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होली के अवसर पर कोटा–जबलपुर स्पेशल ट्रेन में बढ़ाई गई सुविधा, 17 डिब्बों के साथ चलेगी

जबलपुर: होली के त्योहारी मौसम में यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए पश्चिम मध्य रेल ने कोटा–जबलपुर होली स्पेशल ट्रेन में 5 अतिरिक्त कोच जोड़ने का निर्णय लिया है। इस कदम के बाद विशेष ट्रेन अब कुल 17 डिब्बों के साथ चलेगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था 1 से 4 मार्च के बीच लागू रहेगी, ताकि त्योहार के दौरान यात्रा करने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके। अतिरिक्त कोचों में 3 स्लीपर, 1 एसी-3 टियर और 1 एसी-3 टियर सह एसी-2 टियर कोच शामिल किए गए हैं। इस वृद्धि के बाद ट्रेन की कुल संरचना में 6 सामान्य श्रेणी, 5 स्लीपर, 2 वातानुकूलित श्रेणी और 2 बैठक श्रेणी के डिब्बे उपलब्ध रहेंगे। रेलवे का उद्देश्य यात्रियों की लंबी वेटिंग सूची कम करना और सुरक्षित व आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करना है। गाड़ी संख्या 09806 कोटा से जबलपुर के लिए 1 और 3 मार्च को शाम 6:30 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन सुबह 6:55 बजे जबलपुर पहुंचेगी। वहीं वापसी में गाड़ी संख्या 09805 2 और 4 मार्च को सुबह 9:10 बजे जबलपुर से रवाना होकर रात 10:15 बजे कोटा पहुंचेगी। रेलवे के अनुसार इस विशेष सेवा से मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच त्योहारी सीजन में आवागमन और भी आसान होगा। त्योहारी सीजन में ट्रेनों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए भारतीय रेल समय-समय पर विशेष सेवाएं शुरू करती रही है। इस बार भी यात्रियों की भारी मांग और अग्रिम आरक्षण की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त कोच जोड़ने का निर्णय लिया गया। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि होली के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक, छात्र और परिवार अपने गृह नगर जाते हैं, जिससे नियमित ट्रेनों पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में विशेष ट्रेन और अतिरिक्त कोच यात्रियों के लिए राहत का कदम साबित होंगे। यात्रियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। कई यात्रियों का कहना है कि पिछले वर्षों में होली के समय टिकट मिलना मुश्किल हो जाता था। इस बार अतिरिक्त कोच जुड़ने से यात्रा अधिक सुविधाजनक और आरामदायक होगी। रेलवे प्रशासन ने भी यात्रियों से अपील की है कि वे समय पर स्टेशन पहुंचें और टिकट केवल आधिकारिक बुकिंग प्लेटफॉर्म से ही खरीदें। रेलवे का यह कदम न केवल त्योहार के मौसम में सुविधा सुनिश्चित करता है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और आराम को भी प्राथमिकता देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि विशेष ट्रेन और अतिरिक्त कोचों की व्यवस्था से भीड़भाड़ कम होगी और यात्रा में व्यवधान नहीं आएगा। इस प्रकार, कोटा–जबलपुर होली स्पेशल ट्रेन त्योहारी सीजन में यात्रियों की बड़ी राहत साबित होगी।

जिम्बाब्वे टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर, लेकिन भारत में फंसी टीम; दुबई हवाई अड्डे की बंदी बनी रुकावट

नई दिल्ली । T20 विश्व कप 2026 में जिम्बाब्वे का सफर सुपर 8 चरण में ही समाप्त हो गया। रविवार 1 मार्च को नई दिल्ली में खेले गए आखिरी सुपर 8 मुकाबले में जिम्बाब्वे को दक्षिण अफ्रीका से हार का सामना करना पड़ा जिससे टीम का टूर्नामेंट से बाहर होना तय हो गया। हालांकि इस हार के बाद भी टीम स्वदेश वापसी की राह में कई बाधाओं का सामना कर रही है। मुख्य वजह है पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और दुबई हवाई अड्डे के बंद होने का मामला। जिम्बाब्वे की टीम को दुबई से कनेक्टिंग फ्लाइट लेनी थी लेकिन हवाई अड्डे की बंदी के चलते उनकी यात्रा योजना अनिश्चित हो गई। मुख्य कोच जस्टिन सैम्पसन ने कहा कि रविवार को मैच के दौरान टीम को कोई नई जानकारी नहीं दी गई थी और खिलाड़ियों का पूरा ध्यान खेल पर ही था। उन्होंने बताया जब हमने मैच शुरू किया था तब कोई अपडेट नहीं था। उसके बाद पूरा ध्यान खेल पर रहा। तब से मुझे कोई सूचना नहीं मिली है। जिम्बाब्वे टीम के हरफनमौला खिलाड़ी क्रेग एर्विन भी दुबई में फंसे हैं और अब उनके लिए अदीस अबाबा स्थित इथियोपियन एयरलाइंस के जरिए स्वदेश लौटना एक संभावित विकल्प बन सकता है। ICC ने शनिवार को घोषणा की थी कि वह भारत और श्रीलंका में आयोजित टी20 विश्व कप से लौट रहे खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए वैकल्पिक उड़ानों का इंतजाम कर रही है। यह कदम अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हमलों के कारण उत्पन्न हवाई व्यवधान को देखते हुए उठाया गया है। मुख्य कोच सिकंदर रजा की अगुआई वाली टीम सोमवार सुबह तीन अलग-अलग चरणों में दिल्ली से रवाना होने वाली थी लेकिन दक्षिण अफ्रीका से हार के बाद यह योजना स्थगित कर दी गई। सैमन्स ने कहा कि इस स्थिति के बावजूद टीम का ध्यान मैदान पर ही रहा। दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीका अभी भी टूर्नामेंट में है और उनका सेमीफाइनल 4 मार्च को कोलकाता में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला जाएगा। दक्षिण अफ्रीका के मुख्य कोच शुक्री कॉनराड ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति खिलाड़ियों के बीच चर्चा का विषय रही है लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि टीम का पूरा ध्यान खेल पर बना रहेगा। इस बीच जिम्बाब्वे टीम और आईसीसी दोनों की कोशिशें जारी हैं ताकि खिलाड़ियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित हो सके। फिलहाल टीम की वापसी का मार्ग और समय पूरी तरह से हवाई मार्ग की स्थिति पर निर्भर है।

IND vs AFG का बिगुल बजा, BCCI ने टेस्ट-वनडे सीरीज की तारीखों का किया ऐलान

नई दिल्ली। भारत और Afghanistan के बीच अब तक ज़्यादातर मुकाबले टी20 फॉर्मेट में देखने को मिले हैं, लेकिन अब दोनों टीमें रेड-बॉल और 50 ओवर क्रिकेट में आमने-सामने होंगी। बीसीसीआई ने ऐलान किया है कि अफगानिस्तान की टीम जून 2026 में भारत दौरे पर आएगी, जहां एकमात्र टेस्ट और तीन वनडे मैचों की सीरीज खेली जाएगी। एकमात्र टेस्ट मैच 6 से 10 जून 2026 तक न्यू चंडीगढ़ में खेला जाएगा। इसके बाद वनडे सीरीज की शुरुआत 14 जून को धर्मशाला से होगी। दूसरा वनडे 17 जून को लखनऊ और तीसरा व अंतिम मुकाबला 20 जून को चेन्नई में खेला जाएगा। तीनों वनडे दोपहर 1:30 बजे से शुरू होंगे। 2018 का टेस्ट यादगार, पारी और 262 रन से जीतभारत और अफगानिस्तान के बीच अब तक सिर्फ एक टेस्ट मैच खेला गया है। यह मुकाबला 2018 में बेंगलुरु में हुआ था, जहां भारतीय टीम ने पारी और 262 रन से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उस मैच में 107 रन की शानदार पारी खेलने वाले Shikhar Dhawan प्लेयर ऑफ द मैच रहे थे, जबकि कप्तानी Ajinkya Rahane ने संभाली थी। अब आठ साल बाद फिर से दोनों टीमें टेस्ट क्रिकेट में भिड़ेंगी, जो अफगानिस्तान के लिए खुद को साबित करने का बड़ा मौका होगा। वनडे रिकॉर्ड में भारत का पलड़ा भारीभारत और अफगानिस्तान के बीच अब तक कुल चार वनडे खेले गए हैं। इनमें से तीन मुकाबलों में भारत ने जीत दर्ज की है, जबकि एक मैच टाई रहा। आखिरी वनडे 11 अक्टूबर 2023 को खेला गया था। इस सीरीज के जरिए अफगानिस्तान को 50 ओवर फॉर्मेट में अपनी रणनीति मजबूत करने का अवसर मिलेगा, खासकर तब जब टीम हालिया टी20 विश्व कप 2026 में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। नए कोच के साथ नई शुरुआतपिछले टी20 विश्व कप में सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली अफगान टीम इस बार सुपर-8 में भी जगह नहीं बना पाई। इसके बाद टीम मैनेजमेंट में बदलाव हुआ और जोनाथन ट्रॉट की जगह Richard Pybus को नया मुख्य कोच बनाया गया। भारत दौरा अफगानिस्तान के लिए एक तरह से पुनर्निर्माण की शुरुआत साबित हो सकता है। भारतीय परिस्थितियों में टेस्ट और वनडे खेलना उनके खिलाड़ियों के अनुभव को नई ऊंचाई देगा।अब क्रिकेट फैंस को जून 2026 का इंतजार है-जब दोनों टीमें मैदान पर उतरेंगी और मुकाबला सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा और नई दिशा का होगा।

इकोनॉमी को डिमांड का बूस्ट, FY2027 में भारत की वृद्धि दर अनुमान से ऊपर जा सकती है

नई दिल्ली। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर आशावाद जताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक मजबूत बने हुए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि घरेलू मांग में लगातार सुधार हो रहा है। ऐसे माहौल में वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.5 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि दर में ऊपर की ओर संशोधन संभव है। रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यापक आर्थिक स्थिरता-जैसे नियंत्रित मुद्रास्फीति, संतुलित राजकोषीय स्थिति और निवेश में सुधार-नीतिगत समर्थन के साथ विकास को गति दे सकती है। यानी ग्रोथ की कहानी सिर्फ उम्मीदों पर नहीं, ठोस आंकड़ों पर टिकी है। बाहरी मांग और निर्यात में सुधार की उम्मीद मॉर्गन स्टैनली ने बाहरी मोर्चे पर भी सकारात्मक संकेत देखे हैं। खासकर वस्तु निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) में सुधार की संभावना जताई गई है। हालिया महीनों में वैश्विक शुल्क दरों में कमी आई है, जो पहले 50 प्रतिशत तक पहुंच गई थीं। इसके अलावा भारत द्वारा कई मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) सफलतापूर्वक पूरे किए जाने से निर्यात के नए अवसर खुल सकते हैं। यह संकेत देता है कि भारत की ग्रोथ अब केवल घरेलू खपत पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक मांग से भी सहारा मिलेगा। नई जीडीपी सीरीज से अधिक सटीक तस्वीर सरकार ने जीडीपी गणना का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। संशोधित आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी और सकल मूल्य वर्धन (GVA) दोनों 7.8 प्रतिशत रहे। पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत आंकी गई है, जो पुराने आधार वर्ष के अनुमान 7.4 प्रतिशत से अधिक है। नए आधार वर्ष के तहत असंगठित क्षेत्र, डिजिटल इकोनॉमी, जीएसटी संग्रह, ई-वाहन आंकड़े और सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (PFMS) जैसे नए डेटा स्रोतों को शामिल किया गया है। दोहरी अपस्फीति जैसी उन्नत पद्धतियों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुधारों से अब वृद्धि दर का अनुमान अधिक सटीक माना जा रहा है। आगे क्या संकेत? मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि यदि मौजूदा नीति समर्थन और मांग का रुझान बना रहता है, तो भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज बढ़ने वालों में शामिल रह सकता है। घरेलू खपत, निजी निवेश और निर्यात-तीनों का संतुलित योगदान भारत को वित्त वर्ष 2027 में अनुमान से बेहतर प्रदर्शन की दिशा में ले जा सकता है।

ईरान-इजराइल संघर्ष में बंकरों में कैद यूपी-बिहार के लोग, होली पर घर लौटने से हुए वंचित

गोरखपुर। ईरान और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष ने होली पर घर लौटने की भारतीयों की उम्मीदों को रोक दिया है। उत्तर प्रदेश और बिहार के नागरिक जो काम या कारोबार के सिलसिले में खाड़ी देशों में गए थे मिसाइल हमलों के डर से बंकरों में शरण लिए हुए हैं और उड़ानों के रद्द होने से फंसे हुए हैं। मिसाइल हमलों की दहशत गोरखपुर के रसूलपुर निवासी अब्दुल रहमान ने दुबई से बताया कि एयरपोर्ट के पास छह मिसाइलें देखी गईं जिन्हें एयर डिफेंस ने हवा में मार गिराया। एक मिसाइल पास में गिरी लेकिन कोई क्षति नहीं हुई। धमाकों की खौफनाक आवाजें कमरे तक पहुंच रही थीं और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते रहे। शनिवार देर रात से यह स्थिति जारी है। संदीप कुमार जो मई 2024 में इजराइल गए थे ने बताया कि 2 मार्च को भारत वापसी की फ्लाइट रद्द कर दी गई। यरुशलम और पेटा टिकवा के बीच कार्यरत जनार्दन ने कहा कि रविवार सुबह छह से सात बजे तक लगातार मिसाइलों के धमाके सुनाई दिए। छात्र और युवा भी फंसे सिद्धार्थनगर के आधा दर्जन छात्र ईरान में धार्मिक शिक्षा ले रहे हैं जिनसे परिजन संपर्क नहीं कर पा रहे। सीवान के इटहरी गांव निवासी 24 वर्षीय जितेंद्र प्रसाद तीन साल बाद होली मनाने घर लौटने वाले थे लेकिन दोहा एयरपोर्ट पर उड़ानें रद्द होने की जानकारी मिली। फिलहाल 25 युवकों को एयरपोर्ट के पास अमेरिकी आर्मी बेस कैंप में ठहराया गया है। यरुशलम में रिहायशी इलाकों की स्थिति गंभीर कुशीनगर के पडरौना निवासी नंदलाल विश्वकर्मा जो वेस्ट बैंक क्षेत्र में हैं ने बताया कि रिहायशी इलाकों में स्थिति गंभीर है। बीच-बीच में सायरन बजता रहता है और लोग नजदीकी बंकरों की ओर भागते हैं। हमलावर अक्सर शब्बात के समय को निशाना बनाते हैं जो यहूदी धर्म का साप्ताहिक विश्राम दिवस है। बंकर छोटे या हल्के हमलों से बचाव कर सकते हैं लेकिन सीधे और बड़े हमलों में पर्याप्त नहीं होंगे। दुबई से फंसे नागरिकों का अनुभव गोरखपुर के वसीम जो दुबई में कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं ने बताया कि ठहरने के स्थान के पास मिसाइलों के धमाके और उड़ानें दिखाई दे रही हैं। हालांकि ईरान का लक्ष्य मुख्य रूप से मिलिट्री बेस कैंप हैं रिहायशी इलाके सुरक्षित रह रहे हैं। खामेनेई की मौत के बाद यूपी में अलर्ट ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद उत्तर प्रदेश में अलर्ट जारी किया गया है। पुलिस और खुफिया एजेंसियों को शिया बहुल इलाकों और प्रदर्शन संवेदनशील जिलों में पूरी सतर्कता बरतने और अतिरिक्त निगरानी रखने को कहा गया है।

रहीमाबाद में दिल दहला देने वाला मंजर, कुत्तों के हमले में बच्ची की जान गई

नई दिल्ली। रहीमाबाद, एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है। 7 साल की बच्ची पर कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया और उसकी जान ले ली। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण घटनास्थल की ओर भागे। बच्ची की लाश देखकर माहौल और भी गहन मातम में बदल गया। मामला तरौना गांव का है, जहां बच्ची शाम के समय घर से थोड़ी दूर शौच के लिए गई थी। इसी दौरान अचानक कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। कुत्तों ने बच्ची के बदन को बुरी तरह नोंच डाला और इस हिंसक हमले में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद जब बच्ची घर नहीं लौटी तो परिजन बेहद घबराए और उसकी खोजबीन में जुट गए। खोजते-खोजते उन्हें खेत में बच्ची की लाश मिली। लाश के पास कुछ कुत्ते भी खड़े थे, जिन्हें देखकर ग्रामीणों की रूह कांप उठी। बच्ची की मां वहां पहुंची और लाश देखकर चीख पड़ी। उसकी चीख सुनकर पूरा गांव घटनास्थल पर इकट्ठा हो गया और कुत्तों के झुंड को वहां से भगाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि बच्ची बहुत ही मासूम और जीवन से भरी हुई थी। इस घटना ने पूरे इलाके में गहरा मातम फैला दिया है। परिजन और ग्रामीण इस हमले के सदमे से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। बच्ची की मौत ने गांव को शोक में डुबो दिया है और लोग इसे किसी बड़े हादसे की तरह याद रखेंगे। स्थानीय पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और कुत्तों के झुंड को नियंत्रित करने के लिए उपाय करने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों को रोकने और भविष्य में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि ग्रामीण और शहर क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या को किस तरह नियंत्रित किया जाए। मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है क्योंकि ऐसे हमले जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि कुत्तों के झुंड और आवारा जानवरों पर निगरानी बढ़ाई जाए और भविष्य में किसी भी मासूम की जान खतरे में न पड़े। घटना ने समाज में सुरक्षा और जागरूकता के मुद्दे को फिर से उजागर कर दिया है।

खामेनेई की मौत पर PM मोदी की चुप्पी को लेकर विपक्ष ने साधा निशाना, कहा- भारत इतना कमजोर कभी नहीं दिखा

नई दिल्ली। इजरायल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद दुनिया भर में हलचल मची हुई है। अमेरिकी सहयोगी इसे जायज ठहरा रहे हैं जबकि विरोधी इसे क्रूर हत्या बता रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत की तरफ से अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। विपक्षी दलों ने इस चुप्पी को लेकर मोदी सरकार पर तीखे आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का हमला: नैतिक नेतृत्व पर प्रश्न कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार की चुप्पी भारत की नैतिक नेतृत्व क्षमता पर प्रश्न उठाती है। उनका कहना था आयतुल्ला खामेनेई और अन्य ईरानी नेताओं की हत्या पर सरकार की चुप्पी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ कुछ भी कहने की उसकी अनिच्छा को दर्शाती है। यह भारत के मूल सिद्धांतों और विदेश नीति से समझौता है। इतिहास में भारत इतना कमजोर कभी नहीं दिखा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद भारत की मौन नीति उसके मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि इस समय जब घातक हमले और युद्ध आम नागरिकों से लेकर शीर्ष नेताओं तक को प्रभावित कर रहे हैं सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही यह बताना चाहिए कि भारत एक तटस्थ देश के रूप में शांति बहाली के लिए क्या कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।मोदी सरकार की मौन नीति और विदेश मंत्रालय का बयान ईरान की तरफ से रविवार को खामेनेई की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी थी। इसके बावजूद भारत सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया। हालांकि विदेश मंत्रालय ने शनिवार देर रात अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को लेकर एक सामान्य बयान जारी किया। इसमें कहा गया भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम से गहरी चिंता में है। सभी पक्ष संयम बरतें तनाव बढ़ाने से बचें और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाया जाना चाहिए। सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।

टी20 में दमदार ओपनर कैसे बने मार्करम? फाफ ने IPL को बताया गेमचेंजर

नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका ने टी20 विश्व कप 2026 में ग्रुप स्टेज और सुपर-8 में अजेय रहते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाई है, और इस सफर में कप्तान एडन मार्करम की भूमिका बेहद अहम रही है। बतौर ओपनर उन्होंने टीम को तेज और स्थिर शुरुआत दिलाई। पूर्व कप्तान फाफ डू प्लेसिस के मुताबिक, मार्करम के खेल में यह बदलाव यूं ही नहीं आया-इसके पीछे आईपीएल का बड़ा हाथ है। ईएसपीएनक्रिकइंफो से बातचीत में डू प्लेसिस ने कहा कि Lucknow Super Giants के लिए ओपनिंग करते हुए मार्करम ने पावरप्ले में आक्रामक लेकिन संतुलित बल्लेबाजी करना सीखा। आईपीएल 2025 में उनका पावरप्ले स्ट्राइक रेट 151.13 रहा, जो उनके साथी ओपनरों-Quinton de Kock, Rohit Sharma और Will Jacks-से भी बेहतर था। स्ट्राइक रेट और तकनीक का संतुलनडू प्लेसिस ने खास तौर पर मार्करम की तकनीकी मजबूती और स्ट्राइक रेट में आए सुधार की तारीफ की। उनके मुताबिक, मार्करम ने यह साबित किया कि वह सिर्फ क्लासिकल बल्लेबाज नहीं, बल्कि आधुनिक टी20 की मांग के मुताबिक तेज रन बनाने में भी सक्षम हैं। आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर नियम के तहत मिली स्वतंत्रता ने उन्हें जोखिम लेने और मैच की रफ्तार तय करने का आत्मविश्वास दिया। मार्करम ने टीम मैनेजमेंट का भरोसा जीतते हुए यह दिखाया कि वह ओपनिंग के साथ-साथ मिडिल ऑर्डर में भी प्रभावी रह सकते हैं। लेकिन मौजूदा फॉर्म को देखते हुए उन्हें अब फुल-टाइम ओपनर की भूमिका दी गई है। वर्ल्ड कप 2026 में दमदार प्रदर्शनटी20 विश्व कप 2026 में मार्करम का बल्ला जमकर बोला है। सात मैचों में तीन अर्धशतक के साथ उन्होंने 268 रन बनाए हैं। उनकी औसत 53.60 और स्ट्राइक रेट 175.16 रही है, जो उन्हें टूर्नामेंट के सबसे प्रभावशाली बल्लेबाजों में शामिल करता है। वह इस समय दक्षिण अफ्रीका के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। टीम मैनेजमेंट ने SA20 में शानदार प्रदर्शन करने वाले रेयान रिकेल्टन को नंबर-3 पर भेजकर बल्लेबाजी क्रम में संतुलन बनाया है, जबकि मार्करम नई गेंद से आक्रामक शुरुआत दे रहे हैं। साफ है-आईपीएल का मंच मार्करम के लिए सिर्फ एक लीग नहीं, बल्कि टी20 में खुद को नए सांचे में ढालने की प्रयोगशाला साबित हुआ है। अब सेमीफाइनल में सबकी नजरें एक बार फिर उनके बल्ले पर टिकी होंगी।

रंगों के त्योहार पर मेट्रो यात्रियों के लिए अहम सूचना, एनसीआरटीसी ने जारी की एडवाइजरी

नई दिल्ली: होली के रंगोत्सव के मौके पर एनसीआरटीसी ने यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। एनसीआरटीसी के अनुसार 4 मार्च को नमो भारत और मेरठ मेट्रो सेवाएं सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक बंद रहेंगी। यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों के संचालन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। होली पर शहर में लोग रंग और पानी के साथ उत्सव मनाते हैं और इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक स्थानों पर इकट्ठा होते हैं। ऐसे में मेट्रो सेवाओं के सामान्य संचालन में बाधा आने की संभावना रहती है। एनसीआरटीसी ने बताया कि यही कारण है कि नमो भारत और मेरठ मेट्रो को पूरे दिन अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया गया है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि दिनभर चलने वाले रंग खेलने के कार्यक्रम और भीड़भाड़ को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। इस दौरान यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ ट्रेनों और स्टेशनों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। एनसीआरटीसी ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपने यात्रा की योजना बनाते समय इस समय परिवर्तन को ध्यान में रखें। यात्रा में होने वाली असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक परिवहन का उपयोग करना बेहतर होगा। अधिकारीयों ने यह भी बताया कि शाम 5 बजे के बाद सेवाएं फिर से सामान्य रूप से शुरू कर दी जाएंगी और रात 10 बजे तक चलेंगी। नमो भारत और मेरठ मेट्रो दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर संचालित होती हैं और रोजाना हजारों यात्रियों को सुविधा प्रदान करती हैं। त्योहार के मद्देनज़र यह अस्थायी बदलाव किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या संचालन में बाधा को रोका जा सके। एनसीआरटीसी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय पूरी तरह से सुरक्षा दृष्टिकोण से लिया गया है। रंग और पानी के उपयोग से मेट्रो ट्रेनों के संचालन में तकनीकी और सुरक्षा संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को बनाए रखने के लिए अस्थायी बंद आवश्यक था। यात्रियों के लिए सलाह दी गई है कि वे मेट्रो स्टेशन पर जाने से पहले समय का ध्यान रखें और यदि संभव हो तो सार्वजनिक या निजी वाहनों के विकल्प पर विचार करें। इसके अलावा, परिवार और दोस्तों के साथ होली के उत्सव में शामिल होने के लिए योजना बनाते समय मेट्रो की अस्थायी बंदी को ध्यान में रखें। एनसीआरटीसी का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि होली के रंगोत्सव का आनंद लेने वाले लोग सुरक्षित रहें और किसी अप्रत्याशित दुर्घटना का सामना न करें। इसके साथ ही ट्रेनों की देखभाल और संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।

समावेशी विकास की ओर बढ़ता मध्य प्रदेश: केंद्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार

– प्रद्युम्न शर्मामध्य प्रदेश में इस साल मनाए जा रहे किसान कल्याण वर्ष की पहली कृषि कैबिनेट जनजातीय बहुल जिले बड़वानी में होना और उसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में अनेक किसानों के हित में निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ना आज बता रहा है कि राज्‍य विकास के धरातल पर अपनी किन प्राथमिकताओं को लेकर चल रहा है। इस दृष्टि से मध्य प्रदेश सरकार का वर्ष 2026-27 का बजट राज्य के विकास मॉडल को नए ढंग से परिभाषित करता नजर आता है। कहना होगा कि हाल ही में सामने आए मप्र के बजट में जहां एक ओर दीर्घकालीन योजनाओं के लिए वित्तीय प्रबंधन की रणनीति दिखाई देती है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने का स्पष्ट प्रयास भी झलकता है। “समावेशी बजट, सशक्त नागरिक” के नारे के साथ पेश किए गए इस बजट की थीम “तेरा तुझको अर्पण” रखी गई है, जो यह संकेत देती है कि विकास का लाभ सीधे जनता तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीण रोजगार और अर्थव्यवस्था पर विशेष फोकसबजट का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन पर दिखाई देता है। इसी दिशा में भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए “विकसित भारत – रोजगार की गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण)” के लिए 10,428 करोड़ रुपये की बड़ी राशि स्वीकृत की गई है। यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में अहम भूमिका निभा सकती है। राज्य सरकार का मानना है कि इस मिशन के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और पलायन की समस्या में भी कमी आएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास को मिला बड़ा बजटपंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को इस बजट में विशेष प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2026-27 में इस विभाग के लिए कुल 40,103 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित किया गया है। यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास, सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने के लिए उपयोग की जाएगी। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार विभाग को अधिक बजट आवंटित किया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार ग्रामीण विकास को अपने एजेंडे के केंद्र में रख रही है। ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की पहलग्रामीण सड़कों के निर्माण और उन्नयन के लिए 2,968 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर होने से कृषि उत्पादों के बाजार तक पहुंच आसान होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़कों के नवीनीकरण और उन्नयन के लिए 1,285 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे पहले से बनी सड़कों की गुणवत्ता में सुधार होगा और परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी। तीन वर्षीय रोलिंग बजट की नई व्यवस्थाइस बजट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक तीन वर्षीय रोलिंग बजट व्यवस्था है। इस प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास योजनाएं केवल एक वर्ष की सीमा में न सिमटें, बल्कि उन्हें दीर्घकालीन लक्ष्य और वित्तीय स्थिरता के साथ लागू किया जा सके। इस तरह की व्यवस्था से सरकार को बड़े विकासात्मक प्रोजेक्ट्स के लिए बेहतर योजना बनाने और संसाधनों का संतुलित उपयोग करने में मदद मिलेगी। बहुआयामी गरीबी सूचकांक आधारित बजटिंग का प्रयोगइस बजट की एक और विशेषता यह है कि इसमें मल्टी डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स आधारित बजटिंग को संस्थागत रूप देने का प्रयास किया गया है। यह अपनी तरह का पहला प्रयास माना जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि विकास योजनाओं का लाभ उन क्षेत्रों तक प्राथमिकता से पहुंचे जो पहले से ही अभावग्रस्त और पिछड़े के रूप में चिन्हित किए गए हैं। इस व्यवस्था से सरकारी खर्च को परिणाम आधारित बनाया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि संसाधनों का उपयोग वास्तव में गरीबी कम करने और जीवन स्तर सुधारने में हो। खनिज राजस्व से स्थानीय विकास को बलखनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व का भी स्थानीय विकास में उपयोग सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है। जिला खनिज निधि के लिए 1,400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि गौण खनिज राजस्व से पंचायतों को 934 करोड़ रुपये अंतरित किए जाएंगे। इससे खनन प्रभावित क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं और सामाजिक विकास योजनाओं को मजबूती मिल सकेगी। पोषण और कनेक्टिविटी योजनाओं को प्राथमिकतापोषण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को भी बजट में पर्याप्त प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के लिए 1,100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण को कम करना और विद्यालयों में पोषण स्तर सुधारना है। इसके अलावा मुख्यमंत्री मजरा टोला सड़क योजना के लिए 793 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे छोटे-छोटे गांवों और बस्तियों को मुख्य सड़कों से जोड़ा जा सकेगा। प्रमुख योजनाओं के लिए बढ़ा बजट प्रावधानसरकार ने कई महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए भी पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में अधिक राशि स्वीकृत की है। इनमें ग्राम स्वराज अभियान, प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना, यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना, क्षतिग्रस्त पुलों का पुनर्निर्माण, मुख्यमंत्री मजरा टोला सड़क योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, रेडी टू ईट टेक होम राशन, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), मुख्यमंत्री आवास मिशन, वाटरशेड विकास और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाएं शामिल हैं। ग्रामीण जीवन स्तर सुधारने की दिशा में प्रयासइन योजनाओं का सीधा संबंध ग्रामीण जीवन स्तर को बेहतर बनाने से है। उदाहरण के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और मुख्यमंत्री आवास मिशन के माध्यम से गरीब परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। वहीं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को मजबूत कर महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। समावेशी विकास की व्यापक रणनीतिअत: कहना होगा कि मध्य प्रदेश का यह बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेजीकण न होकर विकास की एक व्यापक रणनीति का संकेत देता है। इसमें ग्रामीण बुनियादी ढांचे, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन को एक साथ जोड़कर विकास की समावेशी अवधारणा को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई है। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो यह बजट राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण