इच्छामृत्यु से अंगदान तक हरीश राणा की जिंदगी की कहानी अब फिल्म बनेगी.
नई दिल्ली:कभी-कभी जिंदगी ऐसी कहानी लिखती है, जिसे सुनकर हर कोई भीतर तक हिल जाता है. हरीश राणा की कहानी भी ऐसी ही एक दर्दभरी लेकिन साहस से भरी दास्तान है, जिसमें 13 साल का लंबा इंतजार, परिवार का अटूट साथ और अंत में इंसानियत की मिसाल देखने को मिलती है. अब यही कहानी बड़े पर्दे पर आने की तैयारी में है, जिसने पहले ही लोगों के दिलों को छूना शुरू कर दिया है. करीब 13 साल पहले एक हादसे ने हरीश राणा की पूरी जिंदगी बदल दी. वह एक होनहार छात्र थे और सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन रक्षाबंधन के दिन हुए एक हादसे में वह चौथी मंजिल से गिर गए. इस हादसे के बाद डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से जूझ रहे हैं, जिसमें शरीर के चारों अंग काम करना बंद कर देते हैं. एक पल में उनका सक्रिय जीवन पूरी तरह बिस्तर तक सिमट गया. इसके बाद शुरू हुआ दर्द, संघर्ष और उम्मीद का लंबा सफर. परिवार ने कभी हिम्मत नहीं हारी और हर हाल में हरीश के साथ खड़ा रहा. इलाज, देखभाल और उम्मीद के बीच साल दर साल बीतते गए, लेकिन हालत में कोई बड़ा सुधार नहीं आया. आखिरकार परिवार ने कानूनी रास्ता अपनाया और इस मामले को अदालत तक लेकर गए. लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी. यह फैसला जितना संवेदनशील था, उतना ही भावनात्मक भी. इसके बाद उन्हें एम्स दिल्ली के पैलिएटिव केयर वार्ड में शिफ्ट किया गया, जहां उनकी तकलीफ को कम करने के लिए विशेष चिकित्सा प्रक्रिया अपनाई जा रही है. ताकि उन्हें कम से कम दर्द महसूस हो. मेडिकल बोर्ड की निगरानी में हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जा रहा है. इस पूरी कहानी का सबसे भावुक पहलू है परिवार का साहस और उनका बड़ा फैसला. हरीश के पिता अशोक राणा ने अपने बेटे के अंगदान का निर्णय लिया है. यह फैसला न सिर्फ उनके बेटे की पीड़ा को एक अर्थ देता है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा बनता है. इतने सालों तक बेटे को इस हालत में देखना किसी भी माता-पिता के लिए असहनीय होता है, लेकिन उन्होंने हर पल धैर्य और हिम्मत दिखाई. अब इस सच्ची घटना पर फिल्म बनाने की योजना भी सामने आई है. एक राइटर प्रोड्यूसर ने इस कहानी को बड़े पर्दे पर लाने की इच्छा जताई है और इसके लिए बातचीत भी शुरू हो चुकी है. हालांकि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल जल्दबाजी नहीं की जा रही है. हरीश राणा की कहानी सिर्फ दर्द और अंत की कहानी नहीं है, बल्कि यह प्यार, त्याग और इंसानियत की गहराई को भी दर्शाती है. जब यह कहानी बड़े पर्दे पर आएगी, तो शायद हर दर्शक के दिल में कई सवाल और भावनाएं छोड़ जाएगी. यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि मुश्किल हालात में भी इंसानियत और संवेदनशीलता सबसे बड़ी ताकत होती है.
चैत्र नवरात्र: पालकी पर आगमन, हाथी पर प्रस्थान, जानें क्या संकेत दे रहा है समय

नई दिल्ली। देशभर में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से हो चुका है और श्रद्धालु माँ भवानी के नौ रूपों की आराधना में जुटे हैं। नवरात्रि न केवल हिंदू नववर्ष का प्रतीक है, बल्कि देवी के आगमन और प्रस्थान की सवारी भविष्य के शुभ-अशुभ संकेतों का मार्गदर्शन भी करती है। इस वर्ष मां जगदंबा का आगमन गुरुवार को पालकी पर हुआ, जबकि प्रस्थान शुक्रवार को हाथी पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, पालकी पर आगमन सामान्यतः शुभ नहीं माना जाता। यह प्राकृतिक आपदाओं, सामाजिक उपद्रव, दंगे या आर्थिक चुनौतियों का संकेत दे सकता है। गुरुवार को आगमन से जुड़े संकेतों को सावधानी और वित्तीय सतर्कता से जोड़ा जा रहा है। वहीं, प्रस्थान का समय और सवारी विशेष महत्व रखते हैं। शुक्रवार को मां का हाथी पर प्रस्थान शुभ माना गया है। हाथी स्थिरता, सुख-संपत्ति और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। इसका अर्थ है कि आने वाला समय अप्रिय घटनाओं के साथ-साथ जीवन में स्थिरता और अवसर भी लाएगा। शास्त्रों के अनुसार वार दिन और सवारी का तालमेल भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है। उदाहरण के लिए: रविवार और सोमवार को प्रस्थान – भैंसे की सवारी- रोग, शोक, अशुभता। मंगलवार और शनिवार को प्रस्थान – मुर्गा की सवारी – महामारी और जनहानि। बुधवार और शुक्रवार को प्रस्थान – हाथी की सवारी – सुख, समृद्धि और स्थिरता। गुरुवार को प्रस्थान – मानव पर सवार – भक्त पर विशेष कृपा और जीवन में संतुलन। इस साल आगमन पालकी पर और प्रस्थान हाथी पर होने से मिश्रित संकेत मिलते हैं। आगमन से सावधानी और चुनौतियों की चेतावनी मिलती है, जबकि प्रस्थान सुख-समृद्धि और स्थिरता की संभावना दर्शाता है। ऐसे में यह समय जीवन में सतर्क रहकर अवसरों का लाभ उठाने का प्रतीक है। पिछले वर्ष शारदीय नवरात्रि में मां का आगमन हाथी पर हुआ था और प्रस्थान भक्तों के कंधे पर हुआ था। यह दोनों ही शुभ संकेतों का प्रतीक थे। इस वर्ष के संकेत कुछ मिश्रित हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार सावधानी के साथ श्रद्धा और कर्म से जीवन में संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
जोमैटो यूज़र्स के लिए अपडेट, प्रति ऑर्डर शुल्क हुआ बढ़कर लगभग 15 रुपए

नई दिल्ली। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने अपने प्लेटफॉर्म फीस में 19.2 प्रतिशत यानी 2.40 रुपये प्रति ऑर्डर की बढ़ोतरी कर दी है। ऐप के लेटेस्ट बिलिंग डेटा के अनुसार, अब प्लेटफॉर्म फीस 14.90 रुपये प्रति ऑर्डर होगी, जो पहले 12.50 रुपये थी। फीस बढ़ोतरी के पीछे कारणप्लेटफॉर्म फीस में यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है जब एलपीजी की प्लेटफॉर्म में पहुंचा हुआ है, जिससे रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी कंपनियों की लागत बढ़ेगी है। जोमैटो ने यह कदम यूनिट इकोनॉमिक्स और मार्जिन सुधार के उद्देश्य से उठाया है, ताकि बढ़ती परिचालन लागतों के बीच संचालन को स्थिर रखा जा सके। फीस बढ़ोतरी का इतिहासजोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस में आखिरी बार सितंबर 2025 में बदलाव किया था। इससे पहले, फरवरी 2025 में त्योहारी सीजन के दौरान यह फीस 6 रुपये प्रति ऑर्डर से बढ़कर 10 रुपये कर दिया गया था। अगस्त 2023 में कंपनी ने प्रति ऑर्डर 2 रुपये का प्लेटफॉर्म फीस लागू किया था, जिसे बाद में प्रमुख बाजारों में धीरे-धीरे बढ़ाया गया। प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलनाप्रतिद्वंद्वी कंपनी स्विगी वर्तमान में कर सहित 14.99 रुपए प्रति ऑर्डर प्लेटफॉर्म फीस ले रही है। इसका मतलब है कि जोमैटो और स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस अब लगभग बराबर हो गई है। शेयर बाजार में असरजोमैटो की पेरेंट कंपनी इटरनल के शेयर शुक्रवार को 1.55 प्रतिशत यानी 3.55 रुपए की तेजी के साथ 232.29 रुपए पर बंद हुए। दिन के दौरान शेयर ने 236.70 रुपए का सर्वोच्च स्तर और 230.10 रुपए का न्यूनतम स्तर जारी किया। वित्तीय प्रदर्शनदिसंबर तिमाही के बढ़ोतरी में कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रेशर इंडेक्स आधार पर 72.88 प्रतिशत बढ़कर 102 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल समान अवधि में 59 करोड़ रुपए था। इसी दौरान कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू करीब तीन गुना बढ़कर 16,315 करोड़ रुपए हो गया, जो कि एक साल पहले समान अवधि में 5,405 करोड़ रुपए था। ब्रांडिंग और भविष्य की योजनामार्च 2025 में जोमैटो ने अपने आपको इटरनल के नाम से रीब्रांड किया था। प्लेटफॉर्म फीस में यह बढ़ोतरी कंपनी की लॉन्ग-टर्म बढ़ोतरी और स्टेबिलिटी सुनिश्चित करने की स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। बढ़ती ऑपरेटिंग कॉस्ट और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म भविष्य में भी अपनी प्राइस स्ट्रक्चर और फीस मॉडल में बदलाव कर सकते हैं।
रणवीर सिंह की धुरंधर 2 को मिला साउथ का सपोर्ट महेश बाबू और जूनियर एनटीआर ने कही बड़ी बात

नई दिल्ली:फिल्म धुरंधर 2 द रिवेंज इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है और रिलीज के साथ ही चर्चा का बड़ा विषय बन गई है. जहां एक तरफ फिल्म ने शानदार कमाई करते हुए भारत में 139 करोड़ से ज्यादा का आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं वर्ल्डवाइड कलेक्शन भी तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि फिल्म को दर्शकों से मिले-जुले रिव्यू मिल रहे हैं, लेकिन साउथ फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारों ने इसे लेकर खुलकर तारीफ की है. सुपरस्टार महेश बाबू ने सोशल मीडिया पर फिल्म की सराहना करते हुए इसे एक शानदार सिनेमैटिक अनुभव बताया. उन्होंने खासतौर पर रणवीर सिंह की परफॉर्मेंस की तारीफ की और कहा कि यह उनका अब तक का सबसे बेहतरीन अवतार है. इसके साथ ही उन्होंने फिल्म के निर्देशक आदित्य धर की भी जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने हर फ्रेम को परफेक्शन के साथ पेश किया है. महेश बाबू ने फिल्म के म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर को भी खास बताया, जिससे फिल्म का इमोशनल और एक्शन प्रभाव और मजबूत हुआ. वहीं दूसरी ओर जूनियर एनटीआर ने भी फिल्म को लेकर लंबा चौड़ा रिएक्शन शेयर किया. उन्होंने पूरी टीम की तारीफ करते हुए कहा कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा के लिए एक दमदार पेशकश है. जूनियर एनटीआर ने रणवीर सिंह की एक्टिंग को शानदार बताया और कहा कि उन्होंने स्क्रीन पर एक अलग ही स्तर की परफॉर्मेंस दी है. उन्होंने आगे आर माधवन, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल के अभिनय की भी सराहना की और कहा कि सभी कलाकारों ने अपने किरदारों को पूरी गहराई और मजबूती के साथ निभाया है. खासतौर पर फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर शाश्वत सचदेव के काम को उन्होंने अलग ही स्तर का बताया, जिसने हर सीन को और ज्यादा प्रभावी बना दिया. जूनियर एनटीआर ने एक अलग पोस्ट में अक्षय खन्ना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इस फ्रेंचाइजी की मजबूत नींव रखी थी. पार्ट 1 में उनका शांत लेकिन खतरनाक अंदाज आज भी यादगार है और उनकी परफॉर्मेंस ने फिल्म को एक अलग पहचान दी थी. फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त चर्चा हो रही है. जहां एक तरफ फैंस अपने पसंदीदा सितारों की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि रिलीज के पहले ही दिन दोनों साउथ सुपरस्टार्स ने फिल्म कैसे देख ली. इस पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिसमें कुछ लोग मजाक कर रहे हैं तो कुछ इसे प्रमोशन का हिस्सा बता रहे हैं. धुरंधर 2 द रिवेंज ने रिलीज के साथ ही एक बड़ा माहौल बना दिया है. फिल्म की कमाई, स्टार पावर और बड़े सितारों की तारीफ ने इसे और भी चर्चा में ला दिया है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितनी दूर तक जाती है और दर्शकों के दिलों में कितनी गहरी छाप छोड़ पाती है.
Chaitra Navratri 2026: उज्जैन के महाकाल वन क्षेत्र में मां हरसिद्धि मंदिर माता सती की कोहनी से लेकर 51 शक्तिपीठों की महिमा तक

उज्जैन। सप्तपुरियों में स्थित प्राचीन धर्म नगरी उज्जैन में मां हरसिद्धि मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। कहा जाता है कि इसी स्थल पर देवी सती का दाहिना हाथ कोहनी का अंश गिरा था, जिससे यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। मंदिर का स्थान और विशेषताएँ स्थान: महाकाल वन क्षेत्र, रुद्रसागर के किनारे मुख्य आकर्षण: 51 फीट ऊँचे दो दीप स्तंभ, जिन पर प्रतिदिन संध्या समय दीप प्रज्वलित होते हैं धार्मिक महत्व: यह स्थल तंत्र साधना और महालक्ष्मी-महासरस्वती के संयुक्त स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है सम्राट विक्रमादित्य और माता हरसिद्धि सम्राट विक्रमादित्य माता हरसिद्धि के अनन्य भक्त थे। उन्होंने अपनी कृपा प्राप्त करने हेतु 11 बार अपने मस्तक की बलि दी, जो हर बार पुनः जुड़ गया। 12वीं बार जब सिर नहीं जुड़ा, माना गया कि उनका शासन सम्पूर्ण हुआ। इस स्थान को परमार वंशीय राजाओं की कुलदेवी का स्थान भी कहा जाता है। मंदिर के पीछे सिरसिन्दूर चढ़े हुए रखे हैं, जिन्हें विक्रमादित्य के सिर के रूप में जाना जाता है। देवी हरसिद्धि का नामकरण और दैत्य वध कीवदंति अनुसार, उज्जैन की रक्षा के लिए कई देवीयाँ तैनात हैं, जिनमें हरसिद्धि देवी प्रमुख हैं। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, दैत्य चण्ड और मुण्ड कैलाश पर कब्जा करने आए। शिवजी के आदेश पर देवी चंडी ने उनका वध किया। शंकरजी ने प्रसन्न होकर कहा कि आपने दुष्टों का वध किया, इसलिए आपका नाम हरसिद्धि से प्रसिद्ध होगा। शक्तिपीठ का महत्व उज्जैन स्थित माता हरसिद्धि शक्तिपीठ में माता सती की दाहिनी कोहनी गिरने के कारण यह स्थान प्रमुख माना जाता है।यह शक्तिपीठ भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से खंडित सती से संबंधित है और श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र है।
गर्मियों में सूरज की तीखी धूप से जलती त्वचा? अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय

नई दिल्ली। गर्मी में महिलाओं को अक्सर कई प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है उसमें से एक है स्क्रीन। आप कितना भी स्क्रीन केयर कर लें लेकिन गर्मी में इसमें कई बदलाव देखने को मिलते हैं। कई लोगों को बाहर निकलते ही त्वचा में जलन, लालपन और टैनिंग की समस्या होने लगती है।तो चलिए इसके लिए कुछ उपाय जानते हैं। इस प्रकार गर्मी में स्क्रीन का ध्यानगर्मी शुरू होते ही स्क्रीन पर काफी प्रभाव पड़ता है जिसके कारण आपकी त्वचा से निखार दूर जाने लगता है। ऐसे में ये जरूरी है कि, गर्मियों में अपनी त्वचा की खास देखभाल की जाए। कुछ आसान और रोजाना अपनाए जाने वाले स्किन केयर टिप्स आपकी त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रख सकते हैं। सनस्क्रीन लगाना हमेशा रखें यादगर्मी में घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना बहुत जरूरी होता है। तेज धूप में मौजूद यूवी किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए बाहर जाने से करीब 20 मिनट पहले एसपीएफ 30 या उससे ज्यादा वाली सनस्क्रीन जरूर लगाएं। त्वचा को रखें हाइड्रेटेडगर्मी में शरीर के साथ-साथ त्वचा को भी हाइड्रेशन की जरूरत होती है। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। इससे शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और त्वचा भी फ्रेश और ग्लोइंग नजर आती है। अगर यह आप बरकरार रखती हैं तो आपकी त्वचा में हमेशा निखार और ग्लो बना रहेगा। दिन में दो-तीन बार धोने फेसबाहर कई प्रकार की धूल,मिट्टी गर्म हवाएं और पसीना आपके चेहरे को खराब कर देती है।इसलिए सुबह और रात को चेहरे को अच्छे फेसवॉश से साफ करना चाहिए। इससे स्किन साफ रहती है और पिंपल्स की समस्या भी कम होती है। धूप से बचाव करेंतेज धूप में बाहर निकलते समय छाता, टोपी या स्कार्फ का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे त्वचा सीधे धूप के संपर्क में आने से बच जाती है और टैनिंग की समस्या भी कम होती है।
चेटीचंड पर्व अखंड भारत की याद दिलाता है, हृदय में जागृत रखता है अखंड भारत का सपना: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल । भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के टावर चौक पर चेटीचंड महापर्व पर आयोजित सिंधी समाज के चल समारोह का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि चेटीचंड का पर्व न केवल धार्मिक और सामाजिक उत्सव है, बल्कि यह अखंड भारत की स्मृति दिलाकर भारतीयों के हृदय में अखंड भारत का सपना जागृत रखता है। सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक उत्सवों से लोगों में आपसी प्रेम और आत्मीयता बढ़ती है। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य को उनकी वीरता, न्यायप्रियता और दानशीलता के लिए याद किया और कहा कि शासन इन्हीं गुणों से प्रेरित होकर सुशासन के नए आयाम स्थापित कर रहा है।विकास और सिंहस्थ-2028 की तैयारी विक्रम संवत 2083 में बाबा श्री महाकाल की नगरी से देश और प्रदेशवासियों को चेटीचंड की मंगलकामनाएं दी गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत सरकार उज्जैन में विकास कार्य कर रही है, जिससे प्रदेश और उज्जैन को वैश्विक पहचान मिलेगी। चल समारोह का विवरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवा ध्वज लहराकर समारोह का शुभारंभ किया। रैली में उपस्थित गणमान्य अतिथियों में शामिल थे: राज्यसभा सांसद और अभिनेत्री सुश्री जयाप्रदा अभिनेता श्री आफताब शिवदासानी तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम गोली सांसद श्री अनिल फिरोजिया, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर श्री मुकेश टटवाल अन्य गणमान्यजन और सिंधी समाज के अनेक सदस्य चेटीचंड महापर्व ने उज्जैन में धार्मिक आस्था, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक गौरव का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे अखंड भारत की स्मृति और सामाजिक प्रेम का प्रतीक बताया और उज्जैन को आगामी सिंहस्थ-2028 के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित बनाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
बिना UPSC पास किए भी बन पाएंगे IAS अधिकारी, जानिए कैसे होगा ये संभव?
नई दिल्ली देश में बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं जो देश सेवा के लिए UPSC का रास्ता चुनते हैं और दिन रात एक करने पढ़ने के बाद IAS नियुक्त होते हैं। हालांकि बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि बिना UPSC पास किए भी IAS की पदवी हासिल की जा सकती है। कई सरकारी अधिकारी अपने अनुभव और काम के आधार पर प्रमोशन के जरिए भी IAS कैडर में शामिल हो सकते हैं। हालांकि यह सुनने में जितना आसान लग रहा है उससे कहीं ज्यादा मुश्किल काम है। इसके लिए कई शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। बिना UPSC कैसे बनें IAS?बहुत सीमित मात्रा में लोग जानते हैं कि स्टेट सिविल सर्विस के अधिकारी भी बिना यूपीएससी पास किए IAS बनने का सपना पूरा कर सकते हैं। यह सफर PCS से शुरु होता है जो IAS तक पहुंचती है। उत्तर प्रदेश में UP PCS,मध्य प्रदेश में State Administrative Service,अन्य राज्यों में भी इसी तरह की प्रशासनिक सेवाएं होती हैं, इन सेवाओं में चयनित अधिकारी शुरुआत में SDM, डिप्टी कलेक्टर जैसे पदों पर काम करते हैं और जिलों में प्रशासनिक अनुभव हासिल करते हैं। राज्य के सिविल सर्विस अधिकारी कब बन सकते हैं IAS?राज्य के जो सिविल सर्विस अधिकारी 10 से 12 साल तक अपनी सेवा पूरी कर लेते हैं तो वह प्रमोशन के लिए पात्र हो जाते हैं। हालांकि इसके लिए एक कड़ी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके लिए कई जरूरी शर्तें होती हैं और पूरी प्रक्रिया नियमानुसार होती है। PCS से IAS बनने के लिए इस बिंदुओं को ध्यान में रखा जाता है। अधिकारी का काम और प्रदर्शन अच्छा होना चाहिए।सेवा रिकॉर्ड मजबूत होना चाहिए।IAS कैडर में खाली पद होना जरूरी है।राज्य सरकार की सिफारिश महत्वपूर्ण होती है।इन सभी चीजों के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया शुरू होती है।हालांकि, IAS प्रमोशन का फैसला चयन समिति करती है। इस समिति में आमतौर पर राज्य के मुख्य सचिव ,वरिष्ठ IAS अधिकारी,UPSC का प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
DATIYA RAPE CASE: घर छोड़ने के बनाए युवती के साथ दुष्कर्म, आरोपी के खिलाफ POSCO एक्ट के तहत मामला दर्ज

HIGHLIGHTS: • घटना 27 नवंबर 2025 को बड़ौनी के पास जंगल में हुई • आरोपी ने बच्चे को बहाना बनाकर महिला को अलग-थलग किया • परिवार को मारने की धमकी से तीन महीने चुप रही पीड़िता • हालिया उत्पीड़न के बाद गुरुवार को दर्ज हुई शिकायत • दुष्कर्म और POCSO धाराओं में केस, जांच तेज DATIYA RAPE CASE: ग्वालियर। दतिया के जिगना पुलिस थाना क्षेत्र के एक गांव में 22 वर्षीय विवाहित महिला ने स्थानीय युवक पर जबरन दुष्कर्म करने और पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। बता दें कि पीड़िता ने गुरुवार को थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने रात में ही मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस पर रेखांकित किया: आनंद धन से नहीं, अंतस से आता है मायके से लौटते समय हुआ हादसा पीड़िता ने बताया कि करीब चार महीने पहले पति से विवाद के बाद वह मायके चली गई थीं। 27 नवंबर 2025 को बीमार बच्चे की दवा दिलाने वह बड़ौनी आई थीं। इसी दौरान गांव का एक युवक आया और घर छोड़ने के बहाने मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले गया। टी20 सीरीज में न्यूज़ीलैंड का दबदबा, तीसरे मैच में SA को दी 8 विकेट से मात जंगल में बच्चे को बनाया बंधक आरोप है कि रास्ते में फॉरेस्ट क्षेत्र के पास आरोपी ने बाइक रोकी। बच्चे को शौच के बहाने झाड़ियों में ले गया और फिर महिला को जबरदस्ती खींचकर अंदर ले गया। वहां बच्चे को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपी ने उसे बड़ौनी टैक्सी स्टैंड पर छोड़ दिया और किसी को बताने पर पूरे परिवार को मार डालने की धमकी दी। “पंजाब किंग्स को चैंपियन बनाना मेरा लक्ष्य”: सूर्यांश शेडगे का आत्मविश्वासी बयान डर के साये में तीन महीने चुप रही डर के कारण पीड़िता ने लंबे समय तक किसी को कुछ नहीं बताया। हाल ही में आरोपी द्वारा फिर से परेशान करने और पीछा करने पर उसने हिम्मत जुटाई, पति और परिजनों को पूरी घटना बताई और गुरुवार को जिगना थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। चैत्र नवरात्रि 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र पुलिस ने तेज की कार्रवाई पुलिस ने दुष्कर्म, आपराधिक धमकी और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, आरोपी की पहचान हो चुकी है। टीम गठित कर उसे गिरफ्तार करने की कोशिश की जारी है। साथ ही मेडिकल जांच और फॉरेंसिक सबूत जुटाए जा रहे हैं।
सिंहस्थ-2028 में दुनिया देखेगी सनातन संस्कृति का वैभव: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के राम घाट पर आयोजित विक्रमोत्सव-2026 और गुड़ी पड़वा सृष्टि आरंभ उत्सव के अवसर पर कहा कि उज्जैन का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व विश्व स्तर पर अनोखा है। उन्होंने कहा कि आगामी सिंहस्थ-2028 में पूरी दुनिया सनातन संस्कृति के वैभव को देखेगी।उज्जैन का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व उज्जैन प्राचीन अवंतिका और उज्जयिनी के नाम से विख्यात 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर का धाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन का पावन शिप्रा तट और यह नगरी जीवन में आस्था और आध्यात्मिक संबल देती है। उन्होंने महान सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा का उल्लेख किया जिनके 32 पुतलियों वाले सिंहासन नवरत्नों की विद्वता और वीरता आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं। सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ उज्जैन के सभी मार्गों को फोरलेन और सिक्सलेन बनाया जा रहा है। मां शिप्रा के तट पर लगभग 30 किलोमीटर लंबे नवीन घाट विकसित किए जा रहे हैं। शहर को व्यापार और उद्योग के दृष्टिकोण से भी विकसित किया जा रहा है विक्रम उद्योगपुरी मेडिकल डिवाइस पार्क 12,500 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र और अतिरिक्त 5,000 एकड़ में नया पार्क तैयार। नए एयरपोर्ट और हेलीकॉप्टर सेवाओं से तीर्थाटन को नई ऊंचाई देने का प्रयास। सृष्टि आरंभ उत्सव की भव्य झलक कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पार्श्व गायक श्री विशाल मिश्रा के संगीत से हुई। भव्य ड्रोन-शो लेजर-शो और आतिशबाजी ने शिप्रा तट के आकाश को रोशनी और रंगों से भर दिया। उत्सव ने आस्था संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। साहित्य और ज्ञान का विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ का विक्रम पंचांग 2083 संस्कृति संचालनालय का कला पंचांग विभिन्न ग्रंथों और मोनोग्राफ का विमोचन किया। विमोचित ग्रंथों में अष्टावक्र गीता नारद गीता ब्राह्मण गीता गर्भ गीता समेत महर्षियों और वीर भारत न्यास के विभिन्न ग्रंथ शामिल थे। राष्ट्रीय और स्थानीय गणमान्यजन उपस्थित राज्यसभा सांसद श्री बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा महापौर श्री मुकेश टटवाल नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव शोधपीठ निदेशक डॉ. श्रीराम तिवारी और अन्य गणमान्यजन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन को धार्मिक सांस्कृतिक औद्योगिक और वैश्विक पहचान का केंद्र बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों का विवरण दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिंहस्थ-2028 में दुनिया सनातन संस्कृति के वैभव और उज्जैन की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देखेगी।