जंग की गूंज क्रिकेट तक! ईरान-इजरायल तनाव से जिम्बाब्वे टीम की वापसी में अड़चन

नई दिल्ली। Iran और Israel के बीच जारी टकराव का असर खेल जगत पर भी साफ दिख रहा है। टी20 विश्व कप 2026 में अपना अभियान समाप्त करने के बाद जिम्बाब्वे की टीम अब तक स्वदेश नहीं लौट पाई है। दरअसल, ईरान के जवाबी हमलों के बाद पश्चिम एशिया के कई देशों में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया, जिसके चलते दुबई एयरपोर्ट अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। जिम्बाब्वे की टीम को नई दिल्ली से दुबई होते हुए अपने देश लौटना था, लेकिन एयरपोर्ट बंद होने से उनकी कनेक्टिंग फ्लाइट रद्द हो गई। फिलहाल पूरी टीम दिल्ली में ठहरी हुई है और नई यात्रा योजना का इंतजार कर रही है। कोच जस्टिन सैमन्स बोले – स्थिति को नजरअंदाज करना मुश्किल टीम के मुख्य कोच Justin Sammons ने कहा कि खिलाड़ियों के लिए ऐसी परिस्थिति मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होती है। उन्होंने बताया कि सभी खिलाड़ी सोमवार सुबह घर लौटने की तैयारी में थे, लेकिन अचानक हालात बदल गए। टीम के भीतर इस विषय पर लगातार चर्चा हो रही है और सभी अगली आधिकारिक सूचना का इंतजार कर रहे हैं। कोच के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच तक भी किसी संभावित व्यवधान की जानकारी नहीं थी। ऐसे में अचानक फ्लाइट रद्द होने से खिलाड़ियों की योजनाएं प्रभावित हुईं। वैकल्पिक रूट पर विचार, ICC भी सक्रिय दुबई मार्ग बाधित होने के बाद अब अदीस अबाबा के रास्ते इथियोपियन एयरलाइंस से टीम को भेजने का विकल्प तलाशा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने भी स्पष्ट किया है कि विश्व कप के बाद घर लौटने वाली टीमों और अधिकारियों के लिए वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यात्रा कार्यक्रम में बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी खिलाड़ी या स्टाफ को जोखिम का सामना न करना पड़े। मैदान पर शानदार सफर, सुपर-8 में थमी रफ्तार Sikandar Raza की कप्तानी में जिम्बाब्वे ने ग्रुप स्टेज में शानदार प्रदर्शन किया था। टीम ने ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका जैसी मजबूत टीमों को हराकर सुपर-8 में जगह बनाई। हालांकि, अगले दौर में वेस्टइंडीज, भारत और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उसे हार का सामना करना पड़ा और अभियान यहीं समाप्त हो गया। अब टीम की नजरें सुरक्षित स्वदेश वापसी पर टिकी हैं। खेल खत्म हो चुका है, लेकिन हालात ने खिलाड़ियों की यात्रा को अनिश्चित बना दिया है। सभी को उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति सामान्य होगी और टीम सकुशल घर लौटेगी।
सोना-चांदी अब आम आदमी की पहुंच से कोसों दूर: $5390 के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँचा गोल्ड, ईरान पर हमले के बाद भारत के हर बड़े शहर में मची खलबली!

नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति और युद्ध की विभीषिका ने आज भारतीय सराफा बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदलकर रख दी है। इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी सीधी जंग ने न केवल मिडिल ईस्ट को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है, बल्कि इसका सीधा और घातक असर सोने-चांदी की कीमतों पर भी पड़ा है। 2 मार्च की सुबह जब देश उठा, तो सोने की कीमतें आसमान छू रही थीं। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,73,240 प्रति 10 ग्राम के अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुँच गई, जिसने निवेशकों और आम खरीदारों के होश उड़ा दिए हैं। बाजार में इस अभूतपूर्व तेजी का मुख्य कारण 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ किया गया हवाई हमला और उसके जवाब में ईरान की भीषण मिसाइल कार्रवाई को माना जा रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। इस अनिश्चितता के माहौल में दुनिया भर के निवेशकों ने शेयर बाजार से अपना पैसा निकालकर सोने जैसे ‘सुरक्षित ठिकाने’ (Safe Haven) की ओर रुख कर लिया है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल के साथ $5,390 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर ट्रेड कर रहा है। भारत के महानगरों की बात करें तो मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, पुणे और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,58,660 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जबकि 24 कैरेट की कीमत ₹1,73,090 तक जा पहुँची है। सिर्फ एक हफ्ते के भीतर सोना लगभग ₹9,430 प्रति 10 ग्राम महंगा हो चुका है। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली खबर चांदी की कीमतों से आई है। आज सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत में एक ही दिन में ₹35,000 प्रति किलोग्राम की ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई, जिससे दिल्ली में एक किलोग्राम चांदी का भाव ₹3,30,000 के अविश्वसनीय आंकड़े को छू गया। MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर भी 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 3.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ खुला, जो बाजार की घबराहट को साफ दर्शाता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और इजराइल के बीच तनाव कम नहीं हुआ और यह युद्ध एक क्षेत्रीय महायुद्ध में तब्दील हुआ, तो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चमक और भी तीखी होगी। मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने कीमती धातुओं को अब आम आदमी की पहुंच से बहुत दूर कर दिया है।
खामेनेई के निधन पर भारत के इस गांव में तीन दिन का शोक, पूरे गांव में बंद रहा व्यापार

नई दिल्ली। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के अलीपुर गांव में तीन दिन का अनौपचारिक शोक मनाया गया। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले में खामेनेई के परिवार के कई सदस्य और उनके 40 से अधिक अधिकारी मारे गए। इस घटना के बाद ईरान ने मध्य-पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए। मिनी ईरान में शोक की लहर अलीपुर जिसे लंबे समय से मिनी ईरान कहा जाता है शिया मुस्लिम समुदाय के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है। रविवार को खामेनेई की मृत्यु की खबर की पुष्टि होते ही पूरा गांव थम गया। स्थानीय निवासियों ने स्वेच्छा से तीन दिन के लिए दुकानें और व्यवसाय बंद रखे। सुबह से ही सड़क किनारे ठेले और बाजार बंद रहे लोग समूहों में इकट्ठा हुए और खामेनेई के चित्र के साथ धार्मिक नारे लगाए। विरोध जुलूस और शोक प्रदर्शन दो दिन के शोक के बाद अंजुमन-ए-जाफरिया कमेटी के नेतृत्व में विरोध जुलूस निकाला गया। लगभग पूरे गांव ने इसमें भाग लिया। कई लोग काले वस्त्र पहनकर खामेनेई के प्रति सम्मान और शोक व्यक्त कर रहे थे। ईरान से ऐतिहासिक और व्यक्तिगत संबंध अलीपुर गांव का ईरान से जुड़ाव केवल धार्मिक नहीं बल्कि शैक्षिक और व्यापारिक भी रहा है। गांव का मूल नाम बेल्लिकुंटे था। बीजापुर आदिलशाहियों के समय शिया मुस्लिमों का एक समूह यहां बस गया और इसे अलीपुर नाम दिया गया। अधिकांश निवासी आज भी व्यापार और शिक्षा के लिए ईरान और अरब देशों से जुड़े हैं। खामेनेई का इस गांव से व्यक्तिगत संबंध 1986 से जुड़ा है जब वह ईरान के राष्ट्रपति के रूप में अलीपुर आए और एक स्थानीय अस्पताल का उद्घाटन किया। स्थानीय निवासी शफीक ने बताया उनका दौरा हमारे आध्यात्मिक संबंध को मजबूत करने वाला था। हमारा जुड़ाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं बल्कि आस्था और धार्मिक मार्गदर्शन से भी जुड़ा है। स्थानीय धर्मगुरुओं का बयान गांव के धर्मगुरु मौलाना सैयद इब्राहिम ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह हमला बिना उकसावे के और अत्यंत निंदनीय था। उनका कहना था कि दुर्भाग्य है कि कई इस्लामी देश इस हमले पर मूक दर्शक बने हुए हैं।
भोपाल में फिर बम की धमकी से दहशत, 15 दिन में दूसरी बार People’s University खाली, बम निरोधक दस्ता अलर्ट

मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal में एक बार फिर दहशत का माहौल बन गया जब People’s University को बम से उड़ाने की धमकी मिली। 15 दिनों के भीतर यह दूसरी बार है जब यूनिवर्सिटी को निशाना बनाते हुए धमकी भरा ईमेल भेजा गया है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। निशातपुरा थाना क्षेत्र स्थित इस निजी विश्वविद्यालय को ईमेल के जरिए धमकी दी गई। जैसे ही प्रबंधन को इसकी जानकारी मिली, तत्काल पुलिस को सूचित किया गया। एहतियातन बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की टीम मौके पर पहुंची और पूरे कैंपस की सघन तलाशी शुरू की गई। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यूनिवर्सिटी परिसर को खाली करा लिया गया ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियां हर कोने की बारीकी से जांच कर रही हैं। भवनों, कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और हॉस्टल क्षेत्रों की तलाशी ली जा रही है। साथ ही तकनीकी टीम ईमेल भेजने वाले की पहचान और लोकेशन का पता लगाने में जुटी है। इससे पहले 19 फरवरी को भी इसी तरह का धमकी भरा ईमेल मिला था जिसमें कॉलेज भवन में सायनाइड जहर वाले बम रखने का दावा किया गया था और एक निश्चित समय पर विस्फोट की बात कही गई थी। उस समय व्यापक जांच के बाद धमकी को अफवाह पाया गया था। हालांकि घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। अब 15 दिन के भीतर दोबारा मिली धमकी ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। विश्वविद्यालय प्रबंधन भी छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। लगातार मिल रही धमकियों से छात्रों और अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है और पूरी जांच प्रक्रिया सावधानीपूर्वक जारी है। सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं यह शरारती तत्वों की हरकत तो नहीं या इसके पीछे कोई संगठित साजिश है। राजधानी में शैक्षणिक संस्थानों को मिल रही ऐसी धमकियां सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। फिलहाल सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही धमकी देने वाले की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Wrestling Federation of India ने तिराना में फंसी भारतीय महिला कुश्ती टीम को सुरक्षा का भरोसा दिया, हालात सामान्य होने तक ठहरने की व्यवस्था पुख्ता।

नई दिल्ली। Iran–Israel तनाव के बीच पश्चिम एशिया में हवाई यातायात प्रभावित हुआ तो असर भारतीय महिला कुश्ती टीम पर भी पड़ा। मुहामेट मालो 2026 टूर्नामेंट के बाद दुबई मार्ग से भारत लौटने वाली टीम की फ्लाइट रद्द हो गई, जिसके कारण 16 महिला पहलवान और सपोर्ट स्टाफ अल्बानिया की राजधानी Tirana में ही रुक गए। स्थिति संवेदनशील होने के बावजूद राहत की बात यह है कि टीम सुरक्षित है। एयरस्पेस बंद होने के बाद भारत सरकार और रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने तुरंत दखल देते हुए खिलाड़ियों के ठहरने और सुरक्षा का इंतजाम किया। टीम एयरपोर्ट के पास एक होटल में ठहरी हुई है, जहां सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। “हमें यहां कोई दिक्कत नहीं” – कोचों का भरोसाभारतीय महिला टीम के कोच मंजीत ने स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं है और वे सुरक्षित माहौल में हैं। मुख्य कोच वीरेंद्र सिंह ने बताया कि फ्लाइट रद्द होते ही खेल मंत्रालय और फेडरेशन की ओर से संपर्क किया गया। उन्होंने कहा कि जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, टीम को हर संभव सहयोग दिया जाएगा। वीरेंद्र सिंह के मुताबिक, फेडरेशन ने भरोसा दिलाया है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और वापसी की वैकल्पिक व्यवस्था पर लगातार काम किया जा रहा है। एयरस्पेस बंद होने से बढ़ी मुश्किलेंईरान द्वारा क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर जवाबी हमलों के बाद यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन समेत कई देशों ने एहतियातन अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। इसी के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा और कई रूट अस्थायी रूप से रोक दिए गए। भारतीय महिला टीम भी इसी वजह से निर्धारित समय पर स्वदेश नहीं लौट सकी। मुहामेट मालो 2026 में भारत का प्रदर्शनमुहामेट मालो 2026 रैंकिंग सीरीज के लिए भारत ने 48 सदस्यीय दल भेजा था, जिसमें फ्रीस्टाइल, महिला और ग्रीको-रोमन-तीनों वर्गों में 16-16 पहलवान शामिल थे। पुरुष फ्रीस्टाइल में अंडर-23 विश्व चैंपियन सुजीत कलकल ने 65 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। कुल मिलाकर भारत ने एक स्वर्ण, तीन रजत और तीन कांस्य पदक के साथ टूर्नामेंट का समापन किया।अब सबकी नजरें हालात सामान्य होने और महिला टीम की सुरक्षित वापसी पर टिकी हैं। राहत की बात यही है-खिलाड़ी सुरक्षित हैं और सिस्टम उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
भक्ति का ढोंग और नियत में खोट: पुणे के जैन मंदिर में 'पुजारी' बनकर आए शातिर चोर ने उड़ाया चांदी का मुकुट, CCTV ने खोली पोल

नई दिल्ली/पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में अपराध और आस्था का एक ऐसा संगम देखने को मिला है, जिसने न केवल जैन समुदाय बल्कि आम जनता को भी झकझोर कर रख दिया है। अक्सर लोग मंदिर में शांति और सुकून की तलाश में जाते हैं, लेकिन चिंचवड़ स्थित प्रसिद्ध भगवान श्री आदेश्वर शंकेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर में एक अपराधी “भक्ति का चोला” ओढ़कर पहुँचा। उसकी मंशा भगवान के दर्शन करना नहीं, बल्कि मंदिर की बहुमूल्य संपत्ति पर हाथ साफ करना था। इस शातिर चोर ने पुजारी की वेशभूषा धारण की ताकि किसी को उस पर संदेह न हो, और फिर बड़ी ही चालाकी से करीब ढाई लाख रुपये कीमत का चांदी का मुकुट लेकर फरार हो गया। पूरी घटना किसी फिल्मी सीन की तरह मंदिर के CCTV कैमरों में कैद हो गई, जिसे देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि आरोपी सबसे पहले एक सामान्य पुजारी की तरह मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करता है। वह अपनी हरकतों से खुद को एक सच्चा श्रद्धालु दिखाने की कोशिश करता है। उसने बड़ी ही सफाई से मुकुट को एक कपड़े से ढका, फिर भगवान के सामने हाथ जोड़े और कुछ देर के लिए बाहर निकल गया। यह उसकी रेकी का हिस्सा था ताकि वह देख सके कि आसपास कोई उसे देख तो नहीं रहा है। कुछ ही मिनटों के बाद वह दोबारा वापस लौटा और मौका पाते ही एक किलो वजनी चांदी का मुकुट समेटकर चंपत हो गया। जब मंदिर प्रबंधन को मुकुट के गायब होने का पता चला, तो इलाके में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पिंपरी-चिंचवड़ क्राइम ब्रांच यूनिट-1 ने तुरंत मोर्चा संभाला। पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती आरोपी की पहचान करना था क्योंकि वह पुजारी के भेष में था। हालांकि, आधुनिक तकनीकी जांच और सीसीटीवी फुटेज के गहन विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने आरोपी के भागने के रूट को ट्रैक किया। पुलिस की मुस्तैदी का नतीजा यह रहा कि इस शातिर अपराधी को महज 48 घंटों के भीतर दबोच लिया गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान नरेश अगरचंद जैन के रूप में हुई है। पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ वह और भी चौंकाने वाला था; नरेश कोई नौसिखिया चोर नहीं बल्कि एक आदतन अपराधी है, जिसके खिलाफ पहले से ही चोरी और सेंधमारी के करीब 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या उसने पहले भी धार्मिक स्थलों को अपना निशाना बनाया है और चोरी का माल वह किसे ठिकाने लगाता था। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने भक्तों के बीच खोई हुई सुरक्षा की भावना को फिर से जगाया है, लेकिन इस घटना ने मंदिरों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए है
ईरान-इजरायल टकराव का तेल बाजार पर पड़ा असर, कच्चा तेल 80 डॉलर के पार

नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनकी जद में दुबई और अबू धाबी जैसे प्रमुख शहरों के साथ कतर, बहरीन, सऊदी अरब और ओमान भी आए। इस घटनाक्रम ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर आशंकाएं बढ़ा दी हैं और निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।कीमतों में तेज उछाल तनाव बढ़ते ही कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड, जो शुक्रवार को 72 डॉलर प्रति बैरल के सात महीने के उच्च स्तर पर बंद हुआ था और 2026 के पहले दो महीनों में करीब 19% चढ़ चुका था, अब 12% की छलांग लगाकर 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यह स्तर पिछले साल जून के बाद पहली बार देखा गया है। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में भी करीब 8% की तेजी आई और यह 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव लंबा खिंचता है तो कीमतों में और अस्थिरता देखी जा सकती है। ईरान की उत्पादन क्षमता और वैश्विक सप्लाई भले ही क्षेत्रीय राजनीति में ईरान की स्थिति समय के साथ बदली हो, लेकिन ऊर्जा बाजार में उसकी भूमिका अब भी अहम है। ओपेक+ गठबंधन में वह चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले इस समूह के कुल उत्पादन में ईरान की हिस्सेदारी लगभग 12% है। ईरान प्रतिदिन करीब 3.3 मिलियन बैरल तेल उत्पादन की क्षमता रखता है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 3% है। उसकी सबसे बड़ी रिफाइनरी की क्षमता लगभग 5 लाख बैरल प्रतिदिन बताई जाती है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी निगाहें संकट का सबसे संवेदनशील पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। इस समुद्री मार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% और एलएनजी की बड़ी खेप गुजरती है। यही कारण है कि इसे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का ‘चोक पॉइंट’ माना जाता है। ईरान का लगभग 90% तेल निर्यात भी इसी रास्ते चीन तक पहुंचता है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया है कि जलडमरूमध्य को बंद करने का कोई इरादा नहीं है। फिर भी बाजार में आशंकाएं बनी हुई हैं और समुद्री यातायात को लेकर विरोधाभासी रिपोर्टें सामने आ रही हैं। 100 डॉलर तक पहुंचने की आशंका विश्लेषकों, जिनमें बार्कलेज जैसी वित्तीय संस्थाएं शामिल हैं, का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहता है तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। हालांकि वे यह भी मानते हैं कि यदि हालात जल्द सामान्य हो जाते हैं तो मौजूदा ऊंचे स्तर टिकाऊ नहीं रहेंगे। इसी बीच ओपेक+ ने अपनी मासिक बैठक में अप्रैल से उत्पादन बढ़ोतरी की रफ्तार तेज करने पर सहमति जताई है। समूह के प्रमुख सदस्य सऊदी अरब और रूस, जिन्होंने पहली तिमाही में उत्पादन वृद्धि रोकी थी, अब अप्रैल से प्रतिदिन 2,06,000 बैरल अतिरिक्त तेल बाजार में उतारेंगे। यह बढ़ोतरी पिछले दिसंबर में घोषित 1,37,000 बैरल प्रतिदिन की वृद्धि से करीब डेढ़ गुना ज्यादा है। मौजूदा हालात में तेल बाजार पूरी तरह भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर नजर आ रहा है। यदि तनाव और बढ़ता है तो कीमतों में और उछाल संभव है, जबकि कूटनीतिक समाधान की स्थिति में बाजार को कुछ राहत मिल सकती है।
छिंदवाड़ा में मौत का मंजर, पति पत्नी की कुचलकर मौत के बाद हाईवे जाम, तीन घंटे ठप रहा यातायात

छिंदवाड़ा /मध्य प्रदेश के Chhindwara जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। सौंसर नागपुर मार्ग पर स्थित सतनूर के पास नेशनल हाईवे 547 पर आरटीओ बैरियर के नजदीक एक तेज रफ्तार ट्रक ने पति पत्नी को कुचल दिया जिससे मौके पर ही दोनों की मौत हो गई। घटना इतनी भयावह थी कि आसपास मौजूद लोग सन्न रह गए और देखते ही देखते गुस्से की लहर फैल गई। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों में भारी आक्रोश फूट पड़ा। लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में आरटीओ की सख्ती और अव्यवस्थित कार्रवाई के कारण आए दिन सड़क पर अव्यवस्था की स्थिति बनती है जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बैरियर के आसपास वाहनों की लंबी कतारें लगती हैं और अचानक ब्रेक लगाने या दिशा बदलने से हादसों का खतरा बना रहता है। दंपति की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। आक्रोशित भीड़ ने नेशनल हाईवे 547 पर चक्काजाम कर दिया और सड़क पर टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि भीड़ ने आरटीओ के एक वाहन में तोड़फोड़ भी कर दी। हालात ऐसे बन गए कि दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और करीब तीन घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। मौके पर शुरुआती दौर में केवल चार पुलिसकर्मी मौजूद थे जो बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने में असमर्थ नजर आए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हादसे के बाद संबंधित अधिकारी और कथित दलाल मौके से गायब हो गए जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क उठा। भीड़ लगातार जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करती रही। लोगों का कहना है कि यदि बैरियर पर व्यवस्था दुरुस्त होती और यातायात को सुचारू रूप से संचालित किया जाता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आरटीओ की कार्यप्रणाली की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। करीब तीन घंटे की मशक्कत और समझाइश के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराया। आश्वासन दिया गया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद धीरे धीरे जाम खुला और यातायात सामान्य हो सका। यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए असहनीय त्रासदी बन गया बल्कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर गया है। स्थानीय लोगों की मांग है कि हाईवे पर सुरक्षा इंतजाम मजबूत किए जाएं ताकि भविष्य में किसी और को अपनी जान न गंवानी पड़े।
ईरान के मिसाइल हमलों पर अमेरिका और खाड़ी देशों का कड़ा रुख, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और खाड़ी देशों ने ईरान की ओर से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की तीखी आलोचना की है। घटनाक्रम तब तेज हुआ जब इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमले किए। इसके बाद जारी संयुक्त बयान में अमेरिका, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने इन हमलों को “लापरवाही भरा और अस्थिर करने वाला” बताया। अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ईरान द्वारा संप्रभु क्षेत्रों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का सीधा उल्लंघन है। बयान के मुताबिक, इन हमलों का असर बहरीन, इराक (जिसमें इराकी कुर्दिस्तान क्षेत्र भी शामिल है), जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई पर पड़ा। देशों ने आरोप लगाया कि हमलों में आम नागरिकों की जान जोखिम में डाली गई और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। ‘खतरनाक बढ़त’ से क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरासंयुक्त बयान में कहा गया कि इस तरह की कार्रवाई कई देशों की संप्रभुता का उल्लंघन है और यह पूरे इलाके की स्थिरता को खतरे में डालती है। सरकारों ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान ने उन देशों को भी निशाना बनाया जो सीधे तौर पर किसी सैन्य टकराव में शामिल नहीं थे। इसे गैर-जिम्मेदाराना और उकसावे वाली कार्रवाई करार दिया गया। बयान में साफ कहा गया कि आम नागरिकों और तटस्थ देशों को टारगेट करना अस्वीकार्य है। सातों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि वे अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए एकजुट हैं और आत्मरक्षा के अधिकार को दोहराते हैं। एयर डिफेंस सहयोग पर जोर, सुरक्षा रणनीति मजबूतक्षेत्र में बढ़ते मिसाइल और ड्रोन खतरों के बीच संयुक्त बयान में एयर और मिसाइल डिफेंस सहयोग की सराहना की गई। देशों ने कहा कि समन्वित प्रयासों के कारण बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान को रोका जा सका। अमेरिका की खाड़ी क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी और बहरीन, कतर, कुवैत, सऊदी अरब व यूएई के साथ उसकी रक्षा साझेदारी लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा रही है। पश्चिमी और खाड़ी देशों का मानना है कि हाल के वर्षों में ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं में उल्लेखनीय विस्तार किया है, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित हुआ है। हालांकि तेहरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह रक्षात्मक है। मौजूदा घटनाक्रम ने मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कूटनीतिक प्रयास इस टकराव को कितना थाम पाते हैं या हालात और गंभीर मोड़ लेते हैं।
होलिका दहन पर वामपंथी कलुष

– कैलाश चन्द्र भारत की सांस्कृतिक स्मृति पर जितने हमले बाहरी आक्रांताओं ने नहीं किए, उससे कहीं अधिक गहरे और कहीं अधिक धूर्त हमले आज के वैचारिक उपनिवेशवादियों ने किए हैं। यह हमला तलवारों का नहीं, शब्दों का है। यह आक्रमण सीमाओं का नहीं, स्मृति का है। वस्तुत: आज जो लोग होली, होलिका दहन और प्रह्लाद की कथा को “ब्राह्मणवाद द्वारा एक दलित नारी को जलाए जाने” की घटना बताकर प्रस्तुत करते हैं, वे न परंपरा जानते हैं और न कथा समझते हैं। वे सिर्फ भारत की सांस्कृतिक संचेतना को उसकी अपनी कहानी से काट देना चाहते हैं। होलिका की वास्तविक कथाहोलिका की कथा जितनी सरल है, उतनी ही गहन भी। कश्यप ऋषि और दिति की पुत्री तथा दिति की संतानों को स्वभाव वैचित्र्य के कारण दैत्य कहा गया है। सम्पूर्ण कथा श्रीमद्भागवत पुराण में बहुत विस्तार से कही गई है। भारतवर्ष में होने वाली अधिकांश भागवत कथाओं में भागवताचार्य अपनी कथा का प्रारम्भ यहीं से करते हैं। इस आधार पर होलिका दैत्यकुल की राजकुमारी व प्रिचिति की पत्नी और स्वरभानु की माता थी। वह एक संपूर्ण दैत्यवंशी, राक्षसी चरित्र है। उसका भाई हिरण्यकश्यप न केवल राजा था बल्कि अत्याचारी, अहंकारी और असुर प्रवृत्ति वाला शासक भी था। उसके सामने किसी “शोषित समुदाय” की कथा गढ़ना या उसे “दलित नारी उत्पीड़न” में बदल देना केवल अज्ञान नहीं एक सुनियोजित बौद्धिक छल है, जो भारतीय मिथकीय चेतना को वर्गीय, जातीय और जेंडरवादी चश्मे से दूषित करना चाहता है। धर्म और अधर्म का स्पष्ट संदेशयहां सत्य सरल है। होलिका किसी “अबला स्त्री” की कथा नहीं है। वह वरदान से सशक्त, छल से प्रेरित और अधर्म की सहायक थी। ब्रह्मा ने उसे अग्नि प्रतिरोध का वरदान दिया था, किन्तु वह वरदान धर्म विरोधी कर्मों के लिए नहीं था। जब वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठती है तो उसका जलना कर्मफल है। यह अन्याय के अंत, अधर्म की पराजय और सत्य की विजय का प्रतीक है। यही पुराणों का स्वर है और यही भारतीय संस्कृति की जीवंतता का मूलाधार भी है। पर आज इस कथा को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने वाले “कल्चरल मार्क्सिज्म” के प्रशिक्षित कार्यकर्ता इसे “ब्राह्मणों द्वारा स्त्री दहन” का उदाहरण बताते हैं। ये उनकी चाल पुरानी है। हर परंपरा को उत्पीडन का प्रमाण बनाओ। हर कथा को वर्ग संघर्ष के ढांचे में फिट करो। हर मूल्य को अपराधबोध में बदलो। वे राक्षसी को पीड़िता बना देते हैं, दैत्यकुल को जाति समूह कह देते हैं और धर्म-अधर्म की अनंत कथा को सत्ता विरोध के रंग में विकृत कर देते हैं। यही मानसिकता श्रीराम को साम्राज्यवादी, श्रीकृष्ण को चालबाज, माता दुर्गा को पीड़ित स्त्री और श्रीगणेश को उपहास का पात्र बना देती है। होलिका दहन का सांस्कृतिक अर्थहोलिका दहन का अर्थ किसी व्यक्ति, कुल या जाति का दमन नहीं है। यह जीवन की नकारात्मकता के दहन का संदेश है। यह नव वसंत, नवहर्ष, नई शुरुआत और सत्य के धारण एवं संरक्षण का पर्व है। इसमें प्रह्लाद की विजय, भक्ति की शक्ति और अधर्म के अंत का संदेश निहित है। इसे महिला विरोध, समाज विरोध या सत्ता विरोध की कहानी में बदलना हमारी परंपरा का नहीं बल्कि हमारी स्मृति का अपमान है। इतिहास के नाम पर फैलाया गया भ्रमभारतीय समाज को बांटने के लिए आज एक विचित्र वैचारिक नाटक रचा जा रहा है। यह कहा जा रहा है कि ‘हिरण्यकश्यप’ शूद्र था, शूद्र तप नहीं कर सकते और गुरुकुल नहीं जा सकते। यह इतिहास नहीं बल्कि वैचारिक क्षुद्रता का प्रमाण है। जिन लोगों ने न शास्त्र पढ़े और न पुराण समझे, वे आज सोशल मीडिया की अधूरी जानकारी के आधार पर एक संपूर्ण सभ्यता को अपराधी सिद्ध करने में लगे हैं। भारतीय चेतना का मूल सत्यवास्तविकता यह है कि होलिका और हिरण्यकश्यप भारतीय चेतना में सदियों से अहंकार और अधर्म के प्रतीक रहे हैं। गुरुकुलों की शिक्षा में शस्त्र और शास्त्र का अध्ययन करने के बाद अहंकार के कारण वे अधर्म के मार्ग पर चले और भक्त प्रह्लाद सत्य के प्रतीक बने। जो लोग इस सरल सत्य को भी “सामाजिक न्याय” के चश्मे से विकृत करते हैं, वे न्याय के पक्षधर नहीं बल्कि भारतीय समाज को भीतर से तोड़ने वाले मानसिक उपनिवेशवाद के वाहक हैं। स्मृति और परंपरा की पुनर्स्थापनाआज आवश्यकता किसी प्रतिक्रिया या प्रतिशोध की नहीं है। आवश्यकता है तथ्यों की पुनर्स्थापना की। हमें अपनी चेतना में सांस्कृतिक स्मृति को पुनः प्रखर करना होगा। परंपरा को आधुनिक राजनीतिक सिद्धांतों के ढांचे में कैद करने के स्थान पर उसके कालातीत संदेश को समझना होगा। यह संघर्ष एक कथा का न होकर भारतीय तत्वज्ञान, वांग्मय, दर्शन और वैचारिक संप्रभुता का है। इसलिए यह समझना सभी के लिए समान रूप से आवश्यक है कि ‘होलिका’ का जलना किसी स्त्री का दहन नहीं है। यह अत्याचार, असहिष्णुता, अधर्म, अनीति और असत्य के दहन का प्रतीक है। उसका अंत किसी समाज पर अत्याचार का नहीं बल्कि अधर्म की पराजय का उत्सव है। आज भारत की सभ्यता इस वैचारिक आक्रमण को पहचान चुकी है। वह जानती है कि हमारी परंपराएं हिंसा की नहीं बल्कि समरसता की उपज हैं। होलिका दहन उसी समरसता का उत्सव है, अहंकार के अंत और सत्य के आरंभ का पर्व। अत: हमेशा ही अपने समय में वर्तमान काल की हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस वैचारिक धुंध में भी स्पष्ट देख सकें और यह कह सकें कि भारतीय संस्कृति को समझने के लिए भारतीयता चाहिए, न कि वह वैचारिक चश्मा जो हर कथा को संघर्ष, हर पात्र को पीड़ित और हर पर्व को अपराध में बदल देता है। अंत में यही कि होलिका दहन पर कलुष केवल परंपरा का नहीं बल्कि विवेक का अपमान है। इसे समझना और इस भ्रम को तोड़ना आज केवल सांस्कृतिक कर्तव्य नहीं यह हम सभी की राष्ट्रीय आवश्यकता है। (लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ स्तम्भकार हैं)