अमेरिका भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में, 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स की सेक्शन 301 जांच शुरू

नई दिल्ली। अमेरिकी ट्रम्प प्रशासन ने भारत और चीन सहित 16 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ नई जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई ‘सेक्शन 301’ के तहत की जा रही है, जो अमेरिकी ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 का हिस्सा है और अमेरिका को उन देशों पर एकतरफा टैरिफ या प्रतिबंध लगाने की शक्ति देती है, जो अमेरिकी कंपनियों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नुकसान पहुंचा रहे हों। इस कदम के पीछे पिछली घटनाओं का संदर्भ है। फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया था। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने 150 दिनों के लिए 10% का अस्थायी टैरिफ लागू किया। अब नई जांच के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि टैरिफ का दबाव जारी रहे और ट्रेडिंग पार्टनर्स को बातचीत की मेज पर लाया जा सके। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने बताया कि यह जांच भारत, चीन, यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे पर केंद्रित है। अगर जांच में इन देशों की नीतियां अनुचित व्यापार व्यवहार के तहत पाई गईं, तो उन पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। जांच का मुख्य फोकस उन देशों पर है, जो जरूरत से अधिक उत्पादन कर अमेरिकी बाजार में सस्ते दाम पर माल बेचते हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी देश में जूतों की फैक्ट्री सालाना 100 जूते बना सकती है, लेकिन घरेलू मांग केवल 20 जूते की है, तो शेष 80 जूते सस्ते दाम पर अमेरिका में भेज दिए जाते हैं। अमेरिका इसे मार्केट डंपिंग और अनुचित व्यापार व्यवहार मानता है। भारत के लिए यह चिंता का विषय है। 2024 में भारत का अमेरिका के साथ गुड्स ट्रेड सरप्लस 58,216 मिलियन डॉलर था, जो 2025 में घटकर 45,801 मिलियन डॉलर रह गया। इस कमी के बावजूद भारत इस जांच की सूची में शामिल है। यदि भारत की नीतियां ‘अनुचित’ पाई गईं, तो भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ या प्रतिबंध लग सकते हैं। इसके अलावा, अमेरिका फोर्स्ड लेबर पर भी अलग जांच कर रहा है। इसका उद्देश्य है बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना। पहले ही उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य सामानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। अब यह कार्रवाई अन्य देशों पर भी लागू हो सकती है। जांच की टाइमलाइन भी निर्धारित कर दी गई है। 15 अप्रैल तक आम जनता और कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं, इसके बाद 5 मई के आसपास सार्वजनिक सुनवाई होगी। लक्ष्य है कि जुलाई में अस्थायी टैरिफ खत्म होने से पहले नए टैरिफ प्रस्ताव और जांच के नतीजे तैयार हो जाएं। जेमिसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रम्प टैरिफ लगाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार को बचाना है। साथ ही ट्रेडिंग पार्टनर्स को चेतावनी दी गई है कि वे मौजूदा व्यापार समझौतों का पालन करें, अन्यथा भारी टैक्स या प्रतिबंध झेलना पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस जांच का असर टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग गुड्स और कृषि उत्पादों की कीमतों पर पड़ेगा। व्यवसायियों, निर्यातकों और आयातकों को अमेरिकी पॉलिसी पर लगातार नजर रखनी होगी, क्योंकि जुलाई के बाद अमेरिकी बाजार में कीमतों और टैरिफ में बड़े बदलाव संभव हैं। यह कदम व्यापार के वैश्विक परिदृश्य में भारत और अन्य देशों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी है। यदि व्यापारिक नीतियों में सुधार नहीं हुआ, तो अमेरिकी टैरिफ की मार व्यापार घाटे और निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर गहरा असर डाल सकती है।
झुर्रियों से पहले संभल जाएं! हेल्दी और यंग स्किन के लिए रखें इन बातों का ध्यान

नई दिल्ली।आजकल 30 की उम्र पार करते ही चेहरे पर झुर्रियां और फाइन लाइन्स दिखने लगती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय से पहले एजिंग की सबसे बड़ी वजह अनियमित जीवनशैली और स्किन केयर में लापरवाही है। प्रदूषण, धूप, तनाव और गलत प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल त्वचा को समय से पहले बूढ़ा बना सकता है। ऐसे में जरूरी है कि रोजमर्रा की दिनचर्या में कुछ बुनियादी बातों को शामिल किया जाए, ताकि त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ और दमकती रहे। सुबह की शुरुआत सही सफाई से’त्वचा की देखभाल की पहली शर्त है नियमित और सही क्लीनिंग। सुबह उठकर कॉटन पैड या माइल्ड क्लींजर से चेहरे की सफाई करें, ताकि रातभर जमा ऑयल और गंदगी हट सके। बाहर से लौटने के बाद भी चेहरा जरूर धोएं। ध्यान रखें कि हार्श साबुन या बार-बार स्क्रब करने से त्वचा की प्राकृतिक नमी खत्म हो सकती है। किसी भी स्क्रबर या फेसवॉश का इस्तेमाल करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। सफाई के बाद मॉइस्चराइज़र लगाना न भूलें। बढ़ती उम्र में त्वचा रूखी होने लगती है, जिससे रिंकल्स जल्दी उभरते हैं। ऐसे में हाइड्रेशन बेहद जरूरी है। सनस्क्रीन है सबसे बड़ा कवचधूप में मौजूद यूवी किरणें एजिंग की प्रक्रिया को तेज करती हैं। इसलिए घर से बाहर निकलते समय कम से कम SPF 50 वाला सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। इसे हर 2-3 घंटे में दोबारा लगाना भी उतना ही अहम है, खासकर अगर आप लंबे समय तक बाहर रहते हैं। सनस्क्रीन सिर्फ गर्मियों में ही नहीं, बल्कि हर मौसम में लगाना चाहिए। सस्ते प्रोडक्ट्स से बचें, एंटीऑक्सीडेंट को अपनाएंत्वचा पर सस्ते और अनजाने ब्रांड के उत्पाद इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे प्रोडक्ट्स में मौजूद केमिकल्स त्वचा को डैमेज कर सकते हैं। इसके बजाय एंटीऑक्सीडेंट युक्त प्रोडक्ट्स चुनें, जिनमें विटामिन C और विटामिन E जैसे तत्व हों। ये फ्री रैडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं और त्वचा को लंबे समय तक युवा बनाए रखने में सहायक होते हैं। रात की देखभाल भी उतनी ही जरूरीसोने से पहले मेकअप हटाना अनिवार्य है। मेकअप के साथ सोने से पोर्स बंद हो जाते हैं, जिससे त्वचा बेजान दिखने लगती है। भले ही मेकअप न किया हो, फिर भी चेहरा धोकर ही सोएं। घरेलू नुस्खों की बात करें तो बेसन, हल्दी, दही, शहद और एलोवेरा जैसे प्राकृतिक तत्व त्वचा को पोषण देने में मददगार हो सकते हैं। हालांकि, किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले त्वचा के प्रकार को ध्यान में रखना जरूरी है। नियमित देखभाल, संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीना-ये तीनों मिलकर त्वचा को उम्र के असर से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
भारत के इन अद्भुत पर्यटन स्थलों पर जरूर जाएं, मन और आत्मा को मिलेगी शांति

नई दिल्ली। यात्रा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि मन और आत्मा को ताजगी देने का भी एक तरीका है। भारत अपनी विविधता, प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। अगर आप इस वर्ष यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो ये 14 जगहें आपके लिए जरूर हैं। कुछ स्थल तो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं, तो कुछ प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं। आइए जानते हैं उन अद्भुत स्थलों के बारे में जहाँ जाकर आपको सुकून और रोमांच दोनों का अनुभव मिलेगा। 1. कश्मीरकश्मीर को अक्सर धरती का स्वर्ग कहा जाता है। यहां की हर घाटी, बर्फ से ढके पहाड़, हरे-भरे मैदान और शांत जलधाराएँ मन को मोह लेने वाली हैं। झीलों की नीली छटा और पहाड़ों पर पड़ता कोहरा किसी पेंटिंग से कम नहीं लगता। यदि आप प्रकृति प्रेमी हैं, तो कश्मीर की यात्रा आपकी आत्मा को सुकून देगी। 2. आगरउत्तर प्रदेश का आगरा शहर ताजमहल के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। यह सफेद संगमरमर का स्मारक प्रेम की अमर कहानी कहता है। इसके अलावा आगरा किला और फतेहपुर सिकरी जैसी ऐतिहासिक धरोहरें भी देखने योग्य हैं। यहां के स्थानीय व्यंजन जैसे पेठा और पारंपरिक मिठाइयाँ इस शहर की यात्रा को और भी यादगार बनाती हैं। 3. चंडीगढ़चंडीगढ़, जो भारत के सबसे सुव्यवस्थित शहरों में से एक है, पारंपरिक पंजाबी संस्कृति और आधुनिकता का अनोखा मिश्रण प्रस्तुत करता है। यहाँ के सुंदर बोटैनिकल गार्डन, रॉक गार्डन और संग्रहालय शहर के हर कोने को खास बनाते हैं। 4. कूर्ग कर्नाटक का कूर्ग, जिसे भारत का स्कॉटलैंड कहा जाता है, अपनी हरियाली और चाय के बागानों के लिए प्रसिद्ध है। यहां का मौसम हमेशा ठंडा और ताजगी भरा रहता है। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह आदर्श स्थल है, जहां हरे-भरे पहाड़ और खुशबूदार कॉफी बागान यात्रा को अविस्मरणीय बना देते हैं। 5. धनौल्टी धनौल्टी उत्तराखंड की पहाड़ियों में बसा एक छोटा सा स्वर्ग है। यह जगह शांति, सुकून और प्रकृति की सुंदरता का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करती है। यदि आप शहर की भागदौड़ और शोर-शराबे से दूर रहना चाहते हैं, तो धनौल्टी एक आदर्श विकल्प है। 6. गोवागोवा का नाम आते ही सुंदर समुद्र तट, शानदार सूर्यास्त और जीवंत नाइटलाइफ़ का ख्याल आता है। गोवा में समुद्र के किनारे समय बिताना, स्थानीय व्यंजन चखना और सांस्कृतिक उत्सवों का अनुभव करना, हर यात्री के लिए एक अद्भुत अनुभव है 7. जयपुरराजस्थान की राजधानी जयपुर, ‘गुलाबी शहर’ के नाम से प्रसिद्ध है। पुराने किले, राजमहल और आधुनिक बाजारों के साथ यहां के सांस्कृतिक उत्सव और पारंपरिक व्यंजन यात्रा को और रोमांचक बनाते हैं। जयपुर की यात्रा हर पर्यटक की बकेट लिस्ट में जरूर होनी चाहिए। 8. कच्छ का रण गुजरात का कच्छ का रण विशाल नमक के मैदान के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ हर साल आयोजित होने वाला रण उत्सव स्थानीय संगीत, नृत्य और हस्तशिल्प का जादुई प्रदर्शन करता है। सफेद मैदान की विशालता और सांस्कृतिक उत्सव इसे एक अनूठा पर्यटन स्थल बनाते हैं। 9. ऋषिकेश ऋषिकेश गंगा के किनारे बसा एक ऐसा स्थान है, जहाँ आध्यात्मिक शांति और साहसिक गतिविधियाँ दोनों का आनंद लिया जा सकता है। यहाँ राफ्टिंग, योग और ध्यान का अनुभव जीवन बदल देने वाला होता है। 10. मुन्नार केरल का मुन्नार हिल स्टेशन अपनी चाय बागानों और पहाड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। यह सप्ताहांत बिताने के लिए आदर्श है, जहाँ आप प्रकृति की गोद में शांति और ताजगी महसूस कर सकते हैं। 11. मसूरीगढ़वाल हिमालय की तलहटी में स्थित मसूरी को पहाड़ों की रानी कहा जाता है। हरियाली, बर्फ से ढके पहाड़ और शांति से भरपूर वातावरण इसे परिवार और हनीमून के लिए आदर्श बनाते हैं। 12. ऊटीऊटी, जो कभी ईस्ट इंडिया कंपनी का मुख्यालय था, अब तमिलनाडु का एक प्रमुख हिल स्टेशन है। यहाँ का सुहावना मौसम, झीलें और हरियाली इसे यात्रियों के बीच खास बनाती हैं। 13. शिमलाशिमला का औपनिवेशिक इतिहास, मशहूर मॉल रोड और रोमांचक गतिविधियाँ इसे पर्यटन की दृष्टि से आकर्षक बनाती हैं। गर्मी और सर्दियों दोनों में यह हिल स्टेशन पर्यटकों के लिए परिपूर्ण विकल्प है 14. उदयपुरराजस्थान का उदयपुर, ‘पूर्व का वेनिस’ कहा जाता है। यहाँ की झीलें, महल और खूबसूरत पहाड़ प्राकृतिक और मानव निर्मित सुंदरता का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करते है।
Skin Care Tips: ऑयली और डल स्किन से छुटकारा, समर में ऐसे रखें चेहरा फ्रेश और जवान

नई दिल्ली। जैसे ही तापमान चढ़ता है, त्वचा की परेशानी भी बढ़ने लगती है। तेज धूप, पसीना और उमस मिलकर स्किन को बेजान, चिपचिपी और थकी हुई बना देते हैं। ऑयली स्किन और ज्यादा ऑयली हो जाती है, जबकि ड्राई स्किन रूखी और खिंची-खिंची महसूस होने लगती है। अगर आप चाहते हैं कि गर्मियों में भी आपकी त्वचा दमकती और जवां दिखे, तो अब समय है अपना स्किनकेयर रूटीन बदलने का। सही देखभाल से न सिर्फ टैन और पिंपल्स से बचाव होगा, बल्कि नेचुरल ग्लो भी बरकरार रहेगा। क्लींजिंग है सबसे पहला और जरूरी कदमगर्मियों में चेहरे पर धूल, पसीना और एक्स्ट्रा ऑयल जल्दी जमा हो जाता है। इसलिए दिन में दो बार माइल्ड, पीएच-बैलेंस्ड और अल्कोहल-फ्री फेस वॉश से चेहरा साफ करें। ऑयली स्किन वालों के लिए जेल-बेस्ड क्लींजर बेहतर रहते हैं, जबकि ड्राई स्किन वालों को नॉन-फोमिंग क्लींजर चुनना चाहिए। इससे पोर्स साफ रहते हैं और मुंहासों का खतरा कम होता है। क्रीम नहीं, जेल और वॉटर-बेस्ड प्रोडक्ट्स चुनेंगर्मियों में भारी क्रीम त्वचा को और चिपचिपा बना सकती हैं। ऐसे में हल्के, जेल-बेस्ड या वॉटर-बेस्ड मॉइश्चराइज़र का इस्तेमाल करें। दिन में दो बार क्लींजिंग, टोनिंग और मॉइश्चराइजिंग (CTM रूटीन) फॉलो करने से स्किन फ्रेश और हेल्दी बनी रहती है। एंटीऑक्सिडेंट सीरम से बढ़ाएं नैचुरल ग्लोअपने समर रूटीन में एंटीऑक्सिडेंट सीरम जरूर शामिल करें। विटामिन C जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, कोलेजन को बढ़ावा देते हैं और स्किन को ब्राइट बनाते हैं। साथ ही डाइट में खट्टे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और ग्रीन टी शामिल करना भी फायदेमंद रहेगा। हाइड्रेशन है सबसे बड़ी कुंजीगर्मी में शरीर और त्वचा दोनों को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और जरूरत हो तो हाइड्रेटिंग फेस मिस्ट या एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करें। रात में सोने से पहले हाइड्रेटिंग फेस मास्क लगाने से स्किन को एक्स्ट्रा नमी मिलती है और सुबह चेहरा फ्रेश दिखता है। हफ्ते में दो बार करें एक्सफोलिएशनस्किन से डेड सेल्स हटाने के लिए हफ्ते में एक या दो बार हल्के स्क्रब से एक्सफोलिएट करें। इससे पोर्स साफ रहते हैं और चेहरा साफ-सुथरा दिखता है। ध्यान रखें, ज्यादा स्क्रबिंग से स्किन को नुकसान भी हो सकता है। सनस्क्रीन कभी न भूलेंगर्मियों में यूवी-ए और यूवी-बी किरणें स्किन को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। घर से बाहर निकलते समय SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन जरूर लगाएं। घर के अंदर रहते हुए भी सनस्क्रीन लगाना फायदेमंद होता है, क्योंकि धूप की किरणें खिड़कियों से भी अंदर आ सकती हैं। हल्का मेकअप और सही टोनर का इस्तेमालभारी मेकअप से बचें, क्योंकि यह पोर्स को बंद कर सकता है और पिंपल्स बढ़ा सकता है। एलोवेरा या खीरा-बेस्ड टोनर का उपयोग करें, जो त्वचा को ठंडक और ताजगी देता है।
प्रहलाद पटेल के साथ दिल्ली में मिले सीएम मोहन यादव, सरसों और तुअर किसानों को बड़ी राहत

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। इस बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा किसानों की फसलों से जुड़ी समस्याओं और उनकी आय बढ़ाने के उपाय थे। बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि यह चर्चा मुख्यतः सरसों और तुअर की फसल से संबंधित रही। लंबे समय से लंबित सरसों की खरीद पर भावांतर भुगतान योजना को हरी झंडी दे दी गई है। इसका लाभ सीधे किसानों के बैंक खातों में मिलेगा और यह उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी। इससे प्रदेश के लाखों सरसों उत्पादक किसानों को बाजार मूल्य और समर्थन मूल्य के अंतर की राशि मिल सकेगी। इसके अलावा, तुअर की पूरी फसल 100 प्रतिशत सरकारी खरीद के तहत खरीदी जाएगी। शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को इस योजना का स्वीकृति पत्र भी सौंपा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम मध्य प्रदेश के दलहन उत्पादन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा। दिल्ली में हुई इस बैठक की पृष्ठभूमि में एमपी विधानसभा का हालिया बजट सत्र भी रहा। सत्र के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयानों से सीएम और उनके बीच अंदरूनी मतभेद नजर आए थे। इसके बाद पिछले हफ्ते सीएम मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल ने अलग-अलग समय पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। हालांकि इस बार कैलाश विजयवर्गीय निजी कार्यक्रम में व्यस्त रहे और बैठक में शामिल नहीं हो पाए। बैठक में यह भी तय किया गया कि वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। इसमें मध्य प्रदेश को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इस वर्ष में मूंग, उड़द, सोयाबीन और अन्य तिलहनों पर विशेष फोकस रहेगा। सरकार किसानों के लिए योजनाओं की प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर निगरानी भी सुनिश्चित करेगी। शिवराज-मोहन-प्रहलाद की यह बैठक किसानों के हितों के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि भावांतर भुगतान योजना और तुअर की पूरी सरकारी खरीद से किसान आर्थिक रूप से सशक्त होंगे और राज्य में दलहन उत्पादन में तेजी आएगी। प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार मिलकर किसानों की आय बढ़ाने, फसल की सही कीमत सुनिश्चित करने और उत्पादन को प्रोत्साहित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। यह बैठक किसानों के लिए वास्तविक राहत और लंबे समय से प्रतीक्षित निर्णयों का परिणाम साबित होगी।
Papmochani Ekadashi 2026: तुलसी चालीसा का पाठ करें, भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करें

नई दिल्ली । सनातन धर्म में एकादशी व्रत का अपना विशेष महत्व है। इसमें कृष्ण पक्ष की एकादशी को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इसी श्रेणी में पापमोचनी एकादशी का व्रत आता है। इस वर्ष यह व्रत 15 मार्च 2026 रविवार को रहेगा और इसका पारण 16 मार्च को किया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। तुलसी तुल्य सामग्री के साथ पूजा करने से जिसे भगवान विष्णु प्रिय माना गया है विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। इसलिए इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। पूजा विधि स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद घर के पूजा स्थान या मंदिर में भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। पूजा में धूप दीप फूल फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर भक्त चालीसा का पाठ और व्रत कथा सुनते हैं।तुलसी चालीसा का महत्व चालीसा में तुलसी माता का गुणगान किया गया है और इसे पाठ करने वाले को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शास्त्रों के अनुसार इस चालीसा के पाठ से जीवन के संकट समाप्त होते हैं सुख समृद्धि आती है और भक्त अपने पापों से मुक्ति पाते हैं। व्रत के नियम पापमोचनी एकादशी के दिन व्रत रखने वाले को भोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कथा और पूजा के बाद ही भोजन करें। दिन भर में जल और फल का सेवन किया जा सकता है। एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 16 मार्च 2026 को किया जाता है। चालीसा के कुछ प्रमुख दोहे और चौपाई नमो नमो तुलसी महारानी महिमा अमित न जाय बखानी।दियो विष्णु तुमको सनमाना जग में छायो सुयश महाना। तुलसी मैया तुम कल्याणी तुम्हरी महिमा सब जग जानी।भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे गा गाकर मां तुझे रिझावे। भक्त इस चालीसा का पाठ करते हुए मन वचन और कर्म से माता तुलसी की सेवा करें। ऐसा करने से जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और परम सुख की प्राप्ति होती है।
हंसिका-सोहेल नहीं, इन सितारों की भी कम चली शादी, किसी ने 2 तो किसी ने 5 साल में लिया तलाक
नई दिल्ली। बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री में कई सितारे अपने फैंस को सपनों जैसी शादियों का मज़ा देते हैं, लेकिन कुछ रिश्ते इतने कम समय में टूट जाते हैं कि सब हैरान रह जाते हैं। हाल ही में एक्ट्रेस हंसिका मोटवानी और उनके पति सोहेल कथूरिया का तलाक फाइनल हुआ, जो चार साल ही चल सकी। हंसिका-मोटवानी और सोहेल कथूरियाहंसिका और सोहेल ने दिसंबर 2022 में राजस्थान में भव्य शाही अंदाज में शादी की थी। मुंबई के बांद्रा फैमिली कोर्ट ने म्यूचुअल कंसेंट से तलाक मंजूर किया। जानकारी के अनुसार हंसिका ने कोई एलिमनी नहीं मांगी। दोनों शादी के कुछ दिनों बाद ही अलग रह रहे थे। सोहेल पहले से शादीशुदा थे और उनकी पहली पत्नी हंसिका की सहेली थीं। जब उनकी लव स्टोरी सामने आई, तो हंसिका को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया। दोनों ने अपने शो ‘लव शादी ड्रामा’ में भी इस बारे में चर्चा की थी।सोहेल पहले से शादीशुदा थे और उनकी पहली पत्नी हंसिका की सहेली थीं। जब उनकी लव स्टोरी सामने आई, तो हंसिका को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया। दोनों ने अपने शो ‘लव शादी ड्रामा’ में भी इस बारे में चर्चा की थी। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कम चलने वाली शादियों के उदाहरणकरण मेहरा और निशा रावल: साल 2012 में शादी के बाद 2021 में अलग हुए। निशा ने करण पर घरेलू हिंसा और धोखे का आरोप लगाया। मामला कोर्ट तक गया और तलाक हुआ। उर्मिला मातोंडकर और मोहसिन अख्तर मीर: साल 2016 में शादी हुई, मोहसिन उर्मिला से 10 साल छोटे हैं। दोनों काफी समय से अलग हैं और उर्मिला ने तलाक की याचिका दाखिल कर दी है, हालांकि अभी ऑफिशियल कन्फर्मेशन बाकी है। करण सिंह ग्रोवर और जेनिफर विंगेट: साल 2012 में शादी हुई, लेकिन दो साल में टूट गई। इसके बाद करण ने बिपाशा बसु से शादी की और बेटी के पिता बने, जबकि जेनिफर ने अब तक दोबारा शादी नहीं की। अनुराग कश्यप और कल्कि कोचलिन: साल 2011 में शादी रचाई, 2013 में अलग हुए और 2015 में तलाक हुआ। दोनों आज भी अच्छे दोस्त हैं और मिलते रहते हैं। कोंकणा सेन शर्मा और रणवीर शौरी: साल 2010 में शादी, पांच साल बाद अलग होने की घोषणा और तलाक साल 2020 में। दोनों कई फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं। इमरान खान और अवंतिका मालिक: आमिर खान के भांजे इमरान ने साल 2011 में शादी की। एक बेटी भी हुई, लेकिन दोनों 2015 में अलग हुए और 2019 में तलाक लिया। क्यों टूटते हैं स्टार की शादियां?इन शादियों में कम चलने का कारण अक्सर अंतर व्यक्तिगत मतभेद, समय की कमी, पेशेवर दबाव और पारिवारिक मुद्दे होते हैं। कुछ मामले सोशल मीडिया और फैंस की उम्मीदों से भी प्रभावित होते हैं। बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री में शादियों के कम चलने की वजह से यह एक आम चर्चा का विषय बन गया है। हंसिका-मोटवानी और सोहेल कथूरिया की चार साल की शादी, करण मेहरा से लेकर इमरान खान तक, ये उदाहरण बताते हैं कि स्टार्स की चमकती जिंदगी में भी रिश्ते टिकाना आसान नहीं होता। प्यार, भरोसा और समय के बावजूद कई बार शादी सिर्फ कुछ सालों तक ही चल पाती है।
MORENA ILLIGAL LIQUOR: मुरैना में अवैध शराब पर पुलिस का शिकंजा, गुमठी से 1.02 लाख की शराब जब्त

HIGHLIGHTS: कैलारस थाना पुलिस की देर रात कार्रवाई लकड़ी की गुमठी से देशी और अंग्रेजी शराब बरामद करीब 1 लाख 2 हजार रुपए की शराब जब्त क्वारी बिलगांव निवासी अरविंद कुशवाह गिरफ्तार आरोपी पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज MORENA ILLIGAL LIQUOR: ग्वालियर। मुरैना जिले के कैलारस थाना क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सड़क किनारे रखी एक लकड़ी की गुमठी से करीब 1 लाख 2 हजार रुपए की देशी और अंग्रेजी शराब जब्त की है। इस मामले में पुलिस ने मौके से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो गुमठी में शराब का भंडारण कर आसपास के ग्रामीण इलाकों में इसकी बिक्री कर रहा था। भोपाल: LLB छात्रा ने फांसी लगाकर दी जान, महीने भर से कॉलेज से कटी थी अंकिता, परिजनों से कहती रही- ‘पढ़ाई में मन नहीं लग रहा’ गुमठी की तलाशी में मिला बड़ा स्टॉक पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि क्वारी बिलगांव के पास सड़क किनारे रखी लकड़ी की गुमठी में अवैध शराब का भारी मात्रा में भंडारण किया जा रहा है और वहीं से इसकी बिक्री भी की जा रही है। सूचना की पुष्टि के बाद बुधवार रात पुलिस टीम मौके पर पहुंची। जब पुलिस वहां पहुंची तो आरोपी गुमठी पर मौजूद था। तलाशी के दौरान गुमठी से बड़ी मात्रा में देशी और अंग्रेजी शराब बरामद हुई, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया। आज का राशिफल 12 मार्च 2026: व्यापार में होगा लाभ, धन की होगी वर्षा; पढ़ें सभी राशियों की स्थिति आरोपी को मौके से किया गिरफ्तार कार्रवाई के दौरान पुलिस ने क्वारी बिलगांव निवासी अरविंद कुशवाह, पुत्र दीवान सिंह कुशवाह को मौके से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ अवैध शराब भंडारण और बिक्री का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है ताकि इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिल सके। भोपाल के जवाहर चौक में 5 दुकानों के छज्जे गिरे, मेट्रो निर्माण पर दुकानदारों का विरोध पहले भी दर्ज हैं कई मामले पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी अरविंद कुशवाह पहले भी कई बार अवैध शराब की तस्करी और बिक्री के मामलों में पकड़ा जा चुका है। उसके खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। तेज़ी और स्टेमिना का संगम, Mohammed Siraj बन गए विदेशी पिचों पर भारत की मुख्य ढाल थाना प्रभारी ने दी जानकारी कैलारस थाना प्रभारी सतेंद्र कुशवाह ने बताया कि मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने क्वारी बिलगांव के पास सड़क किनारे स्थित गुमठी पर दबिश दी। तलाशी के दौरान वहां से अवैध शराब बरामद की गई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।
मध्यप्रदेश में अब दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य, मिलावटी दूध पर कड़ा नियंत्रण

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब डेयरी सहकारी समितियों को छोड़कर सभी दूध उत्पादक और विक्रेता लाइसेंस या पंजीकरण के बिना अपने कारोबार को जारी नहीं रख सकते। यह निर्णय एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। सरकार ने दूध संग्रह और परिवहन में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और भंडारण व्यवस्थाओं की नियमित जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे मिलावटी दूध और नकली दुग्ध उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। राज्य में ऐसे दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान की जाएगी जो अभी तक पंजीकृत नहीं हैं। साथ ही, दूध से जुड़ी हर गतिविधि की मासिक निगरानी रिपोर्ट 15 और 30 या 31 तारीख को तैयार कर प्राधिकरण को भेजी जाएगी। मध्यप्रदेश देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहाँ कुल 213 लाख टन दूध का उत्पादन होता है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 9 प्रतिशत है। राज्य में भैंस के दूध का हिस्सा लगभग 48 प्रतिशत है। वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 652 से 707 ग्राम प्रतिदिन रही। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में दूध उत्पादन को वर्तमान 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ अनुबंध भी किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में दूध संग्रह को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 381 नई सहकारी समितियां भी संचालित हो रही हैं। प्रदेश सरकार ने दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना भी शुरू की है। इस योजना के तहत यदि कोई किसान 25 गायों की यूनिट स्थापित करता है, तो उसे 10 लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादन बढ़ाना और किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। केंद्र सरकार भी दूध उत्पादन और बिक्री पर नजर रख रही है। एफएसएसएआई ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र में दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की निगरानी बढ़ाएं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य इस अनिवार्यता से छूट प्राप्त हैं, लेकिन अन्य सभी को खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार पंजीकरण या लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। एफएसएसएआई ने विशेष पंजीकरण अभियान चलाकर उन दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान करने को कहा है जो अब तक पंजीकृत नहीं हैं। साथ ही, दूध संग्रह, परिवहन और भंडारण की जांच को नियमित रूप से लागू करने का निर्देश भी दिया गया है।
सिनेमाघरों में फिर से रिलीज हुई ‘धुरंधर’, विदेशों में भी आदित्य धर के धुरंधरों का जादू

नई दिल्ली। जियो स्टूडियो और बी-62 स्टूडियो की सुपरहिट फिल्म ‘धुरंधर’ अब एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौट रही है। 19 मार्च को रिलीज होने वाली मोस्टअवेटेड सीक्वल ‘धुरंधर द रिवेंज’ से ठीक पहले, मूल फिल्म को दुनिया भर में खास री-रिलीज किया गया है। ‘धुरंधर’ 12 मार्च से भारत में करीब 250 स्क्रीनों पर और 13 मार्च से विदेशों में लगभग 250 स्क्रीनों पर दोबारा दिखाई जाएगी। कुल मिलाकर दुनिया भर में 500 स्क्रीनों पर ‘धुरंधर’ का जादू फिर से देखने को मिलेगा। खास बात यह है कि उत्तर अमेरिका में ही यह फिल्म 185 स्क्रीनों पर री-रिलीज हो रही है, जो इसके सीक्वल को लेकर दर्शकों की भारी मांग को दिखाता है। मेकर्स के अनुसार, फैंस के लिए यह सुनहरा मौका है। वे पहले ‘धुरंधर’ को सिनेमाघरों में दोबारा देख सकेंगे और कुछ ही दिनों बाद उसी कहानी का रोमांचक अगला हिस्सा ‘धुरंधर द रिवेंज’ भी बड़े पर्दे पर एंजॉय कर पाएंगे। हिंदी फिल्मों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर री-रिलीज बहुत कम होती है, ऐसे में यह कदम फ्रेंचाइजी की वैश्विक लोकप्रियता को दिखाता है। वहीं, ‘धुरंधर द रिवेंज’ के स्पेशल प्रीमियर शो 18 मार्च को अमेरिका और कनाडा में आयोजित होंगे। ये शो ज्यादातर प्रीमियम लार्ज फॉर्मेट (पीएलएफ) स्क्रीन्स पर होंगे, जहां बड़ी स्क्रीन, डॉल्बी एटमॉस साउंड, बेहतर प्रोजेक्शन और लग्जरी सीटिंग मिलेगी। ऐसे फॉर्मेट आमतौर पर बड़े हॉलीवुड इवेंट फिल्मों के लिए इस्तेमाल होते हैं। कई प्रीमियर शो के टिकट पहले ही हाउसफुल हो चुके हैं। हाल ही में रिलीज ‘धुरंधर द रिवेंज’ के ट्रेलर को दुनियाभर के दर्शकों से खूब प्यार मिल रहा है। ट्रेड एक्सपर्ट्स और सिनेमाघर मालिक इसकी अंतरराष्ट्रीय रिलीज से बड़ी उम्मीदें लगा रहे हैं। ‘धुरंधर द रिवेंज’ जियो स्टूडियोज की प्रस्तुति और बी 62 स्टूडियोज का प्रोडक्शन है। यह हाई ऑक्टेन स्पाई एक्शन थ्रिलर आदित्यधर ने लिखी और निर्देशित की है। ज्योति देशपांडे और लोकेशधर भी इसके निर्माता हैं। फिल्म 19 मार्च को गुड़ी पड़वा और उगादी के मौके पर हिंदी, तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़ में दुनियाभर में रिलीज होगी।