ईरान का दावा या सच्चाई? अमेरिका ने F-15 को मार गिराने की खबर को बताया फर.

नई दिल्ली:ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक नया विवाद सामने आया जब ईरानी मीडिया ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा ने एक अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया है, यह रिपोर्ट सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई, लेकिन अमेरिका ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे झूठ और अफवाह करार दिया अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट किया कि ईरान की ओर से फैलाए जा रहे दावे पूरी तरह निराधार हैं, उन्होंने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान अमेरिकी सेना ने हजारों उड़ानें भरी हैं और इस दौरान किसी भी अमेरिकी F-15 विमान को नुकसान नहीं पहुंचा है, यह बयान ईरान के दावे के सीधे जवाब के रूप में आया ईरानी मीडिया में छपी रिपोर्ट में कहा गया था कि दक्षिणी तट के पास एक संदिग्ध या अनधिकृत विमान को ईरानी एयर डिफेंस ने निशाना बनाया, और दावा किया गया कि यह विमान अमेरिकी F-15 था, हालांकि इस दावे को किसी स्वतंत्र स्रोत या अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है अमेरिका ने अपने बयान में न केवल इस दावे को खारिज किया बल्कि यह भी संकेत दिया कि ईरान की ओर से इस तरह की जानकारी फैलाना एक प्रोपेगेंडा का हिस्सा हो सकता है, सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दावे अक्सर रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालने के लिए किए जाते हैं, खासकर तब जब क्षेत्र में तनाव चरम पर हो वहीं, F-15 जैसे फाइटर जेट दुनिया के सबसे उन्नत और शक्तिशाली लड़ाकू विमानों में से एक माने जाते हैं, जिन्हें अमेरिका की वायु शक्ति का अहम हिस्सा माना जाता है, ऐसे में किसी भी विमान को गिराने का दावा बहुत गंभीर माना जाता है और इसकी पुष्टि बिना ठोस सबूत के नहीं की जा सकती इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित किया कि पश्चिम एशिया में स्थिति कितनी संवेदनशील बनी हुई है और छोटी सी खबर भी बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद का रूप ले सकती है, फिलहाल अमेरिका ने अपने आधिकारिक बयान के जरिए स्थिति को स्पष्ट कर दिया है और ईरान के दावे को पूरी तरह गलत बताया है यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सूचना युद्ध और वास्तविक सैन्य कार्रवाई के बीच अंतर समझना कितना जरूरी है, और जब तक आधिकारिक और स्वतंत्र पुष्टि न हो, तब तक ऐसे दावों को सावधानी से ही देखा जाना चाहिए
एविएशन सेक्टर पर दबाव, IndiGo के भविष्य को लेकर Goldman Sachs की चेतावनी

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन InterGlobe Aviation को लेकर वैश्विक ब्रोकरेज Goldman Sachs ने सतर्क रुख अपनाया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार चढ़ाव के बीच कंपनी के मुनाफे पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। विश्लेषकों ने इंडिगो के टारगेट प्राइस को 13.33 प्रतिशत घटाकर 5,200 रुपए कर दिया है, जो पहले 6,000 रुपए था। हालांकि, इसके बावजूद ब्रोकरेज ने स्टॉक पर अपनी बाय रेटिंग बरकरार रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक हालात और यात्रा क्षेत्र में अनिश्चितता के चलते कंपनी के आय के अनुमान कमजोर हो गए हैं और निकट भविष्य में प्रदर्शन दबाव में रह सकता है। वित्त वर्ष 27 में मुनाफे की उम्मीद नहीं, आय पर संकटविश्लेषकों ने साफ कहा है कि लगातार बदलती कच्चे तेल की कीमतें एयरलाइन सेक्टर के लिए सबसे बड़ा जोखिम बनी हुई हैं। इसी वजह से IndiGo के लिए वित्त वर्ष 2027 में मुनाफा होने की संभावना बेहद कम है। कंपनी के शेयर में उतार चढ़ाव जारी रहने की भी चेतावनी दी गई है। जून तिमाही के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ान क्षमता के अनुमान, खासकर मिडिल ईस्ट रूट्स पर, घटा दिए गए हैं। खाड़ी देशों में बार बार हवाई क्षेत्र बंद होने से उड़ानों पर असर पड़ा है, जिससे यात्रियों की संख्या और राजस्व दोनों प्रभावित हो सकते हैं। जेट ईंधन महंगा, लागत बढ़ने से दबावएयरलाइन उद्योग में जेट ईंधन सबसे बड़ा खर्च होता है और मौजूदा हालात में इसकी कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ईरान से जुड़े संघर्ष के बाद आपूर्ति संबंधी जोखिम और निर्यात प्रतिबंधों के कारण प्रोसेस्ड ईंधन की कीमतें कच्चे तेल से भी ज्यादा तेजी से बढ़ी हैं। इसका सीधा असर इंडिगो की लागत पर पड़ रहा है। यही वजह है कि गोल्डमैन सैक्स ने कंपनी के परिचालन आय यानी ईबीआईटीडीआर के अनुमानों में भी भारी कटौती की है। वित्त वर्ष 2026 के लिए यह अनुमान घटाकर 13,700 करोड़ रुपए और 2027 के लिए 15,900 करोड़ रुपए कर दिया गया है, जो पहले क्रमशः 18,300 करोड़ और 25,800 करोड़ रुपए था। प्रति शेयर आय के अनुमान में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है। शेयर में गिरावट, निवेशकों की नजर भविष्य परबाजार में भी इस रिपोर्ट का असर साफ दिखाई दिया। इंडिगो का शेयर दोपहर कारोबार में करीब 5.75 प्रतिशत गिरकर 3,910 रुपए पर आ गया। बीते एक महीने में यह शेयर लगभग 20 प्रतिशत तक टूट चुका है। हालांकि, ब्रोकरेज का मानना है कि लंबी अवधि में कंपनी की मजबूती उसके लागत नियंत्रण और बैलेंस शीट प्रबंधन पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे बड़ा फोकस आय में स्थिरता और वैश्विक हालात में सुधार पर रहेगा।
मां स्कंदमाता के दिव्य रूप के दर्शन से भक्तों में उमड़ी भक्ति और आस्था की लहर

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्र का पावन पर्व देशभर में भक्ति और आस्था के रंग में रंगा नजर आता है। नवरात्र के पांचवे दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष आयोजन किया जाता है। इस दिन मंदिरों और घरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है जो पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ मां का स्मरण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं जिन्हें स्कंद भी कहा जाता है। इसी कारण उन्हें स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और मनमोहक माना जाता है। मां सिंह पर विराजमान रहती हैं और उनके चार भुजाओं से उनका सौंदर्य और शक्ति झलकती है। उनकी एक भुजा में बाल रूप में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं जबकि अन्य हाथों में कमल पुष्प और वरमुद्रा होती है। यह स्वरूप मातृत्व शक्ति और करुणा का अद्भुत संगम दर्शाता है। मां स्कंदमाता को कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण पद्मासना देवी भी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों और लोकमान्यताओं के अनुसार उनके सच्चे मन से पूजन करने पर संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। नि:संतान दंपतियों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। इसके साथ ही माता की कृपा से संतान की उन्नति और सुख समृद्धि की कामना भी पूरी होती है। नवरात्र के इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा से भक्तों को ज्ञान बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है। यह आशीर्वाद जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। इसलिए पांचवे दिन भक्त विशेष रूप से पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण करते हैं और मां के लिए कमल पुष्प फल और मिठाइयों का भोग अर्पित करते हैं। कई भक्त दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करते हैं और भजन कीर्तन के माध्यम से मां की स्तुति करते हैं। मंदिरों में इस दिन विशेष आयोजन होते हैं। भजन कीर्तन धार्मिक कार्यक्रम और कथा सरिता के माध्यम से भक्तों का मन आध्यात्मिक अनुभव से भर जाता है। इस अवसर पर लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ मां स्कंदमाता की कृपा की कामना करते हैं और एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। मां स्कंदमाता की भक्ति से जीवन में सुख शांति और समृद्धि का संचार होता है। माता के आशीर्वाद से मानसिक शक्ति विवेक और ज्ञान की वृद्धि होती है जिससे जीवन में हर क्षेत्र में संतुलन और सफलता मिलती है। इस दिन की पूजा से भक्त यह भी विश्वास रखते हैं कि मां की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी और संतान से जुड़ी हर चिंता दूर होगी। चैत्र नवरात्र के पांचवे दिन का यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि यह आस्था विश्वास और समाजिक एकता का भी प्रतीक है। मां स्कंदमाता के पूजन से हर भक्त अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव की आशा रखता है और मां की दिव्य कृपा को अनुभव करता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु हर वर्ष की तरह इस साल भी पूरे मनोयोग और विश्वास के साथ मां स्कंदमाता के पूजन में शामिल हुए।
कोठी विवाद में डॉ. गोविंद सिंह का जवाब, धरना प्रदर्शन पर उठे सवालों का खंडन

भिंड । लहार विधानसभा क्षेत्र में कोठी विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। विधायक अम्बरीश शर्मा के धरना प्रदर्शन के दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह पर लगाए गए सरकारी रास्ते पर अवैध निर्माण के आरोपों को लेकर राजनीति गर्म हो गई है। इस मामले में डॉ. गोविंद सिंह ने सख्त शब्दों में पलटवार किया और कहा कि उनके ऊपर लगाए जा रहे सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं और तथ्यों से परे हैं। डॉ. गोविंद सिंह ने स्पष्ट किया कि जिस जमीन पर उनके बेटे और भाई के नाम से कोठी बनी हुई है यदि यह सरकारी रास्ते पर बनी साबित होती है तो वह स्वयं अपने हाथों से रास्ता खुलवा देंगे। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में उन्होंने कभी कोई गलत कार्य नहीं किया है और न ही ऐसे किसी कार्य का समर्थन करेंगे। उन्होंने तात्कालीन कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव और स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठाते हुए बताया कि सर्वे गलत तरीके से कराया गया। उनके अनुसार दो अलग-अलग सर्वे रिपोर्ट सामने आई हैं जिनमें पहली रिपोर्ट को बदलकर दूसरी तैयार की गई जो कई सवाल खड़े करती है। डॉ. सिंह ने विधायक अम्बरीश शर्मा की भाषा शैली पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की भाषा का उपयोग करना उचित नहीं है। विधायक द्वारा जेसीबी से खुद कोठी तोड़ने की बात कहना उनके दबंगई रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और उन्हें कोर्ट से स्टे मिला हुआ है। न्यायालय ने सभी साक्ष्यों के आधार पर आदेश दिए हैं ऐसे में धरना प्रदर्शन कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश न्यायोचित नहीं है। डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि यह लड़ाई अदालत में लड़ी जा रही है और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। वहीं विधायक अम्बरीश शर्मा ने अपने धरना प्रदर्शन के दौरान गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि लहार स्थित डॉ. गोविंद सिंह की कोठी उस स्थान पर बनी है जहां से दलित और पिछड़ा वर्ग की बस्ती मझतौरा मोहल्ला का सरकारी रास्ता निकलता है। उन्होंने दावा किया कि इस रास्ते का सर्वे नंबर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है और करीब डेढ़ साल पहले हुई प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट हो गया था कि रास्ता कोठी के भीतर आता है। विधायक ने कहा कि संबंधित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट और स्थानीय सिविल न्यायालय में अपना पक्ष रखा लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। एसडीएम कोर्ट ने भी दलित बस्ती के पक्ष में निर्णय देते हुए रास्ता खोलने के निर्देश दिए। उन्होंने सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने सरकारी रास्ते पर अवैध रूप से कोठी का निर्माण कराया और मांग की कि निर्माण हटाकर बस्ती के लोगों के लिए रास्ता तुरंत खोला जाए। इस विवाद ने इलाके में राजनीतिक उबाल पैदा कर दिया है। दोनों पक्षों के बयान सामने आने के बाद मामला और भी संवेदनशील हो गया है। डॉ. गोविंद सिंह ने यह भी कहा कि वे हमेशा कानून और न्यायपालिका का पालन करते आए हैं और मामले का निपटारा अदालत के आदेशों के अनुसार होना चाहिए। कोठी विवाद ने लहार विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच भी सवाल खड़े कर दिए हैं। भले ही धरना प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी हो लेकिन डॉ. गोविंद सिंह ने यह साफ कर दिया है कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
अमेरिका–इज़रायल की अटूट दोस्ती: रणनीति, राजनीति और वैश्विक शक्ति का अद्भुत गठजोड़

नई दिल्ली:अमेरिका और इज़रायल का रिश्ता आज के समय में केवल दोस्ती नहीं बल्कि एक गहरा रणनीतिक गठबंधन बन चुका है, जिसे वैश्विक राजनीति का सबसे मजबूत समीकरण माना जाता है, यह रिश्ता केवल भावनाओं पर नहीं बल्कि सुरक्षा, तकनीक, खुफिया जानकारी और आर्थिक हितों पर आधारित है, अमेरिका इज़रायल को मध्य पूर्व में अपना एक ऐसा मजबूत ठिकाना मानता है जो पूरे क्षेत्र में उसके हितों की रक्षा करता है, इज़रायल अमेरिका के लिए एक ऐसा सहयोगी है जो उसके रणनीतिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है मध्य पूर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जहां तेल और गैस के विशाल भंडार हैं, वहां इज़रायल अमेरिका के लिए एक सुरक्षा ढाल की तरह काम करता है, ईरान जैसे देशों के साथ तनाव के दौरान इज़रायल न केवल अपने हितों की रक्षा करता है बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका के हितों की भी सुरक्षा करता है, यही कारण है कि अमेरिका इज़रायल को हर साल अरबों डॉलर की सैन्य सहायता देता है, हालांकि यह सहायता अंततः अमेरिकी अर्थव्यवस्था को ही वापस मिल जाती है क्योंकि इज़रायल इन पैसों से अमेरिकी हथियार खरीदता है युद्ध के मैदान में इन हथियारों के उपयोग से अमेरिका को वास्तविक समय का डेटा मिलता है जिससे वह अपने हथियारों को और उन्नत बना सकता है, मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसे आयरन डोम में भी अमेरिका की अहम भागीदारी है, यह सहयोग दोनों देशों को तकनीकी रूप से और मजबूत बनाता है खुफिया जानकारी के क्षेत्र में भी इज़रायल अमेरिका का बेहद भरोसेमंद साझेदार है, इज़रायल की खुफिया एजेंसी मोसाद का नेटवर्क दुनिया के कई हिस्सों में फैला हुआ है, खासकर इस्लामिक देशों और ईरान के अंदर इसकी पकड़ मजबूत मानी जाती है, इस एजेंसी से मिलने वाली जानकारियां अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं, जिससे वह अपने देश पर संभावित खतरों को समय रहते रोक पाता है तकनीकी और आर्थिक साझेदारी भी इस रिश्ते का अहम हिस्सा है, इज़रायल को स्टार्टअप नेशन कहा जाता है, जहां दुनिया की बड़ी कंपनियां जैसे इंटेल, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट अपने रिसर्च सेंटर स्थापित कर चुकी हैं, इज़रायल और अमेरिका के बीच टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का गहरा संबंध है, जिसने दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है अमेरिका की घरेलू राजनीति में भी इज़रायल का प्रभाव साफ देखा जा सकता है, अमेरिकी इज़रायल पब्लिक अफेयर्स कमेटी जैसी शक्तिशाली लॉबी वहां की विदेश नीति को प्रभावित करती है, कोई भी अमेरिकी नेता इज़रायल के खिलाफ खुलकर नहीं जा सकता क्योंकि इससे उसका राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है इसके अलावा अमेरिका में एक बड़ा ईसाई वर्ग इज़रायल को धार्मिक दृष्टिकोण से समर्थन देता है, वे इसे अपनी आस्था का हिस्सा मानते हैं और इज़रायल की सुरक्षा को अपना कर्तव्य समझते हैं, यह धार्मिक और सांस्कृतिक समर्थन भी इस रिश्ते को मजबूत बनाता है इतिहास की बात करें तो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने यूरोप से आए कई यहूदी वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों को शरण दी, जिनमें अल्बर्ट आइंस्टीन जैसे महान वैज्ञानिक शामिल थे, जिन्होंने परमाणु अनुसंधान और मैनहट्टन प्रोजेक्ट की नींव रखने में भूमिका निभाई, एडवर्ड टेलर और जॉन वॉन न्यूमैन जैसे वैज्ञानिकों ने अमेरिका को वैज्ञानिक महाशक्ति बनाने में योगदान दिया ऑपरेशन पेपरक्लिप के जरिए भी अमेरिका ने जर्मन वैज्ञानिकों को अपने साथ जोड़ा, जिससे अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक में बड़ी प्रगति हुई, इस तरह यह रिश्ता केवल आज का नहीं बल्कि दशकों पुरानी रणनीतिक सोच का परिणाम है
1 अप्रैल से एटीएम नियमों में होगा बड़ा बदलाव, निकासी सीमा और चार्ज पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली। अगले महीने 1 अप्रैल 2026 से बैंकिंग नियमों में बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जो सीधे एटीएम इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को प्रभावित करेंगे। इन बदलावों के तहत एचडीएफसी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बंधन बैंक ने कैश निकासी सीमा, फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट और चार्ज को लेकर नई व्यवस्था तैयार की है। एचडीएफसी बैंक ने फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में किया बदलावएचडीएफसी बैंक ने घोषणा की है कि अब एटीएम कैश विथड्रॉल UPI आधारित फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट से जोड़ा जाएगा। इसका मतलब है कि तय फ्री लिमिट पार होने के बाद हर अतिरिक्त एटीएम ट्रांजैक्शन पर ग्राहकों को 23 रुपये और टैक्स देना होगा। नए नियम मेट्रो शहरों में तीन फ्री ट्रांजैक्शन और नॉन-मेट्रो शहरों में पांच फ्री ट्रांजैक्शन तक ही लागू होंगे। इसके बाद किए जाने वाले हर लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगेगा। PNB ने घटाई ATM निकासी सीमाPunjab National Bank ने अपने कुछ डेबिट और प्रीमियम कार्ड्स पर कैश निकासी सीमा घटाने का फैसला किया है। चुनिंदा डेबिट कार्ड्स पर अब ग्राहक पहले की तुलना में आधी राशि, यानी 50,000 रुपये प्रतिदिन, ही निकाल सकेंगे। वहीं कुछ प्रीमियम कार्ड्स पर दैनिक निकासी सीमा घटाकर 75,000 रुपये कर दी गई है। पहले यह सीमा 1.5 लाख रुपये तक थी। यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। बंधन बैंक ने भी बदले नियमबंधन बैंक ने भी अपने ग्राहकों के लिए ATM ट्रांजैक्शन से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। अब ग्राहक बैंक के अपने एटीएम पर महीने में सिर्फ 5 फ्री फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन कर सकेंगे। अन्य बैंकों के एटीएम से यह सीमा घटाकर 3 फ्री ट्रांजैक्शन कर दी गई है। तय सीमा पार होने पर हर अतिरिक्त लेनदेन पर 23 रुपये का चार्ज लागू होगा।
विकेटों का खेल! Purple Cap जीतकर इन भारतीयों ने रचा इतिहास

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में जहां बल्लेबाजों के लिए ऑरेंज कैप खास होती है, वहीं गेंदबाजों के लिए पर्पल कैप (Purple Cap Winners) सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है। यह कैप हर सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज को दी जाती है। इसकी शुरुआत साल 2008 में हुई थी और तब से यह गेंदबाजों की श्रेष्ठता का प्रतीक बन चुकी है। IPL के इतिहास में कई दिग्गज गेंदबाजों ने पर्पल कैप अपने नाम की है। अगर भारतीय खिलाड़ियों की बात करें तो Bhuvneshwar Kumar, Harshal Patel और Mohammed Shami जैसे गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इस लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। ये हैं भारतीय Purple Cap Winners भुवनेश्वर कुमार भुवनेश्वर कुमार उन चुनिंदा गेंदबाजों में शामिल हैं जिन्होंने पर्पल कैप दो बार (2016 और 2017) जीती है। वहीं हर्षल पटेल ने 2021 में 32 विकेट लेकर रिकॉर्ड की बराबरी की और 2024 में फिर से 24 विकेट के साथ यह खिताब अपने नाम किया। मोहम्मद शमीअगर हाल के सालों पर नजर डालें तो मोहम्मद शमी ने 2023 में 28 विकेट लेकर पर्पल कैप जीती थी। इसके बाद 2025 में प्रसिद्ध कृष्णा ने 25 विकेट लेकर यह उपलब्धि हासिल की। हर्षल पटेलIPL के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट एक सीजन में लेने का रिकॉर्ड 32 विकेट का है, जिसे ड्वेन ब्रावो (2013) और हर्षल पटेल (2021) ने बनाया। कुल मिलाकर देखा जाए तो पर्पल कैप सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह टीम की सफलता में गेंदबाज के योगदान को भी दर्शाती है। हर सीजन में यह रेस बेहद रोमांचक होती है और गेंदबाज अपनी धारदार गेंदबाजी से मैच का रुख बदल देते हैं। आने वाले IPL सीजन में भी फैंस की नजरें इस बात पर रहेंगी कि इस बार कौन सा गेंदबाज विकेटों की बारिश कर पर्पल कैप अपने नाम करता है।
मां त्रिपुर सुंदरी का पंचमेवा श्रृंगार, श्रद्धालुओं में उमड़ा आस्था का सैलाब

नरसिंहपुर । नरसिंहपुर जिले के परमहंसी गंगा आश्रम श्रीवनम की पहाड़ियों पर नवरात्र का पावन पर्व अपने चरम पर है। इस पावन अवसर पर नवरात्र के पांचवे दिन श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष और अद्भुत दृश्य देखने को मिला। राजराजेश्वरी मां त्रिपुर सुंदरी का पंचमेवा से श्रृंगार किया गया। काजू, किशमिश, बादाम, अंजीर और पिस्ता से मां के आभूषण और वस्त्रों को सजाया गया। इस अनोखे और आकर्षक श्रृंगार ने पूरे आश्रम परिसर को भक्ति और आस्था के रंगों से भर दिया। श्रद्धालु सुबह से ही आश्रम में पहुंचना शुरू हो गए थे। हर ओर उत्साह का माहौल नजर आ रहा था। भक्तों की आँखों में आस्था झलक रही थी और वे माता के दिव्य रूप को निहारते हुए उनके आशीर्वाद की कामना कर रहे थे। पंचमेवा के श्रृंगार में मां के आभूषण और वस्त्रों की सजावट इतनी मनमोहक थी कि हर भक्त मंत्रमुग्ध हो गया। विशेष रूप से काजू, किशमिश, बादाम, अंजीर और पिस्ता से बने गहनों और वस्त्रों ने मां के रूप को और भी दिव्य और मोहक बना दिया। मान्यता है कि राजराजेश्वरी मां त्रिपुर सुंदरी की साधना से भक्तों को भोग और मोक्ष दोनों का फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि नवरात्र के इन दिनों श्रद्धालु विशेष रूप से इस स्थान की ओर आकर्षित होते हैं। आश्रम में लगी भव्य सजावट और मां के पंचमेवा श्रृंगार को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आ रहे हैं। हर कदम पर भक्तों की श्रद्धा और भक्ति का अनुभव किया जा सकता है। श्रीवनम आश्रम की पहाड़ियों पर यह दृश्य अत्यंत मनोहारी था। मां के श्रृंगार के चारों ओर रंग-बिरंगे फूलों की सजावट और दीपों की रौशनी ने वातावरण को और भी पवित्र बना दिया। श्रद्धालु न केवल मां के दर्शन कर रहे थे बल्कि पंचमेवा श्रृंगार की अद्भुत कला और सजीवता की सराहना भी कर रहे थे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इस दिव्य अनुभव में लीन थे। भक्तों का कहना था कि इस पंचमेवा श्रृंगार ने न केवल मां के रूप को अद्भुत बना दिया बल्कि उनके मन को भी शांति और आनंद से भर दिया। यह अनुभव उन्हें जीवनभर याद रहेगा। इस अवसर पर आश्रम के महंत और पुजारी ने भी मां को विशेष भोग अर्पित किया और पंचमेवा के आभूषणों का महत्व समझाते हुए श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन दिया। पूरे परिसर में भक्ति का माहौल देखने लायक था। मंदिर के गर्भगृह से लेकर बाहरी हिस्सों तक हर जगह श्रद्धालुओं की श्रद्धा और उत्साह की चमक दिखाई दे रही थी। पंचमेवा के श्रृंगार के दर्शन करने वाले श्रद्धालु अपने हाथ जोड़कर मां के चरणों में शीश झुकाते और आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे। यही नवरात्र की असली भक्ति और आनंद की अनुभूति है। आस्था और भक्ति की इस अनूठी परंपरा ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं के दिलों को भी छू लिया। पंचमेवा श्रृंगार के माध्यम से मां त्रिपुर सुंदरी का दिव्य रूप भक्तों के सामने उतारा गया और उन्होंने इस अवसर को जीवन का अद्भुत अनुभव माना।
उत्तर प्रदेश में सौर क्रांति, पीएम सूर्य घर योजना से घर-घर पहुंची स्वच्छ ऊर्जा..

नई दिल्ली: पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए खुद को देश के अग्रणी हरित ऊर्जा राज्यों में शामिल कर लिया है वर्ष 2017 से पहले जहां राज्य की सौर क्षमता लगभग 400 मेगावाट तक सीमित थी वहीं आज यह बढ़कर 5000 मेगावाट से अधिक हो चुकी है यह बदलाव राज्य की मजबूत नीतियों बड़े निवेश और जनभागीदारी का परिणाम है इस बदलाव में PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है इस योजना के तहत सरकार ने लोगों को अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित किया है जिससे आम नागरिक भी स्वच्छ ऊर्जा के इस अभियान का हिस्सा बन सके हैं रूफटॉप सोलर कार्यक्रम की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में 4 लाख से अधिक सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं इससे न केवल बिजली की लागत कम हुई है बल्कि लोगों को हर महीने हजारों रुपये की बचत भी हो रही है साथ ही नेट मीटरिंग के जरिए अतिरिक्त बिजली बेचकर आम लोग अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं वर्ष 2017 के बाद लागू की गई सौर ऊर्जा नीतियों ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति 2017 और 2022 के तहत बड़े सोलर पार्क और ग्राउंड माउंटेड प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया गया जिससे राज्य में निवेश भी बढ़ा और क्षमता में तेजी से वृद्धि हुई सरकार ने सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं जिसमें 22000 मेगावाट सौर क्षमता हासिल करने का लक्ष्य शामिल है इसके लिए सरकारी भवनों का सौरकरण बड़े प्रोजेक्ट्स और नई तकनीकों पर जोर दिया जा रहा है इसके साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में भी उत्तर प्रदेश ने कदम बढ़ाए हैं गोरखपुर और रामपुर में पायलट प्रोजेक्ट्स स्थापित किए जा रहे हैं जो भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्प प्रदान करेंगे यह पहल राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत बनाती है सौर ऊर्जा के विस्तार से पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिला है इसके साथ ही हजारों युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त हुए हैं खासकर सोलर इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के क्षेत्र में घरेलू स्तर पर भी सौर ऊर्जा ने लोगों की जीवनशैली को बदल दिया है अब सौर ऊर्जा का उपयोग केवल लाइट और पंखे तक सीमित नहीं है बल्कि इंडक्शन कुकटॉप इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य उपकरणों के संचालन में भी इसका उपयोग बढ़ रहा है इससे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम हो रही है उत्तर प्रदेश की यह प्रगति दर्शाती है कि सही नीतियों और योजनाओं के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सकता है और यह राज्य को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है
मिडिल ईस्ट तनाव पर संसद में बोले PM मोदी, "भारत के सामने भी चुनौतियां, लेकिन संकट से निपटने सरकार तैयार"

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी जंग का असर अब सीधे भारत पर भी दिखने लगा है। सोमवार को संसद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इस युद्ध ने भारत के सामने कई अप्रत्याशित और गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार आर्थिक, सुरक्षा और मानवीय सभी स्तरों पर इस संकट से निपटने के लिए पूरी तैयारी के साथ काम कर रही है। युद्ध से खड़ी हुई चुनौतियांप्रधानमंत्री ने लोकसभा में कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति चिंताजनक है और यह संकट तीन हफ्तों से ज्यादा समय से जारी है। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम जनता की जिंदगी पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए भी यह आसान नहीं है और कई मोर्चों पर चुनौतियां सामने आई हैं। खाड़ी में 1 करोड़ भारतीय, सुरक्षा प्राथमिकतापीएम मोदी ने बताया कि युद्ध क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और करीब 1 करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं। उनकी सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी चिंता है। 3.75 लाख भारतीय सुरक्षित लौटाए गएप्रधानमंत्री ने कहा कि अब तक 3 लाख 75 हजार से ज्यादा भारतीयों को सुरक्षित घर लाया गया है। सिर्फ ईरान से ही करीब 1 हजार भारतीयों को निकाला गया, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल थे। उन्होंने दुख जताया कि कुछ लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबरें भी आई हैं। पेट्रोल-डीजल और गैस की आपूर्ति सुरक्षितपीएम मोदी ने बताया कि भारत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है, जो संकट में है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए खास रणनीति तैयार की है। देश अपनी घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दे रहा है और उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है। ऊर्जा सुरक्षा के बड़े कदम– भारत अब पहले 27 देशों की बजाय 41 देशों से ऊर्जा आयात कर रहा है।– देश के पास 53 लाख मैट्रिक टन से अधिक तेल का भंडार मौजूद है।– पिछले सालों में इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने से पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाया जा रहा है।– रेलवे के बिजलीकरण से ऊर्जा पर दबाव कम हुआ है। खेती और खाद पर नजरप्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध का असर कृषि पर भी पड़ सकता है, लेकिन देश में खाद्यान्न की पर्याप्त उपलब्धता है। किसानों के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था की गई है और 6 नए यूरिया प्लांट शुरू किए गए हैं, ताकि खेती पर असर न्यूनतम हो। भारत हर स्थिति के लिए तैयारपीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि सरकार वैश्विक सहयोगियों के संपर्क में है ताकि समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें। उन्होंने कहा कि भारत इस संकट का मजबूती से सामना करेगा और देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।