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हरी सब्जियों को खाएं सही तरीके से, बुजुर्ग और बच्चों के लिए विशेष सलाह…

नई दिल्ली: हरी सब्जियां स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती हैं। आयुर्वेद में भी हरी पत्तेदार सब्जियों को खाने का सही तरीका बताया गया है, ताकि पाचन ठीक रहे और शरीर को पूरा पोषण मिल सके। हालांकि आजकल सैंडविच, सलाद और नूडल्स में कच्ची सब्जियों का इस्तेमाल आम हो गया है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार कई हरी सब्जियां कच्ची खाने से पाचन में समस्या हो सकती है और वात दोष बढ़ा सकती हैं। कैसे खाएं हरी सब्जियां: पालक, शिमला मिर्च और गोभी जैसी हरी सब्जियों को कच्चा खाने से बचें। इनमें परजीवी टेपवर्म होने का खतरा रहता है। सब्जियों को पहले उबालें, फिर अतिरिक्त पानी निचोड़कर घी या तेल में हल्का भूनकर पकाएं। बुजुर्ग और बच्चों को हरी सब्जियों का सेवन कम मात्रा में दें। आयुर्वेद में बुजुर्गों और बच्चों के पाचन को ध्यान में रखते हुए कुछ सब्जियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। इनमें तोरई, टिंडा, लौकी, परवल और कुंदरू शामिल हैं। ये हरी सब्जियों जितनी ही पौष्टिक होती हैं और पचाने में हल्की होती हैं। यदि बच्चे इन सब्जियों को कम पसंद करें, तो इन्हें आटे में मिलाकर पराठा या मीठे के रूप में दिया जा सकता है। सही मात्रा और सही तरीके से हरी सब्जियों का सेवन करने से पाचन बेहतर रहता है, प्रतिरक्षा मजबूत होती है और हृदय स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहता है।

एमपी में 18 मार्च से बदलेगा मौसम, आधे प्रदेश में आंधी-बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में अलर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में 18 मार्च से मौसम का मिजाज बदलने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय होने जा रहा है। इसके प्रभाव से अगले तीन दिनों तक राज्य के करीब आधे जिलों में आंधी, बारिश और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। इसका असर भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर समेत कई बड़े शहरों में भी देखने को मिलेगा। हालांकि, इससे पहले सोमवार को पूरे प्रदेश में गर्मी का असर बना रहा और मंगलवार को भी तेज गर्मी पड़ने के आसार हैं। मौसम विभाग के मुताबिक 17 मार्च की रात से उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय होने वाला वेस्टर्न डिस्टरबेंस मध्य प्रदेश के मौसम को भी प्रभावित करेगा। इसके कारण 18, 19 और 20 मार्च के दौरान प्रदेश के कई इलाकों में बारिश होने की संभावना जताई गई है।मौसम विभाग के मुताबिक 17 मार्च की रात से उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय होने वाला वेस्टर्न डिस्टरबेंस मध्य प्रदेश के मौसम को भी प्रभावित करेगा। इसके कारण 18, 19 और 20 मार्च के दौरान प्रदेश के कई इलाकों में बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मार्च के इस सीजन में पहली बार इतना मजबूत सिस्टम एक्टिव हो रहा है। इसके असर से 3 से 4 दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कहीं आंधी और बारिश, कहीं गरज-चमक तो कहीं बादल छाए रहने की स्थिति बन सकती है। अभी तीन सिस्टम एक्टिव, फिर भी गर्मी का असरमौसम विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवातीय परिसंचरण) और एक ट्रफ लाइन सक्रिय है, लेकिन इनका खास असर देखने को नहीं मिला। यही वजह है कि सोमवार को प्रदेश के अधिकांश इलाकों में गर्मी बनी रही। खरगोन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, रायसेन, सिवनी, मंडला, टीकमगढ़, सागर और खजुराहो में पारा 37 डिग्री या उससे अधिक रहा। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में जबलपुर सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में 35.2 डिग्री, इंदौर में 35 डिग्री, ग्वालियर में 34.1 डिग्री और उज्जैन में 35 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। अप्रैल-मई में बढ़ेगी गर्मी, चल सकती है लूमौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि इस साल अप्रैल और मई में गर्मी अपने चरम पर रह सकती है। इन महीनों में ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग भी तेज गर्मी की चपेट में रहेंगे। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार अप्रैल और मई के दौरान हीट वेव यानी लू चलने की भी संभावना है, जो करीब 15 से 20 दिनों तक रह सकती है।

पंचतत्व और हमारी उंगलियां: जानें शरीर में इन्हें सक्रिय करने के आसान तरीके

नई दिल्ली: हमारा शरीर पंचभूतों से बना है -पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। आयुर्वेद और प्राचीन ज्ञान के अनुसार ये पंचतत्व हमारे शरीर और स्वास्थ्य के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मृत्यु के बाद शरीर इन्हीं पंचतत्वों में विलीन हो जाता है, लेकिन जीवन में इनके संतुलन और सक्रियता को बनाए रखना भी जरूरी है। हाथ की पांचों उंगलियां हमारे शरीर के पंचतत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं। अंगूठा पृथ्वी तत्व, तर्जनी वायु, मध्यमा आकाश, अनामिका अग्नि और कनिष्ठा जल का प्रतीक है। पृथ्वी तत्व अंगूठा:प्रकृति से जुड़ने से पृथ्वी तत्व सक्रिय होता है। हरियाली के बीच समय बिताएं, नंगे पैर घास पर चलें, मिट्टी को हाथ लगाएं और बागवानी करें। वायु तत्व तर्जनी:सांस और प्राणायाम से वायु तत्व संतुलित होता है। रोजाना खुली हवा में अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम करें। आहार में हल्की कड़वी चीजें शामिल करें। आकाश तत्व मध्यमा:आकाश तत्व को संतुलित करने के लिए ध्यान और मौन की प्रक्रिया अपनाएं। ध्यान मुद्रा में बैठकर ओम का उच्चारण करें। यह मानसिक चेतना बढ़ाता है और मन को शांति प्रदान करता है। अग्नि तत्व अनामिका:अग्नि तत्व पाचन से जुड़ा है। इसे सक्रिय करने के लिए सूर्य नमस्कार, नौकासन और कपालभाति जैसी योग मुद्राएं करें। साथ ही हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लें। सही पाचन से कई रोग अपने आप ठीक हो सकते हैं। जल तत्व कनिष्ठा:जल तत्व हमारे शरीर का 50-65 फीसदी हिस्सा बनाता है। इसे सक्रिय करने के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ लें, जल मुद्रा का अभ्यास करें और स्विमिंग करें।इस प्रकार पंचतत्वों को सक्रिय और संतुलित रखने से न केवल स्वास्थ्य बेहतर रहता है बल्कि मानसिक शांति और ऊर्जा भी बढ़ती है।