मुरैना: तेज रफ्तार ट्रक ने चरवाहे को 25 किलोमीटर तक घसीटा, सिर कुचलने से युवक की मौके पर मौत

नई दिल्ली। मुरैना जिले में शनिवार सुबह एक भयंकर सड़क हादसे ने इलाके में सनसनी मचा दी। शिवपुरी की ओर से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक (MP31 HA 1220) ने पहले एक बकरी को कुचल दिया और फिर चरवाहा सोनू धोबी (25) को टक्कर मार दी। हादसे के बाद युवक ट्रक के नीचे फंस गया, लेकिन चालक ने बेपरवाही दिखाई और ट्रक को चलते रहने दिया।सोनू धोबी, जो पहाड़गढ़ थाना क्षेत्र का रहने वाला था, सुबह बकरियां चराने रोड के पास गया था।करीब 10 बजे ट्रक ने पहले उसकी बकरी को कुचला।सोनू ने ट्रक रोकने की कोशिश की, लेकिन चालक ने उसे भी टक्कर मार दी ट्रक के नीचे फंसे रहने के कारण युवक का सिर कुचल गया और मौके पर ही सोनू की मौत हो गई। ग्रामीण और पुलिस की कार्रवाई:आसपास के ग्रामीणों ने घटना देखी और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पहाड़गढ़ थाना पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से ट्रक का पीछा किया। किसारोली गांव के पास ट्रक और चालक को पकड़ लिया गया। थाना प्रभारी राजेंद्र परिहार ने बताया कि चालक को पकड़ने में काफी मशक्कत लगी। एडीशनल एसपी सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ट्रक चालक ने पहले बकरी को कुचला और जब सोनू ने रोकने का प्रयास किया तो उसका पैर ट्रक में फंस गया। परिजनों को सूचना:मृतक सोनू धोबी के परिजनों को घटना की जानकारी दे दी गई है। पुलिस ने कहा कि चालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।यह हादसा तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा की अनदेखी का परिणाम है। आसपास के ग्रामीणों की सतर्कता ने ट्रक चालक को पकड़ने में मदद की। घटना ने पूरे इलाके में सड़क सुरक्षा और ट्रक चालक की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खरमास 2026: 15 मार्च से 14 अप्रैल तक मांगलिक कार्यों पर विराम, जानिए धार्मिक मान्यता, महत्व और क्या करना माना जाता है शुभ

नई दिल्ली । हिंदू धर्म और ज्योतिष में समय और ग्रहों की स्थिति को विशेष महत्व दिया गया है। इन्हीं ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर वर्ष में दो बार आने वाले खरमास को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में खरमास की शुरुआत 15 मार्च से होने जा रही है और यह अवधि 14 अप्रैल तक रहेगी। इस दौरान विवाह गृह प्रवेश मुंडन कर्ण छेदन जैसे कई मांगलिक कार्यों पर परंपरागत रूप से विराम लग जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय किए गए शुभ कार्य अपेक्षित फल नहीं देते इसलिए लोगों को इन्हें टालने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 14 मार्च की रात 1 बजकर 8 मिनट के बाद सूर्य देव कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि यानी धनु या मीन में प्रवेश करते हैं तो उनकी स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है। इसी कारण इस अवधि को खरमास कहा जाता है और इस दौरान मांगलिक कार्यों को शुभ नहीं माना जाता। इस बार मीन संक्रांति के साथ शुरू होने वाला खरमास 14 अप्रैल को समाप्त होगा जब सूर्य देव सुबह 9 बजकर 31 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर लगा विराम भी समाप्त हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास में विवाह गृह प्रवेश नए घर के निर्माण की शुरुआत मुंडन संस्कार और कर्ण छेदन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। मान्यता है कि इस समय शुरू किए गए दीर्घकालिक कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं या अपेक्षित सुख समृद्धि नहीं मिलती। यही कारण है कि लोग इस अवधि में नया व्यवसाय शुरू करने या बड़े निवेश करने से भी बचते हैं। हालांकि यह समय पूरी तरह निष्क्रिय रहने का नहीं माना जाता बल्कि इसे आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत श्रेष्ठ बताया गया है। खरमास के दौरान दान पुण्य जप तप पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए दान का फल कई गुना अधिक मिलता है। ब्राह्मणों गुरुजनों गायों और साधु संतों की सेवा करना भी पुण्यदायी माना गया है। इसके अलावा तीर्थ यात्रा करना धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना और भगवान के नाम का स्मरण करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। खरमास से जुड़ी एक प्रचलित कथा भी बताई जाती है। कथा के अनुसार सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। लगातार चलते रहने से उनके घोड़े थक जाते हैं और प्यास से व्याकुल हो जाते हैं। ऐसे में सूर्य देव उन्हें विश्राम देने के लिए रथ को एक तालाब के पास रोकते हैं और घोड़ों को पानी पिलाते हैं। इस दौरान रथ को चलाने के लिए वे दो ‘खर’ यानी गधों को रथ में जोड़ देते हैं। गधों की गति धीमी होने के कारण रथ की चाल भी धीमी हो जाती है लेकिन इस बीच सूर्य के घोड़े आराम कर लेते हैं। इसी कारण इस अवधि को खरमास कहा जाता है और मान्यता है कि इस समय सूर्य के घोड़े विश्राम करते हैं। इस प्रकार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खरमास का समय भले ही मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त न माना जाता हो लेकिन इसे आध्यात्मिक साधना दान पुण्य और भगवान की भक्ति के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी समय माना गया है।
सूर्यकुमार यादव और गौतम गंभीर टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी लेकर मंदिर पहुंचे; अभिषेक शर्मा ने वैष्णो देवी के दर्शन किए

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में तीसरी बार खिताब जीतकर इतिहास रचा। जीत के जश्न में कप्तान सूर्यकुमार यादव और हेड कोच गौतम गंभीर शनिवार को टी-20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी लेकर मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान गणेश के दर्शन कर टीम की सफलता और देशवासियों के लिए आशीर्वाद मांगा। हनुमान मंदिर दर्शन और कीर्ति आजाद की प्रतिक्रिया:वहीं, चैंपियन बनने के बाद 8 मार्च की रात सूर्यकुमार यादव और टीम के कुछ सदस्य अहमदाबाद के हनुमान मंदिर भी गए। इस पर पूर्व क्रिकेटर और TMC सांसद कीर्ति आजाद ने सवाल उठाते हुए कहा कि टीम को शर्म आनी चाहिए, क्योंकि विजेता टीम में सभी धर्मों के खिलाड़ी शामिल थे और ट्रॉफी को मंदिर में ले जाना उचित नहीं था। इस पर हेड कोच गौतम गंभीर ने जवाब दिया कि यह पूरे देश के लिए गर्व का पल है और ऐसी बातों को उठाने का कोई मतलब नहीं। गंभीर ने कहा कि अगर हर बयान को गंभीरता से लिया जाएगा तो इससे टीम के 15 खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियों का सम्मान कम हो जाएगा। अभिषेक शर्मा ने वैष्णो देवी में मांगी आशीर्वाद:टीम इंडिया के ओपनर अभिषेक शर्मा ने 13 मार्च को जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित प्रसिद्ध वैष्णो देवी मंदिर में माता रानी के दर्शन किए। उन्होंने अपनी यात्रा की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा कीं और कैप्शन में लिखा “जय माता दी।” फोटोज में अभिषेक सफेद कुर्ता-पायजामा पहनकर माथे पर तिलक लगाए हाथ जोड़कर दर्शन करते नजर आए। अभिषेक की फाइनल में शानदार पारी:टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में अभिषेक ने अहम भूमिका निभाई। टूर्नामेंट के पहले मैचों में उनका प्रदर्शन कमजोर रहा और लगातार तीन बार शून्य पर आउट हुए। लेकिन फाइनल में उन्होंने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में महज 21 गेंदों में 52 रन की पारी खेलकर भारत को जीत दिलाई। टीम इंडिया तीसरी बार चैंपियन बनी:8 मार्च को हुए फाइनल मैच में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराया और टी-20 वर्ल्ड कप का तीसरा खिताब अपने नाम किया। टीम के अन्य सदस्य भी बोले:ईशान किशन ने कीर्ति आजाद के बयान पर कहा, इतना अच्छा वर्ल्ड कप जीतें, तो अच्छे सवाल पूछिए। कीर्ति आजाद क्या बोले, इस पर मैं क्या कहूं? कुछ अच्छा सवाल करिए।
उज्जैन: किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर की नृत्य प्रस्तुति, सोशल मीडिया रील पर जताई आपत्ति

नई दिल्ली। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के सिलसिले में आयोजित बैठक में इंटरनेशनल किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर और महंत शामिल हुए। शिवांजलि गार्डन में आयोजित कार्यक्रम के दूसरे दिन धार्मिक प्रस्तुतियों का आयोजन हुआ और सिंहस्थ से जुड़े आयोजन, व्यवस्थाओं और भागीदारी पर विस्तृत चर्चा हुई। महामंडलेश्वर की नृत्य प्रस्तुति:बैठक के दूसरे दिन भोजन प्रसादी के बाद ब्रज धाम से आई किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर डॉ. वैष्णवी जगदम्बा गिरी ने “ॐ नमः शिवाय” भजन पर नृत्य प्रस्तुति दी। इसके बाद अन्य किन्नर संतों ने भी अपनी धार्मिक प्रस्तुतियां साझा की। सिंहस्थ 2028 की व्यवस्थाओं पर चर्चा:कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों से आए किन्नर संत, महंत और श्रद्धालु शामिल हुए। बैठक में किन्नर अखाड़ा की सिंहस्थ 2028 में भागीदारी, व्यवस्थाएं और धार्मिक आयोजनों को लेकर विशेष चर्चा हुई। नए महामंडलेश्वर और श्री महंतों की घोषणा:आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने गुजरात के सूरत से दिलीपनंद गिरी, तेलंगाना से महाकालीनंद गिरी, राजस्थान से कामाख्यानंद गिरी सीतारमण, उत्तर प्रदेश के गड़ी मानिकपुर प्रतापगढ़ से रेखनंद गिरी को महामंडलेश्वर नियुक्त किया। श्री महंतों में शामिल हैं: गुजरात की नंदिनीनंद गिरी, महाराष्ट्र के अकोला की गणेशानंद गिरी, इंदौर की सुनहरी नंद गिरी, आकांक्षा नंद गिरी, गुंजन नंद गिरी, खुशीनंद गिरी। शिप्रा में पर्व स्नान:समापन अवसर पर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि सिंहस्थ 2028 में किन्नर अखाड़ा जूना अखाड़े के साथ शिप्रा नदी में पर्व स्नान करेगा। सोशल मीडिया रील पर आपत्ति:महामंडलेश्वर त्रिपाठी ने किन्नर संतों को सोशल मीडिया रील बनाने से बचने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि यदि रील बनानी है तो केवल भगवान के भजन पर बनाएं, फिल्मी गीतों पर नृत्य करना उचित नहीं है। सभी को मर्यादा का ध्यान रखना अनिवार्य होगा। अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं:इंटरनेशनल किन्नर अखाड़ा जल्द ही अपनी वेबसाइट लॉन्च करेगा। महामंडलेश्वर, श्री महंत और महंतों के लिए पहचान पत्र बनाए जाएंगे। सभी को एक समान तिलक लगाने की व्यवस्था की जाएगी।बैठक के समापन के बाद देशभर से आए किन्नर संत अपने-अपने शहरों के लिए रवाना हो गए।
मध्य प्रदेश में LPG संकट: सिलेंडर 30% महंगे, होटल और घरों में हाहाकार

भोपाल। मध्य प्रदेश में रसोई गैस (LPG) की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले 6 दिनों से प्रदेश के कई शहरों में कॉमर्शियल और घरेलू सिलेंडर की सप्लाई बाधित है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि होटल, रेस्टोरेंट और घरों में रसोई गैस की गंभीर किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें:भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे प्रमुख शहरों में लोग सुबह-सुबह सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़े हो रहे हैं। बड़ी संख्या में बच्चे और बुजुर्ग भी सिलेंडर लेने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। कई बार बुकिंग पूरी नहीं हो पा रही है, जबकि कभी-कभी 6 से 8 घंटे इंतजार के बाद सिलेंडर मिल पा रहा है। होटल और रेस्टोरेंट्स पर असर:प्रदेश में करीब 50 हजार होटल और रेस्टोरेंट्स इस संकट से प्रभावित हैं। इन व्यवसायों को अपने संचालन के लिए कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे, जिससे खाना पकाने में बाधा और ग्राहकों की सेवा प्रभावित हो रही है। विकल्प और बढ़ा खर्च:गैस की कमी के कारण इंडक्शन और डीजल भट्ठियों का उपयोग बढ़ गया है। हालांकि, इनके संचालन की लागत 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। भोपाल में कुछ रेहड़ियां और छोटे स्ट्रीट फूड स्टॉल्स अस्थायी रूप से बंद भी हो गए हैं। राज्यव्यापी स्थिति:LPG संकट केवल भोपाल तक सीमित नहीं है। राजधानी से लेकर छिंदवाड़ा और अन्य शहरों में रसोई गैस की कमी ने आम जनता और व्यवसायों में हाहाकार मचा दिया है। विशेषज्ञों की चेतावनी:विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो इससे खाद्य सेवा उद्योग और घरेलू रसोई दोनों प्रभावित होंगे। लंबे समय तक गैस की कमी के कारण लोग सस्ता और असुरक्षित विकल्प, जैसे खुले भट्ठी या कोयला, इस्तेमाल करने पर मजबूर हो सकते हैं, जिससे सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। सरकारी कदम:इस समय सरकारी एजेंसियां और वितरक प्रयास कर रहे हैं कि जल्द से जल्द सिलेंडर की सप्लाई बहाल हो। हालाँकि, अभी तक कोई ठोस समयरेखा नहीं दी गई है। मध्य प्रदेश में LPG संकट से गृहस्थी और व्यापार दोनों प्रभावित हैं। होटल और रेस्टोरेंट्स संचालन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, घरों में रसोई गैस की कमी आमजन की दिनचर्या पर असर डाल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की सुविधा दोनों पर लंबी अवधि में असर डाल सकता है।
Travel Tips: मार्च में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये 5 डेस्टिनेशन्स, ना ठंड की चिंता ना गर्मी का झंझट

नई दिल्ली। मार्च ऐसा महीना होता है जब सीज़ बिल्कुल चलता रहता है। ना कोई परेशानी होती है और ना ही गर्मी का असर होता है। विशाल धूप, साना आकाश और कम भीड़ के कारण इस समय की यात्रा का अनुभव और भी बेहतर हो जाता है। अगर आप भी इस महीने कहीं भी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो भारत की कुछ ऐसी खूबसूरत जगहें हैं जहां आपको प्रकृति, संस्कृति और सबसे शानदार संगम देखने को मिलेगा। वाराणसी: अध्यात्म और शांति का अनुभववाराणसी में मार्च महीने में घूमने के लिए बेहद शानदार जगह मणि मिलती है। इस समय यहां की सुबह बेहद सुहावनी होती है और धूप के बीच घाटों का दृश्य मन मोह लेता है। यहां आप प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कर सकते हैं और शहर की पुरानी कहानियों में डूबे हुए दार्शनिक दार्शनिक को महसूस कर सकते हैं। सुबह-सुबह गंगा नदी में नाव की सवारी और शाम को घाटों पर वाली गंगा आरती का अनुभव करने के लिए हर यात्री स्मारक पर जाता है। यूके: झीलों की नगरी का रोमांटिक दृश्यराजस्थान की गर्मी मार्च से पहले शुरू होने पर उदयपुर घूमने का सबसे सही समय माना जाता है। साफ नीले आकाश की परछाई जब पिछोला झील में खूबसूरत माला है, तो पूरे शहर में किसी भी तरह की पेंटिंग नजर आती है। यहां का ग्रैंड सिटी पैलेस, उदयपुर और जग मंदिर की भूमिका को प्रमुखता से तैयार किया गया है। वहीं सहेलियों-की-बारी में टहलना और झील किनारे शाम की चढ़ाई बेहद सच्चा अनुभव देती है। वायनाड: प्रकृति प्रेमियों की पसंदअगर आप हरियाली और प्रकृति के करीब घूमना चाहते हैं, तो वायनाड मार्च में घूमने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। यह इस समय बेहद खूबसूरत दिखती है। यहां आप प्राचीन एडक्कल गुफाएं देख सकते हैं और बाणासुर सागर बांध के शानदार नज़ारों का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा चेम्बरा पीक तक ट्रैकिंग करते हुए दिल के आकार वाली लेक तक का आनंददायक अनुभव भी देखने को मिलता है। उटी: फूल और चाय बागानों की सुंदरतादक्षिण भारत का प्रसिद्ध हिल स्टेशन ऊटी मार्च में अपनी असली सुंदरता का प्रतीक है। इस समय यहां के सजावटी रंग-बिरंगे फूलों से भरपूर रहते हैं और चारों ओर चाय के हरे-भरे बाग देखने को मिलते हैं। यहां की ऊटी झील में बोटिंग करना और प्रसिद्ध नीलगिरि माउंटेन रेलवे की टेरी ट्रेन की सवारी करना बेहद यादगार अनुभव होता है। अगर आप पेपैल से शानदार दृश्य देखना चाहते हैं, तो डोड्डाबेट्टा पीक जरूर जाएं। गैंगटोक: पहाड़ों में वसंत का जादूगंगटोक में मार्च महीने में वसंत का मौसम शुरू हो जाता है। इस समय यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है और आसपास के दृश्यों में साक्षात् दृश्य दिखाई देते हैं। यहां आप खूबसूरत त्सोम्गो झील का नजारा देख सकते हैं और शांत वातावरण वाले रमटेक मठ में समय सामात्यकर मनोवैज्ञानिक पवित्र पा सकते हैं। शाम के समय एमजी मार्ग, गंगटोक पर घूमना और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेना और भी खास बनाना है।
ग्वालियर: शराब के लिए पैसे न देने पर स्कूटी में आग, CCTV में कैद हुई घटना

ग्वालियर। हजीरा थाना क्षेत्र के बिरला नगर में शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात एक व्यक्ति की घर के बाहर खड़ी स्कूटी में आग लगा दी गई। घटना का कारण था शराब के लिए पैसे न देना। पूरी वारदात घर के बाहर लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। बिरला नगर निवासी जंडेल सिंह यादव ने पुलिस को बताया कि चेतन राजावत और पंकज कोली उससे शराब के लिए पैसे मांग रहे थे।पैसे देने से इनकार करने पर दोनों आरोपी उस रात वहां से चले गए।गुरुवार देर रात दोनों फिर उसके घर पहुंचे। एक आरोपी निगरानी करता रहा, जबकि दूसरा स्कूटी के पास गया। स्कूटी में आग लगाने की वारदातआरोपी ने स्कूटी पर पेट्रोल डालकर माचिस से आग लगा दी। इसके बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस कार्रवाईCCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों की तलाश शुरू की।पंकज कोली को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि चेतन राजावत अभी फरार है।सीएसपी मनीष यादव ने बताया कि शराब के लिए पैसे न देने के विवाद में ही स्कूटी में आग लगाई गई। कीवर्ड्स (कोमा से अलग): ग्वालियर, बिरला नगर, हजीरा थाना, स्कूटी आग, शराब विवाद, पैसे नहीं देने, CCTV फुटेज, पंकज कोली, चेतन राजावत, पुलिस गिरफ्तारी, फरार आरोपी, जंडेल सिंह यादव, आगजनी, सड़क सुरक्षा, स्थानीय अपराध
बैतूल पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की पुत्री के निधन पर जताई शोक संवेदना

बैतूल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को बैतूल पहुंचे और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की पुत्री सुरभि खंडेलवाल के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से बैतूल पहुंचे और शहर के गंज स्थित खंडेलवाल निवास जाकर परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कहा कि वे सुरभि के निधन पर अपनी संवेदना व्यक्त करने आए हैं। उन्होंने कहा कि हेमंत खंडेलवाल ने अपनी पुत्री की पूरे समर्पण के साथ सेवा की। मुख्यमंत्री ने बताया कि सुरभि बचपन से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं लेकिन परिवार ने हमेशा उनकी पूरी देखभाल की। उन्होंने कहा कि परिवार के किसी सदस्य के बिछड़ने का दुख अत्यंत पीड़ादायक होता है और इस कठिन समय में वे परिवार के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री ने भगवान से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति और मोक्ष प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि इस दुखद घड़ी में पूरा प्रदेश खंडेलवाल परिवार के साथ खड़ा है। उन्होंने बाबा महाकाल से प्रार्थना करते हुए कहा कि वे शोक संतप्त परिवार को इस गहरे दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। इससे पहले प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और मंत्री कृष्णा गौर भी बैतूल पहुंचे। दोनों नेताओं ने गंज स्थित खंडेलवाल निवास पहुंचकर परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और दिवंगत सुरभि खंडेलवाल को श्रद्धांजलि अर्पित की। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा सड़क मार्ग से बैतूल पहुंचे थे। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी और इस कठिन समय में उनके साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया। सुरभि खंडेलवाल के निधन के बाद से बैतूल में प्रदेशभर के राजनीतिक और सामाजिक नेताओं का आना-जाना लगातार जारी है। शनिवार को भी खंडेलवाल निवास पर प्रदेश सरकार के कई मंत्री जनप्रतिनिधि भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता पहुंचे और दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाते हुए अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। खंडेलवाल निवास पर श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे लोगों की भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की थी। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर हेलीपैड और सुरक्षा इंतजाम भी प्रशासन द्वारा किए गए थे। प्रदेशभर से भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा शोक संदेश भेजे जा रहे हैं और सुरभि खंडेलवाल को श्रद्धांजलि दी जा रही है। इस दुखद घटना के बाद खंडेलवाल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने का सिलसिला लगातार जारी है।
अब कोई नहीं है सुपरमार्केट की ओर से: शॉकॉक कैंसिल करने पर देना होगा टैगडा पुअनी, बिना एयरलाइन की टैक्सी चलाना संभव नहीं है

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने ओला और उबर के जेईई ऐप पर आधारित टैक्सी सेवाओं को कंपनियों में शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने मोटरयान ग्रुप एवं वितरण सेवा प्रदाता नियमावली-2026 का ड्राफ्ट जारी किया है। सरकार का कहना है कि अब बिना रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के कोई भी ऐप आधारित रेडियो सेवा संचालित नहीं हो सकती। इन पेशेवरों का मकसद यात्रियों की सुरक्षा और यात्री सेवाओं को सुरक्षित करना है। 30 दिनों में सलाह और सलाह दी गईराज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली-1998 में संशोधन करते हुए नई नियमावली का मसौदा जारी किया है। इस पर आम लोगों, सुपरमार्केट और अन्य संबंधित स्टार्स से 30 दिनों के लिए सलाह और गोपनीयता की छूट दी गई है। सरकार का कहना है कि सभी सुझावों पर विचार करने के बाद प्रतिभा को अंतिम रूप दिया जाएगा और इसके बाद प्रदेश में चलने वाली सभी ऐप आधारित रेडियो सेवाओं को अंतिम चरण के अनुसार काम करना होगा। बिना किराये वाली गाड़ी चलाना संभव नहींनई व्यवस्था के अनुसार किसी भी प्रकार की रोड़ सेवा के बिना भर्ती, वाहन, फिटनेस और चालक के लिए यात्रा नहीं चलनी चाहिए। इसके साथ ही चालक का मेडिकल परीक्षण और पुलिस सत्यापन भी अनिवार्य होगा। यदि कोई सेवा प्रदाता या चालक दल के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का मानना है कि इससे अवैध विदेशी सेवाओं पर रोक से यात्रियों और यात्रियों को सुरक्षित यात्रा की सुविधा मिलेगी। बैंक कैंसिल करने पर अंतिम कीमतनई नियमावली में यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। यदि कोई चालक दल नामांकन स्वीकार करने के बाद बिना किसी वैध के उसे रद्द कर देता है, तो उस पर किराए का 10 प्रतिशत या अधिकतर 100 रुपये तक का मूल्य निर्धारण होगा। इसके अलावा अगले कोच में यात्री को किराए पर कुछ डीजल भी देगा। सरकार का मानना है कि इससे बार-बार शोक कंसिल करने की समस्या कम होगी। सरकार ने पासपोर्ट के लिए 40 घंटे का प्रशिक्षण कार्यक्रम अनिवार्य कर दिया है। इसमें ऐप का सही उपयोग, मोटरयान नियम, सुरक्षित ड्राइविंग, यात्रियों से व्यवहार और सड़क दुर्घटना के समय सहायता जैसे विषय शामिल होंगे। अगर किसी ड्राइवर की रेटिंग 5 प्रतिशत से कम है तो उसे हर तीन महीने में फिल्म ट्रेनिंग लेनी होगी। ड्राइवर बनने के लिए तय किये गये नये नियमनई नीति के अनुसार ड्रॉइट ड्राइवर बनने के लिए कम से कम दो साल का ड्राइविंग अनुभव जरूरी होगा। इसके अलावा पिछले तीन वर्षों में किसी भी अपराध में दोषी पाए गए व्यक्ति को चालक बनने की अनुमति नहीं दी गई। सभी पासपोर्टों का पुलिस द्वारा चरित्र सत्यापन भी अनिवार्य होगा। सरकार ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई नियम तय किए हैं। ड्राइवर के पास कम से कम 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा 10 लाख रुपये का आकस्मिक बीमा अनिवार्य है ऐप में महिला चालक दल का विकल्प आवश्यक यात्री लाइव ड्राइवर परिवार या दोस्तों के साथ साझा कर पैसा सभी साहिलियत में साहिली सिस्टम सक्रिय रहेगाअगर ड्राइवर तय रास्ते से हटता है तो कंट्रोल रूम को तुरंत जरूरी मिल जाएगा। नई नीति में प्रदूषण कम करने पर भी जोर दिया गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अब केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक ऑटो कैरिज ही जोड़ा जाएगा। चार पहिया औद्योगिक वाणिज्यिक वाहन, औद्योगिक मालवाहक वाहन और डोपहिया श्रेणी में पेट्रोल या डीजल से चलने वाले नए ऑटोमोबाइल को शामिल नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे प्रदूषण पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी
इंदौर–खंडवा ब्रॉडगेज रेल लाइन को पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी, जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य

नई दिल्ली। इंदौर–खंडवा के बीच बनने वाली नई ब्रॉडगेज रेल लाइन को पर्यावरण और वन मंत्रालय से प्रारंभिक अनुमति मिल गई है। इससे लंबे समय से अटकी परियोजना का रास्ता साफ हो गया है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। परियोजना का दायराइस रेल लाइन के लिए 454 हेक्टेयर वनभूमि का उपयोग किया जाएगा। निर्माण क्षेत्र में कुल 1 लाख 34 हजार पेड़ों की कटाई होगी, जबकि करीब 17 हजार पेड़ों को संरक्षित किया जाएगा। परियोजना के तहत करीब 20 किलोमीटर के हिस्से में 16 सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। मुख्य सुरंगेंबड़िया से बेका के बीच: 4.1 किमी लंबी सुरंग चोरल से मुख्तियार बलवाड़ा के बीच: 2.2 किमी सुरंग राजपुर के पास: 1.6 किमी लंबी सुरंग इसके अलावा 13 छोटी सुरंगें 12.1 किमी क्षेत्र में बनाई जाएंगी। निर्माण और स्वीकृतिपरियोजना के निर्माण कार्य की अस्थायी अनुमति 10 मार्च 2026 से 9 जून 2026 तक दी गई है। सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि वन भूमि उपयोग की आवश्यक सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है। रेलवे को निर्देश दिए गए हैं कि यदि पुरानी रेल लाइन आगे उपयोग में नहीं आएगी, तो उसे हटाकर जमीन वन विभाग को लौटाई जाए और ग्रीन रेलवे कॉरिडोर प्रबंधन योजना तैयार की जाए।यह परियोजना इंदौर सहित पूरे मालवा और निमाड़ क्षेत्र के विकास के लिए अहम मानी जा रही है।