जबलपुर के चार परिवार दुबई में फंसे, युद्ध और रद्द उड़ानों ने बढ़ाई मुश्किलें, केंद्र सरकार से सुरक्षा वापसी की अपील

नई दिल्ली। जबलपुर के चार व्यापारी परिवार दुबई में फंस गए हैं। शैलेश जैन, प्रशांत विश्वकर्मा, संजय सिंघई और प्रवीण जैन अपने परिवारों के साथ 21 फरवरी को दुबई घूमने गए थे और 28 फरवरी को लौटने वाले थे, लेकिन ईरान-इजराइल तनाव और मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण उनकी वापसी अनिश्चित हो गई। व्यापारियों ने वीडियो संदेश जारी कर बताया कि फिलहाल वे सुरक्षित हैं, लेकिन एयरपोर्ट का संचालन और उड़ानों का समय तय नहीं होने से तनाव बना हुआ है। होटल्स ने किराया तीन गुना तक बढ़ा दिया, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ गया। बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा करने की वजह से मानसिक चिंता भी अधिक है। व्यापारियों ने केंद्र सरकार से विशेष विमान या सुरक्षित व्यवस्था के माध्यम से जल्दी स्वदेश लौटने की गुहार लगाई। इंदौर के पूर्व विधायक संजय शुक्ला सहित कई यात्री अब लौटने लगे हैं, लेकिन एयर इंडिया एक्सप्रेस की शारजाह-इंदौर उड़ान IX-256 लगातार कैंसिल हो रही है, जिससे स्थिति और जटिल बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों में फंसे नागरिकों के लिए सरकार को त्वरित राहत, आर्थिक मदद और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए। व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार जल्द ही उनके परिवार सहित सुरक्षित लौटने का इंतजाम करेगी।
अमेरिका-इजराइल का संयुक्त हमला, ईरान परमाणु विवाद में 742 मौतों के बाद सुरक्षा अलर्ट

नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों के बीच ईरान में संकट गहराता जा रहा है। यह संघर्ष अब चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका के स्पेशल प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ परमाणु समझौते की अंतिम कोशिश भी नाकाम रही। अमेरिका ने ईरान को प्रस्ताव दिया था कि वह अगले 10 साल तक यूरेनियम इनरिचमेंट पूरी तरह बंद कर दे, और बदले में अमेरिका न्यूक्लियर फ्यूल उपलब्ध कराने को तैयार था। हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। बातचीत टूटते ही अमेरिका और इजराइल ने मिलकर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। इस संघर्ष में अब तक ईरान में 742 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 176 बच्चे शामिल हैं। घायल हुए लोगों की संख्या 750 से अधिक है। इस हिंसा ने पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा की स्थिति पैदा कर दी है। लेबनान के बेरूत में इजराइली सेना ने हिज्बुल्लाह से जुड़े अल-मनार टीवी स्टेशन की इमारत को निशाना बनाया, जिससे प्रसारण कुछ समय के लिए बाधित हुआ। हालांकि, हमले के बाद प्रसारण फिर से शुरू कर दिया गया। ईरान के मिनाब शहर में गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले में मारी गई 165 लड़कियों का अंतिम संस्कार भी हुआ। इस दौरान हजारों लोग इकट्ठा हुए, और एक मां ने मंच से अमेरिका पर हमले का आरोप लगाया। भीड़ ने ‘अमेरिका मुर्दाबाद’, ‘इजराइल मुर्दाबाद’ और ‘नो सरेंडर’ जैसे नारे लगाए। ईरानी मीडिया ने हमले का आरोप इजराइल पर लगाया, जबकि इजराइली सेना ने इसे नकारा। इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध लंबा और अंतहीन नहीं होगा। उनका कहना है कि यह संघर्ष क्षेत्र में स्थायी शांति लाने का अवसर बन सकता है। उन्होंने पहले हुए अब्राहम अकॉर्ड्स का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ मिलकर अब और देशों के साथ शांति समझौते भी संभव हैं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प अमेरिका को लंबी और अनिश्चित लड़ाई में नहीं फंसने देंगे। उन्होंने कहा कि ईरान पर हमला विशेष रणनीति के तहत किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों। ट्रम्प की अनुमति के बिना कोई युद्ध लंबे समय तक जारी नहीं रहेगा, जिससे अमेरिका को इराक और अफगानिस्तान जैसी लंबी लड़ाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। सुरक्षा के मद्देनजर अमेरिका ने जॉर्डन, बहरीन और इराक से गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है। जॉर्डन और बहरीन में ईरान से ड्रोन और मिसाइल हमले का खतरा है, जबकि इराक में हिंसा और अपहरण का भी जोखिम बना हुआ है। अमेरिकी दूतावासों में केवल आवश्यक स्टाफ ही रहेंगे, और फ्लाइट्स रद्द होने के कारण नागरिकों को सुरक्षित निकासी का निर्देश दिया गया है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति को गंभीर बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने शांति बहाल करने और संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस बीच अमेरिका और इजराइल की मिलीजुली कार्रवाई, ईरानी नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नए संकट की घंटी साबित हो रही है।
LUBAR ECLIPSE: खग्रास चंद्र ग्रहण के चलते ग्वालियर के मंदिरों में पट बंद; शाम को शुद्धिकरण के बाद होंगे दर्शन

HIGHLIGHTS: सुबह 6:20 बजे से ग्वालियर में सूतक काल लागू शाम 6:46 बजे शुद्धिकरण के बाद खुलेंगे मंदिरों के पट प्रमुख मंदिरों में सुबह की आरती के बाद दर्शन बंद सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में खग्रास ग्रहण ग्रहण के बाद स्नान, दान और जप-तप का विशेष महत्व LUBAR ECLIPSE: ग्वालियर। 2026 के पहले खग्रास चंद्र ग्रहण के चलते प्रमुख मंदिरों के पट सुबह से बंद कर दिए गए हैं। सुबह 6:20 बजे सूतक काल प्रारंभ होते ही देवदर्शन वर्जित कर दिए गए थे। इसके बाद अब शाम 6:46 बजे ग्रहण समाप्ति और शुद्धिकरण के बाद ही श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे। बता दें कि लगभग 12 घंटे तक मंदिरों में नियमित पूजा-अर्चना स्थगित रहेगी। GWALIOR CYBER CRIMES: ग्वालियर में ‘RTO ई-चालान’ के नाम पर साइबर ठगी, युवक के खाते से 2.12 लाख पार प्रमुख मंदिरों में सुबह की आरती के बाद बंद हुए पट शहर के राम मंदिर फालका बाजार, अचलेश्वर मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, गुरुद्वारा महादेव और संकट मोचन हनुमान मंदिर सहित कई मंदिरों में सुबह की आरती के बाद पट बंद कर दिए गए। ग्रहण समाप्ति पर गंगाजल से शुद्धिकरण कर विधि-विधान से आरती की जाएगी। मिडिल ईस्ट तनाव का असर! सोने की चमक बढ़ी, लगातार पांचवें दिन दाम चढ़े सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में ग्रहण ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह खग्रास चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में दिखाई देगा। ग्वालियर अंचल में इसका दृश्य प्रभाव लगभग 28 मिनट तक रहने का अनुमान है। सूतक काल में पूजा, मूर्तियों का स्पर्श और भोग लगाना वर्जित माना जाता है, इसलिए धार्मिक गतिविधियां दिनभर स्थगित रहेंगी। खाड़ी युद्ध से प्रभावित भारत का चावल निर्यात, लाखों करोड़ रुपये का स्टॉक समंदर में… गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सावधानी की सलाह धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। उन्हें घर में रहने और नुकीली वस्तुओं के उपयोग से बचने को कहा गया है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, दान और जप-तप का विशेष महत्व बताया गया है। भोजन पकाने से परहेज और पहले से बने भोजन में तुलसी पत्र रखने की परंपरा भी निभाई जाती है। होर्मुज संकट: भारत की तेल रणनीति में रूस और सऊदी की अहम भूमिका.. वैज्ञानिक दृष्टि से क्या है चंद्र ग्रहण? वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। खग्रास स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में ढक जाता है और लालिमा लिए दिखाई देता है।
GWALIOR CYBER CRIMES: ग्वालियर में ‘RTO ई-चालान’ के नाम पर साइबर ठगी, युवक के खाते से 2.12 लाख पार

HIGHLIGHTS: व्हाट्सऐप पर आई फर्जी ‘RTO ई-चालान’ APK से ठगी फाइल खोलते ही मोबाइल 8 मिनट तक हैंग कैनरा बैंक खाते से 2.12 लाख रुपए ट्रांसफर 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद केस दर्ज पुलिस ने मैलवेयर के जरिए ठगी की पुष्टि की GWALIOR CYBER CRIMES: मध्यप्रदेश। ग्वालियर के थाटीपुर क्षेत्र में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां तृप्ति नगर निवासी शशांक गुप्ता के व्हाट्सऐप पर एक अनजान नंबर से ‘RTO ई-चालान कॉपी’ नाम की APK फाइल भेजी गई और पैसे ठग लिए गए। बताया जा रहा है कि इसे ट्रैफिक चालान समझकर जैसे ही उन्होंने फाइल खोली, उनका मोबाइल करीब 7-8 मिनट तक हैंग हो गया। बाद में फोन सामान्य हो गया, जिससे उन्हें किसी गड़बड़ी का अंदेशा नहीं हुआ। खाड़ी युद्ध से प्रभावित भारत का चावल निर्यात, लाखों करोड़ रुपये का स्टॉक समंदर में… एक घंटे बाद आए ट्रांजेक्शन मैसेज करीब एक घंटे बाद शशांक के मोबाइल पर बैंक ट्रांजेक्शन के मैसेज आने लगे। उनके कैनरा बैंक खाते से 89 हजार, 60 हजार और 63 हजार रुपए ट्रांसफर हो गए। बता दें कि कुल मिलाकर 2 लाख 12 हजार रुपए की राशि निकाल ली गई। इसके बाद मैसेज देखकर वे तुरंत बैंक पहुंचे, जहां उन्हें साइबर फ्रॉड की आशंका बताई गई। खाड़ी युद्ध से प्रभावित भारत का चावल निर्यात, लाखों करोड़ रुपये का स्टॉक समंदर में… 1930 पर शिकायत, ई-जीरो FIR दर्ज थाने में शुरुआती सुनवाई न होने पर पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद थाटीपुर थाना पुलिस ने ई-जीरो FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, APK फाइल के जरिए मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल किया गया, जिससे ठगों ने बैंकिंग डिटेल्स तक पहुंच बना ली। होर्मुज संकट: भारत की तेल रणनीति में रूस और सऊदी की अहम भूमिका.. पुलिस की अपील: APK फाइल से रहें सावधान साइबर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि व्हाट्सऐप या एसएमएस पर आने वाली किसी भी अनजान APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। आरटीओ चालान की जानकारी केवल सरकारी वेबसाइट या अधिकृत ऐप के माध्यम से ही जांचें।
मिडिल ईस्ट तनाव का असर! सोने की चमक बढ़ी, लगातार पांचवें दिन दाम चढ़े
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और ऊर्जा कीमतों में उछाल के बीच सोना एक बार फिर निवेशकों का पसंदीदा सुरक्षित ठिकाना बन गया है। वैश्विक बाजारों में मंगलवार को सोने की कीमतों में लगातार पांचवें सत्र में तेजी दर्ज की गई। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और महंगाई की आशंकाओं ने कीमती धातुओं में जोरदार खरीदारी को बढ़ावा दिया है। एमसीएक्स पर रिकॉर्ड उछालभारत के Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना सोमवार को 2.53 प्रतिशत चढ़कर 1,66,199 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं मई डिलीवरी वाली चांदी 0.90 प्रतिशत गिरकर 2,80,090 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। होली के कारण मंगलवार को पहले सत्र में एमसीएक्स पर कारोबार बंद रहा और शाम 5 बजे से ट्रेडिंग दोबारा शुरू होनी है। वैश्विक बाजारों में भी तेजीअंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.8 प्रतिशत बढ़कर 5,360 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में करीब 1 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। स्पॉट सिल्वर लगभग 1.9 प्रतिशत उछलकर 91.11 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। हालांकि डॉलर इंडेक्स 0.19 प्रतिशत बढ़कर 98.57 पर पहुंच गया, जिससे डॉलर आधारित सोना विदेशी खरीदारों के लिए महंगा हो गया और तेजी की रफ्तार पर कुछ हद तक अंकुश लगा। तनाव की आग में घी का काम कर रहा तेलअमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जरूरत पड़ने तक जारी रहेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान ने सऊदी अरब में तेल और गैस ढांचे को निशाना बनाया है और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को नुकसान पहुंचाने की चेतावनी दी है। इसके जवाब में इजरायल ने ईरान के कमांड केंद्रों पर ‘हमलों की नई लहर’ शुरू करने की घोषणा की। इस बढ़ते टकराव से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका गहरा गई है। अमेरिकी कच्चा तेल वायदा 1.4 प्रतिशत बढ़कर 72.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 1.87 प्रतिशत की तेजी के साथ 79.2 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई की चिंताओं को और हवा दे रही हैं, जिससे सोने की मांग मजबूत हो रही है। फेड की नीति पर नजरनिवेशक अब अमेरिका के विनिर्माण और गैर-विनिर्माण पीएमआई, एडीपी नॉन-फार्म रोजगार आंकड़े और बेरोजगारी दर जैसे संकेतकों पर नजर टिकाए हुए हैं। इन आंकड़ों से Federal Reserve की आगे की मौद्रिक नीति का संकेत मिल सकता है। यदि महंगाई दबाव बना रहता है और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। हालांकि अनिश्चितता के माहौल में निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं। 2026 में 25% चढ़ चुका है सोनासाल 2026 में अब तक सोने की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है। पिछले वर्ष भी सोना लगभग 64 प्रतिशत चढ़ा था। इस तेजी के पीछे केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीदारी, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में बढ़ता निवेश और फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं प्रमुख कारण रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व में हालात सामान्य नहीं होते और ऊर्जा बाजार स्थिर नहीं होता, तब तक सोने में मजबूती बनी रह सकती है। हालांकि मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरें इसकी रफ्तार को सीमित कर सकती हैं।
खाड़ी युद्ध से प्रभावित भारत का चावल निर्यात, लाखों करोड़ रुपये का स्टॉक समंदर में…

नई दिल्ली : ईरान-इजरायल युद्ध की गर्मी Iran और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का असर अब भारतीय बासमती चावल के निर्यात पर भी पड़ रहा है। खाड़ी देशों में पानी के जहाजों का आवागमन रुक जाने के कारण भारत से निर्यात होने वाला चावल फंसा हुआ है। इस वजह से न केवल कच्चे तेल और नेचुरल गैस का आयात प्रभावित हुआ है, बल्कि भारत का बासमती चावल भी समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया के मुताबिक, भारत से खाड़ी देशों को भेजा जाने वाला चावल का ट्रांजिट समय लगभग 40 दिन का होता है। इसमें भारतीय बंदरगाह पर लगने वाला समय, जहाजों पर यात्रा का समय और डेस्टिनेशन कंट्री के बंदरगाह पर लगने वाला समय शामिल है। अभी हालात की वजह से निर्यात ठहरा हुआ है, लेकिन इससे पहले भेजे गए लगभग छह लाख टन बासमती चावल बंदरगाहों, समंदर में या गंतव्य देशों के पोर्ट पर फंसे हैं। निर्यातकों का कहना है कि इस समय अटके हुए भारतीय बासमती चावल का वैल्यू पांच से छह हजार करोड़ रुपये है। इतने बड़े कंशाइनमेंट के फंसने के कारण नए कंशाइनमेंट की पैकिंग और बैगिंग का काम फिलहाल रोक दिया गया है। जब हालात सामान्य होंगे, तब यह काम फिर से शुरू किया जाएगा। भारत से हर साल करीब 60 लाख टन बासमती चावल का निर्यात होता है, जिसमें से लगभग 70 फीसदी खाड़ी देशों को जाता है। इसका मतलब सालाना करीब 45 लाख टन बासमती चावल खाड़ी देशों में भेजा जाता है। इनमें से छह से सात लाख टन का निर्यात अकेले ईरान को होता रहा है। ईरान को निर्यात का रिकॉर्ड 14 लाख टन तक पहुंच चुका है। अब जबकि खाड़ी में युद्ध छिड़ गया है, भारत के निर्यातकों के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। न केवल वर्तमान कंशाइनमेंट फंसा है, बल्कि भविष्य में खाड़ी देशों को निर्यात की योजनाओं पर भी संकट मंडरा रहा है। यह स्थिति भारत के बासमती निर्यातकों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला दोनों के लिए तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर रही है।
स्वच्छ ऊर्जा बनेगी भारतीय कंपनियों की नई ताकत, दुनिया के बाजारों में मिलेगा मौका: पीएम मोदी

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर की गई हालिया सैन्य कार्रवाई का जोरदार बचाव किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर यह कदम अभी नहीं उठाया जाता, तो भविष्य में ईरान को रोक पाना लगभग असंभव हो जाता। उनके मुताबिक यह हमला महज जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से एक रणनीतिक और समयबद्ध निर्णय था। ‘नागरिकों को निशाना बनाता है तेहरान’फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना बना रहा है, जबकि इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई आतंकवादियों और सैन्य ढांचों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, “यही तेहरान और हमारे बीच मूल अंतर है। वे नागरिकों को निशाना बनाते हैं, हम आतंकियों को।” प्रधानमंत्री ने हालिया बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी मिसाइलें “टीएनटी से भरी बस की तरह होती हैं, जो मैक 8 की रफ्तार से आकर गिरती हैं।” उनके अनुसार, एक हमले में नौ लोगों की मौत हुई। उन्होंने इसे ‘सामूहिक हत्या’ करार दिया और कहा कि दुनिया को ऐसे खतरों से बचाना जरूरी है। परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम बना कारणनेतन्याहू का कहना है कि इजरायल ने पहले भी ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर प्रहार किया था, लेकिन इसके बावजूद तेहरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को और आगे बढ़ाया। “हमें लगा था कि वे सबक सीखेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वे सुधार से परे हैं और अमेरिका को नष्ट करने के लक्ष्य को लेकर कट्टर हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने दावा किया कि ईरान नए भूमिगत ठिकाने बना रहा था, जिससे उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम भविष्य की किसी भी सैन्य कार्रवाई से सुरक्षित हो सकता था। यदि ये ठिकाने पूरी तरह तैयार हो जाते, तो इजरायल या अमेरिका के लिए उन्हें निष्क्रिय करना बेहद कठिन हो जाता। ‘देरी का मतलब होता रणनीतिक हार’नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि “अगर अभी कार्रवाई नहीं करते, तो भविष्य में कोई कदम उठाना संभव नहीं होता।” उनके अनुसार, ईरान न केवल इजरायल बल्कि अमेरिका और अन्य देशों को भी निशाना बना सकता था, उन्हें ब्लैकमेल कर सकता था और क्षेत्रीय संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ सकता था। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ इजरायल की सुरक्षा का सवाल नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक स्थिरता का मुद्दा है। “हमें अपनी दुनिया को इन लोगों से बचाना होगा,” उन्होंने दोहराया। ट्रंप की सराहना, गठबंधन पर भरोसाइजरायली प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी निर्णायक कार्रवाई के लिए “पक्के इरादे वाले राष्ट्रपति” की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, “हम उनके बहुत मजबूत और काबिल साझेदार हैं। हमारा गठबंधन आज बेहद मजबूत है।” नेतन्याहू के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक तालमेल ने इस कार्रवाई को संभव बनाया। उन्होंने संकेत दिया कि यह कदम लंबे समय से मिल रही खुफिया जानकारियों और सुरक्षा आकलन के आधार पर उठाया गया। बढ़ता तनाव, दुनिया की नजरेंईरान पर हमले और उसके बाद की जवाबी कार्रवाइयों से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि यह टकराव सीमित दायरे में रहेगा या व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है। नेतन्याहू ने हालांकि साफ कर दिया है कि उनके मुताबिक यह कार्रवाई टाली नहीं जा सकती थी। “हमें अभी करना था और हमने किया। वरना ईरान की सरकार भविष्य की किसी भी कार्रवाई से सुरक्षित हो जाती,” उन्होंने कहा।
होर्मुज संकट: भारत की तेल रणनीति में रूस और सऊदी की अहम भूमिका..

नई दिल्ली :भारत का कच्चे तेल आयात रणनीति India पिछले कुछ महीनों में काफी बदल गया है। हालाँकि भारत ने रूस से तेल की खरीद कम कर दी है, लेकिन रूस अभी भी सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है। फरवरी में सऊदी अरब से क्रूड की सप्लाई में 30 फीसदी की वृद्धि हुई और यह रोजाना 10 लाख बैरल के स्तर तक पहुंच गई, जो जनवरी में 7.7 लाख बैरल थी। ग्लोबल डेटा सर्विस प्रोवाइडर Kpler के अनुसार, पिछले कुछ सालों में सऊदी से आयात रोजाना 6-7 लाख बैरल के आसपास था, लेकिन फरवरी में यह छह साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। वहीं रूस से तेल का आयात जनवरी में 11 लाख और दिसंबर में 12 लाख बैरल था, जबकि फरवरी में यह करीब 10 लाख बैरल प्रति दिन रहा। पश्चिम एशिया से भारत की सप्लाई बढ़ने के कारण गल्फ क्षेत्र से आने वाले क्रूड की हिस्सेदारी इम्पोर्ट बास्केट में बढ़ी है। लेकिन ईरान संकट और होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से यह स्थिति अस्थिर हो गई है। भारत के पास वर्तमान में केवल 18 दिन का क्रूड स्टॉक उपलब्ध है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान संकट लंबा खिंचता है तो भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदना होगा। रूस से अतिरिक्त सप्लाई की संभावना मौजूद है क्योंकि उसके कई जहाज समुद्र में हैं जिन्हें भारत की तरफ मोड़ा जा सकता है। इस बीच भारत ने होर्मुज की खाड़ी में ट्रांजिट कर रहे 25-27 लाख बैरल तेल पर भी नजर रखी है, जो ईराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आ रहा है। संकट की स्थिति में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रिफाइनिंग आपूर्ति बनाए रखने के लिए रूस और सऊदी से तेल की खरीद बढ़ाना पड़ सकता है।इस रणनीति से भारत न केवल आपूर्ति संकट से निपटने में सक्षम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच स्थिरता भी बनाए रख सकेगा।
ईरान पर हमला क्यों था जरूरी? इजरायली पीएम बोले– खतरा बढ़ने से पहले लिया एक्शन

नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाई को “जरूरी और समयबद्ध” बताते हुए कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाया जाता, तो भविष्य में कार्रवाई करना लगभग असंभव हो जाता। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना बना रहा है, जबकि इजरायल और अमेरिका “आतंकियों” पर फोकस कर रहे हैं। बैलिस्टिक मिसाइलों पर तीखी टिप्पणीनेतन्याहू ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों को बेहद खतरनाक बताते हुए कहा कि ऐसी मिसाइल “टीएनटी से भरी बस की तरह होती है, जो मैक 8 की रफ्तार से आकर गिरती है।” उन्होंने दावा किया कि हालिया हमलों में नौ लोगों की जान गई और कहा:“यही तेहरान और हमारे बीच फर्क है। तेहरान के सामूहिक हत्यारे नागरिकों को निशाना बनाते हैं, जबकि इजरायल और अमेरिका आतंकियों को निशाना बनाते हैं।” “परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम रोकना जरूरी था”नेतन्याहू के मुताबिक, इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर पहले भी प्रहार किया था, लेकिन तेहरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को आगे बढ़ाना जारी रखा। उनका दावा है कि ईरान नए भूमिगत ठिकाने बना रहा था, जिससे उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम भविष्य की सैन्य कार्रवाई से सुरक्षित हो सकता था। उन्होंने कहा,“अगर हम अभी कार्रवाई नहीं करते, तो भविष्य में ईरान को रोकना संभव नहीं होता। वह अमेरिका को निशाना बना सकता था, ब्लैकमेल कर सकता था और हमें व अन्य देशों को धमका सकता था।” ट्रंप की सराहनानेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई के लिए “पक्के इरादों वाले राष्ट्रपति” की जरूरत थी। उन्होंने कहा, हमारा गठबंधन आज बेहद मजबूत है। हमें अभी कार्रवाई करनी थी और हमने की।” बढ़ता क्षेत्रीय तनावईरान पर हमले और उसके बाद जवाबी कार्रवाइयों के चलते पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। इजरायल का कहना है कि यह कदम आत्मरक्षा और वैश्विक सुरक्षा के लिए जरूरी था, जबकि तेहरान इसे आक्रामक और गैरकानूनी कार्रवाई बता रहा है।
EPFO ने पेंशन, बीमा और ट्रस्टों के लिए एमनेस्टी स्कीम की मंजूरी दी, PF ब्याज दर जारी

नई दिल्ली :रिटायरमेंट फंड के संचालन वाली संस्था EPFO ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भविष्य निधि (EPF) पर ब्याज दर 8.25 प्रतिशत तय की है। यह लगातार तीसरे साल ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं है। सोमवार को केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में हुई सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। सबसे प्रमुख घोषणा ट्रस्टों के लिए छह महीने की ‘माफी योजना’ (एमनेस्टी स्कीम) है। यह उन ट्रस्टों पर लागू होगी जो अब तक EPF कानून के दायरे में नहीं आए हैं। योजना का उद्देश्य कंपनियों और ट्रस्टों को नियमों में लाना और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पहले से नियमों के अनुसार लाभ दे रहे ट्रस्टों का जुर्माना और ब्याज माफ कर दिया जाएगा। बैठक में नई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी मंजूरी मिली। ‘सोशल सिक्योरिटी कोड 2020’ के तहत EPF, EPS 2026 और EDLI 2026 योजनाओं को लागू किया जाएगा। इन नई योजनाओं से पीएफ, पेंशन और बीमा लाभ देने के लिए एक मजबूत कानूनी आधार मिलेगा और पुराने नियमों से नए नियमों में संक्रमण आसान होगा। बंद पड़े खातों (इनऑपरेटिव) को लेकर भी बोर्ड ने पायलट प्रोजेक्ट की मंजूरी दी। इसके तहत जिन खातों में 1,000 रुपये या उससे कम की राशि पड़ी है, उनका ऑटो-सेटलमेंट शुरू होगा। यह सुविधा सफल होने के बाद बड़ी रकम वाले खातों पर भी लागू की जाएगी। निवेश और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बोर्ड ने नई SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य EPFO निवेश की निगरानी और प्रबंधन को और मजबूत करना है। इन घोषणाओं से EPFO का वित्तीय ढांचा और अधिक मजबूत होगा, खाताधारकों को स्थिर और बेहतर रिटर्न मिलेगा और कंपनियों/ट्रस्टों को कानून के दायरे में लाने में मदद मिलेगी।