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मिडिल ईस्ट तनाव से बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 1836 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे लाखों करोड़

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आया। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और Nifty 50 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1836.57 अंक यानी 2.46 प्रतिशत टूटकर 72696.39 पर आ गया, जबकि निफ्टी 601.85 अंक यानी 2.60 प्रतिशत गिरकर 22512.65 पर बंद हुआ। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव और युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है। निवेशकों को भारी नुकसान, 13.65 लाख करोड़ डूबेइस बड़ी गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 14 लाख करोड़ रुपए घट गया और यह 428.76 लाख करोड़ रुपए से गिरकर 415.11 लाख करोड़ रुपए रह गया। इंट्रा डे में बाजार और भी ज्यादा दबाव में दिखा, जहां सेंसेक्स एक समय करीब 1974 अंक तक लुढ़क गया था। वहीं, निफ्टी भी 643 अंकों तक गिर गया था। बाजार में घबराहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि India VIX में 19 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई, जो निवेशकों के बीच बढ़ती चिंता को दर्शाता है। मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा मार, सभी सेक्टर दबाव मेंबाजार में गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में और ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 3.90 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 3.94 प्रतिशत गिरा। सेक्टरवार देखें तो कंस्ट्रक्शन, रियल्टी और मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। बैंकिंग, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि आईटी सेक्टर में अपेक्षाकृत कम कमजोरी देखने को मिली। यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली हुई है और निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी है। तेल कीमतें और होर्मुज संकट बने बड़ी वजहविशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। Strait of Hormuz में संभावित बाधा से सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते बयानबाजी और संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेतों ने बाजार का माहौल और नकारात्मक कर दिया है। आगे का रुख अनिश्चित, निवेशकों में बढ़ी चिंतामार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में स्थिरता लौटना मुश्किल है। वैश्विक बाजारों के साथ तालमेल के चलते भारत भी इस दबाव से बच नहीं पा रहा है। फिलहाल बाजार का रुख कमजोर बना हुआ है और निवेशकों के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

अरुंधति रेड्डी बनीं ICC प्लेयर ऑफ द मंथ, ऑस्ट्रेलिया में दमदार प्रदर्शन

नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तेज गेंदबाज Arundhati Reddy ने शानदार प्रदर्शन के दम पर फरवरी 2026 के लिए International Cricket Council का ‘विमेंस प्लेयर ऑफ द मंथ’ अवॉर्ड अपने नाम किया है। उनके करियर में यह पहला मौका है जब उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को उसके घर में हराने में अहम भूमिका निभाई। भारत की इस ऐतिहासिक टी20 सीरीज जीत में उनकी गेंदबाजी निर्णायक साबित हुई। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर शानदार प्रदर्शन, टीम की जीत में अहम योगदानऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में अरुंधति रेड्डी ने कमाल की गेंदबाजी करते हुए कुल 8 विकेट झटके। उन्होंने 10.87 की बेहतरीन औसत और 7.25 की इकॉनमी रेट से गेंदबाजी की, जो टी20 फॉर्मेट में बेहद प्रभावी मानी जाती है। उनके प्रदर्शन की बदौलत भारत ने यह सीरीज 2-1 से अपने नाम की। खास बात यह रही कि साल 2016 के बाद यह पहली बार था जब भारतीय महिला टीम ने ऑस्ट्रेलिया में टी20 सीरीज जीती। सिडनी में करियर बेस्ट, हर मैच में दिखाया दमदाएं हाथ की इस तेज गेंदबाज ने सिडनी में खेले गए पहले मुकाबले से ही अपने इरादे साफ कर दिए थे। इस मैच में उन्होंने 22 रन देकर 4 विकेट झटके, जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इस शानदार गेंदबाजी के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ भी चुना गया। इसके बाद भी उन्होंने अपनी लय बरकरार रखी। कैनबरा में खेले गए दूसरे मैच में 30 रन देकर 2 विकेट हासिल किए, जबकि एडिलेड में निर्णायक मुकाबले में 35 रन देकर 2 विकेट लेकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। विश्व कप से पहले बढ़ा आत्मविश्वासअवॉर्ड मिलने के बाद अरुंधति रेड्डी ने इसे अपने करियर का बड़ा सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में जीत हासिल करना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है और इस जीत से टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। उन्होंने आगामी ICC Women’s T20 World Cup को लेकर भी भरोसा जताया और कहा कि टीम संतुलित है और इस बार मजबूत दावेदार के रूप में उतरेगी। यह प्रदर्शन न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के लिए भी एक बड़ा संकेत है कि टीम अब बड़े मंच पर दमदार प्रदर्शन के लिए तैयार है।

Chaitra Ashtami Special: ऐसे बनाएं काला चना का प्रसाद, जानें आसान रेसिपी

नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) की अष्टमी के दिन अगर आप प्रसाद बना रहे हैं लेकिन इसकी रेसिपी को लेकर कुछ कन्फूशन हैं तब आपके के लिए ये खबरबहुत जरूरी हैं। नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा को भोग लगाने के लिए काले चने का प्रसाद बनाया जाता है।यह प्रसाद न केवल भक्तिभाव से भरपूर होता बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। तो चलिए इसकी खास रेसिपी जानते हैं। कन्या पूजन भोगकन्या पूजन भोग में देवी के पसंदीदा और पारंपरिक व्यंजन शामिल थे। इसमें खीर, बेसन का हलवा, शकरपारा, लड्डू, फल, मिठाई और काले चने का प्रसाद शामिल किए गए है। नवरात्रि में काले चने का प्रसाद रेसिपीसामग्री:काले चने – 1 कपपानी – 3 कप (भिगोने और उबालने के लिए)गुड़ – 1/2 कप (कद्दूकस किया हुआ)घी – 1–2 चम्मचकेसर – 2–3 धागे (वैकल्पिक)छोटी इलायची – 2–3 (पिसी हुई) काला चना उबालने की विधिइसे बनाने के लिए आपको सबसे पहले काले चनों को रात भर पानी में भिगो दें। उसके बाद कुकर में भिगोया हुआ काला चना, पानी, अदरक, तेज पत्ता, जीरा, नमक और घी डालें। तेज आंच पर 2 सीटी लगाएं और फिर धीमी आंच पर 5-6 सीटी आने तक पकाएं। बनाने की विधिकढ़ाई में घी गर्म करें. अब उसमें जीरा और हींग डालकर भूनें।उबले हुए चने को इसके साथ डालें और साथ ही बचा हुआ नमक डालकर ढककर पकाएं।जब पानी सूखने लगे तो इसमें गरम मसाला, अमचूर पाउडर, कसूरी मेथी और 1 चम्मच घी डालकर अच्छे से मिलाएं. इसे धनिया पत्ती से गार्निश करें और प्रसाद के रूप में मां दुर्गा को अर्पित करें। इस नवरात्रि, आप इस प्रकार काला चना प्रसाद बनाकर मां दुर्गा को भोग लगाएं इससे माता प्रसन्न होंगी और आपको और आपके घर परिवार पर अपनी कृपा बनाएं रहेंगी।

चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा और कथा का महत्व

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का पांचवां दिन मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप, मां स्कंदमाता की पूजा के लिए समर्पित है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की आराधना की जाती है और प्रत्येक दिन का विशेष आध्यात्मिक महत्व और फल माना जाता है। पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व है, जो मातृत्व, करुणा और शक्ति का प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता की पूजा के समय व्रत कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से माता प्रसन्न होती हैं और जीवन को सुख-समृद्धि और आनंद से भर देती हैं। मान्यता है कि निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति भी होती है। इसी लिए आज मां की पूजा करते समय इस पौराणिक कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर नामक एक शक्तिशाली असुर था। उसने कठोर तपस्या कर भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न किया और वरदान स्वरूप प्राप्त किया कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही संभव होगी। उस समय भगवान शिव गहन तपस्या में लीन थे और माता सती का पुनर्जन्म नहीं हुआ था। इस कारण तारकासुर को विश्वास हो गया कि वह लगभग अमर है। वरदान के अहंकार में आकर तारकासुर ने देवताओं और मनुष्यों पर अत्याचार शुरू कर दिया। उसके अत्याचार से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंचे और उन्हें तपस्या से जगाने का प्रयास किया। इसी बीच माता सती का पुनर्जन्म हुआ और उन्होंने हिमालयराज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। देवताओं के प्रयास और माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह किया। इसके बाद माता पार्वती ने स्वयं अपने पुत्र भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को जन्म दिया और उन्हें युद्ध कौशल और ज्ञान की शिक्षा दी। भगवान कार्तिकेय ने बाद में तारकासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया। धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता की श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने पर संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। मां का आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और संतुलन भी आता है। इसलिए पांचवे दिन माता की पूजा करते समय कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आज मां स्कंदमाता की पूजा करते समय भक्त कमल पुष्प, फल और मिठाइयों का भोग अर्पित करते हैं। घर और मंदिरों में भजन-कीर्तन और कथा का आयोजन किया जाता है। यह दिन केवल पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक भी है। व्रत कथा पढ़ने और ध्यानपूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का संचार होता है। इसलिए आज के दिन माता स्कंदमाता की पूजा और कथा का पाठ अवश्य करें। इससे न केवल संतान सुख की प्राप्ति होती है, बल्कि जीवन में समृद्धि, आनंद और संतुलन भी आता है। भक्तों के लिए यह अवसर अपने परिवार के लिए सुख और समृद्धि सुनिश्चित करने का भी संदेश है।

मिनटों में तैयार हों फेस्टिव लुक के लिए, ये फिंगर टिप मेहंदी डिजाइन्स हैं वर्किंग वुमन की पहली पसंद

नई दिल्ली:नवरात्रि के फेस्टिव सीजन में हर महिला अपने लुक को खास बनाना चाहती है और मेहंदी इस खूबसूरती को बढ़ाने का सबसे आसान और पारंपरिक तरीका है, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के पास घंटों बैठकर मेहंदी लगवाने का समय नहीं होता, ऐसे में फिंगर टिप मेहंदी डिजाइन्स एक बेहतरीन और ट्रेंडी विकल्प बनकर उभरे हैं आजकल वर्किंग वुमन और कॉलेज जाने वाली लड़कियों के बीच मिनिमल मेहंदी का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें पूरे हाथ की बजाय सिर्फ उंगलियों के पोरों को सजाया जाता है, यह स्टाइल न केवल समय की बचत करता है बल्कि हाथों को एक एलिगेंट और मॉडर्न लुक भी देता है फिंगर टिप मेहंदी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगाने में बहुत कम समय लगता है, जहां पारंपरिक मेहंदी में कई घंटे लग जाते हैं वहीं ये डिजाइन्स महज 10 से 15 मिनट में तैयार हो जाते हैं, यही वजह है कि यह बिगिनर्स के लिए भी एक आसान और शानदार विकल्प बन चुका है इन डिजाइन्स में रिंग स्टाइल काफी लोकप्रिय है, जिसमें उंगलियों के बीच मेहंदी इस तरह लगाई जाती है कि वह अंगूठी जैसा लुक देती है, इससे बिना किसी ज्वेलरी के भी हाथ बेहद आकर्षक और सजे हुए नजर आते हैं, यह स्टाइल सोशल मीडिया पर भी काफी ट्रेंड कर रहा है इसके अलावा मिक्स एंड मैच पैटर्न भी युवाओं के बीच पसंद किया जा रहा है, जिसमें हर उंगली पर अलग-अलग डिजाइन बनाया जाता है, यह न केवल यूनिक लुक देता है बल्कि आपके हाथों को एक स्टाइलिश और फैशनेबल टच भी देता है अगर आप थोड़ा हैवी लुक चाहती हैं तो एंकलेट स्टाइल फिंगर मेहंदी ट्राई कर सकती हैं, इसमें उंगलियों के साथ कलाई तक डिजाइन बनाया जाता है जो पारंपरिक और मॉडर्न दोनों का बेहतरीन मेल होता है, यह स्टाइल आपके हाथों को रॉयल लुक देता है सिंपल और सोबर लुक पसंद करने वालों के लिए छोटे-छोटे फ्लोरल मोटिफ्स और बारीक बूटी वर्क वाले डिजाइन्स भी एक शानदार विकल्प हैं, ये देखने में बेहद डेलिकेट और आकर्षक लगते हैं और हर तरह के आउटफिट के साथ आसानी से मैच हो जाते हैं नवरात्रि के दौरान जब महिलाएं व्रत और पूजा में व्यस्त रहती हैं, तब फिंगर टिप मेहंदी और भी ज्यादा सुविधाजनक साबित होती है, क्योंकि इसमें हथेलियां खाली रहती हैं और रोजमर्रा के काम करने में कोई परेशानी नहीं होतीफिंगर टिप मेहंदी डिजाइन्स उन लोगों के लिए परफेक्ट हैं जो कम समय में स्टाइलिश और एलिगेंट लुक पाना चाहते हैं, यह ट्रेंड न केवल फैशन को आसान बना रहा है बल्कि हर महिला को अपने तरीके से खूबसूरत दिखने का मौका भी दे रहा है

ऊर्जा सुरक्षा मजबूत! देश के रणनीतिक तेल भंडार पर सरकार का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा भरोसा जताया है। संसद में जानकारी देते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री Suresh Gopi ने बताया कि भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों में इस समय 3.37 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चा तेल मौजूद है। यह कुल भंडारण क्षमता का लगभग 64 प्रतिशत है, जो किसी भी अल्पकालिक आपूर्ति संकट से निपटने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। सरकार के अनुसार, यह भंडार देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के असर को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। आईएसपीआरएल के तहत मजबूत भंडारण व्यवस्थासरकार ने Indian Strategic Petroleum Reserves Limited के माध्यम से आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में तीन प्रमुख स्थानों पर रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार स्थापित किए हैं। इनकी कुल क्षमता 5.3 मिलियन मीट्रिक टन है। तटीय क्षेत्रों में स्थित ये भंडार आपातकालीन स्थिति में बफर के रूप में काम करते हैं। मंत्री ने बताया कि इन भंडारों में मौजूद कच्चे तेल की मात्रा स्थिर नहीं रहती, बल्कि बाजार की स्थिति, खपत और आपूर्ति के अनुसार बदलती रहती है। फिलहाल इनमें लगभग 3.372 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल उपलब्ध है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है। भविष्य की तैयारी, नए भंडारों को मिली मंजूरीऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। जुलाई 2021 में ओडिशा और कर्नाटक में 6.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले दो अतिरिक्त रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार स्थापित करने को मंजूरी दी गई थी। इन नए प्रोजेक्ट्स के पूरा होने के बाद भारत की कुल भंडारण क्षमता और बढ़ेगी, जिससे किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश की निर्भरता कम होगी। यह कदम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयात में विविधता, 41 देशों से तेल की खरीदसरकार ने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में भी बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां भारत मुख्य रूप से मध्य पूर्व के देशों पर निर्भर था, वहीं अब आयात को विविध बनाकर जोखिम कम किया गया है। वर्तमान में भारत इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर जैसे पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं के साथ साथ अमेरिका, नाइजीरिया, अंगोला, कनाडा, ब्राजील और मैक्सिको सहित कुल 41 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है। खासतौर पर Strait of Hormuz में व्यवधान के बाद यह रणनीति और महत्वपूर्ण हो गई है। अब देश के लगभग 70 प्रतिशत तेल आयात खाड़ी देशों के बाहर से हो रहे हैं, जिससे सप्लाई बाधित होने का खतरा काफी हद तक कम हो गया है।

लक्ष्मी पंचमी 2026: आज करें लक्ष्मी चालीसा का पाठ, घर में आएगी धन धान्य और समृद्धि

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्र का पावन पर्व देशभर में भक्ति और आस्था के रंग में रंगा हुआ है। इस दौरान आने वाला एक विशेष दिन है लक्ष्मी पंचमी, जिसे इस साल 23 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए पूजन और लक्ष्मी चालीसा के पाठ से घर में धन धान्य, सुख समृद्धि और वैभव का वास होता है। लक्ष्मी पंचमी का यह पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ता है। इस दिन मां स्कंदमाता के साथ साथ मां लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी, जो समृद्धि, धन और सुख समृद्धि की देवी हैं, इस दिन अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। देवी की कृपा से व्यक्ति न केवल भौतिक संपन्नता पाता है, बल्कि ज्ञान, बुद्धि और विवेक की भी प्राप्ति होती है। इस अवसर पर व्रतियों और श्रद्धालुओं की परंपरा होती है कि वे सफेद या पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा अर्चना करें। घर में या मंदिर में कमल पुष्प, फल और मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है। साथ ही, लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। लक्ष्मी चालीसा के पाठ से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और घर में धन संपत्ति और सुख समृद्धि बनी रहती है। लक्ष्मी चालीसा का पाठ भक्तों के हृदय में विश्वास और भक्ति का संचार करता है। इसमें माता लक्ष्मी के गुणों और उनके दिव्य रूप का वर्णन है। चालीसा के माध्यम से यह विश्वास प्रकट होता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से इसका पाठ करता है, उसे सभी प्रकार की विपत्तियों और दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही पुत्र, धन और संतान संपत्ति की प्राप्ति भी होती है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने वाले को माता लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है। वे अपने भक्तों के घर में सुख शांति, स्वास्थ्य, वैभव और समृद्धि का वास करती हैं। इसके साथ ही, यह पाठ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करता है। भक्त चालीसा का ध्यानपूर्वक पाठ करें और इसे दूसरों को सुनाने की परंपरा अपनाएं, जिससे शुभ प्रभाव और भी बढ़ जाता है। लक्ष्मी पंचमी और लक्ष्मी चालीसा का यह पर्व केवल पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि यह भक्ति, श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक भी है। इस दिन घर और मंदिरों में भक्तगण एकत्र होते हैं, भजन कीर्तन करते हैं, और मां लक्ष्मी की कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दिन किए गए उपाय और पाठ से वर्षभर सुख समृद्धि बनी रहती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए आज के दिन लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना न केवल धन वैभव और सुख की प्राप्ति का साधन है, बल्कि यह मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ भी प्रदान करता है। भक्तगण इस दिन माता लक्ष्मी का स्मरण करते हुए पूरे श्रद्धा भाव से पाठ करें और अपने परिवार के लिए समृद्धि और सुख की कामना करें।

कॉर्पोरेट सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, संसद में आया नया संशोधन बिल

नई दिल्ली। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को लोकसभा में कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य Companies Act 2013 और Limited Liability Partnership Act 2008 में जरूरी बदलाव करना है। सरकार का कहना है कि इन संशोधनों से कॉर्पोरेट क्षेत्र में पारदर्शिता, सुगमता और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। विधेयक पेश करते हुए वित्त मंत्री ने इसे आगे की विस्तृत जांच के लिए संसद की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे लोकसभा ने मंजूरी दे दी। उन्होंने बताया कि यह विधेयक दो वर्षों के गहन विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है और इसमें कंपनी विधि समिति की सिफारिशों को शामिल किया गया है। कॉर्पोरेट गवर्नेंस और निवेश को मिलेगा बढ़ावावित्त मंत्री ने कहा कि कंपनी अधिनियम निगमन, कॉर्पोरेट प्रशासन, प्रकटीकरण और विघटन से जुड़े नियमों को नियंत्रित करता है, जबकि एलएलपी अधिनियम व्यवसायों को अधिक लचीला ढांचा प्रदान करता है। इस संशोधन के जरिए दोनों कानूनों को और अधिक सरल और प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी विधि समिति में उद्योग संगठनों, पेशेवर संस्थानों, कानूनी और लेखा विशेषज्ञों को शामिल किया गया था, जिनकी सिफारिशों के आधार पर विधेयक तैयार हुआ है। रिपोर्ट को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए भी जारी किया गया था, जिसके बाद प्राप्त सुझावों को ध्यान में रखकर अंतिम मसौदा तैयार किया गया। विपक्ष का विरोध, सीएसआर प्रावधानों पर उठे सवालहालांकि, विधेयक पेश किए जाने से पहले विपक्ष ने इसका विरोध किया। कांग्रेस सांसद Manish Tewari, टीएमसी के Saugata Roy और डीएमके की T. Sumathy ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधन कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर प्रावधानों को कमजोर कर सकता है। इन आरोपों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य नियमों को आसान बनाना और निवेश को आकर्षित करना है, न कि किसी प्रावधान को कमजोर करना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इससे कॉर्पोरेट गवर्नेंस और मजबूत होगा। आईबीसी संशोधन की भी तैयारी, समाधान प्रक्रिया होगी तेजसरकार कॉर्पोरेट क्षेत्र में सुधार के लिए अन्य कदम भी उठा रही है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिवालियापन और दिवालिया संहिता में संशोधन को मंजूरी दी है, जिससे चालू सत्र में नया विधेयक पेश करने का रास्ता साफ हो गया है। यह प्रस्ताव Insolvency and Bankruptcy Code में सुधार से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य कॉर्पोरेट समाधान प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाना है। यह संशोधन Baijayant Panda की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित है, जिसने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

उज्ज्वला योजना का असर! देशभर में LPG कनेक्शन का विस्तार, सप्लाई भी हुई बेहतर

नई दिल्ली। देश में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने वाली Pradhan Mantri Ujjwala Yojana ने एलपीजी पहुंच के मामले में बड़ा बदलाव किया है। सरकार के मुताबिक, इस योजना के लागू होने के बाद अब देश में लगभग हर घर तक एलपीजी कनेक्शन पहुंच चुका है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 1 मार्च 2026 तक देशभर में करीब 10.56 करोड़ पीएमयूवाई कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं। इनमें महाराष्ट्र में 52.60 लाख और गुजरात में 43.92 लाख कनेक्शन शामिल हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि योजना ने खासतौर पर गरीब और ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। सरकार का लक्ष्य, हर जरूरतमंद तक एलपीजी कनेक्शनसरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में 25 लाख अतिरिक्त एलपीजी कनेक्शन देने की मंजूरी भी दी है, ताकि लंबित आवेदनों को जल्द पूरा किया जा सके। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री Suresh Gopi ने राज्यसभा में बताया कि 1 मार्च 2026 तक महाराष्ट्र में करीब 0.48 लाख और गुजरात में लगभग 0.87 लाख नए कनेक्शन दिए जा चुके हैं। योजना की शुरुआत से पहले देश में एलपीजी कवरेज करीब 62 प्रतिशत थी, जो अब काफी बढ़कर लगभग सार्वभौमिक स्तर पर पहुंच गई है। इससे ग्रामीण और गरीब परिवारों को धुएं से मुक्ति मिली है और स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ा है। उपयोग बढ़ा, वितरण नेटवर्क हुआ मजबूतपीएमयूवाई के विस्तार के साथ ही एलपीजी के उपयोग में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। जहां 2021-22 में एक लाभार्थी परिवार औसतन 3.68 सिलेंडर सालाना इस्तेमाल करता था, वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 4.80 सिलेंडर हो गया है। यह दर्शाता है कि लोग अब पारंपरिक ईंधनों की बजाय एलपीजी को तेजी से अपना रहे हैं। साथ ही, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने सप्लाई व्यवस्था को भी मजबूत किया है। देश में अब कुल 25,605 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर काम कर रहे हैं, जिनमें से 17,677 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इनकी सप्लाई के लिए 214 बॉटलिंग प्लांट सक्रिय हैं, जिससे दूरदराज के इलाकों तक भी समय पर सिलेंडर पहुंच रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस, सब्सिडी से मिल रही राहतसरकार ने ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में एलपीजी की पहुंच बढ़ाने के लिए पिछले 10 वर्षों में बड़े पैमाने पर काम किया है। अप्रैल 2016 से फरवरी 2026 के बीच 8,037 नए डिस्ट्रीब्यूटर शुरू किए गए, जिनमें से 93 प्रतिशत यानी 7,444 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इसके अलावा, सरकार उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत देने के लिए सब्सिडी भी प्रदान कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर 300 रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है, जो अधिकतम 9 रिफिल तक लागू है। साथ ही ‘सक्षम’ पहल के तहत ऊर्जा बचत और टिकाऊ विकास को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

ऊर्जा और कृषि पर सरकार का फोकस, Narendra Modi बोले-भारत आत्मनिर्भरता की राह पर

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी तैयारी मजबूत कर ली है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने संसद में स्पष्ट किया कि देश के पास उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आयात के स्रोतों को भी विविध बनाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में किसानों को किसी भी संकट से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता पूरी तरह सुनिश्चित की गई है, जिससे खेती पर किसी तरह का नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश में ही उर्वरकों के उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो रही है और किसानों को समय पर खाद मिल रही है। किसानों को राहत, सौर पंप और योजनाओं से मजबूतीप्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने किसानों की लागत घटाने और उन्हें ऊर्जा के वैकल्पिक साधन देने के लिए बड़े स्तर पर काम किया है। डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए अब तक 22 लाख से ज्यादा सौर पंप किसानों को दिए जा चुके हैं। इससे न सिर्फ किसानों का खर्च कम हुआ है, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले से ही उर्वरकों की जरूरत का आकलन कर लिया है और पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा है, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का असर किसानों तक न पहुंचे। यह कदम देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इथेनॉल मिश्रण से घटा तेल आयात, ऊर्जा सुरक्षा को बलऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत को बड़ी सफलता इथेनॉल मिश्रण से मिल रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण देश हर साल लगभग 4.5 करोड़ बैरल तेल के आयात को कम करने में सफल हो रहा है। यह न सिर्फ विदेशी मुद्रा की बचत कर रहा है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में उतार चढ़ाव से भी देश को बचा रहा है। सरकार वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में केंद्र ने राज्यों को 15,000 ई बसें भी उपलब्ध कराई हैं, जिससे स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा मिल रहा है। ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र के लिए रणनीति, अर्थव्यवस्था मजबूतप्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती है और पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में सरकार ने संभावित व्यवधानों से निपटने के लिए व्यापक रणनीति बनाई है। हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक में उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों, बिजली संयंत्रों में पर्याप्त कोयला भंडार और जरूरी आयात के स्रोतों में विविधता लाने पर चर्चा की गई। रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स जैसे क्षेत्रों के लिए भी नई रणनीतियां तैयार की जा रही हैं। साथ ही भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए नए निर्यात बाजार विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था किसी भी वैश्विक संकट में मजबूत बनी रहे।