Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में 12 लाख कर्मचारियों को 64% महंगाई भत्ता पाने के लिए करना पड़ेगा इंतजार

Madhya Pradesh: नई दिल्ली। मध्य प्रदेश का वित्त विभाग घोषित प्लान के मुताबिक 7वें वेतनमान पर 64 प्रतिशत महंगाई भत्ता चालू वित्त वर्ष में नहीं दे पाएगा। ताजा ऐलान के अनुसार महंगाई भत्ता केंद्र सरकार के निर्णय के 8 महीने बाद कर्मचारियों को दिया गया है। कर्मचारियों को करना पड़ेगा इंतजार प्रदेश में लगभग साढ़े सात लाख नियमित कर्मचारी और साढ़े चार लाख पेंशनर्स महंगाई भत्ता और महंगाई राहत पाते हैं। ऐसे में 12 लाख कर्मचारियों को 64% भत्ता पाने के लिए 4 से 6 महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है। यह देरी राज्य सरकार के अप्रैल वेतन में 3% बढ़ा भत्ता देने के फैसले की वजह से हुई है। वित्त विभाग का पुराना प्लान वित्त विभाग ने तय किया था कि 7वें वेतनमान वाले कर्मचारियों को: 31 मार्च 2026 तक: 64% 31 मार्च 2027 तक: 74% 31 मार्च 2028 तक: 84% 31 मार्च 2029 तक: 94% महंगाई भत्ता मिलेगा। हालांकि, इस योजना के मुताबिक अब तक 64% भत्ता पूरा नहीं हो पाया है। अभी की स्थिति रोलिंग बजट के दौरान सरकार ने कहा था कि मार्च तक 64% भत्ता मिलेगा, लेकिन वास्तव में केवल 55% से बढ़कर 58% भत्ता ही दिया गया। भुगतान अप्रैल के वेतन से किया जाएगा। कर्मचारियों की उम्मीद थी कि दिवाली 2025 और फरवरी-मार्च 2026 में इसे 64% तक बढ़ा दिया जाएगा, लेकिन यह पूरा नहीं हो पाया। 5वें और 6वें वेतनमान वाले कर्मचारियों के लिए योजना 6वें वेतनमान में वर्तमान महंगाई भत्ता: 252%, होली घोषणा के बाद: 255% आगामी वर्षों में योजना 2026-27: 265% 2027-28: 280% 2028-29: 295% 5वें वेतनमान के कर्मचारियों को वर्तमान में 315% भत्ता, भविष्य में 325% → 335% → 345% के अनुसार मिलेगा। सरकार के प्लान से 6% पीछे मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी का कहना है कि 64% भत्ता देने की बात कही गई थी, लेकिन हाल ही में केवल 58% भत्ता दिया गया। इस कारण सरकार के प्लान से 6% की कमी कर्मचारियों को भुगतनी पड़ेगी। कर्मचारी अब महंगाई भत्ते के लिए केंद्र सरकार के नए ऐलान और राज्य सरकार की कार्रवाई का इंतजार करेंगे। वित्त विभाग के रोलिंग बजट और भविष्य की योजना के अनुसार भत्ता धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा, लेकिन अभी चार से छह महीने तक 12 लाख कर्मचारियों को प्रतीक्षा करनी पड़ेगी।
T20 World Cup 2026: वानखेड़े में आज फैसला भारत या इंग्लैंड किसे मिलेगी फाइनल की टिकट पीटरसन बोले न्यूजीलैंड से होगा इंग्लैंड का मुकाबला

T20 World Cup 2026: नई दिल्ली :टी20 वर्ल्ड कप 2026 अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और अब सभी की नजरें दूसरे सेमीफाइनल पर टिकी हुई हैं जहां गुरुवार शाम मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड आमने सामने होंगे इस मुकाबले का महत्व इसलिए और भी बढ़ गया है क्योंकि जो टीम यह मैच जीतेगी वह 8 मार्च को अहमदाबाद में होने वाले फाइनल में न्यूजीलैंड से भिड़ेगी न्यूजीलैंड पहले ही कोलकाता में खेले गए पहले सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुकी है भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाला यह मुकाबला सिर्फ एक सेमीफाइनल नहीं बल्कि दो मजबूत टीमों के बीच प्रतिष्ठा की बड़ी लड़ाई माना जा रहा है भारतीय टीम को घरेलू मैदान का फायदा मिल सकता है और इसी वजह से कई क्रिकेट विशेषज्ञ भारत को इस मुकाबले में थोड़ा आगे मान रहे हैं वानखेड़े की पिच और यहां की परिस्थितियां भारतीय खिलाड़ियों के लिए जानी पहचानी हैं जो टीम इंडिया के आत्मविश्वास को और मजबूत बनाती हैं हालांकि इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन की राय इससे अलग है उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी भविष्यवाणी करते हुए कहा कि टी20 वर्ल्ड कप का फाइनल न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच खेला जाएगा पीटरसन का यह बयान न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए पहले सेमीफाइनल के बाद आया उन्होंने लिखा कि रविवार को होने वाला फाइनल न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच एक शानदार मुकाबला होगा उनके इस बयान के बाद क्रिकेट फैंस के बीच चर्चा और तेज हो गई है दरअसल भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप के पिछले कुछ मुकाबले भी बेहद दिलचस्प रहे हैं टी20 वर्ल्ड कप 2022 के सेमीफाइनल में दोनों टीमों का सामना हुआ था उस मैच में इंग्लैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को हराया था और बाद में फाइनल में पाकिस्तान को हराकर खिताब अपने नाम किया था इसके बाद टी20 वर्ल्ड कप 2024 के सेमीफाइनल में फिर से दोनों टीमों की भिड़ंत हुई इस बार भारतीय टीम ने जोरदार वापसी करते हुए इंग्लैंड को मात दी और फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर ट्रॉफी जीत ली यही वजह है कि भारत और इंग्लैंड के बीच यह सेमीफाइनल मुकाबला क्रिकेट प्रेमियों के लिए बेहद खास माना जा रहा है पिछले दो वर्ल्ड कप में इन दोनों टीमों के सेमीफाइनल से ही चैंपियन टीम निकली है इसलिए माना जा रहा है कि इस बार भी सेमीफाइनल का विजेता खिताब की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार होगा अगर हेड टू हेड रिकॉर्ड की बात करें तो आंकड़े भारतीय टीम के पक्ष में नजर आते हैं भारत और इंग्लैंड के बीच अब तक कुल 29 टी20 मुकाबले खेले गए हैं जिनमें भारत ने 17 मैच जीते हैं जबकि इंग्लैंड को 12 मुकाबलों में जीत मिली है हालांकि क्रिकेट में आंकड़े हमेशा जीत की गारंटी नहीं देते हर मैच की अपनी परिस्थितियां और दबाव होता है वानखेड़े स्टेडियम में होने वाला यह मुकाबला इसलिए भी खास होगा क्योंकि यहां की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जाती है ऐसे में दर्शकों को एक हाई स्कोरिंग और रोमांचक मुकाबला देखने को मिल सकता है अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत अपने घरेलू मैदान का फायदा उठाकर फाइनल में जगह बनाता है या फिर इंग्लैंड पीटरसन की भविष्यवाणी को सच साबित करते हुए न्यूजीलैंड से खिताबी मुकाबला खेलने पहुंचता है
ईरान ने होर्मूज स्ट्रेट से सिर्फ चीनी जहाजों को दी इजाजत; भारत को नहीं, जानिए वजह

तेहरान। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति केवल चीनी जहाजों को देने की घोषणा की है। इस फैसले को चीन के समर्थन के प्रति ईरान की कृतज्ञता के रूप में देखा जा रहा है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि युद्ध के दौरान China ने तेहरान का खुलकर समर्थन किया, इसलिए उसके तेल टैंकरों और जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। वहीं अन्य देशों—खासकर पश्चिमी देशों और उनके सहयोगियों—के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने से रोका जा सकता है। भारत के लिए बड़ा झटका ईरान के इस फैसले से India को बड़ा झटका लग सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है और इनका अधिकांश परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही होता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% से अधिक हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड का दावा ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने दावा किया है कि इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका “पूर्ण नियंत्रण” है। ईरानी समाचार एजेंसी Fars News Agency के मुताबिक IRGC नौसेना के अधिकारी Mohammad Akbarzadeh ने कहा कि क्षेत्र में गुजरने वाले जहाजों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। अमेरिका ने दी सुरक्षा की चेतावनी इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा के लिए तैनात की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जहाजरानी कंपनियों को जोखिम बीमा उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो। बढ़ी वैश्विक चिंता तनाव के कारण तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार कुछ बीमा कंपनियों ने खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए प्रीमियम बढ़ा दिए हैं। वहीं समुद्री डेटा कंपनी Lloyd’s List Intelligence के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में करीब 200 तेल टैंकर फंसे हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
Ballistic missile: ईरान ने तुर्की की ओर दागी बैलिस्टिक मिसाइल, ईरानी राजदूत तलब

Ballistic missile: अंकारा। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक Iran ने बुधवार को Turkey की दिशा में एक बैलिस्टिक मिसाइल दाग दी। हालांकि NATO की एयर डिफेंस प्रणाली ने मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया। इस घटना के बाद तुर्की में हड़कंप मच गया और इसे युद्ध में नाटो की पहली प्रत्यक्ष एंट्री के रूप में देखा जा रहा है।नाटो की प्रवक्ता Allison Hart ने बयान जारी कर कहा कि संगठन तुर्की को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा करता है और अपने सभी सहयोगी देशों के साथ मजबूती से खड़ा है। इराक और सीरिया के एयरस्पेस से गुजरी मिसाइलतुर्की के रक्षा मंत्रालय के अनुसार ईरान की ओर से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल Iraq और Syria के हवाई क्षेत्र से गुजरते हुए तुर्की की ओर बढ़ रही थी। इससे पहले कि वह लक्ष्य तक पहुंचती, पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में तैनात नाटो एयर डिफेंस सिस्टम ने उसे मार गिराया। तुर्की प्रेसिडेंसी के कम्युनिकेशन निदेशालय ने बताया कि इंटरसेप्टर का मलबा देश के दक्षिणी प्रांत Hatay Province में गिरा। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।रणनीतिक सैन्य ठिकानों के पास गिरा मलबा जिस इलाके में मिसाइल का मलबा गिरा, वह तुर्की के प्रमुख सैन्य अड्डे Incirlik Air Base से लगभग 60 मील दूर बताया जा रहा है। वहीं तुर्की के Kürecik क्षेत्र में नाटो का एक महत्वपूर्ण अर्ली-वॉर्निंग रडार सिस्टम भी मौजूद है, जो बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा माना जाता है। तुर्की ने ईरानी राजदूत को किया तलब घटना के बाद तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने अपने ईरानी समकक्ष Abbas Araghchi से बातचीत कर कड़ी आपत्ति जताई। इसके साथ ही तुर्की ने Iran के राजदूत को विदेश मंत्रालय में तलब कर घटना पर जवाब मांगा। तुर्की के अधिकारियों ने चेतावनी दी कि देश के खिलाफ किसी भी दुश्मनी भरे कदम का जवाब देने का अधिकार उनके पास सुरक्षित है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो यह संघर्ष और ज्यादा देशों को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे पूरे मध्य पूर्व और यूरोप की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ईरान की धरती पर नहीं उतरेंगे अमेरिकी सैनिक? जानिए वजह

वाशिंगटन। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए व्यापक हवाई हमलों के बाद मध्य पूर्व में युद्ध भड़क गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरानी जनता के लिए ‘आजादी’ बताया है। आसमान से बरसती मिसाइलों और भयानक बमबारी के बीच ट्रंप का ‘एंडगेम’ यानी अंतिम लक्ष्य बिल्कुल साफ हो चुका है- ईरान में पूरी तरह से सत्ता परिवर्तन। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के असली लक्ष्य को हासिल करना- बिना जमीनी सेना के लगभग असंभव है। इस संघर्ष ने अपने शुरुआती दिनों में ही पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। शनिवार तड़के हुए अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई शीर्ष अधिकारी और सैकड़ों नागरिक मारे गए हैं। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों, अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। इराक स्थित ईरान-समर्थित गुटों और लेबनान के हिज्बुल्लाह ने भी युद्ध में प्रवेश कर लिया है। इसके साथ ही इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान पर जमीनी हमले की योजना की भी खबरें हैं। क्या केवल हवाई हमलों से सत्ता परिवर्तन संभव है? राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी जनता से अपील करते हुए कहा है- जब हम अपना काम खत्म कर लेंगे, तो अपनी सरकार पर कब्ब्जा कर लेना। यह आपकी होगी। हालांकि, विशेषज्ञ इस रणनीति पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। अल-जजीरा से बात करते हुए स्टिम्सन सेंटर थिंक टैंक के केली ग्रीको ने कहा कि जमीनी सेना के बिना इतना बड़ा राजनीतिक बदलाव लाना लगभग असंभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप हवाई हमलों की ताकत को लेकर कुछ ज्यादा ही मुग्ध हो गए हैं। सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी के मैथ्यू डस ने स्पष्ट किया कि इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जहां केवल हवाई हमलों से सत्ता परिवर्तन हुआ हो। उन्होंने 2011 के लीबिया युद्ध का उदाहरण दिया, जहां नाटो के हवाई हमलों के बावजूद मुअम्मर गद्दाफी को हटाने के लिए जमीनी स्तर पर विद्रोहियों को ही लड़ना पड़ा था। हालिया रॉयटर्स सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 25% अमेरिकी इस युद्ध का समर्थन कर रहे हैं। इसकी तुलना में 2003 के इराक युद्ध को शुरुआत में लगभग 55% जनसमर्थन प्राप्त था। डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल ने एक खुफिया ब्रीफिंग के बाद चिंता व्यक्त की है कि अमेरिका ईरान में जमीनी सेना उतारने की दिशा में बढ़ रहा है, जिससे अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा बहुत अधिक बढ़ जाएगा। ट्रंप का ‘मास्टरप्लान’: हवा और समंदर से तबाही ट्रंप प्रशासन की रणनीति इराक या अफगानिस्तान जैसी नहीं है, जहां लाखों सैनिक भेजकर कब्ज़ा किया गया था। ट्रंप का दांव है कि आसमान और समंदर से ही इतना भयानक प्रहार किया जाए कि ईरान का पूरा सिस्टम ताश के पत्तों की तरह ढह जाए। इस रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत है। ट्रंप का मानना है कि नेतृत्व को खत्म करने से व्यवस्था अपने आप पंगु हो जाएगी। अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमता, उसकी नेवी और उसके परमाणु ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर रहा है ताकि ईरान के पास पलटवार की कोई ताकत ही न बचे। ‘बूट्स ऑन द ग्राउंड’ से परहेज क्यों? ट्रंप हमेशा से अमेरिका को दूसरे देशों के ‘अंतहीन युद्धों’ में फंसाने के खिलाफ रहे हैं। किसी देश में पैदल सेना भेजने का मतलब है अमेरिकी सैनिकों की लाशें वापस आना और खरबों डॉलर का खर्च। ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ का नारा इसके सख्त खिलाफ है। ट्रंप खुलेआम ईरानी जनता से कह रहे हैं कि वे इस मौके का फायदा उठाएं और खुद अपनी सरकार को उखाड़ फेंकें। ट्रंप को उम्मीद है कि भारी बमबारी और बदहाली से टूटकर ईरानी जनता खुद बगावत कर देगी और अमेरिका को सेना उतारने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। ट्रंप प्रशासन के भीतर और बाहर अलग-अलग सुर इस युद्ध के उद्देश्यों को लेकर अमेरिकी नेताओं और प्रशासन के बयानों में काफी विरोधाभास देखने को मिल रहा है। विदेश मंत्री मार्क रूबियो ने कहा कि लक्ष्य ईरान के परमाणु और ड्रोन कार्यक्रमों तथा नौसेना को नष्ट करना है ताकि वह विदेशी हमलों से न बच सके। वहीं रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यह कोई अंतहीन युद्ध नहीं होगा; हम स्पष्ट उद्देश्यों के साथ काम कर रहे हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा, ‘यह एक अवैध युद्ध है जो झूठ पर आधारित है। ट्रंप प्रशासन के पास ईरान को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं है।’ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने इस युद्ध की आवश्यकता और इसके सटीक लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से जनता के सामने नहीं रखा है। यह संघर्ष अब उस त्वरित सैन्य कार्रवाई से कहीं अधिक लंबा खिंचता दिख रहा है, जिसके लिए ट्रंप जाने जाते हैं, जैसे जनवरी में वेनेज़ुएला के निकोलस मादुरो का अपहरण या जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले।
Thailand’s unique wedding: थाईलैंड की अनोखी शादी : एक ही मंडप में दो दूल्हों संग दुल्हन ने रचाई शादी

Thailand’s unique wedding: बैंकॉक। शादी-ब्याह के इस सीजन में आपने कई तरह के विवाह समारोह देखे होंगे, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी शादी की तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। इस अनोखी शादी में एक दुल्हन ने एक ही मंडप में दो दूल्हों के साथ विवाह रचा लिया।यह अनोखा मामला Thailand का बताया जा रहा है, जहां 37 वर्षीय महिला Duangduan Ketsaro ने दो ऑस्ट्रियाई पुरुषों से शादी की। बताया जाता है कि डुआंगडुआन पहले सिंगर और सॉन्गराइटर रह चुकी हैं। शादी का समारोह सादा लेकिन पारंपरिक तरीके से आयोजित किया गया, जिसमें परिवार और करीबी दोस्त मौजूद रहे। समारोह की तस्वीरें सामने आने के बाद यह शादी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। पहले एक से प्यार, फिर दूसरे से भी बना रिश्तामीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डुआंगडुआन की मुलाकात सबसे पहले ऑस्ट्रिया के रिटायर्ड पुलिस अधिकारी Roman से थाईलैंड के मशहूर पर्यटन शहर Pattaya में हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच रिश्ता गहरा हुआ और वे करीब पांच साल तक साथ रहे। कुछ समय बाद उनकी मुलाकात Macky नाम के दूसरे ऑस्ट्रियाई युवक से हुई। दोनों के बीच भी प्यार हो गया। डुआंगडुआन के मुताबिक उन्होंने अपने इस रिश्ते को कभी छिपाया नहीं और तीनों ने आपसी समझ से भविष्य को लेकर खुलकर बातचीत की। परिवार की सहमति से हुआ विवाह डुआंगडुआन ने बताया कि शादी से पहले उन्होंने अपने माता-पिता और बच्चों से भी सलाह ली थी। उनकी पहले की शादी से तीन बेटियां हैं और वे नानी भी बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि संगीत करियर में सफलता नहीं मिलने के बाद उन्हें आर्थिक और व्यक्तिगत संघर्षों का सामना करना पड़ा। परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए उन्होंने पटाया में काम शुरू किया, जहां उनकी मुलाकात पहले रोमन और फिर मैकी से हुई। समय के साथ दोनों पुरुष न केवल उनकी जिंदगी का हिस्सा बने, बल्कि परिवार की जिम्मेदारियों में भी साथ देने लगे। डुआंगडुआन के अनुसार, उनके माता-पिता और बच्चे भी इस शादी से खुश हैं।
अमेरिका नहीं चाहता भारत बने ताकतवर, ईरानी अधिकारी का बड़ा आरोप

वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भारत में ईरानी सुप्रीम लीडर के विशेष प्रतिनिधि Abdul Majid Hakim Elahi ने कहा कि अमेरिका अपने वैश्विक वर्चस्व को बनाए रखने के लिए दुनिया में जानबूझकर युद्ध जैसी स्थितियां पैदा करता है। उनका दावा है कि ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष के पीछे भी अमेरिका की यही रणनीति है, ताकि भारत और चीन जैसे देशों को उभरने से रोका जा सके। खास बातचीत में इलाही ने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि भारत या चीन जैसे देश वैश्विक ताकत के रूप में सामने आएं। उनके मुताबिक, अमेरिका की कोशिश रहती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसकी ताकत को कोई चुनौती न दे और इसी वजह से वह विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध की स्थितियां पैदा करता है। भविष्य में भारत भी होगा बड़ी ताकत इलाही ने कहा कि आने वाले समय में भारत, चीन, रूस और अमेरिका दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों में शामिल होंगे। हालांकि, उनका आरोप है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर अपनी ताकत को साझा नहीं करना चाहता और इसी कारण वह वैश्विक स्तर पर टकराव की स्थितियां बनाए रखता है। ईरान ने नहीं, अमेरिका ने शुरू किया संघर्ष ईरानी अधिकारी ने यह भी कहा कि मौजूदा युद्ध की शुरुआत ईरान ने नहीं की, बल्कि अमेरिका और इजरायल ने सैन्य कार्रवाई कर इसे शुरू किया। इससे पहले ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी Ali Larijani ने भी कहा था कि ईरान केवल अपनी रक्षा कर रहा है। उनके अनुसार अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरानी नागरिकों और ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिसके जवाब में ईरान प्रतिक्रिया दे रहा है। लारिजानी ने यह भी कहा कि चूंकि संघर्ष की शुरुआत अमेरिका की ओर से हुई है, इसलिए इसे खत्म करने की जिम्मेदारी भी उसी की है। लंबा खिंच सकता है संघर्ष इस बीच विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य ढांचे और नौसैनिक अड्डों पर किए गए हमलों के बाद यह संघर्ष लंबा चल सकता है। इन हमलों में ईरान के कुछ वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने की खबरें भी सामने आई हैं। जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत होने और कई अन्य के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
दुनिया का सबसे सुरक्षित स्थान में UAE के तीन शहर

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। इस संघर्ष का प्रभाव संयुक्त अरब अमीरात के शानदार शहरों अबू धाबी और दुबई तक भी पहुंच रहा है, जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित ठिकाने और वैश्विक संघर्षों से अलग-थलग माना जाता रहा है। मध्य पूर्व में पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। इस संघर्ष का प्रभाव संयुक्त अरब अमीरात के शानदार शहरों अबू धाबी और दुबई तक भी पहुंच रहा है, जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित ठिकाने और वैश्विक संघर्षों से अलग-थलग माना जाता रहा है। दरअसल, अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियानों में ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों और अमेरिकी सेना के ठिकानों सहित पूरे क्षेत्र में जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। दुबई तक मिसाइल और ड्रोन हमलों की पहुंच के साथ ही वैश्विक संघर्षों से दुनिया के कई स्थानों के अछूते न रहने की चिंताएं बढ़ गई हैं। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी तनाव के बीच, यहां दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित शहरों की सूची दी गई है। यह सूची Numbeo द्वारा तैयार की गई है (Safety Index 2026 के आधार पर)। दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित शहर किंगदाओ (किंगडाओ), शेडोंग, चीन अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात दोहा, कतर शारजाह, संयुक्त अरब अमीरात दुबई, संयुक्त अरब अमीरात ताइपे, ताइवान मनामा, बहरीन मस्कट, ओमान द हेग (डेन हाग), नीदरलैंड्स आइंडहोवन, नीदरलैंड्स गौरतल है कि Numbeo का डेटा वेबसाइट पर आने वाले आगंतुकों द्वारा दिए गए सर्वेक्षणों के आधार पर तैयार किया जाता है, जो स्थापित वैज्ञानिक और सरकारी सर्वेक्षणों की तरह संरचित होते हैं। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात खुद दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित देशों की सूची में शामिल नहीं है। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) द्वारा जारी ग्लोबल पीस इंडेक्स (2025) के अनुसार, दुनिया के 10 सबसे शांतिपूर्ण (सुरक्षित) देश निम्नलिखित हैं… दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित देश आइसलैंड: ग्लोबल पीस इंडेक्स में सबसे ऊपर, स्कोर 1.10 (लगभग) आयरलैंड: स्कोर 1.26 न्यूजीलैंड: स्कोर 1.28 ऑस्ट्रिया: स्कोर 1.29 स्विट्जरलैंड: स्कोर 1.29 सिंगापुर: स्कोर 1.36 पुर्तगाल: स्कोर 1.37 डेनमार्क: स्कोर 1.39 स्लोवेनिया: स्कोर 1.409 (लगभग) फिनलैंड: स्कोर 1.42 (लगभग) बता दें कि यह वैश्विक शांति सूचकांक 23 मात्रात्मक और गुणात्मक संकेतकों पर आधारित है, जिन्हें 1-5 के पैमाने पर भारित किया जाता है। स्कोर जितना कम, देश उतना ही अधिक शांतिपूर्ण और सुरक्षित माना जाता है। यह सूचकांक विश्व की 99.7 प्रतिशत आबादी को कवर करता है और उच्च सम्मानित स्रोतों से डेटा लेकर तैयार किया जाता है।
AIIMS DR. SUICIDE CASE: मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया, 15 दिन में मांगी विस्तृत रिपोर्ट

AIIMS DR. SUICIDE CASE: नई दिल्ली। भोपाल एम्स में महिला असिस्टेंट प्रोफेसर की आत्महत्या का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। आरोप है कि ट्रॉमा एंड इमरजेंसी विभाग के तत्कालीन HOD डॉ. मोहम्मद यूनुस द्वारा लगातार मानसिक प्रताड़ना और सार्वजनिक अपमान के चलते चिकित्सक ने बेहोशी की दवा का ओवरडोज लेकर आत्महत्या कर ली। मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की अध्यक्षता कर रहे प्रियंक कानूनगो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वयं संज्ञान लिया। आयोग ने भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव, एम्स भोपाल के निदेशक और भोपाल पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर 15 दिनों में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में POSH कमेटी की कार्यवाही, एफआईआर की प्रति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अनिवार्य रूप से शामिल करनी होगी। ट्वीट से सामने आया मामला आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर मामले का ब्यौरा साझा किया। उन्होंने बताया कि महिला चिकित्सक ने तीन बार HOD पर प्रताड़ना की शिकायत की, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया। इससे डॉक्टर ने आत्महत्या का कदम उठाया। आरोप-शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई शिकायत के अनुसार, विभागाध्यक्ष द्वारा लगातार मानसिक दबाव, सार्वजनिक अपमान और पेशेवर बाधाएं उत्पन्न की गईं। डॉक्टर ने संस्थान की आंतरिक शिकायत प्रणाली (POSH कमेटी) के तहत शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन आरोप है कि प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। यदि यह साबित होता है, तो मामला केवल व्यक्तिगत उत्पीड़न नहीं बल्कि संस्थागत लापरवाही का उदाहरण बनेगा। POSH कमेटी और पुलिस जांच पर निगाह आयोग ने विशेष रूप से POSH कमेटी की कार्यवाही का ब्यौरा मांगा है। यदि शिकायत दर्ज होने के बावजूद उचित जांच या कार्रवाई नहीं हुई, तो यह नियमों के उल्लंघन में आएगा। साथ ही, भोपाल पुलिस से भी संपूर्ण जांच रिपोर्ट मांगी गई है, जिसमें यह देखा जाएगा कि उकसाने या मानसिक प्रताड़ना के तहत क्या कदम उठाए गए। 15 दिन में रिपोर्ट, आगे की कार्रवाई तय आयोग ने स्पष्ट किया है कि 15 दिनों में रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसके आधार पर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का दिशा-निर्धारण होगा। आयोग ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पूर्व में भी उठे थे सवाल मामले से जुड़े लोग बताते हैं कि डॉक्टर एक मेधावी और समर्पित चिकित्सक थीं। उनकी असामयिक मृत्यु ने परिवार और चिकित्सा समुदाय दोनों को झकझोर दिया है। कई चिकित्सकों ने स्वीकार किया कि मेडिकल संस्थानों में कार्यदबाव और प्रशासनिक तनाव गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। एम्स भोपाल में हुई इस दुखद घटना ने संस्थागत शिकायत निवारण तंत्र की निष्पक्षता और कार्यसंस्कृति की गंभीर समीक्षा की आवश्यकता को उजागर किया है। मानवाधिकार आयोग की स्वतः पहल और 15 दिन में मांगी जाने वाली रिपोर्ट इस मामले की कानूनी और प्रशासनिक सच्चाई सामने लाएगी।
Van Vihar National Park: मध्य प्रदेश में गिद्धों की संख्या 14,000 के पार, वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता

Van Vihar National Park: भोपाल। 5 मार्च 2026 मध्य प्रदेश में गिद्धों की संख्या 14,000 के पार पहुँच गई है, जो राज्य के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। वन विभाग द्वारा 20 से 22 फरवरी तक तीन दिनों में किए गए विशेष गिद्ध सर्वे में यह आंकड़ा सामने आया है; हालांकि अंतिम रिपोर्ट में यह संख्या और बढ़ सकती है। पिछले साल (2025) की गणना में प्रदेश में 12,981 गिद्ध दर्ज हुए थे, वहीं अब यह आंकड़ा अनुमानतः 14 हजार से अधिक है। ये सर्वे प्रदेश भर के प्रमुख गिद्ध आवासों पर किए गए, जिनमें पन्ना, भोपाल वन विहार नेशनल पार्क, इंदौर वन मंडल, रायसेन के हलाली डैम सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं। सर्वे के दौरान लगभग 7 प्रजातियों के गिद्ध पाए गए, जिनमें भारतीय गिद्ध, सिनेरियस गिद्ध, मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजेर) और हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रजातियां शामिल हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में गिद्धों की गणना 2016 से नियमित रूप से की जा रही है। उस समय कुल 7,028 गिद्ध गिने गए थे। इसके बाद हर सर्वे में संख्या में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज हुई 2019: 8,397 2021: 9,446 2024: 10,845 2025: 12,981 और अब 2026 में यह संख्या 14,000 से अधिक होने का अनुमान है। विशेषज्ञों के अनुसार, गिद्ध धीरे‑धीरे प्रजनन करते हैं और इनके जीवनचक्र के कारण संख्या बढ़ाना आसान नहीं होता। यही वजह है कि कभी ये प्रदेश और देशभर में विलुप्ति की कगार पर थे। पशुओं को दर्द और सूजन में दिए जाने वाली दवा डाइक्लोफेनाक के कारण गिद्धों की मृत्यु की दर बढ़ गई थी, लेकिन बाद में इस दवा पर प्रतिबंध लगा दिया गया। अब उसके प्रभाव से संख्या में सुधार हुआ है। इंदौर वन मंडल में पिछले सर्वे में केवल 86 गिद्ध देखे गए थे, जबकि इस बार यह संख्या 156 तक पहुँच गई है। भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में भी सफेद पीठ वाले गिद्धों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। 23 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा। इन पर उच्च तकनीक GPS ट्रैकर लगाए गए हैं, ताकि वन विभाग उनकी गतिविधियों की निरंतर निगरानी कर सके। यह प्रयास राज्य सरकार के संरक्षण कार्यक्रम की सक्रियता को दर्शाता है। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, शीत ऋतु के अंतिम चरण में गिद्धों की संख्या की गणना करना सबसे उपयुक्त होता है, क्योंकि इस समय स्थानीय और प्रवासी दोनों प्रजातियां एक साथ रहती हैं। इस वजह से सर्वे के आंकड़े वास्तविक स्थिति का सटीक प्रतिबिंब प्रस्तुत करते हैं। इतिहास में पहली बार 2016 में गिद्धों की गणना हुई थी और तब से लगातार वृद्धि जारी है। वन विभाग का मानना है कि लगातार संरक्षण प्रयास, प्राकृतिक आवास का संरक्षण और वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली के कारण ही यह सकारात्मक परिणाम संभव हो पाया है। विशेष रूप से वन विहार, पन्ना (पवई), रायसेन (हलाली डैम), शिवपुरी और गांधीसागर अभयारण्य (मंदसौर) जैसे इलाकों में गिद्धों की बढ़ती संख्या वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षणकर्ताओं के लिए खुशी का विषय है।