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लगातार चौथे हफ्ते बाजार में गिरावट, मिडिल ईस्ट संकट से Nifty 50-BSE Sensex पर दबाव

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आ रहा है। लगातार चौथे हफ्ते बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। वैश्विक अनिश्चितता, महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की दिशा पर दबाव बनाए रखा। निफ्टी-सेंसेक्स का प्रदर्शनसप्ताह के दौरान निफ्टी 50 में 0.16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि आखिरी कारोबारी दिन यह 0.49 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,114.50 पर बंद हुआ। वहीं बीएसई सेंसेक्स हफ्ते के आखिर में 325.72 अंकों (0.44%) की तेजी के साथ 74,532.96 पर बंद हुआ, लेकिन पूरे हफ्ते में इसमें 0.04 प्रतिशत की हल्की गिरावट रही। तेल की कीमतों से बढ़ती चिंतावैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई और भारत के व्यापार घाटे को लेकर चिंता बढ़ गई है। यही वजह है कि जींस का रुख सतर्क बना हुआ है और बाजार पर दबाव बना हुआ है। सेक्टर आधारित प्रदर्शनइस हफ्ते सेक्टरों में मिलाजुला रुख देखने को मिला। आईटी और पीएसयू बैंकिंग सर्विसेज ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि मेटल सेक्टर में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मेटल इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई।हालांकि, व्यापक बाजार में कमजोरी नजर आई-मिडकैप में मामूली बढ़त और स्मॉलकैप में गिरावट देखने को मिली। रुपये में गिरावट और FII की बिकवालीभारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.49 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इसके पीछे डॉलर की मजबूत मांग और विदेशी जींस (FII) की लगातार बिकवाली प्रमुख कारण रहे। पिछले 13 ट्रेडिंग सत्रों में एफआईआई करीब 81,263 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। निफ्टी की रायमोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, निकट अवधि में बाजार का रुख सतर्क ही रहेगा। निफ्टी कच्चे तेल के दाम और पश्चिम एशिया का तनाव जींस की भावना को प्रभावित कर रहा है। विश्लेषकों के अनुसार:निफ्टी के लिए 23,850 तत्काल रेजिस्टेंस हैइसके बाद 24,000 और 24,150 अहम स्तर होंगेनीचे की ओर 22,950 और 22,700 मजबूत सपोर्ट हैं वहीं बैंक निफ्टी के लिए 52,000–53,000 का फाइलरा सपोर्ट और 54,000–55,000 रेजिस्टेंस माना जा रहा है। पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की रिकवरी आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करें। यदि निवेशकों को सतर्क रहकर सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

हाईकोर्ट की सख्ती छिंदवाड़ा कलेक्टर को फटकार 50 हजार का जुर्माना

जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए छिंदवाड़ा के कलेक्टर पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है साथ ही उनके द्वारा जारी आदेश को भी निरस्त कर दिया गया है यह फैसला प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर अहम माना जा रहा है मामले के अनुसार कलेक्टर ने खनन विभाग की रिपोर्ट को बिना ठीक से जांचे मंजूरी दे दी थी जिस पर छिंदवाड़ा निवासी सारंग रघुवंशी ने आपत्ति जताते हुए इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि संबंधित आदेश में गंभीर लापरवाही बरती गई है और बिना उचित जांच के निर्णय लिया गया हाईकोर्ट ने कलेक्टर के इस व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे प्रशासनिक जिम्मेदारी का उल्लंघन माना अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी निर्णय से पहले सभी तथ्यों और रिपोर्टों की गहन जांच आवश्यक होती है ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे यह मामला वर्ष 2025 का बताया जा रहा है जब परिवहन विभाग ने अवैध परिवहन के एक ट्रक को जब्त किया था इस दौरान ट्रक के असली मालिक की पहचान किए बिना याचिकाकर्ता को ही ट्रक मालिक मान लिया गया था याचिकाकर्ता ने बार बार अपनी सफाई पेश की लेकिन विभाग ने उनकी बात को अनसुना कर दिया जिससे उन्हें न्याय के लिए अदालत का रुख करना पड़ा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में न केवल कलेक्टर के निर्णय को निरस्त किया बल्कि यह भी निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि याचिकाकर्ता को दी जाए यह फैसला इस बात का संकेत है कि न्यायालय प्रशासनिक मनमानी और लापरवाही के मामलों में सख्त रुख अपनाए हुए है इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी अधिकारियों को अपने निर्णयों में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए और नियमों का पालन करते हुए ही किसी भी प्रकार का आदेश जारी करना चाहिए अन्यथा उन्हें न्यायालय की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है

मध्यप्रदेश में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का खौफ भोपाल इंदौर समेत तीन शहरों में व्यापारियों को धमकी और करोड़ों की फिरौती

मध्यप्रदेश में एक बार फिर संगठित अपराध और गैंग गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है जहां कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर व्यापारियों को धमकाने और भारी रकम की मांग करने के मामले सामने आए हैं राजधानी भोपाल और इंदौर सहित कई शहरों में हाई प्रोफाइल कारोबारियों को निशाना बनाया गया है जिससे व्यापारिक समुदाय में दहशत का माहौल है भोपाल में एक सोना व्यापारी गौरव जैन को अंतरराष्ट्रीय नंबरों से व्हाट्सएप कॉल कर 10 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गई कॉल करने वाले ने खुद को लॉरेंस गैंग का सदस्य बताते हुए धमकी दी कि रकम नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे धमकी भरे कॉल में भय पैदा करने की कोशिश करते हुए गाली गलौज और चेतावनी दी गई जिससे व्यापारी और उनका परिवार डर के साये में आ गया इसी तरह इंदौर के तुकोगंज इलाके में रहने वाले रियल एस्टेट कारोबारी संजय जैन को भी गैंग के नाम पर धमकी मिली उनसे पहले 10 करोड़ रुपए और बाद में 5 करोड़ रुपए अतिरिक्त की मांग की गई इस तरह कुल 15 करोड़ रुपए की फिरौती की मांग ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं पुलिस के अनुसार धमकियां देने वाला खुद को ‘हैरी बॉक्सर’ के नाम से बता रहा है और बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति गैंग से जुड़ा हुआ है या उसके नाम का इस्तेमाल कर रहा है गौरतलब है कि इससे पहले भी इस नाम से जुड़ा एक आरोपी अशोकनगर में पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है और हाल ही में खरगोन में एक व्यापारी के घर पर गोलीबारी की घटना ने भी सुरक्षा चिंता बढ़ा दी थी सूत्रों के मुताबिक धमकी के इन मामलों में खास तौर पर उन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं या समाज में प्रभावशाली माने जाते हैं बीजेपी नेताओं और बड़े कारोबारियों को टारगेट किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है फिलहाल पुलिस ने अलग अलग जगहों पर शिकायतें मिलने के बाद मामले दर्ज कर लिए हैं और जांच शुरू कर दी गई है साइबर सेल की मदद से अंतरराष्ट्रीय कॉल्स और व्हाट्सएप नंबरों की जांच की जा रही है ताकि धमकी देने वालों तक पहुंचा जा सके इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि संगठित अपराध अब डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहा है और दूर बैठे अपराधी भी स्थानीय स्तर पर दहशत फैलाने में सक्षम हैं ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि वे इन गैंग्स की गतिविधियों पर नियंत्रण रखें और आम लोगों के बीच भरोसा कायम करें

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच Donald Trump का दावा, ईरान की मिलिट्री कमजोर

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की सैन्य क्षमता “पूरी तरह खत्म” हो गई है। हालाँकि, जमीनी स्तर पर संघर्ष अभी भी जारी है और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बनी हुई है। व्हाईट हाउस के साउथ लॉन में अविश्वास से बातचीत के दौरान अख्तर ने कहा कि अमेरिका अपने सैन्य अभियान के लक्ष्य को हासिल करने के बेहद करीब पहुंच चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि मध्य पूर्व में ईरान के खिलाफ चल रहा बड़ा सैन्य अभियान जल्द ही समाप्त हो सकता है। अमेरिका के सैन्य लक्ष्य क्या हैं?स्केल ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता, लॉन्च किए गए सिस्टम और डिफेंस सैटेलाइट को पूरी तरह से तैयार करना है। इसके अलावा ईरान के रक्षा उद्योग, नौसेना, परमाणु ऊर्जा संयंत्र और एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम को भी खत्म करना इस अभियान का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार विकसित न कर सके और वह इस दिशा में आगे न बढ़ सके। “हम जीत गए हैं” – बायस्टअसलहे ने परमाणु हथियारबंद सामान में कहा कि सैन्य स्थिति पूरी तरह से अमेरिका के पक्ष में है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम जीत गए हैं। हमने अपनी सैन्य ताकत खत्म कर दी है।” हालाँकि, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई देशों द्वारा विराम की अपील की जा रही है, लेकिन किआल ने साफ कर दिया कि अमेरिका से युद्ध की दिशा इस दिशा में नहीं सोची जा रही है। उनके अनुसार, जब विरोध पूर्ण तरह से हो रहा हो, तब युद्धविराम करना नहीं होता। होर्मुज जलडमरूमध्य पर जिम्मेदारी का प्रश्नरियल ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर अमेरिका को ज्यादा छूट नहीं है, लेकिन यूरोप, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, इसलिए उन्हें अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मार्ग को फिर से खोलना “आसान सैन्य कदम” हो सकता है, लेकिन इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय सहायता आवश्यक होगी। सहयोगी सहयोगियों की भूमिका पर प्रश्नविद्रोहियों ने नाटो की भूमिका पर भी सवाल उठाया और कहा कि अब तक गठबंधन ने इस मुद्दे पर कोई ठंडा कदम नहीं उठाया है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से भी सक्रिय भूमिका की अपील की। इजराइल के साथ संस्तुतिअछूत ने इजराइल के साथ अमेरिका के मजबूत संतुलन का ज़िक्र करते हुए कहा कि दोनों देश इस संघर्ष में अपने लक्ष्य को हासिल करने के करीब हैं। आर्थिक प्रभाव को खारिज कर दिया गयातेल के गोदामों में प्लांट और बाजार में प्लॉट को लेकर उठती रही कंपनी को दिवालिया घोषित करते हुए कहा कि यह सैन्य कार्रवाई जरूरी थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर “परमाणु हथियार” हासिल नहीं कर पाएगा।

आसमान से आफत मध्यप्रदेश में ओलावृष्टि से खेत तबाह किसान मुआवजे की राह तकते

मध्यप्रदेश में मौसम ने अचानक करवट बदलते हुए किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है बीती रात कई जिलों में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है खासतौर पर डबरा और रायसेन जिलों में स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है जहां किसानों को अपनी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है डबरा और भितरवार अंचल में अचानक तेज हवा गरज और बेर के आकार के ओलों के साथ हुई बारिश ने खेतों में खड़ी गेहूं सहित रबी सीजन की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है किसानों के अनुसार करीब 50 प्रतिशत तक फसलें बर्बाद हो चुकी हैं तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण फसलें जमीन पर गिर गई हैं जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा गांवों में किसानों की चिंता साफ तौर पर देखी जा सकती है सेकरा जागीर सहित कई क्षेत्रों के किसान अपनी फसलों का नुकसान देख मायूस हैं किसान दीपक आकाश अमर सिंह बृजमोहन सुघर सिंह और लक्ष्मण सिंह जैसे कई कृषक बताते हैं कि अब तक कोई सरकारी अमला सर्वे के लिए नहीं पहुंचा है ऐसे में वे सरकार से मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं यह प्राकृतिक आपदा उनके लिए आर्थिक संकट का कारण बनती जा रही है इधर रायसेन जिले के सुल्तानगंज तहसील क्षेत्र में भी मौसम का मिजाज अचानक बिगड़ गया नई गढ़िया गोपई उमरहारी और गुलवाड़ा जैसे गांवों में बारिश के साथ ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है यहां चने और बेर के आकार के ओले गिरने से खेतों में खड़ी गेहूं और चना फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है जिस समय किसान फसल की कटाई की तैयारी कर रहे थे उसी दौरान मौसम के इस बदलाव ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया तेज ठंडी हवाएं और काले बादलों ने पूरे इलाके का माहौल बदल दिया और खेतों में खड़ी तैयार फसलें अब बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं बारिश का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहा बल्कि स्थानीय बाजारों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिला सुल्तानगंज और बेगमगंज क्षेत्रों में चांद रात को लेकर सजी दुकानों पर भी बारिश ने खलल डाल दिया जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों और व्यापारियों दोनों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं अब सभी की नजरें प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं कि जल्द सर्वे कराकर नुकसान का आकलन किया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए ताकि वे इस संकट से उबर सकें

Israel ने ईरान के प्रमुख इलाकों में एयर स्ट्राइक की, तेहरान, करज और इस्फहान प्रभावित

  नई दिल्ली। ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, शनिवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान में कम से कम दो धमाकों की आवाज सुनी गई। एयर स्ट्राइक का असर राजधानी के आसपास के इलाकों शहर-ए-रे और कर्ज पर भी पड़ा। साथ ही, दक्षिणी ईरान के ऐतिहासिक शहर इस्फहान में भी एयर स्ट्राइक की खबर है। जल्द ही, इन हमलों में किसी के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने इन हमलों की पुष्टि की और कहा कि यह स्ट्राइक ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक सरकार के ठिकानों को असर बनाने के लिए की गई है। IDF ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि उनका हमला बेरूत के दक्षिणी उपनगरों के सात इलाकों को खाली करने के नोटिस के साथ जारी है। इन इलाकों में हिजबुल्लाह के इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से हमले होंगे। अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, 2 मार्च से इजरायल के हमलों में लेबनान में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इस हफ़्ते की शुरुआत में, IDF ने दावा किया कि उसने ईरान के बासिज इंटेलिजेंस चीफ इस्माइल अहमदी और एक अन्य सीनियर अधिकारी को मार गिराया। इससे पहले केवल जांच चल रही थी, लेकिन अब इजरायल ने इस बात की पुष्टि कर दी है। IDF ने बताया कि तेहरान के बीचों-बीच बासिज यूनिट के सीनियर कमांडर गुलाम रेजा सुलेमानी सहित कई सीनियर अधिकारियों को भी हवाई हमले में फंसाया गया। इजरायली के अनुसार, अहमदी ने इस साल की शुरुआत में ईरान में हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन प्रदर्शनकारियों में हजारों लोगों की मौत हुई, और इजरायल का दावा है कि अहमदी इसमें शामिल था। आंकड़ों के अनुसार, इजरायली इन हमलों के माध्यम से ईरानी सत्ता पर अधिकारियों की पकड़ को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। हाल के हमलों में कई बड़े ईरानी अधिकारी मारे गए हैं, जिनमें सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई, सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और इंटेलिजेंस मंत्री इस्माइल खतीब शामिल हैं। ईरानी अधिकारियों के खिलाफ इस तरह के एयर स्ट्राइक यह संकेत देते हैं कि इजरायल अब केवल सीमांत या मध्य पूर्व तक ही सीमित नहीं रहना चाहता है, बल्कि वह ईरान के आंतरिक सुरक्षा आयाम और इंटेलिजेंस नेटवर्क को भी प्रभावित बना रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह कार्रवाई मध्य पूर्व की स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के आंकड़ों से गंभीर है। यदि तनाव इसी तरह बढ़ता है, तो यह सीधे तौर पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और सैन्य रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है। इस बीच, ईरानी मीडिया ने केवल धमाकों की पुष्टि की है लेकिन हमले के प्रभाव और हताहतों की जानकारी साझा नहीं की है। इसका मतलब यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अभी भी स्थिति की पूरी संभावनाओं का आकलन कर रहा है। संक्षेप में, इजरायल के हमले यह दबाव हैं कि मध्य पूर्व में संघर्ष अब सिर्फ स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि ईरान के मुख्य शहरों और वरिष्ठ अधिकारियों तक फैल चुका है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक राजनीतिक संतुलन पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की 21 किमी गोवर्धन परिक्रमा भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम

नई दिल्ली: द्रौपदी मुर्मू का मथुरा प्रवास गहरी आस्था और भारतीय संस्कृति की झलक के रूप में सामने आया जहां उन्होंने शनिवार को गिरिराज गोवर्धन पर्वत की लगभग 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा पूरी की यह परिक्रमा न केवल धार्मिक महत्व रखती है बल्कि भारतीय परंपरा में श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक भी मानी जाती है राष्ट्रपति ने पूरे मार्ग में भक्तिभाव के साथ यात्रा की और इस दौरान आम श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह देखने को मिला परिक्रमा के बाद राष्ट्रपति दान घाटी मंदिर पहुंचीं जहां उन्होंने विधिवत पूजा अर्चना की इस दौरान उनके साथ आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहीं मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे लेकिन इसके बावजूद वातावरण पूरी तरह श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत रहा राष्ट्रपति का यह दौरा तीन दिनों का है जिसमें उन्होंने आध्यात्मिक स्थलों का भ्रमण कर भारतीय संस्कृति की गहराई को अनुभव किया शुक्रवार को वे केली कुंज आश्रम पहुंचीं जहां उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए और उनका सत्संग सुना इस दौरान राष्ट्रपति ने संत से एकांत में संवाद भी किया जिसमें अध्यात्म सेवा और जनकल्याण जैसे विषयों पर चर्चा हुई इस मुलाकात ने उनके प्रवास को और भी विशेष बना दिया राष्ट्रपति ने संत प्रेमानंद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संत समाज देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इससे पहले गुरुवार को राष्ट्रपति प्रेम मंदिर पहुंचीं जहां उन्होंने राधा कृष्ण के दर्शन कर पूजा अर्चना की मंदिर का भव्य वातावरण और लेजर शो उन्हें बेहद आकर्षक लगा उन्होंने इसकी सराहना भी की मंदिर परिसर में उनकी सुरक्षा को लेकर विशेष प्रबंध किए गए थे राष्ट्रपति ने मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए गर्भगृह के सामने पहुंचकर दिव्य युगल विग्रह के दर्शन किए और विधिपूर्वक पूजा संपन्न की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह मथुरा प्रवास केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से उनका गहरा जुड़ाव दर्शाता है उनके इस दौरे ने यह संदेश दिया कि देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत आज भी उतनी ही जीवंत और प्रेरणादायक है जितनी सदियों पहले थी

‘धुरंधर 2’ पर सियासी विवाद तेज, बैन की मांग; डायरेक्टर-प्रोड्यूसर पर कार्रवाई की उठी आवाज

मुंबई। बॉक्स ऑफिस पर तेजी से आगे बढ़ रही फिल्म धुरंधर 2 अब राजनीतिक विवादों में घिरती नजर आ रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने फिल्म पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसके प्रदर्शन पर रोक लगाने और निर्माताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अल्वी का कहना है कि फिल्म में माफिया अतीक अहमद की सार्वजनिक हत्या को सही ठहराने का प्रयास किया गया है, जो समाज और न्याय व्यवस्था के लिए गलत संदेश देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या फिल्मों के जरिए इस तरह की घटनाओं को उचित ठहराना सही है। “ऐसी फिल्मों से माहौल खराब होता है” राशिद अल्वी ने आरोप लगाया कि इस तरह की फिल्मों से देश का माहौल खराब होता है। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है ऐसी फिल्मों को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन या फंडिंग मिलती हो, हालांकि इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि अगर फिल्मों के जरिए हत्याओं को जायज ठहराया जाएगा, तो क्या देश में अदालतों की जरूरत ही खत्म हो जाएगी? पाकिस्तान-चीन एंगल पर भी सवाल कांग्रेस नेता ने फिल्म की कहानी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें केवल पाकिस्तान के खिलाफ माहौल दिखाया गया है, जबकि चीन का जिक्र नहीं किया गया। उनके मुताबिक, यह एकतरफा सोच को दर्शाता है। नोटबंदी को लेकर भी उठे सवाल अल्वी ने दावा किया कि फिल्म में नोटबंदी जैसे मुद्दे को भी सही ठहराने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के चित्रण से उन लोगों की पीड़ा नजरअंदाज होती है, जो उस फैसले से प्रभावित हुए थे। बॉक्स ऑफिस पर मजबूत प्रदर्शन विवादों के बीच धुरंधर 2 की कमाई लगातार बढ़ रही है। फिल्म ने रिलीज के शुरुआती दो दिनों में ही 200 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन कर लिया है। इससे पहले इसके पहले भाग धुरंधर ने 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी। प्रोपेगैंडा बनाम एंटरटेनमेंट की बहस फिल्म को लेकर देश में दो धड़े बनते दिख रहे हैं। एक पक्ष इसे प्रोपेगैंडा करार दे रहा है, जबकि दूसरा इसे मनोरंजन और देशभक्ति से जुड़ी कहानी बता रहा है। फिलहाल, धुरंधर 2 पर बैन को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इस विवाद ने फिल्म को लेकर राजनीतिक बहस जरूर तेज कर दी है।

“पत्नी नौकरानी नहीं, बराबर की साथी है” — सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

नई दिल्ली। वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पति को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कहा कि शादी किसी नौकरानी से नहीं, बल्कि जीवनसाथी से की जाती है। अदालत ने दो टूक कहा कि घर के कामों में पति को भी बराबरी से हाथ बंटाना होगा। कोर्ट ने टिप्पणी की कि खाना बनाना, कपड़े धोना या घर संभालना सिर्फ पत्नी की जिम्मेदारी नहीं है। समय बदल चुका है और पति-पत्नी दोनों को मिलकर जिम्मेदारियां निभानी चाहिए। तलाक की मांग पर कोर्ट सख्त मामले में पति ने ‘क्रूरता’ के आधार पर तलाक की मांग की थी। उसका आरोप था कि पत्नी घर का काम नहीं करती और उसके साथ दुर्व्यवहार करती है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पत्नी घरेलू काम ठीक से नहीं करती, तो इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि इस आधार पर तलाक देना उचित नहीं है और पति को अपने नजरिए में बदलाव लाना चाहिए। 2017 में हुई थी शादी दोनों की शादी वर्ष 2017 में हुई थी और उनका एक आठ साल का बेटा भी है। पति का कहना था कि शादी के कुछ ही समय बाद पत्नी का व्यवहार बदल गया और वह उसके माता-पिता के प्रति भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करती है। हालांकि, कोर्ट ने इस विवाद को सुलझाने के लिए पहले मध्यस्थता (मेडिएशन) का रास्ता सुझाया था, लेकिन दोनों के बीच सहमति नहीं बन पाई। अब मामले की अगली सुनवाई तय की गई है। दूसरे मामले में भी दिलचस्प टिप्पणी इसी दिन एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक फरार जोड़े की सुरक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें सीधे राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वे इसके लिए संबंधित दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करें। बताया गया कि यह जोड़ा सोशल मीडिया से प्रभावित होकर इस गलतफहमी में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था कि वह परिसर में शादी कर सकता है और तुरंत सुरक्षा मिल जाएगी। अदालत ने इस पर अप्रत्यक्ष रूप से नाराजगी जताते हुए उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।

अग्निपथ भर्ती में बड़ा बदलाव: नेपाली गोरखाओं की एंट्री बंद, केवल भारतीय गोरखा ही पात्र

आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जून से शुरू होने वाली भर्ती के लिए जारी नोटिफिकेशन में ‘गोरखा’ की जगह केवल ‘भारतीय गोरखा’ का उल्लेख किया गया है। इससे स्पष्ट है कि अब सिर्फ भारत में रहने वाले गोरखा युवा ही आवेदन कर सकेंगे। नेपाल के रुख का असर इस बदलाव के पीछे नेपाल का पहले से चला आ रहा विरोध अहम माना जा रहा है। जब अग्निपथ योजना लागू की गई थी, तब नेपाल ने इसे भारत, ब्रिटेन और नेपाल के बीच हुए पुराने त्रिपक्षीय समझौते के खिलाफ बताया था। नेपाल के विरोध के बाद वहां स्थित भारतीय सेना के दो भर्ती केंद्र भी बंद हो गए थे, जहां से लंबे समय से गोरखा सैनिकों की भर्ती होती थी। भारत ने कई बार बातचीत के जरिए स्थिति सुलझाने की कोशिश की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। सुरक्षा और अवसर भी वजह सूत्रों के अनुसार, नेपाल में बढ़ते भारत-विरोधी माहौल और बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इसके अलावा नेपाली गोरखाओं के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निजी सुरक्षा एजेंसियों और विदेशी सेनाओं में काम करने के बेहतर अवसर भी मौजूद हैं। बताया जाता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी कई गोरखा सैनिकों को रूसी सेना में काम करने के मौके मिले। वहीं, ब्रिटेन की सेना में गोरखाओं की भर्ती पहले से जारी है। भारतीय सेना में पहले से बड़ी मौजूदगी फिलहाल भारतीय सेना की गोरखा राइफल्स में करीब 30 हजार से अधिक नेपाली गोरखा सैनिक सेवा दे रहे हैं। इसके अलावा नेपाल में बड़ी संख्या में पूर्व गोरखा सैनिक भी हैं, जिन्हें भारत सरकार हर साल लगभग 500–600 करोड़ रुपये पेंशन के रूप में देती है। भारतीय गोरखा युवाओं को फायदा इस फैसले से भारत में रह रहे गोरखा युवाओं के लिए सेना में भर्ती के अवसर बढ़ने की संभावना है। अब वे सीमित प्रतिस्पर्धा के बीच ज्यादा मौके हासिल कर सकेंगे। कुल मिलाकर, अग्निपथ योजना के तहत यह बदलाव भारत-नेपाल सैन्य सहयोग के लंबे इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।