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राष्ट्रपति के दौरे से पहले वृंदावन में बंदरों पर सख्ती लंगूर कटआउट से लेकर गुलेल तक बना सुरक्षा कवच

नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में इन दिनों प्रशासन एक अनोखी चुनौती से जूझ रहा है। आमतौर पर धार्मिक और शांत वातावरण के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में बंदरों का बढ़ता आतंक अब बड़े स्तर की चिंता बन चुका है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब द्रौपदी मुर्मू के आगामी दौरे की घोषणा हुई। राष्ट्रपति का यह दौरा 19 मार्च से शुरू होकर तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें वे विभिन्न धार्मिक और सामाजिक स्थलों का भ्रमण करेंगी। इस दौरान उड़िया बाबा आश्रम, रामकृष्ण मिशन सेवा चैरिटेबल अस्पताल और गोवर्धन परिक्रमा जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। ऐसे में प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उनकी यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और व्यवधान रहित रहे। वृंदावन के बंदर खासतौर पर अपने अनोखे व्यवहार के लिए कुख्यात हैं। यहां के बंदर राह चलते लोगों के चश्मे छीन लेने के लिए जाने जाते हैं। वे अचानक झपट्टा मारकर चश्मा लेकर भाग जाते हैं और फिर उसे लौटाने के बदले खाने-पीने की चीजों की मांग करते हैं। फ्रूटी जैसे पेय पदार्थ उनके लिए मानो सौदेबाजी का जरिया बन चुके हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों ही अक्सर इस समस्या से जूझते नजर आते हैं। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने इस बार पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ कुछ अनोखे उपाय भी अपनाए हैं। पहले ऐसे मौकों पर बंदरों को भगाने के लिए प्रशिक्षित लंगूरों की मदद ली जाती थी, लेकिन वन्यजीव संरक्षण कानूनों के चलते अब यह तरीका अपनाना संभव नहीं है। इसके विकल्प के रूप में अब लंगूरों के कटआउट लगाए जा रहे हैं ताकि बंदरों में डर का माहौल बनाया जा सके। इसके अलावा वन विभाग ने लगभग 30 सदस्यों की एक विशेष टीम भी तैनात की है। यह टीम गुलेल, लाठी-डंडों और लेजर लाइट जैसे उपकरणों से लैस है। जिन इलाकों में बंदरों की संख्या अधिक है, वहां अतिरिक्त कर्मियों को लगाया जा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन की कोशिश है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कोई भी बंदर पास न भटके। यह पूरा घटनाक्रम न केवल सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है बल्कि यह भी दिखाता है कि शहरी और धार्मिक क्षेत्रों में वन्यजीवों के साथ संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है। बंदरों का यह व्यवहार एक लंबे समय से चली आ रही समस्या है, लेकिन अब जब मामला देश के सर्वोच्च पद से जुड़ा है, तो प्रशासन हर संभव कदम उठाने में जुटा है। वृंदावन में किए गए ये इंतजाम भले ही अस्थायी हों, लेकिन उन्होंने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भविष्य में इस समस्या का कोई स्थायी समाधान निकाला जा सकेगा। फिलहाल सभी की नजरें राष्ट्रपति के दौरे पर हैं और यह देखने पर कि ये अनोखे उपाय कितने कारगर साबित होते हैं।

करवटों से परेशान हैं? इन 5 टिप्स से पाएं गहरी और आरामदायक नींद

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अच्छी और सुकूनभरी नींद लेना कई लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। देर रात तक मोबाइल चलाना, तनाव, अनियमित दिनचर्या और गलत खान-पान जैसी आदतें नींद को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। नतीजा यह होता है कि रातभर नींद नहीं आती और सुबह उठते ही थकान महसूस होती है। अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो कुछ आसान घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय आपकी मदद कर सकते हैं। 1. सोने से पहले पिएं गुनगुना दूधरात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुना दूध पीना बेहद फायदेमंद माना जाता है। दूध में मौजूद पोषक तत्व शरीर और दिमाग को रिलैक्स करते हैं, जिससे नींद जल्दी आने लगती है। यह एक पुराना और असरदार घरेलू उपाय है, जिसे रोजाना अपनाया जा सकता है। 2. तलवों की करें तेल या घी से मालिशआयुर्वेद के अनुसार, सोने से पहले पैरों के तलवों पर सरसों के तेल या घी से हल्की मालिश करना काफी लाभकारी होता है। इससे शरीर को गहरा आराम मिलता है और तनाव कम होता है। तलवों की मालिश से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे गहरी नींद आने में मदद मिलती है। 3. सोने से पहले स्क्रीन से बनाएं दूरीआजकल नींद खराब होने का सबसे बड़ा कारण मोबाइल और स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल है। मोबाइल से निकलने वाली ब्लू लाइट दिमाग को एक्टिव बनाए रखती है, जिससे नींद आने में देरी होती है। इसलिए सोने से कम से कम 30 मिनट पहले मोबाइल, टीवी या लैपटॉप का इस्तेमाल बंद कर दें। 4. रात में खाएं हल्का और सुपाच्य भोजनभारी, तला-भुना और मसालेदार खाना पाचन को प्रभावित करता है और नींद में बाधा डालता है। इसलिए रात के समय हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। इससे पेट भी आराम में रहता है और नींद बेहतर आती है। 5. आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का लें सहाराआयुर्वेद में कुछ जड़ी-बूटियां जैसे Ashwagandha और Brahmi को नींद सुधारने में उपयोगी माना गया है। ये तनाव को कम करती हैं और दिमाग को शांत करती हैं, जिससे अच्छी नींद आती है। हालांकि इनका सेवन करने से पहले किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। क्यों जरूरी है अच्छी नींदअच्छी नींद न केवल शरीर को ऊर्जा देती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है। नींद पूरी न होने से चिड़चिड़ापन, कमजोरी और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। छोटी-छोटी आदतें, बड़ा असरअगर आप रोजाना इन आसान आदतों को अपनाते हैं, तो धीरे-धीरे आपकी नींद में सुधार देखने को मिलेगा। बिना दवाइयों के भी आप बेहतर और गहरी नींद पा सकते हैं।

आपदा में अवसर खोजने की मानसिकता: समाज के लिए एक खतरनाक संकेत

– कैलाश चन्द्रमार्च 2026 के दूसरे सप्ताह से भारत में एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति और बुकिंग से जुड़ी चर्चा अचानक सुर्खियों में आ गई। देश के अनेक हिस्सों से गैस सिलिंडर की कमी, बुकिंग में देरी और डिलीवरी में व्यवधान जैसी खबरें तेजी से फैलने लगीं। सोशल मीडिया पर लोगों की चिंता देखकर यह विषय राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया। कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाए कि सिलिंडर मिल नहीं रहे, डिलीवरी डेट आगे बढ़ रही है और एजेंसियों पर दबाव बढ़ चुका है। इसके विपरीत केंद्र और राज्य सरकारों ने बार-बार स्पष्ट किया कि देश में कोई वास्तविक कमी नहीं है, परंतु कुछ क्षेत्रों में अचानक बढ़ी मांग और डिमांड–सप्लाई असंतुलन से अस्थायी तनाव अवश्य देखा गया है। यही तनाव इस पूरी चर्चा की शुरुआत बना। इन खबरों के बीच सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह रहा कि अचानक ऐसी स्थिति क्यों बनी? इसे समझने के लिए एलपीजी बुकिंग और सप्लाई के वास्तविक आंकड़ों को देखना आवश्यक है। मार्च 2026 के आरंभ में रोज़ाना LPG बुकिंग 5.5 मिलियन के औसत स्तर से बढ़कर 7.6 मिलियन तक पहुँच गई। यह लगभग 35–40 प्रतिशत की उछाल थी, जिसे विशेषज्ञों ने ‘पैनिक बुकिंग’ की श्रेणी में रखा। कई शहरों में बुकिंग 2–3 गुना तक बढ़ गई। एक प्रमुख महानगर में केवल छह दिनों के भीतर 12 लाख से अधिक बुकिंग दर्ज होना इसकी तीव्रता का प्रमाण था। दूसरी ओर सरकार का दावा था कि घरेलू सिलिंडर की डिलीवरी 2–2.5 दिन के सामान्य समय में ही हो रही है, और राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी कोई गंभीर समस्या नहीं है, जिसे कमी कहा जाए। इसका अर्थ यह था कि समस्या व्यापक राष्ट्रीय अभाव की नहीं, बल्कि कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में अचानक मांग बढ़ने और वितरण प्रणाली पर बने अस्थायी दबाव की थी। इस पूरे परिदृश्य के पीछे जो वास्तविक कारण उभरकर सामने आए, वे कई स्तरों पर काम कर रहे थे। पहला और सबसे महत्वपूर्ण कारण अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव था। मध्य-पूर्व में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के मध्य बढ़ते संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित हुए। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए जहाजों में देरी, समुद्री बीमा लागत और जोखिम बढ़ने लगे। एलपीजी शिपमेंट का समय बढ़ा, जिससे भारतीय बंदरगाहों पर डिलीवरी शेड्यूल में भी देर हुई। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह था कि भारत आज भी LPG की अपनी कुल घरेलू आवश्यकता का लगभग 60–65% आयात करता है। अर्थात वैश्विक अस्थिरता का सीधा प्रभाव भारतीय उपभोक्ता तक पहुँच सकता है। बड़े आयातक देशों में तनाव, शिपमेंट विलंब, पोर्ट कंजेशन और बर्करिंग समय का बढ़ना, इन सभी का प्रभाव सीधे घरेलू सप्लाई चेन पर पड़ा। इसके अतिरिक्त ट्रकों की कमी, स्थानीय परिवहन में देरी, कुछ क्षेत्रों में सड़क मरम्मत या मौसम अवरोध जैसी घरेलू परिस्थिति ने भी दबाव बढ़ाया। तीसरा कारण मीडिया और सोशल मीडिया के प्रभाव से उत्पन्न ‘पैनिक बुकिंग’ रहा। किसी भी संकट में यह मानवीय प्रतिक्रिया आमतौर पर देखी जाती है। जैसे ही कुछ उपभोक्ताओं ने देरी की बात साझा की, लोगों ने एक साथ अतिरिक्त सिलिंडर बुक करना शुरू कर दिया। कई परिवारों ने सुरक्षा कारणों से दो-तीन सिलिंडर अतिरिक्त बुक कर लिए। जबकि सामान्य परिस्थितियों में वे इतनी खपत नहीं करते। इस असामान्य मांग ने वितरण प्रणाली में तात्कालिक तनाव उत्पन्न किया और सामान्य चक्र बिगड़ गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार और तेल विपणन कंपनियों ने कई त्वरित कदम उठाए। सबसे पहले रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया कि वे अपनी प्रोपेन-ब्यूटेन स्ट्रीम्स को एलपीजी उत्पादन में परिवर्तित करें, ताकि घरेलू बाजार की जरूरतें तुरंत पूरी हों। इस निर्देश से घरेलू एलपीजी उत्पादन लगभग 25% तक बढ़ाने में सफलता मिली। इससे तत्काल राहत मिली और डोमेस्टिक सप्लाई बैलेंस मजबूत हुआ। दूसरा महत्वपूर्ण कदम यह था कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के तहत घरेलू उपभोक्ता को प्राथमिकता देने और ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू की गई। वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की जमाखोरी या कृत्रिम कमी की आशंका को खत्म किया गया। तीसरा कदम बुकिंग नियमों में संशोधन का था। पैनिक बुकिंग को रोकने के लिए बुकिंग गैप 25 दिन तक बढ़ाया गया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में इसे 45 दिन तक भी बढ़ाया गया, जिससे बार-बार अनावश्यक बुकिंग रुक सके। इससे सिस्टम पर दबाव कम हुआ और जिन उपभोक्ताओं को वास्तव में सिलिंडर की जरूरत थी, उन्हें समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की गई। सरकार ने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि जहां पीएनजी (पाइप्ड नैचरल गैस) उपलब्ध है वहाँ उपभोक्ता अस्थायी रूप से पीएनजी को प्राथमिकता दें, ताकि एलपीजी वितरण पर दबाव संतुलित किया जा सके। इसके साथ-साथ अफवाहों और गलत सूचनाओं को रोकने के लिए प्रेस विज्ञप्तियों, मीडिया ब्रीफिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। इन सभी तात्कालिक उपायों ने संकट के विस्तार को रोका, लेकिन इस स्थिति का प्रभाव विभिन्न वर्गों पर अलग-अलग दिखाई दिया। घरेलू उपभोक्ता, जिनके लिए सरकार प्राथमिकता देती है, उन्हें सामान्यतः 2–3 दिन की डिलीवरी चक्र में सिलिंडर मिलता रहा। हालांकि कुछ क्षेत्रों में अस्थायी देरी का अनुभव हुआ। दूसरी ओर व्यापारिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं, विशेषकर होटल, रेस्टोरेंट और फूड उद्योग—को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा क्योंकि कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति पर प्राथमिकता सीमित थी। कुछ छोटे व्यवसायों और एमएसएसई ने भी गैस की अनिश्चिता के कारण उत्पादन लागत बढ़ने की शिकायत की। इधर-उधर से ब्लैक मार्केटिंग की सूचनाएं भी मिलीं, हालांकि सरकार ने इन शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई कर स्थिति को नियंत्रित किया। इस संकट के बीच कई मिथक भी उभरे, जिनमें प्रमुख था कि देश में गैस खत्म हो गई है। सरकारी आंकड़े और विशेषज्ञ रिपोर्टें इस दावे को स्पष्ट रूप से गलत साबित करती हैं। देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद था, और प्रमुख समस्या सप्लाई अभाव की नहीं बल्कि वितरण तनाव और पैनिक बुकिंग की थी। दूसरा मिथक यह था कि गैस आपूर्ति पूरी तरह रुक गई है, जबकि वास्तविकता यह थी कि देशभर में ट्रकिंग, रीफिलिंग और डिलीवरी कार्य एक सीमित देरी के साथ निरंतर जारी रहा। इस अनुभव का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू यह है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति अब पहले से अधिक परिपक्व और दीर्घकालिक दिशा में बढ़ रही है। भारत

ईद पर चमकती त्वचा का राज: घर बैठे आसान स्किन केयर टिप्स

नई दिल्ली। ईद का त्योहार नजदीक आते ही हर कोई अपने लुक को लेकर खास तैयारी शुरू कर देता है। खासकर महिलाएं चाहती हैं कि इस मौके पर उनका चेहरा साफ, चमकदार और हेल्दी दिखे। लेकिन हर बार पार्लर जाना जरूरी नहीं है। अगर आप सही स्किन केयर रूटीन अपनाएं, तो घर पर ही नेचुरल ग्लो पाया जा सकता है। कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी त्वचा को फ्रेश, सॉफ्ट और चमकदार बना सकते हैं। सबसे जरूरी है सही क्लीनिंग स्किन केयर की शुरुआत हमेशा क्लीनिंग से होती है। दिन में कम से कम दो बार हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करें। इससे चेहरे पर जमा धूल, पसीना और अतिरिक्त तेल हट जाता है। साफ त्वचा ही ग्लोइंग स्किन की पहली सीढ़ी होती है। डेड स्किन हटाने के लिए हल्का स्क्रब चेहरे की डेड स्किन हटाना भी बहुत जरूरी है, लेकिन ध्यान रखें कि ज्यादा स्क्रब न करें। हफ्ते में 2–3 बार हल्का स्क्रब पर्याप्त होता है। घर पर स्क्रब बनाने के लिए एक चम्मच कॉफी और एक चम्मच शहद मिलाकर हल्के हाथों से मसाज करें। इससे स्किन साफ और मुलायम बनती है। बेसन-दही फेस पैक से आएगा निखार ईद से पहले चेहरे पर इंस्टेंट ग्लो पाने के लिए फेस पैक बेहद फायदेमंद होता है। इसके लिए दो चम्मच बेसन, एक चम्मच दही और थोड़ा सा हल्दी मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे 15 मिनट तक चेहरे पर लगाकर धो लें। यह पैक स्किन को साफ करने के साथ-साथ नेचुरल चमक भी देता है। एलोवेरा जेल से करें नाइट केयर रात में सोने से पहले एलोवेरा जेल लगाना स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह त्वचा को हाइड्रेट करता है और ठंडक पहुंचाता है। नियमित इस्तेमाल से चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है और स्किन हेल्दी रहती है। इंस्टेंट ग्लो के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय अगर आपके पास ज्यादा समय नहीं है, तो कुछ आसान उपाय तुरंत निखार दे सकते हैं गुलाब जल से चेहरा साफ करें कच्चे दूध से क्लीनिंग करें खीरे का रस लगाएं शहद और नींबू का फेस पैक इस्तेमाल करें ये उपाय त्वचा को तुरंत फ्रेश और चमकदार बना देते हैं। अच्छी नींद और हेल्दी डाइट भी जरूरी सिर्फ बाहरी देखभाल ही नहीं, बल्कि अंदर से हेल्दी रहना भी जरूरी है। रोज 7–8 घंटे की नींद लें, ताकि डार्क सर्कल और डलनेस से बचा जा सके। साथ ही फलों और हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाएं। इनमें मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं। हाइड्रेशन का रखें खास ध्यान दिनभर में कम से कम 7–8 गिलास पानी जरूर पिएं। पर्याप्त पानी पीने से त्वचा हाइड्रेट रहती है और उसका नेचुरल ग्लो बरकरार रहता है। ध्यान रखने वाली जरूरी बातें स्किन केयर करते समय नए प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। धूप में निकलते समय सनस्क्रीन लगाएं और स्किन को हमेशा मॉइश्चराइज रखें।

राधा रानी का दिव्य स्वरूप: शब्दों से परे सौंदर्य, जिसे केवल भक्ति से ही पाया जा सकता है

नई दिल्ली । भक्ति मार्ग में एक प्रश्न सदियों से लोगों के मन में उठता रहा है आखिर राधा रानी कैसी दिखती हैं? भक्त साधक और जिज्ञासु अक्सर संतों से इस रहस्य को जानने की इच्छा रखते हैं लेकिन संतों का स्पष्ट कहना है कि राधा रानी के वास्तविक स्वरूप को शब्दों में बांध पाना संभव नहीं है। उनका दिव्य रूप सामान्य दृष्टि से परे है और उसे देखने के लिए केवल भौतिक आंखें पर्याप्त नहीं हैं बल्कि इसके लिए दिव्य अनुभूति और गहन भक्ति की आवश्यकता होती है। संत प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार मनुष्य जो कुछ भी इस संसार में देखता है वह उसकी भौतिक दृष्टि तक सीमित होता है जो माया से प्रभावित है। यही कारण है कि हम केवल भौतिक जगत को ही देख पाते हैं। जिस प्रकार महाभारत में अर्जुन को भगवान श्री कृष्ण के विराट स्वरूप के दर्शन के लिए दिव्य चक्षु प्रदान किए गए थे उसी प्रकार राधा रानी के वास्तविक स्वरूप को देखने के लिए भी दिव्य दृष्टि की आवश्यकता होती है। बिना इस आध्यात्मिक दृष्टि के उनके स्वरूप को समझ पाना असंभव है। संतों का कहना है कि राधा रानी सौंदर्य की पराकाष्ठा हैं। उनके रूप का वर्णन करना इतना कठिन है कि यदि किसी व्यक्ति के शरीर के प्रत्येक रोम में करोड़ों जिह्वाएं भी उत्पन्न हो जाएं तब भी उनके सौंदर्य की पूर्ण व्याख्या नहीं की जा सकती। यह भी कहा जाता है कि जिन भगवान श्री कृष्ण के सौंदर्य से करोड़ों कामदेव भी मोहित हो जाते हैं वही श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी की रूप माधुरी के सामने आकर्षित हो जाते हैं। उनकी महिमा इतनी अद्भुत है कि वेद भी उनके वर्णन में असमर्थ होकर नेति-नेति कहकर मौन हो जाते हैं। ब्रज की गोपियों का सौंदर्य भी अद्वितीय बताया गया है। कहा जाता है कि ब्रज की प्रत्येक गोपी इतनी सुंदर है कि करोड़ों लक्ष्मी भी उनके सामने फीकी पड़ जाएं। लेकिन जब यही सखियां अपनी आराध्य राधा रानी के दर्शन करती हैं तो वे भी उनके सामने नतमस्तक हो जाती हैं। राधा रानी के प्रत्येक अंग में ऐसी मधुरता और दिव्यता विद्यमान है जिसकी तुलना तीनों लोकों में कहीं नहीं मिलती। संतों के अनुसार राधा रानी के स्वरूप का अनुभव करने का सबसे सरल और प्रभावी मार्ग भक्ति और नाम जप है। यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से राधा नाम का निरंतर जप करता है तो धीरे-धीरे उसके हृदय में राधा रानी का दिव्य स्वरूप प्रकट होने लगता है। इसके साथ ही वृंदावन की पवित्र रज को माथे पर धारण करना और संतों का संग करना भी इस आध्यात्मिक यात्रा में सहायक माना जाता है। भक्ति परंपरा में राधा और कृष्ण के प्रेम को अद्वितीय बताया गया है। उनका संबंध मछली और जल के समान है अलग होते ही अस्तित्व समाप्त हो जाता है। जब राधा और कृष्ण एक साथ होते हैं तो वृंदावन की पूरी प्रकृति उस दिव्य प्रेम में डूब जाती है। पशु-पक्षी तक शांत होकर उस अलौकिक आनंद का अनुभव करने लगते हैं। अंततः संतों का संदेश स्पष्ट है कि राधा रानी का स्वरूप देखने के लिए बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक दृष्टि की आवश्यकता है। सच्ची भक्ति समर्पण और नाम जप के माध्यम से ही वह क्षण आता है जब भक्त इस दिव्य प्रेम और स्वरूप का अनुभव कर पाता है।

Rahul Gandhi parliament controversy: राहुल गांधी के संसद व्यवहार पर बवाल, 204 पूर्व अधिकारियों ने लिखा ओपन लेटर

   Rahul Gandhi parliament controversy: नई दिल्ली। देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। 204 पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के संसद में कथित व्यवहार पर सवाल उठाते हुए एक खुला पत्र जारी किया है। इस पत्र में उनके आचरण को संसदीय परंपराओं के विपरीत बताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और आत्ममंथन करने की मांग की गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं में 116 सेवानिवृत्त सशस्त्र बल अधिकारी, 84 पूर्व नौकरशाह (जिनमें चार राजदूत शामिल हैं) और चार वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं, जिससे इस मुद्दे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य ने उठाया मुद्दा इस खुले पत्र का समन्वय जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी S. P. Vaid ने किया है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय गरिमा से जुड़ा हुआ है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि संसद देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है, जहां कानून बनते हैं और जनता की आवाज को मंच मिलता है। ऐसे में यहां हर जनप्रतिनिधि से उच्चतम स्तर के आचरण की अपेक्षा की जाती है। 12 मार्च की घटना पर जताई आपत्ति हस्ताक्षरकर्ताओं ने 12 मार्च की एक घटना को लेकर विशेष आपत्ति जताई है। उनके अनुसार, संसद परिसर में किसी भी प्रकार के प्रदर्शन या विरोध पर रोक के बावजूद विपक्ष ने निर्देशों का उल्लंघन किया। आरोप है कि Rahul Gandhi के नेतृत्व में सांसदों ने संसद की सीढ़ियों पर बैठकर विरोध जताया और चाय-बिस्कुट लेते हुए नजर आए। पत्र में कहा गया है कि यह आचरण न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि संसदीय गरिमा के प्रति अनादर भी दर्शाता है। ‘लोकतंत्र का मंदिर’ है संसद पत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि संसद को ‘लोकतंत्र का मंदिर’ माना जाता है, जहां गंभीर मुद्दों पर बहस और निर्णय लिए जाते हैं। ऐसे में संसद के हर हिस्से-चाहे वह सदन का कक्ष हो, गलियारा हो या सीढ़ियां-सभी स्थानों पर समान मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि इस तरह का व्यवहार संस्थागत मूल्यों को कमजोर करता है और जनता के बीच गलत संदेश भेजता है। ‘नाटकीय राजनीति’ का आरोप खुले पत्र में Rahul Gandhi पर यह आरोप भी लगाया गया है कि वे पहले भी संसद के भीतर और बाहर ‘नाटकीय’ तरीके से विरोध जताते रहे हैं, जिससे सार्वजनिक संवाद का स्तर प्रभावित होता है। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां संसद की कार्यवाही में बाधा डालती हैं और जनता के समय व संसाधनों की बर्बादी का कारण बनती हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर पत्र के अंत में कहा गया है कि सांसदों को अपने हर कदम के प्रतीकात्मक महत्व को समझना चाहिए। खासकर नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वे उदाहरण प्रस्तुत करें। हस्ताक्षरकर्ताओं ने इस व्यवहार को लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने वाला बताते हुए इसे गंभीरता से लेने की अपील की है।

हिंदू नववर्ष पर नीम-मिश्री खाने की परंपरा क्यों? जानिए वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व

नई दिल्ली। भारतीय परंपरा में गुड़ी पड़वा और उगादी के साथ हिंदू नववर्ष की शुरुआत बेहद खास मानी जाती है। इस बार 19 मार्च से नवसंवत्सर की शुरुआत हो रही है। इस दिन सुबह पूजा के बाद नीम की पत्तियां और मिश्री या गुड़ खाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है जिसका गहरा धार्मिक दार्शनिक और वैज्ञानिक महत्व है। नीम और मिश्री जीवन का संतुलन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नववर्ष के पहले दिन नीम और मिश्री का सेवन जीवन के कड़वे और मीठे अनुभवों का प्रतीक है। नीम का कड़वा स्वाद जीवन की चुनौतियों संघर्ष और कठिनाइयों को दर्शाता है वहीं मिश्री की मिठास सुख सफलता और खुशियों का संकेत देती है। यह परंपरा सिखाती है कि जीवन में सुख दुख दोनों का संतुलन जरूरी है और हर परिस्थिति को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। पौराणिक महत्व शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा ने चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को सृष्टि की रचना की थी। इसी कारण इस दिन को नववर्ष और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की जाती है। आयुर्वेदिक दृष्टि से भी लाभकारी आयुर्वेद के अनुसार मौसम बदलने के समय यानी बसंत से गर्मी में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में नीम की पत्तियों में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। वहीं मिश्री शरीर को ऊर्जा देती है और नीम की कड़वाहट को संतुलित करती है। कैसे किया जाता है सेवन कई जगहों पर नीम की कोमल पत्तियों को मिश्री गुड़ इमली या कच्चे आम के साथ मिलाकर खाया जाता है। इसे नववर्ष की शुभ शुरुआत और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। इस वर्ष कौन होगा राजा और मंत्री? ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जिस दिन नववर्ष शुरू होता है उसी दिन का ग्रह उस वर्ष का राजा माना जाता है। इस बार नववर्ष गुरुवार को पड़ रहा है इसलिए गुरु ग्रह वर्ष के राजा होंगे जबकि मंगल ग्रह को मंत्री माना गया है।इसके अलावा इस वर्ष चंद्र देव सेनापति मेघाधिपति और फलधिपति रहेंगे। गुरु ग्रह नीरसाधिपति धनाधिपति और सस्याधिपति भी होंगे जबकि बुध धान्याधिपति और शनि रसाधिपति माने गए हैं। कुल मिलाकर हिंदू नववर्ष पर नीम मिश्री खाने की परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि जीवन दर्शन और स्वास्थ्य से जुड़ा एक गहरा संदेश भी देती है।

योगी आदित्यनाथ ने किया हेमवती नंदन बहुगुणा को याद, बोले- विकास को मिली नई ऊंचाइयां

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री Hemwati Nandan Bahuguna की पुण्यतिथि पर एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कार्यक्रम में शामिल होकर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और उनके योगदान को नमन किया। सीएम योगी ने बहुगुणा को एक लोकप्रिय जननेता, कुशल प्रशासक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बताते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। संघर्ष और समर्पण का प्रेरणादायी जीवनमुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अपने संबोधन में कहा कि Hemwati Nandan Bahuguna का जीवन संघर्ष, समर्पण और जनसेवा का जीवंत उदाहरण है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बताया कि बहुगुणा का जन्म तत्कालीन उत्तर प्रदेश (अब उत्तराखंड) के पौड़ी जनपद के एक छोटे से गांव में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा गांव में पूरी करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए Prayagraj पहुंचे, जहां वे छात्र राजनीति से जुड़े और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गए। स्वतंत्रता संग्राम से राजनीति तक का सफरसीएम योगी ने बताया कि वर्ष 1942 के आंदोलन के दौरान छात्र नेता के रूप में Hemwati Nandan Bahuguna को गिरफ्तार भी किया गया था। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने जनप्रतिनिधि, मंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। उनके नेतृत्व में प्रदेश में कई विकास कार्यों को गति मिली और प्रशासनिक सुधारों को मजबूती मिली। प्रयागराज और प्रदेश के विकास में अहम भूमिकामुख्यमंत्री ने कहा कि बहुगुणा जी ने Prayagraj को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके कार्य समाज के सभी वर्गों के उत्थान और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने के लिए समर्पित थे। उन्होंने प्रदेश में विकास की नई दिशा तय की और जनकल्याणकारी नीतियों के जरिए आम जनता के जीवन स्तर को सुधारने का प्रयास किया। सोशल मीडिया पर भी किया नमनइससे पहले Yogi Adityanath ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी बहुगुणा को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा कि महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और लोकप्रिय राजनेता के रूप में बहुगुणा जी का योगदान अविस्मरणीय है। देश की आजादी के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय चेतना को आगे बढ़ाने में उनका योगदान प्रेरणादायी रहा है। जनसेवा की प्रेरणा देते रहेंगे बहुगुणाकार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि Hemwati Nandan Bahuguna का जीवन हम सभी को जनसेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देता है। उनकी स्मृतियां हमेशा समाज को सही दिशा दिखाती रहेंगी।

अनोखा शिव धाम: कच्छ के कल्याणेश्वर महादेव मंदिर में सदियों से टूटे शिवलिंग की होती है पूजा

नई दिल्ली । गुजरात के कच्छ जिला में भुज के पास स्थित माधापार गांव का कल्याणेश्वर महादेव मंदिर आस्था और रहस्य का अनोखा संगम माना जाता है। इस मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित शिवलिंग है जो सदियों से टूटी अवस्था में होने के बावजूद पूरी श्रद्धा और विधि विधान से पूजित हो रहा है। मान्यता है कि यह शिवलिंग मंदिर निर्माण से पहले से ही इसी स्वरूप में मौजूद था। समय के साथ जहां अन्य शिवलिंगों में परिवर्तन देखने को मिलता है वहीं यहां का शिवलिंग प्रारंभ से ही खंडित अवस्था में बताया जाता है। इसके बावजूद श्रद्धालु इसे भगवान शिव का साक्षात रूप मानकर जल दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं। खंडित होने पर भी पूजनीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग किसी भी अवस्था में पूजनीय होता है। यही कारण है कि यहां टूटा हुआ शिवलिंग भी उतनी ही आस्था के साथ पूजित है। जबकि अन्य देवी देवताओं की मूर्तियों के लिए खंडित होने पर पूजा के अलग नियम बताए जाते हैं।रहस्यमयी मान्यताएं मंदिर से जुड़ी कई रहस्यमयी बातें भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं। कहा जाता है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल या दूध कहां जाता है यह स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। इसके अलावा मंदिर परिसर में सांप दिखाई देने की भी स्थानीय लोगों द्वारा चर्चा की जाती है जिसे शिव की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है।पौराणिक जुड़ाव इस मंदिर का संबंध पौराणिक कथाओं से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि पांडव ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां तपस्या की थी और शिवलिंग की स्थापना की थी। कुछ लोककथाओं में कर्ण और छत्रपति शिवाजी महाराज के यहां पूजा करने का भी उल्लेख मिलता है। आज भी दूर दूर से श्रद्धालु इस अद्भुत शिवधाम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर भगवान शिव की शरण में आते हैं।

मातृत्व अधिकारों का विस्तार: सुप्रीम कोर्ट ने गोद लेने वाली महिलाओं के हक में दिया अहम फैसला

नई दिल्ली। देश में मातृत्व अधिकारों को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है। Supreme Court of India ने स्पष्ट किया है कि अब तीन महीने से अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिलाओं को भी मैटरनिटी लीव का पूरा अधिकार मिलेगा। यह फैसला उन हजारों महिलाओं के लिए राहत लेकर आया है, जो अब तक कानूनी पाबंदियों के कारण मातृत्व अवकाश से वंचित रह जाती थीं। कोर्ट ने कहा कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य केवल जन्म के तुरंत बाद की देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि मां और बच्चे के बीच भावनात्मक संबंध को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। पुराना नियम क्यों था भेदभावपूर्णपहले कानून के तहत केवल उन महिलाओं को 12 हफ्तों का मैटरनिटी लीव मिलता था, जो तीन महीने तक के बच्चे को गोद लेती थीं। लेकिन Supreme Court of India ने इस प्रावधान को भेदभावपूर्ण करार दिया। कोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के सेक्शन 60(4) को रद्द करते हुए कहा कि यह संविधान के Article 14 और Article 21 का उल्लंघन करता है। न्यायालय के अनुसार, किसी बच्चे की उम्र के आधार पर मां को अधिकार देना या उससे वंचित करना समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। मां-बच्चे के रिश्ते को दी प्राथमिकताअदालत ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि मातृत्व अवकाश का असली मकसद मां और बच्चे के बीच आत्मीय रिश्ता विकसित करना और बच्चे की समुचित देखभाल सुनिश्चित करना है। यह प्रक्रिया केवल नवजात शिशु तक सीमित नहीं होती, बल्कि बड़े बच्चों के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। कोर्ट ने कहा कि जो महिलाएं बड़े बच्चों को गोद लेती हैं, उन्हें भी उतना ही समय और समर्थन चाहिए, ताकि वे बच्चे को नया और सुरक्षित वातावरण दे सकें। पितृत्व अवकाश पर भी दिया अहम सुझावइस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही Supreme Court of India ने केंद्र सरकार को पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) को लेकर भी ठोस कानून बनाने की सलाह दी है। अदालत ने कहा कि बच्चों की परवरिश केवल मां की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए, बल्कि पिता की भूमिका भी उतनी ही अहम है। यदि पितृत्व अवकाश को कानूनी रूप दिया जाता है, तो इससे परिवार और समाज दोनों को लाभ मिलेगा। कामकाजी महिलाओं के लिए क्यों अहम है फैसलायह निर्णय खासतौर पर उन कामकाजी महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जो किसी कारणवश नवजात के बजाय बड़े बच्चे को गोद लेती हैं। अब उन्हें मातृत्व अवकाश के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकेगा। इससे गोद लेने की प्रक्रिया को भी प्रोत्साहन मिलेगा और अधिक बच्चे बेहतर पारिवारिक माहौल पा सकेंगे। सामाजिक बदलाव की दिशा में कदमविशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव का संकेत भी है। इससे गोद लेने की प्रक्रिया को नया आयाम मिलेगा और समाज में समानता तथा संवेदनशीलता को बढ़ावा मिलेगा।