इच्छा मृत्यु का वरदान फिर भी 58 दिन बाणों पर क्यों लेटे रहे भीष्म पितामह जानिए असली रहस्य

नई दिल्ली । महाभारत के विशाल और गूढ़ इतिहास में भीष्म पितामह का व्यक्तित्व त्याग संकल्प और धर्म का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है। देवव्रत से भीष्म बने इस महान योद्धा को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था यानी वे जब चाहें तब अपने प्राण त्याग सकते थे। लेकिन कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन जब वे बाणों की शय्या पर गिरे तब उन्होंने तुरंत मृत्यु को स्वीकार नहीं किया बल्कि 58 दिनों तक असहनीय पीड़ा सहते हुए जीवित रहने का निर्णय लिया। यही निर्णय उन्हें साधारण योद्धा से महान आत्मा के रूप में स्थापित करता है। कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन का दृश्य अत्यंत मार्मिक था। अर्जुन ने शिखंडी को आगे कर भीष्म पर बाणों की वर्षा की क्योंकि भीष्म अपने वचन के कारण शिखंडी के विरुद्ध शस्त्र नहीं उठा सकते थे। परिणामस्वरूप उनका शरीर सैकड़ों बाणों से विदीर्ण होकर धरती पर नहीं गिरा बल्कि उन्हीं बाणों पर टिक गया। यह दृश्य केवल युद्ध का नहीं बल्कि त्याग और संकल्प की पराकाष्ठा का प्रतीक बन गया। सबसे बड़ा प्रश्न यही उठता है कि जब उनके पास मृत्यु को चुनने की स्वतंत्रता थी तो उन्होंने इस पीड़ा को क्यों स्वीकार किया। इसका उत्तर उनके जीवन के मूल सिद्धांत में छिपा है जो था धर्म को सर्वोपरि रखना। भीष्म ने अपने वरदान का उपयोग केवल व्यक्तिगत मुक्ति के लिए नहीं किया बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान देने के अवसर के रूप में किया। उन्होंने मृत्यु को इसलिए टाला ताकि वे धर्म और नीति का उपदेश दे सकें। बाणों की शय्या पर लेटे हुए उन्होंने युधिष्ठिर को राजधर्म न्याय सत्य और जीवन के गूढ़ सिद्धांतों का ज्ञान दिया। यही उपदेश आगे चलकर महाभारत के शांति पर्व और भीष्म पर्व का आधार बने जो आज भी जीवन मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं। इसके अलावा भीष्म ने शुभ समय की प्रतीक्षा भी की। हिंदू मान्यताओं के अनुसार उत्तरायण में प्राण त्यागना अत्यंत शुभ और मोक्षदायक माना जाता है। इसलिए उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने तक अपने शरीर को त्यागने का निर्णय स्थगित रखा। यह उनकी गहरी आध्यात्मिक समझ और आस्था को दर्शाता है। उनका यह निर्णय केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि मानसिक शक्ति का भी अद्भुत उदाहरण था। असहनीय दर्द के बावजूद उन्होंने अपने मन और आत्मा को अडिग बनाए रखा। यह दिखाता है कि मनुष्य की इच्छाशक्ति शरीर की सीमाओं से कहीं अधिक शक्तिशाली हो सकती है। बाणों की शय्या केवल पीड़ा का प्रतीक नहीं थी बल्कि जीवन के सत्य का दर्पण भी थी। यह सिखाती है कि कर्मों का फल हर व्यक्ति को भोगना पड़ता है लेकिन उसे स्वीकार कर उससे सीख लेना ही सच्चा धर्म है अंततः भीष्म पितामह का यह निर्णय हार नहीं बल्कि उनकी महानता का प्रतीक था। उन्होंने अपने कष्ट को ज्ञान में बदलकर मानवता को यह संदेश दिया कि सच्ची शक्ति कठिन परिस्थितियों में धैर्य कर्तव्य और धर्म का पालन करने में ही निहित है। महाभारत के विशाल और गूढ़ इतिहास में भीष्म पितामह का व्यक्तित्व त्याग संकल्प और धर्म का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है। देवव्रत से भीष्म बने इस महान योद्धा को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था यानी वे जब चाहें तब अपने प्राण त्याग सकते थे। लेकिन कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन जब वे बाणों की शय्या पर गिरे तब उन्होंने तुरंत मृत्यु को स्वीकार नहीं किया बल्कि 58 दिनों तक असहनीय पीड़ा सहते हुए जीवित रहने का निर्णय लिया। यही निर्णय उन्हें साधारण योद्धा से महान आत्मा के रूप में स्थापित करता है। कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन का दृश्य अत्यंत मार्मिक था। अर्जुन ने शिखंडी को आगे कर भीष्म पर बाणों की वर्षा की क्योंकि भीष्म अपने वचन के कारण शिखंडी के विरुद्ध शस्त्र नहीं उठा सकते थे। परिणामस्वरूप उनका शरीर सैकड़ों बाणों से विदीर्ण होकर धरती पर नहीं गिरा बल्कि उन्हीं बाणों पर टिक गया। यह दृश्य केवल युद्ध का नहीं बल्कि त्याग और संकल्प की पराकाष्ठा का प्रतीक बन गया। सबसे बड़ा प्रश्न यही उठता है कि जब उनके पास मृत्यु को चुनने की स्वतंत्रता थी तो उन्होंने इस पीड़ा को क्यों स्वीकार किया। इसका उत्तर उनके जीवन के मूल सिद्धांत में छिपा है जो था धर्म को सर्वोपरि रखना। भीष्म ने अपने वरदान का उपयोग केवल व्यक्तिगत मुक्ति के लिए नहीं किया बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान देने के अवसर के रूप में किया। उन्होंने मृत्यु को इसलिए टाला ताकि वे धर्म और नीति का उपदेश दे सकें। बाणों की शय्या पर लेटे हुए उन्होंने युधिष्ठिर को राजधर्म न्याय सत्य और जीवन के गूढ़ सिद्धांतों का ज्ञान दिया। यही उपदेश आगे चलकर महाभारत के शांति पर्व और भीष्म पर्व का आधार बने जो आज भी जीवन मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं। इसके अलावा भीष्म ने शुभ समय की प्रतीक्षा भी की। हिंदू मान्यताओं के अनुसार उत्तरायण में प्राण त्यागना अत्यंत शुभ और मोक्षदायक माना जाता है। इसलिए उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने तक अपने शरीर को त्यागने का निर्णय स्थगित रखा। यह उनकी गहरी आध्यात्मिक समझ और आस्था को दर्शाता है। उनका यह निर्णय केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि मानसिक शक्ति का भी अद्भुत उदाहरण था। असहनीय दर्द के बावजूद उन्होंने अपने मन और आत्मा को अडिग बनाए रखा। यह दिखाता है कि मनुष्य की इच्छाशक्ति शरीर की सीमाओं से कहीं अधिक शक्तिशाली हो सकती है। बाणों की शय्या केवल पीड़ा का प्रतीक नहीं थी बल्कि जीवन के सत्य का दर्पण भी थी। यह सिखाती है कि कर्मों का फल हर व्यक्ति को भोगना पड़ता है लेकिन उसे स्वीकार कर उससे सीख लेना ही सच्चा धर्म है। अंततः भीष्म पितामह का यह निर्णय हार नहीं बल्कि उनकी महानता का प्रतीक था। उन्होंने अपने कष्ट को ज्ञान में बदलकर मानवता को यह संदेश दिया कि सच्ची शक्ति कठिन परिस्थितियों में धैर्य कर्तव्य और धर्म का पालन करने में ही निहित है।
दिल्ली से इंदौर तक फूडी डेस्टिनेशन भारत के ये 6 शहर बनाते हैं खाने का अनुभव यादगार
नई दिल्ली:भारत अपनी विविधता के साथ साथ अपने अनोखे स्वादों के लिए भी दुनिया भर में जाना जाता है हर शहर का अपना एक अलग फूड कल्चर है जो वहां की संस्कृति और परंपरा को दर्शाता है ऐसे कई शहर हैं जहां घूमने से ज्यादा लोग खाने के लिए जाते हैं और वहां का हर व्यंजन एक अलग अनुभव देता है दिल्ली इस सूची में सबसे ऊपर आती है जहां स्ट्रीट फूड से लेकर मुगलई खाने तक हर चीज का स्वाद लोगों को आकर्षित करता है चांदनी चौक की गलियों में मिलने वाले छोले भटूरे परांठे और बटर चिकन का स्वाद एक बार लेने के बाद बार बार मन करता है यहां का खाना सिर्फ पेट नहीं बल्कि दिल भी भर देता है लखनऊ को नवाबी स्वाद का शहर कहा जाता है जहां गलौटी कबाब अवधी बिरयानी और निहारी जैसी डिशेस बेहद लोकप्रिय हैं यहां का खाना सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि एक नफासत और तहजीब का भी प्रतीक है लखनऊ में हर व्यंजन को बनाने और परोसने का तरीका भी खास होता है अमृतसर का नाम आते ही पंजाबी खाने की खुशबू मन को लुभा लेती है यहां का अमृतसरी कुलचा छोले और मक्खन से भरपूर व्यंजन हर खाने के शौकीन को पसंद आते हैं लस्सी और सरसों का साग मक्के की रोटी यहां की खास पहचान हैं जो लोगों को बार बार यहां खींच लाती हैं कोलकाता अपने मीठे और बंगाली व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है यहां माछेर झोल कोषा मंगशो और रसगुल्ला जैसी मिठाइयां लोगों को बेहद पसंद आती हैं बंगाल का खाना अपने हल्के मसालों और अनोखे स्वाद के लिए जाना जाता है और यहां की मिठाइयों का कोई मुकाबला नहीं हैदराबाद को बिरयानी का शहर कहा जाता है यहां की हैदराबादी बिरयानी दुनियाभर में मशहूर है इसके अलावा हलीम मिर्च का सालन और डबल का मीठा भी यहां के खास व्यंजन हैं बिरयानी के शौकीन लोग खास तौर पर इस शहर का रुख करते हैं इंदौर को भारत का स्ट्रीट फूड हब कहा जाता है सराफा और छप्पन दुकान यहां के प्रमुख फूड डेस्टिनेशन हैं जहां पोहा जलेबी भुट्टे का कीस और दाल बाफला जैसे व्यंजन लोगों को खूब पसंद आते हैं इंदौर का खाना स्वाद के साथ साथ साफ सफाई के लिए भी जाना जाता है इन सभी शहरों की खास बात यह है कि यहां का खाना सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है बल्कि यह वहां की संस्कृति और परंपरा को भी दर्शाता है अगर आप खाने के शौकीन हैं तो ये शहर आपके लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं
राम नवमी पर अयोध्या जाने से पहले जानें भीड़ और सुरक्षा की पूरी जानकारी

नई दिल्ली । राम नवमी 2026 का पावन पर्व 26 मार्च को अयोध्या में मनाया जाएगा और इस बार राम लला के भव्य मंदिर के निर्माण के बाद यह उत्सव और भी खास होने वाला है। इस मौके पर देश दुनिया से लाखों भक्त अयोध्या पहुँचते हैं, जिससे यात्रा के दौरान भारी भीड़ और व्यवस्थाओं से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए यात्रा को आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। सबसे पहले दर्शन का सही समय चुनना महत्वपूर्ण है। राम नवमी के दिन मंदिर में कतारें कई किलोमीटर लंबी हो सकती हैं। यदि आप शांति से दर्शन करना चाहते हैं तो राम नवमी से 2 3 दिन पहले या उत्सव के 2 दिन बाद मंदिर जाने की योजना बनाएं। मुख्य उत्सव के दिन सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक मंदिर परिसर में सबसे अधिक भीड़ रहती है क्योंकि इसी समय मध्याह्न की विशेष आरती और सूर्य तिलक होता है। ठहरने और खाने पीने का भी सही प्लान बनाना जरूरी है। भीड़ के कारण अयोध्या के होटलों और धर्मशालाओं के दाम बढ़ जाते हैं। यदि मुख्य शहर में कमरे नहीं मिल रहे हैं तो फैजाबाद (अयोध्या कैंट) या गुप्तार घाट के पास ठहरने का विकल्प देखें। यहां से मंदिर तक ई रिक्शा आसानी से उपलब्ध हैं। अयोध्या के प्रमुख मठों और मंदिरों में भंडारा और प्रसाद की व्यवस्था रहती है, और राम पथ के किनारे कई किफायती भोजनालय भी हैं। भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के नियमों का पालन करना जरूरी है। प्रशासन ने इस बार ई पास या क्यूआर कोड आधारित प्रवेश व्यवस्था पर जोर दिया है। मंदिर के अंदर मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैमरा और चमड़े के सामान ले जाना वर्जित है। भारी भीड़ को देखते हुए बुजुर्गों और छोटे बच्चों को मुख्य उत्सव के दिन मंदिर ले जाने से बचें। राम जन्मभूमि पथ पर लंबी पैदल यात्रा के लिए आरामदायक जूते पहनना न भूलें। अयोध्या की यात्रा केवल मुख्य मंदिर तक सीमित न रखें। यात्रा के दौरान हनुमानगढ़ी, कनक भवन, नागेश्वरनाथ मंदिर और सरयू तट की आरती का भी आनंद लें। शाम के समय सरयू घाट पर होने वाला लेजर शो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। राम नवमी पर अयोध्या की यात्रा आस्था का अनूठा अनुभव है। इसके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहना, समय पर बुकिंग करना और धैर्य रखना जरूरी है। सही तैयारी के साथ आप राम लला के दर्शन को आराम से और सफलतापूर्वक कर पाएंगे।
मीठा खरबूजा चुनने के आसान ट्रिक्स: खुशबू, रंग और वजन से पहचानें

नई दिल्ली । खरबूजा गर्मियों का एक बेहतरीन फल है, जो हाइड्रेशन और न्यूट्रिशन दोनों का पैकेज लेकर आता है। इसे अपनी डाइट में शामिल करना स्वादिष्ट और हेल्दी आदत बन सकती है। लेकिन अक्सर खरबूजा खरीदते समय यह तय करना मुश्किल होता है कि वह मीठा होगा या नहीं। आज हम आपको कुछ आसान टिप्स बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप हर बार मीठा और रसदार खरबूजा खरीद सकते हैं।सबसे पहले खुशबू से पहचानें। पका और मीठा खरबूजा नीचे यानी डंठल वाली साइड से मीठी खुशबू देता है। अगर कोई खुशबू नहीं है तो वह खरबूजा कच्चा हो सकता है और उसे बिल्कुल ना लें। दूसरी ट्रिक रंग की है। खरबूजे का छिलका हल्का पीला या सुनहरा होना चाहिए। बहुत हरा खरबूजा अभी कच्चा है और मीठा नहीं होगा। इसलिए रंग देखकर ही अनुमान लगाना आसान हो जाता है। तीसरी ट्रिक वजन की है। खरबूजे को हाथ में उठाएं और देखें कि वह अपने आकार के हिसाब से भारी लगे या नहीं। भारी होने का मतलब है कि अंदर रस और मिठास ज्यादा है। हल्का खरबूजा कम मीठा हो सकता है। इसके अलावा डंठल वाले हिस्से को हल्का दबाकर देखें। बहुत सख्त हिस्सा कच्चा होता है और बहुत नरम हिस्सा ज्यादा पका या खराब हो सकता है। खरबूजे को हल्की थपकी देने पर उसकी आवाज भी बता सकती है। अगर हल्की खोखली आवाज आती है तो यह अच्छा और मीठा खरबूजा है। जबकि भारी या भरी हुई आवाज वाले खरबूजे कम पके या कम मीठे होंगे। अंत में सतह देखें। खरबूजे के ऊपर जाल साफ और उभरा हुआ हो तो वह अच्छा माना जाता है। चिकना या फीका खरबूजा कम पका होगा और मीठा नहीं आएगा। इन आसान टिप्स को अपनाकर आप गर्मियों में हर बार मीठा, रसदार और ताजगी भरा खरबूजा खरीद सकते हैं।
चेहरे की झुर्रियां करें कम और पाएं नैचुरल चमक जानिए 8 आसान घरेलू तरीके

नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बढ़ती उम्र का असर सबसे पहले चेहरे पर दिखाई देने लगता है। तनाव प्रदूषण और असंतुलित खानपान त्वचा की प्राकृतिक चमक को कम कर देते हैं। नतीजतन चेहरे पर झुर्रियां और महीन रेखाएं समय से पहले ही नजर आने लगती हैं। कई लोग इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं लेकिन उनमें मौजूद केमिकल्स कई बार त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। ऐसे में घरेलू और प्राकृतिक उपाय एक सुरक्षित और असरदार विकल्प साबित हो सकते हैं। एलोवेरा त्वचा के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। इसमें मौजूद तत्व त्वचा की लोच को बढ़ाने में मदद करते हैं। ताजे एलोवेरा जेल को चेहरे पर लगाकर कुछ समय के लिए छोड़ दें और फिर गुनगुने पानी से धो लें। यह त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइज करता है और उसे मुलायम बनाता है। नारियल तेल भी त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह त्वचा के अंदर जाकर उसे पोषण देता है और कोलेजन के निर्माण को बढ़ावा देता है। रात में सोने से पहले हल्के हाथों से चेहरे की मालिश करने से त्वचा में कसाव आता है और झुर्रियां धीरे धीरे कम होने लगती हैं। अंडे की सफेदी त्वचा को तुरंत टाइट करने में मदद करती है। इसमें मौजूद प्रोटीन त्वचा को मजबूती देता है। इसे चेहरे पर लगाकर सूखने दें और फिर धो लें। यह उपाय त्वचा को तुरंत तरोताजा और जवां दिखाने में मदद करता है। नींबू और शहद का मिश्रण भी काफी असरदार माना जाता है। शहद त्वचा को नमी प्रदान करता है जबकि नींबू में मौजूद विटामिन सी त्वचा को साफ और चमकदार बनाता है। यह मिश्रण दाग धब्बों को हल्का करने के साथ झुर्रियों को कम करने में सहायक होता है। केले का फेस मास्क त्वचा को पोषण देने का एक आसान तरीका है। पके हुए केले में शहद मिलाकर लगाने से त्वचा को जरूरी विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं। इससे त्वचा की कोशिकाएं पुनर्जीवित होती हैं और चेहरे पर प्राकृतिक चमक लौटती है। जैतून का तेल भी एंटी एजिंग गुणों से भरपूर होता है। इसमें मौजूद विटामिन त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और उसे स्वस्थ बनाए रखते हैं। नियमित उपयोग से त्वचा में निखार आता है और झुर्रियां कम होती हैं।खीरे का रस त्वचा को ठंडक और ताजगी देता है। यह त्वचा को हाइड्रेट रखने के साथ रोमछिद्रों को कसने में मदद करता है। इसे नियमित रूप से लगाने से त्वचा साफ और फ्रेश दिखती है। इन सभी उपायों के साथ साथ शरीर को अंदर से स्वस्थ रखना भी बेहद जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और संतुलित आहार लेना त्वचा की खूबसूरती बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। अगर आप रोजाना इन आसान घरेलू उपायों को अपनाते हैं तो बिना किसी साइड इफेक्ट के आप लंबे समय तक जवान और दमकती त्वचा पा सकते हैं।
नवरात्रि समाप्त होने से पहले करें पीली सरसों के ये महाउपाय, आर्थिक तंगी और गृह-क्लेश दूर

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि 2026 पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। नवरात्रि का हर दिन माता दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा के लिए समर्पित है और तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना होती है। देवी भागवत पुराण के अनुसार मां चंद्रघंटा अत्यंत शांतिदायक और कल्याणकारी हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, नवरात्रि के दौरान कुछ विशेष उपाय करने से जीवन में सुख-समृद्धि और धन लाभ की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इन उपायों में पीली सरसों के उपाय काफी प्रभावी माने जाते हैं। सबसे पहले नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए पीली सरसों को लाल कपड़े में बांधकर पोटली बना लें और नवरात्रि के दिनों में अपने घर के मुख्य द्वार पर लटका दें। ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती। आर्थिक तंगी से मुक्ति पाने के लिए रात को एक मुट्ठी पीली सरसों अपने सिर से 7 बार वारकर किसी सुनसान चौराहे या बहते जल में प्रवाहित करें। इस उपाय से धन वृद्धि में बाधाएं दूर होती हैं। यदि कर्ज से छुटकारा पाना हो तो लाल कपड़े में पीली सरसों बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखें। नजर दोष और गृह-क्लेश से मुक्ति के लिए पीली सरसों और सेंधा नमक को मिलाकर पूरे घर में घुमाएं और फिर इसे घर की सीमा से बाहर फेंक दें। ऐसा करने से घर की भारी ऊर्जा समाप्त हो जाती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। करियर और व्यापार में उन्नति के लिए मंगलवार या रविवार की शाम यह उपाय करें। थोड़ी पीली सरसों अपने सिर से 7 बार वारकर घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर या किसी चौराहे पर फेंक दें। यह प्रयोग कार्यक्षेत्र की बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है। मां दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए नवरात्रि में नियमित पूजा करें और अपनी पूजा सामग्री में पीली सरसों को भी शामिल करें। पूजा की थाली में कुछ सरसों के दाने रखने से साधना पूर्ण मानी जाती है और माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इन आसान पीली सरसों उपायों को अपनाकर आप नवरात्रि समाप्त होने से पहले आर्थिक तंगी, गृह-क्लेश, नजर दोष और कार्यक्षेत्र की बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं। साथ ही घर में सुख-शांति और समृद्धि का संचार भी सुनिश्चित होता है।
नवरात्रि स्पेशल: 10 मिनट में बनाएं चटपटे दही वाले आलू

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि 2026 का पावन पर्व चल रहा है और कई लोग इस दौरान नौ दिन का व्रत रखते हैं। व्रत में हल्का और स्वादिष्ट खाना खाने का मन करना स्वाभाविक है और ऐसे में “दही वाले आलू” एक बेहतरीन विकल्प हैं। खट्टा-मीठा स्वाद व्रत के दौरान खाने में आनंद देता है और इसे बनाना भी बेहद आसान है। सामग्री की बात करें तो इसके लिए आपको चाहिए 3-4 मीडियम साइज़ के उबले हुए आलू 1 कप अच्छी तरह फेंटा हुआ दही 1-2 चम्मच घी 1 छोटा चम्मच जीरा 1-2 बारीक कटी हरी मिर्च स्वादानुसार सेंधा नमक ½ छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर व्रत वाला और सजाने के लिए धनिया पत्ती। विधि शुरू करने के लिए सबसे पहले कढ़ाही में घी गर्म करें और उसमें जीरा डालें। जीरा चटकने लगे तो हरी मिर्च डालकर हल्का भूनें। इसके बाद उबले हुए आलू डालें और 2-3 मिनट तक हल्का सुनहरा होने दें। अब गैस धीमी कर दें और फेंटा हुआ दही डालें। ध्यान रखें कि दही डालते समय गैस धीमी हो ताकि दही फटे नहीं। तुरंत अच्छी तरह चलाएं और उसमें सेंधा नमक काली मिर्च और लाल मिर्च पाउडर डाल दें। इसे तब तक पकाएं जब तक ग्रेवी थोड़ी गाढ़ी न हो जाए। अंत में ऊपर से धनिया पत्ती डालकर गरमागरम परोसें। यह रेसिपी व्रत में खाने के लिए हल्की और स्वादिष्ट है और इसे आसानी से घर पर बनाया जा सकता है। दही वाले आलू का खट्टा-मीठा स्वाद व्रत के खाने में नया तड़का लगाता है और सभी उम्र के लोगों को पसंद आता है।
स्मार्ट किचन हैक्स से आसान बनाएं काम, नारियल तोड़ने के ये तरीके जान लें

नई दिल्ली:रसोई में कई बार छोटी सी चीज भी बड़ा काम बना देती है और जटा वाला कच्चा नारियल उन्हीं में से एक है बाहर से बेहद सख्त और अंदर से मुलायम यह नारियल दिखने में आसान लगता है लेकिन इसे तोड़ना कई लोगों के लिए चुनौती बन जाता है सही तरीका न पता होने के कारण लोग नारियल खरीदने के बाद भी उसे इस्तेमाल नहीं कर पाते अगर आप भी नारियल तोड़ने में परेशानी महसूस करते हैं तो कुछ आसान ट्रिक्स अपनाकर यह काम मिनटों में किया जा सकता है सबसे पहले नारियल की बाहरी जटा को हटाना जरूरी होता है इसके लिए नारियल को कुछ समय के लिए गर्म पानी में डालकर रखें इससे जटा थोड़ी ढीली हो जाती है और उसे निकालना आसान हो जाता है इसके बाद चाकू या पेचकस की मदद से धीरे धीरे जटा हटाई जा सकती है जटा हटाने के बाद नारियल पर तीन छोटे निशान दिखाई देते हैं जिन्हें आमतौर पर आंख कहा जाता है इनमें से किसी एक को नुकीली चीज से छेद करके नारियल का पानी निकाला जा सकता है इससे नारियल हल्का हो जाता है और आगे का काम और आसान हो जाता है इसके बाद नारियल को तोड़ने के लिए माइक्रोवेव या ओवन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है नारियल को कुछ मिनट के लिए गर्म करने से उसका छिलका और अंदर का हिस्सा अलग होने लगता है जिससे इसे तोड़ना आसान हो जाता है हल्के से वार करने पर नारियल आसानी से दो हिस्सों में बंट जाता है और पूरी गरी बाहर आ जाती है अगर आपके पास माइक्रोवेव नहीं है तो गैस पर भी नारियल को हल्का गर्म करके तोड़ा जा सकता है नारियल को धीरे धीरे घुमाते हुए गर्म करें और फिर हल्के से हथौड़े या किसी भारी चीज से उस पर वार करें इससे नारियल आसानी से टूट जाएगा और उसकी गरी अलग करना आसान हो जाएगा इन आसान तरीकों से न सिर्फ समय की बचत होती है बल्कि नारियल को बिना नुकसान पहुंचाए पूरी तरह से उपयोग किया जा सकता है थोड़ी सावधानी और सही तकनीक अपनाकर यह काम बेहद आसान बनाया जा सकता है
हेल्दी फूड का सच 5 ऐसी चीजें जो आपकी सेहत को चुपचाप पहुंचा रही हैं नुकसान

नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों के पास इतना समय नहीं बचता कि वे रोज ताजा और संतुलित भोजन तैयार कर सकें। ऐसे में बाजार में मिलने वाले पैक्ड और रेडी टू ईट फूड्स उनकी पहली पसंद बनते जा रहे हैं। कंपनियां भी इस जरूरत को भुनाने के लिए हेल्दी नेचुरल और शुगर फ्री जैसे आकर्षक लेबल लगाकर इन उत्पादों को बेचती हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि जिन चीजों को हम सेहत के लिए फायदेमंद समझते हैं वही धीरे धीरे हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। डिब्बाबंद और बाजार में मिलने वाले फ्रूट जूस को अक्सर लोग फलों का बेहतर विकल्प मान लेते हैं। जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। पैक्ड जूस में लंबे समय तक खराब न होने के लिए प्रिजर्वेटिव्स और कृत्रिम रंग मिलाए जाते हैं। वहीं ताजे जूस में से फाइबर निकाल दिया जाता है जो फल का सबसे जरूरी हिस्सा होता है। बिना फाइबर के जूस शरीर में तेजी से शुगर बढ़ाता है और लीवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इंस्टेंट ओट्स को लोग वजन घटाने का आसान तरीका मानते हैं लेकिन 2 मिनट में बनने वाले ओट्स असल में काफी प्रोसेस्ड होते हैं। इनमें सोडियम चीनी और कृत्रिम फ्लेवर मिलाए जाते हैं जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं। अगर आप ओट्स का सही फायदा चाहते हैं तो कम प्रोसेस्ड विकल्प चुनना ज्यादा बेहतर होता है। ब्राउन ब्रेड को भी लोग हेल्दी समझकर खाते हैं लेकिन ज्यादातर मामलों में यह सिर्फ नाम का ही हेल्दी होता है। बाजार में बिकने वाली कई ब्राउन ब्रेड में मैदा की मात्रा ज्यादा होती है और उसे भूरा दिखाने के लिए अलग से रंग मिलाया जाता है। यह पाचन को प्रभावित करने के साथ वजन बढ़ाने का कारण बन सकती है। फ्लेवर्ड दही और पैक्ड लस्सी भी हेल्दी के नाम पर बेचे जाने वाले ऐसे उत्पाद हैं जिनमें जरूरत से ज्यादा चीनी मिलाई जाती है। इनका स्वाद भले ही अच्छा लगे लेकिन ये शरीर को उतना फायदा नहीं देते जितना सादा दही देता है। साथ ही इनमें मौजूद प्रिजर्वेटिव्स आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकते हैं। शुगर फ्री प्रोडक्ट्स भी एक बड़ा भ्रम हैं। लोग सोचते हैं कि इनमें चीनी नहीं होती इसलिए ये सुरक्षित हैं लेकिन इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर्स मिलाए जाते हैं जो लंबे समय में शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकते हैं। ज्यादा मात्रा में इनका सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम केवल पैकेट पर लिखे दावों पर भरोसा न करें बल्कि उसके अंदर मौजूद सामग्री को भी समझें। जितना संभव हो ताजा और कम प्रोसेस्ड भोजन को अपनी डाइट में शामिल करें। याद रखें असली हेल्दी फूड वही है जो प्राकृतिक हो और जिसे ज्यादा समय तक सुरक्षित रखने के लिए किसी केमिकल की जरूरत न पड़े।
बिना मेहनत घटता वजन बन सकता है जानलेवा इन लक्षणों को तुरंत पहचानें

नई दिल्ली । आज के समय में जहां लोग वजन कम करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं वहीं अगर बिना किसी डाइटिंग या एक्सरसाइज के वजन तेजी से घटने लगे तो यह चिंता का विषय बन जाता है। मेडिकल भाषा में इसे बिना किसी कारण वज़न कम होना कहा जाता है और इसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार यदि 6 से 12 महीनों के भीतर शरीर का 5 प्रतिशत या उससे अधिक वजन बिना किसी कारण के कम हो जाए तो यह किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है। हमारा शरीर मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल संतुलन के आधार पर काम करता है। जब शरीर के अंदर कोई गड़बड़ी होती है तो वह ऊर्जा के लिए फैट और मांसपेशियों को तेजी से जलाने लगता है जिससे वजन अचानक कम होने लगता है। इसके पीछे कई गंभीर कारण हो सकते हैं जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। सबसे आम कारणों में से एक है हाइपरथायरायडिज्म। इस स्थिति में थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है जिससे मेटाबॉलिज्म बहुत तेज हो जाता है। व्यक्ति सामान्य से ज्यादा खाना खाने के बावजूद तेजी से दुबला होने लगता है। इसके साथ घबराहट, पसीना आना और दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। इसी तरह टाइप 2 मधुमेह भी अचानक वजन घटने का कारण बन सकती है। जब शरीर में इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता तो कोशिकाएं ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल नहीं कर पातीं। ऐसे में शरीर फैट और मांसपेशियों को तोड़कर ऊर्जा बनाता है जिससे वजन तेजी से कम होने लगता है। बार बार पेशाब आना और ज्यादा प्यास लगना इसके सामान्य संकेत हैं। कई मामलों में यह समस्या कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकती है। कैंसर कोशिकाएं शरीर की ऊर्जा को तेजी से खर्च करती हैं और शरीर को कमजोर बना देती हैं। भूख कम होना, लगातार थकान और बिना वजह वजन गिरना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है।अवसाद या अत्यधिक तनाव की स्थिति में व्यक्ति की भूख प्रभावित हो जाती है। शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं जिससे या तो व्यक्ति खाना छोड़ देता है या शरीर पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता और वजन गिरने लगता है। इसके अलावा शराब, सिगरेट या नशीले पदार्थों की आदत भी शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है। इससे इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है और शरीर बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है जिसके कारण वजन तेजी से घट सकता है। अचानक वजन कम होना कभी भी सामान्य बात नहीं होती बल्कि यह शरीर का एक चेतावनी संकेत है। यदि आप भी बिना कारण वजन घटने की समस्या से जूझ रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच जैसे ब्लड टेस्ट, थायराइड प्रोफाइल और अन्य जरूरी स्क्रीनिंग करवाना बेहद आवश्यक है। सही समय पर पहचान और इलाज ही आपको बड़ी और गंभीर बीमारियों से बचा सकता है।