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फिल्म ‘सरके चुनर’ के विवादित मामले में राइटर का बयान, डायरेक्टर को सतर्क किया

नई दिल्ली।  नोरा फतेही और संजय दत्त के गाने ‘सरके चुनर सरके’ के हिंदी वर्जन पर काफी बवाल मचा था। इस गाने के बोल काफी अश्लील थे। गाने पर मचे बवाल के बाद सरकार की तरफ से गाने को बैन कर दिया गया और इस गाने को यूट्यूब से भी हटा लिया गया है। गाने पर मचे बवाल के बाद नोरा फतेही और गाने के गीतकार रकीब आलम ने अपने आप को गाने से अलग कर लिया था। अब रकीब आलम का कहना है कि उन्होंने फिल्म के डायरेक्टर को इस गाने को लेकर चेतावनी दी थी। गाने के राइटर नहीं करना चाहते थे अनुवाद‘सरके चुनर सरके’ संजय दत्त की साउथ फिल्म ‘केडी: द डेविल’ फिल्म का गाना था। इस गाने को साउथ की भाषा से हिंदी में ट्रान्सलेट किया गया था। गाने के राइटर रकीब आलम ने टाइम्स नाउ से खास बातचीत में कहा कि वो नहीं चाहते थे गाने को हिंदी में ट्रान्सलेट करना, लेकिन केडी के डायरेक्टर ने कहा कि उन्हें गाने का ट्रान्सलेशन ही चाहिए। रकीब आलम ने कहा कि उन्हें सरके चुनर सरके के बोल पसंद नहीं आए थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने डायरेक्टर से कहा था कि अगर गाना रिलीज होगा तो बहुत हंगामा होगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने डायरेक्टर से कहा था कि वो वही लिरिक्स लिखेंगे जो उनकी छवि को सूट करे। लेकिन केडी के डायरेक्टर ने रकीब से कहा कि वो इस गाने का शब्द-दर-शब्द हिंदी में अनुवाद चाहते हैं। गाने का दूसरा वर्जन भी लिखा गया थारकीब ने कहा कि उन्होंने केडी के डायरेक्टर से कहा, “तो मैंने कहा कि ये लिरिक्स नहीं हैं, ये अनुवाद है, आप किसी और से अनुवाद करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आपने गाना लिखा है, तो मैं किसी और से कैसे छठा गाना लिखने को कह सकता हूं? मैंने कहा कि मैं इसे अपने तरीके से लिखूंगा। मैंने एक वर्जन लिखकर उन्हें भेजा भी था। उन्होंने कहा कि उन्हें लिरिक्स का लाइन बाय लाइन और शब्द-दर-शब्द अनुवाद चाहिए। मैंने कहा मैं नहीं करूंगा। आप किसी और से कह दें इसे लिखने के लिए।” डायरेक्टर को दी थी चेतावनीगीतकार ने आगे कहा कि उन्होंने फिल्म के डायरेक्टर को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा, “मैंने ये भी कहा कि ये गाना चलेगा नहीं। बहुत ही हंगामा होगा। इसके बहुत बुरे परिणाम होंगे। तो उन्होंने कहा कि वो मैनेज कर लेंगे और उन्होंने मुझसे चिंता न करने के लिए कहा।” 5 भाषाओं में रिलीज होगी फिल्मकेडी-द डेविल की बात करें तो फिल्म को डायरेक्टर प्रेम ने डायरेक्ट किया है। ये फिल्म कन्नड़, मलयालम, तमिल, तेलुगु और हिंदी भाषा में रिलीज होगी। फिल्म 30 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

आईपीएल के एक सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज, टॉप लिस्ट में हर्षल पटेल का नाम भी शामिल

नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का 19वां सीजन 28 मार्च 2026 से शुरू होने जा रहा है। आईपीएल के इतिहास में कुछ गेंदबाजों ने एक सीजन में अपने बेहतरीन प्रदर्शन से रिकॉर्ड बनाए हैं। इनमें से सबसे चर्चित नाम है हर्षल पटेल, जिन्होंने आईपीएल 2021 में 32 विकेट लेकर सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड बनाया। हर्शल पटेल ने उस साल रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की ओर से खेलते हुए 15 मैचों में कुल 32 विकेट झटके थे। इस दौरान उन्होंने एक मैच में 5 विकेट लेने का कारनामा भी किया था, जो उनके फॉर्म और स्ट्राइक की क्षमता को दिखाता है। हर्षल की इस उपलब्धि ने उन्हें आईपीएल के शीर्ष गेंदबाजों में शामिल कर दिया। दवेन ब्रावो, चेन्नई सुपर किंग्स के दिग्गज ऑलराउंडर, आईपीएल 2013 में हर्षल पटेल के बराबर 32 विकेट निकाल चुके हैं। ब्रावो ने 18 मैचों में सिर्फ 7.95 की इकोनॉमी से रन खर्च किए थे। उनकी लगातार प्रभावशाली गेंदबाजी ने चेन्नई सुपर किंग्स को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी, हालांकि फाइनल में मुंबई इंडियंस ने जीत हासिल की। कगिसो रबाडा ने भी आईपीएल में शानदार प्रदर्शन किया। दिल्ली कैपिटल्स की ओर से खेलते हुए रबाडा ने आईपीएल 2020 में 17 मैचों में कुल 30 विकेट लिए। इस सीजन में उन्होंने दो मैचों में 4 विकेट लेने का कारनामा किया, जो उनकी घातक गति और विकेट लेने की आदत को बरकरार है। लसिथ मलिंगा, मुंबई इंडियंस के लेग स्पिनर, आईपीएल 2011 में अपने बेस्ट फॉर्म में थे। उन्होंने 16 मैचों में 28 विकेट झटके। इस सीजन का उनका बेस्ट प्रदर्शन था, जब उन्होंने 13 रन देकर 5 विकेट लिए थे। मलिंगा की यॉर्कर क्षमता और अनुभव ने उन्हें आईपीएल के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में शामिल कर दिया। जेम्स फॉकनेर, राजस्थान रॉयल्स की तरफ से आईपीएल 2013 में खेलते हुए भी 28 विकेट लेने में सफल रहे। उन्होंने 16 मैचों में 6.75 की बेहतरीन इकोनॉमी से रन खर्च किए। फॉकनेर की निरंतरता और किफायती गेंदबाजी ने राजस्थान रॉयल्स के प्रदर्शन को बढ़ाया। हाल ही में मोहम्मद शमी ने IPL 2023 में गुजरात टाइटंस के लिए धमाकेदार प्रदर्शन किया। भारतीय तेज गेंदबाज ने 17 मैचों में कुल 28 विकेट झटके। शमी की गति और बल्लेबाजों को दबाव में डालने की क्षमता ने उन्हें इस लिस्ट में शामिल किया। IPL के इन रिकॉर्डधारी गेंदबाजों की उपलब्धियों से यह स्पष्ट होता है कि एक सीजन में विकेट लेने की चुनौती केवल गति और कौशल नहीं बल्कि रणनीति, अनुभव और मानसिक तैयारी पर भी निर्भर करती है। हर्षल पटेल, ड्वेन ब्रावो, रबाडा, मलिंगा, फॉकनेर और शमी जैसे गेंदबाजों ने साबित किया कि IPL में निरंतरता बनाए रखना और दबाव में प्रदर्शन करना ही उन्हें सर्वश्रेष्ठ बनाता है। IPL 2026 में भी दर्शकों इन गेंदबाजों के रिकॉर्ड को तोड़ने और नए सितारे उभरने की उम्मीद कर रहे हैं। हर्षल पटेल का नाम अब भी टॉप में दर्ज है, लेकिन नए सीजन में कौन सी टीम और कौन सा गेंदबाज नई उपलब्धि बनाएगा, यह देखने वाली बात होगी।

वनडे सीरीज तय, आयरलैंड ने अफगानिस्तान के खिलाफ 5 मैचों की मेजबानी करने का फैसला किया

नई दिल्ली: क्रिकेट आयरलैंड ने अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के साथ वनडे सीरीज आयोजित करने का फैसला किया है, जो 5 से 14 अगस्त 2026 के बीच खेले जाएंगे। इस फैसले ने कई लोगों के मन में सवाल उठाए हैं, क्योंकि तालिबान सरकार के तहत अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों पर लगातार रोक और भेदभाव जारी है। इसके बावजूद, आयरलैंड ने नैतिक परेशानी के बावजूद यह फैसला संगठन के व्यापक हित को ध्यान में रखा हुआ है। बोर्ड की मुख्य कार्यकारी सारा कीन ने बताया, “यह फैसला न तो वित्तीय कारणों से लिया गया है और न ही किसी कानूनी मजबूरी के कारण। हमें इस फैसले में नैतिक बेचैनी महसूस हो रही है, क्योंकि हम अफगानिस्तान महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ हैं। लेकिन इस दौरे को हम अफगानिस्तान महिला टीम की स्थिति को उजागर करने का अवसर भी मानते हैं।” कीन ने बताया कि आयरलैंड ने अफगानिस्तान की महिला टीम को भी आयरलैंड में खेलने का निमंत्रण दिया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनके मुद्दे को प्रमुखता दी जा सके। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा व्यापक सिद्धांत है, जिसके तहत खिलाड़ी अपनी दर्जनों से अलग देखे जाते हैं, जैसा हाल ही में ओलंपिक आयोजनों में देखा गया। आयरलैंड और अफगानिस्तान के बीच पहला वनडे 5 अगस्त को और दूसरा 7 अगस्त को ब्रेडी में खेला जाएगा। तीसरा, चौथा और पांचवां वनडे 10, 12 और 14 अगस्त को बेलफास्ट में आयोजित होंगे। इससे आयरलैंड को आगामी 50 ओवर वर्ल्ड कप और ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए तैयारी का भी अवसर मिलेगा। इस बीच, आयरलैंड 28 मई से 4 जून तक वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के साथ टी20 त्रिकोणीय सीरीज भी खेलेगा। बोर्ड ने 2027 तक पाकिस्तान दौरे की योजना भी बनाई है, जिसमें एक टेस्ट मैच शामिल होगा। यह सब तैयारियां अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और खिलाड़ियों के विकास को ध्यान में रखते हुए की जा रही हैं। क्रिकेट प्रतियोगिताओं का आयोजन है कि यह निर्णय आयरलैंड के लिए दोहरी चुनौती पेश करता है। एक तरफ बोर्ड को नैतिक जिम्मेदारी निभानी है, वहीं खिलाड़ियों और टीम के भविष्य को ध्यान में रखकर प्रतिस्पर्धी क्रिकेट भी सुनिश्चित करना है। कीन ने स्पष्ट किया कि बोर्ड की कोशिश यही है कि अफगान महिला टीम का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में बना रहे और उनके संघर्ष को वैश्विक मंच पर उजागर किया जा सके। इस फैसले को लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समुदाय में मिली-जुली प्रतिक्रिया रही। कुछ एथलीटों ने इसे “सहज समझौता” कहा, जबकि कुछ ने इसे “खेल और नैतिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने का प्रयास” बताया। आयरलैंड की योजना स्पष्ट है: टीम को आगामी टूर्नामेंट और क्वालिफिकेशन मुकाबलों के लिए अधिक अवसर प्रदान करना, जबकि सामाजिक और नैतिक मानकों को नजरअंदाज नहीं करना। इस फैसले से यह संदेश भी गया कि अंतरराष्ट्रीय खेलों में खिलाड़ियों को उनके देश की राजनीति से अलग मानक देखा जा सकता है। इस तरह, अफगानिस्तान के खिलाफ 5 वनडे मैचों की सीरीज न केवल क्रिकेट के लेस से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक मंच पर महिलाओं के अधिकारों और खेल के व्यापक सिद्धांत को भी उजागर करती है।

टेस्ट क्रिकेट की वापसी का इशारा, आर अश्विन के अनुसार विराट कोहली में क्षमता बरकरार

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली ने पिछले साल इंग्लैंड दौरे से पहले टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया, जिसने क्रिकेट फैंस और आलोचकों दोनों को चौंका दिया। कोहली के इस फैसले को लेकर पूर्व स्पिनर आर अश्विन ने कहा है कि उनके अनुसार कोहली में अभी भी टेस्ट क्रिकेट बाकी था और वह रेड-बॉल क्रिकेट में टीम इंडिया के लिए योगदान दे सकते थे। अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, “मैंने विराट से सीधे कहा था कि टेस्ट क्रिकेट में उनमें अभी भी क्रिकेट बाकी है। लेकिन सच कहूं तो यह ठीक है। भारत में सोच को लेकर थोड़ी समस्या है। उन्होंने हमेशा टीम को पहले रखा। टीम की जीत उनके लिए सबसे अहम रही। रिटायरमेंट का फैसला उनका है, लेकिन मुझे विश्वास है कि उनमें और क्रिकेट खेलने की क्षमता नियत थी।” विराट कोहली के टेस्ट से संन्यास लेने के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। उनके लिए 2024-25 का ऑस्ट्रेलिया दौरा चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। वहां ऑफ-स्टंप के बाहर गेंदबाजी पर उनकी कमजोरी सामने आई। लय पाने के लिए कोहली रणजी ट्रॉफी में भी उतरे, लेकिन वहां उम्मीद के मुताबिक रन नहीं बने। अश्विन ने कहा कि बढ़ती उम्मीदों और मीडिया की सुर्खियों से थोड़ी राहत मिलने के कारण ही कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से दूर जाने का फैसला लिया। उनका टेस्ट करियर शानदार रहा; 123 टेस्ट मैचों में 9,230 रन, 30 शतक और 31 अर्द्धशतक बनाना उनकी क्षमता का प्रमाण है। विराट का सर्वोच्च स्कोर 254 रन रहा। कप्तानी की भूमिका में भी कोहली ने टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया को बढ़ाया। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में शामिल हुई। अश्विन ने कहा, “विराट के टेस्ट से संन्यास लेने से रेड-बॉल क्रिकेट का एक शानदार चैप्टर अचानक बंद हो गया।” आर अश्विन खुद लंबे समय तक विराट के साथ टेस्ट टीम का हिस्सा रहे। अश्विन ने साल 2024 के अंत में ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था। कोहली, अश्विन और रोहित शर्मा के संन्यास ने भारतीय क्रिकेट मैनेजमेंट पर भी सवाल खड़े कर दिए थे। इसने यह दिखाया कि टीम ने ऐसे खिलाड़ी खो दिए जो अभी काफी योगदान दे सकते थे। अश्विन ने यह भी कहा कि कोहली ने हमेशा टीम को सर्वोपरि रखा और व्यक्तिगत उपलब्धियों से ज्यादा टीम की जीत को महत्व दिया। यही वजह है कि कोहली का टेस्ट क्रिकेट से जाना भारतीय क्रिकेट के लिए दर्दनाक नुकसान है, लेकिन फैंस को टी20 और वनडे फॉर्मेट में उनके शानदार प्रदर्शन का इंतजार रहेगा। विराट कोहली का टेस्ट करियर न केवल व्यक्तिगत आंकड़ों की वजह से याद किया जाएगा, बल्कि उनके कप्तान के रूप में टीम इंडिया को बढ़ाने देने, दबाव में शांत रहने और खेल की गुणवत्ता बनाए रखने के दृष्टिकोण से भी हमेशा याद रखा जाएगा।

RCB के स्टार खिलाड़ी आर अश्विन बोले, टीम में संतुलन, भविष्य के सीजन में जीत की संभावना

नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 का खिताब जीतने वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की आने वाली 2026 सीजन की टीम को लेकर दिग्गज स्पिनर आर अश्विन ने जमकर मुकाबला किया है। अश्विन ने कहा कि RCB की मौजूदा स्क्वॉड बैलेंस्ड और मजबूत है, और यह टीम अगले कुछ सीजन में फिर से IPL खिताब जीतने में सक्षम है। अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, “RCB इस स्क्वॉड के साथ अगले दो सालों में एक और खिताब जीत सकती है। IPL जीतना आसान नहीं है, लेकिन इस टीम में जो बैलेंस, फिटिंग और रिप्लेसमेंट ऑप्शन मौजूद हैं, वे इसे खास बनाते हैं।” उन्होंने टीम के स्ट्रक्चरल कॉन्ट्रैक्ट की भी मुकाबला किया। IPL 2025 से पहले हुए मेगा ऑक्शन में टीम ने विराट कोहली, रजत पाटीदार और यश दयाल को छोड़कर बाकी खिलाड़ियों को रिलीज किया। इसके बाद ऑक्शन में फिल सॉल्ट, जितेश शर्मा, जोश हेजलवुड, टिम डेविड और भुवनेश्वर कुमार जैसे खिलाड़ियों को शामिल किया गया, जिससे टीम को बढ़त मिली। अश्विन का मानना ​​है कि इन टीमों ने RCB को एक बड़े स्टार पर निर्भर रहने की जगह बैलेंस और बैलेंस टीम बना दिया है। “टीम की खासियत अब यह है कि हर रोल के लिए ऑप्शन मौजूद हैं। अगर कोई खिलाड़ी अवेलेबल नहीं होता है, तो टीम अलग-अलग कॉम्बिनेशन के साथ मैदान पर उतर सकती है। यही उन्हें लंबे समय तक टॉप टीम बनाए रख सकता है,” अश्विन ने कहा। हालांकि, टीम के तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड की फिटनेस अभी भी चिंता का विषय है। शुरुआती मैचों में उनका अवेलेबल न होना टीम की स्ट्रैटेजी पर असर डाल सकता है, लेकिन अश्विन ने भरोसा दिलाया कि टीम के पास काफी ऑप्शन हैं। अश्विन ने यह भी कहा कि यह सपोर्ट सिर्फ पिछले टाइटल जीतने की वजह से नहीं है, बल्कि टीम की स्ट्रक्चर, बैलेंस और मुश्किल हालात से निपटने की कैपेसिटी को देखते हुए दिया गया है। उन्होंने कहा, “RCB के पास बैटिंग, स्पिन और तेज बॉलिंग के सभी रनों में डेप्थ मौजूद है। पिछले सीजन की तुलना में टीम अब हर पोजिशन से निपटने के लिए बेहतर तैयार है।” आरसीबी आईपीएल 2026 का पहला मैच 28 मार्च को सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के खिलाफ खेलेगी। टीम ने इस बार अभ्यास सत्र और रणनीति पर विशेष जोर दिया है। दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली और नए शामिल हुए खिलाड़ी टीम में संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे। अश्विन के अनुसार, टीम की सफलता का रहस्य बढ़ता और संतुलन है। पहले जहां आरसीबी पर स्टार खिलाड़ियों पर अत्यधिक निर्भर होने का आरोप था, अब टीम के हर रोल में विकल्प मौजूद हैं। इसके चलते आरसीबी अगले कुछ सीजन में लगातार शीर्ष टीमों में बनी रहेगी और फिर से खिताब जीतने की मजबूत दावेदार है। इस बार टीम के पास बैटिंग और बॉलिंग दोनों में गहराई है। कोहली, डेविड और फिल सॉल्ट जैसे खिलाड़ी बल्लेबाजी को बढ़ाएंगे, जबकि भुवनेश्वर कुमार और अश्विन की मौजूदगी बॉलिंग में संतुलन बनाए रखेगी। इस संतुलित संरचना के चलते आरसीबी की रणनीति और प्रदर्शन में निरंतरता बनी रहेगी।

दोहा वर्ल्ड कप स्थगित, मिडिल ईस्ट की हालात को देखते हुए वर्ल्ड जिमनास्टिक्स का फैसला

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनावों के बीच अप्रैल 2026 में दोहा, कतर में आयोजित होने वाला आर्टिस्टिक जिमनास्टिक्स वर्ल्ड कप एक्टिव कर दिया गया है। यह फैसला वर्ल्ड जिमनास्टिक्स ने शुक्रवार रात एक ऑपरेशन ऑनलाइन वोट के बाद लिया। संस्था ने बयान में कहा कि 15 से 18 अप्रैल तक होने वाला अपैरेट्स विश्व कप अब एक्टिव रहेगा और इस इवेंट को भविष्य में रीशेड्यूल नहीं किया जाएगा। वर्ल्ड जिमनास्टिक्स ने कहा कि मिडिल ईस्ट में मौजूदा हालात के कारण कई देशों की टीमों ने पहले ही इस प्रतियोगिता के लिए अपना आवेदन एक्टिव कर दिया था। शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से मिडिल ईस्ट में स्थिरता बढ़ेगी। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय खेल संचालकों को सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के गंभीर मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। वर्ल्ड जिमनास्टिक्स ने सभी प्रभावित लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्ति की और उम्मीद जताई कि जल्द ही मिडिल ईस्ट में स्थिरता लौटेगी। संगठन ने यह भी साफ़ किया कि अप्रैल में काहिरा और ओसिजेक में होने वाले अपरेटस वर्ल्ड कप के लिए देर से आवेदन करने पर कोई पेनल्टी नहीं गिल। वर्ल्ड जिमनास्टिक्स ने नियमों में कुछ एक्सरसाइज को भी मंज़ूरी दी है। अब रैंकिंग और वर्ल्ड चैंपियनशिप क्वालिफिकेशन के लिए हर अपरेटस पर पांच मुकाबलों में तीन सबसे ज़्यादा स्कोर वाले इवेंट्स को आधार बनाया जाएगा। संस्था ने कहा, “स्थगन का फ़ैसला खास हालात के कारण लिया गया है। इससे जुड़े दूसरे आधिकारिक नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा।” मिडिल ईस्ट संकट का असर दूसरे स्पोर्ट्स इवेंट्स पर भी पड़ा है। उदाहरण के लिए, Formula 1 कैलेंडर में भी बदलाव हुआ है। 2026 सीज़न में होने वाली बहरीन और सऊदी अरब ग्रां प्री रेस कैंपेन कर दी गई हैं। 12 अप्रैल को साखिर और 19 अप्रैल को जेद्दा में होने वाली रेस इस इलाके में सुरक्षा दबाव और लॉजिस्टिक दिक्कतों की वजह से कैंसिल कर दी गई हैं। इसके चलते Formula 1 का 22-रेस कैलेंडर छोटा हो जाएगा और स्प्रिंग ब्रेक लंबा हो जाएगा। एथलीटों का रुझान है कि मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते संघर्षों और प्रतिबंधों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय खेल संचालक भविष्य में भी इस क्षेत्र में इवेंट आयोजित करने में सतर्क रहेंगे। वर्ल्ड जिम्नास्टिक्स ने कहा कि सुरक्षा और खिलाड़ी की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। अवसर विश्व कप के कारण दोहा में ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक और टीम व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा है। टीमों को नई स्ट्रैटेजी और आगामी मुकाबलों के अनुसार अपने कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ेगा। इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय जिम्नास्टिक्स कम्युनिटी में प्रतिबंधों की झलक मिली है, लेकिन खिलाड़ियों और संचालकों ने इसे सुरक्षित और जिम्मेदार कदम के रूप में स्वीकार किया है।

BCCI ने घोषित किया शेड्यूल, जून में टीम इंडिया खेलेगी आयरलैंड के खिलाफ T20

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने शनिवार की सुबह टीम इंडिया के आयरलैंड दौरे का शेड्यूल जारी कर दिया। भारतीय टीम जून 2026 में आयरलैंड में दो T20 मुकाबले खेलने के लिए रवाना होगी। बीसीसीआई के अनुसार, पहला मैच 26 जून और दूसरा मुकाबला 28 जून को होगा। दोनों ही मुकाबले बेलफास्ट में खेले जाएंगे। यह टीम इंडिया का आयरलैंड का चौथा दौरा होगा। इससे पहले भारतीय टीम 2018, 2022 और 2023 में आयरलैंड का दौरा कर चुकी है। वहीं, 2007 के बाद यह पहला मौका होगा जब भारतीय टीम बेलफास्ट में खेलेगी। आयरलैंड क्रिकेट टीम और वहां के फैंस हमेशा टीम इंडिया के दौरे का बेसब्री से इंतजार करते हैं। बीसीसीआई आयरलैंड दौरे पर अक्सर युवा खिलाड़ियों को टीम में शामिल करती रही है। इस बार यह देखने लायक होगा कि विश्व कप जीतने वाली सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली टीम जाएगी या कोई और कप्तान युवा टीम की हासिल करेगा। T20 में भारत का आयरलैंड के खिलाफ अजेय रिकॉर्ड है। अब तक दोनों टीमों के बीच 8 T20 मैच खेले गए हैं और टीम इंडिया ने सभी में जीत हासिल की है। इस जीत का रिकॉर्ड भारतीय टीम के लिए आयरलैंड दौरे से पहले आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। आयरलैंड ने भी 2026 के लिए अपना शेड्यूल घोषित किया है। भारत के खिलाफ सीरीज से पहले आयरलैंड टीम वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के खिलाफ त्रिकोणीय T20 सीरीज खेलेगी, जो 28 मई से 4 जून तक चलेगी। इसके बाद आयरलैंड को अफगानिस्तान के खिलाफ 5 वनडे मैचों की सीरीज खेलनी है, जो 5 से 14 अगस्त के बीच आयोजित होगी। इस दौरे को लेकर चर्चा का एक पहलू यह भी है कि आयरलैंड ने अफगानिस्तान में महिला और महिला क्रिकेट टीम के अधिकारों के हनन को लेकर मुखर रुख अपनाया था। ऐसे में भारत की सीरीज से पहले अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे खेलने वाला कदम माना जा रहा है। सीबीए की मुख्य कार्यकारी सारा कीन ने कहा, “यह फैसला न तो वित्तीय कारणों से लिया गया है और न ही किसी कानूनी मजबूरी में, बल्कि इसे संगठन के व्यापक हित में लिया गया है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि टीम का दौरा सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी रूप से सफल रहे।” इस दौरे के दौरान टीम इंडिया को आयरलैंड की तेज़ पिच और मौसम की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। बेलफास्ट की परिस्थितियों में गेंदबाजों और बल्लेबाजों की रणनीति और फिटनेस महत्वपूर्ण साबित होगी। वहीं युवा खिलाड़ियों के लिए यह दौरा अंतरराष्ट्रीय अनुभव लेने और अपनी क्षमता दिखाने का सुनहरा मौका है। भारतीय टीम का यह दौरा आगामी टी20 विश्व कप की तैयारियों के पन्नों से भी अहम माना जा रहा है। आयरलैंड के खिलाफ अजेय रिकॉर्ड और पिछले अनुभव टीम के खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को और मजबूत करेंगे। बीसीसीआई ने कहा है कि इस दौरे पर टीम के चयन और रणनीति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

आईपीएल 2026: विराट कोहली ने साथी खिलाड़ियों को दिया ‘एक भी मिनट बर्बाद ना करें’ का गुरु मंत्र

नई दिल्ली आईपीएल 2026 के प्रोजेक्ट से पहले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली ने टीम के बाकी सदस्यों को प्रेरित करते हुए कहा है कि उन्हें अभ्यास के हर सत्र का पूरा खेल खेलना चाहिए और एक मिनट में भी ब्रेक नहीं लेना चाहिए। माइकल का यह संदेश टीम की तैयारी और ग्रेड संवर्धन के लिए आया है। इस बार की चैंपियन सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के साथ 28 मार्च को होम ग्राउंड एम. के साथ आरसीबी का पहला मुकाबला। चिन्नास्वामी स्टेडियम, बेंगलुरु में खेला जाएगा। इस मैच में और पूरे सीजन में टीम के खिलाड़ियों का प्रदर्शन अच्छा रहा। आरसीबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रैक्टिस सत्र का वीडियो साझा किया है, जिसमें कोहली टीम के साथ बातचीत नीचे दी गई है। कोहली ने कहा, ”पिछले दो-तीन सीजन में हमने कड़ी मेहनत की, जिससे हमें आईपीएल 2025 में पहली बार टाइटल जीतने में मदद मिली। विराट ने टीम को यह भी याद दिलाया कि कर्मचारियों को नौकरानी भेजना आसान नहीं है, और इसके लिए मानसिक तैयारी और शारीरिक फिटनेस दोनों जरूरी हैं। उनके जोर हर खिलाड़ी से पूरी क्षमता का उपयोग किया जा रहा है। कोहली 2008 से आरसीबी से जुड़े हुए हैं और लंबे समय तक टीम के कप्तान भी रहे हैं। उन्होंने टीम के लिए कई स्मारकों का प्रदर्शन किया। आईपीएल 2025 में खिताब जीतने में उनका योगदान बेहद अहम था। कोहली ने उस सीज़न में 15 मैचों में 8 मैचों में 657 रन बनाये थे। हालाँकि, विराट ने अंतर्राष्ट्रीय टी20 से संन्यास ले लिया है, लेकिन आईपीएल में उन्हें अब भी आकर्षण का केंद्र बना लिया गया है। आईपीएल 2026 में उनके चाहने वालों को उम्मीद है कि वह टीम के लिए नाटकीय प्रदर्शन करेंगे और प्रदर्शन में लगातार योगदान देंगे। आरसीबी के लिए यह सीज़न डीवीडी बनाने वाला है क्योंकि अब अन्य रिकॉर्ड भी पहले से अधिक मजबूत और तैयार हैं। कोहली के नेतृत्व और अनुभव से लेकर टीम की रणनीति और प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद है। उनके गुरु मंत्र का उद्देश्य टीम को सकारात्मक प्रेरणा और निर्देशन के साथ मैदान पर उतारना है। आईपीएल 2026 के इस सीजन में आरसीबी के लिए डिफेंस डिफेंस और टीम की नई रणनीति परखने का मौका मिलेगा। विराट कोहली की प्रेरणा और खिलाड़ियों की मेहनत इस बार टीम को नई जहां तक ​​ले जाने की कोशिश है।

गौतम गंभीर ने डर के मारे खाया था बत्तख का मांस, गेंदबाज आशीष नेहरा ने किया था सावधान !

नई दिल्ली। IPL Story Gautam Gambhir three ducks in a row: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप में भारत को चैंपियन बनाने वाले कोच गौतम गंभीर के इंडियन प्रीमियर लीग 2014 का एक मजेदार किस्सा सामने आया है. उन्होंने एक बार बताया था कि कैसे तीन मैच में शून्य पर आउट होने के बाद उन्होंने आशीष नेहरा के डराने के बाद बत्तख का मांस चखा था. आशीष नेहरा के चिढ़ाने पर गौतम गंभीर ने चखा था बत्तख का मांसभारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने आईपीएल का एक मजेदार किस्सा साझा किया था. 2014 में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) सीजन की शुरुआत उनके लिए कितनी खराब रही थी. उस समय कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान गंभीर टूर्नामेंट की शुरुआत में लगातार तीन मैचों में शून्य पर आउट हो गए थे. गंभीर ने एक मजेदार घटना का जिक्र किया जिसमें पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा शामिल थे. गंभीर ने बताया कि आशीष नेहरा ने उनसे कहा था कि वह रात के खाने में डक ऑर्डर करें ताकि चौथी बार शून्य पर आउट होने से बच सकें. गंभीर ने हरभजन सिंह के शो पर खुलासा किया था, “दिल्ली के चार-पांच लड़के डिनर टेबल पर बैठे थे. आशीष नेहरा ने डक ऑर्डर किया. उन्होंने मुझसे कहा कि डिनर में डक खा लो, नहीं तो अगले मैच में फिर से डक मिल सकता है. मैंने बस थोड़ा सा चखा. उस मैच में मैंने एक रन बनाया और नेहरा ने मुझे उसके बाद मैसेज भी किया.” लगातार तीसरी बार डक पर आउट होने के बाद गंभीर ने बताया कि उनकी टीम के को-ओनर शाहरुख खान से बातचीत हुई थी. गंभीर ने कहा कि वह खुद को प्लेइंग 11 से बाहर करना चाहते थे, लेकिन शाहरुख इसके खिलाफ थे. “2014 में अबू धाबी में मैंने आईपीएल की शुरुआत लगातार तीन डक के साथ की थी. चौथे मैच में मैंने एक रन बनाया. हमने अपने पहले पांच में से चार मैच हार दिए थे. हम गेम हारने के बाद रिट्ज कार्लटन लौट रहे थे. वह लॉबी में खड़े थे. उन्होंने मुझे साइड में ले जाकर पूछा कि क्या हो रहा है. मैंने कहा कि मैं खुद को बाहर करने का सोच रहा हूं. गंभीर ने याद किया, “उन्होंने मुझसे कहा, ‘जब तक तुम यहां हो और खेलना चाहते हो, खुद को बाहर नहीं कर सकते.’ उन्होंने मुझसे वादा लिया कि जब तक मैं टीम में हूं, हर मैच खेलूंगा. उसके बाद मैंने लगातार दो-तीन हाफ सेंचुरी लगाईं और 2014 मे हम जीते. कप्तानी के सात सालों में शाहरुख के साथ मेरी यही एक क्रिकेट की बातचीत थी.”

'क्रूड ऑयल' ने बदली थी गल्फ देशों की किस्मत, फिर अमेरिका ने कैसे किया तेल साम्राज्य पर कब्जा?

नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद से पूरे मिडिल ईस्ट में खलबली मची हुई है. 28 फरवरी को हुए इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई. इसके बाद ईरान ने भी अमेरिका और इजरायल पर पलटवार शुरू कर दिया. इस युद्ध का असर पहले तो सिर्फ मिडिल ईस्ट पर था लेकिन अब धीरे-धीरे इसका असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है. युद्ध की वजह से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई, शिपिंग रूट्स और ईंधन बाजार पर भारी दबाव दिखाई दे रहा है. पूरी दुनिया की ऊर्जा के लिए तेल और गैस सबसे जरूरी है लेकिन युद्ध की वजह से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी कर दी है. जिसकी वजह से दुनियाभर के देशों को तेल और गैस की किल्लतों का सामना करना पड़ रहा है. क्रूड ऑयल ही खाड़ी देशों की सबसे बड़ी संपदा है जिसे पूरी दुनिया ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करती है. इस युद्ध के पीछे कहीं न कहीं अमेरिका की मंशा उनके तेल पर कब्जे की है! भौगोलिक तौर पर अगर देखा जाए तो गल्फ देशों में सिर्फ रेगिस्तान ही है. ऐसे में जब तेल के उपयोग के बारे में दुनिया को नहीं पता था तब यहां रहने वाले लोगों को अपना जीवन-यापन बहुत कठिनाइयों के साथ करना होता था. ऐसे में जब दुनिया को क्रूड ऑयल के बारे में जानकारी मिली तो यहां भी क्रूड ऑयल की तलाश शुरू हुई. धीरे-धीरे मिडिल ईस्ट के इलाकों में क्रूड ऑयल की एक के बाद एक करके बहुत से तेल के भंडार खोज निकाले गए. इन तेल के भंडारों के मिलने के बाद मिडिल ईस्ट की दशा बदल गई. यहां रहने वाले लोग अचानक से अमीर होते गए. अचानक इतनी तेजी से विकास कर रहे मिडिल ईस्ट देशों पर अमेरिका सहित पश्चिमी देशों की भी नजर पड़ी तो पता चला इनके विकास के पीछे इनके यहां के तेल भंडारण का पाया जाना है. ऐसे में पश्चिमी देशों ने इन तेल के भंडारों पर कब्जा करने की चाल चलनी शुरू कर दी. अमेरिका की नजर गल्फ देशों के तेल पर थीः ब्रिटेनबीबीसी न्यूज के मुताबिक ब्रिटेन के कुछ सरकारी दस्तावेजों से इस बात का पता चलता है कि अमेरिका ने 1973 में ही मिडिल ईस्ट देशों के तेल भंडारों पर कब्जा करने की योजना बनाई थी. साल 1973 में अरब देशों ने इजरायल के हमले के बाद तेल बिक्री पर रोक लगा दी थी. इसके बाद मिस्र और सीरिया के बीच मुकाबले में इजरायल एक बड़ी ताकत बनकर उभरा. इस युद्ध को ‘अक्तूबर युद्ध’ के नाम से जाना गया था. ब्रिटेन सरकार ने उस दौरान के कुछ सरकारी दस्तावेजों को हाल ही में सार्वजनिक किया है. अमेरिका ने तेल भंडारों पर कब्जे की योजना बनानी शुरू कर दीब्रिटेन के जारी किए गए इन दस्तावेजों से पता चलता है कि ब्रिटेन सरकार ने उस संकट को इतनी गंभीरता से लिया कि इस बारे में एक आपातकालीन योजना बनाई गई कि अमेरिका तेल के भंडारों पर कब्जा करने के लिए क्या-क्या कदम उठा सकता है? ब्रिटेन ने यहां तक अनुमान लगा लिया था कि अमेरिका आने वाले दिनों में सऊदी अरब और कुवैत में तेल भंडार पर कब्जा करने के लिए वहां पर एयरफोर्स की मदद ले सकता है और अमेरिका ब्रिटेन को भी अबूधाबी में ऐसा ही करने के लिए कह सकता है. इन डॉक्यूमेंट्स से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि तेल की आपूर्ति की चिंता किस हद तक पश्चिमी देशों के लिए रही है. अमरिका ने ब्रिटिश राजदूत को दी थी चेतावनीगल्फ देशों में तेल पर कब्जा करने की योजना के बारे में ब्रिटेन को तब पता चलता है, जब तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स शेल्सिंगर ने अमरीका में ब्रिटिश एंबेस्डर लॉर्ड क्रोमर को चेतावनी दी थी. ब्रिटिश एंबेस्डर ने अमेरिकी रक्षामंत्री जेम्स शेल्सिंगर के हवाले से कहा था कि तेल के लिए अमेरिका बलप्रयोग करने से भी नहीं झिझकेगा. गल्फ देशों ने पश्चिमी देशों को तेल बेचने पर पाबंदी लगा दी थी. गल्फ देशों ने पश्चिमी देशों पर इस बात का दबाव बढ़ाने के लिए कि वो उन्हें तेल नहीं बेचेंगे इसके लिए उन्होंने इजरायल पर दबाव बढ़ाया ताकि वो इस संदेश को पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका तक पहुंचा सके. गल्फ देशों ने ये पाबंदी खासतौर पर अमेरिका के लिए लगाई थी लेकिन इससे अन्य पश्चिमी देश भी प्रभावित हुए थे. ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों को लगी अमेरिकी रणनीति की खबरब्रिटेन की संयुक्त जांच समिति ने अनुमान लगाया था कि जब अमरीका ने बलप्रयोग की बात की थी तो अमरीकी रणनीति में मध्य पूर्व में तेल संस्थानों पर कब्जा किए जाने की बहुत संभावना थी. दस्तावेजों के मुताबिक, ‘तेल के भंडारों पर कब्जे के लिए अमरीकी रणनीति से ऐसा ही आभास होता है’ ब्रिटेन का ऐसा मानना था. इससे साफ पता चलता है कि ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों को अमेरिकी रणनीतियों की कुछ भनक लग गई थी. बाद में अमेरिका ने बलप्रयोग की रणनीति में अरब देशों के शासक बदले जाने या ताकत के बल पर दबाव बनाने के विकल्पों को खारिज कर दिया था. अमेरिका 10 सालों तक तेल भंडार पर कब्जा चाहता था!संयुक्त जांच समिति ने भरोसा जताते हुए विश्वास व्यक्त किया था कि अमेरिका की बलप्रयोग की रणनीति में एयर फोर्स अभियान चलाता और जिसके लिए वो संभवतः ईरान, तुर्की, साइप्रस, ग्रीस या इजरायल के हवाई अड्डों का इस्तेमाल करता. समिति ने ये भी कहा था कि उनका अनुमान था कि ऐसे अभियान के लिए अमेरिका को कम से कम दो ब्रिगेड की जरूरत थी. एक सऊदी अरब के लिए और एक कुवैत के लिए तीसरी ब्रिगेड अबूधाबी के लिए भी लगाई जा सकती थी. समिति ने ये चेतावनी भी दी थी कि आने वाले 10 सालों तक वहां पर अमेरिका का कब्जा रह सकता है. क्या थी ब्रिटेन की भूमिका?ब्रिटेन के लिए भी इस अभियान में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी थी. समिति की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अमेरिका शायद यह चाहता था कि ब्रिटेन अबूधाबी के तेल संस्थानों पर कब्जे के लिए कार्रवाई करे और कुछ ब्रिटिश ऑर्मी के अफसरों के के नाम अबूधाबी डिफेंस फोर्स के लिए घोषित भी कर दिए गए थे. समिति ने इस