आईपीएल 2017 का धमाकेदार आगाज़: Yuvraj Singh की पारी ने दिलाई Sunrisers Hyderabad को जीत
नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग के 19वें सीजन यानी Indian Premier League 2026 की शुरुआत 28 मार्च से होने जा रही है। टूर्नामेंट के शुरुआती शेड्यूल के तहत पहला मुकाबला Royal Challengers Bengaluru और Sunrisers Hyderabad के बीच खेला जाएगा। यह मैच बेंगलुरु के प्रसिद्ध M. Chinnaswamy Stadium में आयोजित होगा। दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों टीमों ने 2017 में भी आईपीएल सीजन का पहला मुकाबला खेला था, जिसमें सनराइजर्स हैदराबाद ने शानदार जीत दर्ज की थी। उस मुकाबले में भारतीय टीम के स्टार ऑलराउंडर Yuvraj Singh ने अपनी दमदार बल्लेबाजी से मैच को यादगार बना दिया था। युवराज सिंह की तूफानी पारी से खड़ा हुआ बड़ा स्कोर2017 का वह उद्घाटन मुकाबला हैदराबाद के Rajiv Gandhi International Cricket Stadium में खेला गया था। टॉस जीतकर आरसीबी ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था, लेकिन सनराइजर्स हैदराबाद के बल्लेबाजों ने इस फैसले को गलत साबित कर दिया। टीम की ओर से युवराज सिंह ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 27 गेंदों में 62 रन की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें 7 चौके और 3 छक्के शामिल थे। उनके अलावा ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर Moises Henriques ने 52 रन और भारतीय सलामी बल्लेबाज Shikhar Dhawan ने 40 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। इन शानदार पारियों की बदौलत सनराइजर्स हैदराबाद ने 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 207 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। आरसीबी के गेंदबाजों को मिली सीमित सफलताआरसीबी की ओर से गेंदबाजों को ज्यादा सफलता नहीं मिल सकी। टीम के लिए इंग्लैंड के तेज गेंदबाज Tymal Mills, अनिकेत चौधरी, स्पिनर Yuzvendra Chahal और ऑलराउंडर Stuart Binny ने एक-एक विकेट हासिल किया। हालांकि एसआरएच के बल्लेबाजों की आक्रामक बल्लेबाजी के सामने आरसीबी के गेंदबाज बेबस नजर आए और टीम को बड़े स्कोर का सामना करना पड़ा। लक्ष्य का पीछा करते हुए बिखर गई आरसीबी208 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी आरसीबी की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम नियमित अंतराल पर विकेट खोती रही। वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज Chris Gayle ने 32 रन बनाकर टीम को संभालने की कोशिश की, जबकि Kedar Jadhav ने 31 और ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज Travis Head ने 30 रन की पारी खेली। इसके बावजूद पूरी टीम 19.4 ओवर में 172 रन पर सिमट गई और सनराइजर्स हैदराबाद ने 35 रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया। गेंदबाजों ने भी जीत में निभाई अहम भूमिकासनराइजर्स हैदराबाद की जीत में गेंदबाजों का भी बड़ा योगदान रहा। भारत के अनुभवी तेज गेंदबाज Ashish Nehra, स्विंग के उस्ताद Bhuvneshwar Kumar और अफगानिस्तान के स्टार स्पिनर Rashid Khan ने दो-दो विकेट झटके। वहीं Deepak Hooda और Bipul Sharma ने एक-एक विकेट लेकर आरसीबी की बल्लेबाजी को पूरी तरह रोक दिया। 2016 फाइनल की भी रही थी ऐतिहासिक भिड़ंतआरसीबी और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मुकाबले हमेशा रोमांचक रहे हैं। 2016 में आईपीएल का फाइनल भी इन्हीं दोनों टीमों के बीच खेला गया था, जिसमें सनराइजर्स हैदराबाद ने शानदार जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया था। आईपीएल 2026 के ओपनिंग मैच पर टिकी नजरेंअब एक बार फिर आईपीएल 2026 के पहले मैच में दोनों टीमें आमने-सामने होंगी। पिछले सीजन की चैंपियन आरसीबी आत्मविश्वास से भरी हुई है, जबकि सनराइजर्स हैदराबाद भी पिछले कुछ सीजन में अपने आक्रामक खेल से फैंस को रोमांचित करती रही है। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों को एक और हाई-वोल्टेज मुकाबले की उम्मीद है और यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार जीत किस टीम के खाते में जाती है।
GWALIOR HIGHCOURT: 8 साल के बेटे के लिए ससुराल लौटी महिला: हाईकोर्ट ने दी सुरक्षा, पति-ससुर पर लगाए प्रताड़ना के आरोप

HIGHLIGHTS: घरेलू विवाद मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ का आदेश महिला ने पति और ससुर पर प्रताड़ना के आरोप लगाए 8 साल के बेटे के लिए ससुराल लौटने की जताई इच्छा अदालत ने पति-ससुर को सम्मानजनक व्यवहार के निर्देश दिए छह महीने के लिए ‘शौर्य दीदी’ नियुक्त कर सुरक्षा निगरानी तय GWALIOR HIGHCOURT: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में बुधवार को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक घरेलू विवाद मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने महिला को सुरक्षा व्यवस्था के साथ उसके ससुराल जाने की अनुमति दी। साथ ही पति और ससुर को निर्देश दिया कि वे महिला के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें और किसी प्रकार की प्रताड़ना न दें। जब अमिताभ के मुहूर्त में देर से पहुंचने की घटना से जन्मा ‘मिस्टर इंडिया’ का आइडिया, जावेद अख्तर ने बना दी कल्ट फिल्म हैबियस कॉर्पस याचिका के रूप में पहुंचा मामला यह मामला हैबियस कॉर्पस याचिका के रूप में अदालत के सामने आया था। याचिकाकर्ता प्रदीप राठौर ने आरोप लगाया था कि उसकी बहन प्रियंका राठौर को उसके पति नरेंद्र राठौर और ससुर द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार को उससे संपर्क नहीं करने दिया जा रहा था। सुनवाई के दौरान अदालत ने महिला, उसके पति और अन्य पक्षों को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए थे। सभी पक्षों की मौजूदगी में खंडपीठ ने महिला की बात सुनी और आगे की कार्रवाई की। 20 साल से इसी दिन का इंतजार था: कौन है कमल सिंह जामवाल? जिसने फारूक अब्दुल्ला पर तान दी बंदूक महिला ने लगाए प्रताड़ना के आरोप अदालत में प्रियंका राठौर ने बताया कि उसके पति और ससुर उसे अक्सर परेशान करते हैं। उसने यह भी आरोप लगाया कि एक बार उसके पति ने उसे सीढ़ियों से धक्का देने की कोशिश की थी। महिला ने अदालत को यह भी बताया कि उसका 8 वर्षीय बेटा है। परिवार को बचाने और बेटे के भविष्य को देखते हुए उसने फिलहाल ससुराल में रहकर विवाद सुलझाने का अवसर देने की इच्छा जताई। ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी कराने में जुटी सरकार, ये दो देश कर रहे मदद पति ने अदालत को दिया भरोसा सुनवाई के दौरान पति नरेंद्र राठौर, जो बैंक में मार्केटिंग से जुड़े काम करते हैं, ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह आगे से अपनी पत्नी का ध्यान रखेंगे और उसे किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने देंगे। संसद में आज मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने की तैयारी छह महीने के लिए ‘शौर्य दीदी’ नियुक्त महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अदालत ने विशेष व्यवस्था की है। सरकारी अधिवक्ता अंजली ज्ञानानी और जनकगंज थाने की महिला आरक्षक अंतिमा तिवारी और आरती लोधी को छह महीने के लिए ‘शौर्य दीदी’ नियुक्त किया गया है। ये समय-समय पर महिला से संपर्क कर उसकी सुरक्षा और स्थिति की निगरानी करेंगी, ताकि किसी प्रकार की प्रताड़ना की स्थिति सामने न आए।
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की आहट: चुनाव से पहले राजनीतिक तूफ़ान तेज, एसआईआर और दस्तावेज़ विवाद से बढ़ी चिंता

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रपति शासन की अटकलों ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। राज्यपाल के अचानक बदलाव, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे पर विवाद और चुनाव आयोग की टीम के दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन ने इस संभावना को और गहरा कर दिया है। इतिहास और संवैधानिक पहलूपश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू होने का इतिहास बहुत लंबा नहीं है। 30 अप्रैल 1977 को तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जो वाममोर्चा सरकार के शपथ ग्रहण तक 52 दिनों तक जारी रहा। अब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या बंगाल एक बार फिर राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है। चुनाव आयोग का दौरा और विरोध प्रदर्शनचुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने कोलकाता दौरे के दौरान सभी राजनीतिक दलों और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों का जायजा लिया। हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर सीधे जवाब देने से परहेज किया और कहा कि कानून-व्यवस्था की समीक्षा के बाद चुनाव की तारीख और चरण तय किए जाएंगे। तृणमूल कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों ने एक या दो चरणों में मतदान कराने की मांग की। आयोग को कोलकाता और आसपास बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। तृणमूल समर्थकों ने काले झंडे दिखाए और “लोकतंत्र का हत्यारा” जैसे पोस्टर भी लगाए। एसआईआर प्रक्रिया पर विवादराज्य में नवंबर से चल रही एसआईआर (Special Summary Revision) प्रक्रिया के तहत लगभग 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेज विचाराधीन हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दस्तावेजों की जांच में न्यायिक अधिकारियों को दो महीने का समय लगने की संभावना है। राजनीतिक दलों का कहना है कि इस स्थिति में चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण होगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से वैध वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अचानक राज्यपाल सीवी आनंद बोस की जगह आर.एन. रवि को क्यों नियुक्त किया गया, जो तमिलनाडु में विवादित रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा और विवादराष्ट्रपति का दौरा सिलीगुड़ी में आदिवासी सम्मेलन के लिए था। हालांकि मुख्यमंत्री ने इसे लेकर असंतोष जताया और कहा कि उन्हें न्यूनतम प्रोटोकॉल तक नहीं मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस पर राष्ट्रपति के अपमान का आरोप लगाया। राजनीतिक माहौल और भविष्य की चुनौतियांराजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एसआईआर के तहत विचाराधीन 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेज समय पर जांच कर लिए जाएंगे। यदि यह कार्य पूरा नहीं हुआ, तो या तो चुनाव टालना पड़ सकता है या बिना पूरी सूची के चुनाव कराना पड़ सकता है। इससे राष्ट्रपति शासन की संभावना बढ़ सकती है।अगले कुछ दिनों में केंद्र और चुनाव आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा साफ होगी।
Indian Premier League 2026 से पहले बड़ा बदलाव: Gujarat Titans से जुड़े पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 से पहले Gujarat Titans अपनी टीम को हर मोर्चे पर मजबूत करने में जुटी हुई है। इसी कड़ी में फ्रेंचाइजी ने कोचिंग स्टाफ में एक और बड़ा नाम जोड़ते हुए पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज Vijay Dahiya को सहायक कोच नियुक्त किया है। इससे पहले टीम ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज Matthew Hayden को बल्लेबाजी कोच बनाया था। दहिया के जुड़ने से टीम प्रबंधन को उम्मीद है कि खिलाड़ियों को अनुभव और रणनीतिक मार्गदर्शन मिलेगा, जिससे आगामी सीजन में टीम का प्रदर्शन और मजबूत होगा। आईपीएल में कोच के रूप में लंबा अनुभवविजय दहिया लंबे समय से आईपीएल में कोचिंग से जुड़े रहे हैं और उन्हें युवा खिलाड़ियों के साथ काम करने का खास अनुभव है। इससे पहले वह Kolkata Knight Riders, Delhi Capitals और Lucknow Super Giants जैसी टीमों के साथ कोचिंग स्टाफ का हिस्सा रह चुके हैं। क्रिकेट रणनीति और खिलाड़ियों के विकास पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। गुजरात टाइटंस प्रबंधन का मानना है कि उनके अनुभव से टीम के युवा और सीनियर खिलाड़ियों को काफी फायदा मिलेगा और टीम संतुलित प्रदर्शन कर सकेगी। घरेलू क्रिकेट में भी साबित किया कोचिंग का दमआईपीएल के अलावा घरेलू क्रिकेट में भी विजय दहिया का कोचिंग रिकॉर्ड काफी शानदार रहा है। उनकी कोचिंग में Delhi cricket team ने 2007-08 में रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता था। इसके अलावा वह Uttar Pradesh cricket team के मुख्य कोच भी रह चुके हैं। खिलाड़ियों के तकनीकी कौशल को निखारने और टीम के भीतर सकारात्मक माहौल बनाने के लिए दहिया की काफी सराहना होती रही है। यही कारण है कि कई फ्रेंचाइजी उन्हें अपनी कोचिंग टीम में शामिल करना चाहती रही हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी निभाई भूमिका52 वर्षीय विजय दहिया भारतीय क्रिकेट टीम के लिए भी खेल चुके हैं। उन्होंने भारत के लिए 2 टेस्ट और 19 वनडे मैच खेले थे। विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में उनकी पहचान एक भरोसेमंद खिलाड़ी की रही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का अनुभव अब कोच के रूप में खिलाड़ियों को दिशा देने में उनके काम आता है। गुजरात टाइटंस का सफर और कप्तानी में बदलावगुजरात टाइटंस ने आईपीएल में 2022 में कदम रखा था और पहले ही सीजन में खिताब जीतकर सभी को चौंका दिया था। उस समय टीम की कमान ऑलराउंडर Hardik Pandya के हाथों में थी। इसके बाद 2023 में भी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि 2024 में हार्दिक पांड्या टीम छोड़कर Mumbai Indians में चले गए, जिसके बाद कप्तानी युवा बल्लेबाज Shubman Gill को सौंप दी गई। 2026 सीजन के लिए टीम की बड़ी तैयारीगुजरात टाइटंस ने 2026 सीजन से पहले खिलाड़ियों के साथ-साथ कोचिंग स्टाफ को भी मजबूत करने पर खास ध्यान दिया है। टीम के मुख्य कोच Ashish Nehra के साथ Parthiv Patel, मैथ्यू हेडन, Matthew Wade और अब विजय दहिया जैसे अनुभवी नाम शामिल हो चुके हैं। फ्रेंचाइजी की नजर अब अपने दूसरे आईपीएल खिताब पर है और प्रबंधन को उम्मीद है कि मजबूत कोचिंग सेटअप के साथ टीम आगामी सीजन में खिताब की प्रबल दावेदार बनकर उभरेगी।
जब अमिताभ के मुहूर्त में देर से पहुंचने की घटना से जन्मा ‘मिस्टर इंडिया’ का आइडिया, जावेद अख्तर ने बना दी कल्ट फिल्म

नई दिल्ली । फिल्मी दुनिया में कई बार छोटी-सी घटना भी बड़ी कहानी का आधार बन जाती है। हिंदी सिनेमा की मशहूर और कल्ट फिल्मों में गिनी जाने वाली मिस्टर इंडिया के पीछे भी एक ऐसा ही दिलचस्प किस्सा छिपा हुआ है। साल 1987 में रिलीज हुई इस फिल्म ने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता बल्कि अपने अनोखे कॉन्सेप्ट और दमदार किरदारों की वजह से आज भी याद की जाती है। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के गायब होने वाले हीरो का आइडिया लेखक जावेद अख्तर के दिमाग में तब आया था जब महानायक अमिताभ बच्चन एक फिल्म के मुहूर्त शॉट के लिए समय पर नहीं पहुंच पाए थे। दरअसल एक फिल्म का मुहूर्त समारोह चल रहा था जिसमें अमिताभ बच्चन को फिल्म की लीड एक्ट्रेस के साथ पहला शॉट देना था। लेकिन किसी कारणवश वे तय समय पर सेट पर नहीं पहुंच सके। ऐसे में फिल्म की टीम के सामने यह समस्या आ खड़ी हुई कि मुहूर्त शॉट कैसे लिया जाए। काफी सोच-विचार के बाद टीम ने एक अनोखा तरीका निकाला। उन्होंने हीरो की जगह एक ऑडियो टेप का इस्तेमाल करने का फैसला किया। कैमरे को इस तरह घुमाया गया कि ऐसा लगे जैसे हीरो वहां मौजूद है जबकि वास्तव में केवल उसकी आवाज सुनाई दे रही थी। उसी समय सेट पर मौजूद जावेद अख्तर ने इस पूरे दृश्य को ध्यान से देखा। यह अजीब लेकिन दिलचस्प अनुभव उनके दिमाग में एक नए विचार की चिंगारी बन गया। उन्होंने सोचा कि क्यों न ऐसी कहानी लिखी जाए जिसमें फिल्म का हीरो दिखाई ही न दे और सिर्फ उसकी मौजूदगी का एहसास हो। यही सोच आगे चलकर एक ऐसे किरदार में बदल गई जो अदृश्य होकर लोगों की मदद करता है और बुराई से लड़ता है। यही विचार बाद में मिस्टर इंडिया की कहानी की नींव बना। निर्देशक शेखर कपूर ने जब इस कहानी को पर्दे पर उतारा तो यह फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल हो गई। फिल्म के मुख्य किरदार के लिए कई अभिनेताओं के नामों पर चर्चा हुई लेकिन आखिरकार यह भूमिका अनिल कपूर को मिली और उन्होंने इसे बेहद लोकप्रिय बना दिया। फिल्म में श्रीदेवी की शानदार अदाकारी और उनका सुपरहिट गीत हवा हवाई आज भी दर्शकों की जुबान पर है। वहीं खलनायक मोगैम्बो के रूप में अमरीश पुरी ने ऐसा प्रभाव छोड़ा कि उनका मशहूर डायलॉग “मोगैम्बो खुश हुआ” आज भी लोगों के बीच उतना ही लोकप्रिय है। उस दौर में यह फिल्म अपने बड़े बजट की वजह से भी चर्चा में रही। करीब 3.8 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह फिल्म उस समय की सबसे महंगी फिल्मों में से एक मानी जाती थी। हालांकि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की और बड़ी हिट साबित हुई। मिस्टर इंडिया केवल बॉक्स ऑफिस सफलता तक ही सीमित नहीं रही बल्कि अपने स्पेशल इफेक्ट्स मनोरंजक कहानी और यादगार गानों के कारण हिंदी सिनेमा के इतिहास में खास जगह बना चुकी है। आज भी जब बॉलीवुड की सबसे आइकॉनिक फिल्मों की बात होती है तो मिस्टर इंडिया का नाम गर्व के साथ लिया जाता है।
20 साल से इसी दिन का इंतजार था: कौन है कमल सिंह जामवाल? जिसने फारूक अब्दुल्ला पर तान दी बंदूक

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक Farooq Abdullah पर बुधवार रात एक शादी समारोह के दौरान फायरिंग की कोशिश की गई। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता से यह हमला नाकाम हो गया और वह बाल-बाल बच गए। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। कहां हुई घटनायह घटना बुधवार रात जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में स्थित रॉयल पार्क बैंक्विट हॉल में हुई। यहां नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और वरिष्ठ वकील दिनेश सिंह चौहान की बेटी की शादी का समारोह चल रहा था। समारोह में Farooq Abdullah के अलावा जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary, कैबिनेट मंत्री Satish Sharma और मुख्यमंत्री Omar Abdullah के राजनीतिक सलाहकार नासिर असलम भी मौजूद थे। कैसे हुई हमले की कोशिशसूत्रों के मुताबिक, Farooq Abdullah रात करीब 9:15 बजे समारोह में पहुंचे थे। कुछ समय तक उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। करीब 10:10 बजे जब वह समारोह से निकलकर अपनी कार की ओर जा रहे थे, तभी भीड़ में मौजूद एक शख्स अचानक उनके पीछे आया और उनकी पीठ पर बंदूक तान दी। हालांकि इससे पहले कि वह गोली चला पाता, सुरक्षा में तैनात एक सुरक्षाकर्मी ने तुरंत बंदूक को हटा दिया। इस दौरान गोली ऊपर की ओर चली गई और कोई बड़ा हादसा होने से बच गया। कौन है आरोपी कमल सिंहपुलिस के मुताबिक हमलावर की पहचान कमल सिंह जामवाल के रूप में हुई है। वह जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का रहने वाला है। रिपोर्ट्स के अनुसार कमल सिंह का जन्म 1963 में हुआ था। जम्मू के ओल्ड सिटी इलाके में उसकी कई दुकानें हैं। वह इन दुकानों से मिलने वाले किराए से अपना गुजारा करता है। पुलिस ने आरोपी के पास से घटना में इस्तेमाल किया गया हथियार भी बरामद कर लिया है। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने चौंकाने वाला दावा किया। उसने कहा कि वह पिछले 20 साल से Farooq Abdullah को मारना चाहता था और इसी मौके का इंतजार कर रहा था। उसने यह भी बताया कि हमला करना उसका “पर्सनल एजेंडा” था। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और घटना के पीछे की वजहों की जांच जारी है। चश्मदीदों ने क्या बतायाशादी समारोह में मौजूद एक चश्मदीद राकेश सिंह के मुताबिक, सभी लोग समारोह से बाहर निकल रहे थे तभी अचानक एक व्यक्ति ने पीछे से आकर डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर रिवॉल्वर तान दी। उन्होंने बताया कि सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई की और बंदूक को हटा दिया, जिससे बड़ी घटना टल गई। मंत्री सतीश शर्मा ने क्या कहाजम्मू-कश्मीर के मंत्री Satish Sharma ने कहा कि यह एक गंभीर घटना है, लेकिन Farooq Abdullah पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी को पुलिस हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
भारत पर नया टैरिफ लगा सकता है, अमेरिका…कई देशों की व्यापारिक नीतियों की जांच शुरू

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की सरकार ने 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों की उन व्यापारिक नीतियों और प्रथाओं के खिलाफ नई जांच शुरू की है, जिन्हें अमेरिका (America) ‘अनुचित’ मानता है। इस कदम से भारत (India) सहित कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ (Additional Tariff.) और अन्य जुर्माने लगने का रास्ता साफ हो सकता है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा ट्रंप की ओर से पहले लगाए गए टैरिफ को खारिज कर दिया गया था, जिसके बाद वह अब नए विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। जांच के दायरे में भारत और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाएंऔद्योगिक क्षमता से अधिक उत्पादन को लेकर की जा रही इस जांच के निशाने पर मुख्य रूप से भारत के साथ-साथ यूरोपीय संघ (EU), चीन, जापान और कई अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। अमेरिका के इस कड़े कदम से इन प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ उसके संबंधों में तनाव बढ़ने की पूरी संभावना है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का कड़ा रुखन्यूज एजेंसी एएफपी (AFP) के हवाले से, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर ने बताया कि ट्रंप प्रशासन दो अलग-अलग जांचें शुरू कर रहा है। पहली जांच जरूरत से ज्यादा उत्पादन पर केंद्रित है, जबकि दूसरी जांच जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को लेकर है। उन्होंने कहा कि इस गर्मियों तक चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और मैक्सिको के खिलाफ नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। इस सूची में ताइवान, वियतनाम, थाइलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे भी शामिल हैं। अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार कनाडा को इस जांच से बाहर रखा गया है। अपने रुख को स्पष्ट करते हुए ग्रीर ने कहा- हमें अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करनी है और हमें यह सुनिश्चित करने की सख्त जरूरत है कि हमारे व्यापारिक साझेदारों के साथ हमारा व्यापार पूरी तरह से निष्पक्ष हो। उन्होंने सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा- अगर इस समस्या को हल करने के लिए हमें टैरिफ लगाने की जरूरत पड़ी, तो हम ऐसा जरूर करेंगे। हालांकि, ग्रीर ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि भविष्य में लगाए जाने वाले संभावित जुर्माने या टैरिफ अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग होंगे या एक समान। ग्रीर के अनुसार, चीन की इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उत्पादन क्षमता उसकी घरेलू मांग से कहीं अधिक है। फिर भी, वहां की शीर्ष ईवी निर्माता कंपनी BYD आक्रामक रूप से उज्बेकिस्तान, थाइलैंड, ब्राजील, हंगरी और तुर्की में अपने कारखाने स्थापित कर रही है और यूरोप में भी विस्तार करने की योजना बना रही है। जर्मनी और आयरलैंड के बड़े व्यापार अधिशेष को यूरोपीय संघ की अतिरिक्त क्षमता का सबूत माना गया है। इसके अलावा, अमेरिका के साथ व्यापार घाटे के बावजूद सिंगापुर में सेमीकंडक्टर की अतिरिक्त वैश्विक क्षमता है, और नॉर्वे में ईंधन व समुद्री भोजन के भारी निर्यात को इसका सबूत माना गया है। 60 देशों पर पड़ेगा असरजबरन मजदूरी को लेकर जो दूसरी जांच की जा रही है, उसके बारे में ग्रीर ने बताया कि यह जांच कल दोपहर के बाद किसी भी समय शुरू हो सकती है। इस जांच की जद में लगभग 60 व्यापारिक साझेदार देश आएंगे, जिससे ग्लोबल सप्लाई चैन पर व्यापक असर पड़ सकता है। अमेरिका ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा हस्ताक्षरित ‘उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट’ के तहत पहले ही चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य सामानों पर कार्रवाई की है। अमेरिका का आरोप है कि चीन ने उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए लेबर कैंप बनाए हैं (हालांकि चीन इन आरोपों से इनकार करता है)। अब इस जांच का दायरा अन्य देशों तक भी बढ़ाया जा सकता है। ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात से ठीक पहले उठाया गया कदमट्रंप प्रशासन का यह ताजा व्यापारिक कदम रणनीतिक रूप से भी काफी अहम है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब अप्रैल महीने में बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इस नई जांच का असर दोनों नेताओं की आगामी बातचीत पर भी देखने को मिल सकता है।
ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी कराने में जुटी सरकार, ये दो देश कर रहे मदद

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते संघर्ष के बीच भारत सरकार (Indian Government) अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर लगातार सक्रिय है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि ईरान में मौजूद भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सरकार उन भारतीयों की मदद कर रही है जो ईरान से बाहर निकलना चाहते हैं। इसके लिए आर्मेनिया (Armenia) और अजरबैजान (Azerbaijan) के रास्ते लोगों को सुरक्षित बाहर लाने की व्यवस्था की जा रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है और हाई अलर्ट पर काम कर रहा है। दूतावास भारतीय छात्रों, तीर्थयात्रियों और अन्य नागरिकों से लगातार संपर्क में है। जो लोग ईरान छोड़ना चाहते हैं उन्हें जमीन के रास्ते आर्मेनिया और अजरबैजान भेजा जा रहा है, जहां से वे व्यावसायिक उड़ानों के जरिए भारत लौट सकते हैं। ईरान में कितने भारतीय मौजूद हैं?विदेश मंत्रालय के मुताबिक ईरान में करीब नौ हजार भारतीय नागरिक मौजूद हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्र और तीर्थयात्री शामिल हैं। सरकार ने कहा कि कई भारतीय पहले ही सरकार की एडवाइजरी का पालन करते हुए स्वदेश लौट चुके हैं। बाकी लोगों से भी लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके। सरकार ने सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए हैं?सरकार ने बताया कि कुछ छात्रों और आगंतुकों को सुरक्षा कारणों से ईरान के अलग-अलग शहरों में स्थानांतरित किया गया है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, जो चौबीसों घंटे काम कर रहा है। यहां परिवार के लोग फोन या ईमेल के जरिए जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और अधिकारियों से मदद ले सकते हैं। खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा क्यों अहम है?विदेश मंत्रालय के अनुसार खाड़ी सहयोग परिषद के देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं। सरकार ने कहा कि इन सभी भारतीयों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार क्षेत्र के कई नेताओं के संपर्क में हैं और भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर जोर दे रहे हैं। संघर्ष में भारतीयों को कितना नुकसान हुआ?सरकार ने बताया कि हालिया घटनाओं में दो भारतीय नागरिकों की मौत हुई है और एक व्यक्ति लापता है। ये तीनों एक व्यापारी जहाज पर मौजूद थे, जो हमले का शिकार हुआ था। इसके अलावा कुछ भारतीय घायल भी हुए हैं। एक भारतीय इस्राइल में और एक दुबई में घायल हुआ है। दोनों का इलाज चल रहा है और भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है।
संसद में आज मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने की तैयारी

नई दिल्ली। संसद (Parliament) में लोकसभा स्पीकर पद (Lok Sabha Speaker’s post) से हटाने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner (CEC) Gyanesh Kumar) के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। संभावना है कि तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट विपक्ष (Opposition) गुरुवार को सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देगा। नोटिस पर लोकसभा के 120 और राज्यसभा के 60 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। तृणमूल की रणनीति मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को प. बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाने की है। सीईसी के खिलाफ टीएमसी को मिला कांग्रेस-सपा का साथपश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मुहिम पर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में हुई बैठक में सहमति बनी। बैठक में राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तृणमूल के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद नोटिस देने के लिए जरूरी सांसदों के हस्ताक्षर कराए गए। योजना दोनों सदनों में नोटिस देने की है। दरअसल, महाभियोग की प्रक्रिया के लिए लोकसभा में 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर की जरूरत पड़ती है। सीईसी को हटाने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट के जजों को हटाने की तरह ही प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। जल्दबाजी में क्यों हैं तृणमूलदरअसल पार्टी चाहती है कि अप्रैल-मई में बंगाल विधानसभा चुनाव में एसआईआर को बड़ा मुद्दा बनाने के लिए इसी सत्र में महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा हो। प्रक्रिया शुरू करने और मुख्य रूप से चर्चा के लिए 14 दिन पहले नोटिस देना जरूरी है। यदि बृहस्पतिवार को नोटिस दिया गया तो इसी सत्र में प्रस्ताव पर चर्चा हो जाएगी। नोटिस में सीईसी पर सरकार के इशारे पर एसआईआर के बहाने जानबूझकर उचित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का आरोप लगाया गया है। क्या है महाभियोग की प्रक्रिया?मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही होती है। इसके लिए ‘साबित दुर्व्यवहार’ या ‘अक्षमता’ को आधार बनाना होता है। यह प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है। इसे पास कराने के लिए सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और मौजूद व वोट देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।
साउथ हॉरर फिल्म ‘हनी’ प्राइम वीडियो पर ट्रेंडिंग, 11 साल की बेटी के साथ होती है रूह कंपाने वाली घटना

नई दिल्ली। प्राइम वीडियो पर साउथ फिल्म हनी अब दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। यह फिल्म फरवरी 2026 में तेलुगू में रिलीज हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर अपनी कहानी और थ्रिलिंग सीन के कारण लोकप्रिय रही। अब यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी ट्रेंड कर रही है। फिल्म की कहानी साइकोलॉजिकल हॉरर और थ्रिलर पर आधारित है, जो दर्शकों के दिल-दिमाग में डर और रोमांच दोनों पैदा करती है। कहानी की शुरुआत और गांव का माहौलफिल्म की कहानी एक अंधविश्वासी गांव से शुरू होती है। गांव वाले पहाड़ी गुफाओं में शैतानी शक्तियों की पूजा करते हैं। अपनी पूजा के दौरान वे सिर पर नारियल फोड़ते हैं और अजीब रीति-रिवाज निभाते हैं। इसी माहौल में आनंद नामक मुख्य पात्र की एंट्री होती है, जो सरल और कम बोलने वाला इंसान है, लेकिन अंधविश्वास में विश्वास रखता है। काला जादू और धन की लालसाआनंद अपनी गरीबी मिटाने और अमीर बनने के लिए काले जादू का सहारा लेता है। वह शैतानी शक्तियों की पूजा करता है और धीरे-धीरे अपने परिवार को भी इसमें शामिल कर लेता है। ऑफिस में भी आनंद अपने ड्रा से काले जादू का सामान लोगों को देता है, जिससे वह खुद परेशान हो जाता है और पड़ोसी उससे दूरी बनाने लगते हैं। बेटी के साथ भयावह घटनाएँफिल्म में सबसे खतरनाक और दिल दहला देने वाला हिस्सा यह है कि आनंद अपनी 11 साल की बेटी मीरा को भी काले जादू में शामिल करता है। उसे बिल्ली का खून लाने और राक्षसी अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए मजबूर किया जाता है। मीरा अपने पिता के डर के कारण सब कुछ करती है। इस दौरान कहानी में रोमांच तब बढ़ता है जब मूर्ति बनाने वाले आर्टिस्ट का किरदार शामिल होता है, जो मीरा और उसकी मां को आनंद से बचाने की कोशिश करता है। साइकोलॉजिकल हॉरर का प्रभावफिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण इसके साइकोलॉजिकल हॉरर सीन हैं। आनंद की पूजा और अजीब-अजीब आवाजें, बेटी पर हो रहे अत्याचार और गांव के अंधविश्वासी रीति-रिवाज दर्शकों की रूह कंपा देते हैं। अंत में भी कहानी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं रहती, जिससे दर्शक फिल्म खत्म होने के बाद भी डर और सस्पेंस महसूस करते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोकप्रियताहनी की इस डरावनी कहानी और अनोखे हॉरर एलिमेंट्स की वजह से यह प्राइम वीडियो पर ट्रेंड कर रही है। दर्शक सोशल मीडिया पर फिल्म के सीन, थ्रिल और हॉरर इफेक्ट्स को लेकर चर्चा कर रहे हैं। 11 साल की बेटी के साथ जो घटना होती है, वह खासकर माता-पिता और हॉरर प्रेमियों के लिए बेहद भयावह और चर्चा योग्य है। हनी केवल एक साउथ फिल्म नहीं बल्कि साइकोलॉजिकल हॉरर थ्रिलर का बेहतरीन उदाहरण है। काले जादू, डरावने सीन और पिता-पुत्री के बीच हो रही भयावह घटनाएँ इसे प्राइम वीडियो पर ट्रेंडिंग बनाती हैं। फिल्म का अंत भी दर्शकों के लिए डर और सस्पेंस बनाए रखता है, यही वजह है कि यह अब हर हॉरर प्रेमी की वॉचलिस्ट में शामिल है।