ट्रंप का दावा: अमेरिकी हमलों में ईरान की नौसेना और वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह नष्ट, अभियान अभी जारी

नई दिल्ली । वाशिंगटन से रवाना होते समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियान को लेकर बेहद चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ढांचे को इतनी भयंकर क्षति पहुँचाई है कि अब वहां कुछ भी सुरक्षित नहीं बचा है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान की नौसेना की पूरी क्षमता और उसकी वायु रक्षा प्रणाली अब पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। ट्रंप के अनुसार अमेरिकी हमलों ने ईरानी एयरबेस, नौसैनिक जहाजों और रडार सिस्टम को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि ईरान के कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेता भी इस अभियान में प्रभावित हुए हैं, जिससे नेतृत्व संकट उत्पन्न हो गया है। व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने अमेरिकी सेना की ताकत और कार्यक्षमता की तारीफ करते हुए इसे विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना बताया। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि अमेरिकी सेना ने कुछ महत्वपूर्ण ईरानी ठिकानों को जानबूझकर सुरक्षित छोड़ दिया है। उनके अनुसार, यदि अमेरिका चाहे तो केवल एक घंटे में उन बचे हुए ठिकानों को भी पूरी तरह से नष्ट कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई ईरान के लिए अपने देश को फिर से खड़ा करना लगभग असंभव बना देगी। ट्रंप ने यह साफ किया कि अमेरिकी हमले केवल जवाबी कार्रवाई नहीं थे, बल्कि ईरान की सैन्य क्षमता को जड़ से समाप्त करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थे। उनके अनुसार ईरान की नौसेना के अधिकांश जहाज अब समुद्र की गहराई में डूब चुके हैं और वायुसेना भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त है। इस बयान से स्पष्ट होता है कि अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से पंगु बनाने की पूरी योजना बनाई है। पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या अमेरिकी कार्रवाई अब रोक दी जाएगी। ट्रंप ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि अभियान अभी जारी है और सेना आगे की कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा संदेश है कि अमेरिका की सुरक्षा से खिलवाड़ भारी पड़ेगा। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, जिसे अमेरिका ने पहले कभी नहीं देखा। विश्व के रक्षा विशेषज्ञ और राजनेता अब ट्रंप के इस दावे पर बहस कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और सैन्य पटल पर हलचल मचा दी है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर हैं कि ईरान इस विनाशकारी दावे और सैन्य क्षति के बारे में क्या प्रतिक्रिया देता है।
सैमसन नहीं, Jasprit Bumrah थे असली हकदार: ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ पर AB de Villiers की राय

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने ICC Men’s T20 World Cup 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने New Zealand national cricket team को 96 रन से हराकर ट्रॉफी जीती। पूरे टूर्नामेंट में कई भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ का पुरस्कार विकेटकीपर बल्लेबाज Sanju Samson को दिया गया। हालांकि दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान AB de Villiers का मानना है कि तेज गेंदबाज Jasprit Bumrah भी इस सम्मान के उतने ही बड़े दावेदार थे। डिविलियर्स ने बताया क्यों बुमराह थे मजबूत दावेदारएबी डिविलियर्स ने अपने यूट्यूब चैनल पर टूर्नामेंट का विश्लेषण करते हुए कहा कि प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के लिए संजू सैमसन और जसप्रीत बुमराह के बीच काफी करीबी मुकाबला था। उनके अनुसार कई ऐसे मौके आए जब बुमराह की गेंदबाजी ने मैच का रुख बदल दिया और भारत को निर्णायक बढ़त दिलाई। डिविलियर्स ने कहा कि जब उन्होंने बुमराह को दबाव भरे पलों में गेंदबाजी करते देखा तो उन्हें लगा कि यह अवॉर्ड उनके नाम भी जा सकता था। उनका मानना है कि टूर्नामेंट के कुछ अहम क्षणों में बुमराह का प्रदर्शन भारत की जीत की सबसे बड़ी वजहों में से एक रहा। मुश्किल हालात में भी मैच पलट देते हैं बुमराहडिविलियर्स ने बुमराह की तारीफ करते हुए कहा कि भारत जैसे देश में तेज गेंदबाज के तौर पर गेंदबाजी करना आसान नहीं होता, क्योंकि यहां की पिचें अक्सर बल्लेबाजों के अनुकूल होती हैं। लेकिन बुमराह ऐसे गेंदबाज हैं जो किसी भी परिस्थिति में मैच का रुख बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब टीम को विकेट की जरूरत होती है, तब बुमराह एक अलग गियर में आ जाते हैं और विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बना देते हैं। डिविलियर्स के मुताबिक बुमराह भारतीय टीम के लिए एक अमूल्य संपत्ति हैं और उनकी मौजूदगी गेंदबाजी आक्रमण को बेहद खतरनाक बना देती है। टूर्नामेंट में बुमराह का शानदार प्रदर्शनटी20 विश्व कप 2026 में जसप्रीत बुमराह का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने 8 मैचों में 14 विकेट हासिल किए और टूर्नामेंट के शीर्ष विकेट लेने वाले गेंदबाजों में शामिल रहे। वह स्पिनर Varun Chakravarthy के साथ संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे, हालांकि वरुण ने बुमराह से एक मैच ज्यादा खेला था। बुमराह की इकॉनमी रेट भी काफी किफायती रही, जिसने विरोधी टीमों पर लगातार दबाव बनाए रखा। खास तौर पर सेमीफाइनल और फाइनल जैसे बड़े मुकाबलों में उनकी गेंदबाजी ने भारत को निर्णायक बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। सैमसन के बल्ले ने दिलाया खिताबदूसरी ओर, विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन का प्रदर्शन भी पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा। उन्होंने केवल 5 मैच खेले, लेकिन करीब 200 के स्ट्राइक रेट से 321 रन बनाकर टीम इंडिया को कई महत्वपूर्ण जीत दिलाई। सैमसन ने क्वार्टर फाइनल में West Indies national cricket team के खिलाफ नाबाद 97 रन की शानदार पारी खेली। इसके बाद सेमीफाइनल में England national cricket team के खिलाफ 89 रन बनाए और फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी 89 रन की यादगार पारी खेली। उनके लगातार मैच जिताऊ प्रदर्शन के कारण उन्हें टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। टीम इंडिया की सफलता में कई खिलाड़ियों का योगदानविशेषज्ञों का मानना है कि भारत की इस ऐतिहासिक जीत में केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि पूरी टीम का योगदान रहा। बल्लेबाजी में संजू सैमसन और अन्य खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह और अन्य गेंदबाजों ने विपक्षी टीमों को दबाव में रखा। यही संतुलन टीम इंडिया को टी20 विश्व कप 2026 का चैंपियन बनाने में निर्णायक साबित हुआ।
वैश्विक तेल संकट के बीच बड़ा फैसला: IEA के 40 करोड़ बैरल आपात भंडार जारी करने के कदम का भारत ने किया स्वागत

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और तेल की कीमतों में तेज उछाल की आशंका के बीच अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। एजेंसी ने अपने सदस्य देशों के साथ मिलकर बाजार में 40 करोड़ बैरल आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का फैसला किया है। इस निर्णय का भारत ने खुले तौर पर स्वागत करते हुए कहा है कि यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने और कीमतों को बेकाबू होने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दरअसल पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के 32 सदस्य देशों ने समन्वित रूप से यह निर्णय लिया है कि वे अपने रणनीतिक तेल भंडार का एक बड़ा हिस्सा बाजार में जारी करेंगे। भारत, जो IEA का एक महत्वपूर्ण सहयोगी सदस्य है, ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि वह ऊर्जा बाजार की स्थिति और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। भारत सरकार का मानना है कि इस तरह का समन्वित अंतरराष्ट्रीय कदम मौजूदा संकट की स्थिति में बेहद आवश्यक है। सरकार ने कहा है कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार में अचानक आपूर्ति कम हो जाती है तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है। इस संकट की सबसे बड़ी वजह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में आई भारी बाधा है। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद इस मार्ग से होने वाला तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और अब यह पहले की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत तक ही रह गया है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, इसलिए यहां की स्थिति पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार को सीधे प्रभावित करती है। साल 2025 के आंकड़ों के अनुसार रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता था, लेकिन युद्ध और अस्थिरता के कारण यह आपूर्ति गंभीर संकट में फंस गई है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार इस मार्ग का कोई प्रभावी वैकल्पिक रास्ता नहीं है, जिसके कारण ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। IEA का यह कदम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 1974 में एजेंसी के गठन के बाद यह केवल छठा मौका है जब सदस्य देशों ने मिलकर इस तरह का समन्वित आपातकालीन तेल भंडार जारी करने का निर्णय लिया है। इससे पहले 1991 के खाड़ी युद्ध, 2005 के ऊर्जा संकट, 2011 के लीबिया संकट और 2022 के वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान भी ऐसे कदम उठाए गए थे। फिलहाल IEA सदस्य देशों के पास कुल मिलाकर 1.2 अरब बैरल से अधिक का रणनीतिक तेल भंडार सुरक्षित है, जिसे केवल आपातकालीन परिस्थितियों में ही बाजार में उतारा जाता है। इसके अलावा उद्योगों के पास भी लगभग 60 करोड़ बैरल का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है, जिसे सरकारी नियमों के तहत सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह भंडार धीरे-धीरे बाजार में उतारा जाता है तो इससे वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि तेल की कीमतों में तेजी सीधे तौर पर महंगाई, परिवहन लागत और आम जनता की जेब पर असर डालती है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार में कुछ हद तक स्थिरता लौट सकेगी।
1 अप्रैल से महंगी होंगी Audi की गाड़ियां, कंपनी ने 2% तक बढ़ाई कीमतें

नई दिल्ली। भारत के लग्जरी कार बाजार में एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। जर्मन लग्जरी कार निर्माता Audi की भारतीय इकाई Audi India ने गुरुवार को अपनी गाड़ियों की कीमतों में 2 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने की घोषणा की। कंपनी के अनुसार नई कीमतें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी और यह वृद्धि भारत में बिकने वाले सभी मॉडलों के एक्स-शोरूम दामों पर लागू होगी। कंपनी का कहना है कि हाल के महीनों में बढ़ती इनपुट लागत और मुद्रा दरों में उतार-चढ़ाव के कारण उत्पादन और संचालन की लागत बढ़ गई है, जिसके चलते यह फैसला लिया गया है। कंपनी ने ग्राहकों पर असर कम रखने की कोशिश कीऑडी इंडिया के ब्रांड निदेशक Balbir Singh Dhillon ने कहा कि कंपनी ने कीमतों में बढ़ोतरी का निर्णय काफी सोच-समझकर लिया है और कोशिश की गई है कि ग्राहकों पर इसका असर न्यूनतम रहे। उन्होंने कहा कि हाल ही में कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में अस्थिरता के कारण कंपनी की लागत बढ़ी है। ऐसे में कीमतों में सीमित बढ़ोतरी करना आवश्यक हो गया था। ढिल्लों ने भरोसा दिलाया कि कंपनी अपने ग्राहकों को बेहतर प्रोडक्ट और प्रीमियम अनुभव देने के लिए प्रतिबद्ध है और आगे भी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कई लोकप्रिय सेडान और एसयूवी मॉडल भारत में उपलब्धभारत में ऑडी की कई लग्जरी सेडान और एसयूवी मॉडल काफी लोकप्रिय हैं। कंपनी देश में प्रीमियम सेडान और एसयूवी सेगमेंट में कई विकल्प उपलब्ध कराती है। इनमें Audi A4, Audi A6 जैसी सेडान और Audi Q3, Audi Q5, Audi Q7 और Audi Q8 जैसी एसयूवी शामिल हैं। कीमतों में बढ़ोतरी इन सभी मॉडलों के एक्स-शोरूम दामों पर लागू होगी। हालांकि कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अलग-अलग मॉडल के हिसाब से कीमतों में कितनी वृद्धि होगी, लेकिन अधिकतम बढ़ोतरी 2 प्रतिशत तक हो सकती है। अन्य लग्जरी कार कंपनियां भी बढ़ा सकती हैं कीमतेंऑडी इंडिया के इस फैसले के बाद ऑटो सेक्टर में यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में अन्य लग्जरी कार निर्माता कंपनियां भी कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। आमतौर पर जब किसी बड़े ब्रांड की ओर से कीमतों में संशोधन किया जाता है, तो अन्य कंपनियां भी लागत बढ़ने का हवाला देकर इसी तरह के कदम उठा सकती हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि आने वाले महीनों में लग्जरी कार सेगमेंट में कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। बिक्री और प्री-ओन्ड कार कारोबार में भी मजबूतीऑडी इंडिया के प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने पिछले साल जनवरी से जून की अवधि में भारत में 2,128 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की थी। इसके अलावा कंपनी का प्री-ओन्ड कार कारोबार भी लगातार मजबूत हो रहा है। ऑडी के ‘ऑडी अप्रूव्ड: प्लस’ कार्यक्रम के तहत बेची जाने वाली प्रमाणित प्री-ओन्ड कारों की मांग में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है। कंपनी के अनुसार इस सेगमेंट में जनवरी-जून अवधि के दौरान करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। देश में प्री-ओन्ड कार नेटवर्क का विस्तारऑडी इंडिया अपने प्री-ओन्ड कार कारोबार को भी लगातार विस्तार दे रही है। फिलहाल देशभर में कंपनी के 26 प्री-ओन्ड कार शोरूम मौजूद हैं। कंपनी की योजना इस नेटवर्क को और मजबूत करने की है ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक प्रमाणित प्री-ओन्ड लग्जरी कारों की सुविधा पहुंचाई जा सके। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में लग्जरी कारों का बाजार धीरे-धीरे विस्तार कर रहा है और प्री-ओन्ड कार सेगमेंट भी इस वृद्धि में अहम भूमिका निभा रहा है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद ऑडी जैसे प्रीमियम ब्रांड के लिए भारतीय बाजार में मांग बनी रहने की संभावना है।
कूटनीति की जीत: जयशंकर अराघची वार्ता के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने दी मंजूरी

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री हमलों के बीच भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक राहत सामने आई है। भारत और ईरान के बीच उच्च स्तरीय बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय झंडाधारी तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। यह फैसला उस समय आया है जब इस क्षेत्र में अमेरिका यूरोप और इज़राइल से जुड़े जहाजों को लगातार खतरे और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। इस महत्वपूर्ण फैसले की पृष्ठभूमि में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई फोन वार्ता को निर्णायक माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद ईरान ने भारत के प्रति सकारात्मक रुख दिखाते हुए भारतीय टैंकरों को इस संवेदनशील जलडमरूमध्य से गुजरने की विशेष अनुमति प्रदान की। कूटनीतिक सहमति के तुरंत बाद दो भारतीय तेल टैंकर पुष्पक’ और ‘परिमल को सुरक्षित रूप से होर्मुज से गुजरते हुए देखा गया जो इस समझौते के तुरंत प्रभाव में आने का स्पष्ट संकेत देता है। दरअसल हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। कई विदेशी जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले हुए हैं जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई है। दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है इसलिए यहां की अस्थिरता सीधे तौर पर वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करती है। ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम के बीच स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस जलमार्ग को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है। ईरान की ओर से यह बयान भी सामने आया कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के हितों से जुड़े तेल को होर्मुज से गुजरने नहीं देगा। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि क्षेत्रीय संघर्ष और दबाव की स्थिति में वह अपने भू-राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में भारत ने संतुलित और व्यावहारिक कूटनीति का परिचय देते हुए ईरान के साथ संवाद बनाए रखा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा और रणनीतिक संबंधों ने इस फैसले को संभव बनाया। यही कारण है कि जब कई देशों के जहाजों के सामने जोखिम बना हुआ है तब भारत के तेल टैंकरों को सुरक्षित मार्ग मिलना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल स्थिति यह है कि जहां अमेरिका यूरोप और इज़राइल से जुड़े जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने में प्रतिबंधों और हमलों का खतरा बना हुआ है वहीं भारत को मिली यह विशेष छूट वैश्विक कूटनीति में उसके संतुलित रुख और बढ़ते प्रभाव का संकेत देती है। यह घटनाक्रम इस बात का भी उदाहरण है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के दौर में संवाद और कूटनीति कितनी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
वैश्विक संकट के बीच भी भारत की तेज रफ्तार, FY27 में 7% विकास दर की उम्मीद

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रह सकती है। जापान के दिग्गज निवेश बैंक Nomura ने अपने ताजा आकलन में कहा है कि वित्त वर्ष 2027 में भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। हालांकि बैंक ने यह भी कहा कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबा खिंचता है तो यह भारत के आर्थिक संतुलन की परीक्षा ले सकता है। इसके बावजूद मजबूत घरेलू मांग और संरचनात्मक सुधारों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी रहने की संभावना जताई गई है। भारत के ‘गोल्डीलॉक्स पीरियड’ की हो सकती है परीक्षानोमुरा के मुताबिक वर्तमान समय भारत के लिए तथाकथित “गोल्डीलॉक्स पीरियड” जैसा है। अर्थशास्त्र में Goldilocks Economy उस स्थिति को कहा जाता है जब आर्थिक वृद्धि दर मजबूत होती है और महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रहती है। अगर पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है और ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आता है, तो यह संतुलन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में भारत की आर्थिक नीतियों और घरेलू मांग की मजबूती की असली परीक्षा होगी। जीडीपी, महंगाई और चालू खाते के अनुमान में बदलावनोमुरा की भारत और एशिया (जापान को छोड़कर) की मुख्य अर्थशास्त्री Sonal Varma ने अर्थशास्त्री Aurodeep Nandi के साथ मिलकर जारी रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2027 के लिए कुछ प्रमुख आर्थिक संकेतकों के अनुमान में बदलाव किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार चालू खाते के घाटे यानी Current Account Deficit (सीएडी) के अनुमान को 0.4 प्रतिशत बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद का 1.6 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी Consumer Price Index आधारित महंगाई का अनुमान 0.7 प्रतिशत बढ़ाकर 4.5 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को मामूली रूप से 0.1 प्रतिशत घटाकर 7 प्रतिशत किया गया है। घरेलू खपत और उद्योग में बनी रह सकती है रफ्तारनोमुरा के अनुसार 2026 की पहली तिमाही के शुरुआती संकेत बताते हैं कि भारत में उपभोग और औद्योगिक गतिविधियों में गति बनी रह सकती है। हालांकि निर्यात और सरकारी खर्च में कुछ कमजोरी देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम बना हुआ है, खासकर प्राकृतिक गैस की संभावित कमी घरेलू उद्योग और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। नीतिगत सुधार और वेतन वृद्धि से मिलेगा सहारारिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत की अर्थव्यवस्था को कई सकारात्मक कारकों से समर्थन मिल रहा है। इनमें पिछली नीतिगत ढील, संरचनात्मक सुधार, वेतन वृद्धि और वैश्विक व्यापार संबंधों में सुधार शामिल हैं। खास तौर पर अमेरिका के साथ व्यापार तनाव में कमी से भारत के लिए नए अवसर बन सकते हैं। इन कारकों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में चक्रीय सुधार देखने को मिल सकता है और विकास की रफ्तार बरकरार रह सकती है। ऊर्जा कीमतों से बढ़ सकता है महंगाई का दबावनोमुरा ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं। फिलहाल कई एशियाई देशों में महंगाई अपेक्षाकृत कम स्तर पर है, लेकिन कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी से स्थिति बदल सकती है। ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है असररिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक मौद्रिक नीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे हालात में कई केंद्रीय बैंक फिलहाल अपनी नीति दरों को स्थिर रख सकते हैं, लेकिन अगर महंगाई का दबाव बढ़ता है तो भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना भी बन सकती है। ऐसे में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में आने वाले महीनों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
मिडिल ईस्ट संकट गहराया, Crude Oil की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पार

नई दिल्ली।मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया और कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई में तेज उछालअंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत 9 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 100.76 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं अमेरिकी मानक कच्चे तेल WTI Crude का भाव भी करीब 9 प्रतिशत की तेजी के साथ लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। तेल बाजार में इस तेज उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। आईईए ने इमरजेंसी रिजर्व से तेल जारी करने का फैसलाकच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए International Energy Agency (आईईए) ने बड़ा कदम उठाया है। 32 सदस्य देशों वाले इस संगठन ने अपने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करने की घोषणा की है। यह आईईए के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा इमरजेंसी रिलीज माना जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों में तेजी को कुछ हद तक नियंत्रित करना है। अमेरिका ने भी रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने की घोषणा कीआईईए के फैसले के अलावा United States Department of Energy ने भी अलग से बड़ा ऐलान किया है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने अपने Strategic Petroleum Reserve से 172 मिलियन बैरल तेल जारी करने की घोषणा की है। अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright के अनुसार इस तेल की आपूर्ति अगले सप्ताह से शुरू हो सकती है और इसे पूरा होने में लगभग 120 दिन का समय लग सकता है। पहले भी 119 डॉलर तक पहुंच चुका है कच्चा तेलविशेषज्ञों के अनुसार हाल के दिनों में मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतें पहले भी तेजी से बढ़ी थीं और एक समय यह 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि बाद में बाजार में कुछ स्थिरता आने के बाद कीमतें गिरकर लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ गई थीं। लेकिन मौजूदा हालात ने फिर से बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्रतेल बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह Strait of Hormuz में बढ़ता तनाव भी है। यह मध्य पूर्व का एक संकरा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया में उत्पादित होने वाले करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार होता है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। तेल टैंकरों पर हमलों से बढ़ी चिंतामध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तेल टैंकरों को भी निशाना बनाया जा रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। यही कारण है कि निवेशकों और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है और कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेज उछाल देखने को मिल रहा है।
BHIND MINRO GIRL RAPED: 8वीं की दलित छात्रा से 6 महीने तक भाई करता रहा दुष्कर्म: गर्भवती होने पर खुला मामला, आरोपी फरार

HIGHLIGHTS: भिंड में 8वीं की दलित छात्रा से छह महीने तक दुष्कर्म गर्भवती होने के बाद परिवार को घटना की जानकारी सहेलियों ने अपने भाई से कराई थी पहचान धमकी देकर आरोपी करता रहा शोषण केस दर्ज, आरोपी फरार; संगठनों ने जताई नाराजगी BHIND MINRO GIRL RAPED: ग्वालियर। मध्यप्रदेश के भिंड जिले में आठवीं कक्षा की एक दलित छात्रा के साथ छह महीने तक लगातार दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है। बता दें कि इस घटना का खुलासा तब हुआ जब छात्रा गर्भवती हो गई। इसके बाद परिजनों ने रौन थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसको लेकर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मिडिल ईस्ट तनाव का भारतीय बाजार पर असर, BSE Sensex में एक फीसदी से ज्यादा गिरावट सहेलियों के घर बुलाकर कराया परिचय पुलिस जांच अधिकारी के अनुसार छात्रा की दोस्ती मोहल्ले में रहने वाली दो बहनों से थी, दोनों बहनें उसे अक्सर अपने घर बुलाती थीं। इसी दौरान उन्होंने अपने भाई साहिल से उसकी पहचान कराई। परिजनों का आरोप है कि एक दिन दोनों बहनों ने छात्रा को घर बुलाया और उसे कमरे में अकेला छोड़कर बाहर चली गईं। इस दौरान आरोपी साहिल ने छात्रा के साथ जबरन दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर बदनाम करने की धमकी दी। बढ़ती डिमांड से मार्केट में कमी, Induction Cooktop क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर हुए आउट ऑफ स्टॉक धमकी देकर छह महीने तक करता रहा शोषण परिजनों ने बताया कि आरोपी ने छात्रा को डराकर चुप रहने के लिए मजबूर किया। इसके बाद वह उसे बार-बार अपने घर बुलाता रहा और छह महीने तक कई बार दुष्कर्म करता रहा। जब छात्रा गर्भवती हुई तो उसकी मां को जानकारी मिली। मां ने पूछताछ की, जिसके बाद पूरा मामला सामने आया। Mark Butcher का बयान- Arshdeep Singh की फॉर्म ने बढ़ाई Jasprit Bumrah की प्रभावशीलता आरोपी फरार, पुलिस तलाश में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। आरोपी साहिल फिलहाल फरार है और पुलिस हर दिशा में उसकी खोज में जुटी हुई है। घटना की जानकारी मिलने पर बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता छात्रा के समर्थन में थाने पहुंचे। उन्होंने कहा कि पीड़िता को न्याय दिलाना आवश्यक है और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
शिवपुरी में दबंगई: पुरानी रंजिश में पिता-पुत्रों ने युवक को लाठी-डंडों से पीटा, सरेराह गोली चलाने का भी सनसनीखेज आरोप

शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सिल्लारपुर में आपसी रंजिश के चलते खूनी संघर्ष का मामला सामने आया है। यहाँ एक ही परिवार के तीन सदस्यों (पिता और उसके दो बेटों) ने मिलकर एक युवक पर प्राणघातक हमला कर दिया। घटना के दौरान न केवल लाठी डंडों का इस्तेमाल हुआ बल्कि पीड़ित पक्ष ने आरोपियों पर दहशत फैलाने के लिए गोली चलाने की कोशिश करने का भी गंभीर आरोप लगाया है। इस हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।घर के बाहर खड़े युवक पर अचानक हमला प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना 11 मार्च की दोपहर करीब 3:30 बजे की है। ग्राम सिल्लारपुर निवासी 30 वर्षीय कांतेश ओझा अपने घर के बाहर खड़े थे तभी गाँव के ही प्रमोद केवट अपने दो बेटों शिवम केवट और सागर केवट के साथ वहाँ पहुँच गए। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच पुरानी रंजिश चली आ रही थी जिसे लेकर आरोपियों ने पहुँचते ही गाली गलौज शुरू कर दी। जब कांतेश ने अभद्र भाषा का विरोध किया तो पिता और बेटों ने आपा खो दिया और सुनियोजित तरीके से उन पर हमला बोल दिया। परिजनों ने बीच बचाव कर बचाई जान आरोपियों ने कांतेश को घेरकर लाठी डंडों और लात घूंसों से बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। हमले में कांतेश के बाएं हाथ की कलाई पीठ और दाहिने पैर की पिंडली में गंभीर चोटें आई हैं। चीख पुकार सुनकर कांतेश की पत्नी छाया ओझा और माँ हसमुखी ओझा तुरंत मौके पर पहुँचीं। महिलाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर बीच बचाव किया तब कहीं जाकर आरोपी वहाँ से हटे। भागते समय आरोपियों ने पीड़ित परिवार को पुलिस के पास जाने पर जान से मारने की धमकी भी दी।गोली चलाने के आरोप से सनसनी इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब घायल के भाई हरगोविंद झा ने सनसनीखेज दावा किया कि विवाद के दौरान आरोपियों ने गोली चलाने का भी प्रयास किया था ताकि इलाके में दहशत पैदा की जा सके। घटना के तुरंत बाद घायल कांतेश को 108 एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल ले जाया गया जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उन्होंने करैरा थाने पहुँचकर आपबीती सुनाई। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर आरोपी प्रमोद केवट शिवम केवट और सागर केवट के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। थाना पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत विवेचना की जा रही है और फरार आरोपियों की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है। इस घटना के बाद से गाँव में तनाव का माहौल है जिसे देखते हुए पुलिस सतर्कता बरत रही है।
ग्वालियर में सीजन की सबसे गर्म रात, न्यूनतम तापमान 18.5 डिग्री; अगले 3-4 दिन और बढ़ेगी गर्मी

ग्वालियर । ग्वालियर में मौसम लगातार करवट बदल रहा है और गर्मी का असर अब दिन के साथ-साथ रातों में भी साफ महसूस होने लगा है। बुधवार की रात इस सीजन की अब तक की सबसे गर्म रात के रूप में दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार शहर का न्यूनतम तापमान 18.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो इस सीजन में अब तक का सबसे अधिक न्यूनतम तापमान है। इसके साथ ही हवा में नमी की मात्रा भी काफी कम हो गई है, जिससे वातावरण में गर्मी का असर और अधिक महसूस किया जा रहा है। दिन के समय भी तापमान लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को ग्वालियर का अधिकतम तापमान 37.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गुरुवार सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को गर्मी का अहसास करा दिया। सुबह 10 बजे के बाद से ही धूप इतनी तीखी हो गई कि लोगों को बाहर निकलने में परेशानी होने लगी। दोपहर होते-होते गर्मी का असर और बढ़ गया, जिसके कारण शहर की सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में कम आवाजाही दिखाई दी। भीषण गर्मी के चलते लोग केवल जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। दोपहर के समय बाजारों और प्रमुख सड़कों पर भी अपेक्षाकृत सन्नाटा देखने को मिला। गर्म हवाओं और तेज धूप के कारण लोगों को खासा असहज महसूस करना पड़ रहा है। मौसम में आए इस बदलाव का असर दैनिक जीवन के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले तीन से चार दिनों तक मौसम का मिजाज लगभग ऐसा ही बना रह सकता है। तापमान में ज्यादा राहत मिलने की संभावना फिलहाल कम है। विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। विशेष रूप से किसानों को भी अपनी फसलों का ध्यान रखने के लिए कहा गया है, क्योंकि तापमान में बढ़ोतरी का असर खेती पर भी पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने भी लोगों को इस मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ती गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए लोगों को अधिक मात्रा में तरल पदार्थ जैसे पानी, नींबू पानी, छाछ और अन्य पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाव किया जा सकेगा। इसके अलावा डॉक्टरों ने दोपहर के समय हल्का भोजन करने की सलाह दी है और खाने में ऐसी चीजों को शामिल करने को कहा है जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो। फल, सलाद और दही जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को ठंडक पहुंचाने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि दोपहर के समय तेज धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो सिर और शरीर को पूरी तरह ढककर निकलना चाहिए, ताकि सीधे धूप के संपर्क से बचा जा सके। ग्वालियर में मार्च के महीने में ही इस तरह की गर्मी लोगों के लिए चिंता का विषय बन रही है। यदि तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले दिनों में गर्मी और अधिक तीखी हो सकती है। ऐसे में नागरिकों को मौसम के प्रति सतर्क रहते हुए अपनी दिनचर्या और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा।