ईरानी मीडिया का दावा: खामेनेई की पत्नी मंसूरेह बघेरजादेह जिंदा, मौत की खबरें अफवाह

ईरानी मीडिया का दावा: खामेनेई की पत्नी मंसूरेह बघेरजादेह जिंदा, मौत की खबरें अफवाह दुबई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता (Ali Khamenei) की पत्नी को लेकर फैली मौत की खबरों को ईरानी मीडिया ने खारिज कर दिया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि Mansoureh Khojasteh Bagherzadeh पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनके निधन की खबरें अफवाह हैं। ईरान की सरकारी मीडिया और एक समाचार एजेंसी ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया और कुछ अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर जो दावे किए जा रहे थे, वे गलत हैं। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के दौरान यह खबर फैल गई थी कि अमेरिका और Israel के हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के साथ उनकी पत्नी भी मारी गईं। मोजतबा के बयान के बाद स्पष्टता हालांकि बाद में ईरानी मीडिया ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। बताया गया कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने गुरुवार को अपना पहला आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें अपनी मां के निधन का कोई जिक्र नहीं था। इसके बाद सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की कि उनकी मौत की खबरें गलत हैं। युद्ध के माहौल में फैल रही अपुष्ट खबरें पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच कई तरह की अपुष्ट खबरें तेजी से फैल रही हैं। ऐसे माहौल में सोशल मीडिया पर अफवाहें भी तेजी से वायरल हो रही हैं। ईरान की सरकारी एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी जानकारी पर ही भरोसा करें। हमलों के बाद बढ़ा तनाव गौरतलब है कि हाल ही में United States और Israel के संयुक्त सैन्य हमलों में ईरान के कई शीर्ष नेताओं के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद Iran ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और इजरायल से जुड़े लक्ष्यों पर हमले किए, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष के दौर में जानकारी की पुष्टि करना और आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो जाता है।
सागर: बहरोल बैंक में आग, दस्तावेज खाक, कर्मचारियों और दमकल की सतर्क कार्रवाई से टला बड़ा हादसा

सागर जिले के बहरोल में शुक्रवार की सुबह अचानक अफरा-तफरी मच गई जब सेंट्रल बैंक की शाखा में आग लग गई। सुबह करीब नौ बजे बैंक में धुआं उठते देख स्थानीय लोग घबरा गए और तुरंत पुलिस और बैंक कर्मचारियों को सूचना दी। बहरोल थाना से पुलिस और बंडा नगर पंचायत की दमकल मौके पर पहुंची और स्थिति को काबू में करने के लिए आनन-फानन में कार्रवाई की। जैसे ही दमकल टीम बैंक की शटर खोली और अंदर पहुंची तो आग कैश काउंटर के पास लगी हुई दिखाई दी। वहां रखे कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और फाइलें आग की चपेट में आ गईं। हालांकि त्वरित पानी डालने और दमकल कर्मियों की सतर्क कार्रवाई से आग पर जल्दी काबू पा लिया गया। इस दौरान किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन बैंक में रखे दस्तावेज जलकर खाक हो गए। आग लगने की सूचना पाते ही बैंक के आसपास भारी भीड़ जमा हो गई। लोग धुआं और आग को देखकर चिंतित नजर आए और तुरंत पुलिस को सूचना देने में मदद की। बहरोल थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर कैश काउंटर के पास शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन पूरी जांच अभी चल रही है। इस घटना के कारण शाखा में फिलहाल कामकाज बंद कर दिया गया है। बैंक प्रबंधन ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। बैंक के दस्तावेजों के नुकसान की भरपाई और जांच का काम जल्द ही शुरू होगा। स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया। अधिकारी बता रहे हैं कि आग फैलने का खतरा कम था, लेकिन यदि समय पर कार्रवाई नहीं होती तो नुकसान और अधिक हो सकता था। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि बैंक शाखाओं में सुरक्षा और आग सुरक्षा उपायों को नियमित रूप से लागू करना कितना आवश्यक है। पुलिस और प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि वे किसी बैंक शाखा या सार्वजनिक स्थल पर असामान्य धुआं या आग का संकेत देखें तो तुरंत संबंधित विभाग को सूचित करें। वहीं बैंक प्रशासन भी आग से सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रिकल सिस्टम और दस्तावेजों के रखरखाव पर नजर रखेगा। इस घटना ने बैंकिंग और वित्तीय सुरक्षा के महत्व को फिर से उजागर किया है। दस्तावेजों का नुकसान भले ही अपूरणीय है, लेकिन किसी के हताहत न होने से राहत की सांस ली जा सकती है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा उपायों और जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है।
6 साल बाद फिर बीजिंग से प्योंगयांग के लिए पहली ट्रेन रवाना

बीजिंग। करीब छह साल के लंबे अंतराल के बाद चीन और उत्तर कोरिया के बीच यात्री ट्रेन सेवा एक बार फिर शुरू हो गई है। गुरुवार को बीजिंग रेलवे स्टेशन से दोनों देशों की राजधानियों को जोड़ने वाली पहली ट्रेन रवाना हुई। इससे चीन और उत्तर कोरिया के बीच लोगों के आवागमन और संपर्क बढ़ाने की दिशा में नया कदम माना जा रहा है। चीनी रेलवे प्राधिकरण के अनुसार ट्रेन K27 शुक्रवार शाम 6:07 बजे उत्तर कोरिया की राजधानी Pyongyang पहुंचेगी। यह ट्रेन लगभग 24 घंटे 41 मिनट का सफर तय करेगी और रास्ते में चीन के सीमावर्ती शहर Dandong में ठहरेगी, जो China और North Korea के बीच प्रमुख सीमा शहर है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देश “मैत्रीपूर्ण पड़ोसी” हैं और सीमा पार यात्री ट्रेन सेवा फिर से शुरू होने से लोगों के बीच संपर्क और आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि चीन दोनों देशों के बीच यात्रा और संवाद को आसान बनाने के लिए मजबूत सहयोग का समर्थन करता है। हालांकि ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक उत्तर कोरिया अभी भी विदेशी पर्यटकों के लिए लगभग बंद है। कुछ सीमित अपवादों में रूस के पर्यटन समूहों को विशेष व्यवस्थाओं के तहत प्रवेश दिया जा रहा है। रेलवे प्राधिकरण के नोटिस के अनुसार बीजिंग और प्योंगयांग के बीच चलने वाली यह ट्रेन सप्ताह में चार दिन—सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शनिवार दोनों दिशाओं में संचालित होगी। बीजिंग की एक ट्रैवल एजेंसी ने बताया कि गुरुवार की यात्रा के लिए टिकट पूरी तरह बिक चुके थे और फिलहाल ये केवल बिजनेस वीजा धारकों के लिए उपलब्ध थे, जबकि 18 मार्च की यात्रा के लिए टिकट अभी भी मिल रहे हैं। चीनी सरकारी समाचार एजेंसी Xinhua News Agency के मुताबिक छोटा मार्ग डैंडोंग-प्योंगयांग भी दोनों दिशाओं में रोजाना संचालित होगा। इस रूट की पहली ट्रेन गुरुवार सुबह 10 बजे डैंडोंग से रवाना हुई और शाम 6:07 बजे प्योंगयांग पहुंचने का कार्यक्रम है। इससे पहले उत्तर कोरिया की सरकारी एयरलाइन Air Koryo ने 2023 में चीन के लिए अपनी उड़ानें फिर से शुरू की थीं। एयरलाइन फिलहाल Beijing और प्योंगयांग के बीच मंगलवार और शनिवार को सप्ताह में दो बार सेवाएं संचालित कर रही है। ट्रेन सेवा की बहाली को दोनों देशों के बीच परिवहन संपर्क और संबंधों में धीरे-धीरे बढ़ती सक्रियता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
क्या होते हैं ‘श्याओकांग’ गांव? LAC के पास चीन ने बसाए सैकड़ों गांव, भारत ने भी बढ़ाई सीमा पर तैयारी

बीजिंग। भारत-चीन सीमा पर बुनियादी ढांचे की होड़ तेज होती जा रही है। चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास सैकड़ों नए गांव बसाए हैं, जिनमें बड़ी संख्या Arunachal Pradesh की सीमा के सामने स्थित है। भारतीय सेना के उपप्रमुख (रणनीति) Rajiv Ghai ने जानकारी दी कि चीन ने LAC के आसपास 600 से अधिक गांव बसाए हैं, जिनमें से करीब 72% उत्तर-पूर्वी सीमा के पास हैं। इनमें लगभग 450 गांव सीधे अरुणाचल प्रदेश की सीमा के सामने बनाए गए हैं। क्या हैं ‘श्याओकांग’ गांव? चीन इन सीमावर्ती बस्तियों को ‘श्याओकांग’ गांव कहता है। चीनी भाषा में ‘श्याओकांग’ का अर्थ समृद्ध या खुशहाल गांव होता है। इन गांवों का निर्माण मुख्य रूप से Tibet Autonomous Region से लगने वाली भारतीय सीमा के पास पिछले करीब पांच वर्षों से किया जा रहा है। इन बस्तियों में आम तौर पर दो मंजिला आधुनिक मकान, चौड़ी सड़कें और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की गई हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन गांवों का इस्तेमाल दोहरे उद्देश्य से किया जा सकता है—एक ओर नागरिक आबादी को बसाने के लिए और दूसरी ओर किसी सैन्य तनाव की स्थिति में सैनिकों की तैनाती, रसद और निगरानी के लिए। इसे चीन द्वारा विवादित क्षेत्रों पर अपना दावा मजबूत करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। पहले खाली रहे, अब बसने लगी आबादी चीन ने 2019 के बाद इन गांवों का निर्माण तेज कर दिया था, लेकिन शुरुआत में कई गांव खाली पड़े रहे। रिपोर्टों के मुताबिक 2023 से चीनी नागरिकों ने इन बस्तियों में बसना शुरू किया है। खास तौर पर अरुणाचल प्रदेश के लोहित घाटी और Tawang सेक्टर के सामने वाले इलाकों में आबादी बढ़ने लगी है। बताया जाता है कि चीन ने इसी तरह के कुछ गांव Bhutan के क्षेत्रों के पास भी बनाए हैं। सीमा कानून से बढ़ी रणनीति चीन ने 1 जनवरी 2022 से नया थल सीमा कानून लागू किया, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना बताया गया। इस कानून के तहत सरकार लोगों को सीमा क्षेत्रों में बसने और काम करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे वहां नागरिक मौजूदगी बढ़े और निगरानी तंत्र मजबूत हो सके। भारत भी दे रहा जवाब चीन की इस रणनीति के जवाब में भारत सरकार ने 2022 में ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ शुरू किया। इस योजना के तहत सीमा के पास स्थित 663 गांवों को बुनियादी सुविधाओं, सड़क, संचार और पर्यटन विकास से जोड़ा जा रहा है ताकि वहां से पलायन रोका जा सके। इस कार्यक्रम के लिए कई गांवों को प्राथमिकता दी गई है, जिनमें Kibithu, Tuting, Taksing, Chayang Tajo और Zemithang शामिल हैं। सीमा पर तेज हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण चीन तवांग और सियांग घाटी के आसपास नई सड़कें, पुल और हवाई पट्टियां भी विकसित कर रहा है। इसके जवाब में भारत ने भी LAC के पास फॉरवर्ड कनेक्टिविटी मजबूत की है। नए हेलीपैड, अंतर-घाटी सड़कें और वैकल्पिक मार्ग बनाए जा रहे हैं, जिससे भारतीय सेना की तैनाती और मूवमेंट पहले से कहीं अधिक तेज हो सके। लेफ्टिनेंट जनरल घई के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से उभरती ये बस्तियां भारत के लिए रणनीतिक चुनौती जरूर हैं, लेकिन साथ ही सीमा पर मजबूत बुनियादी ढांचा और स्थानीय आबादी को वहां बनाए रखना अब भारत की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है।
युद्ध की आहट से बाजार में भूचाल, एक दिन में अरबपतियों की दौलत से उड़े 35 अरब डॉलर

तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Iran–United States–Israel के बीच टकराव की आशंका का असर वैश्विक बाजारों पर साफ दिखा। गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे दुनिया के शीर्ष अरबपतियों की संपत्ति में एक ही दिन में करीब 35 अरब डॉलर की कमी आ गई। बाजार में गिरावट के चलते Dow Jones Industrial Average 739 अंक टूट गया। वहीं S&P 500 में 1.52% और Nasdaq Composite में 1.78% की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट का सीधा असर अरबपतियों की दौलत पर पड़ा। एलन मस्क को सबसे बड़ा नुकसान दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति Elon Musk को सबसे बड़ा झटका लगा। उनकी संपत्ति में 9.20 अरब डॉलर की गिरावट आई और उनका नेटवर्थ घटकर करीब 660 अरब डॉलर रह गया। इसके बाद Larry Page की संपत्ति में 4.11 अरब डॉलर की कमी आई और उनका नेटवर्थ 261 अरब डॉलर रह गया। वहीं Sergey Brin की संपत्ति 3.80 अरब डॉलर घटकर करीब 243 अरब डॉलर रह गई। बेजोस और जुकरबर्ग को भी झटका Jeff Bezos को गुरुवार को 2.83 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, जिससे उनकी कुल संपत्ति 234 अरब डॉलर रह गई। वहीं Mark Zuckerberg की संपत्ति में 5.74 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई और उनका नेटवर्थ करीब 226 अरब डॉलर रह गया। एलिसन और अर्नाल्ट की दौलत भी घटी Larry Ellison की संपत्ति में 4.58 अरब डॉलर की कमी आई और उनका नेटवर्थ करीब 210 अरब डॉलर रह गया। फ्रांस के उद्योगपति Bernard Arnault ने भी 2.39 अरब डॉलर गंवाए और उनकी संपत्ति घटकर लगभग 162 अरब डॉलर रह गई। जिम वॉल्टन को फायदा, बफेट पीछे Jensen Huang की संपत्ति में भी 2.30 अरब डॉलर की गिरावट आई और उनका नेटवर्थ 152 अरब डॉलर रह गया। हालांकि Jim Walton ऐसे इकलौते अरबपति रहे जिनकी संपत्ति में 1.58 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। उनका नेटवर्थ बढ़कर 159 अरब डॉलर हो गया और उन्होंने Warren Buffett को पीछे छोड़ते हुए अमीरों की सूची में 9वां स्थान हासिल कर लिया। वहीं बफेट को भी 579 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ और उनकी कुल संपत्ति करीब 147 अरब डॉलर रह गई। भारत के अरबपतियों को फायदा वैश्विक बाजार में गिरावट के बावजूद भारत के दो बड़े उद्योगपतियों की संपत्ति में बढ़त दर्ज की गई। Mukesh Ambani को 64.5 मिलियन डॉलर का फायदा हुआ और उनकी संपत्ति बढ़कर 92.4 अरब डॉलर हो गई। वे दुनिया के 18वें सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं। वहीं Gautam Adani की संपत्ति में 1.84 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और उनका नेटवर्थ 77.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि इस उछाल के बावजूद वे अभी टॉप-20 अरबपतियों की सूची में जगह नहीं बना पाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के चलते आने वाले दिनों में बाजार और अरबपतियों की संपत्ति में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
संभावना सेठ का दावा, सलमान ने स्टेज पर कहा- 100% काम दूंगा, बाद में बोला- मैं…

मुंबई। संभावना सेठ ने सलमान खान के साथ अपनी एक मुलाकात का किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि सलमान खान ने ‘बिग बॉस 4’ के स्टेज पर उनकी तारीफ की थी। इतना ही नहीं, सलमान ने ये भी कहा था कि वह उन्हें 100% काम देंगे। हालांकि, शो खत्म होने के बाद चीजें बदल गईं। वह सलमान खान से मिलने गईं और रोते हुए बाहर आईं। पढ़िए सलमान ने उन्हें क्या जवाब दिया था। संभावना सेठ ने हॉटरफ्लाई को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘बिग बॉस सीजन 4 में सलमान खान की एंट्री हुई थी तो सारे सीजन (1,2 और 3) के पॉपुलर कंटेस्टेंट्स को परफॉर्म करने के लिए बुलाया गया था। मुझे याद है, मैं अपनी परफॉर्मेंस के बाद जाकर बैठ गई थी। सब एक-दूसरे की तारीफ कर रहे थे और मैं अकेले एक कोने में बैठी हुई थी। तभी अचानक सलमान जी ने कहा, इस लड़की ने कमाल कर दिया।’ संभावना ने आगे कहा, ‘फिर मेरा दोस्त रवि किशन मुझे सलमान जी के पास लेकर गया। रवि किशन ने सलमान जी से कहा, ये संभावना हैं। ये भोजपुरी की आन बान शान हैं। बहुत अच्छा डांस करती हैं। सलमान जी ने कहा, हां! मैं अभी इनका डांस देखा। मैंने मौके का फायदा उठाया और सलमान जी से कहा, सर अगर आपको ठीक लगे तो मुझे फिल्म में…। सलमान जी ने कहा, हां! हां! 100%। उनका 100% मेरे लिए सपने जैसा था। मुझे लगा कि अब तो मैं फाड़ दूंगी। उन्होंने मुझे अपना पर्सनल नंबर भी दिया।’ संभावना बोलीं, ‘इसके बाद मुझे दोबारा स्टेज पर बुलाया गया। मेकर्स ने कहा कि हमें बिग बॉस वाली संभावना चाहिए। आपको सलमान के सामने वैसे ही जवाब देना है जैसे आप बिग बॉस में देती थीं। मैंने मेकर्स के हिसाब से चीजें कीं, लेकिन शायद सलमान जी को वो बात पसंद नहीं आई। मुझे लगता है कि सलमान जी को वैसे लड़कियां पसंद नहीं हैं जो थोड़ा उठकर ज्यादा बात करें। ऐसा मेरा सोचना है।’ संभावना ने आगे बताया, ‘फिर मैं शो के खत्म होने के बाद सलमान जी से मिलने गई। मुझे सलमान जी बहुत इरिटेटेड लग रहे थे। उन्होंने मुझसे बहुत अच्छे से बात की, लेकिन वो मुझे बिल्कुल अलग लग रहे थे। वैसे नहीं लग रहे थे जैसे स्टेज पर थे। अब वो मुझसे चिढ़े हुए थे या थक गए थे, मुझे नहीं पता। तो मैंने पूछा कि आपने कहा कि आप फिल्म में मुझे…। सलमान जी बोले, संभावना तुम्हें थोड़ा वजन कम करना पड़ेगा और मैं लोगों को प्रमोट नहीं करता हूं।’ संभावना बोलीं, ‘मेरा तो दिल टूट गया। मैं रोते-रोते घर गई हूं। मैं सलमान खान की आज भी बहुत बड़ी फैन हूं, लेकिन मैं टूट गई थी। मेरे पापा-मम्मी जिंदा थे तब। मैं बहुत कोशिश कर रही थी कि कुछ बड़ा मिल जाए तो मैं पापा-मम्मी को सरप्राइज दूं।’ यह कहते-कहते संभावना भावुक हो गईं और उनकी आंखों में आंसू आ गए। बता दें, संभावना सेठ ‘बिग बॉस सीजन 2’ का हिस्सा थीं। इस सीजन को शिल्पा शेट्टी ने होस्ट किया था और आशुतोष कौशिक इस सीजन के विनर बने थे।
ट्रंप के बयान पर भड़की Iran national football team, FIFA World Cup में भागीदारी को लेकर दिया पलटवार

नई दिल्ली। ईरान की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सुरक्षा कारणों से ईरान को फीफा विश्व कप में हिस्सा नहीं लेना चाहिए। ईरान की टीम ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर कहा कि कोई भी देश उन्हें FIFA World Cup से बाहर नहीं कर सकता, क्योंकि यह टूर्नामेंट किसी एक देश का नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संस्था FIFA द्वारा आयोजित किया जाता है। टीम ने सुरक्षा की जिम्मेदारी मेजबान पर डालीईरान की टीम ने कहा कि यदि मेजबान देश सभी टीमों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता, तो इसके लिए उसी को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। टीम के बयान में कहा गया कि विश्व कप एक ऐतिहासिक और वैश्विक खेल आयोजन है, जिसमें भाग लेने का अधिकार उन टीमों को होता है जिन्होंने क्वालिफिकेशन हासिल किया है। लगातार चौथे विश्व कप के लिए क्वालिफाईईरान की टीम ने पिछले साल एशियाई क्वालिफायर के तीसरे दौर में ग्रुप ए में शीर्ष स्थान हासिल कर लगातार चौथी बार विश्व कप के लिए जगह बनाई है। 2026 FIFA World Cup का आयोजन 11 जून से 19 जुलाई तक United States, Mexico और Canada में होना है, जहां ईरान को अपने मैच अमेरिका में खेलने हैं। फीफा अध्यक्ष का बयानफीफा अध्यक्ष Gianni Infantino ने भी कहा कि उनकी मुलाकात डोनाल्ड ट्रंप से हुई थी और अमेरिकी राष्ट्रपति ने उन्हें भरोसा दिलाया कि विश्व कप में ईरान की टीम का स्वागत किया जाएगा। ईरान के खेल मंत्री ने जताई चिंताहालांकि ईरान के खेल मंत्री Ahmad Donyamali ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के एयरस्ट्राइक के बाद देश में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के लिए विश्व कप में हिस्सा लेना मुश्किल हो सकता है। उनके अनुसार हाल के महीनों में हुए संघर्षों में हजारों लोगों की मौत हुई है, जिससे देश में असुरक्षा का माहौल बन गया है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा राजनीतिक टकराव, Benjamin Netanyahu ने Mojtaba Khamenei को आईआरजीसी की कठपुतली बताया

नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने ईरान की मौजूदा स्थिति और संभावित राजनीतिक बदलाव पर बयान दिया। नेतन्याहू ने कहा कि उन्हें यह निश्चित नहीं था कि हमलों के बाद ईरान की जनता इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ खड़ी हो जाएगी या नहीं। मोजतबा खामेनेई पर आरोपनेतन्याहू ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजी) की कठपुतली बताई। उनका कहना था कि खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आते और असल ताकत आईआरजी के पास है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से मोजतबा खामेनेई जनता रूप से नजर नहीं आए हैं, जिससे उनके बारे में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। ईरान में सत्ता परिवर्तन पर बयानइजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि बाहरी ताकतें बना सकती हैं, लेकिन किसी देश में सत्ता परिवर्तन अंततः उसी देश के लोगों द्वारा ही संभव होता है। उन्होंने कहा, “आप किसी को पानी तक ले जा सकते हैं, लेकिन उसे पीने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। नेतन्याहू के अनुसार इजरायल के हवाई हमले और सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे हालात बनाना है, जिससे ईरान की जनता को विरोध के लिए जगह मिल सके। आईआर जेब और बासिज पर हमले का दावानेतन्याहू ने कहा कि इजरायल की सेना ईरान की सैन्य ताकतों को घुमा रही है, जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और उनके सहयोगी मिलिशिया बासिज शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि इन संगठनों के ठिकानों और चेकपॉइंट्स पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतानेतन्याहू ने कहा कि इजरायल की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। उनके अनुसार ईरान ने हाल के महीनों में अपने परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को फिर से तेज किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को घुमाया है और एक महत्वपूर्ण परमाणु वैज्ञानिक को भी मार गिराया है। मोजतबा पर हमले के सवाल पर प्रतिक्रियाजब पत्रकारों ने पूछा कि क्या इजरायली मोजतबा खामेनेई को भी घुमाया जा सकता है, तो नेतन्याहू ने कहा कि वह “किसी भी आतंकवादी संगठन के नेता के लिए जीवन बीमा नीतियां नहीं लेंगे।
पीएम मोदी की नेतृत्व शैली की तारीफ, Tony Abbott बोले- उन्होंने सत्ता का घमंड खुद से दूर रखा

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि दस साल से ज़्यादा समय तक सत्ता में रहने के बावजूद उन्होंने खुद को “सत्ता के अहंकार” से दूर रखा है। एबॉट ने यह टिप्पणी भारत में आयोजित मनमोहन सिंह सम्मेलन रायसीना डायलॉग के 11वें संस्करण के संदर्भ में की। उन्होंने कहा कि यह मंच आज वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण संवाद का केंद्र बन चुका है। रायसीना डायलॉग की बढ़ती वैश्विक अहमियतटोनी एबॉट ने कहा कि 2016 से हर साल मार्च में नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग आयोजित किया जाता है। यह विचार भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से बताया गया, जो लंबे समय तक भारत के विदेश मंत्री रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कॉन्फ्रेंस राजनीतिक नेताओं, सैन्य अधिकारियों, उद्योगपतियों, पत्रकारों और थिंक टैंक के कार्यकर्ताओं को वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए एक मंच प्रदान करता है। एबॉट के अनुसार इस कॉन्फ्रेंस में कई वजहों से वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सालाना मीटिंग से भी अलग है, क्योंकि यह केवल होस्ट सरकार की तारीफ तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खुली चर्चा को बढ़ावा देता है। मोदी के नेतृत्व की शैली की तारीफएबॉट ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं, लेकिन इसके बावजूद वे दूसरों की बात सुनने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने बताया कि रायसीना डायलॉग के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री मोदी अक्सर मुख्य अतिथि को सुनते हैं और खुद भाषण देने से भी परहेज करते हैं। यह नेतृत्व की विनम्र शैली का उदाहरण है। लोकतंत्र को लेकर आलोचनाओं को गलत बतायाटोनी एबॉट ने उन अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं को भी खारिज किया जिनमें कहा जाता है कि भारत में लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिस देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, स्वतंत्र मीडिया और मजबूत न्यायपालिका हो, वहां तानाशाही का खतरा नहीं हो सकता। एबॉट ने यह भी कहा कि रायसीना डायलॉग जैसे मंच इस बात का प्रमाण हैं कि भारत में खुली बहस और विचारों का हेरफेर-तत्व संभव है।
रील नहीं रियल कॉलेज कैंपस: देहरादून के जंगलों से लेकर मुंबई के सेंट जेवियर्स तक, जब फिल्मी सितारों ने यहाँ ली क्लासेज

नई दिल्ली। बॉलीवुड फिल्मों में कॉलेज लाइफ की अपनी एक अलग ही चमक होती है। दोस्ती, मस्ती और पहली बार प्यार का अहसास-ये सभी भावनाएं तब और भी जीवंत हो जाती हैं जब उन्हें किसी खूबसूरत कॉलेज कैंपस में फिल्माया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि कई बड़े बजट की फिल्मों ने इसके लिए कृत्रिम सेट बनाने के बजाय भारत के असली और गौरवशाली कॉलेजों को चुना है। इस फेहरिस्त में सबसे पहला नाम आता है आलिया भट्ट, वरुण धवन और सिद्धार्थ मल्होत्रा की डेब्यू फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ का। फिल्म में जिस ‘सेंट टेरेसा’ कॉलेज को दिखाया गया है, वह असल में देहरादून का ऐतिहासिक फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट FRI है। इसकी वास्तुकला इतनी भव्य है कि यह पहली नजर में किसी विदेशी कॉलेज जैसा आभास देती है। वहीं, सुशांत सिंह राजपूत और श्रद्धा कपूर की फिल्म ‘छिछोरे’ ने दर्शकों की यादें ताजा कर दीं। इस फिल्म की शूटिंग असल में IIT बॉम्बे के हॉस्टल्स और कैंपस में की गई थी, जिससे फिल्म की कहानी को और भी प्रामाणिकता मिली। इम्तियाज अली की मास्टरपीस फिल्म ‘रॉकस्टार’ में रणबीर कपूर का जो कॉलेज दिखाया गया है, वह दिल्ली का मशहूर सेंट स्टीफन कॉलेज है। रणबीर के ‘जनार्दन जाखड़’ बनने का सफर इसी कैंपस की गलियों से शुरू हुआ था। दूसरी तरफ, ‘3 इडियट्स’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म, जिसने भारतीय शिक्षा प्रणाली पर गहरी चोट की, उसकी शूटिंग बेंगलुरु के इम्पीरियल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग IIM-B में हुई थी। फिल्म की अधिकांश शूटिंग इसी कैंपस में की गई, जिसने कहानी के हर मोड़ को यादगार बना दिया। युवा पीढ़ी के उभरते सितारे खुशी कपूर और इब्राहिम अली खान की फिल्म ‘नादानियां’ के लिए भी पुणे की मशहूर फ्लेम यूनिवर्सिटी को चुना गया। वहीं, साल 2008 की रोमांटिक हिट ‘जाने तू या जाने ना’ में जय और अदिति के कॉलेज की यादें आज भी प्रशंसकों के जेहन में ताजा हैं, जिसकी शूटिंग मुंबई के प्रतिष्ठित सेंट जेवियर्स कॉलेज में हुई थी। इसी कड़ी में चेतन भगत के उपन्यास पर आधारित फिल्म ‘2 स्टेट्स’ का जिक्र भी जरूरी है। आलिया भट्ट और अर्जुन कपूर की इस प्रेम कहानी को IIM अहमदाबाद के कैंपस में फिल्माया गया, जो फिल्म की संस्कृति और माहौल को पूरी तरह से मेल खाता था। इन असली कॉलेजों की वजह से ही ये फिल्में दर्शकों को खुद से जुड़ी हुई महसूस हुईं।