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नवरात्रि स्पेशल: व्रत की थाली में शामिल करें ये सुपरफूड्स, नहीं होगी कमजोरी

नई दिल्ली नवरात्रि के पावन पर्व में व्रत रखना सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि शरीर और मन को बनाए रखने का भी एक तरीका है। ऐसे में सही खान-पान बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि पूरे दिन ऊर्जा बनी रहे और कमजोरी महसूस न हो। व्रत की थाली में ये चीजें जरूर शामिल करेंव्रत के दौरान प्रभाव, सुपाच्य और मोनसायटिक भोजन लेना चाहिए। थाली में मखाना, साबूदाना, कुट्टू और समुद्री फल जरूर शामिल करें। ये सभी शरीर को आवश्यक पोषक तत्व देते हैं और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं। मखाना: परमाणु बम का सबसे अच्छा विकल्पमखाना लो कैलोरी और हाई चॉकलेट वप्रोटीन से भरपूर होती है। इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम भी पाए जाते हैं, जो शरीर को ताकत देते हैं। इसे भूनकर या खेडगेरे का खजाना पाया जा सकता है। यह ब्लड डीवीडी कंट्रोलर और किडनी को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। साबूदाना: तत्काल ऊर्जा का स्रोतसाबूदाना कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। यह प्रभाव और आसानी से पचने वाला होता है। इसे वड़ा या खेड के रूप में खाया जाता है। बेहतर पोषण के लिए इसे दही या मूंगफली के साथ लेना खतरनाक होता है। कुट्टू: लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखेंकुट्टू का आटा प्रोटीन, आयरन और विविधता से भरपूर होता है। यह ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है और लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराता है। कुट्टू की रोटी, पूरी या चीला व्रत में अच्छे विकल्प हैं। चमत्कारी फल: ताजगी और इम्युनिटी का खजानासेब, केला, सेंट्रा और अनार जैसे फलों को विटामिन और वस्तुएं दी जाती हैं। ये शरीर को बनाए रखते हैं, डिटॉक्स करते हैं और इम्युनिटी को मजबूत बनाते हैं। ध्यान में क्या रखें?व्रत के दौरान अधिकतर ताला-भुना खाने से अर्थव्यवस्था और पानी का ठहराव होता है। श्रेणी आहार लेने से शरीर पर प्रभाव, मन शांत और ऊर्जा संरक्षित रहता है।

FOOD SAFETY TEAM RAID : फूड सेफ्टी टीम की नकली दूध पर छापेमारी; सामने ही साबुत नष्ट करने की कोशी, विधायक को फ़ोन लगाने की धमकी

BHIND MILK FACTORY

HIGHLIGHTS: डेयरी संचालक ने फूड सेफ्टी टीम के सामने ही संदिग्ध केमिकल नष्ट किया। नकली दूध की आशंका पर टीम पहुंची थी। संचालक ने अपने साथी से विधायक को फोन लगाने को कहा। डेयरी का लाइसेंस केवल 500 लीटर दूध ट्रांसपोर्टिंग का था। पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई और सख्त कार्रवाई नहीं हुई। FOOD SAFETY TEAM RAID : भिंड। अटेर रोड स्थित मुकेश शिवहरे की डेयरी पर फूड सेफ्टी टीम की बड़ी छापेमारी सामने आयी है। सूचना थी कि डेयरी में केमिकल मिलाकर नकली दूध तैयार किया जा रहा है। लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही संचालक सतर्क नजर आया और संदिग्ध केमिकल पानी में उड़ा दिया। नासिक में बाबा ने ‘ज्योतिष’ की आड़ में कई महिलाओं से किया दुष्‍कर्म, आरोपी गिरफ्तार सैंपल लेने से पहले सबूत नष्ट जांच के दौरान टीम ने पुराने दूध टैंकर में तीन कंटेनरों में संदिग्ध तरल पाया। जैसे ही टीम सैंपल लेने की तैयारी कर रही थी, संचालक ने केमिकल को पास भरे पानी में डालकर नष्ट कर दिया। पहले वह इसे रिफाइंड ड़ालडा बताता रहा, लेकिन नष्ट करने से शक और गहरा गया। लेबनान में लाइव रिपोर्टिंग के दौरान धमाका, पत्रकार के पीछे गिरी इजरायली मिसाइल; दो घायल अधिकारियों के न पहुंचने से उठे सवाल कार्रवाई के दौरान संचालक ने अफसरों को धमकाने की कोशिश की और अपने साथी से विधायक को फोन लगाने को कहा। हालांकि संपर्क नहीं हो सका। संचालक के पास केवल 500 लीटर दूध ट्रांसपोर्टिंग का लाइसेंस था, जबकि डेयरी इसी आधार पर चल रही थी। फाइबर का पावरहाउस कटहल, गर्मियों में सेहत और दिल दोनों का रखे ख्याल ढुलमुल कार्यशैली पर सवाल फूड सेफ्टी टीम के सामने सबूत नष्ट होने और धमकाने के बावजूद पुलिस में कोई शिकायत नहीं दर्ज की गई और कोई ठोस कानूनी कदम नहीं उठाया गया। टीम की यह ढुलमुल कार्यशैली पूरे सिस्टम की गंभीरता पर सवाल खड़े कर रही है। रिपोर्ट का दावा, अपस्ट्रीम ऑयल और सर्विस कंपनियों को मिल सकता है बड़ा बूस्ट रिपोर्ट का इंतजार दल प्रभारी अवनीश गुप्ता का कहना है कि वे मौके पर नहीं थे, लेकिन पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार की जा रही है और आगे कार्रवाई की जाएगी।

नासिक में बाबा ने ‘ज्योतिष’ की आड़ में कई महिलाओं से किया दुष्‍कर्म, आरोपी गिरफ्तार

नासिक। महाराष्ट्र के नासिक से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आध्यात्मिकता और ज्योतिष के नाम पर महिलाओं के साथ कथित यौन शोषण किए जाने का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में 67 वर्षीय ज्योतिषी अशोक खरात को गिरफ्तार किया है, जिस पर 35 वर्षीय महिला के साथ बार-बार दुष्कर्म करने का आरोप है। पीड़िता के मुताबिक, आरोपी ने अनुष्ठान के बहाने उसे अपने पास बुलाया, नशीला पदार्थ पिलाया और सम्मोहित कर उसकी आस्था का फायदा उठाते हुए यौन उत्पीड़न किया। जांच में यह भी सामने आया है कि यह मामला केवल एक महिला तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य महिलाओं के साथ भी इसी तरह की वारदातें की गईं। एफआईआर के अनुसार, अशोक खरात खुद को ‘कैप्टन’ बताता था और मर्चेंट नेवी से सेवानिवृत्त होने का दावा करता था। वह महिलाओं को उनकी व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याओं के समाधान का झांसा देकर अपने कार्यालय में बुलाता था। वहां पहुंचने के बाद उन्हें नशीला पदार्थ देकर काबू में कर लिया जाता था और फिर डर तथा अंधविश्वास का सहारा लेकर उनका शोषण किया जाता था। आरोपी महिलाओं को उनके पतियों की मौत या तंत्र-मंत्र से जुड़े भय दिखाकर चुप रहने के लिए मजबूर करता था। जांच एजेंसियों को आरोपी के ठिकाने से एक पेन ड्राइव बरामद हुई है, जिसमें कथित तौर पर 58 महिलाओं से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो क्लिप मिले हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह एक सुनियोजित और लंबे समय से चल रहा अपराध हो सकता है। आरोपी नासिक के पॉश कैनेडा कॉर्नर इलाके में ‘ओकस प्रॉपर्टी डीलर्स एंड डेवलपर्स’ के नाम से कार्यालय चलाता था, लेकिन पुलिस के अनुसार वहां असल में आपराधिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। उसने समाज में खुद को एक प्रभावशाली ज्योतिषी और ‘दैवीय शक्तियों’ के जानकार के रूप में स्थापित कर रखा था। मीरगांव में उसके पास ईशान्येश्वर मंदिर और एक आलीशान विश्राम गृह भी है, जहां कथित तौर पर प्रभावशाली लोग आते-जाते थे। सिन्नर स्थित श्री ईशान्येश्वर मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में भी उसकी पहचान थी और कई राजनेताओं, व्यवसायियों तथा अन्य चर्चित लोगों से उसके संबंध होने की चर्चा है। गिरफ्तारी का नाटकीय घटनाक्रमपुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए बेहद गोपनीय अभियान चलाया। जानकारी लीक न हो, इसके लिए टीम ने रात के अंधेरे में ‘चोर-चोर’ का शोर मचाकर उसके फार्महाउस के बाहर अफरा-तफरी पैदा की और इसी दौरान घर में घुसकर उसे शयनकक्ष से गिरफ्तार कर लिया। छापेमारी के दौरान फार्महाउस से एक पिस्तौल, जिंदा कारतूस और कई खाली खोखे बरामद हुए। इसके अलावा मंदिर और आश्रम में भी तलाशी ली गई, जहां से कई संदिग्ध दस्तावेज मिले हैं। पुलिस अब आरोपी की अन्य संपत्तियों और नेटवर्क की भी जांच कर रही है। एसआईटी गठित, जांच जारीमामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने आईपीएस अधिकारी तेजस्विनी सतपुते के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। नासिक क्राइम ब्रांच की टीम बरामद वीडियो और दस्तावेजों की विस्तृत जांच में जुटी है। राजनीतिक बयानबाजी तेजघटना सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी शुरू हो गई है। उद्धव ठाकरे गुट की नेता सुषमा अंधारे ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिलाओं का शोषण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और सरकार को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं तथा कितनी महिलाएं इसका शिकार बनीं।

उत्तर कोरियाः ‘सुप्रीम पीपल्स असेंबली’ के चुनाव में किम जोंग उन की पार्टी के सभी सदस्य जीते

नई दिल्ली। उत्तर कोरिया के चुनाव में मौजूदा तानाशाह किम जोंग उन की जीत हो गई है। अब आप में से कुछ लोग इस सोच में पड़ गए होंगे कि क्या उत्तर कोरिया में कोई चुनाव भी होता है? और अगर चुनाव होता भी है, तो क्या लोगों के पास किम जोंग को चुनने के अलावा दूसरा विकल्प भी होता है? दूसरा विकल्प हो भी तो क्या किम जोंग के राज में कोई शख्स उनके अलावा किसी और को वोट देने की गुस्ताखी कर सकता है! इंटरनेट पर हाल ही में यह इलेक्शन और इसके नतीजे पर लोग मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। इससे पहले कोरिया की सरकारी मीडिया आउटलेट KCNA ने बताया कि किम जोंग उन ने एक और बड़ी चुनावी जीत हासिल की है। उनकी ‘वर्कर्स पार्टी ऑफ़ कोरिया’ और उसके सहयोगियों ने 2026 के संसदीय चुनावों में 99.97% वोट और सभी सीटें जीत ली हैं। यह चुनाव 15 मार्च को 15वीं ‘सुप्रीम पीपल्स असेंबली’ (Supreme People’s Assembly) के सदस्यों को चुनने के लिए हुआ था। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक चुनाव में 99.99% रजिस्टर्ड वोटरों ने चुनाव में हिस्सा लिया। इनमें से सिर्फ 0.0037 फीसदी लोग विदेश में होने या समुद्र में काम करने की वजह से वोट नहीं डाल पाए। वहीं देश में मौजूद महज 0.00003 फीसदी लोग वोट डालने नहीं आए। चुनाव में जिन लोगों ने वोट डाला, उनमें से 99.93% ने किम जोंग की पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन किया। हालांकि 0.07 फीसदी ने उनके खिलाफ वोट दिया। चुनावों में इतनी बड़ी जीत के बाद भी यह एक असामान्य आंकड़ा माना जा रहा है। खास बात यह है कि सरकारी मीडिया ने 1957 के बाद पहली बार ‘सुप्रीम पीपल्स असेंबली’ के चुनाव में विरोध में पड़े वोटों की बात स्वीकार की है। सोशल मीडिया पर क्या कह रहे लोगसोशल मीडिया यूज़र्स ने इस पर खूब मजे ले रहे हैं। लोगों का कहना है कि आखिर किम जोंग के होते हुए 0.07 फीसदी लोगों ने उन्हें वोट ना देने की हिम्मत कैसे कर ली। एक यूजर ने इंटरनेट पर लिखा, “एक नई खबर: इस गर्मी में देश की आबादी 0.07% कम होने की उम्मीद है।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “उन 0.07% लोगों के लिए थोड़ी देर का मौन।” एक दूसरे यूजर ने लिखा, “वो 0.07 फीसदी लोग अब देश के मोस्ट ‘वॉन्टेड’ लोग बन गए हैं।”

तेल-गैस के बाद इंटरनेट पर भी संकट? ईरान के कदम से वैश्विक कनेक्टिविटी पर खतरा, भारत भी प्रभावित हो सकता है

तेहरान। मध्य पूर्व में जारी तनाव अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क पर भी खतरा मंडराने लगा है। ईरान द्वारा हॉर्मुज में ऊर्जा आपूर्ति बाधित करने के बाद अब समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन केबलों को नुकसान पहुंचता है, तो दुनिया के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं ठप हो सकती हैं, जिसका असर India सहित कई देशों की बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं पर पड़ेगा। दो अहम समुद्री रास्ते खतरे मेंरिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक कनेक्टिविटी के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गहॉर्मुज  और बाब-अल-मंदेब मार्ग इस समय जोखिम में हैं। इन दोनों इलाकों के समुद्र तल में फाइबर ऑप्टिक केबलों का विशाल नेटवर्क फैला हुआ है, जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ता है। बताया जा रहा है कि हॉर्मुज क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों और संभावित सुरंगों के कारण शिपिंग और बीमा कंपनियां पहले ही सतर्क हो गई हैं। वहीं लाल सागर क्षेत्र में Houthis के हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इंटरनेट की रीढ़ हैं ये केबलसमुद्र के नीचे बिछी ये फाइबर केबलें हजारों किलोमीटर लंबी होती हैं और दुनिया के अधिकांश डेटा ट्रांसफर का आधार हैं। वीडियो कॉल, ईमेल, ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेवाएं—सब कुछ इन्हीं पर निर्भर करता है। हॉर्मुज के संकरे हिस्सों में समुद्र की गहराई लगभग 200 फीट तक ही है, जिससे इन केबलों को निशाना बनाना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। करीब 20 केबलों पर मंडरा रहा खतरालाल सागर और हॉर्मुज क्षेत्र में करीब 20 प्रमुख केबल मौजूद हैं, जिनमें 17 लाल सागर से होकर गुजरती हैं। हॉर्मुज मार्ग में AAE-1, Falcon, Gulf Bridge International और Tata TGN-Gulf जैसी महत्वपूर्ण लाइनें शामिल हैं। ये केबल सीधे तौर पर भारत के अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक को सपोर्ट करती हैं। डिजिटल दुनिया पर बड़ा असर संभवAmazon, Microsoft और Google जैसी बड़ी टेक कंपनियों के मिडिल ईस्ट में स्थापित डाटा सेंटर भी इन्हीं केबलों से जुड़े हैं। ऐसे में अगर कनेक्टिविटी प्रभावित होती है, तो क्लाउड सेवाएं, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर व्यापक असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर, यह संकट दिखाता है कि आधुनिक दुनिया की डिजिटल लाइफलाइन कितनी नाजुक है—जहां एक क्षेत्रीय संघर्ष भी वैश्विक इंटरनेट और अर्थव्यवस्था को झकझोर सकता है।

ईरान युद्ध में अमेरिकी सैनिक नहीं भेजेंगे: ट्रंप का यू-टर्न, बोले-‘कहीं भी सेना तैनात नहीं कर रहा’

वॉशिंगटन। अमेरिका राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि वह ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी जमीनी सैनिक नहीं भेजेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है, जब युद्ध चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है और अमेरिका की भूमिका को लेकर अटकलें तेज थीं। व्हाइट हाउस में Sanae Takaichi के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “मैं कहीं भी सैनिक नहीं भेज रहा हूं… और अगर भेज भी रहा होता, तो आपको नहीं बताता। लेकिन स्पष्ट कर दूं—हम वहां सैनिक नहीं भेज रहे।” गौरतलब है कि युद्ध की शुरुआत के कुछ दिन बाद ट्रंप ने जमीनी सेना भेजने की संभावना से इनकार नहीं किया था, लेकिन अब उनका रुख बदलता नजर आ रहा है। ‘जरूरत पड़ी तो कार्रवाई करेंगे’हालांकि ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका पूरी तरह पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि हालात के मुताबिक जो जरूरी होगा, वह किया जाएगा। ट्रंप लंबे समय से विदेशी जमीन पर अमेरिकी सैनिक भेजने के आलोचक रहे हैं। अपने पहले कार्यकाल में भी उन्होंने Afghanistan से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया शुरू की थी। ईरान को बताया बड़ा खतराट्रंप ने Iran को वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि “जब यह अभियान खत्म होगा, तो दुनिया पहले से ज्यादा सुरक्षित होगी।” उन्होंने अमेरिकी सेना की ताकत का जिक्र करते हुए दावा किया कि हालिया हमलों में दागे गए 114 रॉकेट्स को एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। जंग लंबी खिंचने के संकेत28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में United States और Israel एक ओर हैं, जबकि दूसरी ओर Iran डटा हुआ है। शुरुआती आकलन था कि ईरान में सत्ता परिवर्तन जल्दी हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल हवाई हमलों के जरिए न तो सत्ता परिवर्तन संभव है और न ही ईरान के संवर्धित यूरेनियम कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है, क्योंकि इसे गहरे भूमिगत ठिकानों में सुरक्षित रखा गया है। जमीनी युद्ध से क्यों बच रहा अमेरिका?विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान में जमीनी युद्ध बेहद महंगा और जोखिम भरा साबित हो सकता है। वहां की भौगोलिक परिस्थितियां और सैन्य ताकत अमेरिकी सेना के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में ट्रंप का सैनिक न भेजने का फैसला संकेत देता है कि अमेरिका फिलहाल इस युद्ध को सीमित दायरे में रखकर ही आगे बढ़ना चाहता है, ताकि बड़े और लंबे जमीनी संघर्ष से बचा जा सके।

लेबनान में लाइव रिपोर्टिंग के दौरान धमाका, पत्रकार के पीछे गिरी इजरायली मिसाइल; दो घायल

तेल अवीव/बेरूत। दक्षिण लेबनान से सामने आए एक वीडियो ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टिंग के दौरान एक पत्रकार के ठीक पीछे मिसाइल गिरने का दृश्य कैमरे में कैद हुआ, जिसमें दो पत्रकार घायल हो गए। वीडियो में RT के पत्रकार Steve Sweeney लाइव रिपोर्टिंग कर रहे थे। तभी अचानक वे झुकते हैं और उनके पीछे कुछ ही दूरी पर मिसाइल आकर फट जाती है। इस विस्फोट में स्टीव स्विनी और उनके कैमरामैन Ali Rida घायल हो गए। दोनों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। ‘PRESS’ पहचान के बावजूद हमला?रिपोर्ट के अनुसार, टीम दक्षिण लेबनान के अल-कासमिया ब्रिज के पास कवरेज कर रही थी। कैमरामैन अली रिदा ने दावा किया कि उनकी टीम स्पष्ट रूप से ‘PRESS’ चिन्ह के साथ काम कर रही थी, इसके बावजूद हमला हुआ। Russia से जुड़े अधिकारियों ने भी आशंका जताई है कि यह हमला जानबूझकर किया गया हो सकता है। Margarita Simonyan ने सोशल मीडिया पर बताया कि कथित तौर पर Israel Defense Forces (IDF) के फाइटर जेट ने उस वाहन को निशाना बनाया, जिसमें पत्रकार सवार थे। इजरायल का जवाबवायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए Israel Defense Forces ने कहा कि जिस कासमिया क्रॉसिंग क्षेत्र में पत्रकार मौजूद थे, उसे पहले ही खाली करने की चेतावनी जारी की गई थी। सेना के अनुसार, पर्याप्त समय देने के बाद ही हमला किया गया और इजरायल पत्रकारों को निशाना नहीं बनाता तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कार्रवाई करता है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब Israel और Lebanon के बीच तनाव चरम पर है। इस वीडियो ने युद्ध क्षेत्र में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

2 मुस्लिम देशों की ईरान को चेतावनी, क्या सऊदी-पाकिस्तान जंग में उतरेंगे

रियाद। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान  के खिलाफ 12 मुस्लिम देशों ने एकजुट होकर कड़ा रुख अपनाया है। साउदी अरब  की राजधानी में हुई अहम बैठक में पाकिस्‍तान समेत कई देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से तुरंत हमले रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की मांग की। बैठक में । अज़रबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात  जैसे देश शामिल रहे। सभी ने नागरिक ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की। ईरान को सख्त संदेश बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में तेल संयंत्रों, हवाई अड्डों, रिहायशी इलाकों और राजनयिक मिशनों पर हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया। देशों ने United Nations चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का भी जिक्र किया और United Nations Security Council के प्रस्तावों के पालन की मांग की। साथ ही ईरान से हॉर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में हस्तक्षेप न करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की अपील की गई। सऊदी विदेश मंत्री की कड़ी चेतावनीसऊदी विदेश मंत्री Faisal bin Farhan Al Saud ने साफ कहा कि ईरान पर भरोसा “पूरी तरह खत्म” हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेहरान दबाव और आक्रामक रणनीति के जरिए क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो सऊदी अरब “उचित कदम” उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उनका यह बयान सीधे तौर पर सैन्य कार्रवाई की संभावना की ओर इशारा माना जा रहा है। क्या पाकिस्तान भी जंग में खिंच सकता है?विश्लेषकों का मानना है कि यदि Saudi Arabia सीधे संघर्ष में उतरता है, तो उसका रक्षा सहयोग समझौता Pakistan के साथ सक्रिय हो सकता है। ऐसे में इस्लामाबाद भी इस टकराव का हिस्सा बन सकता है, जिससे संघर्ष और व्यापक हो सकता है। खाड़ी देशों पर हमलों से बढ़ा तनावरिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद ईरान ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सभी छह देशों को निशाना बनाया है। Abu Dhabi और Dubai में हुए हमलों में कई नागरिकों की मौत हुई, जबकि Kuwait, Oman और Bahrain में भी नुकसान की खबरें हैं। Qatar के अल-उदीद एयरबेस और Saudi Arabia के तेल ठिकानों पर भी हमले किए गए, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थिति बेहद संवेदनशीलमौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि यह संघर्ष अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा। अगर सऊदी अरब और उसके सहयोगी सीधे मैदान में उतरते हैं, तो यह टकराव पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है—जिसके वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक असर भी गंभीर हो सकते हैं।

GWALIOR FAMOUS TEMPLE: अधूरी प्रतिमा और चमत्कारिक इतिहास; जानें पहाड़ा वाली माता मंदिर की कहानी, नवरात्री में लगी लंबी कतारें

PADHAY MATA MANDIR

HIGHLIGHTS: मंदिर लगभग 350 साल पुराना है। दिनभर में चार बार भोग और आरती की परंपरा। नवरात्र में भक्तों की भारी भीड़। प्रतिमा अधूरी अवस्था में स्थापित है। औरंगजेब भी मंदिर को खंडित नहीं कर सका। GWALIOR FAMOUS TEMPLE: मध्यप्रदेश। ग्वालियर के नई सड़क क्षेत्र में स्थित पाढ़ाय माता मंदिर, जिसे स्थानीय लोग पहाड़ा वाली माता मंदिर के नाम से जानते हैं, शहरवासियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। लगभग 350 साल पुराना यह मंदिर मां बघेश्वरी के शेर पर सवार स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। नवरात्र के दौरान सुबह से देर रात तक यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। International Energy Agency की बड़ी सलाह, ऊर्जा संकट से निपटने के लिए वर्क फ्रॉम होम से आधुनिक कुकिंग तक सुझाव दिनभर की अनोखी परंपरा मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि यहां दिनभर में चार बार आरती और भोग किए जाते हैं। यही वजह है कि श्रद्धालु पूरे दिन किसी भी समय दर्शन के लिए आते हैं। Eid 2026: भारत में ईद-उल-फितर 21 मार्च को, पूरे 30 रोजे रखे गए चमत्कारिक इतिहास मंदिर का इतिहास चमत्कारों से भरा हुआ है। मंदिर के पुजारी महेश कुमार के अनुसार, माता मूल रूप से डीडवाना (जिला नागौर) में विराजमान थीं। लगभग 400 साल पहले नगर सेठ पाढ़ाय को स्वप्न में माता ने दर्शन दिए और उन्हें 12 कोस तक बिना पीछे मुड़े पैदल चलने का निर्देश दिया। लेकिन अंत में सेठ ने पीछे मुड़कर देखा, जिससे माता की प्रतिमा अधूरी अवस्था में प्रकट हुई और उनके चरणों की पंजी अधूरी रह गई। पावर सेक्टर में बड़ी साझेदारी, Bharat Heavy Electricals Limited लगाएगा 3,064 करोड़ का निवेश सुरक्षा और ऐतिहासिक महत्ता स्थानीय मान्यता है कि औरंगजेब भी इस मंदिर को खंडित नहीं कर सका, जिससे इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है। पावर सेक्टर में बड़ी साझेदारी, Bharat Heavy Electricals Limited लगाएगा 3,064 करोड़ का निवेश आधुनिक श्रद्धालुओं का आकर्षण आज यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि ग्वालियर के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक नक्शे पर भी एक अहम स्थल बन चुका है।

Eid 2026: भारत में ईद-उल-फितर 21 मार्च को, पूरे 30 रोजे रखे गए

नई दिल्ली। भारत में ईद उल फितर 2026 की तारीख तय हो गई है। इस बार रमजान के पूरे 30 रोजे रखे गए हैं। 20 मार्च को 30वां रोजा रखा गया और अगले दिन यानी 21 मार्च शनिवार को देशभर में ईद मनाई जाएगी। यह घोषणा धार्मिक कमेटी और जामा मस्जिद दिल्ली के नायब इमाम सैयद उसामा शाबान बुखारी ने की। भारत में ईद की तारीख चांद दिखने पर निर्भर करती है। इस बार 19 मार्च को शव्वाल का चांद नजर नहीं आया जिससे रमजान का आखिरी रोजा बढ़ गया। इसके बाद 20 मार्च को चांद देखने के बाद ईद 21 मार्च को मनाने का फैसला लिया गया। वहीं सऊदी अरब में 20 मार्च को ही ईद उल फितर मनाई जा रही है।ईद उल फितर का महत्व  ईद उल फितर इस्लाम धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। इसका मतलब है रोजा खोलने का त्योहार । यह रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद मनाया जाता है और अल्लाह का धन्यवाद अदा करने का अवसर होता है। यह पर्व खुशियों और भाईचारे का प्रतीक है। इतिहास में ईद उल फितर की शुरुआत 624 ईस्वी में पैगंबर हजरत मुहम्मद ने मदीना में की थी। हिजरत के बाद मुसलमानों ने पहला रमजान पूरा किया और तब ईद उल फितर और ईद उल अजहा दो पर्व तय किए गए। इस बार के ईद समारोह के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। मस्जिदों और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ की व्यवस्था की जा रही है। लोग अपने घरों में भी सजावट और ईद की मिठाइयों की तैयारी में जुटे हैं।