JUNIOR NTR: अस्पताल के उद्घाटन समारोह में पहुंचे जूनियर NTR, झलक पाने के लिए बेकाबू हुए फैंस, जमकर तोड़फोड़

JUNIOR NTR: बेंगलुरु। साउथ के सुपरस्टार एक्टर जूनियर एनटीआर (South Superstar Actor Junior NTR) का एक अस्पताल का दौरा उस वक्त मुसीबत बन गया, जब उनके फैंस की भारी भीड़ ने वहां हंगामा खड़ा कर दिया। रविवार को एक्टर बेंगलुरु के निजी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (Super Specialty Hospital) के उद्घाटन समारोह में पहुंचे थे। जूनियर एनटीआर की एक झलक पाने के लिए हजारों की संख्या में फैंस अस्पताल पहुंच गए, जिससे वहां भगदड़ जैसे हालात पैदा हो गए और बिल्डिंग के अंदर काफी तोड़फोड़ भी हुई। फैंस की भीड़ इतनी ज्यादा थी कि एक वायरल वीडियो में भीड़ के धक्के से एक एस्केलेटर टूटता नजर आ रहा है। फैंस की इस दीवानगी और नए हॉस्पिटल में हुई तोड़फोड़ पर सोशल मीडिया यूजर्स का रिएक्शन भी देखने लायक है। बेकाबू भीड़ की वजह से हुई यह तोड़फोड़ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे फैंस की भारी भीड़ अस्पताल के अंदर घुस गई है। भीड़ का दबाव इतना ज्यादा था कि अस्पताल की एक एस्केलेटर पूरी तरह चकनाचूर हो गई। इस दौरान वहां मौजूद मरीजों और स्टाफ के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षाकर्मी और बाउंसर्स भी भीड़ को रोकने में नाकाम साबित हुए और उन्हें रास्ता बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। एक बड़ी चुनौती सुपरस्टार की सेफ्टी इनश्योर करना भी था। पुलिस को करना पड़ा हल्का लाठी चार्ज जब हालात ऑर्गनाइजर्स और प्राइवेट सिक्योरिटी टीम के कंट्रोल से बाहर हो गई, तो पुलिस को दखल देना पड़ा। खबर है कि भीड़ को तितर-बितर करने और अस्पताल परिसर को खाली कराने के लिए पुलिस को हल्का लाठी चार्ज भी करना पड़ा। वीडियो क्लिप्स में एक फैन को एस्केलेटर टूटने के बाद उस पर गिरते देखा जा सकता है, जिसे पास खड़े शख्स ने किसी तरह उठाया। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की अराजकता देखकर हर कोई हैरान रह गया। सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा इस घटना के वीडियो सामने आते ही इंटरनेट पर लोगों ने फैंस और मैनेजमेंट की जमकर क्लास लगाई। एक यूजर ने इसे ‘दुनिया का सबसे खराब फैंडम’ करार दिया, तो वहीं दूसरे ने सवाल उठाया कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने बिना सोचे-समझे इतने लोगों को अंदर आने ही क्यों दिया? कुछ लोगों ने जूनियर एनटीआर की भी आलोचना की और उनके फैंस से दूरी बनाए रखने के व्यवहार पर सवाल उठाए। वहीं, कई यूजर्स ने इस भीड़ को मेंटल बताते हुए कहा कि अस्पताल में ऐसा व्यवहार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। वर्क फ्रंट की बात करें तो जूनियर एनटीआर को आखिरी बार फिल्म ‘वॉर 2’ में देखा गया था, जिससे उन्होंने अपना बॉलीवुड डेब्यू किया।
Lok Sabha Speaker: लोकसभा अध्यक्ष बिरला के खिलाफ आज अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में चर्चा…

Lok Sabha Speaker: नई दिल्ली। पूरे 39 वर्षों के बाद सोमवार को फिर संसद में लोकसभा अध्यक्ष (Lok Sabha Speaker) के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। प्रस्ताव पर करीब दस घंटे तक चर्चा होने की उम्मीद है। बहस के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने पूरी तैयारी की है। केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने जहां सत्तापक्ष की तरफ से चर्चा में हिस्सा लेने वाली सदस्यों के साथ बैठक की, वहीं कांग्रेस (Congress) ने भी बैठक कर रणनीति पर चर्चा की है। संसद के बजट सत्र के दूसरे हिस्से की शुरुआत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) के खिलाफ विपक्ष की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के साथ होगी। लोकसभा में सबसे पहले शिलांग से सांसद डॉ. रिकी एजे सिंगकॉन को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद सदन कुछ देर के लिए स्थगित हो सकता है। कार्यसूची में प्रस्ताव पर चर्चा को शामिल किया है, हालांकि सदन में हंगामे के पूरे आसार हैं। सूत्रों का कहना है कि सत्तापक्ष पूरी मजबूती के साथ विपक्ष के आरोपों का खंडन करेगा। सरकार की ओर से भी उन घटनाओं का हवाला दिए जाने की संभावना है जिनमें विपक्षी नेताओं ने कथित तौर पर राष्ट्रपति, राज्यपालों, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक अधिकारियों के प्रति अनादर दिखाया है। वहीं, विपक्षी पार्टियां भी सरकार को घेरने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगी। TMC ने भी किया समर्थन संसदीय सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के 118 सांसदों ने प्रस्ताव के समर्थन में नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। नोटिस पर तृणमूल कांग्रेस ने हस्ताक्षर नहीं किए थे, पर नए घटनाक्रम में टीएमसी ने भी प्रस्ताव का समर्थन करने का निर्णय लिया है। एनसीपी (शरद पवार) ने भी अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है, पर माना जा रहा है कि एनसीपी (एसपी) विपक्षी दलों के खिलाफ नहीं जाएगी। वैश्विक संघर्ष और उसके प्रभावों को लेकर भी बढ़ सकता है गतिरोध लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के साथ दूसरे चरण में वैश्विक संघर्ष और उसके प्रभावों को लेकर भी गतिरोध बढ़ सकता है। कांग्रेस पहले ही विदेश नीति पर चर्चा की मांग कर चुकी है। अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका के रूस से तेल खरीदनों को लेकर बयानों पर भी विपक्ष सरकार को घेर सकता है। अब तक तीन बार आए प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए अब तक तीन औपचारिक प्रस्ताव पेश किए गए हैं, पर कोई भी प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। सबसे पहले 1954 में तत्कालीन अध्यक्ष जीवी मावलंकर के खिलाफ समाजवादी नेता विग्नेश्वर मिश्रा ने पेश किया, पर इस पर सदन में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला और प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया है। इसके बाद 1966 में सरदार हुकुम सिंह के खिलाफ समाजवादी नेता मधु लिमये ने पेश किया। इस पर चर्चा हुई और प्रस्ताव गिर गया। तीसरी बार 1987 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के खिलाफ वामपंथी नेता सोमनाथ चटर्जी ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इसको भी जरूरी बहुमत नहीं मिला और यह भी पारित नहीं हो सका। इसके बाद पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने की बात हुई थी, पर बाद में विपक्ष ने नोटिस देने का फैसला छोड़ दिया था। बिरला नहीं रहेंगे सदन में मौजूद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि जब तक उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का निपटारा नहीं हो जाता तब तक वे सदन में मौजूद नहीं रहेंगे।
अज्ञातवास का रहस्य: क्यों बने अर्जुन ‘बृहन्नला’, उर्वशी के श्राप ने कैसे बना दिया पांडवों के लिए वरदान

नई दिल्ली । भारतीय महाकाव्य महाभारत में अनेक ऐसे प्रसंग हैं जिनमें श्राप भी अंततः वरदान बनकर सामने आते हैं। ऐसा ही एक रहस्यमय प्रसंग उस समय का है जब पांडवों को अपने वनवास के अंतिम वर्ष में अज्ञातवास बिताना पड़ा। इस दौरान महान धनुर्धर अर्जुन ने बृहन्नला नाम से किन्नर का रूप धारण किया था। दिलचस्प बात यह है कि यह रूप उन्हें स्वर्गलोक में मिली एक घटना के कारण प्राप्त हुआ था जिसने आगे चलकर पांडवों की रक्षा में अहम भूमिका निभाई। कथा के अनुसार एक समय अर्जुन अपने दिव्य अस्त्र शस्त्रों की प्राप्ति के लिए स्वर्गलोक गए थे जहां उनके पिता इंद्र का निवास था। वहां अर्जुन की वीरता तेज और सौंदर्य से प्रभावित होकर प्रसिद्ध अप्सरा उर्वशी उन पर मोहित हो गईं। उन्होंने अर्जुन के सामने प्रेम प्रस्ताव रखा लेकिन अर्जुन ने अत्यंत विनम्रता के साथ उसे अस्वीकार कर दिया। अर्जुन ने कहा कि वह उर्वशी को माता के समान मानते हैं क्योंकि वह उनके पूर्वज पुरुरवा की पत्नी रह चुकी थीं। इस कारण वह उन्हें मातृभाव से देखते हैं। अर्जुन की यह बात सुनकर उर्वशी को गहरा अपमान महसूस हुआ। क्रोधित होकर उन्होंने अर्जुन को श्राप दे दिया कि वह नपुंसक यानी किन्नर बन जाएंगे। यह श्राप सुनकर अर्जुन व्यथित हो गए और उन्होंने अपनी पीड़ा इंद्रदेव को बताई। तब इंद्रदेव ने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा कि यह श्राप स्थायी नहीं रहेगा बल्कि केवल एक वर्ष के लिए प्रभावी होगा। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में यही श्राप उनके लिए उपयोगी सिद्ध होगा। समय बीता और वह अवसर भी आ गया जब पांडवों को 12 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना था। अज्ञातवास के दौरान यदि उनकी पहचान उजागर हो जाती तो उन्हें फिर से वनवास भुगतना पड़ता। ऐसे में अर्जुन के लिए उर्वशी का श्राप वास्तव में वरदान बन गया। उन्होंने बृहन्नला नाम से किन्नर का रूप धारण किया और विराट नगरी में रहने लगे। इस दौरान अर्जुन ने राजा विराट की पुत्री उत्तरा को नृत्य और संगीत की शिक्षा देने का कार्य किया। बृहन्नला के रूप में अर्जुन ने न केवल अपनी पहचान छिपाए रखी बल्कि पांडवों के अज्ञातवास को सफलतापूर्वक पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अज्ञातवास के समय अन्य पांडवों ने भी अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग अलग रूप धारण किए थे। युधिष्ठिर कंक नाम से राजसभा में सलाहकार बने भीम बल्लव नाम से रसोइया बने नकुल अस्तबल की देखभाल करने लगे और सहदेव गायों की सेवा में लग गए। वहीं द्रौपदी सैरंध्री बनकर रानी सुदेष्णा की दासी के रूप में केश सजाने का कार्य करने लगीं। इस प्रकार उर्वशी का दिया हुआ श्राप अंततः पांडवों के लिए वरदान साबित हुआ और अर्जुन के बृहन्नला रूप ने महाभारत की कथा में एक अनोखा और प्रेरणादायक अध्याय जोड़ दिया।
प्राचीन ठंडक रहस्य: गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के 5 देसी तरीके…

नई दिल्ली: गर्मियों का मौसम आते ही शरीर को ठंडा रखना हर किसी के लिए चुनौती बन जाता है। शहरों में लोग अक्सर फ्रिज का ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक और एयर कंडीशनर का सहारा लेते हैं। ये तुरंत राहत तो देते हैं और गर्मी में थोड़ी राहत महसूस कराते हैं, लेकिन लंबे समय में स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक असर भी पड़ सकता है। अगर हम गांवों की जीवनशैली देखें तो पता चलता है कि वहां लोग सदियों से प्राकृतिक और देसी तरीकों से गर्मी से राहत पाते आए हैं। इन तरीकों में न तो बिजली की जरूरत होती है और न ही महंगे उपकरण। फिर भी ये शरीर को अंदर से ठंडा रखने में बेहद असरदार हैं। हमारे पारंपरिक खान-पान और घरेलू नुस्खों में कई चीजें शामिल हैं जो शरीर का तापमान संतुलित रखने में मदद करती हैं। यही कारण है कि गांवों में लोग तेज गर्मी के बावजूद ज्यादा हेल्दी और एनर्जेटिक रहते हैं। आइए जानते हैं पांच ऐसी देसी चीजों के बारे में जो गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए आज भी अपनाई जाती हैं। 1. मटके का पानी गांवों में ज्यादातर घरों में मिट्टी के मटके में पानी रखा जाता है। मटके का पानी फ्रिज के पानी जितना ठंडा नहीं होता लेकिन धीरे-धीरे शरीर को ठंडक पहुंचाता है। मिट्टी के बर्तन में छोटे-छोटे छिद्र पानी को धीरे-धीरे ठंडा करते हैं। यह पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है और पाचन के लिए भी लाभकारी होता है। 2. सत्तू का शरबत भुने हुए चने से बनने वाला सत्तू का शरबत बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में गर्मियों में बहुत लोकप्रिय है। इसे देसी एनर्जी ड्रिंक भी कहा जाता है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, लंबे समय तक पेट भरा रखता है और लू से बचाव में मदद करता है। 3. बेल का शरबत बेल का फल गर्मियों में बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसका शरबत शरीर को अंदर से ठंडा करता है और पाचन में सुधार लाता है। आयुर्वेद में भी इसे गर्मी से राहत और पाचन के लिए उपयोगी बताया गया है। 4. छाछ (मट्ठा) दही से बनी छाछ गर्मियों में शरीर को हल्का और ठंडा रखने में मदद करती है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक तत्व पाचन को मजबूत बनाते हैं और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। छाछ पीने से गर्मी में हल्का महसूस होता है और ऊर्जा बनी रहती है। 5. खस का शरबत खस की जड़ से तैयार शरबत भी गर्मियों में ठंडक देने के लिए काफी प्रभावी है। खस की तासीर ठंडी मानी जाती है और यह शरीर को ठंडक देने के साथ गर्मी से होने वाली थकान को भी कम करता है। इसका सेवन शरीर को तरोताजा महसूस कराता है और लंबे समय तक ठंडक बनाए रखता है। आज के समय में लोग गर्मी से बचने के लिए फ्रिज के ठंडे पानी और कोल्ड ड्रिंक्स पर निर्भर हो जाते हैं। लेकिन हमारे पारंपरिक देसी तरीके आज भी उतने ही असरदार हैं जितने पहले थे और शरीर को अंदर से ठंडा बनाए रखने में मदद करते हैं। गर्मी में स्वास्थ्य और ऊर्जा बनाए रखने के लिए इन प्राकृतिक उपायों को अपनाना सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।
ASHOKNAGAR FAIR: करीला मेले में आस्था का महासागर: 20 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, 700 नृत्यांगनाओं का रातभर राई नृत्य

HIGHLIGHTS: रंगपंचमी पर करीला धाम में 20 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं की भीड़ 700 से अधिक नृत्यांगनाओं ने पूरी रात किया पारंपरिक राई नृत्य सीएम मोहन यादव ने 115 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण दीपनाखेड़ा से करीला तक 10 किमी नई सड़क बनाने की घोषणा पानी और प्रसाद व्यवस्था को लेकर श्रद्धालुओं ने जताई नाराजगी ASHOKNAGAR FAIR: अशोकनगर। रंगपंचमी के अवसर पर मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध करीला धाम में आस्था का विशाल सैलाब उमड़ पड़ा। 24 घंटों के भीतर करीब 20 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने माता जानकी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के कारण पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्सव जैसा माहौल बना रहा। RBI ने जारी किया ‘कस्टमर लायबिलिटी फ्रेमवर्क’, डिजिटल भुगतान सुरक्षित बनाने बड़ा कदम सीएम ने किया 115 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण करीला मेले के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी धाम पहुंचे। इस दौरान उन्होंने करीब 115 करोड़ रुपए की लागत से होने वाले विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इनमें सीएम राइज स्कूल, पानी की टंकी और सड़कों के निर्माण जैसे कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसके साथ ही दीपनाखेड़ा से करीला तक करीब 10 किलोमीटर लंबी नई सड़क बनाने की भी घोषणा की गई। दही: ब्लड प्रेशर कम करने और इम्यूनिटी बढ़ाने वाला सुपरफूड, जानें 12 हेल्थ बेनिफिट्स और सावधानियां राई नृत्य ने बढ़ाई मेले की रौनक करीला मेले की सबसे खास पहचान पारंपरिक राई नृत्य है। इस बार भी मेले की रात 700 से अधिक नृत्यांगनाओं ने पूरी रात राई नृत्य प्रस्तुत किया। ढोल-नगाड़ों की धुन पर हुए इस लोकनृत्य ने श्रद्धालुओं और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और मेले की रौनक कई गुना बढ़ा दी। सुबह खाली पेट पानी पीना: सेहत के लिए ‘साइलेंट हीलर’, जानें 11 फायदे और सही तरीका व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवाल हालांकि मेले के दौरान कुछ व्यवस्थाओं को लेकर श्रद्धालुओं ने नाराजगी भी जताई। करोड़ों रुपए की लागत से बनी पानी की टंकी के लोकार्पण के बावजूद कई श्रद्धालु पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। वहीं मंदिर परिसर में कुछ वॉलिंटियर्स द्वारा श्रद्धालुओं के प्रसाद को उचित स्थान पर रखने के बजाय किनारे फेंकने की शिकायतें भी सामने आईं। US-Iran युद्ध की आग में सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के, शेयर बाजार में हाहाकार सुरक्षा के कड़े इंतजाम मेले में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। करीब 1700 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे और पूरे मेले क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही थी, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
RBI Customer Liability: RBI ने जारी किया ‘कस्टमर लायबिलिटी फ्रेमवर्क’, डिजिटल भुगतान सुरक्षित बनाने बड़ा कदम
RBI Customer Liability: नई दिल्ली में डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ग्राहकों को सुरक्षा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क पेश किया है। इस प्रस्तावित नियम के तहत यदि किसी ग्राहक के साथ डिजिटल ट्रांजैक्शन के दौरान धोखाधड़ी होती है और वह इसे समय पर बैंक या संबंधित संस्था को सूचित करता है, तो उसे अधिकतम 25,000 रुपये तक मुआवजा मिल सकता है। आरबीआई ने इसे कस्टमर लायबिलिटी इन डिजिटल ट्रांजैक्शंस नाम से जारी किया है। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल भुगतान में होने वाली धोखाधड़ी से ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाना और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को तेज करना है। केंद्रीय बैंक ने इस मसौदे पर आम जनता, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से 6 अप्रैल 2026 तक सुझाव मांगे हैं। केजरीवाल सिसोदिया की फिर बढ़ी मुश्किलें, तुषार मेहता की दलीलों से दिल्ली शराब नीति केस में आया नया मोड़ ड्राफ्ट के अनुसार यदि किसी ग्राहक के साथ 50,000 रुपये तक का डिजिटल फ्रॉड होता है और वह तुरंत इसकी सूचना देता है, तो उसे नुकसान की राशि का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25,000 रुपये (जो भी कम हो) वापस मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर 10,000 रुपये के फ्रॉड पर लगभग 8,500 रुपये और 40,000 रुपये के फ्रॉड पर अधिकतम सीमा के कारण 25,000 रुपये वापस मिलेंगे। आरबीआई का मानना है कि इस व्यवस्था से ग्राहकों का भरोसा डिजिटल भुगतान प्रणाली पर बढ़ेगा। ड्राफ्ट का प्रस्ताव है कि मुआवजा व्यवस्था लागू होने के एक वर्ष तक प्रभावी रहे और इसके बाद अनुभव और प्रतिक्रिया के आधार पर समीक्षा की जाए। केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा नियम 2017 में जारी किए गए थे। तब से डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल पेमेंट और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के तरीके काफी बदल चुके हैं। साथ ही साइबर अपराध और इलेक्ट्रॉनिक फ्रॉड के नए प्रकार तेजी से बढ़े हैं। पुराने नियमों को अपडेट करने की जरूरत इसलिए महसूस की गई। मध्यप्रदेश ने जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 को दी अंतिम रूप, अमृत मित्र संभालेंगे जल संरक्षण की कमान ड्राफ्ट फ्रेमवर्क का एक अहम उद्देश्य यह भी है कि शिकायतों के निपटारे में लगने वाले समय को कम किया जाए। कई मामलों में ग्राहकों को धोखाधड़ी के बाद अपनी राशि वापस पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। नए नियम लागू होने के बाद बैंकों और वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही बढ़ेगी और शिकायत निपटान तेजी से होगा। आरबीआई ने मसौदा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किया है। बैंक, एनबीएफसी और आम नागरिक ईमेल के माध्यम से सुझाव भेज सकते हैं। सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे। यह कदम देश के डिजिटल भुगतान तंत्र को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दही: ब्लड प्रेशर कम करने और इम्यूनिटी बढ़ाने वाला सुपरफूड, जानें 12 हेल्थ बेनिफिट्स और सावधानियां

नई दिल्ली । दही सेहत का खजाना है। इसमें प्रोटीन गुड फैट शुगर और प्रोबायोटिक्स की भरपूर मात्रा होती है जो न सिर्फ स्वादिष्ट है बल्कि गट हेल्थ इम्यूनिटी और मेटाबॉलिज्म को भी रीसेट करता है। इतना ही नहीं यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मददगार है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित स्टडी बताती है कि नियमित दही खाने से हाई ब्लड प्रेशर का रिस्क 16–20% तक कम हो सकता है। हफ्ते में पांच या उससे अधिक बार संतुलित डाइट के साथ दही खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। डॉ. संचयन रॉय सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल दिल्ली के अनुसार दही में मौजूद जिंक सेलेनियम और विटामिन D संक्रमण पैदा करने वाले वायरस और बैक्टीरिया के खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करते हैं। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर में इंफ्लेमेशन कम होता है। नियमित सेवन से सर्दी-जुकाम से लेकर गंभीर बीमारियों का रिस्क घटता है। हार्ट हेल्थ के लिए भी दही बेहद फायदेमंद है। इसमें पोटेशियम और मैग्नीशियम मौजूद हैं जो शरीर से एक्स्ट्रा सोडियम को बाहर निकालकर ब्लड प्रेशर को संतुलित रखते हैं। प्रोबायोटिक्स बैड कोलेस्ट्रॉल LDLको कम करने और इंफ्लेमेशन घटाने में मदद करते हैं। इन गुणों के कारण दही हार्ट डिजीज का रिस्क कम कर सकता है। ब्लड प्रेशर कंट्रोल में दही कैसे मदद करता है? इसमें मौजूद बायोएक्टिव पेप्टाइड्स ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले एंजाइम्स की एक्टिविटी को कम करते हैं और ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करते हैं। इससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है और दबाव संतुलित रहता है। विशेष रूप से मिड एज महिलाओं और अधिक BMI वाले लोगों के लिए दही ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। दही के नियमित सेवन से पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। प्रोबायोटिक्स गट माइक्रोबायोम का संतुलन बनाए रखते हैं बैड बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकते हैं और IBS कब्ज या ब्लोटिंग जैसी समस्याओं में राहत देते हैं। स्वस्थ गट माइक्रोबायोम मूड और ब्रेन फंक्शनिंग को भी प्रभावित करता है। दही खाने का सही समय दोपहर का माना जाता है क्योंकि इस समय पाचन क्षमता सबसे मजबूत होती है। खाली पेट दही खाने से पेट में एसिड बढ़ सकता है इसलिए इसे हमेशा मेन कोर्स के साथ साइड डिश के रूप में लें। मीठा या फ्लेवर्ड दही एक्स्ट्रा शुगर और प्रिजर्वेटिव्स के कारण नुकसानदेह हो सकता है। साथ ही दही स्किन और बालों के लिए भी लाभकारी है। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड और प्रोटीन स्किन की रंगत सुधारते हैं मॉइश्चर बनाए रखते हैं और बालों की जड़ें मजबूत करते हैं।हालांकि कुछ लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। आर्थराइटिस अस्थमा किडनी डिजीज लैक्टोज इनटॉलेरेंस या गंभीर एसिडिटी वाले लोगों को दही सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए। दही खाने से ब्लड प्रेशर कम होता है इम्यूनिटी मजबूत होती है और यह शरीर को कई तरह की लाइफस्टाइल डिजीज से बचाने में मदद करता है। इसे अपनी डाइट में शामिल करना एक छोटी लेकिन असरदार हेल्थ हैबिट है।
सुबह खाली पेट पानी पीना: सेहत के लिए ‘साइलेंट हीलर’, जानें 11 फायदे और सही तरीका

नई दिल्ली । हम अक्सर सुनते हैं कि सुबह खाली पेट पानी पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। हेल्थ एक्सपर्ट इसे साइलेंट हीलर कहते हैं क्योंकि यह छोटी लेकिन असरदार आदत हमारे शरीर को रीस्टार्ट का संदेश देती है। इंग्लैंड की लॉफबोरो यूनिवर्सिटी की स्टडी बताती है कि सुबह उठने के 30 मिनट के अंदर आधा लीटर पानी पीने से ब्रेन की फंक्शनिंग में सुधार आता है। डॉ. रोहित शर्मा कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल जयपुर बताते हैं कि सोते समय शरीर रिकवरी और रिपेयर मोड में चला जाता है। मेटाबॉलिज्म और ऑर्गन्स स्लो हो जाते हैं। ऐसे में सुबह पानी पीना शरीर को धीरे धीरे इस मोड से बाहर निकालता है। मूड संतुलित रहता है फोकस और याददाश्त बढ़ती है और सोचने समझने की क्षमता बेहतर होती है। डाइजेशन पर इसका असर भी महत्वपूर्ण है। खाली पेट पानी पेट में पहुंचकर पाचन तंत्र को सक्रिय करता है पेट और आंतों की मांसपेशियां मूवमेंट शुरू करती हैं। गैस्ट्रिक जूस और एंजाइम्स रिलीज होने से खाना पचाने की क्षमता बढ़ती है। कब्ज एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं कम होती हैं। सुबह पानी पीने से कई लाइफस्टाइल डिजीज का जोखिम घट सकता है। हाइड्रेटेड रहने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और टॉक्सिन्स जमा नहीं होते। किडनी स्टोन यूरिन इन्फेक्शन हाई ब्लड प्रेशर और कब्ज जैसी बीमारियों के खतरे कम होते हैं। वजन कम करने में भी यह मददगार है। पानी मेटाबॉलिज्म को 20–30% तक एक्टिव करता है और कैलोरी बर्न में सहायक होता है। पेट थोड़ा भरा महसूस होने से नाश्ते में ओवरईटिंग कम होती है। हालांकि सिर्फ पानी पीने से वजन कम नहीं होता इसे हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ अपनाना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर दिखता है। डिहाइड्रेशन से थकान चिड़चिड़ापन और फोकस की कमी हो सकती है। सुबह पानी पीने से ब्रेन को पर्याप्त ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई मिलती है जिससे स्ट्रेस हॉर्मोन बैलेंस होते हैं और दिन की शुरुआत क्लियर और शांत होती है। एनर्जी लेवल और मूड पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। रात भर डिहाइड्रेटेड रहने से शरीर सुस्त रहता है। पानी पीते ही सेल्स सक्रिय हो जाती हैं थकान कम होती है और सिर भारी लगने की समस्या घटती है। यही कारण है कि हेल्थ एक्सपर्ट चाय कॉफी से पहले पानी पीने की सलाह देते हैं। डॉ. शर्मा के मुताबिक गुनगुना या नॉर्मल टेम्परेचर का पानी सुबह के लिए सबसे सही है। ठंडा पानी डाइजेशन धीमा कर सकता है। आमतौर पर 1–2 गिलास 250–500 ml पानी पर्याप्त होता है लेकिन मौसम और हेल्थ कंडीशन के हिसाब से मात्रा बदल सकती है। कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। किडनी या हार्ट की समस्या लो ब्लड प्रेशर गंभीर गैस्ट्रिक इश्यू वाले लोग थोड़ी सतर्कता बरतें। सुबह खाली पेट पानी पीना एक छोटी लेकिन असरदार आदत है जो डाइजेशन मेटाबॉलिज्म मेंटल हेल्थ और ओवरऑल वेलबीइंग को बेहतर बनाती है।
US-Iran युद्ध की आग में सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के, शेयर बाजार में हाहाकार

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार पर सोमवार को अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर देखने को मिला। सेंसेक्स 2,366 अंक टूटकर 76,552 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 717 अंकों की गिरावट के साथ 23,732 पर आ गया। सभी प्रमुख स्टॉक्स लाल निशान में रहे। इंडिगो 7% से अधिक लुढ़ककर शीर्ष नुकसान में रहा। इसके अलावा टाटा स्टील 5.59%, मारुति 5.40% और इटरनल 5.19% टूटकर बंद हुए। शुरुआती कारोबार में भारी गिरावटसुबह के कारोबार में भी बाजार में दबाव साफ दिखा। बीएसई सेंसेक्स 1,862 अंक की गिरावट के साथ 77,056 पर खुला, जबकि निफ्टी 582 अंक नीचे 23,868 पर आया। NSE पर केवल 249 शेयर ही हरे निशान में थे, जबकि 403 स्टॉक्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए। निफ्टी फ्यूचर्स पिछले बंद भाव से करीब 722 अंकों की गिरावट के साथ 23,824 के आसपास ट्रेड कर रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी-ईरान संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू बाजार में भारी बिकवाली हुई। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जिससे वैश्विक निवेशक भी सतर्क हो गए। एशियाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाहाकारसोमवार को एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव देखा गया। जापान का निक्की 225 सूचकांक 6.22% गिरकर 53,000 के स्तर से नीचे चला गया, जबकि टॉपिक्स 5.27% टूट गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स पिछले सप्ताह 11% गिरने के बाद सोमवार को 8% से अधिक लुढ़का, जिसमें सैमसंग और SK हाइनिक्स जैसी कंपनियां सबसे अधिक प्रभावित रहीं। गिरावट के चलते सर्किट ब्रेकर चालू किए गए और ट्रेडिंग 20 मिनट के लिए रोक दी गई। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी तेज गिरावट के साथ खुला। वॉल स्ट्रीट में भी दबाव रहा। डॉउ जोन्स फ्यूचर्स में 950 अंक तक की गिरावट आई, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 100 अंक से अधिक लुढ़के और नैस्डैक फ्यूचर्स में 400 अंकों की गिरावट दर्ज हुई। कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछालअमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच हुर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरे और खाड़ी के तेल उत्पादकों द्वारा उत्पादन में कटौती के कारण कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड ऑयल 18.03% बढ़कर 109.40 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड फ्यूचर्स 20.23% उछलकर 109.29 डॉलर पर पहुंच गए। यह दोनों स्तर रूस के 2022 में यूक्रेन पर हमले के शुरुआती महीनों के बाद नहीं देखे गए थे। कतर के ऊर्जा मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर युद्ध के कारण खाड़ी देशों का उत्पादन बाधित हुआ, तो कच्चे तेल की कीमत $150 तक पहुंच सकती है।
खरमास 2026: 15 मार्च से मांगलिक कार्यों पर विराम, अप्रैल-मई में विवाह के शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली । सनातन धर्म में ग्रहों की चाल और शुभ मुहूर्त का अत्यंत महत्व माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित गिरिधर गोपाल चौबे के अनुसार जब सूर्य देव बृहस्पति गुरु की राशि मीन में प्रवेश करते हैं तब खरमास का आरंभ होता है। साल 2026 में यह गोचर 14 मार्च की मध्य रात्रि को तड़के 3:07 बजे होगा और 15 मार्च से मीन संक्रांति के साथ ही खरमास शुरू हो जाएगा। खरमास की अवधि में विवाह गृह प्रवेश मुंडन और नए व्यापार जैसी मांगलिक गतिविधियों पर रोक रहती है। पंडित चौबे बताते हैं कि इस समय पूजा पाठ दान और तप अत्यंत शुभ और फलदायी माने जाते हैं। सूर्य जब गुरु की राशियों धनु या मीन में होते हैं तो उनका तेज और प्रभाव विवाह जैसे भौतिक सुखों वाले कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। विवाह के लिए शुक्र और गुरु ग्रह का उदय और शुभ स्थिति जरूरी है। गुरु को कन्या की कुंडली में पति का कारक और शुक्र को वर की कुंडली में पत्नी और दाम्पत्य सुख का प्रतीक माना जाता है। यदि ये ग्रह अस्त हों तो विवाह संपन्न नहीं किया जाता। इस वर्ष 28 फरवरी को शुक्र के मीन राशि में प्रवेश के बाद स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन आया है। विवाह के लिए शुभ नक्षत्र जैसे रोहिणी मृगशिरा और रेवती शुभ तिथि और अनुकूल लग्न का संयोग होना आवश्यक है। रविवार सोमवार बुधवार गुरुवार और शुक्रवार को विशेष रूप से विवाह के लिए अनुकूल दिन माने जाते हैं। खरमास की समाप्ति 14 अप्रैल 2026 को होगी जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर मेष संक्रांति मनाएंगे। इसके तुरंत बाद विवाह जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुरू किए जा सकते हैं। मिथिला पंचांग के अनुसार अप्रैल में 17 20 26 और 30 तारीखें और बनारसी पंचांग के अनुसार 15 16 20 21 25–30 अप्रैल की तिथियां विवाह के लिए अति शुभ हैं। मई माह में मिथिला पंचांग के अनुसार 1 6 8 10 और 13 मई और बनारसी पंचांग के अनुसार 1–8 12 और 13 मई को विवाह के विशेष योग बन रहे हैं। ग्रीष्मकाल में भी शुभ संयोग मिलते हैं। जून में 19 24–26 28 और 29 जून और जुलाई में 1 2 3 6 9 12 मिथिला पंचांग और 1 2 6–8 11 12 बनारसी पंचांग को विवाह के लिए अनुकूल मुहूर्त हैं। इसके बाद देवशयनी एकादशी के आसपास से पुनः मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। पंडित चौबे कहते हैं कि जातकों को अपनी कुंडली के अनुसार स्थानीय विद्वान से सलाह लेकर ही लग्न तय करना चाहिए ताकि ग्रहों का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त हो। इस प्रकार 15 मार्च से 14 अप्रैल 2026 तक खरमास रहेगा और इसके बाद अप्रैल मई के बीच विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए कई श्रेष्ठ मुहूर्त उपलब्ध हैं।