सीएम डॉ. मोहन यादव के बैतूल-कटनी दौरे, भोपाल में गैस कालाबाजारी पर पुलिस कार्रवाई और TET परीक्षा को लेकर शिक्षक आंदोलन का उबाल

भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव आज यानी 14 मार्च को बैतूल और कटनी जिलों के दौरे पर रहेंगे। उनका कार्यक्रम सुबह 11 बजे शुजालपुर में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शामिल होने से शुरू होगा जिसमें वे नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएं देंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री भोपाल से बैतूल के लिए रवाना होंगे। बैतूल आरंभ वे सबसे पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निवास पर जाएंगे। दोपहर 1:15 बजे सीएम बैतूल से कटनी जिले के बरही क्षेत्र में आयोजित किसान सम्मेलन में शामिल होंगे। इस दौरान वे किसानों को संबोधित करेंगे और उनकी समस्याओं पर चर्चा करेंगे। शाम 5:40 बजे बरही से जबलपुर के लिए रवाना होने के बाद डुमना एयरपोर्ट से 6:30 बजे तक भोपाल पहुंचने का कार्यक्रम है। इसी बीच राजधानी भोपाल में घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। थाना कोलार रोड पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि घरेलू गैस सिलेंडरों की अवैध बिक्री की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने एक पिकअप वाहन को रोककर जांच की जिसमें इंडेन कंपनी के कुल 25 घरेलू गैस सिलेंडर बरामद हुए। यह सिलेंडर घरेलू उपयोग के लिए आरक्षित थे लेकिन इन्हें काले बाजार में बेचने के इरादे से ले जाया जा रहा था। पुलिस ने वाहन और सिलेंडर दोनों जब्त कर पूरे मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है। इसी समय प्रदेशभर में शिक्षक समाज में TET परीक्षा को लेकर उबाल देखा जा रहा है। शिक्षकों ने कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपे हैं जबकि सुसनेर के पूर्व बीजेपी विधायक मुरलीधर पाटीदार ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह को पत्र लिखा लिखकर TET परीक्षा के आदेश तत्काल निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने पत्र में लिखा कि 25 साल से अधिक अनुभव रखने वाले संविदा शिक्षकों ने शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पूर्व विधायक ने चेतावनी दी है कि यदि TET परीक्षा के आदेश निरस्त नहीं किए गए और शिक्षकों के उचित वातावरण और सुरक्षा के लिए कदम नहीं उठाए गए तो शिक्षक समाज उग्र आंदोलन की ओर बढ़ सकता है। उनका कहना है कि शिक्षक समाज का पूरा समर्थन उनके आंदोलन के साथ रहेगा और जरूरत पड़ने पर शिक्षा के अधिकार अधिनियम में संशोधन की भी मांग की जाएगी। राज्य प्रशासन के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है क्योंकि एक तरफ मुख्यमंत्री के दौरे और कार्यक्रम हैं वहीं दूसरी ओर शिक्षक आंदोलन और गैस कालाबाजारी जैसे मुद्दे समाज में असंतोष बढ़ा रहे हैं। प्रशासन के लिए इन सभी घटनाओं को संतुलित ढंग से संभालना एक बड़ी जिम्मेदारी साबित हो सकती है।
देश में गहराया LPG संकट: बिहार में बढ़ी लकड़ी-कोयले की मांग, राजस्थान के होटल लकड़ी पर बना रहे खाना; कई राज्यों में गोदामों पर छापे

नई दिल्ली। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के असर अब भारत में भी दिखाई देने लगे हैं। देशभर में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत तेजी से बढ़ रही है। कई राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं, वहीं कालाबाजारी और जमाखोरी के मामले भी सामने आ रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि बिहार में लोग लकड़ी और कोयले पर खाना बनाने को मजबूर हैं, जबकि राजस्थान के कई होटल और ढाबे गैस की जगह लकड़ी की भट्ठियों का सहारा ले रहे हैं। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में लोग रात से ही गैस एजेंसियों के बाहर सिलेंडर के इंतजार में बैठे रहे। कई जगहों पर घरेलू और कॉमर्शियल सिलेंडर की कालाबाजारी भी सामने आई है। करीब 2000 रुपए का कॉमर्शियल सिलेंडर कुछ इलाकों में 4000 रुपए तक बेचा जा रहा है। जमाखोरी की शिकायतों के बाद सरकार ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में गैस गोदामों पर छापेमारी शुरू कर दी है। पंजाब और चंडीगढ़ में भी गैस संकट गहराता जा रहा है। बरनाला में सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लगे एक बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वहीं छत्तीसगढ़ के रायपुर समेत कई जिलों में गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुट रही है।पंजाब और चंडीगढ़ में भी गैस संकट गहराता जा रहा है। बरनाला में सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लगे एक बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत हो गई। वहीं छत्तीसगढ़ के रायपुर समेत कई जिलों में गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुट रही है। तेज धूप में घंटों इंतजार करने के बाद भी कई उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। हरियाणा में गैस डिलीवरी में 20 से 25 दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है। ऑनलाइन बुकिंग और फोन कॉल का जवाब नहीं मिलने से लोग सीधे एजेंसियों पर पहुंचकर सिलेंडर लेने की कोशिश कर रहे हैं। उधर, हिमाचल प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण होटल और ढाबा संचालक इंडक्शन हीटर खरीदने लगे हैं। दुकानदारों के अनुसार पहले हफ्ते में एक-दो इंडक्शन बिकते थे, लेकिन अब रोज 8 से 15 तक बिक रहे हैं। इस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के अधिकारियों की हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो गैस सप्लाई की निगरानी कर रही है। साथ ही जमाखोरी रोकने के लिए एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 लागू किया गया है। सिलेंडर की डिलीवरी में OTP और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियम भी बदल दिए हैं। अब एक सिलेंडर मिलने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक किया जा सकेगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतराल 45 दिन कर दिया गया है। वहीं सभी रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया है और उत्पादन में करीब 28% तक बढ़ोतरी की गई है। इसके बावजूद जमीनी हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें बनी हुई हैं और होटल-ढाबा संचालकों ने खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने तक एलपीजी सप्लाई पर दबाव बना रह सकता है।
रिपोर्ट का दावा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस बढ़ाने के लिए मेटा में छंटनी संभव
नई दिल्ली। दुनिया की बड़ी टेक कंपनी में शामिल मेटा प्लेटफॉर्म एक बार फिर बड़े स्तर के कर्मचारियों के ड्रॉ पर विचार कर रही है। कंपनी का फोकस अब तेजी से बढ़ती आर्टिफिशियल टेक्निकल टेक्नोलॉजी (मैटोलिट) सेक्टर पर है और इसी वजह से वह अपने प्लांट को नई कंपनी से सलाह देने की योजना बना रही है। मीडिया विद्वान का कहना है कि मेटा अपने आर्किटेक्चर और डेटा सेंटर की मजबूती को मजबूत करने के लिए भारी निवेश करने की तैयारी में है। इसके साथ ही कंपनी की लागत कम करने और कार्यकुशल बनाने की दिशा में भी अधिक कदम उठाए जा सकते हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के अंदर चल रही चर्चाओं में कर्मचारियों की बड़ी कटौती पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मेटा के कुल कर्मचारियों में से लगभग 20 प्रतिशत या उससे अधिक की निकासी की संभावना बनी हुई है। करीब 16 हजार कर्मचारियों की नौकरी पर संकटदिसंबर के अंत तक मेटा में करीब 79,000 कर्मचारी कर्मचारी थे। यदि प्रस्तावित अधिसूचना लागू होती है तो लगभग 16,000 कर्मचारियों की नौकरियाँ प्रभावित हो सकती हैं। हालाँकि कंपनी ने इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने इस रिपोर्ट में केवल विशाल पर आधारित रेटिंग के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि अभी तक बड़े पैमाने पर खींचने या समय लेने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने अलग-अलग तरह के आंकड़ों से यह आकलन किया है कि किस तरह के ऑपरेशन को और अधिक कुशल बनाया जा सकता है और किस तरह के ढांचे का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। मेटा में पहले भी हो चुका है बड़ा ड्रॉयदि इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को खींचा जाता है तो यह मेटा के इतिहास की सबसे बड़ी पुनर्स्थापना प्रक्रिया हो सकती है। इससे पहले भी कंपनी की लागत के लिए कर्मचारियों की संख्या कम कर दी गई है। 2022 और 2023 के दौरान मेटा ने दो चरणों में 21,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था। उस समय कंपनी ने इसे “ईयर ऑफ फिशिएंसी” यानि कि प्रशिक्षण की रणनीति का हिस्सा बताया था। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग कंपनी को जनरेटिव फिल्म के क्षेत्र में मजबूत स्थिति के लिए तैयार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि नीतिगत रणनीति के तहत आर्किटेक्चरल टेक्नोलॉजी, डेटा सेंटर और बड़े पैमाने पर निवेश की योजना बनाई जा रही है। मस्जिद से लेकर सभी प्रकार के प्रभावशालीइस बीच इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टैनली की टॉयलेट रिपोर्ट में कहा गया है कि मेटल के गोदाम पर सिक्किम के प्रभाव से कोई गंभीर नुकसान नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कई मशीनों को ऑटोमेट किया जा सकता है, लेकिन इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों के पूरी तरह से ऑर्डर होने की संभावना कम है। इसके बजाय कई कर्मचारी नए प्रकार के कर्मचारियों में स्थानांतरण हो सकते हैं और भविष्य में ऐसे रोजगार भी पैदा हो सकते हैं जो अभी मौजूद नहीं हैं। हालांकि टेक इंस्टीट्यूट के कुछ दिग्गजों का मानना है कि अगले 12 से 18 महीनों में कंप्यूटर आधारित कई व्हाइट-कॉलर की हिस्सेदारी काफी हद तक ऑटोमेटेड हो सकती है। टेक इंडस्ट्री में ड्रॉ का जबरदस्त ट्रेंडमेटा इको कंपनी नहीं है जो निवेश के लिए काम में बदलाव पर विचार कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक ओरेकल ने भी अपने स्मार्टफोन डेटा सेंटर की क्षमता बढ़ाने के लिए 20,000 से 30,000 बेरोजगारी खत्म करने की योजना बनाई है। वहीं ई-कॉमर्स और क्लाउड दिग्गज अमेज़न ने भी हाल ही में लगभग 16,000 कर्मचारियों के लिए प्लॉट आधारित रिवाइवल योजना की घोषणा की है। विशेषज्ञ का मानना है कि आने वाले वर्षों में टेक सोसायटी की रणनीति में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। इंटरमीडिएट पारंपरिक प्रयोगशालाओं से अधिकांश ध्यान स्टूडियो, क्लाउड स्टूडियो और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र पर केंद्रित कर रहे हैं।
मध्य पूर्व तनाव का असर: भारतीय शेयर बाजार में हफ्तेभर में 6% गिरावट

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। इस सप्ताह प्रमुख घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई और बाजार में लगातार बिकवाली का माहौल बना रहा। सप्ताह के दौरान Nifty 50 में 5.31 प्रतिशत की गिरावट आई और आखिरी कारोबारी दिन यह 2.06 प्रतिशत टूटकर 23,151 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं BSE Sensex 1,470.50 अंक यानी 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,564 के स्तर पर बंद हुआ। विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति आर्थिक चिंताओं को बढ़ाती है, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई और बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावटइस गिरावट का सबसे ज्यादा असर ऑटो सेक्टर पर पड़ा। Nifty Auto Index में इस सप्ताह करीब 10 से 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो मार्च 2020 के बाद इसका सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन माना जा रहा है। ऑटो इंडेक्स के लगभग सभी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। इसके अलावा सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बैंकिंग, मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। एक दिन में 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसानशुक्रवार को बाजार में आई तेज गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई। अनुमान के मुताबिक सिर्फ एक कारोबारी सत्र में ही निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये डूब गए। वहीं व्यापक बाजार सूचकांकों में भी गिरावट देखने को मिली। Nifty Midcap 100 4.59 प्रतिशत गिर गया, जबकि Nifty Smallcap 100 में 3.66 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में बढ़ा डर और उतार-चढ़ावविश्लेषकों के अनुसार बाजार में डर और अस्थिरता बढ़ रही है। इसका संकेत India VIX से भी मिलता है, जो 22 के स्तर से ऊपर पहुंच गया है। यह आने वाले समय में बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव की संभावना का संकेत देता है। तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है। इसके बाद 23,300 और 23,500 के स्तर पर रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है। वहीं Bank Nifty के लिए 53,500 पहला सपोर्ट स्तर है और इसके नीचे 53,000 का स्तर अहम माना जा रहा है। दूसरी ओर 54,000 और 54,300 के स्तर को प्रमुख रेजिस्टेंस बताया जा रहा है। कच्चे तेल और गैस की चिंता बढ़ीविशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा एलएनजी और एलपीजी की संभावित कमी से औद्योगिक उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। सीएनजी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने से उपभोक्ताओं की मांग के पैटर्न में बदलाव आ सकता है, खासकर उन शहरों में जहां सीएनजी वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल होता है। रुपये पर भी बढ़ा दबाववैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय मुद्रा भी कमजोर हुई है। भारतीय रुपया लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.45 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। इस हफ्ते बाजार में आई करीब 6 प्रतिशत की गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है, और फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक हालात पर निर्भर रहने वाली है।
भोपाल में सनसनी: हमीदिया अस्पताल के इमरजेंसी गेट पर फायरिंग, घायल का पीछा करते पहुंचे बदमाश

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अपराधियों के बढ़ते हौसलों का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालहमीदिया अस्पताल के इमरजेंसी गेट के पास बदमाशों ने फायरिंग कर सनसनी फैला दी। बताया जा रहा है कि पुरानी रंजिश के चलते आरोपी ने पहले एक बदमाश के घर में घुसकर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं और जब घायल को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया तो उसका पीछा करते हुए यहां भी फायरिंग कर दी। जानकारी के अनुसार अशोका गार्डन इलाके में रहने वाले पुराने बदमाश लल्लू रईस के घर पर शनिवार को अचानक बदमाशों ने हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि आरोपी शादाब अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा और घर में घुसकर करीब 8 से 9 राउंड फायरिंग कर दी। इस हमले में लल्लू रईस का बेटा इमरान गंभीर रूप से घायल हो गया। गोली उसके पैर में लगी जिससे वह लहूलुहान होकर गिर पड़ा। फायरिंग की घटना के बाद इलाके में अफरा तफरी मच गई। परिजन और आसपास के लोग तुरंत घायल इमरान को इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। आरोप है कि हमलावर बदमाशों ने घायल का पीछा करते हुए अस्पताल तक पहुंचकर इमरजेंसी गेट के पास फिर से फायरिंग कर दी। अस्पताल परिसर में गोली चलने की खबर फैलते ही वहां मौजूद मरीजों और उनके परिजनों में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अस्पताल के बाहर अचानक गोलियों की आवाज सुनाई दी जिससे कुछ समय के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया। अस्पताल परिसर में मौजूद सुरक्षा कर्मियों और लोगों ने तत्काल स्थिति को संभालने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और आसपास के इलाके में तलाशी अभियान शुरू कर दिया। प्राथमिक जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला पुरानी रंजिश से जुड़ा बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि आरोपी और लल्लू रईस के बीच पहले से विवाद चल रहा था जिसके चलते यह हमला किया गया। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। घायल इमरान का इलाज अस्पताल में चल रहा है और उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल परिसर में फायरिंग जैसी गंभीर घटना को लेकर सख्ती से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। राजधानी भोपाल के बीचोंबीच अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के सबसे बड़े अस्पताल में इस तरह खुलेआम फायरिंग की घटना से लोगों में डर और चिंता का माहौल बना हुआ है।
भारत की पहली खनन कंपनी बनी एनएमडीसी, एक वित्त वर्ष में 50 मिलियन टन आयरन ओर उत्पादन

नई दिल्ली। देश की प्रमुख खनन कंपनी NMDC लिमिटेड ने एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के समाप्त होने से पहले ही 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही NMDC एक ही वित्त वर्ष में 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन करने वाली भारत की पहली खनन कंपनी बन गई है। सरकारी बयान के अनुसार यह उपलब्धि न सिर्फ कंपनी की बढ़ती उत्पादन क्षमता को दर्शाती है, बल्कि भारत की लौह अयस्क आपूर्ति श्रृंखला में उसकी मजबूत और अहम भूमिका को भी साबित करती है। 1958 में हुई थी कंपनी की स्थापनाNMDC लिमिटेड की स्थापना वर्ष 1958 में भारत के लौह अयस्क खनिजों के विकास के उद्देश्य से की गई थी। यह सरकारी कंपनी इस्पात मंत्रालय के अधीन कार्य करती है और इसे ‘नववर्ष CPSE’ का दर्जा प्राप्त है। शुरुआती दौर में कंपनी का उत्पादन सीमित था। उदाहरण के तौर पर 1978 में कंपनी ने लगभग 10 मिलियन टन लौह अयस्क का उत्पादन किया था। लेकिन समय के साथ कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता में लगातार विस्तार किया और अब यह आंकड़ा बढ़कर 50 मिलियन टन तक पहुंच गया है। पिछले दशक में तेज हुई उत्पादन वृद्धिपिछले कुछ दशकों में एनएमडीसी की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2015 में कंपनी का उत्पादन करीब 30 मिलियन टन था, जो अब बढ़कर 50 मिलियन टन हो गया है। इसका मतलब है कि पिछले करीब एक दशक में उत्पादन में लगभग दो-तिहाई की बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि वर्तमान उत्पादन क्षमता का लगभग एक-पांचवां हिस्सा पिछले चार दशकों में ही जोड़ा गया है। इसे कंपनी के इतिहास का सबसे तेज विस्तार माना जा रहा है। एनएमडीसी 2.0 के तहत मजबूत प्रदर्शनइस उपलब्धि पर कंपनी के डायरेक्टर और मैनेजमेंट डायरेक्टर अमिताव मुखर्जी ने इसे एनएमडीसी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा, “50 मिलियन टन उत्पादन तक पहुंचे एक बड़ी उपलब्धि है और यह एनएमडीसी 2.0 के तहत हमारे मजबूत प्रदर्शन को बरकरार है। जिस क्षमता को बनाने में पहले दशकों लगे, उसे हमने बेहतर क्रियान्वयन, जिम्मेदारी खनन और राष्ट्रीय स्तर के प्रति बढ़ने के जरिए कुछ ही वर्षों में तेजी कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की सबसे बड़ी लौह ओर उत्पादक कंपनी होने के कारण एनएमडीसी पर बड़ी जिम्मेदारी भी है। छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में प्रमुख खदानेंएनएमडीसी की प्रमुख खदानें खनिज संपन्न राज्य छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में स्थित हैं। इन खदानों में अत्याधुनिक तकनीक और बड़े पैमाने पर मशीनीकृत खनन किया जाता है। कंपनी देश में लौह अयस्क की स्थिर और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाती है, जिससे इस्पात उद्योग को निरंतर कच्चा माल उपलब्ध हो सके। भारत के इस्पात उत्पादन लक्ष्य में अहम भूमिकाभारत ने वर्ष 2030 तक अपनी इस्पात उत्पादन क्षमता को 300 मिलियन टन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में लौह अयस्क की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना देश की एक महत्वपूर्ण जरूरत बन गई है। इस लक्ष्य को हासिल करने में NMDC Limited की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि आगे भी उसका ध्यान संचालन संयंत्र, नई तकनीकों के इस्तेमाल और जिम्मेदारी खनन पर रहेगा ताकि विकास के अगले चरण को हासिल किया जा सके। NMDC की यह उपलब्धि भारतीय खनन उद्योग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन का आंकड़ा पार कर कंपनी ने न सिर्फ नया रिकॉर्ड बनाया है, बल्कि देश के इस्पात उद्योग और आर्थिक विकास को भी व्यापक प्रदान की है।
अमेरिका में भारतीय मूल के नेता को सम्मान, सीनेट में सुनील पुरी को याद किया गया

नई दिल्ली अमेरिका की सीनेट में भारतीय मूल के अमेरिकी उद्योगपति और राष्ट्रपति सुनील पुरी को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान अमेरिकी सीनेटर डिक डर्बिन ने उनके जीवन और समाज के लिए दिए गए योगदान को याद किया। सीनेटर डर्बिन ने बताया कि किस तरह भारत से बहुत कम पैसे लेकर अमेरिका आए एक युवा ने मेहनत और लगन के दम पर न सिर्फ अपनी पहचान बनाई, बल्कि रॉकफोर्ड, इलिनोइस के विकास में भी अहम भूमिका निभाई। मुंबई से अमेरिका तक का प्रेरणादायक सफरडर्बिन ने अपनी किताब में कहा कि सुनील पुरी अमेरिका में मुंबई से बेहतर शिक्षा का सपना देखते थे। वह रॉकफोर्ड यूनिवर्सिटी (पूर्व में रॉकफोर्ड कॉलेज) की पढ़ाई करने आये थे। कॉलेज के दिनों में आर्थिक स्थिति आसान नहीं थी। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्हें कई छोटी-मोटी सब्जियां उगानी पड़ती हैं। सीनेटर डर्बिन ने बताया कि कड़ी मेहनत और लगन के साथ उन्होंने हर तरह का काम किया, जिसमें अस्पताल में बेडपैन साफ करना और भर्ती जैसे कठिन काम भी शामिल थे। इसी संघर्ष के दम पर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और आगे बढ़ने का रास्ता निकाला। रियल एस्टेट में बनी बड़ी पहचानएक रियल एस्टेट कंपनी की स्थापना के बाद सुनील पुरी ने ‘फर्स्ट रॉकफोर्ड ग्रुप’ का नाम रखा, जिसके बाद उन्हें ‘फर्स्ट मिडवेस्ट ग्रुप’ का नाम दिया गया। इस कंपनी ने रॉकफोर्ड सिटी में कई पुनर्विकास कंपनियों को आगे बढ़ाया। डर्बिन ने बताया कि कंपनी ने कई वीरान और उपेक्षित इमारतों को फिर से विकसित कर उन्हें उपयोगी स्थानों पर रेस्तरां, कार्यालय और गोदामों में बदल दिया। उनके अनुसार इन कोलिक ने शहर में नई ऊर्जा भर दी और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा किए। समाजसेवा में भी दिया बड़ा योगदानव्यवसाय के साथ-साथ सुनील पुरी समाजसेवा के कार्य में भी सक्रिय रहे। डर्बिन ने बताया कि अपने माता-पिता से मिली सीख से प्रेरणा लेकर वह हमेशा समाज को कुछ वापस करने की बात करते थे। उन्होंने कई कोचिंग संस्थानों के लिए लाखों डॉलर का दान और अपना समय भी समर्पित किया। उनके योगदान में कई महत्वपूर्ण स्मारक हो सकते हैं, जिनमें ‘कीलिंग-पुरी पीस प्लाजा’, दक्षिण-पूर्व रॉकफोर्ड की वाईएमसीए शाखा और ‘साल्वेशन आर्मी पुरी फैमिली डिजास्टर सर्विसेज सेंटर’ शामिल हैं। भारत-अफ्रीका को मजबूत बनाने में भूमिकासीनेटर डर्बिन ने यह भी निर्देश दिया कि सुनील पुरी भारत और अमेरिका के सशक्तिकरण को हमेशा के लिए मजबूत करने के लिए सक्रिय रहें। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग और साझेदारी को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया। इसी मित्र में उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों बिल क्लिंटन और बराक ओबामा के साथ भारत की यात्रा भी की थी। सुनील पुरी का जीवन संघर्ष, परिश्रम और समाजसेवा का उदाहरण है। एक साधारण प्रवासी से लेकर सफल उद्योगपति और पदवी तक की यात्रा पर निकले उनके कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। अमेरिकी सीनेट द्वारा दी गई श्रद्धांजलि इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने अमेरिका और भारत दोनों के समाज में गहरी छाप छोड़ी है।
एमपी के सबसे अमीर IAS अफसर का खुलासा: 19.5 करोड़ संपत्ति के साथ मनु श्रीवास्तव टॉप पर, 100 अफसरों के पास न मकान न प्लॉट

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारियों की संपत्ति से जुड़ा एक दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। केंद्र सरकार को दी गई जानकारी के अनुसार राज्य के कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के पास करोड़ों की संपत्ति है, जबकि करीब 100 अधिकारी ऐसे भी हैं जिनके पास न खुद का मकान है और न ही कोई प्लॉट। इस सूची में सबसे ज्यादा संपत्ति रखने वाले अधिकारी के रूप में मनु श्रीवास्तव का नाम सामने आया है। केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय को दी गई संपत्ति की जानकारी के अनुसार अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव के पास करीब 19.5 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज है, जो मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारियों में सबसे अधिक है। वहीं कलेक्टर स्तर के अधिकारियों में विवेक श्रोत्रिय सबसे आगे हैं। उनकी घोषित संपत्ति करीब 6.2 करोड़ रुपये बताई गई है। दरअसल केंद्र सरकार के निर्देश पर सभी आईएएस अधिकारियों को हर वर्ष अपनी चल और अचल संपत्तियों का विवरण देना होता है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश कैडर के अधिकारियों ने 31 दिसंबर 2024 तक की स्थिति में अपनी संपत्ति का विवरण केंद्र को सौंपा है। इस सूची में कुल 388 आईएएस अधिकारियों ने अपनी प्रॉपर्टी की जानकारी दी है, जिनमें से चार अधिकारी अब रिटायर हो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 231 आईएएस अधिकारियों के पास खेती की जमीन भी है। हालांकि इस सूची का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि करीब 100 अधिकारी ऐसे हैं जिनके पास न खुद का मकान है और न ही कोई प्लॉट दर्ज है। यह आंकड़ा इसलिए भी ध्यान खींचता है क्योंकि आमतौर पर यह माना जाता है कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के पास पर्याप्त संपत्ति होती है। संपत्ति के मामले में दूसरे स्थान पर टी प्रतीक राव का नाम सामने आया है, जिनके पास घोषित संपत्ति करीब 10.5 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं प्रताप नारायण यादव लगभग 10.2 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सूची में तीसरे स्थान पर हैं।इसके अलावा अनिरुद्ध मुखर्जी के पास करीब 8.71 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज है। वहीं अंजलि रमेश के पास लगभग 7.35 करोड़ रुपये और ज्ञानेश्वर पाटिल के पास करीब 7.10 करोड़ रुपये की संपत्ति बताई गई है। इसके अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों में अनुराग जैन की घोषित संपत्ति लगभग 4.14 करोड़ रुपये है, जबकि नीरज मंडलोई के पास करीब 4.97 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज की गई है। वहीं राजेश राजोरा की संपत्ति करीब 1.73 करोड़ रुपये बताई गई है। सरकारी नियमों के तहत आईएएस अधिकारियों को अपनी संपत्ति का विवरण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर साल देना अनिवार्य होता है। यह प्रक्रिया प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जाती है। मध्यप्रदेश के आईएएस अधिकारियों की संपत्ति से जुड़ा यह डाटा सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। यह आंकड़े एक ओर जहां अधिकारियों की आर्थिक स्थिति की झलक देते हैं, वहीं यह भी बताते हैं कि कई अधिकारी अभी भी व्यक्तिगत संपत्ति के मामले में अपेक्षाकृत सीमित संसाधनों के साथ सेवा दे रहे हैं।
भारतीय कुश्ती के महान शिक्षक: गुरु हनुमान की विरासत आज भी कायम

नई दिल्ली भारत में कुश्ती सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है। समय-समय पर कई महान पहलवानों और कोचों ने इस खेल को नई ऊंचाई तक पहुंचाया। उन्नीस महान व्यक्तित्वों में एक नाम है गुरु हनुमान का, असली नाम विजय पाल यादव था। गुरु हनुमान को भारतीय कुश्ती का आधुनिक रूप देने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने पारंपरिक भारतीय पहलवानों को अंतर्राष्ट्रीय फ्रीस्टाइल कुश्ती के मानकों के अनुरूप ढालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके सुझाव में कई पहलवानों ने देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया। राजस्थान से दिल्ली तक का सफरविजय पाल यादव का जन्म 15 मार्च 1901 को चिड़ावा, राजस्थान में हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि वह कभी स्कूल नहीं गईं, लेकिन बचपन से ही उनके मन में कुश्ती के लिए गहरी पैठ थी। कम उम्र में ही उन्होंने छात्रों में प्रैक्टिस शुरू कर दी और नौकरी में अपना करियर बनाने का सपना देखा। साल 1919 में उन्होंने काम की तलाश में दिल्ली आकर सब्जी मंडी इलाके में एक छोटी सी दुकान शुरू की। हालाँकि उनका मन व्यापार में नहीं लगा और उन्होंने अपना पूरा ध्यान कुश्ती पर लगा दिया। धीरे-धीरे वह इलाके में एक बेहतरीन रेसलर के रूप में पहचाने जाने लगे। बिड़ला मिल्स व्यायामशाला से गुरु हनुमान एरिना तकभारतीय उद्योगपति के.के. बिड़ला ने उन्हें कुश्ती के प्रशिक्षण के लिए जमीन उपलब्ध कराई। इसके बाद 1925 के आसपास पुरानी दिल्ली के मलकागंज इलाके में बिड़ला मिल्स व्यायामशाला की शुरुआत हुई। यह क्षेत्र बाद में गुरु हनुमान् क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध हुआ। रोशनआरा बाग और शक्ति नगर के पास स्थित यह अखाड़ा आज भी भारत का सबसे पुराना और प्रसिद्ध कुश्ती प्रशिक्षण प्रशिक्षण में से एक माना जाता है। कई दिग्गज रेसलरों को प्रशिक्षण दिया गयागुरु हनुमान के मार्गदर्शन में कई पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया। उनके शिष्य सुदेश कुमार और प्रेम नाथ ने 1958 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा सतपाल सिंह और करतार सिंह ने क्रमशः 1982 और 1986 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। गुरु हनुमान के आठ शिष्यों को भारत के प्रतिष्ठित अर्जुन गुरु भी मिल गए हैं। उनके इंजीनियरों में दारा सिंह, हंस राम, सुभाष वर्मा, वीरेंद्र सिंह और सुशील कुमार जैसे दिग्गज शामिल हैं। सुशील कुमार और रवि दहिया जैसे स्टैंडर्स से लेकर ट्रेडिशनल गुरु परंपरा तकगुरु हनुमान के शिष्य सतपाल सिंह आज भी भारत के बड़े कुश्ती कोचों में गिने जाते हैं। उनके प्रशिक्षण में सुशील कुमार और रवि दहिया जैसे पहलवानों ने ओलंपिक में भारत के लिए पदक नामांकन इतिहास हासिल किया। ऐसे ही गुरु हनुमान की कोचिंग परंपरा आज भी भारतीय कुश्ती को नई पीढ़ी तक पहुंचा रही है। पुरस्कार और सम्मानभारतीय कुश्ती में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें 1983 में पद्म श्री और 1987 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 9 अगस्त 2003 को मदन लाल खुराना ने नई दिल्ली के कल्याण विहार स्पोर्ट्स स्टेडियम में हनुमान जी की प्रतिमा का अनावरण भी किया था। विभिन्न दुर्घटनाओं में हुई मौतें24 मई 1999 को हरिद्वार के पास एक कार दुर्घटना में गुरु हनुमान का निधन हो गया। हालाँकि उनकी विरासत आज भी भारतीय कुश्ती में जीवित है और उनके क्षेत्रीय देश के पहलवानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है। गुरु हनुमान सिर्फ एक कोच नहीं बल्कि भारतीय कुश्ती के महान मार्गदर्शक थे। उन्होंने औद्योगिक स्टॉक एक्सचेंजों को आधुनिक अंतरराष्ट्रीय स्तर तक मान्यता दी और ऐसी पीढ़ी तैयार की, जिसने देश का नाम विश्व मंच पर रोशन किया। उनकी बनाई परंपरा आज भी भारतीय कुश्ती की ताकतें बनी हुई है।
इरफान पठान का बयान: CSK में युवा खिलाड़ियों को मौका, फिर भी धोनी की अहमियत बरकरार

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान का कहना है कि चेन्नई सुपर किंग्स में अब युवा खिलाड़ियों के लिए खुद को साबित करने का सही समय आ गया है। हालांकि टीम में युवा खिलाड़ियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन एमएस धोनी की भूमिका अभी भी बहुत महत्वपूर्ण बनी हुई है। इजरायल पठान ने बातचीत करते हुए कहा कि धोनी मैदान पर और मैदान के बाहर दोनों जगह टीम के लिए योगदान देने को तैयार नजर आते हैं। उनके अनुसार ड्रेसिंग रूम में धोनी की पहचान अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों और नेताओं को दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी। आईपीएल में फिर दिख धोनी का जलवाइरफान पठान ने कहा कि जैसे ही आईपीएल शुरू होगा, क्रिकेट फैंस को एक बार फिर एमएस धोनी मैदान पर नजर आएंगे। उन्होंने कहा कि धोनी इस सीजन के लिए पूरी तरह तैयार और फिट दिख रहे हैं। पठान के अनुसार, धोनी ने सालों तक टीम की जिम्मेदारी संभाली है, लेकिन अब समय आ गया है कि युवा खिलाड़ियों को भी आगे आने का मौका दिया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष म्हात्रे, डेवल्ड ब्रेविस, शिवम दुबे और रुतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ियों को टीम की कमान संभालनी चाहिए। युवा खिलाड़ियों से बड़ी उम्मीदेंइरफान पठान का मानना है कि सीएसके की मौजूदा टीम पेपर पर काफी रोमांचक नजर आती है। उन्होंने कहा कि इस युवा टीम में जिम्मेदारी लेने की क्षमता और निडरता साफ दिखाई देती है। उनके हिसाब से आयुष म्हात्रे, डेवल्ड ब्रेविस, शिवम दुबे और कप्तान रुतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ी आने वाले समय में टीम को नई दिशा दे सकते हैं। अनुभवी टीम से युवा टीम की ओर बदलावएक समय था जब चेन्नई सुपर किंग्स को अनुभवी और अनुभवी खिलाड़ियों की टीम माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ समय से टीम की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नीलामी में भी टीम ने युवाओं पर भरोसा दिखाया है। आयुष म्हात्रे, डेवल्ड ब्रेविस और सरफराज खान जैसे युवा खिलाड़ियों को टीम में शामिल करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वहीं संजू सैमसन के आने से टीम की मजबूती भी काफी मजबूत हुई है। धोनी को शानदार विदाई देने की कोशिशसंभावना तय जा रही है कि यह सीजन एमएस धोनी का चेन्नई सुपर किंग्स के लिए आखिरी आईपीएल हो सकता है। ऐसे में कप्तान रुतुराज गायकवाड़ और अन्य युवा खिलाड़ियों के पास धोनी के साथ खेलते हुए उनसे सीखने का बड़ा मौका होगा। पुणे है कि चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल इतिहास की सबसे सफल टीमों में से एक है। टीम ने धोनी की कप्तानी में पांच बार खिताब जीता है और इस मामले में मुंबई इंडियंस के बराबर है, जिसने रोहित शर्मा की कप्तानी में पांच ट्रॉफी जीती हैं। सीएसके ने आखिरी बार 2023 में आईपीएल का खिताब जीता था। अब टीम की कोशिश इस सीजन में एक बार फिर ट्रॉफी अपने दिग्गज कप्तान धोनी को शानदार विदाई देने की होगी। इरफान पठान के अनुसार चेन्नई सुपर किंग्स अब युवा खिलाड़ियों के दम पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है, लेकिन एमएस धोनी का अनुभव और मार्गदर्शन टीम के लिए अब भी सबसे बड़ी ताकत बना हुआ है। आने वाला आईपीएल सीजन यह तय करेगा कि युवा जोश और अनुभवी नेतृत्व का यह मेल टीम को कितनी सफलता दिला पाता है।