ईद पर काले कपड़े और काली पट्टी! जेल से आजम खान का चौंकाने वाला संदेश, वजह सुनकर रूह कांप जाएगी

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और रामपुर जेल में बंद आजम खान ने इस साल ईद को लेकर एक बड़ा और भावुक संदेश जारी किया है। शनिवार को सपा नेता यूसुफ मलिक और अन्य नेताओं ने जेल में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से मुलाकात की। मुलाकात के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए बताया गया कि आजम खान ने मुस्लिम समुदाय, विशेषकर सुन्नी मुसलमानों से अपील की है कि वे इस बार ईद की नमाज के दौरान काले कपड़े पहनें या बांह पर काली पट्टी बांधकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराएं। आजम खान ने अपनी अपील की वजह ईरान में हाल ही में हुई दुखद घटना बताई, जिसमें 160 बच्चियां शहीद हुईं। उन्होंने कहा कि यह इंसानी और नैतिक जिम्मेदारी है कि इस हादसे पर शोक व्यक्त किया जाए और दुनिया का ध्यान इस घातक घटना की ओर खींचा जाए। उनके अनुसार, ये बच्चियां भी हमारी अपनी बेटियों जैसी थीं और उनके लिए सम्मान जताना हम सभी का कर्तव्य है। सपा नेता ने बताया कि आजम खान ने ईद के दिन सादगी बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोग केवल काले कपड़े पहनें और काली पट्टी बांधें, सामान्य हंसी-खुशी और पारंपरिक उत्सव से दूर रहें। उनका संदेश ‘खिराज-ए-तहसीन’ के रूप में मासूमों को श्रद्धांजलि देने और वैश्विक स्तर पर हो रहे जुल्म के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध का रूप है। मुलाकात में आजम खान की पत्नी तजीन फात्मा भी मौजूद थीं। करीब आधे घंटे तक चली बातचीत में राजनीतिक चर्चा के बजाय मानवीय और सामाजिक संवेदनाओं पर जोर दिया गया। जेल प्रशासन की कड़ी सुरक्षा के बीच यह बातचीत पूरी हुई। सपा नेता यूसुफ मलिक ने कहा कि आजम खान लगातार मानवता और इंसानी मूल्यों पर जोर देते रहे हैं, और उनके संदेश का असर रामपुर और आसपास के जिलों में भी दिखाई दे रहा है। ज्ञात हो कि आजम खान लंबे समय से जेल में बंद हैं, लेकिन उनके पैगाम और बयान समाज और राजनीति पर लगातार असर डाल रहे हैं। इस अपील के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईद के दिन मुस्लिम समुदाय इस प्रतीकात्मक विरोध में किस हद तक शामिल होता है और उनके संदेश का जमीन पर क्या असर दिखाई देता है।
ला लीगा में दिग्गजों का दबदबा, रियल मैड्रिड और एटलेटिको के साथ गिरोना भी विजयी

नई दिल्ली। रियल मैड्रिड ने एल्चे को 4-1 से हराकर ला लीगा की खिताबी दौड़ को रोमांचक बना दिया है। इस जीत के बाद रियल मैड्रिड अंक तालिका में टॉप पर मौजूद बार्सिलोना से महज 1 अंक पीछे रह गया है। मैड्रिड के सैंटियागो बर्नाबेउ स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में रियल मैड्रिड ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा। टीम के लिए पहला गोल एंटोनियो रुडिगर ने 39वें मिनट में किया। एल्चे फ्री किक को सही तरीके से क्लियर नहीं कर पाया और इसका फायदा उठाते हुए रुडिगर ने जोरदार शॉट लगाकर अपनी टीम को बढ़त दिला दी। इसके बाद फेडेरिको वाल्वरडे ने किनारे से शानदार शॉट लगाकर स्कोर 2-0 कर दिया। वाल्वरडे का यह गोल उनके शानदार फॉर्म को दर्शाता है, क्योंकि उन्होंने हाल ही में मैनचेस्टर सिटी के खिलाफ एक हैट्रिक लगाई थी। रियल मैड्रिड का तीसरा गोल डीन हुइजसेन ने 66वें मिनट में शानदार हेडर के जरिए किया। अर्दा गुलेर ने चौथा गोल कर रियल मैड्रिड की बढ़त 4-1 की कर दी, जो आखिर में निर्णायक साबित हुई। एल्चे के लिए एकमात्र गोल तब हुआ जब रियल मैड्रिड के युवा खिलाड़ी मैनुअल एंजेल से गलती से गेंद अपने ही नेट में चली गई। दूसरे मुकाबले में एटलेटिको मैड्रिड ने स्थानीय डर्बी में गेटाफे सीएफ को 1-0 से हराया। मैच का एकमात्र गोल नहुएल मोलिना ने सातवें मिनट में किया। एक अन्य मैच में रियल ओविएडो ने वालेंसिया को 1-0 से हराया। टीम के कप्तान डेविड कोस्टास ने कॉर्नर के बाद जोरदार शॉट लगाकर मैच का एकमात्र गोल किया, जिससे टीम की रेलीगेशन से बचने की उम्मीदें बरकरार रहीं। वहीं गिरोना एफसी ने अपने घरेलू मैदान पर एथलेटिक बिलबाओ को 3-0 से हराकर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। गिरोना के लिए ह्यूगो रिनकॉन ने तीसरे मिनट में गोल कर बढ़त दिलाई, जबकि दूसरे हाफ में अज्जेदीन ओउनाही और क्लाउडियो एचेवेरी ने गोल कर जीत पक्की की।
MP में LPG का बड़ा संकट: होटलों के चूल्हे ठंडे, घरों में 8 घंटे की कतार, प्रशासन अलर्ट पर

भोपाल। मध्य प्रदेश में रसोई गैस (LPG) संकट ने आम नागरिक और व्यवसाय दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से मिली रिपोर्टों के मुताबिक, घरेलू गैस की कमी ने लोगों को धूप में घंटों कतार में खड़ा कर दिया है, वहीं कॉमर्शियल सिलेंडर न मिलने से होटलों और रेस्तरां के चूल्हे ठंडे पड़े हैं। राजधानी भोपाल के जहांगीराबाद और बोगदा पुल इलाकों में स्थिति गंभीर है। स्थानीय निवासी शीबा खान के अनुसार, उनके पास 13 मार्च को डिलीवरी का मैसेज तो आया, लेकिन सिलेंडर घर नहीं पहुंचा, जिससे उन्हें अब रिश्तेदारों के यहां खाना बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं मोहम्मद रियाज ने तीन दिन गैस न मिलने के बाद नया इंडक्शन चूल्हा खरीदा, ताकि परिवार भूखा न रहे। कॉमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत ने प्रदेश के होटल और रेस्तरां उद्योग को भी प्रभावित किया है। पिछले छह दिनों में 50,000 से ज्यादा होटलों और छोटे रेस्टॉरेंट्स को सिलेंडर नहीं मिले हैं। भोपाल और इंदौर के कई होटलों ने मेन्यू छोटा कर दिया है, जबकि कई रेहड़ियां और स्ट्रीट फूड ठेले पूरी तरह बंद हो गए हैं। इससे दैनिक मजदूरी पर निर्भर दुकानदारों की आमदनी भी प्रभावित हो रही है। हालांकि ग्वालियर और उज्जैन में प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं। ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने दावा किया कि जिले में स्टॉक की कोई कमी नहीं है और खाद्य विभाग की टीमें लगातार चेकिंग कर रही हैं। अफवाहों को रोकने के लिए कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। उज्जैन में रविवार की छुट्टी के बावजूद महाकाल गैस एजेंसी खोलकर घरेलू गैस की सप्लाई जारी रखी गई। एजेंसी संचालक भगवान दास एरन ने बताया कि घरेलू सिलेंडर की निरंतर सप्लाई की जा रही है, हालांकि कॉमर्शियल सिलेंडरों के लिए नए आदेशों का इंतजार किया जा रहा है। इंदौर में स्थिति थोड़ी मिश्रित रही। प्रशासन के निर्देश पर रविवार को खुली एजेंसियों में उपभोक्ताओं ने बुकिंग कराने में कोई परेशानी नहीं बताई, लेकिन सप्लाई में देरी के कारण डिलीवरी 7-8 दिन में मिलने का आश्वासन दिया गया। वहीं कुछ उपभोक्ताओं ने KYC प्रक्रिया और गैस पाइप (नली) खरीदने का दबाव भी अनुभव किया। इस संकट ने साफ कर दिया है कि प्रदेश में LPG की आपूर्ति और वितरण में प्रशासनिक और लॉजिस्टिक चुनौतियां हैं। घरों में खाना बनाने वाले आम नागरिक और व्यवसायिक स्तर पर रेस्तरां चलाने वाले दोनों ही इस संकट से प्रभावित हैं। ग्वालियर, उज्जैन और इंदौर में प्रशासन की सक्रियता के बावजूद राजधानी भोपाल सहित कई इलाकों में जनता को गैस के लिए लंबी कतारों और देरी का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं की मांग है कि राज्य सरकार और गैस एजेंसियां जल्द से जल्द सप्लाई और वितरण सुचारू करें ताकि रोजमर्रा के काम और व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित न हों।
सिंगरौली के गजरा बहरा कोल यार्ड से बढ़ा प्रदूषण, फसलें बर्बाद; दमा खांसी से जूझ रहे ग्रामीण

सिंगरौली । सिंगरौली जिले के गजरा बहरा क्षेत्र में संचालित कोल यार्ड से फैल रहे प्रदूषण ने आसपास के गांवों के लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। कोयले की धूल और लगातार उड़ने वाली डस्ट के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, वहीं ग्रामीण खांसी, दमा और सांस से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कोल यार्ड संचालक की लापरवाही के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कोल यार्ड में प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी उपाय नहीं किए जा रहे हैं। न तो नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जा रहा है और न ही धूल को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था की गई है। इसके कारण कोयले की महीन धूल हवा के साथ आसपास के खेतों और घरों तक पहुंच रही है। किसान बताते हैं कि फसलों पर जमी काली धूल से उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है और कई खेतों में फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है। प्रदूषण का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। आसपास के गांवों में रहने वाले लोग सांस से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कई लोगों को लगातार खांसी और दमा की शिकायत हो रही है। बुजुर्गों और बच्चों की स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कोयले की धूल से वातावरण इतना खराब हो गया है कि घर के भीतर भी सांस लेना मुश्किल हो जाता है। सड़क पर उड़ती धूल के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार कोल यार्ड से गुजरने वाले ट्रकों की आवाजाही और उड़ती डस्ट की वजह से सड़क पर दृश्यता कम हो जाती है, जिससे आए दिन छोटे बड़े हादसे होते रहते हैं। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस मामले में पर्यावरण विभाग ने कोल यार्ड संचालक पर कार्रवाई करते हुए करीब डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है। हालांकि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संचालक ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में दायर कर दिया है। न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के कारण फिलहाल प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई नहीं की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि अदालत में मामला लंबित होने का हवाला देकर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग जिम्मेदारी से बच रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदूषण के कारण लोगों का स्वास्थ्य लगातार खराब हो रहा है, लेकिन स्थिति सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। यह इलाका आदिवासी बहुल क्षेत्र माना जाता है और यहां रहने वाले अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं। ऐसे में इलाज की सुविधा भी सीमित है, जिसके कारण बीमारियों से जूझ रहे कई लोग समय पर उपचार नहीं करा पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और पर्यावरण विभाग से मांग की है कि कोल यार्ड संचालक को प्रदूषण नियंत्रण के सभी नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए बाध्य किया जाए। साथ ही प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों की जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
प्रीमियर लीग: आर्सेनल ने एवर्टन को 2-0 से हराया, मैनचेस्टर और वेस्ट हैम यूनाइटेड के बीच मुकाबला ड्रॉ रहा

नई दिल्ली। इंग्लिश प्रीमियर लीग में आर्सेनल एफसी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एवर्टन एफसी को 2-0 से हरा दिया। वहीं दूसरी ओर मैनचेस्टर सीटी एफसी को वेस्ट हैम यूनाइटेड एफ.सी. के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ खेलना पड़ा। लंदन में खेले गए मुकाबले में आर्सेनल को एवर्टन के मजबूत डिफेंस को तोड़ने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कोच मिकेल आर्टेटा की टीम ने मैच में 20 से अधिक शॉट लगाए, लेकिन लंबे समय तक गोल करने में सफल नहीं हो सकी। मैच के आखिरी क्षणों में आर्सेनल को सफलता मिली जब विक्टर ग्योकेरेस ने 89वें मिनट में गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। यह गोल युवा खिलाड़ी मैक्स डाउमैन के शानदार क्रॉस पर आया। इसके बाद डाउमैन ने ही 97वें मिनट में दूसरा गोल कर मैच को पूरी तरह आर्सेनल के नाम कर दिया। इस गोल के साथ डाउमैन ने इतिहास रचा। 16 साल और 73 दिन की उम्र में वह प्रीमियर लीग में गोल करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए। इस जीत ने कुछ समय के लिए आर्सेनल को तालिका में 10 अंकों की बढ़त दिला दी और मैनचेस्टर सिटी पर दबाव बढ़ा दिया। दूसरी ओर, मैनचेस्टर सिटी और वेस्ट हैम के बीच मुकाबला 1-1 से बराबरी पर खत्म हुआ। सिटी के लिए बर्नार्डो सिल्वा ने 31वें मिनट में शानदार शॉट लगाकर टीम को बढ़त दिलाई। हालांकि वेस्ट हैम के कॉन्स्टेंटिनोस मावरोपानोस ने जोरदार हेडर के जरिए जल्दी ही बराबरी कर ली। सिटी ने पूरे मैच में गोल करने के कई मौके बनाए, लेकिन वेस्ट हैम के गोलकीपर मैड्स हरमनसेन के शानदार प्रदर्शन के कारण टीम को जीत नहीं मिल सकी। अन्य मुकाबलों में न्यूकैसल यूनाइटेड एफ.सी. ने चेल्सी एफ.सी. को 1-0 से हराया। मैच का एकमात्र गोल एंथनी गॉर्डन ने 18वें मिनट में किया।
जय शाह ने पाकिस्तान-बांग्लादेश ड्रामे पर तोड़ी चुप्पी, दोनों टीमों को दिखाया आइना

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अध्यक्ष जय शाह ने टी20 विश्व कप 2026 से पहले हुए विवाद पर पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। शाह ने कहा है कि कोई भी देश या टीम संगठन से बड़ी नहीं होती। आईसीसी सभी सदस्य टीमों के सामूहिक प्रयास से चलता है। एक अवॉर्ड समारोह में जय शाह ने कहा, “विश्व कप से पहले काफी अटकलें लगाई जा रही थीं कि कुछ टीमें हिस्सा लेंगी या नहीं। आईसीसी अध्यक्ष के तौर पर मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि कोई भी टीम संगठन से बड़ी नहीं होती। कोई एक टीम मिलकर संगठन नहीं बनाती, बल्कि सभी टीमों के साथ मिलकर ही संगठन चलता है।” जय शाह ने बताया कि इस विश्व कप ने दर्शकों के मामले में इतिहास रच दिया। कुल व्यूअरशिप के सभी पुराने रिकॉर्ड टूट गए। एसोसिएट टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया। यूएसए ने भारत को, नीदरलैंड ने पाकिस्तान को और नेपाल ने इंग्लैंड को कड़ी टक्कर दी। जिम्बाब्वे जैसी छोटी टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हरा दिया। आईसीसी अध्यक्ष ने भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर और टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव को भविष्य के लिए लगातार मेहनत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि टीम को 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक सहित आने वाले बड़े टूर्नामेंटों को ध्यान में रखते हुए अभी से तैयारी करनी चाहिए। विश्व कप से पहले विवाद तब शुरू हुआ था, जब बांग्लादेश क्रिकेट टीम ने भारत आने से इनकार कर दिया था। इसके बाद आईसीसी ने बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया था और उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया था। पाकिस्तान ने इसके बाद बांग्लादेश के समर्थन में विश्व कप के बहिष्कार की धमकी दी थी। पाकिस्तान का कहना था कि आईसीसी बांग्लादेश के साथ गलत व्यवहार कर रही है। पाकिस्तान ने पहले पूरे टूर्नामेंट के बहिष्कार की बात कही, फिर भारत के साथ ग्रुप स्टेज का मुकाबला न खेलने की बात कही। आईसीसी की मध्यस्थता और बांग्लादेश पर किसी तरह का बैन न लगाए जाने के वादे के बाद पाकिस्तान ने यू-टर्न ले लिया और भारत के खिलाफ मैच खेला। पाकिस्तान सुपर-8 से आगे नहीं बढ़ सकी, जबकि भारतीय टीम ने लगातार दूसरा टी20 विश्व कप जीता।
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में फायरिंग: गोलियां चलती रहीं, पुलिसकर्मी अंदर ही रहे, पुरानी गैंगवार का खुला राज

भोपाल। हमीदिया अस्पताल में शनिवार सुबह हुई फायरिंग की घटना ने अस्पताल परिसर और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। प्रत्यक्षदर्शी हेमराज ने बताया कि जब इमरजेंसी गेट के बाहर गोलीबारी हो रही थी, तब अस्पताल के अंदर मौजूद पुलिसकर्मी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। हेमराज उज्जैन के रहने वाले हैं, और उनके दामाद का गंभीर एक्सीडेंट हुआ था, जिसके इलाज के लिए वे अपनी पत्नी के साथ अस्पताल आए थे। सुबह करीब 6:30 बजे, एक्टिवा सवार तीन युवक अस्पताल के गेट पर पहुंचे। एक के हाथ में चाकू था, दूसरे के हाथ में पिस्टल, जबकि तीसरा आरोपी गाड़ी पर बैठा रहा। दोनों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की और इसके बाद आरोपी फरार हो गए। गोलियों से घायल हुए व्यक्ति को तुरंत गार्ड्स ने अंदर ले लिया। इस दौरान इमरजेंसी वार्ड में तैनात पुलिसकर्मी बाहर नहीं निकले। वारदात महज डेढ़-दो मिनट में संपन्न हुई, और अस्पताल परिसर में भय का माहौल बन गया। घटना के तुरंत बाद हिस्ट्रीशीटर लल्लू रईस ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि फायरिंग के दौरान अशोका गार्डन पुलिस मौके पर नहीं थी, जबकि गार्ड्स ने घायल की जान बचाई। घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। कोहेफिजा थाने के प्रभारी केजी शुक्ला ने कहा कि हमीदिया अस्पताल में 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था है और चार्ली दल की गश्त नियमित होती है। हालांकि इमरजेंसी वार्ड की आंतरिक सुरक्षा गार्ड्स की जिम्मेदारी है। पुलिस ने फायरिंग के बाद एफआईआर दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। अशोका गार्डन, कोहेफिजा और क्राइम ब्रांच की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि यह हमला पुरानी गैंगवार का हिस्सा था। लल्लू रईस के बेटे और शादाब कुरैशी के बीच दो साल पहले जुआ और सट्टे के अवैध कारोबार को लेकर विवाद हुआ था। आरोपी का मकसद लल्लू रईस और उसके परिवार को निशाना बनाना था। वारदात के दौरान घायल इमरान रईस को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। यह घटना अस्पताल सुरक्षा और शहर में बढ़ती गैंगवार की गंभीरता को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हमले मरीज और आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा हैं और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।
टेस्ट क्रिकेट के लिए आज का दिन है खास, 1877 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेला गया था पहला आधिकारिक मैच

नई दिल्ली। टेस्ट क्रिकेट को क्रिकेट का सर्वोत्तम फॉर्मेट माना जाता है। 5 दिन और 4 पारियों में खेला जाना वाला यह फॉर्मेट हर खिलाड़ी को उसकी प्रतिभा और क्षमता दिखाने का समय देता है, चाहे वह गेंदबाज हो या बल्लेबाज। टेस्ट में खिलाड़ियों की प्रतिभा के साथ ही उनके धैर्य और खेल के प्रति संकल्प की परीक्षा भी होती है। इस कसौटी पर खरा नहीं उतरने वाले टेस्ट क्रिकेट में सफल नहीं हो सकते। टेस्ट क्रिकेट का इतिहास बहुत पुराना है। पहला आधिकारिक टेस्ट 15 से 19 मार्च 1877 को ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेला गया था। यह मैच टेस्ट क्रिकेट के उस महान परंपरा की एक शुरुआत थी जो टी20 फॉर्मेट के दौर में भी बेहद रोमांचक बना हुआ है। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच पहला टेस्ट मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला गया था। मैच में ऑस्ट्रेलिया के कप्तान डेव ग्रेगरी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था। सलामी बल्लेबाज चार्ल्स बैनरमैन को छोड़कर अन्य कोई भी बल्लेबाज इंग्लैंड के गेंदबाजों का सामना नहीं कर सका था। रिटायर्ड हर्ट होने से पहले बैनरमैन ने 165 रन की पारी खेली थी। टॉम गैरेट नाबाद 18 रन बनाकर दूसरे शीर्ष स्कोरर रहे थे। जैक ब्लेकहैम ने 17, ब्रेंसबी कूपर ने 15 और टॉम होरान ने 12 रन बनाए थे। इन चारों को अलावा कोई भी बल्लेबाज 2 अंकों में प्रवेश नहीं कर सका था। ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में 245 रन बनाए थे। इंग्लैंड के लिए अल्फ्रेड शॉ और जेम्स साउथर्टन ने 3-3, जबकि एलेन हिल और जेम्स लिलीव्हाइट जूनियर ने 1-1 विकेट लिए थे। इंग्लैंड की तरफ से सलामी बल्लेबाज हैरी जुप ने 63, हैरी चार्लवुड ने 36 और एलेन हिल ने नाबाद 35 रन बनाए थे। इन तीनों बल्लेबाजों की बदौलत इंग्लैंड पहली पारी में 196 रन तक पहुंच सकी और पहली पारी के आधार पर ऑस्ट्रेलिया से 49 रन से पिछड़ गई थी। ऑस्ट्रेलिया के लिए बिली मिडविंटर ने 5, टॉम गार्रेट ने 2, जबकि जॉन हॉजेस, टॉम कैंडल और नैट थॉमसन ने 1-1 विकेट लिए थे। ऑस्ट्रेलिया अपनी दूसरी पारी में 104 रन पर सिमट गई थी। इंग्लैंड के लिए अल्फ्रेड शॉ ने 5, जॉर्ज उलिएट ने 3, जबकि एलेन हिल और जेम्स लिलीव्हाइट ने 1-1 विकेट लिए थे। ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में मिले 49 रन की बढ़त के आधार पर इंग्लैंड को जीत के लिए 154 रन का लक्ष्य दिया था। इंग्लैंड की बल्लेबाजी दूसरी पारी में भी निराशाजनक रही और 108 रन पर सिमट गई। ऑस्ट्रेलिया के लिए टॉम केंडल ने 7, जॉन हॉजेस ने 2 और बिली मिडविंटर ने 1 विकेट लिए। इस तरह पहला आधिकारिक टेस्ट ऑस्ट्रेलिया ने 45 रन से जीता था। इस मैच के साथ ही न सिर्फ टेस्ट क्रिकेट, बल्कि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच टेस्ट क्रिकेट की रोमांचक प्रतिस्पर्धा, जिसने बाद में एशेज का रूप लिया, उसकी शुरुआत हुई थी। पहले आधिकारिक टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की प्लेइंग इलेवन पर नजर: ऑस्ट्रेलिया की प्लेइंग इलेवनचार्ल्स बैनरमैन, नेट थॉमसन, टॉम होरान, डेव ग्रेगरी (कप्तान), ब्रैंसबी कूपर, बिली मिडविन्टर, नेड ग्रेगरी, जैक ब्लैकहम (विकेटकीपर), टॉम गैरेट, टॉम केंडल, जॉन हॉजेस। इंग्लैंड की प्लेइंग इलेवनहैरी जुप, जॉन सेल्बी (विकेटकीपर), हैरी चार्लवुड, जॉर्ज उलिएट, एंड्रयू ग्रीनवुड, टॉम आर्मिटेज, अल्फ्रेड शॉ, टॉम एम्मेट, एलन हिल, जेम्स लिलीवाइट (जूनियर) (कप्तान), जेम्स साउथर्टन।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की संभल प्रशासन को कड़ी फटकार: हालात नहीं संभल रहे, तो इस्तीफा दें SP और DM
नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल जिले में रमजान के पवित्र महीने के दौरान नमाजियों की संख्या सीमित करने के जिला प्रशासन के फैसले पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। न्यायालय ने कड़े शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि पुलिस अधीक्षक SP और जिलाधिकारी DM को लगता है कि वे कानून के शासन को प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें या तो अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर तुरंत तबादले की मांग करनी चाहिए। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की खंडपीठ ने मुनाजिर खान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की। मामले की जड़ गाटा संख्या-291 पर स्थित एक स्थल है, जिसे याचिकाकर्ता ने मस्जिद बताते हुए वहां नमाज अदा करने की अनुमति मांगी थी। याचिका में दलील दी गई थी कि स्थानीय प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला देते हुए नमाजियों की संख्या को केवल 20 तक सीमित कर दिया है, जो धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित भूमि निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह प्रतिबंधात्मक सीमा तय की गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने सरकार की इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रत्येक समुदाय को अपने निर्धारित पूजा स्थलों पर शांतिपूर्वक इबादत और पूजा-अर्चना करने का संवैधानिक अधिकार है। न्यायालय ने जोर देकर कहा कि राज्य का प्राथमिक कर्तव्य कानून का शासन स्थापित करना है, न कि अधिकारों को सीमित करना। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित स्थल की तस्वीरें और राजस्व अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 16 मार्च को होगी और अदालत ने इसे ताजा मामलों की सूची में शीर्ष 10 में शामिल करने का निर्देश दिया है।
सैमसन का कबूलनामा: 2024 से शुरू हुआ 'आग और आग' का खेल, कैसे अभिषेक और संजू की जोड़ी बनी टीम इंडिया की सबसे घातक ओपनिंग मशीन!
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज संजू सैमसन ने युवा सनसनी अभिषेक शर्मा के साथ अपनी ओपनिंग जोड़ी को लेकर एक बेहद रोमांचक खुलासा किया है। एक टीवी शो के दौरान संजू ने इस जोड़ी की ताकत का वर्णन करते हुए कहा कि वे आग और बर्फ का मेल नहीं हैं, बल्कि वे दोनों ही आग हैं। संजू के मुताबिक, जब वे मैदान पर उतरते हैं, तो कभी अभिषेक विपक्षी टीम पर आग उगलते हैं, तो कभी वे खुद अपनी बल्लेबाजी से धमाका करते हैं। साल 2024 से चली आ रही इस केरल-पंजाबी दोस्ती ने भारतीय टीम के शीर्ष क्रम को एक नई ऊर्जा दी है। गौरतलब है कि टी20 वर्ल्ड कप 2024 के बाद जब रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों ने संन्यास लिया, तब भारतीय टीम के सामने ओपनिंग स्लॉट भरने की बड़ी चुनौती थी। इस खाली जगह को अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन की जोड़ी ने बड़ी बखूबी से भरा। हालांकि, इस सफर में कई उतार-चढ़ाव भी आए। 2025 के एशिया कप और न्यूजीलैंड सीरीज के दौरान टीम कॉम्बिनेशन में बदलाव के कारण इस जोड़ी को कई बार तोड़ा गया और संजू को प्लेइंग इलेवन से बाहर भी रहना पड़ा। टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत में भी टीम मैनेजमेंट ने अलग-अलग प्रयोग किए, लेकिन अंततः उन्हें फिर से इसी विस्फोटक जोड़ी की ओर लौटना पड़ा। अभिषेक शर्मा ने भी संजू सैमसन की जमकर तारीफ की है। अभिषेक का कहना है कि संजू भाई एक बहुत ही सुलझे हुए और ख्याल रखने वाले इंसान हैं। जब उनके जैसा अनुभवी खिलाड़ी साथ होता है, तो मैदान पर एक सुरक्षा का अहसास बना रहता है। इस जोड़ी की सफलता की सबसे बड़ी गवाही टी20 वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल मैच बना, जहाँ दोनों ने अपनी आग और आग वाली छवि को सार्थक किया और भारत को एक बार फिर विश्व विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई। मैदान के अंदर और बाहर दोनों के बीच का तालमेल टीम इंडिया के भविष्य के लिए एक शुभ संकेत माना जा रहा है।