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Antarctica की बर्फ के नीचे अनोखी अन्टर-सी झील, वैज्ञानिकों को मिले प्राचीन जीवन के संकेत

नई दिल्ली। धरती के सबसे ठंडे और रहस्यमयी महाद्वीप Antarctica में स्थित Lake Untersee दुनिया की सबसे अनोखी झीलों में से एक मानी जाती है। यह झील Queen Maud Land के ग्रुबर पर्वतों के पास अनुचिन ग्लेशियर के किनारे स्थित है। अत्यधिक ठंड के कारण यह झील पूरे साल मोटी बर्फ की परत से ढकी रहती है। यहां का औसत वार्षिक तापमान शून्य से लगभग 10 डिग्री सेल्सियस नीचे रहता है। कठिन और बेहद ठंडे वातावरण के बावजूद यह झील वैज्ञानिकों के लिए किसी प्राकृतिक प्रयोगशाला से कम नहीं है, क्योंकि इसके अंदर ऐसे जीवन के संकेत मिलते हैं जो अरबों साल पुराने हो सकते हैं। उपग्रह से मिली झील की नई तस्वीरहाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के Landsat 9 उपग्रह में लगे ओएलआई सेंसर ने 16 फरवरी 2026 को अंटार्कटिका की गर्मियों के दौरान इस झील की तस्वीर ली। इस तस्वीर में बर्फ से ढकी झील और उसके आसपास का ठंडा व बंजर परिदृश्य साफ दिखाई देता है। वैज्ञानिकों के अनुसार झील का अधिकांश पानी पास स्थित अनुचिन ग्लेशियर के मौसमी पिघलाव से आता है। सूरज की रोशनी बर्फ की परत से होकर नीचे पानी तक पहुंचती है और उसे थोड़ा गर्म करती है, लेकिन तेज हवाएं और बेहद ठंडी सतह वाष्पीकरण और सब्लिमेशन की प्रक्रिया को तेज कर देती हैं। इसी कारण झील की सतह पर बर्फ ज्यादा नहीं पिघलती। झील की गहराई और अनोखी रासायनिक संरचनानासा की वेबसाइट के अनुसार इस झील की अधिकतम गहराई लगभग 558 फीट तक मापी गई है। इसकी सबसे खास बात इसके पानी की अनोखी रासायनिक संरचना है। झील में घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर काफी ज्यादा है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बहुत कम पाई जाती है। इसके अलावा झील का पीएच स्तर काफी एल्कलाइन यानी क्षारीय है। दुनिया में बहुत कम झीलें ऐसी हैं जो पूरे साल जमी रहती हैं और जिनमें बड़े आकार के स्ट्रोमेटोलाइट्स पाए जाते हैं। यही वजह है कि यह झील वैज्ञानिकों के लिए विशेष महत्व रखती है। 3 अरब साल पुराने जीवन का संकेतइस झील में पाए जाने वाले स्ट्रोमेटोलाइट्स दरअसल सूक्ष्मजीवों द्वारा बनाई गई संरचनाएं होती हैं। इन्हें फोटोसिंथेटिक साइनोबैक्टीरिया बनाते हैं, जो चिपचिपी सतह पर तलछट को फंसा कर कैल्शियम कार्बोनेट की परतें बनाते हैं। समय के साथ ये संरचनाएं ऊपर की ओर बढ़ती जाती हैं और ऑक्सीजन छोड़ती हैं। वर्ष 2011 में Dale Andersen और उनकी टीम ने यहां इन विशाल स्ट्रोमेटोलाइट्स की खोज की थी। इनकी ऊंचाई लगभग आधा मीटर तक हो सकती है, जबकि अंटार्कटिका की अन्य झीलों जैसे Lake Joyce में ये केवल कुछ सेंटीमीटर ऊंचे पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये संरचनाएं पृथ्वी पर 3 अरब साल पहले मौजूद शुरुआती जीवन की झलक दिखाती हैं। कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहने वाले जीवइस झील में बड़े जीवों के रूप में टार्डिग्रेड्स पाए जाते हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे मजबूत जीवों में गिना जाता है। ये बेहद कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि झील के साफ पानी, कम तलछट, सीमित रोशनी और बर्फ की मोटी परत के कारण यहां स्ट्रोमेटोलाइट्स असामान्य रूप से बड़े आकार में विकसित हो पाते हैं। यही कारण है कि यह झील सूक्ष्मजीवों के अध्ययन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भी अहमएस्ट्रोबायोलॉजिस्ट इस झील को अंतरिक्ष में जीवन की संभावनाओं को समझने के लिए एक मॉडल के रूप में देखते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह झील Europa और Enceladus जैसे बर्फीले चंद्रमाओं या Mars पर कभी मौजूद रही प्राचीन बर्फीली झीलों के अध्ययन के लिए उपयोगी उदाहरण हो सकती है। इन जगहों पर भी बर्फ के नीचे पानी और सूक्ष्मजीवी जीवन की संभावना जताई जाती है। झील में अचानक आने वाले बदलावहालांकि यह झील बाहर से स्थिर दिखाई देती है, लेकिन इसके भीतर कभी-कभी बड़े बदलाव भी होते हैं। वर्ष 2019 में University of Ottawa के वैज्ञानिकों की एक टीम ने यहां विस्तृत फील्ड रिसर्च की थी। ICESat-2 के डेटा से पता चला कि पास की Lake Obersee के फटने से लगभग 1.75 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी अचानक इस झील में आ गया था। इस घटना से झील के पीएच स्तर और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में बदलाव आया, जिससे सूक्ष्मजीवी जीवन की गतिविधियों में वृद्धि देखी गई। पर्यावरण के लिए चेतावनी भीवैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लेशियल झीलों के अचानक फटने से आने वाली ऐसी बाढ़ अंटार्कटिका के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा बन सकती है। इसलिए इस क्षेत्र में लगातार निगरानी और शोध की जरूरत है। इसके बावजूद लेक अन्टरसी आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्यमयी और अनमोल प्राकृतिक प्रयोगशाला बनी हुई है, जहां पृथ्वी के शुरुआती जीवन के रहस्यों को समझने की नई संभावनाएं छिपी हुई हैं।

International Cricket Council ने दी जानकारी, West Indies cricket team और South Africa national cricket team के बचे खिलाड़ी स्वदेश रवाना

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद International Cricket Council (आईसीसी) ने गुरुवार को पुष्टि की कि दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज की टीमों के बाकी खिलाड़ी भी अब अपने-अपने देशों के लिए रवाना हो गए हैं। दरअसल, ICC Men’s T20 World Cup 2026 खत्म होने के बाद दोनों टीमों के कुछ खिलाड़ी और स्टाफ सदस्य भारत में ही रुक गए थे। मिडिल ईस्ट में चल रहे भू-राजनीतिक संकट और हवाई यात्रा में आई बाधाओं के कारण उनकी वापसी में देरी हो गई थी। अब आईसीसी के समन्वय और प्रयासों के बाद सभी खिलाड़ियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की गई है। पिछले 24 घंटों में रवाना हुए अंतिम ट्रैवल ग्रुपआईसीसी के अनुसार पिछले 24 घंटों के भीतर दक्षिण अफ्रीका के बचे हुए 29 सदस्य और वेस्टइंडीज के 16 सदस्य फ्लाइट से अपने-अपने देशों के लिए रवाना हो गए। इसके साथ ही खिलाड़ियों और स्टाफ की घर वापसी से जुड़ा एक जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन पूरा हो गया। आईसीसी ने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन में कई बाधाएं आई थीं, जिससे खिलाड़ियों की यात्रा योजनाओं में लगातार बदलाव करना पड़ा। क्रिकेट बोर्ड और स्टाफ का जताया आभारआईसीसी ने इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग के लिए Cricket South Africa और Cricket West Indies का आभार जताया। परिषद ने अपने स्टाफ की भी सराहना की, जिन्होंने खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और उनके परिवारों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम किया। आईसीसी ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में सभी संबंधित एजेंसियों और क्रिकेट बोर्डों के बीच बेहतर तालमेल के कारण ही यह ऑपरेशन सफल हो सका। पहले भी कुछ खिलाड़ी लौट चुके थेआईसीसी ने इससे पहले बुधवार को जानकारी दी थी कि दक्षिण अफ्रीका के चार खिलाड़ी और उनके परिवार के पांच सदस्य पहले ही अपने देश के लिए रवाना हो चुके थे। वहीं बाकी 29 सदस्य अगले 24 घंटों के भीतर यात्रा करने वाले थे। इसी तरह वेस्टइंडीज टीम के नौ सदस्य पहले ही कैरिबियन के लिए रवाना हो गए थे, जबकि बाकी 16 खिलाड़ियों ने भारत से उड़ान भरने के लिए अपनी फ्लाइट बुक कर ली थी। मिडिल ईस्ट संकट से प्रभावित हुई हवाई यात्राखिलाड़ियों की घर वापसी में देरी की मुख्य वजह खाड़ी क्षेत्र में चल रहा संकट रहा। इस स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में बड़े पैमाने पर व्यवधान पैदा हुआ। कई देशों ने सुरक्षा कारणों से अपना एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। इसके अलावा मिसाइल अलर्ट, उड़ानों के रूट में बदलाव, और कमर्शियल तथा चार्टर फ्लाइट्स के अचानक स्थगित होने या रीशेड्यूल होने जैसी समस्याओं के कारण भी यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई एजेंसियों के समन्वय से संभव हुआ ऑपरेशनआईसीसी की ऑपरेशन और लॉजिस्टिक्स टीमों ने इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में कई एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया। परिषद ने बताया कि सरकारों, एयरलाइंस, चार्टर सेवा प्रदाताओं, एयरपोर्ट अथॉरिटीज और सदस्य क्रिकेट बोर्डों के साथ लगातार समन्वय किया गया। हालात के अनुसार यात्रा योजनाओं में बदलाव किए गए ताकि खिलाड़ियों और स्टाफ को सुरक्षित तरीके से उनके देशों तक पहुंचाया जा सके। आईसीसी ने बताई सीमाएंआईसीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रा से जुड़ी कई समस्याएं उसके नियंत्रण से बाहर थीं। वैश्विक स्तर पर पैदा हुई सुरक्षा और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण उड़ानों के संचालन में अचानक बदलाव हो रहे थे। इसके बावजूद परिषद ने सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर खिलाड़ियों की सुरक्षित वापसी को प्राथमिकता दी और अंततः सभी सदस्यों को सुरक्षित घर भेजने में सफलता हासिल की।

Indian Wells Open: Yuki Bhambri-Andre Goransson की जोड़ी ने बनाई सेमीफाइनल में जगह

नई दिल्ली। भारतीय टेनिस खिलाड़ी युकी भांबरी और उनके स्वीडिश जोड़ीदार आंद्रे गोरान्सन ने शानदार खेल दिखाते हुए इंडियन वेल्स ओपन के पुरुष डबल्स सेमीफाइनल में जगह बना ली है। गुरुवार सुबह खेले गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में इस जोड़ी ने ऑस्ट्रिया के Alexander Erler और इटली के Andrea Vavassori की मजबूत जोड़ी को 6-3, 7-6(2) से हराया। मुकाबले में भांबरी और गोरान्सन ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और पहले सेट को 6-3 से अपने नाम कर लिया। दूसरे सेट में मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन टाईब्रेक में इस जोड़ी ने शानदार नियंत्रण दिखाते हुए मैच जीतकर सेमीफाइनल का टिकट पक्का कर लिया। मास्टर्स 1000 स्तर पर भांबरी का पहला सेमीफाइनलयह उपलब्धि युकी भांबरी के करियर के लिए काफी अहम मानी जा रही है। एटीपी मास्टर्स 1000 स्तर के किसी टूर्नामेंट में यह उनका पहला सेमीफाइनल है। इससे पहले वह दो बार इस स्तर के टूर्नामेंट में डबल्स क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे थे। उन्होंने Indian Wells 2025 में आंद्रे गोरान्सन के साथ और Miami Open में Nuno Borges के साथ क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। इस बार सेमीफाइनल में पहुंचकर उन्होंने अपने करियर में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। पूरे टूर्नामेंट में शानदार लयभांबरी और गोरान्सन की जोड़ी इस टूर्नामेंट में अब तक शानदार लय में दिखाई दी है। खास बात यह है कि दोनों खिलाड़ियों ने अभी तक एक भी सेट नहीं गंवाया है। राउंड ऑफ 16 में उन्होंने नीदरलैंड के Sander Arends और चेक गणराज्य के Jiří Lehečka की जोड़ी को 6-4, 6-4 से हराया था। इससे पहले पहले दौर में उन्होंने David Pel और Fabrice Martin की जोड़ी को 6-1, 6-3 से हराकर अपने अभियान की धमाकेदार शुरुआत की थी। लगातार सीधे सेटों में जीत से इस जोड़ी का आत्मविश्वास काफी मजबूत हुआ है। सेमीफाइनल में कड़ी चुनौतीअब सेमीफाइनल में भांबरी और गोरान्सन की जोड़ी का सामना रूस के Karen Khachanov और Andrey Rublev की जोड़ी तथा फ्रांस के Arthur Rinderknech और मोनाको के Valentin Vacherot की जोड़ी के बीच होने वाले मुकाबले के विजेताओं से होगा। इस मुकाबले में जीत दर्ज करने वाली जोड़ी फाइनल में जगह बनाएगी। ऐसे में भांबरी और गोरान्सन के सामने कड़ी चुनौती होगी, लेकिन मौजूदा फॉर्म को देखते हुए उनसे एक और शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। एटीपी रैंकिंग में भी बड़ी उपलब्धिहाल ही में युकी भांबरी ने एटीपी डबल्स रैंकिंग में भी एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पिछले महीने वह विश्व रैंकिंग में 20वें स्थान पर पहुंचे, जो उनके करियर की अब तक की सर्वोच्च रैंकिंग है। इसके साथ ही वह Rohan Bopanna के बाद टॉप-20 में जगह बनाने वाले पहले भारतीय पुरुष डबल्स खिलाड़ी बन गए। यह उपलब्धि उनके लगातार बेहतर प्रदर्शन का परिणाम मानी जा रही है। पिछले सीजन से शानदार फॉर्म मेंयुकी भांबरी पिछले कुछ समय से डबल्स टेनिस में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने 2025 सीजन में कई बड़े टूर्नामेंटों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। US Open में वह न्यूजीलैंड के Michael Venus के साथ सेमीफाइनल तक पहुंचे थे। हालांकि वहां उन्हें ब्रिटेन की जोड़ी Joe Salisbury और Neal Skupski से कड़े मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था। दुबई में जीता पहला एटीपी 500 खिताबमार्च 2025 में भांबरी ने अपने करियर का पहला एटीपी 500 डबल्स खिताब भी जीता था। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के Alexei Popyrin के साथ मिलकर Dubai Tennis Championships में यह उपलब्धि हासिल की थी। फाइनल मुकाबले में उन्होंने फिनलैंड के Harri Heliövaara और ब्रिटेन के Henry Patten को रोमांचक मुकाबले में 3-6, 7-6(12), 10-8 से हराया था। एक समय यह जोड़ी मैच हारने के करीब थी, लेकिन चार मैच पॉइंट बचाकर उन्होंने शानदार वापसी की और खिताब अपने नाम कर लिया।

ईरान के हमलों के बीच कतर से सीमित उड़ानें शुरू, भारत के लिए भी विशेष विमान रवाना

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान की ओर से जारी हमलों के बीच नागरिक उड़ानों पर भारी असर पड़ा है। दूसरे देशों के नागरिक इस तनावपूर्ण माहौल में फंसे हुए हैं। इसी बीच कतार वायुमार्ग ने 12 मार्च से दोहा से सीमित उड़ानों का संचालन शुरू करने की घोषणा की है। एयरलाइन ने बताया कि 12 से 17 मार्च तक दोहा के लिए और दोहा से सीमित विमान चलाए जाएंगे। एयरलाइन के अपडेटेड शेड्यूल के अनुसार 12 मार्च को हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कुल 29 विमान उड़ान भरेंगे जिनमें 15 प्रस्थान और 14 आगमन होंगे। दोहा से उड़ानें मुंबई नई दिल्ली कोच्चि इस्लामाबाद न्यूयॉर्क फ्रैंकफर्ट बीजिंग लंदन काहिरा और जोहान्सबर्ग के लिए होंगी। वहीं दोहा आने वाली उड़ानों में सोल जेद्दा नई दिल्ली हांगकांग मस्कट मेलबर्न डलास और बैंकॉक शामिल हैं। भारत के लिए उड़ानों का विशेष शेड्यूल भी तैयार किया गया है। 13 मार्च को दोहा से कोच्चि के लिए उड़ान होगी। 14 मार्च को मुंबई 15 मार्च को नई दिल्ली और 16 मार्च को कोच्चि और मुंबई के लिए उड़ानें संचालित होंगी। वहीं कोच्चि से दोहा 14 मार्च को मुंबई से 15 मार्च और नई दिल्ली से 16 मार्च को विमान रवाना होंगे। 17 मार्च को दोहा से कोच्चि और मुंबई के लिए उड़ानें जारी रहेंगी। कतर एयरवेज ने कहा कि कतर नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अस्थायी प्राधिकरण मिलने के बाद लिमिटेड ऑपरेटिंग कॉरिडोर का इस्तेमाल कर विमान संचालित किए जा रहे हैं। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि ये उड़ानें नियमित कमर्शियल ऑपरेशन की वापसी नहीं हैं। इन अस्थायी उड़ानों का उद्देश्य प्रभावित यात्रियों को उनके परिवार और प्रियजनों से मिलाना है। कतर एयरस्पेस की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही नियमित संचालन फिर से शुरू होगा। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने कैबिनेट मीटिंग में कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष के दौरान देश की तैयारियों और क्षमता को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने नागरिक सुरक्षा और एयरलाइन संचालन की स्थिरता पर जोर दिया। इस बीच बहरीन के गृह मंत्रालय ने जानकारी दी कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ जासूसी के आरोप में चार बहरीन नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें उम्र 22 से 36 वर्ष के लोग शामिल हैं जबकि एक 25 वर्षीय व्यक्ति विदेश में फरार है। मंत्रालय के अनुसार आरोपियों ने हाई रिजॉल्यूशन कैमरा और एन्क्रिप्टेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर महत्वपूर्ण स्थानों की तस्वीरें ली और उन्हें IRGC को भेजा। सुरक्षा और यात्री सुविधा को ध्यान में रखते हुए कतर एयरवेज का यह कदम संकटग्रस्त क्षेत्र में फंसे यात्रियों के लिए राहत का संकेत देता है खासकर भारत समेत अन्य देशों के नागरिकों के लिए।

मध्य पूर्व संघर्ष में 1100 से ज्यादा बच्चे बने निशाना, यूनिसेफ ने कूटनीति और बातचीत से हल निकालने की अपील की

नई दिल्ली । मध्य पूर्व में ईरान की ओर से जारी हमलों के बीच संयुक्त राष्ट्र के बाल आपातकालीन कोष ने चिंताजनक आंकड़े साझा किए हैं। 28 फरवरी से अब तक इस क्षेत्र में 1100 से अधिक बच्चे या तो घायल हो गए हैं या उनकी मौत हो चुकी है। इसमें ईरान में 200, लेबनान में 91, इजरायल में चार और कुवैत में एक बच्चा शामिल है। यूनिसेफ ने चेताया है कि जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ेगा, यह संख्या और बढ़ सकती है। यूनिसेफ ने बच्चों को निशाना बनाने और उनकी निर्भरता पर हमलों की कड़ी निंदा की। संगठन ने बताया कि पढ़ाई में बड़े पैमाने पर बाधा उत्पन्न होने के कारण लाखों बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, जबकि लगातार बमबारी और हमलों से लाखों बच्चे बेघर हो चुके हैं। सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें हॉस्पिटल, स्कूल और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं, को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है या नष्ट कर दिया गया है। बच्चों को मारना या उनके जीवन और शिक्षा के आधारभूत साधनों को नुकसान पहुंचाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। यूनिसेफ ने कहा कि हथियारों से होने वाली लड़ाई में बच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन माना जा सकता है। संगठन ने सभी संघर्षरत पक्षों से अपील की है कि वे लड़ाई के तरीके और साधनों का चुनाव करते समय बच्चों और आम नागरिकों को न्यूनतम जोखिम में रखें। खासकर ऐसे विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल करने से बचें जिनका असर बच्चों पर अधिक होता है। यूनिसेफ ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के नेतृत्व में सभी पक्षों से संघर्ष रोकने और कूटनीतिक बातचीत में शामिल होने की पुरजोर अपील की। संगठन ने चेताया कि इस इलाके के लगभग 20 करोड़ बच्चे दुनिया से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। यूनिसेफ का यह बयान वैश्विक समुदाय को याद दिलाता है कि युद्ध केवल सैन्य या राजनीतिक संकट नहीं है, बल्कि इसमें सबसे संवेदनशील वर्ग बच्चे भी सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। संगठन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके बुनियादी अधिकारों की रक्षा के बिना इस संकट का स्थायी समाधान संभव नहीं है। संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों, अस्पतालों और अन्य बुनियादी सेवाओं को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। यूनिसेफ ने सभी पक्षों से कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानवता की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि बच्चों और आम नागरिकों के जीवन को बचाया जा सके। यूनिसेफ का यह आंकड़ा और चेतावनी वैश्विक समुदाय के लिए गंभीर संदेश है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष में मानवीय राहत और कूटनीतिक प्रयासों को सबसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सोने-चांदी के दामों में गिरावट, महंगाई और युद्ध ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई और मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष ने भारत में सोना और चांदी के बाजार को प्रभावित किया है। आज सुबह 9:15 बजे के आसपास एमसीएक्स पर अप्रैल वायदा सोना 0.10% गिरकर ₹1,61,660 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी मई वायदा 0.57% की गिरावट के साथ ₹2,66,969 प्रति किलोग्राम पर थी। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और सोने पर दबाव बढ़ गया। ब्लूमबर्ग के अनुसार सिंगापुर में सुबह 8:05 बजे सोने की कीमत 0.9% गिरकर $5,132.76 प्रति औंस और चांदी 1.5% गिरकर $84.44 प्रति औंस पर आ गई। इसी दौरान प्लैटिनम में 1% और पैलेडियम में 0.8% की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञ हेबे चेन के मुताबिक, सोने की गिरावट को “हार मानने” की तरह नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि यह एक “अस्थायी ठहराव” है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और मजबूत डॉलर ने फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को टाल दिया है, जिसके चलते निवेशक फिलहाल सोने से किनारा कर रहे हैं। सोने का यह गिरना निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह अभी भी सुरक्षित निवेश के रूप में लोकप्रिय है। हालांकि, ब्याज दरों की बढ़ोतरी और वैश्विक तनाव के कारण सोने में तत्काल लाभ की संभावना कम हो गई है। एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में भी युद्ध के बाद सोने की मात्रा में गिरावट आई है, हालांकि पिछले सप्ताह इसमें कुछ निवेश दर्ज किए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने का सुरक्षित निवेश का दौर खत्म नहीं हुआ है। इस साल अब तक सोने की कीमतों में लगभग 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के समय यह निवेशकों को भरोसा देता रहा है। चेन का कहना है कि फिलहाल सोने की रफ्तार थमी हुई है, लेकिन यह सिर्फ एक “सांस लेने” का दौर है, और लंबी अवधि में इसका महत्व बरकरार रहेगा। कीवर्ड्स: सोना, चांदी, महंगाई, डॉलर मजबूती, युद्ध

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की 3 मई से गोरखपुर से शुरू होगी ‘गविष्ट यात्रा’, बनाएंगे ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’

प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) ने घोषणा की है कि वह 3 मई से गोरखपुर से ‘गविष्ट यात्रा’ की शुरुआत करेंगे। यह अभियान 81 दिनों तक चलेगा और 23 जुलाई को गोरखपुर में ही इसका समापन होगा। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान टीमें उत्तर प्रदेश के गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगी और सनातन धर्म व गौसंरक्षण के मुद्दों पर संवाद करेंगी। प्रयागराज में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि इस यात्रा के माध्यम से राज्य के करीब 1.08 लाख गांवों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने समर्थकों से टीम बनाकर गांव-गांव जाने और प्रमाण के साथ सच बात जनता तक पहुंचाने का आह्वान किया। अनुमति को लेकर लगाए आरोप स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कई बाधाएं खड़ी की गईं। उनके अनुसार पहले काशी में कार्यक्रम रोकने की कोशिश हुई, फिर लखनऊ में प्रवेश को लेकर आपत्ति जताई गई और अंततः देर रात 16 शर्तों के साथ अनुमति दी गई, जिसके बाद 10 और शर्तें जोड़कर कुल 26 कर दी गईं। ‘शंकराचार्य पद सनातन धर्म का सुप्रीम कोर्ट’ अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शंकराचार्य पद सनातन धर्म में सर्वोच्च स्थान रखता है। उनके मुताबिक यह व्यवस्था ज्ञान और परंपरा पर आधारित है, न कि भीड़तंत्र पर। उन्होंने गौसंरक्षण और सनातन धर्म की रक्षा को समाज की जिम्मेदारी बताते हुए संत समाज से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। ‘कोई राजनीतिक दल नहीं बना रहे’ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कोई राजनीतिक दल बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि संत समाज जनता के बीच जाकर केवल यह संदेश देगा कि जो भी गौसंरक्षण और समाज के हित में काम करे, उसे ही समर्थन दिया जाना चाहिए। अखाड़ों को लिखा जाएगा पत्र उन्होंने कहा कि साधु समाज में आई कुछ विकृतियों पर भी चर्चा की जाएगी। इसके लिए विभिन्न अखाड़ों को पत्र लिखकर उनकी भूमिका स्पष्ट करने को कहा जाएगा। साथ ही उन्होंने ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’ बनाने की बात भी कही, जिसमें संन्यासी, बैरागी, उदासीन और गृहस्थ शामिल होंगे।

मिडिल ईस्ट युद्ध में दो भारतीयों की मौत, एक अब भी लापता; विदेश मंत्रालय ने दी पहली आधिकारिक जानकारी

नई दिल्ली/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत के दो नागरिकों की मौत हो गई है, जबकि एक भारतीय अब भी लापता बताया जा रहा है। इस बारे में पहली बार आधिकारिक जानकारी देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs (India) के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल (Randhir Jaiswal) ने बुधवार को पुष्टि की कि क्षेत्र में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने क े लिए सरकार लगातार निगरानी कर रही है। जहाजों पर हमले के दौरान हुई घटना विदेश मंत्रालय के अनुसार, मृतक भारतीय उन व्यापारिक जहाजों पर सवार थे जिन पर संघर्ष प्रभावित समुद्री क्षेत्र में हमला हुआ था। इस दौरान कुछ अन्य भारतीय नागरिक घायल भी हुए हैं। मंत्रालय के मुताबिक एक भारतीय नागरिक Israel में घायल हुआ है, जबकि Dubai में भी एक भारतीय के घायल होने की सूचना मिली है। फिलहाल दो भारतीयों की मौत की पुष्टि हुई है और एक व्यक्ति अभी भी लापता है। भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि विदेश मंत्रालय प्रभावित परिवारों के संपर्क में है और क्षेत्र में मौजूद भारतीय दूतावास व वाणिज्य दूतावास भारतीय समुदाय को हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं। स्थिति को देखते हुए नई दिल्ली में 24 घंटे काम करने वाला एक विशेष नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है, जो आपातकालीन कॉल और ईमेल प्राप्त कर संबंधित देशों में भारतीय मिशनों के साथ समन्वय कर रहा है। पीएम मोदी और विदेश मंत्री स्थिति पर नजर रखे हुए विदेश मंत्रालय के अनुसार Narendra Modi पश्चिम एशिया के हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और United Arab Emirates, Qatar, Saudi Arabia, Oman, Bahrain, Jordan, Kuwait और Israel के नेताओं के संपर्क में हैं। वहीं विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar भी Iran समेत कई देशों के अपने समकक्षों से लगातार बातचीत कर रहे हैं। युद्ध से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाया। इस संघर्ष के कारण समुद्री मार्गों में बाधा आई है और वैश्विक ऊर्जा बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिरता पर भी असर पड़ रहा है।

क्या है इच्छामृत्यु? भारत में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी, जानिए दुनिया में इसका इतिहास और कानून

नई दिल्ली। भारत में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) को मंजूरी देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। यह फैसला Harish Rana vs Union of India मामले में आया, जिसमें 32 वर्षीय हरीश राणा की निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अपील स्वीकार कर ली गई। Supreme Court of India की जस्टिस J. B. Pardiwala और जस्टिस K. V. Viswanathan की पीठ ने यह निर्णय सुनाया। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा एक इमारत से गिरने के बाद पिछले 13 साल से अचेत अवस्था में हैं। बेटे की लगातार बिगड़ती हालत को देखते हुए उनके माता-पिता ने अदालत से जीवन रक्षक उपकरण हटाने की अनुमति मांगी थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इस फैसले के बाद इच्छामृत्यु को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। आइए जानते हैं कि इच्छामृत्यु क्या है और दुनिया में इसका इतिहास क्या रहा है। क्या होती है इच्छामृत्यु इच्छामृत्यु (Euthanasia) का अर्थ है किसी ऐसे व्यक्ति के जीवन को जानबूझकर समाप्त करना, जो असाध्य या लाइलाज बीमारी से पीड़ित हो और असहनीय दर्द झेल रहा हो। इसका उद्देश्य उस व्यक्ति को कष्ट से मुक्ति दिलाना होता है। इच्छामृत्यु मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। 1. सक्रिय इच्छामृत्यु (Active Euthanasia) इसमें मरीज की मृत्यु लाने के लिए डॉक्टर या कोई व्यक्ति सक्रिय कदम उठाता है, जैसे घातक दवा या इंजेक्शन देना। उदाहरण के तौर पर मरीज को ऐसा इंजेक्शन देना जिससे वह गहरी नींद में चला जाए और उसकी दर्दरहित मृत्यु हो जाए। 2. निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) इसमें मरीज को जिंदा रखने वाले इलाज या जीवन रक्षक उपकरण हटा लिए जाते हैं। डॉक्टर सीधे मौत नहीं देते, बल्कि उपचार बंद कर देते हैं, जिससे मरीज प्राकृतिक रूप से मृत्यु को प्राप्त होता है। प्राचीन काल में इच्छामृत्यु इच्छामृत्यु का विचार बहुत पुराना है। लगभग 8वीं सदी ईसा पूर्व के महाकाव्य Iliad में घायल योद्धाओं के दर्द से मुक्ति के लिए दया मृत्यु का उल्लेख मिलता है। भारतीय परंपरा में भी तपस्वियों द्वारा प्रायोपवेश (आमरण अनशन के माध्यम से प्राण त्यागना) की परंपरा रही है, जिसका उल्लेख Mahabharata में मिलता है। प्राचीन यूनान में दार्शनिक Plato ने अपनी पुस्तक Republic में असाध्य रोगियों के लिए इच्छामृत्यु का समर्थन किया था। हालांकि करीब 400 ईसा पूर्व में ली जाने वाली Hippocratic Oath ने सक्रिय इच्छामृत्यु का विरोध किया और कहा कि डॉक्टर किसी मरीज को घातक दवा नहीं देंगे। मध्यकाल में धार्मिक प्रतिबंध ईसाई धर्म के प्रसार के बाद इच्छामृत्यु को पाप और हत्या के समान माना गया। धार्मिक विचारक Augustine of Hippo और Thomas Aquinas ने इसे ईश्वर की इच्छा के विरुद्ध बताया। इस्लाम और यहूदी धर्म में भी सक्रिय इच्छामृत्यु को प्रतिबंधित किया गया, हालांकि कुछ परिस्थितियों में जीवन रक्षक उपचार रोकने की अनुमति दी गई। 19वीं और 20वीं सदी में बहस 19वीं सदी में आधुनिक चिकित्सा के विकास के साथ इच्छामृत्यु पर फिर से बहस शुरू हुई। 1870 में डॉक्टर Samuel D. Williams ने अंतिम अवस्था के मरीजों को क्लोरोफॉर्म देने का सुझाव दिया था। 20वीं सदी में नाजी जर्मनी के कुख्यात Aktion T4 program के कारण इच्छामृत्यु की अवधारणा विवादित हो गई। 1939-1945 के बीच नाजी शासन ने इस कार्यक्रम के नाम पर हजारों लोगों की हत्या कर दी थी। आज किन देशों में मान्य है इच्छामृत्यु समय के साथ कई देशों ने सख्त नियमों के तहत इच्छामृत्यु या सहायता प्राप्त मृत्यु को कानूनी मान्यता दी है। Netherlands (2001) और Belgium (2002) ने सक्रिय इच्छामृत्यु को वैध बनाया। Canada ने 2016 में मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग (MAiD) कार्यक्रम शुरू किया। Switzerland में 1942 से सहायता प्राप्त आत्महत्या कानूनी है। United States के कुछ राज्यों में “Death with Dignity” कानून लागू है, जिसकी शुरुआत Oregon में 1997 में हुई। Spain, Austria, Australia, New Zealand, Colombia और Ecuador में भी विभिन्न रूपों में इसे अनुमति मिली है। किन देशों में सख्त प्रतिबंध कई इस्लामिक देशों में शरिया कानून के तहत इच्छामृत्यु के किसी भी रूप पर प्रतिबंध है। वहीं France और United Kingdom जैसे देशों में सक्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति नहीं है, बल्कि मरीजों को दर्द से राहत देने के लिए पालीएटिव केयर और सिडेशन पर जोर दिया जाता है। भारत में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इच्छामृत्यु के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण कानूनी और नैतिक बहस को नई दिशा देता है। हालांकि यह केवल निष्क्रिय इच्छामृत्यु तक सीमित है, लेकिन इससे भविष्य में चिकित्सा नैतिकता और मरीज के अधिकारों पर व्यापक चर्चा की संभावना बढ़ गई है।

ईरानी स्कूल पर मिसाइल हमले में 168 बच्चों की मौत, अमेरिकी जांच में चौंकाने वाला खुलासा

वॉशिंगटन। ईरान के मीनाब शहर में एक स्कूल पर हुए भीषण मिसाइल हमले को लेकर अमेरिकी सैन्य जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच के मुताबिक इस हमले के लिए खुद अमेरिका जिम्मेदार हो सकता है। इस हमले में करीब 175 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 168 मासूम बच्चे शामिल थे। यदि यह आधिकारिक रूप से पुष्टि हो जाती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान नागरिकों की मौत की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जाएगी। पुराने खुफिया डेटा से हुई चूक अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह हमला Minab शहर के एक प्राथमिक विद्यालय पर हुआ। जांच में सामने आया कि United States Central Command ने लक्ष्य तय करने के लिए Defense Intelligence Agency (DIA) के पुराने खुफिया डेटा का इस्तेमाल किया था। असल में टॉमहॉक मिसाइल का निशाना स्कूल नहीं, बल्कि उसके पास स्थित एक ईरानी सैन्य ठिकाना था। यह स्कूल पहले उसी सैन्य परिसर का हिस्सा था, लेकिन बाद में इसे अलग कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि Shajareh Taybeh Elementary School 2017 तक सैन्य बेस से जुड़ा हुआ था। इसके बाद वहां दीवार बनाकर परिसर अलग कर दिया गया और वॉच टावर भी हटा दिया गया। स्कूल की इमारत को चमकीले रंगों से रंगा गया था और ऑनलाइन मैप्स में भी इसे स्पष्ट रूप से “स्कूल” के रूप में दर्ज किया गया था। यह हमला शनिवार सुबह हुआ, जो ईरान में स्कूल सप्ताह का पहला दिन होता है और उस समय स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद थे। क्या AI सिस्टम से हुई गलती? इस त्रासदी के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह चूक किसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम की वजह से हुई। ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिकी सेना तकनीक और एआई आधारित टार्गेटिंग सिस्टम पर काफी निर्भर है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सेना वॉर-टेक कंपनी Palantir Technologies के “मेवेन स्मार्ट सिस्टम” का इस्तेमाल करती है। इसमें एआई कंपनी Anthropic के मॉडल “Claude” का उपयोग किया जाता है, जो रियल-टाइम लोकेशन और टार्गेटिंग डेटा प्रदान करता है। प्रारंभिक आशंका है कि एआई सिस्टम स्कूल की बदली हुई लोकेशन और उपयोग को अपडेट करने में विफल रहा, जिससे यह घातक गलती हुई। अमेरिका का आधिकारिक रुख अमेरिका ने नागरिक ठिकानों पर हमला न करने की नीति दोहराते हुए कहा है कि मामले की जांच जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने शुरुआत में दावा किया कि ईरान ने खुद ही स्कूल पर बमबारी की होगी क्योंकि उसके हथियार अक्सर सटीक नहीं होते। हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि वह जांच के नतीजों का इंतजार करेंगे और Pentagon की रिपोर्ट को स्वीकार करेंगे। इस घटना को लेकर अमेरिकी संसद में भी सवाल उठने लगे हैं। 45 से अधिक डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने रक्षा सचिव Pete Hegseth को पत्र लिखकर जवाब मांगा है। वहीं रिपब्लिकन सीनेटर Kevin Cramer और सीनेटर Tim Kaine ने भी इस घटना की गहन जांच की मांग की है। ईरान का तीखा आरोप इस हमले के बाद ईरान ने अमेरिका पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने सोशल मीडिया पर हमले का वीडियो साझा करते हुए इसे “जघन्य युद्ध अपराध” बताया। वहीं ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने सामूहिक कब्रों के ड्रोन फुटेज साझा करते हुए कहा कि यह हमला निर्दोष बच्चों की हत्या है और इसे बिना सजा के नहीं छोड़ा जाना चाहिए। यह घटना पहले से ही तनावपूर्ण Iran-Israel संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है और युद्ध में एआई तकनीक के इस्तेमाल पर भी नई बहस शुरू हो गई है।