चूड़ियां सिंदूर के साथ मैदान में उतरीं महिलाएं, नरसिंहपुर का सिंदूर कप बना सशक्तिकरण की मिसाल

नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में खेल और महिला सशक्तिकरण का एक अनोखा संगम देखने को मिला जब स्टेडियम ग्राउंड में गृहणियों और कामकाजी महिलाओं ने क्रिकेट के मैदान पर अपने जज्बे का शानदार प्रदर्शन किया। हाथों में चूड़ियां माथे पर सिंदूर और दिल में जीत का जुनून लिए इन महिलाओं ने सिंदूर कप के जरिए यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी दायरे की मोहताज नहीं होती। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप में शानदार सफलता से प्रेरित होकर आयोजित इस टूर्नामेंट ने जिले में नई ऊर्जा भर दी। आमतौर पर घर परिवार की जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने वाली महिलाओं ने जब बल्ला और गेंद थामी तो मैदान पर चौके छक्कों की बारिश होने लगी और दर्शक भी आश्चर्यचकित रह गए। स्टेडियम मैदान पर आयोजित सिंदूर कप में जिले की छह विवाहित महिला टीमों ने हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता की खास बात यह रही कि इसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएं शामिल हुईं। एक ओर महिला पुलिसकर्मियों की टीम थी तो दूसरी ओर शिक्षिकाएं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी महिलाएं मैदान में उतरीं। सभी टीमों ने पूरे जोश और खेल भावना के साथ मुकाबला किया। दो दिनों तक चले इस रोमांचक टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला पुलिस इलेवन और शिक्षा विभाग की टीम के बीच खेला गया। मैच के दौरान कभी शिक्षिकाओं की बल्लेबाजी हावी नजर आई तो कभी महिला पुलिसकर्मियों की सटीक गेंदबाजी ने मुकाबले को रोमांचक बना दिया। अंततः कड़े संघर्ष के बाद पुलिस इलेवन टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिंदूर कप की ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को घर की चारदीवारी से बाहर निकालकर खेल स्वास्थ्य और आत्मविश्वास से जोड़ना था। टूर्नामेंट के दौरान महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। वे पूरे जोश के साथ खेलते हुए अपने बचपन के दिनों को फिर से जीती नजर आईं। सिंदूर कप न केवल एक खेल प्रतियोगिता रहा बल्कि यह महिलाओं के आत्मबल सामूहिकता और सामाजिक भागीदारी का भी प्रतीक बनकर उभरा। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि अगर अवसर मिले तो महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकती हैं।
कीटनाशकों के बढ़ते खतरे पर बोले Sangram Singh, ऑर्गेनिक खेती को बताया जरूरी

नई दिल्ली। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में संग्राम सिंह ने कहा कि आज की तेज रफ्तार शहरी जीवन में लोग प्राकृतिक और उपजाऊ भोजन से दूर होते जा रहे हैं।उन्होंने पुराने समय को याद करते हुए कहा कि पहले लोग बांस से सीधे फल तोड़कर खाते थे और खेतों से ताजी सब्जियां लाते थे, लेकिन अब यह संस्कृति काफी हद तक खत्म हो गई है। फिटनेस और स्वास्थ्य के लिए जरूरी है संतुलित आहारसंग्राम सिंह ने बताया कि जैविक फल और सब्जियों शरीर को जरूरी पोषक तत्व देती हैं, जिससे: शारीरिक ताकत बढ़ती है इम्युनिटी मजबूत होती है लंबे समय तक बीमारियों से बचाव होता है उन लोगों से अपील की कि वे अपनी डाइट में प्राकृतिक और शुद्ध भोजन को शामिल करें। किसानों से बढ़ रहा स्वास्थ्य खतराकार्यक्रम में मौजूद शैलेश जरिया ने कहा कि बाजार में मिलने वाले कई फल-सब्जियों में बहुत ज़्यादा केमिकल वाले कीटनाशक होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। उनके अनुसार, यह समस्याएं तेज़ी से बढ़ रही हैं: कैंसर डायबिटीज़ हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर) दिल की बीमारी बीमारियों के पीछे खराब खान-पान और केमिकल युक्त खाद्य पदार्थ एक बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। किसानों के लिए भी अहम संदेश शैलेश जरिया ने किसानों से अपील की कि वे: रासायनिक खाद और कीटनाशकों का कम इस्तेमाल करें जैविक और पारंपरिक खेती अपनाएं मिट्टी की उर्वरता बनाए रखें उनका कहना है कि इससे न सिर्फ पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि लोगों को कसरत और सुरक्षित भोजन भी मिलेगा। खेल के मैदान में भी वापसी की तैयारइस मौके पर संग्राम सिंह ने बताया कि वह जल्द ही अंतरराष्ट्रीय MMA मुकाबले में हिस्सा लेंगे। तारीख: 5 अप्रैल स्थान: अर्जेंटीना इवेंट: समुराई फाइट लीग यह साफ है कि जैविक फूड केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और भविष्य की जरूरत बन रहा है। संग्राम सिंह और एथलीटों का संदेश यही है कि अगर हम अभी से अपने खान-पान में बदलाव नहीं करेंगे, तो आने वाले समय में स्वास्थ्य समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
LPG किल्लत पर अक्षय कुमार का बड़ा बयान ट्विंकल ने घर में मंगवाए इलेक्ट्रिक स्टोव..

नई दिल्ली:देशभर में रसोई गैस की किल्लत को लेकर चल रही चर्चा के बीच बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है उन्होंने अपने घर का उदाहरण देते हुए बताया कि इस समस्या को लेकर उनके परिवार ने भी एहतियात बरतना शुरू कर दिया है हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान अक्षय कुमार ने बताया कि उनके घर में फिलहाल गैस की कोई बड़ी समस्या नहीं है लेकिन उनकी पत्नी ट्विंकल खन्ना ने पहले से ही तैयारी करते हुए दो इलेक्ट्रिक स्टोव ऑर्डर कर दिए हैं अक्षय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें यह भी नहीं पता कि वे स्टोव घर पहुंचे हैं या नहीं लेकिन यह साफ है कि उन्होंने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए बैकअप तैयार कर लिया है यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में LPG को लेकर लोगों के बीच चिंता बनी हुई है सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तरह तरह के मीम और चर्चाएं देखने को मिल रही हैं आम लोगों से लेकर सेलेब्रिटीज तक इस विषय पर अपनी राय रख रहे हैं इसी कार्यक्रम में अक्षय कुमार ने सिर्फ गैस संकट ही नहीं बल्कि शहर की स्वच्छता को लेकर भी अहम बात कही उन्होंने मुंबई में क्लीन मुंबई लीग शुरू करने का प्रस्ताव रखा है इस पहल के जरिए वह चाहते हैं कि शहर के लोग खुद आगे आकर सफाई अभियान में हिस्सा लें उन्होंने कहा कि अगर सभी नागरिक मिलकर काम करें तो शहर को साफ रखना मुश्किल नहीं है अक्षय ने यह भी सुझाव दिया कि शहर में जहां भी निर्माण कार्य चल रहा है वहां धूल को नियंत्रित करने के लिए बिल्डरों को हरे पर्दे लगाने चाहिए ताकि प्रदूषण को कम किया जा सके अक्षय कुमार ने एक तरफ जहां LPG संकट पर हल्के अंदाज में अपने घर की स्थिति साझा की वहीं दूसरी तरफ उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया उनका मानना है कि छोटी छोटी तैयारियां और सामूहिक प्रयास बड़े बदलाव ला सकते हैं
शहडोल में बेलगाम खनन माफिया, दफ्तर तक कर रहे रेकी; एक साल में 222 केस, 70 लाख से अधिक जुर्माना वसूला

भोपाल। सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए मध्यप्रदेश से बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य पुलिस विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में सरकार ने तेज़ी दिखाई है। इसी क्रम में पुलिस मुख्यालय की चयन एवं भर्ती शाखा ने करीब 10 हजार पदों पर भर्ती का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेज दिया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार का अवसर मिलेगा। प्रस्तावित भर्ती में सबसे अधिक पद आरक्षक कांस्टेबल के होंगे। जानकारी के अनुसार कुल 10 हजार पदों में से लगभग 7500 पद आरक्षकों के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा 1 हजार पद ड्राइवर के और करीब 1200 पद मिनिस्ट्रियल स्टाफ के शामिल किए गए हैं। यह भर्ती न केवल पुलिस बल को मजबूत करेगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों को भी गति प्रदान करेगी। दरअसल, मध्यप्रदेश पुलिस में लंबे समय से पदों की कमी बनी हुई है। वर्तमान में केवल आरक्षक वर्ग में ही करीब 13 हजार पद खाली बताए जा रहे हैं। ऐसे में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने और पुलिसिंग को प्रभावी बनाने के लिए इन पदों को भरना बेहद जरूरी हो गया है। यही कारण है कि सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाना शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, हर साल बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी रिटायर होते हैं, जिससे विभाग में लगातार रिक्तियां बढ़ती जा रही हैं। अनुमान है कि हर वर्ष लगभग 11 से 12 हजार पुलिसकर्मी सेवा निवृत्त हो जाते हैं। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने पहले ही 22 हजार पदों पर भर्ती का ऐलान किया था। अब उसी योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से भर्तियां की जा रही हैं। वहीं, वर्ष 2025 की पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया फिलहाल जारी है और उम्मीदवारों के फिजिकल टेस्ट लिए जा रहे हैं। इसके बाद लिखित परीक्षा और अन्य प्रक्रियाओं के जरिए चयन किया जाएगा। इस बीच नई भर्ती की तैयारी से उन युवाओं में भी उत्साह बढ़ गया है जो लंबे समय से पुलिस विभाग में नौकरी पाने का सपना देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में भर्ती होने से न केवल बेरोजगारी कम होगी, बल्कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था भी अधिक सुदृढ़ होगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पुलिस बल की उपस्थिति बढ़ने से अपराध नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश पुलिस में प्रस्तावित यह बंपर भर्ती युवाओं के लिए सुनहरा अवसर साबित हो सकती है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की मंजूरी और भर्ती प्रक्रिया की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं।
कमर्शियल रियल एस्टेट में तेजी, 2026 में ग्रेड A ऑफिस की डिमांड मजबूत रहने के संकेत

नई दिल्ली। भारत का ऑफिस साइन रियल एस्टेट सेक्टर 2026 में मजबूती के साथ बना हुआ है। कोलियर्स इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल ग्रेड ए ऑफिस स्पेस की मांग 70-75 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच सकती है, जबकि ओल्ड 60-65 मिलियन स्क्वायर फीट रहने का अनुमान है। इसका सीधा मतलब यह है कि बाजार में मांग अधिक और बिक्री कम है, जिससे आने वाले समय में किराये की खेती और खाली कार्यालय स्थान घटने की संभावना है। जीसीसी ने बदली तस्वीरें, बनीं विकास के इंजनरिपोर्ट में सबसे बड़ा फोकस ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) पर है, जो अब सिर्फ बैक-ऑफिस नहीं बल्कि इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और रिसर्च के बड़े हब बन गए हैं 2026 में जीसीसी करीब 30-35 मिलियन स्क्वायर फीट लीजिंग करेगा, जो कुल मांग का 40-50% हिस्सा होगा। आईटी, बीएफएसआई, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इस ग्रोथ को आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे भारत ग्लोबल एसोसिएशन के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बन रहा है। बैंगलोर टॉप पर, सिकंदर-प्रेमी की तेज़ आख़रीरिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु 2026 में भी ऑफिस मार्केट का किंग बना रहेगा और कुल लीज व स्ट्राइक में करीब एक-तिहाई योगदान देगा। वहीं हैदराबाद और दिल्ली एनसीआर में भी 10 मिलियन स्क्वायर फीट की मांग और अंकित प्रविष्टि हो सकती है। यह ट्रेंड दुकानदार है कि भारत के बड़े शहर तेजी से काउंटी हब में बदल रहे हैं। फ़्लेक्स स्पेस और REITs से सांख्यिकीविद् 2026 में फ्लेक्स (को-वर्किंग) स्पेस का योगदान भी तेजी से बढ़ा। अनुमान है कि यह 15-18 मिलियन वर्ग फुट का होगा, जो कुल भागीदारी का 20-25% होगा। साथ ही रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) आम निवेशकों की भागीदारी के माध्यम से रियल एस्टेट सेक्टर का लोकतंत्रीकरण करेगा। 2030 तक नया रिकॉर्ड, 1 रॉक स्क्वायर पार फीट रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक भारत का ग्रेड ए ऑफिस स्टॉक 1 बेबी स्क्वायर फीट के आंकड़े पार कर जाएगा। निक्की मेहरोत्रा के अनुसार, जीसीसी विस्तार, पिछलग्गू और फ्लेक्स स्पेस की क्रीआम मांग को लगातार मजबूती मिलेगी। वहीं विमल नादर का मानना है कि जो डिजिटल आर्किटेक्चर और सस्टेनेबिलिटी पर ध्यान देगा, वह भविष्य में सबसे ज्यादा सफल होगा। आगे की दिशाकुल मिलाकर 2026 भारत के ऑफिस मार्केट के लिए टर्निंग वेन्ट साबित हो सकता है। मजबूत मांग, बढ़ते निवेश और जीसीसी के विस्तार से यह क्षेत्र जल्द ही 100 मिलियन वर्ग फीट वार्षिक मांग के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। यह साफ संकेत है कि भारत ग्लोबल एसोसिएशन के लिए सिर्फ बैक-ऑफिस नहीं, बल्कि इनोवेशन और बिजनेस का ग्लोबल हब बन रहा है।
Oscar 2026 की हिट फिल्मों का ठिकाना यहां फ्री से लेकर पेड प्लेटफॉर्म तक पूरी जानकारी

नई दिल्ली: 15 मार्च को हुए ऑस्कर अवॉर्ड्स के ऐलान के बाद फिल्म प्रेमियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन अवॉर्ड जीतने वाली फिल्मों को देखा कहां जाए इस साल कई शानदार फिल्मों ने अलग अलग कैटेगरी में बाजी मारी और अब ये धीरे धीरे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध हो रही हैं सबसे ज्यादा चर्चा में रही फिल्म वन बैटल आफ्टर अनदर जिसने इस बार कई अवॉर्ड्स अपने नाम किए यह फिल्म ग्लोबली HBO Max पर स्ट्रीम हो रही है वहीं भारत में इसे जियो हॉटस्टार पर देखा जा सकता है अगर आपके पास सब्सक्रिप्शन नहीं है तो इसे प्राइम वीडियो और Apple TV पर रेंट पर भी उपलब्ध कराया गया है इसी तरह फिल्म सिनर्स भी खूब सुर्खियों में है यह भी HBO Max पर मौजूद है और भारतीय दर्शक इसे जियो हॉटस्टार पर आसानी से देख सकते हैं इसके अलावा प्राइम वीडियो और Apple TV पर इसे किराए पर देखने का विकल्प भी दिया गया है वहीं अवतार फायर एंड ऐश को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह बना हुआ है जेम्स कैमरून की इस फिल्म ने बेस्ट विजुअल इफेक्ट्स कैटेगरी में ऑस्कर जीता है हालांकि अभी यह ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध नहीं है लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही इसे जियो हॉटस्टार पर रिलीज किया जा सकता है अगर आप कुछ अलग देखना चाहते हैं तो मिस्टर नोबॉडी अगेंस्ट पुतिन एक दिलचस्प विकल्प हो सकता है हालांकि फिलहाल यह फिल्म बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध नहीं है और इसे केवल फिल्म फेस्टिवल या लिमिटेड रिलीज के जरिए ही देखा जा सकता है वहीं हेमनेट को आप Peacock पर देख सकते हैं इसके अलावा यह प्राइम वीडियो और Apple TV पर रेंट के लिए भी उपलब्ध है इस फिल्म के लिए जेसी बकले ने ऑस्कर जीतकर इतिहास रचा है अगर आप फ्री में ऑस्कर विजेता कंटेंट देखना चाहते हैं तो द गर्ल व्हू क्राइड पर्ल्स आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन है यह शॉर्ट फिल्म YouTube पर मुफ्त में उपलब्ध है और आसानी से देखी जा सकती है कुल मिलाकर इस साल की ऑस्कर विनिंग फिल्मों को देखने के लिए आपके पास कई विकल्प मौजूद हैं कुछ फिल्में अभी ओटीटी पर स्ट्रीम हो रही हैं जबकि कुछ के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा ऐसे में अगर आप वीकेंड पर कुछ बेहतरीन और चर्चित कंटेंट देखने की सोच रहे हैं तो यह लिस्ट आपके लिए पूरी तरह तैयार है
ITR समेत ये जरूरी काम 31 मार्च से पहले निपटा लें, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

नई दिल्ली। 31 मार्च तक कई वित्तीय काम निपटाने जरूरी हैं। इस डेड लाइन (Dead line) को चूकने पर बड़े आर्थिक झटके का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा पीपीएफ, निवेश के प्रूफ जमा कराने, संशोधित इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल (Income Tax Return Filing) करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य निपटाना भी जरूरी है। 1. टैक्स की बचत के लिए निवेश करने का मौकावर्तमान में दो प्रकार की टैक्स रिजीम (Tax Regime) काम कर रही हैं-पुरानी और नई इनकम टैक्स व्यवस्था। अगर टैक्सपेयर या संयुक्त हिन्दु परिवार यानी एचयूएफ पुरानी इनकम टैक्स व्यवस्था चुनता है तो वह इनकम टैक्स अधिनियम के तहत अलग-अलग धाराओं जैसे 80सी, 80डी, 80टीटीबी, 80ई, 80जी आदि के अंतर्गत विभिन्न कटौतियों का फायदा लेकर अपनी टैक्स देनदारी घटा सकता है। पुरानी इनकम टैक्स व्यवस्था चुनने वालों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 31 मार्च से पहले कर से जुड़ी बचत और निवेश का काम पूरा करना जरूरी है। 2. पीपीएफ, सुकन्या खाते में न्यूनतम राशि निवेशपीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना खाते को सक्रिय रखने के लिए वित्त वर्ष में निश्चित न्यूनतम राशि जमा करना अनिवार्य है। पीपीएफ के लिए न्यूनतम राशि 500 रुपये और सुकन्या समृद्धि खाते के लिए 250 रुपये है। 12 महीने में एक बार यह राशि जमा करना जरूरी होता है। 3. दफ्तर में निवेश के साक्ष्य जमा करनाजिन कर्मचारियों ने अपने दफ्तर में वित्त वर्ष की शुरुआत में कर बचाने वाले निवेश की जानकारी दी थी, उन्हें नियत तारीख से पहले नियोक्ता को उससे जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य जमा करने होंगे। इससे चूकने पर नियोक्ता वेतन से ज्यादा टीडीएस कटौती कर सकता है। 4. होम लोन का ब्याज प्रमाणपत्र हासिल करनाजिन लोगों ने होम लोन लिया है, उन्हें अपने बैंक से स्टेटमेंट या ब्याज का प्रमाणपत्र डाउनलोड कर लेना चाहिए। इनकम टैक्स कानून के तहत, करदाता होम लोन के ब्याज पर दो लाख रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं। मूल राशि के पुनर्भुगतान पर 1.5 लाख रुपये तक की कटौती धारा 80सी के तहत उपलब्ध है। 5. कर निर्धारण वर्ष 2021–22 की संशोधित रिटर्नकर निर्धारण वर्ष 2021–22 (वित्त वर्ष 2020-21) के लिए संशोधित रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 मार्च 2026 है। पहले दाखिल किए गए रिटर्न में कोई गलती है या अन्य जानकारी देना भूल गए हैं, तो संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। इसमें ऐसे मामले भी शामिल हैं, जहां करदाता ने मूल या विलंबित रिटर्न में आय से जुड़ी कुछ जानकारी सही तरीके से नहीं दी थी तो संशोधित आईटीआर भर सकते हैं। 6. विदेशी आय का विवरणपिछले वित्त वर्ष 2024–25 के लिए कर योग्य विदेशी आय का विवरण, उस पर काटे गए या भुगतान किए गए टैक्स के साथ की जानकारी 31 मार्च तक देना जरूरी है। यदि रिटर्न धारा 139(1) या धारा 139(4) के तहत दाखिल किया गया है, तो विदेशी कर का दावा करने के लिए यह जरूरी है। 7. फॉर्म 12बी जमा करनाअगर आप वेतनभोगी हैं और आपने मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अपनो नौकरी बदली है तो आपको अपनी पुरानी कंपनी से आय के विवरण फॉर्म 12बी में मौजूदा नियोक्ता के पास जमा करने होंगे। ऐसा इसलिए ताकि मौजूदा नियोक्ता की ओर से स्रोत पर कर कटौती की सही गणना की जा सके।
ईरान युद्ध के चलते भारतीय एयरलाइंस आर्थिक संकट में… हवाई यात्रियों पर बढ़ा बोझ

airlines नई दिल्ली। घरेलू विमान उद्योग (Domestic Aircraft Industry) पहले से ही भारत-पाक संघर्ष, एयर इंडिया विमान दुर्घटना और इंडिगो की उड़ानें रद्द होने के संकट से जूझ रहा था। अब पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध भारतीय एयरलाइंस (Indian Airlines) को बड़े घाटे की ओर ले जा रहा है। भारतीय एयरलाइंस का भविष्य खाड़ी देशों पर अत्यधिक निर्भर है, क्योंकि भारत के कुल अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात का 51% हिस्सा सिर्फ खाड़ी देशों (बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई) से आता है। हवाई यात्रियों की जेब पर असरतनाव और संघर्ष का असर हवाई यात्रियों की जेब पर दिखने लगा है। इंडिगो, एयर इंडिया और अकासा एयर ने पहले 199 से 2,300 रुपये तक की बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र पहले से ही बंद है। ऐसे में पश्चिम एशिया के वैकल्पिक रास्तों में बाधा आने से यात्रा का समय और ईंधन की लागत दोनों बढ़ गए हैं। रेटिंग एजेंसी इक्रा लिमिटेड की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट किंजल शाह ने बताया कि पश्चिम एशिया के लिए होने वाला परिचालन भारतीय विमानन उद्योग के कुल राजस्व का 15-20 फीसदी हिस्सा है। आंकड़ों से पता चलता है कि मुख्य भारतीय एयरलाइंस को वित्त वर्ष 2025 में कुल 4,600 करोड़ का नुकसान हुआ। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान स्थिति और भी खराब थी, जब एयरलाइंस को मुख्य रूप से एटीएफ की ऊंची कीमतों और रुपये के अवमूल्यन के कारण लगभग 20 हजार करोड़ का भारी नुकसान हुआ था। वर्ष 2025 में भारत के अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्री यातायात का विवरण (प्रतिशत में)खाड़ी देश – 51 फीसदी, अन्य 48 प्रतिशत– तीन देश – 1 फीसदी- इसमें अजरबैजान, जॉर्डन और तुर्किये शामिल)(स्रोत: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) टॉप-7 अंतरराष्ट्रीय रूट में पांच संघर्षरतगत 14-28 मार्च के दौरान 3,288 अंतराष्ट्रीय विमानों के शेड्यूल विश्लेषण से पता चलता है कि इंडियन एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय बिजनेस पर बहुत ज्यादा दबाव है। शीर्ष सात इंटरनेशनल रूट में से पांच दुबई, अबू धाबी और शारजाह, दोहा और जेद्दा संघर्षग्रस्त हैं। इन्हीं रूट पर इंडियन एयरलाइंस की 1,303 फ्लाइट्स या कुल इंटरनेशनल फ्लाइट्स का 40 फीसदी हिस्सा ऑपरेट होता है। एयरलाइन-वार एनालिसिस से पता चलता है कि एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर और स्पाइसजेट की लगभग 90 फीसदी फ्लाइट्स पश्चिम एशिया से आने-जाने के लिए शेड्यूल थीं, जबकि एयर इंडिया और इंडिगो के लिए यह हिस्सा 22-51 फीसदी था। अंतरराष्ट्रीय रूट से आने-जाने वाली शेड्यूल फ्लाइट्स की संख्या (14-28 मार्च के बीच)रूट संख्यादुबई (यूएई) 498अबुधाबी (यूएई) 256सिंगापुर 193बैंकॉक(थाइलैंड) 190शारजहां (यूएई) 188दोहा (कतर) 187जेद्दा (सऊदी अरब) 174काठमांडू (नेपाल) 141लंदन (ब्रिटेन) 111कोलंबो (श्रीलंका) 90(स्रोत – डीजीसीए) मुख्य भारतीय एयरलाइंस का नुकसान बढ़ रहापिछले साल 11 दिसंबर को संसद में शीर्ष पांच सरकारी और निजी एयरलाइंस के बारे में साझा डेटा से पता चलता है कि मुख्य भारतीय एयरलाइंस (एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर, इंडिगो और स्पाइसजेट) को वित्त वर्ष 2025 में कुल 4,600 करोड़ का नुकसान हुआ। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान स्थिति और भी खराब थी, जब एयरलाइंस को मुख्य रूप से एटीएफ की ऊंची कीमतों और रुपये के अवमूल्यन के कारण लगभग 20 हजार करोड़ का भारी नुकसान हुआ था। मौजूदा समय में भारतीय एयरलाइंस ज्यादातर घाटे में हैं और लगातार आने वाले संकट उन्हें और अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।
Crude Oil के दाम आसमान पर, लागत बढ़ने से तेल कंपनियों का मुनाफा घटा… बढ़ सकती है पेट्रोल-डीजल की कीमत!

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल की कीमतें (Crude Oil Prices) आसमान छू रही हैं। खाड़ी क्षेत्र में जंग शुरू होने के बाद से भारतीय रिफाइनरियों (Indian Refineries) के लिए कच्चे तेल की लागत में 93% का भारी उछाल आया है। शुक्रवार को यह कीमत 136.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जिससे इंडियन ऑयल, एचपीसीएल, बीपीसीएल और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी घरेलू तेल कंपनियों के मुनाफे में भारी गिरावट आई है। लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम अभी नहीं बढ़ रहे हैं। दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है, मुंबई में भी यही स्थिति। ये कीमतें आगे भी कुछ समय के लिए बनी रह सकती हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असरअमेरिका सहित कई देशों ने कच्चे तेल की कीमतों के अनुरूप खुदरा कीमतें बढ़ा दी हैं। अमेरिका में पेट्रोल 3.7 डॉलर प्रति गैलन है। वहीं भारत में तेल कंपनियों ने अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। पिछले कुछ महीनों में मुनाफा कमाने के बाद, अब इन कंपनियों को अपने मार्जिन में नुकसान उठाना पड़ रहा है। राज्य चुनाव बने वजह?सरकार की ओर से 31 मार्च तक कीमतों या करों में कोई बदलाव किए जाने की संभावना नहीं है, ताकि बजट लक्ष्यों के अनुरूप राजकोषीय संतुलन बनाए रखा जा सके। इसके अलावा, चार राज्यों और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों के मद्देनजर, 29 अप्रैल को अंतिम चरण के मतदान तक भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के आसार कम ही हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में 40% से अधिक और रूसी यूराल क्रूड में 50% से अधिक की वृद्धि हुई है। 26 फरवरी को भारतीय बास्केट की कीमत 70.9 डॉलर प्रति बैरल थी। 12 मार्च को यह बढ़कर 127.2 डॉलर हो गई और शुक्रवार को 7.3% उछलकर 136.5 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। संकट का मुख्य कारण: होर्मुज जलडमरूमध्यभारत पिछले कई महीनों से रियायती दर पर रूसी तेल खरीदकर एक लाभदायक स्थिति में था, लेकिन अब उसकी कीमतें भी बढ़ गई हैं। इस वैश्विक कमी का सबसे बड़ा कारण ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करना है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का 20% हिस्सा संभालता है। भारत के लिए इसका असर और भी गंभीर है, क्योंकि देश की कुल प्रसंस्कृत ऊर्जा का 60% हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से आता है। 9 मार्च को ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर के तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने के फैसले के बाद कीमतों में थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन जब तक जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं होती, कीमतें अस्थिर रहने की उम्मीद है। अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभावआर्थिक विशेषज्ञों ने इस संकट के कारण भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य नीलकंठ मिश्रा के अनुसार, यदि कच्चा तेल एक साल तक 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, तो भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ेगा। इससे व्यापार संतुलन को लगभग 80 अरब डॉलर (जीडीपी का 2.1%) का भारी नुकसान हो सकता है। रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) की रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग मार्गों में लंबे समय तक व्यवधान से भारत के वृहद-आर्थिक परिदृश्य पर असर पड़ेगा। कच्चे तेल की औसत कीमत में मात्र 10 डॉलर की वृद्धि से देश का चालू खाता घाटा 30-40 बेसिस पॉइंट बढ़ सकता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने बताया कि इसका असर वैश्विक विकास पर पड़ेगा। उन्होंने रविवार को ‘X’ पर लिखा कि अगर 2026 के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो वैश्विक विकास दर 0.3-0.4 प्रतिशत अंक गिर सकती है और मुख्य मुद्रास्फीति 60 बेसिस पॉइंट बढ़ सकती है।
गौरीघाट की नर्मदा महाआरती में बड़ा बदलाव गंगा आरती मॉडल से बनेगी पारदर्शी फंडिंग व्यवस्था

जबलपुर के गौरीघाट में होने वाली प्रसिद्ध नर्मदा महाआरती की व्यवस्था में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है प्रशासन अब इसकी वित्तीय प्रणाली को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में सक्रिय हो गया है हाल ही में मिली शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है और जांच के बाद आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे प्रशासन का साफ कहना है कि धार्मिक गतिविधियों में किसी तरह का अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा लेकिन यदि फंडिंग और प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है उद्देश्य यह है कि महाआरती से जुड़ी आर्थिक व्यवस्था पारदर्शी हो और आम लोगों का विश्वास मजबूत बना रहे इस सुधार प्रक्रिया में वाराणसी की विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती को मॉडल के रूप में अपनाने की योजना बनाई जा रही है वाराणसी में गंगा आरती का संचालन मुख्य रूप से दान स्थानीय समितियों और श्रद्धालुओं के स्वैच्छिक योगदान से होता है इसके अलावा विशेष अवसरों और VIP बैठने की व्यवस्था के लिए शुल्क भी लिया जाता है जिससे आयोजन के लिए आवश्यक धन जुटाया जाता है वाराणसी के दशाश्वमेघ घाट पर होने वाली आरती में चंदा और बुकिंग की सुव्यवस्थित प्रणाली है जिसे स्थानीय समितियां और पुजारी मिलकर संचालित करते हैं वहीं गंगा सेवा निधि जैसी संस्थाएं पूरे आयोजन के प्रबंधन और वित्तीय संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं जरूरत पड़ने पर घाटों के विकास के लिए सरकारी सहयोग भी लिया जाता है इसी व्यवस्था से प्रेरणा लेते हुए जबलपुर में भी नर्मदा महाआरती के लिए एक संगठित और जवाबदेह तंत्र तैयार करने की योजना है जिससे दान राशि का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके और किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश खत्म हो नर्मदा महाआरती का इतिहास भी काफी दिलचस्प है वर्ष 2012 में इसकी शुरुआत हुई थी जब स्थानीय निवासी सुधीर अग्रवाल और उनकी नर्मदा भक्त मंडली ने 28 जनवरी को पहली बार आरती का आयोजन किया था बाद में 3 फरवरी को इसे भव्य रूप दिया गया शुरुआती आयोजन के दौरान बारिश होने जैसी घटनाएं भी हुईं लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह ने इसे एक बड़े धार्मिक आयोजन में बदल दिया हालांकि हाल के दिनों में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे सवालों पर महाआरती की व्यवस्था देख रहे ओंकार दुबे ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है उनका कहना है कि पूरी व्यवस्था ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही है और जो भी धनराशि प्राप्त होती है उसका बड़ा हिस्सा दैनिक और विशेष आयोजनों में खर्च हो जाता है अब देखना यह होगा कि प्रशासन की जांच और प्रस्तावित सुधारों के बाद नर्मदा महाआरती का प्रबंधन किस तरह से नया स्वरूप लेता है लेकिन इतना तय है कि पारदर्शिता बढ़ने से श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा और यह आयोजन और भी व्यवस्थित रूप में सामने आएगा