कवि सम्मेलन हमारी समृद्ध काव्य परम्पराओं के हैं सजीव संवाहक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत की मिट्टी कवियों की उर्वर भूमि है। काव्य परम्पराओं से हमारी साहित्यिक विरासत हमेशा से ही समृद्ध रही है। कवि सम्मेलन हमारी इन्हीं समृद्ध काव्य परम्पराओं के सजीव संवाहक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार की रात भोपाल के अटल पथ पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देना हमारा ध्येय है। श्रीराम की नगरी को राजधानी से सीधे जोड़ने के लिए हम बहुत जल्द भोपाल से ओरछा तक धार्मिक पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने जा रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में आए सभी कवियों और विभिन्न सामाजिक सेवा समितियों का उनके सेवा प्रकल्पों में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए सभी को पुष्पगुच्छ देकर स्वागत एवं सम्मान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में 7 हजार भाषाएं-बोलियां बोली जाती हैं। सबका समृद्ध साहित्य है। इतनी बड़ी भाषाई विविधता और समृद्धि किसी और देश में देखने को नहीं मिलती। मध्यप्रदेश की धरती पर बाणभट्ट, कालिदास, राजशेखर, पतंजलि, भर्तहरि, अनंगहर्ष, वत्सराज, केशवदास, पद्माकर, बिहारी जैसे रत्न हुए। आज जिस नगरी भोपाल पधारे हैं, वहां के शासक स्वयं सरस्वती पुत्र राजा भोज रहे। राजा भोज स्वयं एक कालजयी कवि, प्रकांड दार्शनिक और अद्वितीय विचारक थे। उनके शासनकाल में ज्ञान और कला का निरंतर अभिषेक होता था। राजा भोज के बारे में एक ऐतिहासिक किंवदंति बहुत प्रसिद्ध है कि उनके शासनकाल में ज्ञान और कला का इतना सम्मान था कि बुनकर भी संस्कृत कविताएं रचते थे। आज फिर से भोज नगरी में सरस्वती पुत्रों का समागम हुआ है, यहाँ सबका स्वागत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कवियों की वाणी ने ही युवाओं में साहित्य के प्रति प्रेम बचाए रखा है। उन्होंने इस आयोजन के सूत्रधार विधायक श्री रामेश्वर शर्मा को बधाई देते हुए कहा कि कर्मश्री संस्था द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आज अपनी रजत जयंती मना रहा है। विगत 25 वर्षों से कवि सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चैत्र प्रतिपदा, गुड़ी पड़वा, उगादि, चैती चांद, नवरेह के मौके पर होने वाला यह आयोजन अनेकता में एकता और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का सजीव उदाहरण है। भले ही हम ये सभी त्योहार विभिन्न नामों से मनाते हैं, लेकिन ये हमारे विविधता संपन्न राष्ट्र के अलग-अलग कोनों में पारंपरिक रूप से नए साल के शुभारंभ के प्रतीक हैं। ये हमें एकता, प्रेम, सद्भाव और समृद्धि का संदेश देते हैं। मुख्यमंत्री ने मंगलकामना करते हुए कहा कि नव संवत्सर सभी के लिए मंगलमय हो। कार्यक्रम को विधायक रामेश्वर शर्मा, प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर मालती राय, कवि दिनेश बावरा, सुदीप भोला, अजय अंजान, कुशल कुशलेन्द्र, सान्या राय सहित रविन्द्र यति, तीरथ सिंह मीणा, राहुल कोठारी, सुमित पचौरी सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे। कार्यक्रम में कुमार विश्वास ने अपने संबोधन में सियासी तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि पहले रामकाल था, जब अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि एक वोट खरीदकर भी सरकार बनती हो, तो ऐसी सरकार को मैं चिमटे से छूना भी पसंद नहीं करूंगा। वह रामकाल था, लेकिन अब मोहन काल और कृष्ण काल है। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि थोड़ी देर के लिए कांग्रेस की सरकार आई थी। कमलनाथ जी बड़े भले आदमी हैं। जैसे-तैसे इस उम्र में उनकी बारात निकली थी। आगे-आगे दिग्विजय सिंह चल रहे थे, लेकिन पीछे के बारातियों को भाजपा वाले अपने साथ ले गए। जब पीछे मुड़कर देखा, तो बारात में गिने-चुने लोग ही बचे थे। हास्य कवि और व्यंग्यकार कुशल कौशलेंद्र ने कवि सम्मेलन के दौरान एक कवि ने कविता पाठ करते-करते समसामयिक मुद्दों पर भी व्यंग्य किया। उन्होंने मोदी-ट्रंप फोन कॉल का जिक्र करते हुए चुटकी ली। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने ट्रंप से शायद यही कहा होगा कि अगली बार उज्जैन में कुंभ लगने जा रहा है, जितना पाप करना है कर लो, यहां आकर दो डुबकी में सब धुल जाएंगे।” इस तंज पर श्रोताओं के बीच हंसी और तालियों का माहौल बन गया। कवि कुशल कुशलेंद्र ने भोपाल में काव्य पाठ के दौरान अपने व्यंग्य और सियासी तंज से माहौल को जीवंत कर दिया। “तालियों की ताल दीजिए” जैसी पंक्तियों के बीच उन्होंने केंद्र की नीतियों पर चुटकी लेते हुए कहा, “हमसे लोग पूछते हैं मोदी जी ने क्या किया, हम कहते हैं रुपयों का बैग छीनकर बोरा थमा दिया, बोरी की डोर तोड़कर डोरी थमा दिया।” उनकी इस टिप्पणी पर श्रोताओं के बीच ठहाके और तालियों की गूंज सुनाई दी। इसके बाद उन्होंने सिंधिया पर कटाक्ष करते हुए कविता सुनाई— “सच को दिखा सकूं मीडिया ही बना दो, रंग ऐसे भरो मुझको इंडिया बना दो, मैं जिस जगह रहूं उस जगह मौज में रहूं, भगवान मुझको आप सिंधिया ही बना दो।” उनकी प्रस्तुति में व्यंग्य, हास्य और राजनीति का मिश्रण नजर आया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। मुंबई से आए कवि दिनेश बावरा ने भोपाल में काव्य पाठ के दौरान अपने खास अंदाज में हास्य और व्यंग्य का तड़का लगाया। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “घर वालों ने कहा था कि जब तक कुछ बन ना जाना, घर मत लौटना… मैं बेशर्म बन गया।” उनकी इस पंक्ति पर श्रोताओं के बीच ठहाके गूंज उठे और माहौल हल्का-फुल्का हो गया। इसके बाद उन्होंने समकालीन जीवन पर तंज कसते हुए कहा कि आज दुनिया को सबसे बड़ा खतरा किसी देश से नहीं, बल्कि मोबाइल से है। उन्होंने कहा, “इस दुनिया को खतरा न चीन, न अमेरिका, न पाकिस्तान और इजराइल से है… आज की तारीख में सबसे ज्यादा खतरा आपकी जेब में रखे मोबाइल से है।” उनकी इस टिप्पणी ने श्रोताओं को सोचने पर भी मजबूर कर दिया। उत्तर प्रदेश के औरैया से आए कवि अजय अंजाम ने मंच से देशभक्ति काव्य पाठ कर श्रोताओं में जोश भर दिया। उन्होंने अपनी ओजपूर्ण पंक्तियों में कहा, “कश्मीर का दर्रा-दर्रा वंदे मातरम बोलेगा, कारतूस का छर्रा-छर्रा वंदे मातरम बोलेगा। जिस दिन भोपाल के बेटे, जिस दिन भारत मां के बेटे अपनी पर आ जाएंगे, इस धरती का जर्रा-जर्रा वंदे मातरम बोलेगा।” उनकी इस प्रस्तुति
भोपालः हिंदू नववर्ष के स्वागत में प्रभात चौराहे पर लहराया विशाल भगवा झंडा, हुई भव्य आतिशबाजी

भोपाल। मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को हिंदू नववर्ष की पूर्व संध्या पर भोपाल के नरेला विधानसभा के प्रभात चौराहे पर आयोजित भव्य आतिशबाजी और देशभक्ति गीतों की संगीतमय प्रस्तुति कार्यक्रम में सम्मिलित होकर विशाल भगवा झंडा लहराया और नागरिकों को हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं दी। मंत्री सारंग ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू नववर्ष केवल एक तिथि परिवर्तन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और नवचेतना का प्रतीक है। यह दिन हमें हमारी सनातन परंपराओं, ऋषि-मुनियों के ज्ञान और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि चैत्र मास से प्रारंभ होने वाला यह नववर्ष सृष्टि के नवसृजन का प्रतीक है, जब प्रकृति स्वयं नवीन रूप में सजती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। सारंग ने कहा कि भारतीय पंचांग पर आधारित यह नववर्ष वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ऋतु परिवर्तन, कृषि चक्र और जीवन के संतुलन से जुड़ा हुआ है। यह पर्व हमें अपने संस्कारों, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को और अधिक प्रबल करने का अवसर प्रदान करता है। राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ मनाएं नववर्षमंत्री सारंग ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि यह नववर्ष केवल उत्सव का अवसर न होकर, एक नई शुरुआत का प्रतीक बने। उन्होंने कहा कि हम सभी को इस पावन अवसर पर सामाजिक समरसता, स्वच्छता, सेवा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। मंत्री सारंग ने आग्रह किया कि हर नागरिक अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने, जरूरतमंदों की सहायता करने, समाज में भाईचारे और एकता को मजबूत करने तथा सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने का संकल्प ले। छोटे-छोटे प्रयास ही मिलकर बड़े परिवर्तन का आधार बनते हैं और यही प्रयास हमारे राष्ट्र को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भव्य आतिशबाजी और देशभक्ति गीतों के साथ हिंदू नववर्ष का स्वागतनववर्ष की पूर्व संध्या पर प्रभात चौराहे पर आकर्षक आतिशबाजी के साथ देशभक्ति गीतों की संगीतमय प्रस्तुति से संपूर्ण वातावरण देशभक्ति और उत्साह से सराबोर हो उठा। रंग-बिरंगी रोशनी से सजा आकाश और देशभक्ति के जोश से भरे गीतों ने हर हृदय में गर्व, उत्साह और नई उमंग का संचार किया। कार्यक्रम में पार्षद सूर्यकांत गुप्ता, अशोक वाणी, राकेश यादव बाबा, विमलेश ठाकुर, प्रदीप शेखावत, मण्डल अध्यक्ष विक्की ठाकुर, नितिन पाठक, संदीप चौकसे सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, कार्यकर्ता सहित बड़ी संख्या में युवा साथी उपस्थित रहे।
मप्र के मुख्यमंत्री से मिले नेशनल डिफेंस कॉलेज का 5 देशों के ऑफिसर्स का प्रशिक्षण दल

भोपाल। भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन नेशनल डिफेंस कॉलेज में ट्रेनिंग ले रहे पांच देशों के ट्रेनी ऑफिसर्स ने मध्य प्रदेश के प्रवास के दौरान बुधवार देर शाम भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर समत्व भवन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर बताया गया कि रक्षा मंत्रालय के मेजर जनरल पवनपाल सिंह एवं समकक्ष कुनाल सत्यार्थी के नेतृत्व में फ्रांस, यूएई, भूटान, नेपाल एवं म्यांमार (बर्मा) का 16 सदस्यीय प्रशिक्षण दल 15 से 20 मार्च तक मध्य प्रदेश प्रवास पर आया हुआ है। गुरुवार, 19 मार्च को यह प्रशिक्षण दल भोपाल जिले के होम स्टे ग्राम खारी सहित उज्जैन एवं इंदौर जिले के प्रवास पर रहेगा। बताया गया कि बीते तीन दिनों में इस दल ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भेंट सहित भोजपुर मंदिर, वन विहार, भीमबैठका गुफाएं, राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, जनजातीय संग्रहालय सहित अन्य स्थलों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षण दल का मध्य प्रदेश की धरती पर स्वागत करते हुए कहा कि आप सब देश के सबसे हरे-भरे एवं घने वन वाले प्रदेश और टाइगर स्टेट में हैं। भोपाल ऐसी जगह है, जहां प्राय: सड़कों पर बाघ घूमता दिखाई दे जाता है। यह मनुष्य और वन्य प्राणियों के साहचर्य जीवन का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भोपाल के बड़े तालाब का निर्माण करीब 1000 साल पहले और श्रीमहाकालेश्वर मंदिर का निर्माण सैकड़ों साल पहले हुआ था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे वन, जंगली वन्य जीवों से भरे पड़े हैं। हमारे यहां 100 से ज्यादा हाथी हैं और 25 मार्च को ही असम से लाए हुए जंगली भैंसे बालाघाट जिले के जंगल में छोड़ने जा रहे हैं। इससे हमारे वन और भी समृद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में 250 से अधिक नदियां बहती हैं। जल की कोई कमी नहीं है और यही कारण है कि मध्य प्रदेश में बेरोजगारी दर देश में सबसे कम (2 प्रतिशत से भी कम) है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े धार्मिक मेले सिंहस्थ : 2028 के आयोजन के लिए हमारी तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। सिंहस्थ के दौरान एक दिन में पांच करोड़ से अधिक श्रद्धालु शिप्रा में स्नान कर पुण्य लाभ ले सकें, हम ऐसे प्रबंधन करने जा रहे हैं। उज्जैन भ्रमण के दौरान प्रशिक्षण दल इन तैयारियों का भी मुआयना करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देशों के बीच इस तरह से मिलने-जुलने का सिलसिला जारी रहना चाहिए। इससे एक-दूसरे के पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षण दल के साथ समूह चित्र भी क्लिक करवाये। इस अवसर पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के संचालक मुजीबुर्रहमान खान एवं प्रशिक्षण संचालक डॉ. अनुपमा रावत सहित ट्रेनी ऑफिसर्स उपस्थित थे।
मप्र में बॉयोमास एग्रीकल्चर वेस्ट से ऊर्जा उत्पादन के लिए 3200 करोड़ निवेश करेगी एसएईएल

भोपाल। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन (ग्रीन एनर्जी प्रोडक्शन) के नामी कंपनी एसएईएल बॉयोमास एग्रीकल्चर वेस्ट से ऊर्जा उत्पादन के लिए मध्य प्रदेश में 3200 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही है। एसएईएल के पदाधिकारियों ने बुधवार देर शाम भोपाल पहुंचकर समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सौजन्य भेंट की। कंपनी पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रदेश में अपनी भावी निवेश योजना की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को एसएईएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर सुखबीर सिंह आवला ने मध्य प्रदेश में बॉयोमास एग्रीकल्चर वेस्ट उर्जा उत्पादन के लिए 3200 करोड़ रुपये निवेश करने का प्रस्ताव दिया। कंपनी के एमडी ने इसके अतिरिक्त भी अन्य संभावनाओं पर खुलकर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कंपनी द्वारा मप्र में निवेश करने की मंशा पर प्रसन्नता जताई और कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर निवेशकों का स्वागत और अभिनंदन है। राज्य सरकार निवेशकों को हर संभव मदद करने को तत्पर है। सौजन्य भेंट के दौरान मप्र के औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह, मप्र औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला, एसएईएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पदाधिकारी इंदरदीप सिंह गिल एवं संदीप सिंह चढ्ढा भी उपस्थित थे।