई क्रिकेट का उज्ज्वल भविष्य बताया। शनाका ने भरोसा जताया कि चोटिल खिलाड़ी जल्द वापसी करेंगे और टीम नई ऊर्जा के साथ मैदान में उतरेगी। अंत में सिंहली भाषा में फैंस को संबोधित करते हुए शनाका ने दिल से धन्यवाद दिया और कहा कि दर्शकों का समर्थन देखकर उन्हें जीत की उम्मीद थी। उन्होंने स्वीकार किया कि हार से वे बेहद निराश हैं लेकिन एक टीम के रूप में वे मजबूत वापसी का वादा करते हैं। श्रीलंका का यह विश्व कप अभियान भले ही अधूरा रह गया हो लेकिन कप्तान का आत्मस्वीकृति और जिम्मेदारी लेना आने वाले समय के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
युद्ध लंबा चला तो ईरान टिक नहीं पाएगा, चीन का समर्थन भी पर्याप्त नहीं, जाने एक्सपर्ट्स का विश्लेषण

नई दिल्ली। अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और इजरायल पर हुए हमलों के बाद मध्य-पूर्व के कई देशों में युद्ध जैसी स्थिति बन चुकी है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह लंबे समय तक अमेरिका और इजरायल जैसे शक्तिशाली देशों का मुकाबला कर सके।अमेरिका के तीन प्रमुख लक्ष्य सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह के अनुसार, अमेरिका के ईरान पर हमले के पीछे तीन मुख्य उद्देश्य हैं: ईरान में सत्ता परिवर्तन लाना, उसके मिसाइल कार्यक्रम को नष्ट करना और परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ने से रोकना। अमेरिका चाहता है कि ईरान भविष्य में किसी भी प्रकार का खतरा न बन सके। वहीं, ईरान की जवाबी कार्रवाई केवल उन हमलों का प्रतिकार है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि उसकी ताकत इतनी नहीं कि वह लंबे समय तक संघर्ष जारी रख सके। उसे अपने मिसाइल और सीमित संसाधनों के सहारे अमेरिका और इजरायल का मुकाबला करना कठिन होगा, इसलिए अंततः बातचीत की मेज पर आने की नौबत आएगी।ईरान की सीमित ताकत पूर्व एयर वाइस मार्शल ओपी तिवारी के अनुसार, ईरान की एयरफोर्स कमजोर है और हिज़बुल्ला तथा कुछ शिया संगठनों का समर्थन पहले जैसा नहीं रहा। जबकि रूस फिलहाल हथियारों की मदद नहीं दे सकता, चीन कुछ हथियारों से सहायता कर सकता है, लेकिन यह भी अमेरिका और इजरायल के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि ईरान के लिए लंबा युद्ध संभव नहीं और उसकी संभावित तबाही तय है। तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध से मध्य-पूर्व में तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। भारत इन देशों से तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों और आपूर्ति में बाधा देश के लिए चुनौती बनेगी। अमेरिका के पास वेनेजुएला से तेल का विकल्प मौजूद है, जबकि भारत रूस से तेल खरीदने का विकल्प इस्तेमाल कर सकता है।भारतीय नागरिकों की सुरक्षा चुनौती लेफ्टिनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह ने बताया कि ईरान, इजरायल, कतर, सऊदी अरब, बहरीन और यूएई में लाखों भारतीय नागरिक रहते हैं। युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होगा। हालांकि ईरान के हमले ज्यादातर अमेरिकी बेसों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन मिसाइलों के भटकने का खतरा भी पूरी तरह टला नहीं जा सकता।