MP ASI DIES ON DUTY: शिवपुरी में ओन ड्यूटी ASI की हार्ट अटैक से मौत, अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम

HIGHLIGHTS: ड्यूटी के दौरान सीने में दर्द की शिकायत जिला अस्पताल में इलाज के दौरान निधन एसपी निवास पर तैनात थे एएसआई 58 वर्ष की आयु में हुआ निधन पुलिस विभाग में शोक की लहर MP ASI DIES ON DUTY: शिवपुरी। शहर में मंगलवार सुबह एक दुखद घटना सामने आई। जहां पुलिस अधीक्षक निवास पर ड्यूटी के दौरान 58 वर्षीय सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) कल्याण सिंह रजक की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बता दें कि सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। ईयरफोन की तेज आवाज छीन रही सुनने की ताकत वर्ल्ड हियरिंग डे पर एम्स की सख्त चेतावनी बताया जा रहा है कि वे पटेल नगर क्षेत्र के निवासी थे और उनकी ड्यूटी पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़ के निवास पर लगी हुई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुबह ड्यूटी के दौरान उन्हें असहज महसूस हुआ, जिसके बाद साथी पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच राहत! यूएई में फंसे इंदौर के पूर्व विधायक संजय शुक्ला स्वदेश लौटे अचानक बिगड़ी तबीयत प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ASI रजक को सीने में तेज दर्द हुआ, जिसके बाद उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता दी गई। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद उनका उपचार शुरू किया, लेकिन हालत गंभीर बनी रही। FORMER MLA RAO RJKUMAR DEATH: चंदेरी की राजनीति को बड़ा झटका, वरिष्ठ नेता राव राजकुमार सिंह यादव का निधन पुलिस विभाग में शोक की लहर घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। सूचना कि माने तो वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों ने अस्पताल पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही विभागीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारी भी की गई। पुलिस का कहना है कि कल्याण सिंह रजक अपने सरल स्वभाव और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे।
ईयरफोन की तेज आवाज छीन रही सुनने की ताकत वर्ल्ड हियरिंग डे पर एम्स की सख्त चेतावनी

नई दिल्ली :तेज आवाज में लंबे समय तक ईयरफोन या हेडफोन का इस्तेमाल अब युवाओं और किशोरों के लिए गंभीर खतरे की घंटी बनता जा रहा है। 3 मार्च को मनाए जाने वाले वर्ल्ड हियरिंग डे के अवसर पर नई दिल्ली स्थित All India Institute of Medical Sciences New Delhi के ईएनटी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पर्सनल लिसनिंग डिवाइस का अत्यधिक उपयोग नॉइज इंड्यूस्ड हियरिंग लॉस का बड़ा कारण बन रहा है। एम्स के ईएनटी विभाग की डॉ पूनम सागर के अनुसार कान के अंदर मौजूद बेहद संवेदनशील हेयर सेल्स ध्वनि को पहचानकर उसे दिमाग तक पहुंचाने का काम करती हैं। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक तेज आवाज में गाने सुनता है तो ये कोशिकाएं स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। एक बार इनका नुकसान हो जाए तो सुनने की क्षमता पूरी तरह वापस नहीं आती। यही वजह है कि विशेषज्ञ इस समस्या को लेकर लगातार जागरूकता की अपील कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि 120 डेसीबल की तीव्रता पर केवल पांच मिनट तक ईयरफोन सुनना भी कानों के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। वहीं 60 डेसीबल की अपेक्षाकृत कम आवाज पर आठ घंटे लगातार सुनना भी सुरक्षित नहीं माना जाता। दोनों ही स्थितियों में कानों पर दबाव पड़ता है और धीरे धीरे सुनने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। नॉइज इंड्यूस्ड हियरिंग लॉस के मामले अब कम उम्र में तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले जहां 50 वर्ष की आयु के बाद सुनने की क्षमता में कमी आम मानी जाती थी वहीं अब 40 की उम्र के बाद ही हियरिंग लॉस के केस सामने आने लगे हैं। इसके पीछे पर्सनल लिसनिंग डिवाइस का बढ़ता चलन एक बड़ी वजह माना जा रहा है। टीनएजर्स में मोबाइल गेमिंग ऑनलाइन क्लास और म्यूजिक स्ट्रीमिंग के कारण ईयरफोन का इस्तेमाल कई घंटों तक होता है। मेट्रो बस या ट्रैफिक जैसे शोरगुल वाले माहौल में लोग बाहरी आवाज दबाने के लिए वॉल्यूम और बढ़ा देते हैं। तेज बाहरी शोर और हाई वॉल्यूम का यह संयोजन कानों के लिए दोहरा खतरा पैदा करता है। विशेषज्ञों ने कुछ शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है। यदि कानों में घंटी या सीटी जैसी आवाज सुनाई दे जिसे टिनिटस कहा जाता है बातचीत के दौरान शब्द साफ न सुनाई दें या बार बार सामने वाले से बात दोहराने को कहना पड़े तो यह हियरिंग लॉस के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। डॉ पूनम सागर का कहना है कि बचाव संभव है यदि लोग कुछ सरल सावधानियां अपनाएं। डिवाइस को उसकी अधिकतम वॉल्यूम के 60 प्रतिशत से कम पर रखें और लगातार लंबे समय तक इस्तेमाल न करें। लगभग 60 मिनट सुनने के बाद ब्रेक लेना जरूरी है ताकि कानों को आराम मिल सके। शोरगुल वाले माहौल में ईयरफोन के उपयोग से बचना बेहतर है। वर्ल्ड हियरिंग डे का उद्देश्य यही है कि लोग अपनी सुनने की सेहत को गंभीरता से लें। सुनने की क्षमता अनमोल है और इसे लापरवाही से खोना आसान लेकिन वापस पाना लगभग असंभव है। सही आदतें अपनाकर और जागरूक रहकर हम अपने कानों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं।
इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच राहत! यूएई में फंसे इंदौर के पूर्व विधायक संजय शुक्ला स्वदेश लौटे

इंदौर । इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के चलते संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में फंसे इंदौर के पूर्व विधायक संजय शुक्ला सहित कई यात्रियों की मंगलवार को सुरक्षित स्वदेश वापसी हो गई। दुबई और शारजाह में उड़ानों में व्यवधान के कारण ये लोग पिछले कुछ दिनों से वहीं रुके हुए थे। पूर्व विधायक संजय शुक्ला, विशाल पटेल, प्रवीण कक्कड़, उद्योगपति मनीष शाहरा (सहारा ग्रुप), मनीष अग्रवाल (अग्रवाल ग्रुप), पिंटू छाबड़ा (सी-21), गोलू पाटनी सहित अन्य इंदौरी व्यवसायी एक शादी समारोह में शामिल होने दुबई गए थे। इसी दौरान इजराइल-ईरान संघर्ष शुरू हो गया, जिससे यूएई में हालात प्रभावित हुए और कई उड़ानें रद्द कर दी गईं। एयर इंडिया एक्सप्रेस की शारजाह-इंदौर फ्लाइट भी प्रभावित हुई थी, जिसके कारण इंदौर, भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य जिलों के सैकड़ों यात्री दुबई और शारजाह में फंसे रहे। कई यात्रियों को होटल में अतिरिक्त दिन रुकना पड़ा। हालांकि 2 मार्च से दुबई और अबूधाबी से कुछ उड़ानें पुनः शुरू हुईं। मंगलवार सुबह दुबई एयरपोर्ट से उड़ान भरकर संजय शुक्ला समेत कई यात्रियों ने पहले मुंबई का सुरक्षित रास्ता तय किया। वहां से उन्होंने दूसरी फ्लाइट लेकर इंदौर का रुख किया। स्वदेश लौटने वालों में संजय शुक्ला, विशाल पटेल, प्रवीण कक्कड़, मनीष शाहरा, मनीष अग्रवाल, पिंटू छाबड़ा, गोलू पाटनी, उत्पल गोयल और आदित्य शर्मा शामिल रहे। मुंबई पहुंचने पर यात्रियों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली। इस दौरान प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दिल्ली में संबंधित मंत्रालयों से संपर्क किया। वहीं कांग्रेस नेता जीतु पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फंसे लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए हस्तक्षेप की मांग की। सरकार और एयरलाइन कंपनियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थीं। उड़ान से पहले संजय शुक्ला ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बाबा महाकाल की कृपा और सभी की शुभकामनाओं से वे जल्द ही इंदौर लौट रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और मंत्री तुलसीराम सिलावट के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
होली खेलते समय न करें यह गलती केमिकल वाले रंग बढ़ा रहे अस्थमा और एलर्जी का खतरा

नई दिल्ली :होली रंगों और खुशियों का त्योहार है लेकिन जरा सी लापरवाही बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। खासकर हवा में उड़ता गुलाल उनके फेफड़ों और आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इस समय बाजार में हर्बल के नाम पर बिक रहे कई सिंथेटिक रंगों में ऐसे केमिकल पाए जाते हैं जो बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि हर साल होली के बाद अस्पतालों में सांस और त्वचा से जुड़ी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। अहमदाबाद स्थित Narayana Hospital Ahmedabad की कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ शची पंडित के अनुसार बच्चे होली के दौरान लंबे समय तक बाहर खेलते हैं और मजे में खूब गुलाल उड़ाते हैं। यह बारीक रंगीन धूल सांस के जरिए सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाती है। इससे ब्रोंकियल इरिटेशन सांस फूलना खांसी और एलर्जिक रिएक्शन की समस्या हो सकती है। जिन बच्चों को पहले से अस्थमा या एलर्जी की शिकायत है उनके लिए खतरा और बढ़ जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक सस्ते सिंथेटिक रंगों में लेड ऑक्साइड कॉपर सल्फेट मर्करी सल्फाइड और क्रोमियम कंपाउंड जैसे तत्व मिलाए जा सकते हैं। ये तत्व त्वचा की बाहरी सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाते हैं और सूजन पैदा कर सकते हैं। जब ये बारीक कण हवा में तैरते हैं तो बच्चों के शरीर में सांस के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। Asian Hospital Faridabad के रेस्पिरेटरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ मानव मनचंदा बताते हैं कि होली के मौसम में एलर्जिक ब्रोंकाइटिस और अस्थमा के अटैक के मामले बढ़ जाते हैं। रंगों के महीन कण फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर सांस की नलियों में सूजन पैदा कर सकते हैं। इससे घरघराहट तेज खांसी और सीने में जकड़न महसूस हो सकती है। फेफड़ों के अलावा आंखें भी सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। बच्चे अक्सर बिना सावधानी के सीधे चेहरे पर गुलाल लगा देते हैं जिससे रंग आंखों में चला जाता है। सिंथेटिक रंगों के कण कंजंक्टिवाइटिस यानी आंखों में लालिमा और पानी आने की समस्या पैदा कर सकते हैं। कुछ मामलों में कॉर्नियल एपिथेलियल डिफेक्ट यानी आंख की ऊपरी परत पर खरोंच तक आ सकती है खासकर जब रंगों में हानिकारक केमिकल या महीन कांच के कण मिले हों। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन बच्चों को अस्थमा एलर्जिक राइनाइटिस एक्जिमा या सेंसिटिव स्किन की समस्या है उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए। होली खेलने से पहले त्वचा पर नारियल तेल या मॉइश्चराइजर लगाने से केमिकल का सीधा असर कम किया जा सकता है। आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनना बेहतर है और जबरदस्ती चेहरे पर रंग लगाने से बचना चाहिए। डॉक्टर सलाह देते हैं कि केवल सर्टिफाइड हर्बल या पौधों से बने रंगों का ही इस्तेमाल करें। त्योहार की खुशी तभी पूरी है जब वह सेहत पर भारी न पड़े। थोड़ी जागरूकता और सावधानी से होली को सुरक्षित और यादगार बनाया जा सकता है ताकि रंगों की मिठास लंबे समय तक रहे और किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या त्योहार की खुशी को फीका न कर दे।
आलीराजपुर भगोरिया हाट में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आमने-सामने, मंच पर आदिवासी मुद्दों पर बहस

आलीराजपुर। प्रदेश के पारंपरिक भगोरिया पर्व के समापन अवसर पर आयोजित भगोरिया हाट में सोमवार को राजनीति की हलचल देखने को मिली। मंच पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आमने-सामने नजर आए। आयोजन के दौरान आदिवासी समाज की परंपराओं और संस्कृति की चर्चा के बीच दोनों नेताओं की बयानबाजी ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया। मंत्री ने दी शुभकामनाएं, योजनाओं का प्रचार:मंत्री विजयवर्गीय ने मंच से आदिवासी समाज को भगोरिया और होली की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार आदिवासियों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रही है। मंत्री ने यह भी दावा किया कि इन योजनाओं के माध्यम से एक परिवार को 30 से 50 हजार रुपए तक का लाभ मिल रहा है। सिंघार ने उठाए सवाल:वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंच से सरकार और मंत्री पर तीखे सवाल उठाए और कई मुद्दों पर आलोचना की। उनके सवालों ने आयोजन को सिर्फ सांस्कृतिक उत्सव नहीं बल्कि राजनीतिक बहस का मंच बना दिया। राजनीतिक टिप्पणी से परहेज:मंत्री विजयवर्गीय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि वे केवल भगोरिया उत्सव में शामिल होने आए हैं और किसी प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी नहीं करेंगे। उन्होंने आदिवासी समाज की परंपरा और संस्कृति की सराहना करते हुए राजनीतिक सवालों से दूरी बनाई। सांस्कृतिक और राजनीतिक संतुलन:भगोरिया पर्व आदिवासी समाज की प्रमुख सांस्कृतिक धरोहर है। इस बार का हाट आयोजन न केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भरपूर था, बल्कि इसमें राजनीतिक नेताओं की आमने-सामने की बहस ने भी उत्सव को अलग पहचान दी। आदिवासी कल्याण योजनाओं का जिक्र:मंत्री ने विभिन्न सरकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि आदिवासी परिवारों को प्रतिवर्ष आर्थिक लाभ पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुँचाने का अवसर भी प्रदान करते हैं। समारोह की खास बातें:भगोरिया हाट में पारंपरिक नृत्य, गीत, और आदिवासी शिल्प का प्रदर्शन हुआ। मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच नेताओं की बयानबाजी ने आयोजन को सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों रंगों में रंग दिया।
FORMER MLA RAO RJKUMAR DEATH: चंदेरी की राजनीति को बड़ा झटका, वरिष्ठ नेता राव राजकुमार सिंह यादव का निधन

HIGHLIGHTS: लंबी बीमारी के बाद भोपाल में निधन 72 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस 2008 में चंदेरी से विधायक बने सीएम मोहन यादव ने अस्पताल में की थी मुलाकात 30 वर्षों से परिवार का ईसागढ़ जनपद में प्रभाव FORMER MLA RAO RJKUMAR DEATH: अशोकनगर। राव राजकुमार सिंह यादव का लंबी बीमारी के बाद भोपाल में निधन हो गया। 72 वर्षीय वरिष्ठ नेता पिछले छह महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे और उनका इलाज भोपाल स्थित जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल में चल रहा था। जिसके बाद मंगलवार को उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही भारतीय जनता पार्टी में शोक की लहर दौड़ गई। बता दें कि दो दिन पहले ही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव अस्पताल पहुंचकर उनका स्वास्थ्य हाल जानने गए थे। GOHAD CMO ASSAULT CASE: सरकारी दफ्तर में दबंगई: गोहद नगर पालिका बैठक में पार्षद पुत्र ने CMO से की मारपीट, केस दर्ज महुअन से शुरू हुआ राजनीतिक सफर अशोकनगर जिले के महुअन गांव में जन्मे राव राजकुमार सिंह यादव को राजनीति विरासत में मिली थी। उनके पिता बादल सिंह यादव भी क्षेत्र के प्रभावशाली नेता रहे। मध्यप्रदेश में RTE प्रवेश 2026–27 की प्रक्रिया घोषित, ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी से मिलेगा निजी स्कूलों में निशुल्क दाखिला पंच से विधायक तक का सफर उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंचायत में पंच के रूप में की। इसके बाद वे ईसागढ़ जनपद के अध्यक्ष बने। वर्ष 2008 में वे चंदेरी विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए। बाद में पार्टी ने दोबारा उन पर भरोसा जताया, हालांकि वे चुनाव नहीं जीत सके। उन्होंने एक बार बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर भी विधानसभा चुनाव लड़ा। वजन घटाने में आ रही है रुकावट? स्लो मेटाबॉलिज्म हो सकता है बड़ा विलेन; डाइट, एक्सरसाइज और नींद के जरिए ऐसे बदलें अपने शरीर का गियर 30 वर्षों से परिवार का प्रभाव ईसागढ़ जनपद में लगभग तीन दशकों से उनके परिवार का दबदबा रहा है। पहले उनके पिता, फिर स्वयं राव राजकुमार सिंह और बाद में उनकी पत्नी व वर्तमान में पुत्रवधू जनपद अध्यक्ष रहीं। साध्वी रंजना विवाद ने पकड़ा तूल: मिसरोद में पाटीदार समाज का प्रदर्शन, ‘जिहादी’ कहने वालों पर कार्रवाई की मांग अंतिम संस्कार गृह जिले में उनका अंतिम संस्कार अशोकनगर जिले में किया जाएगा। क्षेत्रीय राजनीति में
होली खेलते समय रहें सावधान, कान में गया रंग बना सकता है सूजन दर्द और फंगल इंफेक्शन की वजह

नई दिल्ली :होली का त्योहार खुशियों रंगों और उत्साह का प्रतीक है। इस दिन लोग एक-दूसरे पर रंग और पानी डालकर जश्न मनाते हैं। लेकिन मस्ती के बीच अक्सर कुछ छोटी लापरवाहियां बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन जाती हैं। आमतौर पर लोग होली के रंग से त्वचा और बालों को होने वाले नुकसान की बात करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यही रंग कान की नली को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। कान की नली बेहद पतली और संवेदनशील त्वचा से बनी होती है। जब सूखा या गीला रंग कान के अंदर चला जाता है तो यह नमी के संपर्क में आकर अंदर ही चिपक सकता है। धीरे-धीरे यह रंग कान के मैल के साथ मिलकर सख्त परत बना देता है, जिससे कान में भारीपन महसूस होने लगता है। कई बार लोगों को लगता है कि यह सामान्य गंदगी है और वे कॉटन बड या पिन जैसी नुकीली चीजों से इसे निकालने की कोशिश करते हैं। यह आदत स्थिति को और बिगाड़ सकती है। इससे मैल और रंग और अंदर धकेल दिया जाता है, कान की नली में सूजन बढ़ जाती है और तेज दर्द शुरू हो सकता है। रंगों में मौजूद केमिकल्स भी समस्या को गंभीर बना सकते हैं। ये केमिकल त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे एलर्जिक रिएक्शन शुरू हो सकता है। कान की नली में यह प्रतिक्रिया ज्यादा तीव्र होती है, जिसके कारण खुजली, जलन और सूजन महसूस होती है। अगर कान में लगातार नमी बनी रहती है तो फंगल संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। कुछ मामलों में बैक्टीरियल संक्रमण विकसित होकर मवाद जैसा स्राव, तेज दर्द और सुनाई कम देने जैसी परेशानी पैदा कर सकता है। होली खेलने के बाद अगर कान में लगातार खुजली हो रही है, दर्द या इरिटेशन महसूस हो रहा है, पानी या मवाद जैसा तरल निकल रहा है या सुनने की क्षमता कम हो रही है तो इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि रंग या पानी कान के ज्यादा अंदर तक चला गया हो तो चक्कर आने की शिकायत भी हो सकती है। बच्चों में यह समस्या अधिक देखी जाती है क्योंकि वे खेलते समय सावधानी कम बरतते हैं। अगर होली खेलते समय कान में रंग चला जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे जरूरी बात है कि कान में कोई भी नुकीली वस्तु बिल्कुल न डालें। सिर को एक तरफ झुकाकर हल्के से बाहर की ओर थपथपाएं ताकि फंसा हुआ पानी या ढीला रंग बाहर निकल सके। अगर कान में पानी गया है तो बाहरी हिस्से को सूखे और साफ कपड़े से धीरे से पोंछ लें। यदि 24 से 48 घंटे के भीतर लक्षण कम नहीं होते या दर्द बढ़ता है तो ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। डॉक्टर माइक्रोस्कोप की मदद से सुरक्षित तरीके से कान की सफाई करते हैं और जरूरत पड़ने पर एंटीबायोटिक या एंटीफंगल ड्रॉप्स देते हैं। होली खेलने से पहले कुछ सावधानियां अपनाकर इन समस्याओं से बचा जा सकता है। कान के बाहरी हिस्से में हल्की पेट्रोलियम जेली लगाने से रंग सीधे त्वचा पर चिपकने से बचता है। होली खेलते समय किसी के कान में जबरदस्ती पानी न डालें। कोशिश करें कि ऑर्गेनिक या हर्बल रंगों का इस्तेमाल करें और संभव हो तो कानों को ढककर होली खेलें। थोड़ी सी सतर्कता आपको त्योहार की खुशियों के साथ स्वास्थ्य भी सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है।
मध्य प्रदेश में फिल्म ‘शतक’ टैक्स फ्री, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की घोषणा

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने हिंदी फिल्म ‘शतक’ को प्रदेश में टैक्स फ्री करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह फिल्म राष्ट्रसेवा और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रभावशाली संदेश देती है। मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में जानकारी दी कि फिल्म ‘शतक’ को पूरे मध्य प्रदेश में करमुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म उस सांस्कृतिक परंपरा और राष्ट्रनिर्माण के विचार को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती है, जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने दशकों से आगे बढ़ाया है। उनके अनुसार, संगठित विचार, मजबूत चरित्र और सेवा भाव से ही आत्मनिर्भर और सशक्त भारत का निर्माण संभव है। गौरतलब है कि ‘शतक’ 20 फरवरी को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म में संघ के 100 वर्षों की यात्रा को दर्शाया गया है। इसकी कहानी 1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा संगठन की स्थापना से शुरू होती है और दिखाया गया है कि किस प्रकार एक छोटे समूह से शुरू हुआ प्रयास आज विशाल संगठन में बदल गया। फिल्म में डॉ. हेडगेवार के साथ उनके उत्तराधिकारी माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) के जीवन और संघर्षों को प्रमुखता से उकेरा गया है। साथ ही स्वतंत्रता संग्राम, विभाजन काल, दादरा और नगर हवेली की मुक्ति, कश्मीर मुद्दा और 1975 के आपातकाल के दौरान संगठन की भूमिका को भी दर्शाया गया है। फिल्म की खासियत यह है कि इसमें एआई और आधुनिक ग्राफिक्स तकनीक के जरिए विनायक दामोदर सावरकर, महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। फिल्म का निर्देशन आशीष मॉल ने किया है, जबकि निर्माण वीर कपूर ने किया है। अभिनेता अजय देवगन ने फिल्म की कहानी को अपनी आवाज दी है। मुख्यमंत्री के इस फैसले का प्रदेश में व्यापक स्वागत किया जा रहा है।
इंदौर में होली पर टेपा सम्मेलन हास्य व्यंग्य कवियों की प्रस्तुति सब्जियों की माला से अनोखा सम्मान

Indore: होली के रंगों के बीच इंदौर में इस बार हंसी और व्यंग्य का ऐसा समागम सजा जिसने लोगों को देर रात तक ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। मल्हारगंज मेनरोड स्थित नेमीनाथ चौराहे पर आयोजित टेपा सम्मेलन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि त्योहार केवल रंग और गुलाल तक सीमित नहीं होते बल्कि वे सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और सामाजिक जुड़ाव का भी बड़ा माध्यम हैं। Indore में आयोजित इस खास आयोजन में शहरभर से लोग जुटे और मंच पर सजे हास्य व्यंग्य के रंगों का भरपूर आनंद लिया। सम्मेलन में सरिता सरोज विभा सिंह गोविंद शर्मा राजेश लोटपोट ब्रजकिशोर पटेल और अकबर ताज जैसे चर्चित कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत बनाए रखा। समसामयिक मुद्दों सामाजिक विसंगतियों और राजनीतिक हालात पर किए गए हल्के फुल्के कटाक्षों ने दर्शकों को सोचने पर भी मजबूर किया और हंसी से लोटपोट भी कर दिया। कार्यक्रम की सबसे खास बात रही सम्मान का अनोखा अंदाज। जहां आमतौर पर मंचों पर महंगी शॉल और फूलों के गुलदस्ते भेंट किए जाते हैं वहीं यहां अतिथियों को टाट की शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। फूलों की जगह सब्जियों की माला पहनाई गई सिर पर झाड़ू से बनी टोपी सजाई गई और गोभी के पत्तों से तैयार गुलदस्ता भेंट किया गया। इस व्यंग्यात्मक लेकिन सादगी भरे सम्मान ने मंच और पंडाल दोनों में मौजूद लोगों को खूब गुदगुदाया। यह आयोजन श्री एक पहल संस्था द्वारा पिछले डेढ़ दशक से लगातार किया जा रहा है और हर वर्ष इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। इस बार कार्यक्रम में समाजसेवी सुभाष खण्डेलवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे जबकि नवीन गोधा प्रमुख अतिथि के तौर पर मंच पर मौजूद थे। अध्यक्षता योगेन्द्र महंत ने की और विशेष अतिथियों में नारायण अग्रवाल वीरेन्द्रजी गुप्ता सरदारमल जैन और नितेश जैन आरोन शामिल रहे। देर रात तक चले इस सम्मेलन में श्रोता अपनी सीटों से टस से मस नहीं हुए। हर कविता पर तालियों की गड़गड़ाहट और ठहाकों की गूंज माहौल को उत्साह से भर देती रही। मंच संचालन भी रोचक और चुटीले अंदाज में किया गया जिससे कार्यक्रम की ऊर्जा लगातार बनी रही। होली के इस आयोजन में उत्साह उस समय और बढ़ गया जब भारत की टी 20 टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने की खबर आई। कई दर्शक मोबाइल पर मैच का स्कोर देखते हुए भी कवियों की प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे। रंगों के इस पर्व पर हंसी का यह आयोजन लोगों के लिए यादगार बन गया। टेपा सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि त्योहार केवल परंपराओं का निर्वाह नहीं बल्कि समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा फैलाने का अवसर भी होते हैं। जब रंगों के साथ हास्य और व्यंग्य का संगम हो जाए तो त्योहार की खुशी कई गुना बढ़ जाती है और यही इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता रही।
भोपाल में नई आबकारी नीति लागू, शराब दुकानों को छोटे समूहों में बांटा गया

नई दिल्ली। प्रदेश सरकार ने नई आबकारी नीति लागू कर दी है। इस नीति के तहत शराब दुकानों को बड़े ठेकेदारों के एकाधिपत्य से मुक्त कर छोटे-छोटे समूहों में बांटा गया है। भोपाल में कुल 87 शराब दुकानों को 20 ग्रुप्स में बांटा गया है, जिनके आवंटन की प्रक्रिया ई-टेंडर के जरिए की जा रही है। पहले की व्यवस्था और बदलाव:वित्तीय वर्ष 2025-26 में भोपाल की सभी दुकानों को सिर्फ 4 बड़े ग्रुप में बांटा गया था। इससे बड़े ठेकेदारों का दबदबा कायम था। इस बार नई नीति के तहत छोटे और नए लाइसेंसियों को भागीदारी का मौका मिलेगा। एकाधिपत्य समाप्त होने से पुराने ठेकेदारों में चिंता है और वे घाटे का प्रचार करके नए ठेकेदारों को हतोत्साहित करने की कोशिश कर रहे हैं। राजस्व और मुनाफाअंकड़ों के अनुसार, वर्तमान वर्ष 2025-26 में फरवरी के अंत तक प्रत्येक ग्रुप ने 50 करोड़ रुपए से अधिक मुनाफा कमाया है। इसके बावजूद बड़े ठेकेदार घाटे का प्रचार कर रहे हैं ताकि नए ठेकेदार सामने न आएं और भविष्य में बड़े ग्रुप बनाकर उनका एकाधिपत्य कायम रहे। ठेके की कीमतों में वृद्धिवित्तीय वर्ष 2024-25 में ठेके की नीलामी 1193 करोड़ रुपए से अधिक में हुई थी, जो टारगेट से 11% यानी 120 करोड़ रुपए ज्यादा थी। इस बार आरक्षित मूल्य 1432 करोड़ रुपए रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20% अधिक है। भोपाल के प्रमुख समूहों की कीमतें पिपलानी समूह: 4 दुकानें – पिपलानी, अयोध्या नगर, रत्नागिरी तिराहा और पटेल नगर। नई कीमत 127.77 करोड़ रुपए, पहले 106.48 करोड़ रुपए।बाग सेवनिया समूह: 121.89 करोड़ रुपए, पहले 101 करोड़ रुपए। नीति का लाभछोटे समूह बनाए जाने से ज्यादा बोलीदाता सामने आएंगे, जिससे सरकार को सीधे राजस्व में फायदा होगा। आबकारी विभाग के अनुसार, नई व्यवस्था से सरकार को लगभग 238 करोड़ रुपए अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। टेंडर फाइनल होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। नई आबकारी नीति से न केवल बड़े ठेकेदारों का एकाधिपत्य समाप्त होगा, बल्कि छोटे और नए लाइसेंसियों को भी व्यवसाय में भागीदारी का अवसर मिलेगा। ई-टेंडर के जरिए आवंटन से पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकार को अतिरिक्त राजस्व का लाभ मिलेगा।