Chambalkichugli.com

गया: CM के बेटे निशांत और मैथिली ठाकुर की 'आपत्तिजनक AI फोटो' वायरल करने वाला गिरफ्तार

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का सहारा लेकर मशहूर हस्तियों को बदनाम करने का एक बड़ा मामला बिहार के गया जिले में उजागर हुआ है। पुलिस ने विकास कुमार यादव (35) नामक युवक को गिरफ्तार किया है, जिसने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और प्रसिद्ध लोक गायिका व विधायक मैथिली ठाकुर की मर्यादा को ठेस पहुँचाने वाली एआई-जनित (AI Generated) तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की थीं। आरोपी ने सोशल मीडिया पर रातों-रात लोकप्रियता और फॉलोअर्स पाने की सनक में इस गंभीर अपराध को अंजाम दिया। साजिश: AI की मदद से तैयार की ‘फर्जी’ तस्वीरेंपुलिस की साइबर सेल और स्थानीय थाने की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं: डीपफेक का इस्तेमाल: आरोपी विकास यादव (निवासी: शब्दों गांव, फतेहपुर) ने करीब एक सप्ताह पहले एआई टूल की मदद से निशांत और मैथिली ठाकुर की चेहरे वाली आपत्तिजनक और भ्रामक तस्वीरें तैयार कीं। सोशल मीडिया पर वायरल: इन फर्जी तस्वीरों को उसने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर पोस्ट कर दिया, जिससे तेजी से अफवाहें फैलने लगीं और दोनों हस्तियों की छवि को नुकसान पहुँचा। बयान: आरोपी ने पूछताछ में कबूल किया कि उसने केवल लाइक और फॉलोअर्स बढ़ाने की लालच में यह काम किया था, उसे अंदाजा नहीं था कि वह कानून के लंबे हाथों से बच नहीं पाएगा। पुलिसिया कार्रवाई: आईटी एक्ट की धाराओं में केस दर्जगया पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की: साइबर सर्विलांस: सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट की निगरानी कर रही टीम ने आईपी एड्रेस और लोकेशन के आधार पर आरोपी को ट्रेस किया। गिरफ्तारी: फतेहपुर पुलिस ने दबिश देकर विकास कुमार यादव को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब उसके मोबाइल और कंप्यूटर की जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि उसने और किन हस्तियों को निशाना बनाया है। निष्कर्ष“एआई तकनीक का यह दुरुपयोग समाज के लिए एक नया और खतरनाक खतरा बन गया है। महज कुछ लाइक पाने की चाह में किसी की प्रतिष्ठा को सरेराह नीलाम करने की कोशिश करने वाला यह अपराधी अब जेल की सलाखों के पीछे है। यह मामला उन सभी के लिए चेतावनी है जो सोशल मीडिया को अपनी मनमानी का जरिया समझते हैं।”

हरदा के भुआणा का गणगौर उत्सव राष्ट्रीय मंच पर, 21 मार्च को दूरदर्शन पर होगा प्रसारण

हरदा जिले के भुआणा क्षेत्र में गणगौर महोत्सव की धूम 9 दिनों तक देखने को मिलती है। इस दौरान गांवों में कन्याएं और महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य और पूजा के माध्यम से माता गौरा की आराधना करती हैं। मालवा, निमाड़ और भुआणा क्षेत्र की साझा संस्कृति की झलक इस उत्सव में स्पष्ट रूप से देखने को मिलती है। इस वर्ष भुआणा के कलाकारों ने अपनी कला के दम पर जिले को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्वर प्रभा संगीत कला अकादमी को राष्ट्रीय चैनल दूरदर्शन से प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया गया। कलाकारों ने गणगौर उत्सव और निमाड़ी संस्कृति पर आधारित अपनी प्रस्तुति की रिकॉर्डिंग कराई, जिसे 21 मार्च को दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर प्रसारित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से पूरे देश के दर्शक भुआणा क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं और उत्सव की धूम को देख सकेंगे। स्वर प्रभा संगीत कला अकादमी की गायिका मिशा शर्मा अपने मंडल ‘मां कात्यायनी शक्ति गणगौर मंडल’ के साथ दूरदर्शन के स्टूडियो पहुंचीं। मंडल के कलाकारों ने पारंपरिक गणगौर गीतों और लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। रिकॉर्डिंग के दौरान कलाकारों ने निमाड़ की लोक संस्कृति और गणगौर उत्सव की परंपराओं को जीवंत रूप में मंच पर प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति से क्षेत्र की लोक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम में नृत्य प्रस्तुति देने वालों में प्रियांशी, भूमी, पूजा, साधना रानी, पायल, लक्ष्मी, हर्षा, दुर्गा और मीनाक्षी शामिल रहीं। गायन में मिशा शर्मा और सुमित शर्मा ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। संगीत में ढोलक पर मयंक मालवीय, तबले पर सान्निध्य गंगराड़े और ऑक्टोपैड पर दिव्यांश शर्मा ने संगत देकर प्रस्तुति को और आकर्षक बनाया। भुआणा क्षेत्र की गणगौर परंपरा और निमाड़ी संस्कृति को पहले भी कई मंचों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाया जा चुका है। स्वर प्रभा संगीत कला अकादमी के सुमित शर्मा लगातार अपने विद्यार्थियों को तैयार कर बड़े मंचों पर प्रस्तुति का अवसर दिला रहे हैं। इस बार दूरदर्शन पर होने वाला प्रसारण हरदा और भुआणा क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और अधिक मजबूत होगी। साथ ही आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी लोक परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी। गणगौर महोत्सव के माध्यम से भुआणा का यह सांस्कृतिक रंग न केवल जिले बल्कि पूरे देश के दर्शकों तक पहुंच रहा है। भुआणा का गणगौर उत्सव अब सिर्फ स्थानीय या क्षेत्रीय ही नहीं रह गया, बल्कि राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने में सफल हो रहा है। 21 मार्च को प्रसारित यह कार्यक्रम इस क्षेत्र की कला और संस्कृति की गौरवपूर्ण छवि को और मजबूती देगा।

एमएस रोड पर बाइक टकराने के बाद बीच सड़क पर हाथापाई, पुलिस ने दोनों युवकों को किया बंद

नई दिल्ली। शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में एमएस रोड पर शनिवार को बाइक दुर्घटना के बाद दो युवकों के बीच हाथापाई की घटना सामने आई। यह विवाद अस्पताल के सामने मोड़ पर हुआ, जहां दोनों युवकों के कपड़े तक फट गए। स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर विवाद को शांत कराया, जबकि पुलिस ने धारा 151 के तहत दोनों युवकों को हिरासत में लेकर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार, हिमांशु नामक युवक अपनी बाइक पर गैस सिलेंडर लेकर घर जा रहा था। इसी दौरान एमएस रोड पर सामने से आ रहे वंश नामक युवक की बाइक से उसकी टक्कर हो गई। टक्कर के तुरंत बाद दोनों युवकों के बीच तीखी बहस और गाली-गलौज शुरू हो गई। बहस देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई और दोनों युवकों ने सड़क पर आपस में मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान दोनों के कपड़े फट गए और आसपास खड़े लोग दंग रह गए। स्थानीय लोगों ने स्थिति को संभालते हुए दोनों को अलग किया और विवाद को नियंत्रित करने की कोशिश की। मामले की जानकारी मिलते ही कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंची। टीआई अमित भदौरिया ने बताया कि दोनों युवक शांत होने के बजाय झगड़े में लगे रहे। उन्होंने कहा, “बाइक भिड़ने से दोनों युवकों के बीच मारपीट हुई, लेकिन जब दोनों शांत नहीं हुए तो धारा 151 के तहत उन्हें बंद किया गया।” इस घटना ने सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता को भी उजागर किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क पर किसी भी टकराव को तुरंत शांत न किया जाए तो यह बड़े विवाद या दुर्घटना का रूप ले सकता है। स्थानीय लोगों ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि यदि हस्तक्षेप न किया जाता तो यह झगड़ा और बढ़ सकता था और आम जनता के लिए भी खतरा बन सकता था। वहीं, पुलिस ने चेतावनी दी कि सड़क पर सार्वजनिक जगहों पर किसी भी प्रकार के हिंसक व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हिमांशु और वंश दोनों ही युवकों के लिए यह अनुभव एक सबक साबित हुआ। पुलिस का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए सड़क पर सावधानी और संयम जरूरी है। बाइक चलाते समय यातायात नियमों का पालन न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए, बल्कि अन्य राहगीरों और पड़ोसियों की सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य है। इस घटना ने यह भी संकेत दिया कि स्थानीय लोगों की जागरूकता और त्वरित हस्तक्षेप विवादों को गंभीर रूप लेने से रोक सकता है। शहर में कोतवाली पुलिस ने आने वाले समय में ऐसी घटनाओं पर कड़ी निगरानी बनाए रखने का संकल्प लिया है

इंडियन वेल्स ओपन: आंद्रेओजी और गुइनार्ड ने जीता डबल्स का खिताब

नई दिल्ली। गुइडो आंद्रेओजी और मैनुअल गुइनार्ड ने इंडियन वेल्स ओपन के डबल्स का खिताब जीत लिया है। रविवार को हुए फाइनल में आंद्रेओजी और गुइनार्ड की जोड़ी ने आर्थर रिंडरकनेच और वैलेंटिन वचेरोट को 7-6(3), 6-3 से हराकर खिताब जीता। यह मैच 1 घंटा 23 मिनट तक चला। कैलिफोर्निया में उनकी खिताबी जीत के सफर में कई बड़ी जीतें शामिल रहीं। इस जोड़ी ने टूर्नामेंट में पहले चौथी सीड क्रिश्चियन हैरिसन और नील स्कूप्स्की को हराया, फिर टॉप सीड मार्सेल ग्रैनोलर्स और होरासियो जेबालोस को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। 2025 में साथ आए दोनों खिलाड़ियों के करियर में एक और बड़ी कामयाबी जुड़ गई है। गुइनार्ड के लिए, इंडियन वेल्स का टाइटल उनका दूसरा एटीपी मास्टर्स 1000 क्राउन है। इससे पहले, उन्होंने 2025 में रोमेन अर्नेओडो के साथ रोलेक्स मोंटे-कार्लो मास्टर्स में जीत हासिल की थी। आंद्रेओजी ने एटीपी टूर फाइनल्स में अपने मजबूत रिकॉर्ड को पांच में से चार जीत तक बेहतर किया, इससे पहले उन्होंने क्रोएशिया ओपन उमाग (2024), अर्जेंटीना ओपन (2025), और स्वीडिश ओपन (2025) में खिताब जीते थे। जीत के बाद आंद्रेओजी ने कहा, “मैं यहां जीतकर बहुत खुश हूं। यह एक शानदार टूर्नामेंट है, सच में बहुत बड़ा। मुझे मनु के साथ काम करने और पिछले साल अगस्त से इस सफर पर बहुत गर्व है।” गुइनार्ड ने इतने हाई-प्रोफाइल फाइनल में मुकाबला को दबाव वाला मुकाबला मानते हुए कहा, “मुझे पता था कि यह एक खतरनाक मैच होने वाला है। हमने मैच के लिए जितनी अच्छी तैयारी कर सकते थे, की और दबाव का प्रबंधन करने की कोशिश की। हमने साथ मिलकर जो काम किया है, उससे मैं बहुत खुश हूं।” रिंडरकनेच और वाचेरोट इस टूर्नामेंट में 2025 में रोलेक्स शंघाई मास्टर्स में अपने यादगार प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद से उतरे थे। दोनों खिलाड़ियों को फाइनल में पहुंचने के लिए पांच सीडेड विरोधी को हराया था।

दरोगा भर्ती परीक्षा विवाद: ‘पंडित’ विकल्प पर राजनीति, सीएम योगी ने जताई नाराजगी

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में दरोगा भर्ती परीक्षा के सामान्य हिंदी के प्रश्नपत्र में विकल्प में ‘पंडित’ दिए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शनिवार को पूछे गए सवाल में पूछा गया था कि “अवसर के हिसाब से बदल जाने वाले को क्या कहेंगे?” इसके विकल्पों में ‘पंडित’, ‘अवसरवादी’, ‘निष्कपट’ और ‘सदाचारी’ थे। सवाल सामने आते ही विरोध शुरू हो गया, विशेषकर ब्राह्मण समुदाय में। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि जाति, धर्म या किसी समाज के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी भर्ती बोर्डों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में नियमों का पालन किया जाए और बार-बार गलती करने वालों पर प्रतिबंध लगाया जाए। वहीं, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी। विवाद के बाद पुलिस भर्ती बोर्ड ने रविवार सुबह निर्देश जारी किया। इसमें कहा गया कि एग्जाम सेंटर में प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों से कलावा, मंगलसूत्र आदि न उतारवाए जाएं, ताकि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों। इसके बाद दूसरे दिन परीक्षा केंद्रों पर नरमी बरती गई; महिला अभ्यर्थियों से मंगलसूत्र नहीं उतरवाए गए और पुरुषों के कलावा नहीं काटे गए, जबकि सामान्य सुरक्षा उपाय जैसे जूते, बेल्ट और हाथ के कड़े उतारवाए गए। इस भर्ती परीक्षा में प्रदेश के सभी 75 जिलों में 1,090 सेंटर बनाए गए हैं। परीक्षा दो दिन में पूरी की जा रही है और इसमें कुल 4,543 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। भर्ती के लिए 15,75,760 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें 11,66,386 पुरुष और 4,09,374 महिला अभ्यर्थी शामिल हैं। पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने बताया कि पुलिस परीक्षाओं के प्रश्नपत्र गोपनीय तरीके से तैयार किए जाते हैं। हजारों प्रश्नों में से कुछ ही चुनकर प्रश्नपत्र में शामिल किए जाते हैं। उन्होंने सवाल के विवाद को गैरजिम्मेदाराना बताया और कहा कि ‘पंडित’ का अर्थ विद्वान होता है, जाति विशेष के लिए नहीं। उनका मानना है कि यह मुद्दा केवल ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया। भाजपा के तीन ब्राह्मण विधायक शलभ मणि त्रिपाठी, प्रकाश द्विवेदी और रमेश मिश्र ने भी इस पर सीएम को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। साथ ही, सहारनपुर के पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने भी लिखा कि परीक्षा में विकल्प के इस प्रयोग से ब्राह्मण समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। ब्राह्मण समाज उत्तर प्रदेश में 9–11 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और कई जिलों में राजनीतिक रूप से प्रभावी भूमिका निभाता है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में ब्राह्मण मतदाता चुनाव परिणामों पर बड़ा असर डालते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ब्राह्मण मतदाता भाजपा के लिए महत्वपूर्ण स्विंग वोटबैंक रहे हैं। इस विवाद ने भर्ती परीक्षा में निष्पक्षता, प्रशासनिक सतर्कता और सामाजिक संवेदनशीलता की जरूरत को उजागर किया है। अधिकारियों ने सभी पक्षों से संयम बनाए रखने और किसी भी जाति विशेष के प्रति अनुचित टिप्पणी से बचने की अपील की है।

सैमसन को प्लेइंग इलेवन में लाने का फैसला आक्रामक सोच से प्रेरित, वह पावर प्ले में मैच जीता सकते हैं: गौतम गंभीर

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने कहा है कि टी20 विश्व कप 2026 के दौरान संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन में लाने का फैसला आक्रामक सोच से प्रेरित था। किसी तकनीकी खामी की वजह से उन्हें टीम में नहीं लाया गया था। गंभीर ने कहा कि संजू के पास पावर प्ले में मैच का रुख अपनी टीम के पक्ष में मोड़ने की क्षमता है। गंभीर ने जियोस्टार पर कहा, “मुझे पता है कि बहुत से लोग इस बारे में बात करेंगे कि हम टॉप पर मौजूद तीन बाएं हाथ के बल्लेबाजों से हो रही समस्या से कैसे निपटना चाहते थे। हमें लगा कि हम और ज्यादा आक्रामक होना चाहते हैं क्योंकि पिछले डेढ़ साल में हमारी सोच यही रही है कि हम मैदान पर जाकर जितना हो सके उतना आक्रामक रहें। संजू को लाने का कारण दूसरे छोर से ऑफ-स्पिनर को मैनेज करना नहीं था। मेरा मानना ​​है कि एक अच्छा बल्लेबाज किसी भी तरह के गेंदबाज के खिलाफ अच्छा होगा, चाहे वह ऑफ-स्पिनर हो या लेफ्ट-आर्म स्पिनर। यह इस बारे में था कि क्या हम टॉप पर और भी ज्यादा आक्रामक रहते हुए पहले छह ओवरों में और ज्यादा रन बना सकते हैं।” उन्होंने कहा, “हम जानते हैं कि संजू क्या कर सकता है। उसकी प्रतिभा और खेल पर किसी को कभी कोई शक नहीं था। अगर वह अच्छा खेलता है, तो वह आपको पहले छह ओवर में ही मैच जिता सकता है। सोचिए कि अभिषेक, संजू और ईशान आपके टॉप तीन खिलाड़ी हैं, और फिर आपके पास सूर्या, हार्दिक, तिलक, शिवम और अक्षर जैसे खिलाड़ी हैं। तो, आप इससे ज्यादा कुछ नहीं मांग सकते।” सैमसन की प्लेइंग इलेवन में वापसी पर विस्तार से बात करते हुए गंभीर ने कहा, “मैंने उसे जिम में यह बताया। हम दोनों साथ में ट्रेनिंग कर रहे थे। मैंने बस उसे बताया कि तुम जिम्बाब्वे के खिलाफ खेलोगे, और उसने कहा, ‘आने दो।’ हमारी इस तरह की बातचीत होती है। यह हेड कोच और खिलाड़ी के रिश्ते जैसा नहीं है। यह एक ऐसा रिश्ता है जहां हमारी ज्यादातर आमने-सामने की बातें अभ्यास सत्र के दौरान होती हैं।” सैमसन ने प्लेइंग इलेवन में वापसी के बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 97, सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 89 और फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ 89 रन की पारी खेली। इन लगातार तीन पारियों से उन्होंने भारत को चैंपियन बनाते हुए टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब जीता।

भिंड विवाद: TI नशे में पकड़े गए, कर्नल ने एसपी से सख्त कार्रवाई की मांग की

नई दिल्ली। मिहोना थाना प्रभारी टीआई विजय केन और रिटायर्ड सूबेदार मेज़र राकेश सिंह कुशवाहा के बीच विवाद अब तूल पकड़ चुका है। यह मामला तब सामने आया जब आर्मी के पूर्व जवान और वर्तमान पुलिस अधिकारी के बीच कथित दुर्व्यवहार की खबर आर्मी अधिकारियों तक पहुंची। शनिवार को ग्वालियर से आर्मी के डिप्टी कमांडेंट कर्नल विशाल मिहोना थाने पहुंचे और पुलिस जवानों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। कर्नल ने थाने में मौजूद पुलिस कर्मियों से विवाद के विवरण के साथ कुछ जवानों के बयान भी दर्ज किए। इसके बाद कर्नल ने सीधे टीआई विजय केन के आवास का दौरा किया। वहां उन्होंने पाया कि टीआई नशे की हालत में थे और ठीक से संवाद करने की स्थिति में नहीं थे। कर्नल ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता बताया और कहा कि ड्यूटी के दौरान शराब पीना किसी भी अधिकारी के लिए स्वीकार्य नहीं है। इस गंभीर मामले को लेकर कर्नल ने भिंड के एसपी असित यादव से करीब 35 मिनट तक मुलाकात की और सख्त कार्रवाई की मांग की। कर्नल ने स्पष्ट कहा कि आर्मी के पूर्व जवान के साथ दुर्व्यवहार और ड्यूटी के दौरान शराब पीने जैसी घटनाओं को गंभीरता से लेना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस मामले की रिपोर्ट आर्मी के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाएगी और पुलिस की कार्रवाई पर निगरानी रखी जाएगी। एसपी असित यादव ने बताया कि टीआई विजय केन को फिलहाल लाइन अटैच कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पहले भी टीआई के शराब पीने की शिकायतें आ चुकी हैं और पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मिहोना थाना में इस विवाद ने स्थानीय प्रशासन और आर्मी अधिकारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। कर्नल विशाल ने कहा कि आर्मी के किसी भी पूर्व जवान के साथ दुर्व्यवहार को नज़रअंदाज नहीं किया जाएगा और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। कर्नल की मांग है कि पुलिस विभाग भी ऐसे मामलों में अनुशासनहीन अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करे। किसी भी संगठन में अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। यह मामला यह साबित करता है कि चाहे कोई अधिकारी कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो, उसके कार्यों की निगरानी की जाती है और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय प्रशासन और आर्मी दोनों मिलकर इस मामले की निष्पक्ष जांच कर रहे हैं। इस विवाद ने यह भी उजागर किया है कि शराब और ड्यूटी का मेल किसी भी विभाग में गंभीर परिणाम ला सकता है। मिहोना थाना और भिंड जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल, टीआई को लाइन अटैच किया गया है, रिटायर्ड सूबेदार मेजर राकेश सिंह कुशवाहा अपनी बात प्रशासन के सामने रख चुके हैं, और पूरे मामले की निगरानी आर्मी द्वारा की जा रही है। स्थानीय लोग और आर्मी अधिकारी इस मामले की निष्पक्षता और उचित कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। यह घटना पुलिस विभाग के लिए भी एक चेतावनी है कि अनुशासनहीनता के मामलों में कोई छूट नहीं होगी और हर अधिकारी अपने कर्तव्य के प्रति जिम्मेदार रहेगा।

हाईवे यात्रियों के लिए अपडेट: फास्टैग वार्षिक पास हुआ महंगा

नई दिल्ली। देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। National Highways Authority of India (एनएचएआई) ने फास्टैग एनुअल पास की फीस में 75 रुपये की बढ़ोतरी करने की घोषणा की है। अब वाहन मालिकों को वार्षिक पास के लिए 3,075 रुपये चुकाने होंगे, जबकि पहले इसकी कीमत 3,000 रुपये थी। यह नई दर 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। यह घोषणा Ministry of Road Transport and Highways की ओर से जारी जानकारी में की गई है। मंत्रालय के अनुसार यह संशोधन नियमों के अनुसार किया गया है। नियमों के तहत किया गया शुल्क संशोधनएनएचएआई ने बताया कि वार्षिक पास की फीस में यह बढ़ोतरी राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2008 के प्रावधानों के तहत की गई है। इन नियमों के अनुसार समय-समय पर टोल से जुड़े शुल्क में बदलाव किया जा सकता है। फास्टैग एनुअल पास का उद्देश्य नियमित रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को आसान और किफायती सुविधा देना है। इस योजना के जरिए वाहन मालिकों को बार-बार टोल भुगतान या रिचार्ज करने की परेशानी से राहत मिलती है। 56 लाख से ज्यादा लोग उठा रहे लाभ यह सुविधा तेजी से लोकप्रिय हो रही है। फिलहाल 56 लाख से अधिक उपयोगकर्ता इस वार्षिक पास का फायदा उठा रहे हैं। यह पास विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो रोजाना या अक्सर लंबी दूरी की यात्रा करते हैं। यह पास केवल गैर-वाणिज्यिक निजी वाहनों के लिए उपलब्ध है, जिनके पास वैध फास्टैग लगा हुआ हो। इससे टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ती और यात्रा अधिक तेज व सुविधाजनक हो जाती है। 1,150 से ज्यादा टोल प्लाजा पर मिलेगा लाभफास्टैग वार्षिक पास का उपयोग देशभर में मौजूद लगभग 1,150 टोल प्लाजा पर किया जा सकता है। इनमें राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ कई प्रमुख एक्सप्रेसवे भी शामिल हैं। इस पास की वैधता एक वर्ष या अधिकतम 200 टोल क्रॉसिंग तक होती है, जो भी पहले पूरा हो जाए। यानी नियमित यात्रा करने वालों के लिए यह व्यवस्था काफी सुविधाजनक मानी जाती है। भुगतान के दो घंटे के भीतर सक्रिय हो जाता है पास वार्षिक पास खरीदने या नवीनीकरण करने के बाद यह दो घंटे के भीतर सक्रिय हो जाता है। इसके लिए वाहन मालिकों को एकमुश्त भुगतान करना होता है। यूजर्स इस पास को Rajmarg Yatra App या एनएचएआई की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए आसानी से खरीद या रिन्यू कर सकते हैं। स्वतंत्रता दिवस 2025 पर लॉन्च हुआ था पासफास्टैग वार्षिक पास को 15 अगस्त 2025 को लॉन्च किया गया था। इसके बाद से ही यह योजना तेजी से लोकप्रिय होती जा रही है। एनएचएआई का कहना है कि इस पास की बढ़ती मांग बताती है कि लोग राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्मार्ट और डिजिटल टोल सिस्टम को तेजी से अपना रहे हैं। क्या फायदा मिलता है यात्रियों कोफास्टैग वार्षिक पास के जरिए यात्रियों को कई फायदे मिलते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि बार-बार टोल भुगतान की झंझट खत्म हो जाती है। इसके अलावा टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होती है।

उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे: किसानों की जीत, मुआवजे की लड़ाई जारी

नई दिल्ली। उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना को अब नॉर्मल हाईवे के रूप में स्वीकृति मिल गई है। यह फैसला प्रभावित 62 गांवों के करीब 400 किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। शनिवार देर रात किसानों ने भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर इस निर्णय के लिए उनका आभार जताया। किसानों ने मुख्यमंत्री से अपनी दो प्रमुख मांगों पर चर्चा की। पहली मांग थी कि हाईवे को एक्सेस कंट्रोल रोड के बजाय नॉर्मल हाईवे के रूप में बनाया जाए ताकि गांवों की कनेक्टिविटी और आवागमन प्रभावित न हो। मुख्यमंत्री ने इस मांग को स्वीकार कर किसानों को संतोष दिया। दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण मांग थी भूमि अधिग्रहण के लिए वास्तविक बाजार मूल्य पर मुआवजा देने की। किसानों का आरोप है कि जिला प्रशासन द्वारा तय मुआवजा दरें बेहद कम हैं। 2024–25 की गाइडलाइन के अनुसार केवल 1,700 रुपये से 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, उज्जैन–इंदौर ग्रीनफील्ड रोड परियोजना में किसानों को कई जगह 45 लाख रुपये प्रति बीघा तक का मुआवजा मिला था। इसके मुकाबले उज्जैन–जावरा परियोजना में केवल 2–4 लाख रुपये प्रति बीघा का प्रस्ताव है, जिसे किसान अन्यायपूर्ण मान रहे हैं। मुख्यमंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उचित मुआवजा दिया जाएगा और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने किसानों से संयम और भरोसा बनाए रखने की अपील भी की। इस निर्णय से प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में हल्की राहत की स्थिति है, लेकिन मुआवजे को लेकर संघर्ष अभी जारी है।

दतिया में मासूमियत का कत्ल: प्रेम में मिला धोखा तो 14 वर्षीय किशोरी ने चुन ली मौत, प्रेमी पर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज

दतिया । मध्य प्रदेश के दतिया जिले से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है जहाँ एक 14 वर्षीय नाबालिग किशोरी की खुदकुशी के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। बड़ोनी थाना क्षेत्र के जौन्हार गांव में हुई इस त्रासदी ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया बल्कि समाज में फैल रहे डिजिटल प्रेम और उसके घातक परिणामों को भी उजागर किया है। शनिवार रात पुलिस ने मामले की गहन जांच के बाद मृतका के प्रेमी युवक के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। शादी से इनकार बना मौत की वजह पुलिस जांच और कॉल डिटेल्स से जो सच निकलकर सामने आया है वह बेहद विचलित करने वाला है। जानकारी के अनुसार जौन्हार निवासी इस नाबालिग किशोरी का जिगना क्षेत्र के रहने वाले नीरज पाल नामक युवक से पिछले करीब दो साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। किशोरी उस पर अटूट विश्वास करती थी और उससे विवाह करना चाहती थी। लेकिन जब किशोरी ने शादी का प्रस्ताव रखा तो नीरज पाल ने अपनी असलियत दिखाते हुए उसे ठुकरा दिया। आरोपी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उसकी सगाई कहीं और हो चुकी है और वह उससे शादी नहीं कर सकता। धोखे और उपेक्षा के इसी सदमे को मासूम किशोरी बर्दाश्त नहीं कर पाई। मोबाइल कॉल डिटेल और FSL रिपोर्ट ने खोले राज यह घटना 26 दिसंबर की है जब किशोरी अपने ही घर के कमरे में पंखे के फंदे से लटकी पाई गई थी। शुरुआत में यह केवल आत्महत्या का मामला लग रहा था लेकिन पुलिस की वैज्ञानिक जांच ने कहानी बदल दी। पुलिस ने मृतका के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई जिससे नीरज पाल के साथ उसके लंबे संबंधों की पुष्टि हुई। सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट से मिला। एफएसएल रिपोर्ट में पीड़िता की वैजाइनल स्लाइड में पुरुष डीएनए मिलने की पुष्टि हुई जिससे यह साबित हो गया कि आत्महत्या से पहले किशोरी के साथ शारीरिक संबंध बनाए गए थे। कानूनी शिकंजे में आरोपी नीरज पाल इन पुख्ता वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बड़ोनी थाना पुलिस ने नीरज पाल को इस मौत का जिम्मेदार माना है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने न केवल एक नाबालिग का शारीरिक शोषण किया बल्कि उसे मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया कि उसने मौत को गले लगाना बेहतर समझा। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं सहित पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसकी तलाश तेज कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए अपराधी कितना भी बचने की कोशिश करे वह बच नहीं सकता।