दोहा वर्ल्ड कप स्थगित, मिडिल ईस्ट की हालात को देखते हुए वर्ल्ड जिमनास्टिक्स का फैसला

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनावों के बीच अप्रैल 2026 में दोहा, कतर में आयोजित होने वाला आर्टिस्टिक जिमनास्टिक्स वर्ल्ड कप एक्टिव कर दिया गया है। यह फैसला वर्ल्ड जिमनास्टिक्स ने शुक्रवार रात एक ऑपरेशन ऑनलाइन वोट के बाद लिया। संस्था ने बयान में कहा कि 15 से 18 अप्रैल तक होने वाला अपैरेट्स विश्व कप अब एक्टिव रहेगा और इस इवेंट को भविष्य में रीशेड्यूल नहीं किया जाएगा। वर्ल्ड जिमनास्टिक्स ने कहा कि मिडिल ईस्ट में मौजूदा हालात के कारण कई देशों की टीमों ने पहले ही इस प्रतियोगिता के लिए अपना आवेदन एक्टिव कर दिया था। शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से मिडिल ईस्ट में स्थिरता बढ़ेगी। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय खेल संचालकों को सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के गंभीर मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। वर्ल्ड जिमनास्टिक्स ने सभी प्रभावित लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्ति की और उम्मीद जताई कि जल्द ही मिडिल ईस्ट में स्थिरता लौटेगी। संगठन ने यह भी साफ़ किया कि अप्रैल में काहिरा और ओसिजेक में होने वाले अपरेटस वर्ल्ड कप के लिए देर से आवेदन करने पर कोई पेनल्टी नहीं गिल। वर्ल्ड जिमनास्टिक्स ने नियमों में कुछ एक्सरसाइज को भी मंज़ूरी दी है। अब रैंकिंग और वर्ल्ड चैंपियनशिप क्वालिफिकेशन के लिए हर अपरेटस पर पांच मुकाबलों में तीन सबसे ज़्यादा स्कोर वाले इवेंट्स को आधार बनाया जाएगा। संस्था ने कहा, “स्थगन का फ़ैसला खास हालात के कारण लिया गया है। इससे जुड़े दूसरे आधिकारिक नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा।” मिडिल ईस्ट संकट का असर दूसरे स्पोर्ट्स इवेंट्स पर भी पड़ा है। उदाहरण के लिए, Formula 1 कैलेंडर में भी बदलाव हुआ है। 2026 सीज़न में होने वाली बहरीन और सऊदी अरब ग्रां प्री रेस कैंपेन कर दी गई हैं। 12 अप्रैल को साखिर और 19 अप्रैल को जेद्दा में होने वाली रेस इस इलाके में सुरक्षा दबाव और लॉजिस्टिक दिक्कतों की वजह से कैंसिल कर दी गई हैं। इसके चलते Formula 1 का 22-रेस कैलेंडर छोटा हो जाएगा और स्प्रिंग ब्रेक लंबा हो जाएगा। एथलीटों का रुझान है कि मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते संघर्षों और प्रतिबंधों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय खेल संचालक भविष्य में भी इस क्षेत्र में इवेंट आयोजित करने में सतर्क रहेंगे। वर्ल्ड जिम्नास्टिक्स ने कहा कि सुरक्षा और खिलाड़ी की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। अवसर विश्व कप के कारण दोहा में ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक और टीम व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा है। टीमों को नई स्ट्रैटेजी और आगामी मुकाबलों के अनुसार अपने कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ेगा। इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय जिम्नास्टिक्स कम्युनिटी में प्रतिबंधों की झलक मिली है, लेकिन खिलाड़ियों और संचालकों ने इसे सुरक्षित और जिम्मेदार कदम के रूप में स्वीकार किया है।
BCCI ने घोषित किया शेड्यूल, जून में टीम इंडिया खेलेगी आयरलैंड के खिलाफ T20

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने शनिवार की सुबह टीम इंडिया के आयरलैंड दौरे का शेड्यूल जारी कर दिया। भारतीय टीम जून 2026 में आयरलैंड में दो T20 मुकाबले खेलने के लिए रवाना होगी। बीसीसीआई के अनुसार, पहला मैच 26 जून और दूसरा मुकाबला 28 जून को होगा। दोनों ही मुकाबले बेलफास्ट में खेले जाएंगे। यह टीम इंडिया का आयरलैंड का चौथा दौरा होगा। इससे पहले भारतीय टीम 2018, 2022 और 2023 में आयरलैंड का दौरा कर चुकी है। वहीं, 2007 के बाद यह पहला मौका होगा जब भारतीय टीम बेलफास्ट में खेलेगी। आयरलैंड क्रिकेट टीम और वहां के फैंस हमेशा टीम इंडिया के दौरे का बेसब्री से इंतजार करते हैं। बीसीसीआई आयरलैंड दौरे पर अक्सर युवा खिलाड़ियों को टीम में शामिल करती रही है। इस बार यह देखने लायक होगा कि विश्व कप जीतने वाली सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली टीम जाएगी या कोई और कप्तान युवा टीम की हासिल करेगा। T20 में भारत का आयरलैंड के खिलाफ अजेय रिकॉर्ड है। अब तक दोनों टीमों के बीच 8 T20 मैच खेले गए हैं और टीम इंडिया ने सभी में जीत हासिल की है। इस जीत का रिकॉर्ड भारतीय टीम के लिए आयरलैंड दौरे से पहले आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। आयरलैंड ने भी 2026 के लिए अपना शेड्यूल घोषित किया है। भारत के खिलाफ सीरीज से पहले आयरलैंड टीम वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के खिलाफ त्रिकोणीय T20 सीरीज खेलेगी, जो 28 मई से 4 जून तक चलेगी। इसके बाद आयरलैंड को अफगानिस्तान के खिलाफ 5 वनडे मैचों की सीरीज खेलनी है, जो 5 से 14 अगस्त के बीच आयोजित होगी। इस दौरे को लेकर चर्चा का एक पहलू यह भी है कि आयरलैंड ने अफगानिस्तान में महिला और महिला क्रिकेट टीम के अधिकारों के हनन को लेकर मुखर रुख अपनाया था। ऐसे में भारत की सीरीज से पहले अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे खेलने वाला कदम माना जा रहा है। सीबीए की मुख्य कार्यकारी सारा कीन ने कहा, “यह फैसला न तो वित्तीय कारणों से लिया गया है और न ही किसी कानूनी मजबूरी में, बल्कि इसे संगठन के व्यापक हित में लिया गया है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि टीम का दौरा सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी रूप से सफल रहे।” इस दौरे के दौरान टीम इंडिया को आयरलैंड की तेज़ पिच और मौसम की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। बेलफास्ट की परिस्थितियों में गेंदबाजों और बल्लेबाजों की रणनीति और फिटनेस महत्वपूर्ण साबित होगी। वहीं युवा खिलाड़ियों के लिए यह दौरा अंतरराष्ट्रीय अनुभव लेने और अपनी क्षमता दिखाने का सुनहरा मौका है। भारतीय टीम का यह दौरा आगामी टी20 विश्व कप की तैयारियों के पन्नों से भी अहम माना जा रहा है। आयरलैंड के खिलाफ अजेय रिकॉर्ड और पिछले अनुभव टीम के खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को और मजबूत करेंगे। बीसीसीआई ने कहा है कि इस दौरे पर टीम के चयन और रणनीति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
आईपीएल 2026: विराट कोहली ने साथी खिलाड़ियों को दिया ‘एक भी मिनट बर्बाद ना करें’ का गुरु मंत्र

नई दिल्ली आईपीएल 2026 के प्रोजेक्ट से पहले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली ने टीम के बाकी सदस्यों को प्रेरित करते हुए कहा है कि उन्हें अभ्यास के हर सत्र का पूरा खेल खेलना चाहिए और एक मिनट में भी ब्रेक नहीं लेना चाहिए। माइकल का यह संदेश टीम की तैयारी और ग्रेड संवर्धन के लिए आया है। इस बार की चैंपियन सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के साथ 28 मार्च को होम ग्राउंड एम. के साथ आरसीबी का पहला मुकाबला। चिन्नास्वामी स्टेडियम, बेंगलुरु में खेला जाएगा। इस मैच में और पूरे सीजन में टीम के खिलाड़ियों का प्रदर्शन अच्छा रहा। आरसीबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रैक्टिस सत्र का वीडियो साझा किया है, जिसमें कोहली टीम के साथ बातचीत नीचे दी गई है। कोहली ने कहा, ”पिछले दो-तीन सीजन में हमने कड़ी मेहनत की, जिससे हमें आईपीएल 2025 में पहली बार टाइटल जीतने में मदद मिली। विराट ने टीम को यह भी याद दिलाया कि कर्मचारियों को नौकरानी भेजना आसान नहीं है, और इसके लिए मानसिक तैयारी और शारीरिक फिटनेस दोनों जरूरी हैं। उनके जोर हर खिलाड़ी से पूरी क्षमता का उपयोग किया जा रहा है। कोहली 2008 से आरसीबी से जुड़े हुए हैं और लंबे समय तक टीम के कप्तान भी रहे हैं। उन्होंने टीम के लिए कई स्मारकों का प्रदर्शन किया। आईपीएल 2025 में खिताब जीतने में उनका योगदान बेहद अहम था। कोहली ने उस सीज़न में 15 मैचों में 8 मैचों में 657 रन बनाये थे। हालाँकि, विराट ने अंतर्राष्ट्रीय टी20 से संन्यास ले लिया है, लेकिन आईपीएल में उन्हें अब भी आकर्षण का केंद्र बना लिया गया है। आईपीएल 2026 में उनके चाहने वालों को उम्मीद है कि वह टीम के लिए नाटकीय प्रदर्शन करेंगे और प्रदर्शन में लगातार योगदान देंगे। आरसीबी के लिए यह सीज़न डीवीडी बनाने वाला है क्योंकि अब अन्य रिकॉर्ड भी पहले से अधिक मजबूत और तैयार हैं। कोहली के नेतृत्व और अनुभव से लेकर टीम की रणनीति और प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद है। उनके गुरु मंत्र का उद्देश्य टीम को सकारात्मक प्रेरणा और निर्देशन के साथ मैदान पर उतारना है। आईपीएल 2026 के इस सीजन में आरसीबी के लिए डिफेंस डिफेंस और टीम की नई रणनीति परखने का मौका मिलेगा। विराट कोहली की प्रेरणा और खिलाड़ियों की मेहनत इस बार टीम को नई जहां तक ले जाने की कोशिश है।
गौतम गंभीर ने डर के मारे खाया था बत्तख का मांस, गेंदबाज आशीष नेहरा ने किया था सावधान !

नई दिल्ली। IPL Story Gautam Gambhir three ducks in a row: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप में भारत को चैंपियन बनाने वाले कोच गौतम गंभीर के इंडियन प्रीमियर लीग 2014 का एक मजेदार किस्सा सामने आया है. उन्होंने एक बार बताया था कि कैसे तीन मैच में शून्य पर आउट होने के बाद उन्होंने आशीष नेहरा के डराने के बाद बत्तख का मांस चखा था. आशीष नेहरा के चिढ़ाने पर गौतम गंभीर ने चखा था बत्तख का मांसभारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने आईपीएल का एक मजेदार किस्सा साझा किया था. 2014 में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) सीजन की शुरुआत उनके लिए कितनी खराब रही थी. उस समय कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान गंभीर टूर्नामेंट की शुरुआत में लगातार तीन मैचों में शून्य पर आउट हो गए थे. गंभीर ने एक मजेदार घटना का जिक्र किया जिसमें पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा शामिल थे. गंभीर ने बताया कि आशीष नेहरा ने उनसे कहा था कि वह रात के खाने में डक ऑर्डर करें ताकि चौथी बार शून्य पर आउट होने से बच सकें. गंभीर ने हरभजन सिंह के शो पर खुलासा किया था, “दिल्ली के चार-पांच लड़के डिनर टेबल पर बैठे थे. आशीष नेहरा ने डक ऑर्डर किया. उन्होंने मुझसे कहा कि डिनर में डक खा लो, नहीं तो अगले मैच में फिर से डक मिल सकता है. मैंने बस थोड़ा सा चखा. उस मैच में मैंने एक रन बनाया और नेहरा ने मुझे उसके बाद मैसेज भी किया.” लगातार तीसरी बार डक पर आउट होने के बाद गंभीर ने बताया कि उनकी टीम के को-ओनर शाहरुख खान से बातचीत हुई थी. गंभीर ने कहा कि वह खुद को प्लेइंग 11 से बाहर करना चाहते थे, लेकिन शाहरुख इसके खिलाफ थे. “2014 में अबू धाबी में मैंने आईपीएल की शुरुआत लगातार तीन डक के साथ की थी. चौथे मैच में मैंने एक रन बनाया. हमने अपने पहले पांच में से चार मैच हार दिए थे. हम गेम हारने के बाद रिट्ज कार्लटन लौट रहे थे. वह लॉबी में खड़े थे. उन्होंने मुझे साइड में ले जाकर पूछा कि क्या हो रहा है. मैंने कहा कि मैं खुद को बाहर करने का सोच रहा हूं. गंभीर ने याद किया, “उन्होंने मुझसे कहा, ‘जब तक तुम यहां हो और खेलना चाहते हो, खुद को बाहर नहीं कर सकते.’ उन्होंने मुझसे वादा लिया कि जब तक मैं टीम में हूं, हर मैच खेलूंगा. उसके बाद मैंने लगातार दो-तीन हाफ सेंचुरी लगाईं और 2014 मे हम जीते. कप्तानी के सात सालों में शाहरुख के साथ मेरी यही एक क्रिकेट की बातचीत थी.”
'क्रूड ऑयल' ने बदली थी गल्फ देशों की किस्मत, फिर अमेरिका ने कैसे किया तेल साम्राज्य पर कब्जा?

नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद से पूरे मिडिल ईस्ट में खलबली मची हुई है. 28 फरवरी को हुए इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई. इसके बाद ईरान ने भी अमेरिका और इजरायल पर पलटवार शुरू कर दिया. इस युद्ध का असर पहले तो सिर्फ मिडिल ईस्ट पर था लेकिन अब धीरे-धीरे इसका असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है. युद्ध की वजह से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई, शिपिंग रूट्स और ईंधन बाजार पर भारी दबाव दिखाई दे रहा है. पूरी दुनिया की ऊर्जा के लिए तेल और गैस सबसे जरूरी है लेकिन युद्ध की वजह से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी कर दी है. जिसकी वजह से दुनियाभर के देशों को तेल और गैस की किल्लतों का सामना करना पड़ रहा है. क्रूड ऑयल ही खाड़ी देशों की सबसे बड़ी संपदा है जिसे पूरी दुनिया ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करती है. इस युद्ध के पीछे कहीं न कहीं अमेरिका की मंशा उनके तेल पर कब्जे की है! भौगोलिक तौर पर अगर देखा जाए तो गल्फ देशों में सिर्फ रेगिस्तान ही है. ऐसे में जब तेल के उपयोग के बारे में दुनिया को नहीं पता था तब यहां रहने वाले लोगों को अपना जीवन-यापन बहुत कठिनाइयों के साथ करना होता था. ऐसे में जब दुनिया को क्रूड ऑयल के बारे में जानकारी मिली तो यहां भी क्रूड ऑयल की तलाश शुरू हुई. धीरे-धीरे मिडिल ईस्ट के इलाकों में क्रूड ऑयल की एक के बाद एक करके बहुत से तेल के भंडार खोज निकाले गए. इन तेल के भंडारों के मिलने के बाद मिडिल ईस्ट की दशा बदल गई. यहां रहने वाले लोग अचानक से अमीर होते गए. अचानक इतनी तेजी से विकास कर रहे मिडिल ईस्ट देशों पर अमेरिका सहित पश्चिमी देशों की भी नजर पड़ी तो पता चला इनके विकास के पीछे इनके यहां के तेल भंडारण का पाया जाना है. ऐसे में पश्चिमी देशों ने इन तेल के भंडारों पर कब्जा करने की चाल चलनी शुरू कर दी. अमेरिका की नजर गल्फ देशों के तेल पर थीः ब्रिटेनबीबीसी न्यूज के मुताबिक ब्रिटेन के कुछ सरकारी दस्तावेजों से इस बात का पता चलता है कि अमेरिका ने 1973 में ही मिडिल ईस्ट देशों के तेल भंडारों पर कब्जा करने की योजना बनाई थी. साल 1973 में अरब देशों ने इजरायल के हमले के बाद तेल बिक्री पर रोक लगा दी थी. इसके बाद मिस्र और सीरिया के बीच मुकाबले में इजरायल एक बड़ी ताकत बनकर उभरा. इस युद्ध को ‘अक्तूबर युद्ध’ के नाम से जाना गया था. ब्रिटेन सरकार ने उस दौरान के कुछ सरकारी दस्तावेजों को हाल ही में सार्वजनिक किया है. अमेरिका ने तेल भंडारों पर कब्जे की योजना बनानी शुरू कर दीब्रिटेन के जारी किए गए इन दस्तावेजों से पता चलता है कि ब्रिटेन सरकार ने उस संकट को इतनी गंभीरता से लिया कि इस बारे में एक आपातकालीन योजना बनाई गई कि अमेरिका तेल के भंडारों पर कब्जा करने के लिए क्या-क्या कदम उठा सकता है? ब्रिटेन ने यहां तक अनुमान लगा लिया था कि अमेरिका आने वाले दिनों में सऊदी अरब और कुवैत में तेल भंडार पर कब्जा करने के लिए वहां पर एयरफोर्स की मदद ले सकता है और अमेरिका ब्रिटेन को भी अबूधाबी में ऐसा ही करने के लिए कह सकता है. इन डॉक्यूमेंट्स से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि तेल की आपूर्ति की चिंता किस हद तक पश्चिमी देशों के लिए रही है. अमरिका ने ब्रिटिश राजदूत को दी थी चेतावनीगल्फ देशों में तेल पर कब्जा करने की योजना के बारे में ब्रिटेन को तब पता चलता है, जब तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स शेल्सिंगर ने अमरीका में ब्रिटिश एंबेस्डर लॉर्ड क्रोमर को चेतावनी दी थी. ब्रिटिश एंबेस्डर ने अमेरिकी रक्षामंत्री जेम्स शेल्सिंगर के हवाले से कहा था कि तेल के लिए अमेरिका बलप्रयोग करने से भी नहीं झिझकेगा. गल्फ देशों ने पश्चिमी देशों को तेल बेचने पर पाबंदी लगा दी थी. गल्फ देशों ने पश्चिमी देशों पर इस बात का दबाव बढ़ाने के लिए कि वो उन्हें तेल नहीं बेचेंगे इसके लिए उन्होंने इजरायल पर दबाव बढ़ाया ताकि वो इस संदेश को पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका तक पहुंचा सके. गल्फ देशों ने ये पाबंदी खासतौर पर अमेरिका के लिए लगाई थी लेकिन इससे अन्य पश्चिमी देश भी प्रभावित हुए थे. ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों को लगी अमेरिकी रणनीति की खबरब्रिटेन की संयुक्त जांच समिति ने अनुमान लगाया था कि जब अमरीका ने बलप्रयोग की बात की थी तो अमरीकी रणनीति में मध्य पूर्व में तेल संस्थानों पर कब्जा किए जाने की बहुत संभावना थी. दस्तावेजों के मुताबिक, ‘तेल के भंडारों पर कब्जे के लिए अमरीकी रणनीति से ऐसा ही आभास होता है’ ब्रिटेन का ऐसा मानना था. इससे साफ पता चलता है कि ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों को अमेरिकी रणनीतियों की कुछ भनक लग गई थी. बाद में अमेरिका ने बलप्रयोग की रणनीति में अरब देशों के शासक बदले जाने या ताकत के बल पर दबाव बनाने के विकल्पों को खारिज कर दिया था. अमेरिका 10 सालों तक तेल भंडार पर कब्जा चाहता था!संयुक्त जांच समिति ने भरोसा जताते हुए विश्वास व्यक्त किया था कि अमेरिका की बलप्रयोग की रणनीति में एयर फोर्स अभियान चलाता और जिसके लिए वो संभवतः ईरान, तुर्की, साइप्रस, ग्रीस या इजरायल के हवाई अड्डों का इस्तेमाल करता. समिति ने ये भी कहा था कि उनका अनुमान था कि ऐसे अभियान के लिए अमेरिका को कम से कम दो ब्रिगेड की जरूरत थी. एक सऊदी अरब के लिए और एक कुवैत के लिए तीसरी ब्रिगेड अबूधाबी के लिए भी लगाई जा सकती थी. समिति ने ये चेतावनी भी दी थी कि आने वाले 10 सालों तक वहां पर अमेरिका का कब्जा रह सकता है. क्या थी ब्रिटेन की भूमिका?ब्रिटेन के लिए भी इस अभियान में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी थी. समिति की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अमेरिका शायद यह चाहता था कि ब्रिटेन अबूधाबी के तेल संस्थानों पर कब्जे के लिए कार्रवाई करे और कुछ ब्रिटिश ऑर्मी के अफसरों के के नाम अबूधाबी डिफेंस फोर्स के लिए घोषित भी कर दिए गए थे. समिति ने इस
टीम इंडिया जून के आखिर में करेगी आयरलैंड का दौरा, T20 सीरीज के शेड्यूल का हुआ ऐलान

नई दिल्ली। टीम इंडिया एक बार फिर से आयरलैंड का दौरा करेगी। इस दौरान दो मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज भारत और आयरलैंड के बीच खेली जाएगी। इसका आधिकारिक ऐलान हो गया है। जून के आखिर में ये दो मैच खेले जाएंगे। बेलफास्ट के स्टोरमोंट में 26 और 28 जून को ये दो टी20 मैच भारत और आयरलैंड के बीच खेले जाने की घोषणा मेजबान क्रिकेट बोर्ड ने की है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। इस दो मैचों की टी20 सीरीज का शेड्यूल अफगानिस्तान के खिलाफ मिक्स्ड होम सीरीज और इंग्लैंड में अवे व्हाइट-बॉल सीरीज के बीच में है। अफगानिस्तान के खिलाफ भारत को टेस्ट मैच 5 जून से खेलना है और इसके बाद वनडे सीरीज खेली जाएगी, जो 20 जून तक चलेगी। इसके बाद कुछ खिलाड़ी आयरलैंड रवाना होंगे, जबकि चयनित खिलाड़ी इंग्लैंड जाएंगे, जहां 1 जुलाई से 5 मैचों की टी20 सीरीज खेली जाएगी। इसी के बीच में ये दो टी20 मैचों की सीरीज रखी गई है। मैच शाम को साढ़े सात बजे से खेले जाएंगे। बीसीसीआई ने खिलाड़ियों, कोच और सपोर्ट स्टाफ इस सीरीज के बारे में हाल ही में दिल्ली में आयोजित हुए नमन अवॉर्ड्स के दौरान इसकी जानकारी दे दी होगी। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली टीम का पहला असाइनमेंट टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने के बाद होगा। आयरलैंड के खिलाफ पिछले कुछ समय में भारत ने तीन टी20 सीरीज खेली हैं और तीनों बार कम से कम 3 मैचों की टी20 सीरीज हुई है, लेकिन इस बार 3 मैचों को शेड्यूल करने के लिए समय नहीं है। ऐसे में इस सीरीज में सिर्फ दो मैच रखे गए हैं। क्रिकबज की रिपोर्ट की मानें तो अगले 12 महीने फिर से टीम इंडिया का पैक्ड शेड्यूल है। वर्ल्ड कप विनिंग टी20 टीम भी काफी मैच खेलने वाली है, जबकि वनडे सीरीज भी कई आयोजित होंगी। इनमें भी कुछ मैच बढ़ा दी गए हैं। उदाहरण के तौर पर न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज अब 5 मैचों की होगी। इसके अलावा भी कुछ सीरीज और समायोजित की जा सकती हैं। जापान में भारत को एशियन गेम्स भी खेलने हैं।
एप्पल से बनाएं 4 आसान और स्वादिष्ट रेसिपी जो झटपट तैयार हों और हर उम्र के लोगों को पसंद आएं

नई दिल्ली: अगर घर में सेब पड़े-पड़े बोर हो रहे हैं और समझ नहीं आ रहा कि उनसे क्या बनाया जाए तो अब टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। सेब सिर्फ काटकर खाने या जूस बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कई स्वादिष्ट और आसान रेसिपी तैयार की जा सकती हैं। खास बात यह है कि ये रेसिपी कम समय में बनती हैं और हर किसी को पसंद आती हैं। सबसे पहले बात करते हैं एप्पल चटनी की। अगर आप कुछ मीठा और तीखा एक साथ खाना पसंद करते हैं तो यह रेसिपी आपके लिए परफेक्ट है। इसके लिए सेब को छोटे क्यूब्स में काट लें और कड़ाही में डालें। अब इसमें चीनी, लाल मिर्च पाउडर, अदरक पेस्ट और थोड़ा सा सिरका मिलाकर मध्यम आंच पर पकाएं। जब यह मिश्रण गाढ़ा और हल्का चमकदार हो जाए तो गैस बंद कर दें। यह चटनी पराठे या स्नैक्स के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है। दूसरी रेसिपी है एप्पल शेक, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है। इसे बनाने के लिए सेब को छीलकर टुकड़ों में काट लें और मिक्सर में डालें। फिर इसमें दूध, शहद और बर्फ के टुकड़े डालकर स्मूद ब्लेंड करें। तैयार शेक को गिलास में निकालें और ऊपर से दालचीनी पाउडर डालकर सर्व करें। यह हेल्दी और रिफ्रेशिंग ड्रिंक है। अगर आप ब्रेड के साथ कुछ खास ट्राई करना चाहते हैं तो एप्पल जैम एक बढ़िया विकल्प है। इसके लिए सेब को छोटे टुकड़ों में काटकर कड़ाही में डालें और उसमें चीनी मिलाएं। इसे तब तक पकाएं जब तक यह गाढ़ा न हो जाए। अंत में थोड़ा सा नींबू का रस डालकर मिलाएं। ठंडा होने के बाद इसे जार में स्टोर करें और जब मन करे इस्तेमाल करें। चौथी और सबसे झटपट बनने वाली रेसिपी है एप्पल चाट। जब कुछ चटपटा खाने का मन हो तो यह एकदम परफेक्ट स्नैक है। इसके लिए सेब के छोटे टुकड़े करें और उसमें चाट मसाला, काला नमक, भुना जीरा पाउडर और नींबू का रस मिलाएं। चाहें तो इसमें हरी मिर्च और पुदीना भी डाल सकते हैं। यह चाट स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है। इन आसान रेसिपीज की मदद से आप साधारण सेब को भी खास बना सकते हैं। अब अगली बार जब घर में सेब हों, तो इन्हें नए अंदाज में जरूर ट्राई करें।
आयुर्वेद का नियम तोड़ा तो बढ़ेंगी बीमारियां भोजन के साथ फल खाने से बचें

नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खानपान की आदतें तेजी से बदल रही हैं। शादी समारोह, पार्टियों और होटलों में भोजन के साथ फल परोसना एक आम चलन बन चुका है। लोग इसे हेल्दी समझकर बिना सोचे-समझे खा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद इस आदत को सही नहीं मानता और इसे पाचन के लिए हानिकारक बता सकता है। आयुर्वेद के अनुसार हर खाद्य पदार्थ की अपनी तासीर और पाचन समय होता है। दाल, रोटी, चावल जैसे पके हुए भोजन को पचने में समय लगता है, जबकि फल हल्के होते हैं और जल्दी पच जाते हैं। जब इन दोनों को एक साथ खाया जाता है तो पाचन तंत्र भ्रमित हो जाता है। फल पहले पचने की कोशिश करते हैं, जबकि भारी भोजन को अधिक समय चाहिए होता है। इस असंतुलन के कारण भोजन पेट में रुककर सड़ने लगता है, जिससे गैस, कब्ज, एसिडिटी और भारीपन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा, होटलों या फंक्शन्स में परोसे जाने वाले फल अक्सर ठंडे या स्टोर किए हुए होते हैं। ऐसे फल पाचन अग्नि को कमजोर कर देते हैं, जिससे खाना ठीक से नहीं पच पाता। आयुर्वेद में पाचन अग्नि को शरीर का मूल आधार माना गया है और इसके कमजोर होने से कई रोग जन्म ले सकते हैं। आयुर्वेद यह भी कहता है कि भोजन केवल स्वाद के लिए नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें समय, मात्रा और संयोजन का विशेष महत्व होता है। गलत संयोजन को विरुद्ध आहार कहा जाता है, जो लंबे समय में शरीर में विषैले तत्वों के जमाव का कारण बन सकता है। फल खाने का सही समय सुबह या शाम माना गया है। सुबह खाली पेट फल खाना सबसे ज्यादा लाभकारी होता है, क्योंकि उस समय पाचन तंत्र साफ और सक्रिय होता है। हालांकि सुबह खट्टे फलों से बचना चाहिए, क्योंकि ये गैस और जलन बढ़ा सकते हैं। शाम को भी सूरज ढलने से पहले फल खाए जा सकते हैं, लेकिन भोजन और फल के बीच कम से कम एक घंटे का अंतर रखना जरूरी है। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि फल को दूध या दही के साथ नहीं खाना चाहिए। आयुर्वेद इसे विरुद्ध आहार मानता है और इससे पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। यदि आप फल और भोजन दोनों का पूरा पोषण लेना चाहते हैं तो इन्हें अलग-अलग समय पर खाना ही बेहतर है। छोटी-सी यह आदत आपके पाचन को बेहतर बना सकती है और कई बीमारियों से बचाने में मदद कर सकती है।
NCERT किताब विवाद सुलझा…. केन्द्र ने न्यायपालिका पर आधारित चैप्टर री-ड्राफ्ट करने के लिए गठित की कमेटी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार (Central Government) ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को सूचित किया कि उसने एनसीईआरटी (NCERT) की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका पर आधारित चैप्टर को फिर से तैयार यानी री-ड्राफ्ट (Re-draft) करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा, पूर्व जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस और पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल शामिल होंगे। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वीएम पंचोली की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने केंद्र की ओर से यह जानकारी दी। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया, “हमने चैप्टर का मसौदा तैयार करने के लिए समिति बनाई है। वेणुगोपाल और जस्टिस इंदु मल्होत्रा समिति का हिस्सा होंगे। हमने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी से जस्टिस अनिरुद्ध बोस से भी अनुरोध किया है और वे भी इसमें शामिल होंगे। इस आश्वासन और समिति के गठन की जानकारी के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने विवादित चैप्टर पर दर्ज किए गए अपने स्वतः संज्ञान मामले का निपटारा कर दिया। क्या है पूरा विवाद?यह विवाद कक्षा 8 की किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ (वॉल्यूम 2) से जुड़ा है। इसमें ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ नामक चैप्टर के तहत कथित तौर पर ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ पर एक हिस्सा शामिल किया गया था। इस मुद्दे को सबसे पहले 25 फरवरी को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने उठाया था, जिस पर कोर्ट ने बताया था कि उसने पहले ही इसका स्वतः संज्ञान ले लिया है। विवाद बढ़ने पर NCERT ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा था कि यह एक अनजाने में हुई गलती थी। उन्होंने विवादित हिस्से को किताब से वापस लेने और उचित परामर्श के बाद इसे फिर से लिखने की बात कही थी। सुप्रीम कोर्ट की पिछली कार्रवाइयां और नाराजगीकिताब पर बैन: 26 फरवरी को हुई विस्तारपूर्ण सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस किताब के उत्पादन और वितरण पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। अवमानना का नोटिस: अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग और NCERT के निदेशक डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी को अवमानना अधिनियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि विवादित चैप्टर को लिखने या मंजूरी देने वालों के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई क्यों न की जाए। NCERT डायरेक्टर के जवाब पर आपत्ति: पिछली सुनवाई में कोर्ट ने NCERT निदेशक के उस जवाब पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसमें कहा गया था कि चैप्टर को फिर से लिख लिया गया है। कोर्ट ने इस जवाब को परेशान करने वाला बताया था क्योंकि इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि किन विशेषज्ञों ने इसे दोबारा लिखा है या किसने इसे मंजूरी दी है। इसके बाद अदालत ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह के भीतर एक समिति बनाने का निर्देश दिया था, जिसमें एक सेवानिवृत्त जज, एक प्रसिद्ध शिक्षाविद और एक प्रख्यात वकील शामिल हों। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि कानूनी अध्ययन की सामग्री तैयार करने के लिए भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को भी भरोसे में लिया जाना चाहिए। पुराने लेखकों से दूर रहने का निर्देशअदालत ने यह भी कड़ा निर्देश दिया है कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार के साथ भविष्य में कोई जुड़ाव न रखें। यह निर्देश तब आया जब NCERT निदेशक ने कोर्ट को बताया था कि पिछला विवादित चैप्टर मुख्य रूप से प्रोफेसर डैनिनो द्वारा तैयार किया गया था और दिवाकर व कुमार ने इस कार्य में उनकी सहायता की थी। सोशल मीडिया पर भी सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्तइस मामले में अदालत ने सोशल मीडिया पर गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करने वाले कुछ तत्वों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। पीठ ने कड़े शब्दों में कहा: तथाकथित सोशल मीडिया पर कुछ तत्वों ने गैर-जिम्मेदाराना हरकतें की हैं। हम समस्याओं का डटकर सामना करने में विश्वास रखते हैं। हम भारत सरकार को निर्देश देते हैं कि वह ऐसे प्लेटफार्मों और उन लोगों की पहचान करे जो इसमें लिप्त हैं, ताकि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। कानून अपना काम करेगा। भले ही वे इस देश में कहीं भी छिपे हों, हम उन्हें नहीं छोड़ेंगे।
देशभर में आज ईद-उल-फितर की धूम…. समाजन एक दूसरे को दे रहे मुबारकबाद

नई दिल्ली। आज पूरे देश में ईद-उल-फितर (Eid Ul Fitr 2026) का त्योहार पूरे उत्साह और भाईचारे के साथ मनाया जा रहा है। एक महीने के रोज़ों (Roza) के बाद मुस्लिम समाज (Muslim Brotherhood) में खुशी का माहौल है और ईदगाहों व मस्जिदों (Eidgahs and Mosques) में विशेष नमाज़ अदा की जा रही है। सभी जगह ईद का खास उत्साह देखने को मिल रहा है. सुबह फज्र की नमाज़ के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। ईद-उल-फितर (Eid Ul Fitr 2026) इस्लाम धर्म का बेहद खास त्योहार माना जाता है. पूरे महीने रोजे रखने के बाद जब नया चांद दिखाई देता है, तब शव्वाल महीने की शुरुआत होती है और उसी के पहले दिन ईद मनाई जाती है. इस दिन सुबह लोग ईद की नमाज अदा करते हैं और इसके साथ ही रोजों का सिलसिला समाप्त हो जाता है. यह त्योहार खुशियां बांटने और आपसी भाईचारे को बढ़ाने का संदेश देता है। ईद-उल-फितर का महत्व (Eid ul Fitr 2026 significance) इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान का महीना बहुत पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान पहली बार कुरान शरीफ आई थी. माना जाता है कि इसी दिन से पैगंबर हजरत मुहम्मद के मक्का से मदीना आने के बाद ईद-उल-फितर मनाने की परंपरा शुरू हुई थी. तभी से यह दिन खुशियों के त्योहार के रूप में मनाया जाने लगा। ईद के मौके पर घरों में तरह-तरह के मीठे पकवान बनाए जाते हैं, खासकर सेवइयां. मेहमानों का स्वागत मिठाई से किया जाता है और बच्चों व अपनों को ईदी दी जाती है. लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाई देते हैं. इस दिन दान का भी खास महत्व होता है, इसलिए जरूरतमंदों की मदद करना बेहद शुभ माना जाता है. ईद-उल-फितर क्यों मनाई जाती है?इस्लाम धर्म में ईद-उल-फितर का खास महत्व होता है. रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद लोग अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने उन्हें इबादत करने की ताकत दी. मान्यता है कि सच्चे मन से रखे गए रोजों से अल्लाह खुश होते हैं और अपनी रहमत बरसाते हैं. इसी खुशी और आशीर्वाद को ईद-उल-फितर के रूप में मनाया जाता है. ईद-उल-फितर कैसे मनाई जाती है?ईद के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर साफ-सुथरे और नए कपड़े पहनते हैं और मस्जिद या ईदगाह में जाकर नमाज अदा करते हैं. इसके बाद परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर खुशियां बांटते हैं. घरों में सेवइयां और शीर खुरमा जैसे स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं और एक-दूसरे को मिठाई व तोहफे देकर ईद की मुबारकबाद दी जाती है. यह त्योहार प्यार, भाईचारे और खुशी का संदेश देता है।