रंग पंचमी: क्यों कहा जाता है इसे देवताओं की होली, जानिए धार्मिक महत्व और खास परंपराएं

नई दिल्ली। होली के रंगों और उत्साह से भरे माहौल के बीच आने वाला रंग पंचमी का पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह त्योहार हर वर्ष होली के पांचवें दिन यानी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष रंग पंचमी का पर्व 8 मार्च रविवार को मनाया जाएगा। भारत के कई हिस्सों में इसे बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है हालांकि मध्यप्रदेश महाराष्ट्र गुजरात और ब्रज क्षेत्र में इसका विशेष महत्व माना जाता है। रंग पंचमी को देव पंचमी या कृष्ण पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवी देवता पृथ्वी पर आकर भक्तों के साथ होली खेलते हैं। यही कारण है कि इसे देवताओं की होली भी कहा जाता है। जिस तरह कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं की दिवाली मानी जाती है उसी तरह रंग पंचमी को देवताओं की होली के रूप में देखा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रज में इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी और गोपियों के साथ रंगों की होली खेली थी। इसी परंपरा के चलते आज भी कई मंदिरों में इस दिन विशेष रंगोत्सव आयोजित किए जाते हैं। मंदिरों में चंदन हल्दी और फूलों से बने प्राकृतिक रंगों से भगवान को गुलाल अर्पित किया जाता है और भक्त भी एक दूसरे पर रंग लगाकर इस उत्सव में शामिल होते हैं। ब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव लगभग 40 दिनों तक चलता है और रंग पंचमी के साथ इस उत्सव का समापन माना जाता है। इसलिए यह पर्व होली की विदाई का भी प्रतीक है। इस दिन लोग एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देते हैं और आपसी प्रेम भाईचारे और सद्भाव का संदेश फैलाते हैं। रंग पंचमी के दिन मंदिरों और घरों में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। भक्त सबसे पहले राधा कृष्ण की पूजा करते हैं और गुलाल उनके चरणों में अर्पित करते हैं। कई मंदिरों में इस दिन भगवान की विशेष झांकियां सजाई जाती हैं और श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था की जाती है। इसके साथ ही सामूहिक रंगोत्सव भी आयोजित किए जाते हैं जिनमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। इस अवसर पर कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं जिनमें लोकगीत नृत्य और पारंपरिक कार्यक्रम शामिल होते हैं। शहरों कस्बों और गांवों में लोग मिलकर रंगों का उत्सव मनाते हैं और पुराने मतभेदों को भुलाकर नए सिरे से रिश्तों को मजबूत करते हैं। घर घर में इस दिन विशेष पकवान भी बनाए जाते हैं और परिवार के सभी सदस्य मिलकर उत्सव का आनंद लेते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई रंग पंचमी के रंगों में सराबोर दिखाई देता है। इस तरह रंग पंचमी न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है बल्कि यह सामाजिक एकता प्रेम और भाईचारे का भी प्रतीक माना जाता है।
इंडिगो की बड़ी उपलब्धि, बनी एक हजार से अधिक महिला पायलट वाली देश की पहली एयरलाइंस

नई दिल्ली। भारत के विमानन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। इसी कड़ी में देश की प्रमुख एयरलाइंस में से एक इंडिगो ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के बेड़े में अब 1000 से अधिक महिला पायलट कार्यरत हैं। यह उपलब्धि न केवल इंडिगो के लिए बल्कि पूरे भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इंडिगो में कुल पायलटों में 17.5 प्रतिशत महिलाएं हैं जो वैश्विक औसत से लगभग तीन गुना अधिक है। महिलाओं को अवसर देने पर फोकस 2015 के बाद से इंडिगो ने पायलट भर्ती और प्रशिक्षण में महिलाओं को विशेष अवसर देने की दिशा में कदम उठाए। कंपनी ने कई प्रशिक्षण कार्यक्रम और छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू कीं जिससे महिला उम्मीदवारों को पायलट बनने का मौका मिला। इसी रणनीति के चलते इंडिगो अब उन एयरलाइंस में शामिल हो गई है जहां महिला पायलटों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। भारत में इस समय लगभग 15 हजार कमर्शियल पायलट हैं जिनमें लगभग 12–15 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह अनुपात कई विकसित देशों से बेहतर माना जाता है। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस ने महिला पायलटों को अवसर देकर इस आंकड़े को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।वैश्विक स्तर पर विमानन क्षेत्र में लैंगिक अंतर वैश्विक स्तर पर अभी भी विमानन क्षेत्र में लैंगिक अंतर बड़ा है। दुनिया भर में पायलटों में महिलाओं की हिस्सेदारी औसतन केवल 5–6 प्रतिशत है। ऐसे में भारत उन देशों में शामिल हो गया है जहां महिला पायलटों की भागीदारी अपेक्षाकृत अधिक है। पायलट बनने के लिए सबसे पहले 12वीं में भौतिकी और गणित होना आवश्यक है। इसके बाद उम्मीदवार को डीजीसीए से मान्यता प्राप्त उड़ान स्कूल से प्रशिक्षण लेना होता है। कमर्शियल पायलट लाइसेंस पाने के लिए लगभग 200 घंटे की उड़ान प्रशिक्षण पूरी करनी पड़ती है। उसके बाद एयरलाइंस में नौकरी के लिए आवेदन किया जा सकता है।महिला पायलटों की संख्या में हो रही वृद्धि पिछले एक दशक में भारत में महिला पायलटों की संख्या में तेज वृद्धि हुई है। कई एयरलाइंस अब महिला उम्मीदवारों के लिए विशेष प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति कार्यक्रम चला रही हैं। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी कंपनियों में अब बड़ी संख्या में महिलाएं कॉकपिट की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। भारत की पहली महिला पायलट सरला ठकराल थीं। उन्होंने 1936 में केवल 21 वर्ष की आयु में पायलट लाइसेंस हासिल किया था और उस दौर में महिलाओं के लिए विमानन क्षेत्र में कदम रखना बेहद चुनौतीपूर्ण था। आज भारतीय विमानन क्षेत्र में महिलाओं के लिए नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। इंडिगो में 1000 महिला पायलटों का आंकड़ा इसी बदलाव का प्रतीक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में एयरलाइंस में महिला पायलटों की संख्या और बढ़ेगी और यह क्षेत्र लैंगिक समानता की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।
नेपाल चुनाव में बालेन शाह की RSP ने मारी बाजी: केपी ओली अपने ही गढ़ में 43,000 वोटों से हार गए

नई दिल्ली। नेपाल में आम चुनाव का परिणाम राजनीतिक इतिहास में एक नया मोड़ लेकर आया है। रैपर और काठमांडू के मेयर रह चुके बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) इस बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। शुरुआती रुझानों के अनुसार RSP ने अब तक 58 सीटें जीत ली हैं और 63 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यह पार्टी सिर्फ चार साल पहले पत्रकार रहे रबि लामिछाने के प्रयासों से बनाई गई थी और अब यह युवा नेतृत्व नेपाल की राजनीति में अपनी मजबूती दिखा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री और भारत विरोधी रवैये के लिए जाने जाने वाले केपी शर्मा ओली को झापा-5 सीट पर बालेन शाह के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा। यहां ओली को केवल 16,350 वोट मिले, जबकि बालेन शाह को 59,568 वोट मिले, यानी 43,000 से अधिक मतों की भारी अंतर से वे पिछड़ गए। इससे यह स्पष्ट हो गया कि ओली का अपना गढ़ भी अब उन्हें समर्थन नहीं दे रहा। ओली ने 2017 और 2022 में इसी सीट से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार युवा नेतृत्व और जनता की बदलती पसंद ने उनकी चुनौती को बढ़ा दिया। नेपाल की चुनाव प्रणाली मिश्रित मॉडल पर आधारित है। संसद की कुल 275 सीटों में से 165 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जहां निर्वाचन क्षेत्र के वोटरों का पसंदीदा उम्मीदवार जीतता है। बाकी 110 सीटें पार्टियों को कुल वोट प्रतिशत के आधार पर दी जाती हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य छोटे दलों और विभिन्न सामाजिक समूहों को भी संसद में प्रतिनिधित्व देना है। इस बार भी Balen Shah की RSP ने 54.8 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं, जो उसे संसद में मजबूत स्थिति प्रदान करता है। पिछले साल सितंबर में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद नेपाल में 5 मार्च को हुए चुनाव में लगभग 58% मतदाताओं ने हिस्सा लिया। चुनाव आयोग के अनुसार वोटों की गिनती पूरी करने में 3-4 दिन लग सकते हैं और 9 मार्च तक परिणाम आने की संभावना है। इस चुनाव के नतीजे नेपाल की राजनीति में युवा नेतृत्व के उदय और पुराने नेताओं के प्रभाव में गिरावट को दर्शाते हैं। बालेन शाह की RSP ने युवा और अलग सोच रखने वाले मतदाताओं का समर्थन हासिल किया, वहीं केपी ओली जैसी स्थापित पार्टी और नेता अब नए राजनीतिक परिदृश्य में चुनौती का सामना कर रहे हैं। इससे नेपाल की संसद में बदलाव की उम्मीद और नए गठबंधनों की संभावनाएं भी सामने आ रही हैं। कुल मिलाकर, नेपाल के इस चुनाव ने स्पष्ट कर दिया कि जनता अब युवा और नए दृष्टिकोण वाले नेताओं को प्राथमिकता दे रही है, और पारंपरिक, पुराने नेताओं को अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए नई रणनीतियों की आवश्यकता है।
भोपाल में बिना अनुमति जुलूस धरना पर दो माह की रोक, उज्जैन में पानी के टैंक में गिरने से 7 वर्षीय मासूम की मौत

भोपाल । मध्यप्रदेश में एक ओर जहां राजधानी भोपाल में कानून व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है वहीं उज्जैन जिले के खाचरोद से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। भोपाल में पुलिस प्रशासन ने बिना अनुमति किसी भी प्रकार के जुलूस धरना प्रदर्शन और रैली पर दो महीने के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं उज्जैन के खाचरोद क्षेत्र में सात वर्षीय मासूम के पानी के टैंक में गिरने से मौत हो गई जिसके बाद मामले में नया मोड़ आ गया है और परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए जांच की मांग की है। राजधानी भोपाल में पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह आदेश जारी किया है। आदेश के तहत शहर में बिना प्रशासनिक अनुमति के किसी भी प्रकार के जुलूस आंदोलन रैली धरना प्रदर्शन घेराव और सरकारी भवनों के घेराव पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। यह आदेश आगामी दो महीनों तक प्रभावी रहेगा। पुलिस प्रशासन का कहना है कि शहर में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि कोई संगठन समूह या व्यक्ति किसी प्रकार का सार्वजनिक कार्यक्रम रैली या प्रदर्शन करना चाहता है तो उसे पहले प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। अनुमति के बिना किए गए किसी भी आयोजन को अवैध माना जाएगा और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने सभी विभागों संगठनों और नागरिकों से इस आदेश का पालन करने की अपील की है। इधर उज्जैन जिले के खाचरोद क्षेत्र की लंगर कॉलोनी में सात वर्षीय मासूम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार ध्रुव नामक बच्चा खेलते समय पानी के टैंक में गिर गया। घटना के बाद परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक ध्रुव 7 देवास निवासी धर्मेंद्र बलाई का बेटा था। बताया जा रहा है कि ध्रुव अपनी मां ममता बाई के साथ खाचरोद में किराए के मकान में रह रहा था। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है। हालांकि मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब बच्चे के पिता धर्मेंद्र बलाई ने अपनी पत्नी ममता बाई और खाचरोद थाने में पदस्थ एएसआई प्रभुलाल डालमिया पर हत्या की आशंका जताई है। पिता ने इस संबंध में एसडीओपी को आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि घटना संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। फिलहाल पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। साथ ही घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इंदौर मुक्तिधाम हड़कंप: 13 नंबर के तीन टोकन की चूक से अस्थियां गड़बड़, दो परिवारों में हंगामा, तीन घंटे बाद सुलझा मामला

इंदौर। इंदौर में पचकुइया मुक्तिधाम पर शनिवार को अस्थियों की अदला-बदली से हंगामा मच गया। मामला तब सामने आया जब एक ही नंबर (13) के तीन टोकन अलग-अलग परिवारों को दे दिए गए। इसी कारण गलती से एक अन्य परिवार स्व. मदनलाल विश्वकर्मा की अस्थियों को अपने स्वजन समझकर ले गया। जब परिवार अस्थियां लेने पहुंचा, तब उन्हें यह पता चला कि अस्थियां उनके स्वजन की नहीं हैं। विश्वकर्मा परिवार के अनुसार, 55 वर्षीय मदनलाल विश्वकर्मा का निधन कुछ दिनों पहले हुआ था। उनके अंतिम संस्कार के लिए पंडित ने अस्थि संचय की तिथि रविवार तय की थी, लेकिन शनिवार को परिवार जब संग्रह के लिए मुक्तिधाम पहुंचे तो अस्थियां वहां नहीं मिलीं। इसके बाद परिवार ने ड्यूटी पर मौजूद निगमकर्मी से जानकारी ली, लेकिन कर्मचारी नशे में होने के कारण मदद नहीं कर सके। घटना की तहकीकात में पता चला कि 13 नंबर के तीन टोकन अलग-अलग परिवारों को दे दिए गए थे। इसी कारण चौबे परिवार, जिनके 65 वर्षीय स्व. सुनील चौबे का निधन 5 मार्च को हुआ था, ने गलती से विश्वकर्मा परिवार की अस्थियां ले ली। सुबह लगभग 8.30 बजे चौबे परिवार अस्थियों को संग्रह कर खेड़ी घाट के लिए रवाना हुआ, तभी उन्हें मुक्तिधाम से फोन आया कि उन्होंने गलत अस्थियां ले ली हैं। इसके बाद दोनों परिवारों की अस्थियां तीन घंटे बाद सही ढंग से लौटाई गईं। विश्वकर्मा परिवार के नजदीकी मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि मुक्तिधाम में तैनात पंचकुइया मोक्ष विकास समिति के कर्मचारी की लापरवाही से यह स्थिति बनी। उन्होंने बताया कि कर्मचारी से गलती हुई और उसने टोकन संख्या में गड़बड़ी कर दी। मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष वैभव बाहेती ने खेद जताते हुए बताया कि गलती करने वाला कर्मचारी 35 सालों से मुक्तिधाम में सेवाएं दे रहा है और कोरोना महामारी के दौरान भी उसने अहम योगदान दिया। उन्होंने कहा कि यह मानवीय भूल थी और संबंधित कर्मचारी को चेतावनी दी गई है। इंदौर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर डायल 100 भेजा और एडी. डीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने कहा कि यदि किसी पक्ष ने शिकायत दर्ज कराई, तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर मुक्तिधाम संचालन में कर्मचारियों की सतर्कता और टोकन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता उजागर कर दी है।
लाड़ली बहना योजना से बदली मंजू यादव की किस्मत: घर से शुरू किया सिलाई काम, आज चला रहीं रोजगार देने वाला सेंटर

भोपाल ।मध्यप्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रही है। इस योजना के माध्यम से कई महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नर्मदापुरम जिले की रहने वाली मंजू यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई हैं जिन्होंने योजना से मिली आर्थिक सहायता का सदुपयोग करते हुए अपनी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। आज वे न केवल आत्मनिर्भर बन चुकी हैं बल्कि अपने प्रयासों से अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर रही हैं। नर्मदापुरम जिले के वार्ड क्रमांक 31 दीवान चौक ग्वालटोली निवासी 30 वर्षीय मंजू यादव कभी सीमित आय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपने परिवार का सहारा बनने का सपना देखती थीं। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उनके लिए यह सपना पूरा करना आसान नहीं था लेकिन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने उनके जीवन में उम्मीद की एक नई किरण जगाई। जून 2023 से उन्हें इस योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिलने लगी जिससे उन्हें अपने भविष्य के लिए कुछ नया करने का आत्मविश्वास मिला। मंजू यादव ने योजना से प्राप्त राशि को खर्च करने के बजाय सोच समझकर उसका उपयोग करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने घर से ही सिलाई का छोटा सा काम शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ काम शुरू किया लेकिन उनकी मेहनत और लगन ने धीरे धीरे इस छोटे से प्रयास को एक सफल व्यवसाय में बदल दिया। आसपास के लोगों से कपड़ों की सिलाई के ऑर्डर मिलने लगे और उनका काम लगातार बढ़ने लगा। फरवरी 2026 तक मंजू यादव को योजना की 33वीं किश्त सहित कुल 43 हजार 500 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो चुकी है। इस आर्थिक सहयोग और सिलाई के काम से हुए मुनाफे को उन्होंने अपने व्यवसाय के विस्तार में लगाया। उन्होंने सिलाई के लिए अतिरिक्त मशीनें खरीदीं और धीरे धीरे अपने काम को बढ़ाते हुए एक सिलाई सेंटर की शुरुआत कर दी। आज उनके सेंटर में पांच सिलाई मशीनें संचालित हो रही हैं और काम भी नियमित रूप से मिल रहा है। मंजू यादव की इस पहल का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि उन्होंने केवल खुद को ही आत्मनिर्भर नहीं बनाया बल्कि अपने सिलाई सेंटर के माध्यम से अन्य महिलाओं को भी रोजगार का अवसर प्रदान किया है। उनके साथ काम करने वाली कई महिलाएं अब नियमित आय अर्जित कर रही हैं जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो रही है। मंजू यादव भावुक होकर बताती हैं कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने उनके जीवन में नया आत्मविश्वास और उम्मीद जगाई है। इस योजना ने उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर दिया। आज वे गर्व के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं और अपने काम के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक संदेश भी दे रही हैं कि सही अवसर और थोड़े से सहयोग से महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उनकी सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि यदि योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए तो वे न केवल व्यक्तिगत जीवन में बदलाव ला सकती हैं बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन की राह खोल सकती हैं।
DIY होम डेकोर ट्रिक: 20 लीटर की पुरानी पानी की केन से बनाएं मिनी पॉन्ड, फ्री में मिलेगा गार्डन जैसा लुक
DIY होम डेकोर ट्रिक: 20 लीटर की पुरानी पानी की केन से बनाएं मिनी पॉन्ड, फ्री में मिलेगा गार्डन जैसा लुक शॉर्ट डिस्क्रिप्शनहिंदी: बेकार पड़ी 20 लीटर पानी की केन से आसानी से बनाएं खूबसूरत मिनी पॉन्ड, बिना खर्च घर और गार्डन की सजावट का शानदार तरीका। English: Create a beautiful DIY mini pond using a waste 20 litre water can and enhance your home decor naturally at zero cost. टैगDIY Mini Pond, Home Decor Ideas, Gardening Hacks, Waste to Best, Creative DIY रनिंग मैटरआजकल लोग अपने घर और गार्डन को सजाने के लिए महंगे डेकोरेशन आइटम खरीदते हैं लेकिन कई बार घर में मौजूद बेकार सामान से भी बेहद खूबसूरत सजावट की जा सकती है। अगर आप भी घर को नेचुरल और यूनिक लुक देना चाहते हैं तो एक साधारण 20 लीटर की पानी की केन से शानदार मिनी पॉन्ड बनाया जा सकता है। यह एक आसान और क्रिएटिव DIY आइडिया है जो कम मेहनत में आपके घर की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा सकता है। सोशल मीडिया पर इन दिनों ऐसे कई DIY आइडिया वायरल हो रहे हैं जिनमें बेकार सामान को इस्तेमाल कर नई चीजें बनाई जा रही हैं। इसी तरह एक वीडियो में दिखाया गया है कि किस तरह साधारण वाटर केन को एक खूबसूरत प्लांटेड मिनी पॉन्ड में बदला जा सकता है। अगर आप गार्डनिंग के शौकीन हैं तो यह आइडिया आपके लिए बेहद काम का साबित हो सकता है। मिनी पॉन्ड बनाने के लिए सबसे पहले एक खाली 20 लीटर की पानी की केन लें और उसे अच्छी तरह साफ कर लें। केन जितनी साफ होगी अंदर का दृश्य उतना ही साफ और आकर्षक दिखाई देगा। इसके बाद केन के निचले हिस्से को सावधानी से काट लें ताकि वह खुला टैंक जैसा दिखने लगे। इसके बाद केन के ढक्कन में एक छोटा सा छेद करें और उसमें एक प्लास्टिक की टोटी फिट कर दें। यह टोटी बाद में पानी निकालने और सफाई करने के काम आएगी। जब टोटी फिट हो जाए तो ढक्कन को केन में अच्छी तरह बंद कर दें। मिनी पॉन्ड बनाते समय सबसे बड़ी समस्या पानी के रिसाव की हो सकती है। इसलिए ढक्कन को बंद करने से पहले उस पर टेफ्लॉन टेप अच्छी तरह लपेट दें ताकि पानी बाहर न निकले। इसके अलावा सुरक्षा के लिए ढक्कन और टोटी वाली जगह को एम सील से भी सील कर सकते हैं। इससे पानी का रिसाव पूरी तरह रुक जाता है। इसके बाद केन को उल्टा करके सेट करें और उसमें पानी भर दें। अब इसमें छोटे-छोटे जलीय पौधे लगाए जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर रोटाला रोटुंडिफोलिया ग्रीन नाम का पौधा छोटे प्लास्टिक कंटेनर में एक्वेरियम सॉइल के साथ लगाया जा सकता है। इसके अलावा एनुबियास जैसे पौधे भी इसमें लगाए जा सकते हैं। एनुबियास की खासियत यह है कि इसे मिट्टी की जरूरत नहीं होती और यह पत्थर या लकड़ी के सहारे भी आसानी से बढ़ जाता है। अगर आप चाहें तो इस मिनी पॉन्ड में छोटी मछलियां और झींगे भी रख सकते हैं। लेकिन चूंकि इसमें कोई फिल्टर नहीं लगाया जाता इसलिए बहुत ज्यादा जीव नहीं रखने चाहिए। इसमें एम्बर टेट्रा जैसी छोटी मछलियां और कुछ झींगे रखना बेहतर माना जाता है ताकि पानी ज्यादा गंदा न हो और बायोलोड कम बना रहे। पौधों को सही तरीके से बढ़ने के लिए रोशनी भी जरूरी होती है। इसके लिए एक साधारण एक्वेरियम एलईडी लाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है जिसे रोजाना लगभग सात घंटे तक जलाया जा सकता है। इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और मिनी पॉन्ड देखने में भी बेहद खूबसूरत लगता है। पानी की सफाई के लिए केन में लगी टोटी काफी मददगार होती है। जब भी पानी बदलना हो तो नीचे लगे टैप को खोलकर आसानी से पानी निकाला जा सकता है और नया पानी डाला जा सकता है। इस तरह घर में पड़ी एक साधारण और बेकार पानी की केन को इस्तेमाल कर आप बेहद खूबसूरत मिनी पॉन्ड बना सकते हैं। यह न केवल घर की सजावट को खास बनाता है बल्कि गार्डनिंग के शौकीनों के लिए भी एक शानदार और किफायती आइडिया साबित होता है।
MINOR GIRL RAPED: भोपाल में आठ साल की मासूम से रेप:पड़ोसी अधेड़ ने टॉफी का लालच देकर घर बुलाया, लोगों ने गंदी हरकत करते रंगे हाथ पकड़ा

MINOR GIRL RAPED: भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ईंटखेड़ी इलाके में इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहाँ एक 41 वर्षीय अधेड़ ने पड़ोसी होने का भरोसा तोड़ते हुए 8 साल की मासूम छात्रा को अपनी हवस का शिकार बनाया। हालांकि, आरोपी अपनी इस घिनौनी करतूत को छिपा पाता, उससे पहले ही स्थानीय लोगों की सतर्कता ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया और जमकर सबक सिखाया। वारदात: टॉफी का लालच और हैवानियत घटना शुक्रवार दोपहर की है, जब दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली मासूम अपने घर के बाहर खेल रही थी। तभी पड़ोस में रहने वाले धर्मेंद्र (41) की नीयत बिगड़ गई। उसने मासूम को टॉफी दिलाने का झांसा दिया और फुसलाकर अपने घर के भीतर ले गया। घर का दरवाजा बंद कर आरोपी ने बच्ची के साथ दरिंदगी शुरू कर दी। चीख ने खोली पोल: ग्रामीणों ने किया घेराव दरिंदगी के दौरान जब मासूम की चीखें घर से बाहर सुनाई दीं, तो आसपास के लोग अनहोनी की आशंका में तुरंत मौके पर पहुँचे। लोगों ने जब घर के भीतर का नजारा देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। रंगे हाथ गिरफ्तारी: गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी धर्मेंद्र को रंगे हाथ दबोच लिया। जनता का इंसाफ: पुलिस के पहुँचने से पहले आक्रोशित भीड़ ने आरोपी की जमकर धुनाई कर दी। सूचना मिलते ही ईंटखेड़ी पुलिस मौके पर पहुँची और लहूलुहान हालत में आरोपी को हिरासत में लिया। पुलिस की कार्रवाई: मेडिकल में हुई पुष्टि पुलिस ने तत्काल मासूम को मेडिकल जांच के लिए भेजा, जहाँ डॉक्टरों ने रेप की पुष्टि की है। सख्त धाराएं: पुलिस ने आरोपी के खिलाफ IPC (BNS) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत संगीन मामला दर्ज किया है। कोर्ट में पेशी: शुक्रवार दोपहर को ही आरोपी धर्मेंद्र को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया है। अपडेट: नाबालिग छात्रा केस में आरोपी माज खान का चौंकाने वाला खुलासा इधर, भोपाल के एक अन्य हाई-प्रोफाइल रेप केस (11वीं की छात्रा) में गिरफ्तार आरोपी माज खान ने पुलिस की पूछताछ में सनसनीखेज खुलासे किए हैं। माज ने कबूल किया है कि मुख्य आरोपी ओसाफ अली खान ने ‘थार’ गाड़ी के अंदर नाबालिग से रेप किया था। माज ने बताया कि यह सब एक सोची-समझी प्लानिंग का हिस्सा था। जब ओसाफ कार के अंदर था, तब माज बाहर खड़ा होकर कार के शीशे से अंदर झांक रहा था और उसने अपने मोबाइल से पूरी घटना का वीडियो शूट किया। पुलिस अब इस मामले में डिजिटल साक्ष्यों को और मजबूती से जुटा रही है।
Guna Encroachment Demolished: गुना में अतिक्रमण पर प्रशासन सख्त: भुल्लनपुरा तिराहे पर जेसीबी से हटाए चबूतरे और टीनशेड

HIGHLIGHTS: गुना के भुल्लनपुरा तिराहे पर चला अतिक्रमण हटाओ अभियान जेसीबी से दुकानों के बाहर बने चबूतरे और टीनशेड हटाए गए सड़क हादसों के बाद प्रशासन ने दिखाई सख्ती नगर पालिका, राजस्व और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई स्थाई अतिक्रमण हटाने के लिए दोबारा सर्वे की तैयारी Guna Encroachment Demolished: ग्वालियर। गुना शहर में बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए जिला प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कदम उठाना शुरू कर दिया है। शनिवार को नगरपालिका, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने भुल्लनपुरा तिराहे पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी की मदद से दुकानों के बाहर बने स्थाई चबूतरे, टीनशेड और अन्य अवैध निर्माणों को हटाया गया। CM VISIT KARILA MELA VISIT : करीला में रंग पंचमी मेले की शुरुआत, 8 मार्च को सीएम मोहन यादव करेंगे माता जानकी के दर्शन हादसों के बाद प्रशासन हुआ सख्त हाल ही में बजरंगगढ़ बायपास पर हुए एक दर्दनाक हादसे में एक बच्चे का पैर ट्रक की चपेट में आने से बुरी तरह कुचल गया था। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला था और उन्होंने सड़क जाम कर अतिक्रमण हटाने की मांग की थी। इसके अलावा एबी रोड पर भी एक अनियंत्रित ट्रक ने चार लोगों को टक्कर मार दी थी, जिसमें एक युवक की मौत हो गई थी। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया। अगले हफ्ते शेयर बाजार में IPO की बारिश, 4 कंपनियां खोलेंगी पब्लिक इश्यू, निवेशकों के लिए बड़ा मौका प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई शनिवार को तहसीलदार गौरीशंकर बैरवा, नगर पालिका और पुलिस की टीम भुल्लनपुरा तिराहे पर पहुंची। यहां दुकानों के आगे फैले अस्थाई सामान को जब्त किया गया और सड़क की सीमा में बने स्थाई निर्माणों को जेसीबी से हटाया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बजरंगगढ़ बायपास पर भी आगे लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। दोबारा सर्वे कर हटेंगे स्थाई अतिक्रमण नगर पालिका अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में अस्थाई कब्जे हटाए गए थे। अब स्थाई अतिक्रमणों को चिन्हित करने के लिए दोबारा विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। प्रशासन ने दुकानदारों और मकान मालिकों से अपील की है कि वे स्वयं अपने चबूतरे और टीनशेड हटा लें, अन्यथा प्रशासन बलपूर्वक कार्रवाई करेगा। पूजा सामग्री का पुनः उपयोग: शास्त्र क्या कहते हैं, जानें नियम और अपवाद
इंदौर दूषित पानी कांड पर कांग्रेस में उठी संवेदनशीलता की आवाज: 35 मौतों के बाद होली मिलन टालने की मांग, राहुल गांधी को लिखा पत्र

इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई 35 से अधिक लोगों की मौतों के बाद अब इस मामले की गूंज कांग्रेस संगठन के भीतर भी सुनाई देने लगी है। इस दुखद घटना के बाद जहां एक ओर प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है वहीं कांग्रेस के अंदर से भी संवेदनशीलता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व महासचिव राकेश सिंह यादव ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर भोपाल में प्रस्तावित होली मिलन समारोह को स्थगित कराने की मांग की है। राकेश सिंह यादव ने अपने पत्र में लिखा है कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस त्रासदी में कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है और कई घरों में आज भी मातम पसरा हुआ है। ऐसे समय में जब पूरा शहर दुख और शोक के माहौल से गुजर रहा है तब किसी भी प्रकार का उत्सव मनाना जनता की भावनाओं के विपरीत संदेश दे सकता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को ऐसे संवेदनशील समय में जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का गृहनगर इंदौर है और वहीं इस दुखद घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। ऐसे समय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का दायित्व बनता है कि वे पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होकर उनका दुख साझा करें। राकेश सिंह यादव ने लिखा कि कांग्रेस की विचारधारा हमेशा से गांधीवादी मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित रही है इसलिए इस समय उत्सव मनाने के बजाय पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त करना अधिक जरूरी है। उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा कि भोपाल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के निवास पर प्रस्तावित होली मिलन समारोह को लेकर जनमानस में भी सवाल उठने लगे हैं। खासतौर पर तब जब इसी घटना के विरोध में इंदौर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस घटना के बाद होली जैसे उत्सव से दूरी बनाने का फैसला भी किया है ताकि पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना जाहिर की जा सके। राकेश सिंह यादव ने राहुल गांधी से आग्रह किया है कि पार्टी की मानवीय परंपरा और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए फिलहाल होली मिलन समारोह को स्थगित करने की सलाह दी जाए। उनका कहना है कि ऐसा करने से पीड़ित परिवारों को यह संदेश जाएगा कि कांग्रेस उनके दुख में बराबर की भागीदार है और उनके साथ खड़ी है। इंदौर के इस जलकांड को लेकर पहले से ही प्रदेश सरकार विपक्ष के निशाने पर है। अब कांग्रेस के भीतर से उठी यह मांग राजनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह सीधे तौर पर संगठन की कार्यशैली और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मांग पर क्या फैसला लेता है।