चारधाम यात्रा 2026: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू, 19 अप्रैल से शुरू होगी यात्रा

नई दिल्ली ।उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब श्रद्धालु घर बैठे मोबाइल कंप्यूटर ऐप या वॉट्सएप के माध्यम से यात्रा के लिए पंजीकरण कर सकते हैं। यात्रा में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है ताकि प्रशासन संख्या सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन बेहतर ढंग से संभाल सके। इस साल चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल से होगी। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट इसी दिन श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को खुलेंगे। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के तीन तरीके हैं: वेबसाइट से रजिस्ट्रेशन:उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in पर अकाउंट बनाकर यात्रा की तारीख धाम और यात्रियों की जानकारी भरनी होगी। प्रक्रिया पूरी होने पर रजिस्ट्रेशन स्लिप डाउनलोड की जा सकती है। मोबाइल ऐप से रजिस्ट्रेशन: Tourist Care Uttarakhand मोबाइल ऐप डाउनलोड कर अकाउंट बनाने के बाद यात्रा संबंधी जानकारी भरें और पास डाउनलोड करें। वॉट्सएप से रजिस्ट्रेशन:8394833833 नंबर पर Yatra मैसेज भेजकर चैटबॉट के जरिए रजिस्ट्रेशन पूरा कर सकते हैं। सरकार ने 0135-1364 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है जिससे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन या यात्रा संबंधित जानकारी ली जा सकती है। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे खुलेंगे। यह महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 के पंचांग गणना के अनुसार तय किया गया है। बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे खुलेंगे। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। पिछली यात्रा के दौरान 2025 में केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई को और बद्रीनाथ के 25 नवंबर को बंद किए गए थे। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट 22 और 23 अक्टूबर 2025 को बंद हुए थे।श्रद्धालु ध्यान दें कि ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन 17 अप्रैल से शुरू होगा और हरिद्वार ऋषिकेश समेत कई प्रमुख स्थानों पर बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन काउंटर लगाए जाएंगे।
तिरंगे के अपमान का आरोप: मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को कोर्ट का नोटिस, पूछा-क्यों न दर्ज हो एफआईआर?

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब Rao Uday Pratap Singh के खिलाफ राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान के मामले में अदालत ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जबलपुर स्थित सांसद-विधायक मामलों की विशेष अदालत ने परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश क्यों न दिया जाए। अदालत ने उन्हें 7 अप्रैल 2026 को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। यह मामला मध्यप्रदेश के Narsinghpur जिले के गोटेगांव निवासी कौशल सिलावट द्वारा दायर परिवाद पर आधारित है। परिवादी के अनुसार 11 अगस्त 2024 को Gadarwara में आयोजित एक ‘तिरंगा यात्रा’ के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का अनादर किया गया। आरोप है कि इस यात्रा का नेतृत्व मंत्री राव उदय प्रताप सिंह कर रहे थे और वह एक खुली जीप के बोनट पर खड़े होकर लोगों को संबोधित कर रहे थे। परिवाद में कहा गया है कि इस दौरान जीप के बोनट पर तिरंगा ध्वज इस तरह लगाया गया था कि वह झुक गया था और पास खड़े व्यक्ति के पैर से भी स्पर्श हो रहा था। शिकायतकर्ता का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज को वाहन के बोनट, छत या किसी अन्य हिस्से पर इस प्रकार लगाना और उसे पैरों के संपर्क में आने देना राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा के खिलाफ है। इस मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश डी.पी. सूत्रकार ने प्रारंभिक साक्ष्यों को देखते हुए मंत्री को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने यह भी पूछा है कि क्या इस मामले में राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत अपराध दर्ज किया जाना चाहिए। इस कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को गंभीर अपराध माना गया है, जिसमें दोष सिद्ध होने पर तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। परिवादी कौशल सिलावट का कहना है कि उन्होंने इस घटना की शिकायत पहले स्थानीय पुलिस से की थी। उन्होंने Gadarwara Police Station में जाकर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। इसके बाद उन्होंने कई बार Narsinghpur के पुलिस अधीक्षक को भी लिखित शिकायत भेजी, लेकिन वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने पंजीकृत डाक के माध्यम से थाना प्रभारी को शिकायत भेजी तो उसे स्वीकार करने से भी इंकार कर दिया गया। उन्होंने अदालत में यह भी तर्क दिया कि यह पुलिस के वैधानिक कर्तव्यों के विपरीत है। परिवादी ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले Lalita Kumari vs Government of Uttar Pradesh (2014) का हवाला भी दिया। इस फैसले में स्पष्ट कहा गया है कि यदि किसी संज्ञेय अपराध की सूचना मिलती है तो पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होता है। अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों में घटना की तस्वीरें, मीडिया रिपोर्ट, डाक ट्रैकिंग रिपोर्ट और विभिन्न अधिकारियों को भेजी गई शिकायतों की प्रतियां भी शामिल हैं। इन सभी दस्तावेजों को देखते हुए विशेष अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को नोटिस जारी किया है। अब इस मामले में 7 अप्रैल को अदालत में सुनवाई होगी, जहां मंत्री को अपना पक्ष रखना होगा। अदालत के इस कदम के बाद प्रदेश की राजनीति में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
कृषक कल्याण वर्ष पर सियासी घमासान, जीतू पटवारी का मोहन सरकार पर हमला, बोले- सीएम पहलवान, लेकिन अफसरों के दांव में चित; 60% पद खाली, किसान बेहाल

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में किसानों के मुद्दे को लेकर सियासत तेज हो गई है। Jitu Patwari ने प्रदेश सरकार के “कृषक कल्याण वर्ष” पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री Mohan Yadav पर तीखा हमला बोला। भोपाल स्थित Madhya Pradesh Congress Committee कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने कहा कि सरकार एक तरफ किसानों के कल्याण की बात कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उनके साथ इस दौरान Mukesh Nayak, Abhay Dubey और Sukhdev Panse भी मौजूद थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि शुरुआती दिनों में डॉ. मोहन यादव पहलवानी करते थे और Ujjain में उन्हें पहलवान के नाम से जाना जाता था। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि जब कोई अधिकारी उनके सामने “पहलवानी का दांव” चलता है तो मुख्यमंत्री खुद ही चित हो जाते हैं। पटवारी ने कहा कि यह स्थिति एक-दो बार नहीं बल्कि लगभग हर महीने देखने को मिलती है, जिससे सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने किसानों को लेकर भाजपा की चुनावी गारंटियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय किसानों से वादा किया गया था कि गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल, धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल और सोयाबीन 6000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से खरीदी जाएगी। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि Ujjain Mandi में गेहूं का भाव करीब 1800 से 1900 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। पटवारी ने कहा कि यह स्थिति मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र की मंडी की है, जिससे साफ है कि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस ने इस मामले को लेकर वीडियो भी जारी किया था, जिसमें मंडी में किसानों को कम दाम पर गेहूं बेचते देखा जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ किसानों के हित की बात करती है, लेकिन बाजार में किसानों को उनकी उपज का सही दाम तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि वे पिछले 20 साल की नहीं बल्कि केवल पिछले एक साल की उपलब्धियों का हिसाब प्रदेश की जनता के सामने रखें। पटवारी के अनुसार अगर सरकार वास्तव में किसानों के हित में काम कर रही है तो उसे अपने कामकाज का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने कृषि तंत्र की स्थिति को भी चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि से जुड़े विभागों में भारी संख्या में पद खाली पड़े हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कृषि विभाग में स्वीकृत 14,537 पदों में से 8,468 पद रिक्त हैं, यानी लगभग 60 प्रतिशत पद खाली हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन विभाग में 1,290 में से 722 पद खाली हैं, जबकि उद्यानिकी विभाग में 3,079 में से 1,459 पद रिक्त पड़े हैं। पशुपालन और डेयरी विभाग में भी बड़ी संख्या में पद खाली होने से किसानों से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं। पटवारी ने कहा कि जब कृषि से जुड़े विभागों में इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी ही नहीं हैं तो सरकार किसानों के कल्याण की बात किस आधार पर कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार जल्द से जल्द इन रिक्त पदों को भरे और किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि प्रदेश के किसान आर्थिक संकट से बाहर निकल सकें।
शेयर बाजार में दबाव, सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में, बैंकिंग और रियल्टी शेयर लीड..

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में कमजोर दिखा और दोपहर तक लाल निशान में रहा। दोपहर 1 बजे तक सेंसेक्स 588 अंक यानी 0.72 प्रतिशत फिसलकर 79,427 पर और निफ्टी 154 अंक यानी 0.62 प्रतिशत कमजोरी के साथ 24,612 पर कारोबार कर रहा था। इस गिरावट की अगुवाई बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने की। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 1.85 प्रतिशत और निफ्टी बैंक इंडेक्स 1.31 प्रतिशत कमजोर हुए। इसके अलावा ऑटो, सर्विसेज और कंज्यूमर सेक्टर पर भी दबाव देखा गया। हालांकि, डिफेंस, एनर्जी, पीएसई, ऑयल एंड गैस, कमोडिटी और मेटल इंडेक्स हरे निशान में बने रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध है। युद्ध के लंबा चलने से वैश्विक एनर्जी सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट नकारात्मक हो गया है। युद्ध के प्रभाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी है। डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत 80.39 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 84.84 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इससे निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से हटकर सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोने की कीमत 0.81 प्रतिशत बढ़कर 5,120 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.96 प्रतिशत मजबूत होकर 84.61 डॉलर प्रति औंस पर थी। अमेरिकी बाजार में भी गिरावट ने भारतीय बाजार की कमजोरी को बढ़ावा दिया। गुरुवार को डाओ इंडेक्स 1.61 प्रतिशत और नैस्डैक 0.26 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुआ। इससे एफआईआई और घरेलू निवेशकों के बीच बिकवाली का दबाव बढ़ा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। गुरुवार को एफआईआई ने 3,752.52 करोड़ रुपए के इक्विटी शेयर बेचे। इस बिकवाली ने भारतीय बाजार में लगातार कमजोरी का माहौल बनाया और निवेशकों में सतर्कता बढ़ा दी। विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों की बेचैनी का असर अभी कुछ समय तक जारी रह सकता है, खासकर जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में स्थिरता नहीं आती। ऐसे समय में बैंकिंग, रियल्टी और ऑटो सेक्टर पर दबाव बना रहेगा, जबकि सोना, चांदी और एनर्जी सेक्टर निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प बने
ईरान-इजराइल जंग का असर: भारत में LPG इमरजेंसी, सरकार ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का आदेश

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल के बीच जारी संघर्ष का असर अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी दिखने लगा है। संभावित गैस संकट को देखते हुए भारत सरकार ने आपात कदम उठाते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को रसोई गैस (LPG) का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए आदेश जारी किया कि अब रिफाइनरियां अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग प्राथमिकता से LPG बनाने में करें, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की सप्लाई में कोई कमी न आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका है। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने देर रात निर्देश जारी किए। आदेश के अनुसार अब रिफाइनरी कंपनियां इन गैसों का उपयोग अन्य औद्योगिक कामों में नहीं करेंगी, बल्कि इन्हें सीधे LPG उत्पादन में लगाया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई प्राथमिकता के आधार पर सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी। इसमें प्रमुख रूप से Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum और Bharat Petroleum शामिल हैं। इस फैसले का उद्देश्य देश के करीब 33 करोड़ से अधिक LPG उपभोक्ताओं को बिना रुकावट गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना है। LPG दरअसल प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होती है, जो कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान निकलती हैं। इन गैसों का इस्तेमाल आम तौर पर पेट्रोकेमिकल उद्योग, प्लास्टिक निर्माण और ईंधन के रूप में भी किया जाता है। लेकिन मौजूदा हालात में सरकार ने इनका उपयोग मुख्य रूप से घरेलू गैस उत्पादन में करने का निर्देश दिया है। सरकार के इस फैसले का असर निजी कंपनियों पर भी पड़ सकता है। खासकर Reliance Industries जैसी कंपनियों के पेट्रोकेमिकल उत्पादन और निर्यात पर इसका असर पड़ने की संभावना है। प्रोपेन और ब्यूटेन के डायवर्जन के कारण अल्काइलेट्स जैसे उत्पादों का उत्पादन कम हो सकता है, जिनका उपयोग पेट्रोल की गुणवत्ता सुधारने में किया जाता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनियों के मुनाफे पर भी दबाव पड़ सकता है, क्योंकि पेट्रोकेमिकल उत्पाद बाजार में LPG से ज्यादा कीमत पर बिकते हैं। स्थिति को और गंभीर बनाने वाली खबर कतर से आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरानी ड्रोन हमलों के बाद कतर ने अपने कुछ LNG प्लांट का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है। इससे भारत को मिलने वाली गैस सप्लाई में लगभग 40 प्रतिशत तक कटौती हो गई है। भारत अपनी कुल LNG जरूरत का बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है, इसलिए यह रुकावट घरेलू बाजार पर सीधा असर डाल सकती है। सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है, जो कतर और यूएई जैसे देशों से तेल-गैस सप्लाई का मुख्य समुद्री मार्ग है। युद्ध के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या तेजी से घट गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जहां 28 फरवरी को इस मार्ग से 91 जहाज गुजरे थे, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 26 रह गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। उधर गैस की कमी को लेकर सिटी गैस कंपनियों ने भी सरकार को चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो CNG और PNG की कीमतें बढ़ सकती हैं। उद्योग संगठनों का कहना है कि अगर कतर से सस्ती गैस नहीं मिली तो उन्हें स्पॉट मार्केट से महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी, जिसकी कीमत फिलहाल दोगुनी से भी ज्यादा है। इस पूरे संकट को देखते हुए भारत सरकार फिलहाल घरेलू गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है, ताकि आम लोगों को रसोई गैस की किल्लत का सामना न करना पड़े।
PNB ने ATM कैश लिमिट आधी की: 1 अप्रैल से सिर्फ 50,000 रुपये निकाल सकेंगे कुछ कार्ड्स से..

नई दिल्ली । पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने अपने ग्राहकों की सुरक्षा और डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए एक अहम फैसला लिया है। बैंक ने 1 अप्रैल, 2026 से चुनिंदा डेबिट कार्ड्स से ATM कैश निकालने की लिमिट आधी कर दी है। इसका मकसद फ्रॉड और हैकिंग के जोखिम को कम करना है, साथ ही ग्राहकों को कैश के बजाय सुरक्षित डिजिटल और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए प्रोत्साहित करना है। नई ATM लिमिट के तहत जिन कार्ड्स की पहले डेली लिमिट 1 लाख रुपये थी, उन्हें अब 50,000 रुपये तक सीमित कर दिया गया है। वहीं प्रीमियम कार्ड्स की लिमिट 1.5 लाख से घटाकर 75,000 रुपये कर दी गई है। अन्य सभी कार्ड्स पर कैश और ऑनलाइन/पॉइंट ऑफ सेल ट्रांजैक्शन लिमिट पहले जैसी ही रहेगी। बैंक का मानना है कि कैश निकालने की सीमा कम होने से ग्राहकों के पैसे सुरक्षित रहेंगे और फ्रॉड या हैकिंग जैसी घटनाओं में संभावित नुकसान भी घटेगा। इसके अलावा यह कदम डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने में मदद करेगा। PNB के अधिकारी बताते हैं कि ग्राहक अब अपनी नई लिमिट के अनुसार मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग, वॉट्सएप बैंकिंग या IVR के माध्यम से लिमिट को बदल या रिसेट कर सकते हैं। मोबाइल एप के जरिए लिमिट बदलने का तरीका काफी सरल है। सबसे पहले PNBOne एप में लॉगिन करें और Services ऑप्शन चुनें। इसके बाद Debit Cards सेक्शन खोलें और Update ATM Limit पर क्लिक करें। अब अपना अकाउंट नंबर और कार्ड सिलेक्ट करें, नई लिमिट भरें और ट्रांजैक्शन पासवर्ड डालकर कन्फर्म करें। इस तरह आपकी ATM लिमिट तुरंत अपडेट हो जाएगी। ATM विड्रॉल लिमिट वह अधिकतम राशि होती है, जिसे आप 24 घंटे में ATM से निकाल सकते हैं। बैंक सुरक्षा कारणों से अलग-अलग कार्ड्स पर अलग-अलग लिमिट निर्धारित करता है। PNB का यह नया बदलाव विशेष रूप से उन ग्राहकों को प्रभावित करेगा जो बड़े पैमाने पर कैश ट्रांजैक्शन करते हैं। हालांकि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की बढ़ती स्वीकार्यता के चलते यह बदलाव समयानुकूल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कैश लिमिट में यह कटौती केवल सुरक्षा के लिहाज से ही नहीं, बल्कि डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी की गई है। इससे ग्राहक सुरक्षित तरीके से अपने पैसे का प्रबंधन कर सकेंगे और डिजिटल बैंकिंग के उपयोग में वृद्धि होगी। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राहक अपनी आवश्यकता के अनुसार लिमिट को बढ़ा या घटा सकते हैं, जिससे सुविधा और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सके। PNB का यह कदम देश के अन्य बैंकों के लिए भी एक संकेत है कि कैश निकालने की सीमा नियंत्रित करने से न केवल फ्रॉड की घटनाओं को रोका जा सकता है बल्कि डिजिटल और सुरक्षित बैंकिंग को भी बढ़ावा मिलता है। इस बदलाव के साथ, बैंकिंग ग्राहक अधिक सतर्क और तकनीकी रूप से सशक्त बनेंगे।
ग्वालियर: PM आवास की पानी टंकी में मरी छिपकलियां, 1300 परिवारों में दहशत

ग्वालियर । ग्वालियर के मानपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने फ्लैटों की पानी टंकी में मरी हुई पांच छिपकलियां मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। इस टंकी से लगभग 1300 फ्लैटों में रहने वाले 5 हजार लोगों को पानी की आपूर्ति होती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि फेस वन के ब्लॉक ई 52 की टंकी में पानी की क्वॉलिटी पर पहले से ही शक था। पानी में गंदगी और बदबू महसूस होने के बाद कुछ लोगों ने टंकी की जांच की। ढक्कन खोलने पर टंकी में मरी हुई छिपकलियां पाई गईं। रहवासियों ने इन्हें बाहर निकाला और पूरे घटना का वीडियो भी बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कॉलोनी निवासी अनिक राभास नीलकमल मुदगल ने बताया कि टंकी में मरी छिपकलियों को उन्होंने बाहर निकाला और घटना का वीडियो भी बनाया। उनका कहना है कि कॉलोनी में सफाई और रखरखाव की स्थिति बहुत खराब है। नगर निगम की ओर से पर्याप्त सफाई कर्मी नहीं हैं और महीनों से कचरा नहीं उठाया गया। रहवासी राजेंद्र शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अच्छे घर बने हैं, लेकिन नगर निगम की लापरवाही के कारण उनका सही उपयोग नहीं हो पा रहा। विकास तोमर ने बताया कि पिछले महीने नगर निगम और कलेक्टर को शिकायत देने के बाद सिर्फ दो टंकियों की सफाई हुई, जबकि 45 से अधिक टैंक अभी भी गंदे पड़े हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश घरों में आरओ या फिल्टर सिस्टम नहीं है और सीधे टंकी का पानी पीने और खाना बनाने में इस्तेमाल हो रहा है। इस घटना के बाद कई परिवारों ने टंकी का पानी पीना बंद कर दिया और बाहर से आरओ या कैन का पानी मंगाने लगे हैं। फ्लैटों में रहने वालों का आरोप है कि पिछले दो साल से पानी टंकी की नियमित सफाई नहीं हुई। ढक्कन भी ठीक से बंद नहीं है, जिससे कीड़े मकोड़े या अन्य जीव अंदर गिर सकते हैं। कॉलोनी के प्रतिनिधियों ने नगर निगम अधिकारियों से मुलाकात कर समस्या बताई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नगर निगम आयुक्त संघ प्रिया ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि इंदौर में हुई घटना के बाद ग्वालियर में भी टंकियों की सफाई और ढकने की व्यवस्था कराई गई थी।
नीरव मोदी के भाई निहाल-नीशाल को कोर्ट नोटिस, PNB घोटाले में भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू

नई दिल्ली /मुंबई की एक विशेष अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक के ₹23,780 करोड़ के काले घोटाले में नीरव मोदी के दो भाइयों, निहाल और नीशाल मोदी, को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि उन्हेंभगोड़ा आर्थिक अपराधीFugitive Economic Offender घोषित क्यों न किया जाए। नोटिस के तहत दोनों को 7 मई तक अपना जवाब पेश करना होगा। प्रवर्तन निदेशालयED ने अदालत में अर्जी लगाकर दोनों भाइयों को भगोड़ा घोषित करने की मांग की थी। विशेष जज एवी गुजराती ने यह नोटिस जारी किया, और न सिर्फ निहाल और नीशाल, बल्कि नीरव मोदी की कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों आदित्य नानावती और संदीप मिस्त्री को भी इसी प्रकार का नोटिस भेजा गया। PNB घोटाला भारत के बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े मामलों में से एक माना जाता है। हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी और नीरव मोदी पर आरोप है कि उन्होंने बैंक अधिकारियों को रिश्वत देकर फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंगLoUs और फॉरेन लेटर्स ऑफ क्रेडिटFLCs के जरिए ₹23,780 करोड़ से अधिक की हेराफेरी की। इस मामले में नीरव मोदी फिलहाल लंदन की जेल में हैं, जबकि मेहुल चोकसी बेल्जियम में प्रत्यर्पण प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। नीरव मोदी के भाइयों पर भी गंभीर आरोप हैं। निहाल मोदी पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी कंपनियों और विदेशी लेनदेन के जरिए करोड़ों रुपए छिपाने में भूमिका निभाई। वे अमेरिका में गिरफ्तार हैं और प्रत्यर्पण प्रक्रिया में हैं। वहीं, नीशाल मोदी दुबई स्थित फर्जी कंपनियों में डमी पार्टनर्स की नियुक्ति और 2011-2013 के दौरान कई फर्जी कंपनियों में सिग्नेटरी या लाभार्थी बने रहने में शामिल थे। अगर अदालत 7 मई तक उनके संतोषजनक जवाब नहीं पाती है, तो दोनों भाइयों को भगोड़ा घोषित किया जाएगा। भगोड़ा घोषित होने के बाद भारत सरकार उनकी देश और विदेश में मौजूद संपत्तियों को कुर्क या जब्त कर सकेगी। नीरव मोदी को 2019 में भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। मेहुल चोकसी के खिलाफ कार्रवाई अभी लंबित है। इस नए नोटिस के साथ मोदी परिवार के लिए कानूनी जाल और सख्त हो गया है। कोर्ट के इस कदम से न केवल संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि उनकी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों पर भी कड़ी नजर रखी जा सकेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला भारत में बड़े वित्तीय घोटालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का उदाहरण है। इसके साथ ही यह संकेत देता है कि प्रवर्तन एजेंसियां भगोड़ा घोषित करने और अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने में तेजी ला रही हैं। नीरव मोदी और उनके परिवार के खिलाफ यह मामला अब कानूनी रूप से निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है, और आगामी महीनों में इस घोटाले के विभिन्न पहलुओं पर नई कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
एजेंट अर्थव्यवस्था का भविष्य: भारत में एआई और क्रिप्टो का सामंजस्य और नीति की भूमिका

नई दिल्ली । जैसे-जैसे डिजिटल अर्थव्यवस्था का दायरा बढ़ रहा है, भारत में एआई और क्रिप्टो का संगम एक नई तकनीकी संरचना को जन्म दे रहा है। शुरुआती दौर में जब जनरेटिव एआई ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया, तब क्रिप्टो क्षेत्र में प्रतिक्रियाएं सतही और ट्रेंड आधारित थीं। “एआई टोकन” तेजी से फैल रहे थे, लेकिन उनका वास्तविक उपयोग सीमित नजर आता था। 2026 की शुरुआत तक यह दौर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा और अब एक अधिक गंभीर दिशा उभर रही है। मूल सवाल केवल बड़े भाषा मॉडलों को ब्लॉकचेन पर रखने का नहीं है। असली चुनौती यह है कि ब्लॉकचेन नेटवर्क को भरोसेमंद आधारभूत ढांचे के रूप में इस्तेमाल किया जाए-ऐसा ढांचा जो एआई आधारित गतिविधियों को प्रमाणित कर सके, प्रोत्साहनों को संतुलित करे, डिजिटल संसाधनों का मूल्य तय कर सके और उन प्रतिभागियों के बीच ऑडिट योग्य रिकॉर्ड बनाए रख सके, जो एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते। एआई और ब्लॉकचेन अलग-अलग समस्याओं के समाधान के लिए बनाए गए हैं। एआई स्वचालन, सामग्री निर्माण और बड़े पैमाने पर निर्णय लेने की क्षमता देता है, लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही की चुनौतियों को नहीं हल करता। इसके विपरीत, सार्वजनिक ब्लॉकचेन धीमे और सीमित होते हुए भी सत्यापन, नियमों का अनुपालन और अविश्वास की स्थिति में साझा डेटा की विश्वसनीयता बनाए रखते हैं। इस कारण, दोनों तकनीकों का संयोजन व्यावहारिक जरूरत बनकर सामने आ रहा है-एआई बुद्धिमत्ता और क्रिप्टो भरोसे का आधार प्रदान करता है। वैश्विक उदाहरण इस दिशा को दर्शाते हैं। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स का प्रोजेक्ट एटलस यूरोपीय केंद्रीय बैंकों के सहयोग से क्रिप्टो प्रवाह का विश्लेषण करता है और नियामकीय निगरानी को अधिक स्पष्ट बनाता है। सिंगापुर में TokenAIse जैसे जनरेटिव एआई उपकरण क्रिप्टो टोकनाइजेशन को समझने और अपनाने में मदद कर रहे हैं। वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसी परियोजनाएं ब्लॉकचेन का उपयोग औद्योगिक अनुपालन, डिजिटल सत्यापन और उत्पाद जीवनचक्र की पारदर्शिता के लिए कर रही हैं। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण नीतिगत मोड़ है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 और फ्रंटियर एआई एजेंडा ने साफ संदेश दिया कि एआई उपयोगी, समावेशी और जवाबदेह होना चाहिए। वहीं क्रिप्टो नीति अभी भी अनुपालन-केंद्रित है-कड़े एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियम और रिपोर्टिंग बाध्यताएं हैं। इस स्थिति में अवसर है कि क्रिप्टो को केवल ट्रेडिंग गतिविधि के बजाय एआई शासन और भरोसेमंद डिजिटल ढांचे के लिए इस्तेमाल किया जाए। क्यों जरूरी है? क्योंकि डीपफेक, स्वचालित फ़िशिंग और बॉट आधारित ठगी जैसी धोखाधड़ी तेजी से फैल रही है। पारदर्शी लेजर लेनदेन, ऑन-चेन निगरानी और गोपनीयता-संवेदनशील पहचान प्रणालियां इस चुनौती का समाधान दे सकती हैं। एफएटीएफ का ध्यान स्थिर मुद्राओं और ट्रैवल रूल अनुपालन पर भी इसी दिशा में संकेत देता है। भारत में एआई और क्रिप्टो का भविष्य केवल नए टोकनों या विकेंद्रीकरण से तय नहीं होगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि डिजिटल प्रणालियों पर कितना भरोसा किया जा सकता है। एक जिम्मेदार एजेंट अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए ब्लॉकचेन भरोसे की परत बन सकता है और एआई को सुरक्षित, उत्तरदायी और ऑडिट योग्य ढांचे में जोड़ सकता है। यही भारत को नई तकनीकी संरचना में नेतृत्व देने का वास्तविक अवसर है।
भारत को वैश्विक कृषि प्रतिस्पर्धा में लाने की तैयारी : पीएम मोदी ने निर्यात, तकनीक और फसल विविधीकरण पर जोर दिया

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि अब समय आ गया है कि भारत में निर्यात आधारित कृषि उत्पादन को बढ़ाया जाए और इसे वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ा जाए। इससे न केवल नए रोजगार पैदा होंगे बल्कि किसानों को सशक्त बनाने में भी मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने यह बात ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ विषय पर आयोजित पोस्ट-बजट वेबिनार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कही। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि कृषि हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार और रणनीतिक स्तंभ है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की दूसरी तिमाही की शुरुआत हो चुकी है और कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार करना समय की मांग है। वैश्विक बाजार में मांग तेजी से बदल रही है और इसलिए अब चर्चा निर्यात आधारित खेती, फसल विविधीकरण और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर केंद्रित होनी चाहिए। पीएम मोदी ने केंद्रीय बजट 2026-27 में किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए कई अहम सुधारों का जिक्र किया। उन्होंने कृषि विशेषज्ञों, उद्योग जगत और किसानों से मिलकर काम करने की अपील की ताकि उच्च मूल्य वाली खेती को बढ़ावा दिया जा सके और भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने गुणवत्ता और ब्रांडिंग मानकों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की भी बात कही। उनका कहना था कि इससे समग्र स्वास्थ्य को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने मत्स्य पालन को भविष्य का बड़ा निर्यात आधारित क्षेत्र बताते हुए कहा कि इसमें नए बिजनेस मॉडल और उद्यमियों की भागीदारी बढ़ानी होगी। पीएम मोदी ने उच्च मूल्य वाली फसलों जैसे काजू, नारियल, चंदन, अगरवुड, बादाम, अखरोट और पाइन नट्स की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने पशुपालन और तटीय मत्स्य क्षेत्र में निजी निवेश और उद्यमियों की भूमिका बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए एसएचई-मार्ट जैसे प्लेटफॉर्म का विस्तार करने की भी बात कही। प्रधानमंत्री ने डिजिटल कृषि के क्षेत्र में किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि भारत में अब तक 7.63 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत 23.5 करोड़ फसल प्लॉट का सर्वे किया गया है। केंद्रीय बजट 2026-27 में उच्च मूल्य वाली खेती, तकनीक आधारित खेती और कृषि से जुड़े क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और कृषि के आधुनिकीकरण के लिए कई लक्षित कदमों की घोषणा की। बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 1,62,671 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान से लगभग 7 प्रतिशत अधिक है। प्रधानमंत्री ने बताया कि तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में अगरवुड, बादाम, अखरोट और पाइन नट्स की खेती को समर्थन मिलेगा। इन कदमों से किसानों की आय बढ़ेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और भारत की कृषि को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।