गोंदिया रेलवे ट्रैक अपग्रेड: 5 से 24 अप्रैल तक 3 जोड़ी ट्रेनें रद्द, यात्रियों को अलर्ट

नई दिल्ली। गोंदिया, नागपुर मंडल – दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने गोंदिया स्टेशन पर प्लेटफॉर्म 3 के वॉशेबल एप्रन को हटाकर बैलेस्टेड ट्रैक में बदलने के लिए बड़े अपग्रेडेशन का काम शुरू किया है। इसके चलते 5 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक लाइन नंबर 05 (अप मेनलाइन) पर 20 दिन का ट्रैफिक ब्लॉक लिया गया है। रेलवे ने यात्रियों से कहा है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति जरूर चेक करें। प्रभावित ट्रेनें और तारीखेंकोरबा–अमृतसर एक्सप्रेस (18237) – कोरबा से 5 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक रद्द। अमृतसर–बिलासपुर एक्सप्रेस (18238) – अमृतसर से 7 अप्रैल से 27 अप्रैल 2026 तक रद्द। हजरत निजामुद्दीन–रायगढ़ एक्सप्रेस (12410) – निजामुद्दीन से 2, 4, 6, 7, 8, 9, 11, 13, 14, 15, 16, 18, 20, 21, 22 अप्रैल को रद्द। रायगढ़–हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस (12409) – रायगढ़ से 4, 6, 8, 9, 10, 11, 13, 15, 16, 17, 18, 20, 22, 23, 24 अप्रैल को रद्द। विशाखापत्तनम–हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस (12807) – विशाखापत्तनम से 5, 7, 8, 9, 11, 12, 14, 15, 16, 18, 19, 21, 22, 23 अप्रैल को रद्द। हजरत निजामुद्दीन–विशाखापत्तनम एक्सप्रेस (12808) – 7, 9, 10, 11, 13, 14, 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24, 25 अप्रैल को रद्द। क्या है अपग्रेड का काम?रेलवे के अनुसार, गोंदिया स्टेशन पर प्लेटफॉर्म 3 के वॉशेबल एप्रन को हटाकर उसे बैलेस्टेड ट्रैक में बदला जा रहा है। यह कदम ट्रेन संचालन को और सुरक्षित और तेज बनाने के लिए लिया गया है। अपग्रेड के दौरान ट्रैक ब्लॉक होने के कारण कई लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनें अलग-अलग तिथियों पर रद्द रहेंगी। यात्रियों के लिए जरूरी सूचनारेलवे ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि में ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा, इसलिए यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले ट्रेन की स्थिति ऑनलाइन या स्टेशन पर चेक करें। विशेषकर कोरबा, अमृतसर, रायगढ़ और विशाखापत्तनम जाने वाले यात्री अपनी योजना में बदलाव कर लें। यह अपग्रेडेशन रेलवे की सुरक्षा और सुविधा के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे आने वाले समय में यात्रियों को बेहतर और निर्बाध सेवा मिलेगी। कीवर्ड: गोंदिया, रेलवे ट्रैक अपग्रेड, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, प्लेटफॉर्म 3, बैलेस्टेड ट्रैक, ट्रैफिक ब्लॉक, कोरबा-अमृतसर एक्सप्रेस, अमृतसर-बिलासपुर एक्सप्रेस, हजरत निजामुद्दीन-रायगढ़ एक्सप्रेस, विशाखापत्तनम एक्सप्रेस, ट्रेन रद्द, अप्रैल 2026
Madhya Pradesh Cabinet decision: मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 33,240 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी, मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स प्रोग्राम शुरू होगा

Madhya Pradesh Cabinet decision: भोपाल। मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के विकास और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मंत्रि परिषद ने विभिन्न विभागों की योजनाओं को आगामी पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए करीब 33 हजार 240 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। बैठक में युवाओं को प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम को मंजूरी दी गई। इस योजना के तीन वर्ष के क्रियान्वयन के लिए लगभग 190 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कार्यक्रम के तहत युवाओं को शासन प्रशासन की कार्यप्रणाली से जोड़कर नीति निर्माण और सुशासन की प्रक्रियाओं में भागीदारी का अवसर दिया जाएगा। कैबिनेट ने मध्यप्रदेश वृत्तिकर अधिनियम 1995 के तहत दिव्यांगजनों को वृत्तिकर से दी जा रही छूट को 31 मार्च 2030 तक जारी रखने का भी निर्णय लिया। इससे प्रदेश के हजारों दिव्यांग नागरिकों को आर्थिक राहत मिलती रहेगी। प्रदेश में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक जिला एक उत्पाद परियोजना के तहत सात जिलों को शामिल करने का निर्णय लिया गया। इसमें सीधी में दरी कारपेट दतिया में गुड़ अशोकनगर में चंदेरी हाथकरघा वस्त्र भोपाल में जरी जरदोजी और जूट उत्पाद धार में बाग प्रिंट सीहोर में लकड़ी के खिलौने तथा उज्जैन में बटिक प्रिंट को बढ़ावा दिया जाएगा। इस परियोजना के लिए आगामी पांच वर्षों में 37.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे जिससे स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को प्रशिक्षण ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सिंगरौली जिले के चितरंगी में व्यवहार न्यायालय स्थापित करने की स्वीकृति दी गई है। इसके तहत कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित कुल सात नए पदों का सृजन किया जाएगा। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए मैहर कैमोर कटनी और निमरानी खरगोन में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के तीन नए औषधालय खोलने का निर्णय लिया गया है। इन औषधालयों के लिए चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ के 51 पद स्वीकृत किए गए हैं। इससे लगभग 15 686 पंजीकृत श्रमिकों और उनके करीब 62 744 आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। कैबिनेट ने ग्रामीण और खनिज क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए भी बड़ा फैसला लिया। खनिज अधिभार निधि के तहत ग्रामीण अवसंरचना पेयजल आपूर्ति और सड़क विकास कार्यों के लिए 6 090 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। इसके अलावा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए 7 127 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की 10 योजनाओं के लिए 2 064 करोड़ रुपये जनजातीय कार्य विभाग की योजनाओं के लिए 1 645 करोड़ रुपये और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के लिए 3 773 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई विभाग की निवेश संवर्धन और स्टार्ट अप नीति के क्रियान्वयन हेतु 11 361 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। इन फैसलों को प्रदेश के आर्थिक विकास रोजगार सृजन और सामाजिक कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भोपाल में कमर्शियल गैस संकट: 2000 होटल-रेस्टोरेंट प्रभावित, घरेलू सिलेंडर अब 25 दिन में एक बार ही बुक होंगे

भोपाल। मध्य प्रदेश में ईरान-इजराइल युद्ध के असर के चलते एलपीजी सप्लाई संकट गहराने लगा है। मंगलवार को भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने तीनों तेल कंपनियों, फूड अफसर और गैस एजेंसियों के साथ मीटिंग बुलाई, जिसमें कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई रोकने के बाद शहर के 2000 से अधिक होटल और रेस्टोरेंट में संकट की गंभीर स्थिति सामने आई। जानकारी के अनुसार, सोमवार से ऑयल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडरों की डिलीवरी रोक दी है। इससे बड़े और छोटे होटल, रेस्टोरेंट और बार में भोजन बनाने और शादियों के आयोजन में परेशानी बढ़ गई है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स (बीसीसीआई) के अध्यक्ष गोविंद गोयल और मंत्री अजय देवनानी ने कलेक्टर से अपील की कि कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए, अन्यथा मार्च में होने वाली हजारों शादियों में खाना बनाने में दिक्कतें आएंगी। इधर, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग नियमों में बदलाव किया गया है। पहले 15 दिन में बुकिंग होती थी, अब एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही मिलेगा। इसके अलावा, बुकिंग केवल उसी रजिस्टर्ड नंबर पर ही OTP के जरिए हो पाएगी। मध्यप्रदेश में कुल सवा करोड़ से ज्यादा एलपीजी उपभोक्ता हैं। राजधानी भोपाल में प्रतिदिन लगभग 15 हजार सिलेंडर सप्लाई होते हैं, वहीं इंदौर में 25 हजार, जबलपुर में 20-25 हजार और ग्वालियर में 20 हजार सिलेंडर रोजाना वितरित किए जाते हैं। छोटे जिलों में भी 2 हजार सिलेंडर प्रतिदिन सप्लाई होते हैं। केंद्र सरकार ने गैस की सप्लाई और जमाखोरी रोकने के लिए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू किया है और एलपीजी को चार कैटेगरी में बांटा गया है: पूरी सप्लाई: घरेलू रसोई गैस (PNG) और CNG। खाद कारखाने: फैक्ट्रियों को 70% गैस उपलब्ध। बड़े उद्योग: आवश्यकतानुसार लगभग 80% गैस। छोटे बिजनेस और होटल: पुरानी खपत के हिसाब से 80% गैस। सरकार ने संकट से निपटने के लिए पांच अहम कदम उठाए हैं: हाई-लेवल कमेटी गठन, आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू, घरेलू सिलेंडर बुकिंग में बदलाव, OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य, तथा एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश। सप्लाई संकट के दो प्रमुख कारण हैं: पहला, फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाले 167 किलोमीटर लंबे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना, जिससे भारत की 50% कच्चा तेल और 54% LNG सप्लाई प्रभावित हुई। दूसरा, कतर के LNG प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद उत्पादन रोक दिया गया। भारत अपनी कुल LNG जरूरत का करीब 40% कतर से आयात करता है। इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (LPG) के.एम. ठाकुर ने उपभोक्ताओं को पैनिक बुकिंग से बचने की सलाह दी और बताया कि सरकार वैकल्पिक सप्लाई विकल्प तलाश रही है। वहीं, G7 देश और रूस-अल्जीरिया से अतिरिक्त कच्चा तेल आने की उम्मीद है। साथ ही सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी की है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर अब ₹913 में मिलेगा, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम ₹1883 हो गए हैं। मध्यप्रदेश के होटल-रेस्टोरेंट संचालक और छोटे व्यवसायों में तनाव बढ़ गया है, क्योंकि कमर्शियल गैस की सप्लाई रोकने से खाना बनाने और व्यापार चलाने में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं। सरकार की हाई-लेवल कमेटी और आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू होने के बाद ही हालात में सुधार की उम्मीद है।
BHIND CAR ACCIDENT: भिंड में NH-719 पर भीषण टक्कर: लग्जरी कार का एयरबैग बचा चालक की जान, सभी यात्री सुरक्षित

BHIND CAR ACCIDENT: भिंड ।भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे 719 पर मंगलवार दोपहर को एक जोरदार सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक लग्जरी कार और यात्री बस आमने-सामने टकरा गए। हादसे के वक्त कार का एयरबैग खुलने से चालक की जान बच गई, जबकि सभी यात्री सुरक्षित रहे। जानकारी के अनुसार, दुर्घटना दोपहर करीब पौने दो बजे हुई। ग्वालियर की ओर तेज रफ्तार से आ रही लग्जरी कार लगभग 70-80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रही थी। भिंड से ग्वालियर की ओर जा रही यात्री बस भी 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार में थी। ओवरटेक के प्रयास के दौरान दोनों वाहन आमने-सामने भिड़ गए। T20 WORLD CUP: टी20 वर्ल्ड कप के पीछे की कहानी, गंभीर बोले अगरकर ईमानदारी से काम कर रहे, अजीत ने रचा ‘चक्रव्यूह’ हादसे में कार का आगे का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। लेकिन एयरबैग खुलने के कारण चालक गंभीर चोटिल होने से बच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल कार सवार को बाहर निकाला और डायल 112 पर सूचना दी। मौके पर पहुंची फर्स्ट रिस्पॉन्स टीम (FRV) और पुलिस ने तुरंत दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को सड़क किनारे हटाकर यातायात सुचारू किया। सभी यात्री सुरक्षित थे और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हादसे के कारणों में तेज रफ्तार और ओवरटेक की कोशिश मुख्य वजह बताई जा रही है। अधिकारियों ने वाहन चालकों से हाईवे पर सतर्क रहने और नियमों का पालन करने की अपील की है। इस घटना ने एक बार फिर हाईवे पर गति नियंत्रण और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को उजागर किया है।
T20 WORLD CUP: टी20 वर्ल्ड कप के पीछे की कहानी, गंभीर बोले अगरकर ईमानदारी से काम कर रहे, अजीत ने रचा ‘चक्रव्यूह’

T20 WORLD CUP: नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर खिताब अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत के पीछे टीम के लिए रणनीति तैयार करने वाले मास्टरमाइंड अजीत अगरकर थे, जिनके कड़े और साहसिक फैसलों ने टीम इंडिया को विजेता बनाया। हेड कोच गौतम गंभीर ने इस मौके पर कहा, “अगरकर की काफी आलोचना होती रही, लेकिन वह अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं।” अगरकर के नेतृत्व में भारत ने पिछले तीन वर्षों में वनडे वर्ल्ड कप 2023, टी20 वर्ल्ड कप 2024, और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भी जीत हासिल की थी। सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में अगरकर की रणनीति अजीत अगरकर ने 2023 में सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष का पद संभाला। इस दौरान उन्होंने टीम की लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को मौके दिए, फिटनेस और फॉर्म को प्राथमिकता दी और टीम में संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ सीनियर खिलाड़ियों को बाहर किया। अगरकर के फैसलों में एक खास रणनीति यह थी कि भविष्य की पीढ़ी को मजबूत आधार मिल सके। उनके इस दृष्टिकोण का असर टी20 वर्ल्ड कप 2026 में साफ नजर आया, जब टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। कप्तान और कोच के बीच तालमेल टी20 वर्ल्ड कप में सूर्यकुमार यादव को कप्तान बनाया गया, जबकि हार्दिक पंड्या पर भी दांव खेला जा रहा था। अगरकर ने सूर्या पर भरोसा जताया और वह तीसरे भारतीय कप्तान बने जिन्होंने टी20 वर्ल्ड कप जीताया। सूर्यकुमार ने बताया कि हेड कोच गंभीर के साथ उनका तालमेल शानदार रहा, जिससे प्लेइंग इलेवन तैयार करना आसान हुआ। अगरकर की यह रणनीति टीम के भीतर सामंजस्य और विजेता मानसिकता बनाने में सफल रही। युवा सितारों को मिले मौके, टीम को मिले नायक टी20 वर्ल्ड कप में ईशान किशन को टीम में मौका दिया गया, जिन्होंने 9 मैचों में 317 रन बनाए और चौथे नंबर पर सर्वाधिक रन बनाने वालों की सूची में स्थान पाया। इसके अलावा संजू सैमसन, जो पिछले साल खासा प्रभावित नहीं कर सके थे, को अगरकर ने टीम में शामिल किया। संजू ने वेस्टइंडीज (97), इंग्लैंड (89) और न्यूजीलैंड (89) के खिलाफ शानदार पारियां खेली और 321 रन बनाकर ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ बने। पर्दे के पीछे का मास्टरमाइंड अजीत अगरकर ने पूरी टूर्नामेंट के दौरान पर्दे के पीछे टीम के लिए रणनीति बनाई और निर्णायक कदम उठाए। रोहित शर्मा के स्थान पर शुभमन गिल को वनडे टीम की कमान देना और युवा खिलाड़ियों को मौके देना उनके साहसिक फैसलों का हिस्सा था। अगरकर ने अपनी ईमानदारी और दूरदर्शिता से भारतीय क्रिकेट को नए बुलंदियों तक पहुंचाया।
Covid vaccine compensation: सुप्रीम कोर्ट ने कोविड वैक्सीन साइड इफेक्ट्स के लिए मुआवजा देने का दिया आदेश: नो-फॉल्ट पॉलिसी लागू, एक्सपर्ट पैनल की जरूरत नहीं

Covid vaccine compensation: नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कोविड वैक्सीनेशन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सरकार को निर्देश दिया कि वैक्सीनेशन से किसी भी व्यक्ति को हुए नुकसान के लिए मुआवजा दिया जाए। इसके लिए सरकार नो-फॉल्ट कम्पनसेशन पॉलिसी बनाए। नो-फॉल्ट कम्पनसेशन पॉलिसी का मतलब इस नीति के तहत अगर किसी व्यक्ति को वैक्सीन या दवा से नुकसान होता है, तो उसे मुआवजा मिल सकता है, चाहे इसमें किसी की गलती साबित हो या न हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साइड इफेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए मौजूदा सिस्टम ही जारी रहेगा, अलग से एक्सपर्ट पैनल बनाने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मुख्य बातें साइड इफेक्ट्स के आंकड़े सार्वजनिक होंगे – वैक्सीन से जुड़े मामलों का डेटा समय-समय पर पब्लिक डोमेन में उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार की गलती साबित नहीं होती – मुआवजा नीति लागू होने का मतलब यह नहीं कि सरकार या कोई अन्य अथॉरिटी अपनी गलती मान रही है। याचिकाएं और पृष्ठभूमि यह आदेश रचना गंगू और वेणुगोपालन गोविंदन द्वारा 2021 में दायर याचिकाओं पर आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटियों की मौत कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के कारण हुई थी। करुण्या गोविंदन मामला: जुलाई 2021 में कोवीशील्ड वैक्सीन लगने के महीने भर बाद करुण्या की मौत हुई। राष्ट्रीय समिति ने मामले की जांच की, लेकिन पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण वैक्सीन को सीधे मौत का कारण नहीं माना गया। 8 साल की रितिका मामला: मई 2021 में पहली डोज के 7 दिन बाद तेज बुखार और ब्रेन ब्लड क्लोटिंग के कारण मौत। परिवार ने RTI के जरिए पता लगाया कि मौत का कारण थ्रोम्बोसिस विथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम था। ICMR और NCDC की स्टडी जुलाई 2025 में ICMR और NCDC ने स्टडी जारी की, जिसमें बताया गया कि 18-45 साल के लोगों में अचानक मौतों का कोविड वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं है। स्टडी में यह भी कहा गया कि गंभीर साइड इफेक्ट के मामले बहुत दुर्लभ (rare) हैं। अन्य संभावित कारणों में जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल, पहले से मौजूद बीमारियां और कोविड के बाद के कॉम्प्लिकेशन शामिल हैं। भारत में विकसित कोविड वैक्सीन कोवैक्सिन – भारत बायोटेक ने ICMR के सहयोग से विकसित की। कोवीशील्ड – सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले से बनाई। सुप्रीम कोर्ट का संदेश सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वैक्सीनेशन सुरक्षित और जरूरी है, और सरकार की जिम्मेदारी है कि साइड इफेक्ट्स के लिए उचित मुआवजा नीति लागू करे। जनता को इससे घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नो-फॉल्ट नीति से प्रभावित लोगों को राहत मिलेगी।
Indian Foreign Ministry: मोजाम्बिक में भीषण बाढ़ के बाद भारत की मदद: राहत सामग्री, चावल और दवाइयों की बड़ी खेप भेजी

Indian Foreign Ministry: नई दिल्ली । पूर्वी अफ्रीका के देश मोज़ाम्बिक के मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। हजारों लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं और कई इलाकों में राहत और पुनर्वास कार्यों की तत्काल आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस कठिन समय में भारत ने मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाते हुए बड़े पैमाने पर राहत सामग्री और दवाइयों की खेप भेजी है। भारत के विदेश मंत्रालय भारत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से जानकारी दी कि मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान के तहत मोजाम्बिक को आवश्यक राहत सामग्री भेजी गई है। इस सहायता में 500 मीट्रिक टन चावल, अस्थायी आश्रय के लिए टेंट, हाइजीन किट और पुनर्वास कार्यों में उपयोग होने वाली कई जरूरी वस्तुएं शामिल हैं। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए करीब 10 मीट्रिक टन अतिरिक्त राहत सामग्री भी भेजी गई है। राहत अभियान के हिस्से के रूप में Indian Navy के एक जहाज के जरिए लगभग 3 मीट्रिक टन आवश्यक दवाइयां भी मोजाम्बिक पहुंचाई जा रही हैं, ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों से निपटने में स्थानीय प्रशासन को मदद मिल सके। भारत इससे पहले भी समुद्री मार्ग के जरिए लगभग 86 मीट्रिक टन जीवन रक्षक दवाइयां मोजाम्बिक भेज चुका है। इन दवाइयों का उद्देश्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और पीड़ित लोगों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद सबसे बड़ी चुनौतियों में खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल होती हैं। ऐसे में भारत द्वारा भेजी गई खाद्य सामग्री, स्वच्छता किट और दवाइयां राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। भारत ने अतीत में भी प्राकृतिक आपदाओं के समय कई मित्र देशों की मदद की है। हिंद महासागर क्षेत्र और अफ्रीकी देशों के साथ भारत के मजबूत कूटनीतिक और मानवीय संबंध रहे हैं। आपदा के समय दी जाने वाली यह सहायता इन संबंधों को और मजबूत करने का काम करती है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह मानवीय, चिकित्सीय और लॉजिस्टिक सहायता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पहल के माध्यम से भारत न केवल संकट के समय सहायता पहुंचा रहा है, बल्कि हिंद महासागर और अफ्रीका क्षेत्र में एक जिम्मेदार और भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को भी मजबूत कर रहा है।
उज्जैन में शीतला सप्तमी: मंदिरों में महिलाओं की भारी भीड़, ठंडे भोग से मांगी परिवार की सुख-समृद्धि

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में मंगलवार को शीतला सप्तमी पर श्रद्धालुओं ने मां शीतला का विधिपूर्वक पूजन किया। सुबह से ही शहर के प्रमुख शीतला माता मंदिरों और आसपास के मंदिरों में महिलाओं की भारी भीड़ नजर आई। महिलाएं अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए ठंडे भोग और ठंडाई अर्पित कर रही थीं। मंदिरों में भक्तिमय माहौलशहर के प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सुबह से महिलाएं दर्शन और पूजा के लिए पहुंच रही थीं। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना का क्रम लगातार चलता रहा, और भक्तिमय वातावरण में महिलाएं भक्ति भाव से माता के दर्शन में लीन रही। सात दिनों तक चलती है पूजा परंपराश्रद्धालु संतोष मालवीय ने बताया कि यह परंपरा सदियों पुरानी है। इसके अनुसार, एक दिन पहले भोजन तैयार किया जाता है और रात करीब एक बजे माता को भोग अर्पित किया जाता है। माता को ठंडा भोग अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और किसी प्रकार की परेशानी नहीं आती। मंदिरों में महिलाएं देर रात से ही पूजा के लिए जुटने लगती हैं और सात दिनों तक लगातार माता के दर्शन करती हैं। रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य की कामनाश्रद्धालु शिल्पा मित्तल ने बताया कि शीतला माता की पूजा विशेषकर चैत्र कृष्ण सप्तमी या अष्टमी को की जाती है। इस दिन घर में नया भोजन नहीं बनाया जाता, बल्कि पहले दिन तैयार पकवान जैसे मीठे चावल, दही और पूड़ी माता को अर्पित किए जाते हैं। इस पूजा से चेचक और अन्य चर्म रोगों से रक्षा होती है और आरोग्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि माता का आशीर्वाद घर में स्वास्थ्य और समृद्धि बनाए रखता है। बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचींपूजा के दौरान महिलाएं हर दिन सुबह मंदिर पहुंचकर माता को जल और भोग अर्पित करती हैं। छठे दिन विशेष भोजन लाकर सामूहिक पूजा की जाती है और सातवें दिन विधि-विधान से समापन पूजा होती है। वर्षों पुरानी इस परंपरा को उज्जैन की महिलाएं आज भी पूर्ण श्रद्धा और आस्था के साथ निभा रही हैं। इस अवसर पर महिलाएं अपने घर से ठंडाई और भोग तैयार कर मंदिर पहुंचीं और माता से परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना की। SEO/Keywordsशीतला सप्तमी उज्जैन, शीतला माता पूजा, उज्जैन मंदिर भक्ति, ठंडा भोग पूजा, महिलाओं की पूजा, स्वास्थ्य और समृद्धि, चेचक रोग मुक्ति, उज्जैन धार्मिक कार्यक्रम
जबलपुर में गुजराती मोहल्ले की झुग्गियों में भीषण आग: 50 सालों से बसे परिवारों की रोजी-रोटी राख, 6 दमकलों ने पाया काबू

जबलपुर । जबलपुर के अधारताल थाना क्षेत्र स्थित गुजराती मोहल्ले में मंगलवार तड़के लगभग सुबह 5 बजे भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैल गई कि कुछ ही मिनटों में 8 से 10 झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही नगर निगम की 6 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। रात के समय हुआ हादसा, लोग सो रहे थेप्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अधिकांश लोग उस समय झोपड़ियों में सो रहे थे। अचानक आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। लोग किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकले, लेकिन उनका सारा घरेलू सामान, पुराने कपड़े और लाखों रुपए का स्टॉक जलकर राख हो गया। पुराने कपड़े बेचकर करते थे गुजारागुजराती मोहल्ले में करीब 15 परिवार पिछले 50 सालों से अपने प्लॉट पर झुग्गियों में रह रहे हैं। ये परिवार पुराने कपड़े बेचकर अपना जीवन यापन करते हैं। आग इतनी भीषण थी कि सभी झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। 10 लाख रुपए से ज्यादा का नुकसानपीड़ित परिवारों ने बताया कि इस हादसे में उनका करीब 10 लाख रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। उनका जीवन, रोजी-रोटी और बच्चों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई। कविता गुजराती ने आंसू भरी आंखों से बताया, “रात के वक्त अचानक आग लगी, बच्चे चीखने लगे। हमारी जीवनभर की जमापूंजी और बच्चों का भविष्य सब खाक हो गया। तन में जो कपड़े पहने हैं, वही बचा है।” बुजुर्ग महिला शशि गुजराती ने कहा, “मेरे 25 साल के बेटे की मौत के बाद भी मैं भीख मांगकर गुजारा करती थी। पाई-पाई जोड़कर जो 15 हजार रुपए बचाए थे, वह भी आग में जल गए।” दमकलकर्मियों की कड़ी मशक्कतघटना की सूचना मिलते ही नगर निगम की फायर ब्रिगेड की 6 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने कई घंटों की मेहनत के बाद आग पर काबू पाया। आग बुझने के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली, हालांकि हादसे के दौरान पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। राहत और आगे की तैयारीप्रशासन ने प्रभावित परिवारों के लिए आवश्यक राहत उपायों की योजना बनाने की बात कही है। आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।
CIBIL score repair: बाजार की पाठशाला: सिबिल स्कोर खराब होने पर लोन में हो रही दिक्कत? जानें आसान उपाय

CIBIL score repair: नई दिल्ली। सिबिल (CIBIL) स्कोर एक तीन अंकों का नंबर होता है, जो 300 से 900 के बीच रहता है। यह बताता है कि आपने अपने पिछले लोन और क्रेडिट कार्ड बिलों का भुगतान कितनी जिम्मेदारी से किया। आम तौर पर: 750 से 900 -उत्कृष्ट, लोन आसानी से मिलता है 650 से 750 -अच्छा, मामूली परेशानी हो सकती है 300 से 600 – खराब, लोन मुश्किल खराब स्कोर होने पर लोन मिलने में दिक्कत, ज्यादा ब्याज और कम क्रेडिट लिमिट जैसी समस्याएं आती हैं। होम लोन, कार लोन या प्रीमियम क्रेडिट कार्ड मिलना भी मुश्किल हो सकता है। स्कोर सुधारने के आसान तरीके 1. समय पर भुगतान करें सबसे महत्वपूर्ण है ईएमआई और क्रेडिट कार्ड बिल का समय पर भुगतान। एक दिन की देरी भी स्कोर को नुकसान पहुंचा सकती है। ऑटो-पे सुविधा सेट करना सबसे सुरक्षित तरीका है। 2. क्रेडिट उपयोग अनुपात (CUR) कम रखें कुल क्रेडिट सीमा का 30% से अधिक उपयोग न करें। उदाहरण: क्रेडिट लिमिट 1 लाख है, तो 30 हजार से ज्यादा खर्च न करें। 3. बार-बार आवेदन न करें हर नए लोन या क्रेडिट कार्ड आवेदन पर बैंक आपकी रिपोर्ट चेक करता है (हार्ड इन्क्वायरी) और इससे स्कोर कम हो सकता है। 4. पुराने अकाउंट बंद न करें पुराना क्रेडिट इतिहास आपके स्कोर को बेहतर बनाता है। पुराने क्रेडिट कार्ड या लोन अकाउंट को सक्रिय रखना फायदेमंद होता है। 5. अपनी रिपोर्ट समय-समय पर चेक करें गलत जानकारी पाएँ? जैसे भुगतान के बाद भी बकाया दिखना। CIBIL की डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन प्रक्रिया के जरिए सुधार करवाएं। खास सुझाव: सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड यदि स्कोर बहुत कम है और कोई बैंक कार्ड नहीं दे रहा: फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड लें। इसे जिम्मेदारी से उपयोग और समय पर भुगतान करें। इससे धीरे-धीरे आपका स्कोर सुधारता है और लोन और अन्य वित्तीय फैसले आसान होते हैं। सिबिल स्कोर केवल एक नंबर नहीं, बल्कि आपकी वित्तीय साख और भविष्य के वित्तीय फैसलों का आधार है। समय पर भुगतान, सही क्रेडिट उपयोग और रिपोर्ट की नियमित जांच से आप आसानी से इसे सुधार सकते हैं। 700+ का स्कोर आपके लिए लोन, क्रेडिट कार्ड और निवेश के दरवाजे खोलता है।