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टेक्नोलॉजी ने छीना फिल्मों का जादुई रोमांस जावेद अख्तर की बात ने खोल दी सोच की नई खिड़की

नई दिल्ली । फिल्मों में कभी जो रोमांस दिलों को छू जाता था आज वही एहसास धीरे धीरे फीका पड़ता नजर आ रहा है। पुराने दौर की फिल्मों में इंतजार तड़प और अधूरी ख्वाहिशों का जो जादू था वह अब कम होता दिख रहा है। इस बदलते ट्रेंड पर दिग्गज लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने एक बेहद दिलचस्प और तार्किक वजह सामने रखी है जो आज की पीढ़ी को सोचने पर मजबूर कर देती है। एक कार्यक्रम के दौरान बातचीत में जावेद अख्तर ने कहा कि टेक्नोलॉजी खासकर स्मार्टफोन्स ने रोमांस की बुनियाद को ही बदल दिया है। उनके मुताबिक असली रोमांस पाने में नहीं बल्कि पाने की उम्मीद में होता है। यानी जो इंतजार होता था वही प्यार को खास बनाता था। आज के दौर में सब कुछ तुरंत उपलब्ध है और यही वजह है कि उस इंतजार का रोमांच खत्म हो गया है। उन्होंने अपने तर्क को समझाने के लिए रोमियो और जूलिएट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर उस दौर में दोनों के पास स्मार्टफोन होते तो क्या रोमियो ठंडी रात में जूलिएट की बालकनी के नीचे खड़ा होकर उसका इंतजार करता। शायद नहीं क्योंकि वह एक कॉल या मैसेज में बात कर सकता था। यही फर्क आज के और पुराने रोमांस में सबसे बड़ा बदलाव बनकर सामने आया है। जावेद अख्तर ने आगे कहा कि पहले दूरी ही आकर्षण पैदा करती थी। जब किसी को देखने मिलने या समझने के लिए वक्त लगता था तो कल्पनाएं जन्म लेती थीं। वही कल्पनाएं एक आम इंसान को भी खास बना देती थीं। लेकिन आज सब कुछ तुरंत सामने आ जाता है। न इंतजार है न कल्पना की जरूरत। इसी कारण रोमांस का वह जादू जो धीरे धीरे बनता था अब गायब होता जा रहा है। इस चर्चा के दौरान आमिर खान भी उनकी बात से सहमत नजर आए। यह साफ दिखा कि फिल्म इंडस्ट्री के बड़े नाम भी इस बदलाव को महसूस कर रहे हैं। आज की फिल्मों में तेजी है लेकिन भावनाओं की गहराई कहीं न कहीं कम होती जा रही है। वर्क फ्रंट की बात करें तो आमिर खान इन दिनों अपनी फिल्म लाहौर 1947 को लेकर चर्चा में हैं। इसके अलावा उनके बेटे जुनैद खान की फिल्म एक दिन भी सुर्खियों में बनी हुई है। हालांकि इन प्रोजेक्ट्स को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है लेकिन दर्शकों की उत्सुकता लगातार बनी हुई है। कुल मिलाकर जावेद अख्तर की यह बात सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है बल्कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर भी लागू होती है। टेक्नोलॉजी ने जहां जिंदगी को आसान बनाया है वहीं उसने रिश्तों के उस एहसास को भी बदल दिया है जिसमें इंतजार और कल्पना की सबसे बड़ी भूमिका हुआ करती थी।

बंगाल चुनाव में हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरेगी AIMIM, ओवैसी ने की घोषणा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया समीकरण उभरकर सामने आया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी हुमायूं कबीर की ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के साथ मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव में उतरेगी। ओवैसी 25 मार्च को कोलकाता में हुमायूं कबीर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस गठबंधन की रूपरेखा पेश करेंगे। हुमायूं कबीर की पार्टी ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि वह 2026 के विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। AIMIM भी इस गठबंधन का हिस्सा होगी और लगभग 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। अब तक कबीर की पार्टी ने 18 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें रानीनगर, भगवानगोला और मुर्शिदाबाद जैसी महत्वपूर्ण सीटें शामिल हैं। हुमायूं कबीर स्वयं तीन सीटों से चुनाव लड़ेंगे, भगवानगोला, नौदा और राजीनगर, जो मुर्शिदाबाद जिले में आती हैं।चुनाव की तारीखें पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव दो चरणों में होंगे:पहला चरण (152 सीटें): 23 अप्रैल 2026दूसरा चरण (142 सीटें): 29 अप्रैल 2026नतीजे: 4 मई 2026 सियासी मायने ममता बनर्जी की TMC और मुख्य विपक्षी दल BJP के बीच मुकाबले में ओवैसी और कबीर का गठबंधन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। 2021 के चुनावों में कांग्रेस और वामपंथी दलों का प्रभाव कम हो गया था, ऐसे में यह नया मोर्चा राज्य की राजनीति में ‘तीसरे कोण’ के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है।

ईरान के समर्थन में कश्मीर से मदद, लोगों ने दान किए गहने और नकद राशि

नई दिल्‍ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान के समर्थन में कश्मीर से मदद की खबर सामने आई है। केंद्र शासित प्रदेश के बडगाम जिले में स्थानीय लोगों ने एक मस्जिद में दान केंद्र स्थापित कर आर्थिक सहयोग जुटाना शुरू किया। यहां समुदाय के लोगों ने सोने-चांदी के बर्तन, गहने और नकद राशि देकर ईरान की सहायता का प्रयास किया। जानकारी के अनुसार, Imam Zaman Mosque Budgam में आयोजित इस अभियान के दौरान कई महिलाएं अपने कानों की बालियां, पुराने गहने, बर्तन और अन्य घरेलू सामान लेकर पहुंचीं और उन्हें दान के रूप में सौंप दिया। स्थानीय लोगों ने बताई वजह स्थानीय निवासी मोहसिन अली ने कहा कि दान केंद्र का उद्देश्य ईरान को आर्थिक मदद पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग किया है। उनके मुताबिक, “हम सीधे जाकर मदद नहीं कर सकते, इसलिए आर्थिक सहयोग के माध्यम से समर्थन दे रहे हैं।” ‘कमजोरों की मदद’ बताकर दिया समर्थन मोहसिन अली ने कहा कि ईरान को समर्थन देना उनके लिए कमजोरों की मदद करने जैसा है। उन्होंने बताया कि समुदाय के लोगों ने स्वेच्छा से इस अभियान में हिस्सा लिया और जरूरतमंदों के लिए सहयोग दिया। ईरानी दूतावास ने जताया आभार भारत में स्थित Embassy of Iran in India ने भी इस पहल पर धन्यवाद व्यक्त किया। रिपोर्ट के अनुसार, दूतावास ने सोशल मीडिया के माध्यम से भारत के लोगों के समर्थन की सराहना की। इससे पहले ईरान के समर्थन में दान अभियान शुरू किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। वैश्विक तनाव का असर United States और Israel के साथ बढ़ते तनाव के चलते Iran क्षेत्र में संघर्ष जारी है। Strait of Hormuz में स्थिति तनावपूर्ण होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई जारी है, जिससे युद्ध लंबा खिंचने की संभावना बढ़ती दिखाई दे रही है।

चुनाव आयोग आज बंगाल में जारी करेगा अंतिम मतदाता सूची, पूरे राज्य में अलर्ट

कोलकाता। चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में सोमवार को ही पहली पूरक मतदाता सूची प्रकाशित कर सकता है। इसको देखते हुए पूरे बंगाल के थानों को अलर्ट पर रखा गया है। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया,उचित सत्यापन के बाद 27 लाख से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है। निर्वाचन आयोग सोमवार शाम को पश्चिम बंगाल में चुनाव के लिए पहली सप्लिमेंट्री वोटर लिस्ट प्रकाशित कर सकता है। यह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यह सूची अंतिम मतदाता सूची की तरह ही जारी की जाएगी, जिसकी प्रतियां जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेजी जाएंगी और बाद में राज्य भर के मतदान केंद्रों पर प्रदर्शित की जाएंगी। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया, ‘विचाराधीन मामलों की समीक्षा की प्रक्रिया व्यापक रही है और उचित सत्यापन के बाद 27 लाख से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है। पूरक सूची में इन परिणामों को पारदर्शी रूप से शामिल किया जाएगा।” उन्होंने बताया कि ये 27 लाख मतदाता उन 60 लाख मतदाताओं में शामिल थे जिन्हें 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में ‘विचाराधीन’ के रूप में चिह्नित किया गया था। बंगाल में हाई अलर्ट पहली पूरक मतदाता सूची के सोमवार को जारी होने की संभावना के मद्देनजर राज्य प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते सभी थानों और पुलिस प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है। राज्य के गृह विभाग ने जिलाधिकारियों को विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया है। विभाग ने सभी थानों को सरकारी कार्यालयों में भीड़ संभालने के लिए पर्याप्त पुलिस तैनाती का इंतजाम करने और किसी भी व्यवधान को रोकने के लिए कानून लागू करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय बनाये रखने को भी कहा है। मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय ने सोमवार को अनुपूरक मतदाता सूची जारी होने की पुष्टि की है। इस सूची से बड़ी संख्या में मतदाताओं को लेकर बनी अनिश्चितता दूर होने की उम्मीद है। इससे पहले 28 फरवरी को जारी अंतिम एसआईआर सूची में 60 लाख से अधिक नामों को विचाराधीन श्रेणी में रखा गया था, जिससे उनकी स्थिति अनसुलझी रह गयी थी। सीईओ कार्यालय के सूत्रों ने संकेत दिया है कि शुक्रवार तक, इनमें से लगभग 27 लाख मामलों की समीक्षा की जा चुकी है और राज्य तथा पड़ोसी क्षेत्रों से लाये गये न्यायिक अधिकारियों के पैनल ने इन्हें निपटाया है। तार्किक विसंगति के तहत रखे गये मामलों की समीक्षा के लिए कुल मिलाकर 700 से अधिक न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को लगाया गया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने पहले उल्लेख किया था कि चुनाव से पहले विचाराधीन सभी मामलों के हल होने की संभावना है। इसके अलावा भारत के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भारत चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े विवादों को निपटाने के लिए राज्य भर में 19 जिला-स्तरीय अपीलीय निकाय स्थापित किए हैं। ये अपीलीय निकाय उन मामलों की सुनवाई के लिए जिम्मेदार होंगे जो आधिकारिक निबटारे में विफल रहे थे। स्थिति की गंभीरता के मद्देनजर कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी एस शिवगणनम को कोलकाता और उत्तर 24 परगना जैसे प्रमुख जिलों में अपीलों की निगरानी के लिए नियुक्त किया गया है, जबकि अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को शेष जिलों में इसी तरह के मामलों को संभालने का जिम्मा सौंपा गया है। पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी करने में हुई देरी पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिन्होंने अधिकारियों पर वैध मतदाताओं को बेवजह परेशान करने का आरोप लगाया है।

कॉलेजियम प्रणाली पर पूर्व CJI की दो टूक, बोले– फिलहाल भारत के लिए यही सबसे उपयुक्त व्यवस्था

नई दिल्ली। देश के पूर्व मुख्य जस्टिस बी आर गवई (Justice B. R. Gavai) ने न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में कॉलेजियम प्रणाली ही भारत के लिए सबसे उपयुक्त व्यवस्था है। उन्होंने यह भी माना कि यह प्रणाली पूरी तरह त्रुटिहीन नहीं है, लेकिन अब तक के अनुभव के आधार पर इसे बेहतर विकल्प बताया। यह बात पूर्व CJI ने ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में कही। इस दौरान उन्होंने “न्यायिक शासन की पुनर्कल्पना” विषय पर बोलते हुए न्यायपालिका, कार्यपालिका और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। ‘कोई भी प्रणाली परिपूर्ण नहीं’ जस्टिस गवई ने कहा कि कॉलेजियम व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं, लेकिन कोई भी प्रणाली पूरी तरह परिपूर्ण नहीं होती। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इसके कामकाज को देखने के बाद उन्हें लगता है कि फिलहाल यही प्रणाली देश के लिए सबसे बेहतर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉलेजियम मनमाने ढंग से काम नहीं करता। उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठ न्यायाधीश नाम सुझाते हैं, जिसके बाद प्रक्रिया केंद्र सरकार को भेजी जाती है। विभिन्न एजेंसियों से सुझाव लेने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाता है। सरकार की भूमिका पर क्या बोले पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि केंद्र सरकार को किसी नाम पर आपत्ति होती है, तो वह कॉलेजियम को वापस भेज सकती है। कॉलेजियम इन आपत्तियों पर विचार कर अंतिम निर्णय करता है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट कई बार स्पष्ट कर चुका है कि कॉलेजियम द्वारा दोबारा भेजे गए नामों पर नियुक्ति करना कार्यपालिका की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि कई मामलों में दूसरी सिफारिश के बाद भी नियुक्तियां लंबित हैं। उन्होंने इसे आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा नहीं बताते हुए कहा कि यह एक महत्वपूर्ण संस्थागत प्रश्न है, जिस पर ध्यान देना जरूरी है। जजों के ट्रांसफर और भूमिका पर टिप्पणी जस्टिस गवई ने न्यायाधीशों के स्थानांतरण पर भी कहा कि कुछ विशेष परिस्थितियों में यह आवश्यक हो जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई न्यायाधीश बार-बार शीर्ष अदालत के फैसलों की अनदेखी करता है, तो क्या कॉलेजियम को सुधारात्मक कदम नहीं उठाने चाहिए। कार्यपालिका पर संयम की सलाह पूर्व CJI ने न्यायपालिका और कार्यपालिका के संतुलन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अदालतें हमेशा संयम बरतती हैं, लेकिन जब नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है या शक्तियों का संतुलन बिगड़ता है, तो न्यायपालिका हस्तक्षेप करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कार्यपालिका किसी व्यक्ति पर केवल संदेह के आधार पर उसका घर ध्वस्त कर देती है, तो क्या न्यायपालिका चुप बैठ सकती है। उन्होंने कहा कि यह कानून के शासन से जुड़ा गंभीर प्रश्न है, जिस पर विचार होना चाहिए।

होर्मुज तनाव: एलएनजी संकट के बाद अब भारत में यूरिया उत्पादन पर असर, सप्लाई चेन प्रभावित

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में युद्ध के बढ़ते खतरे और होर्मुज जलसंधि में रुकावट के कारण तेल और गैस संकट और गहरा गया है। इसका असर अब अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ने लगा है। एलपीजी संकट के बाद अब एलएनजी की वैश्विक आपूर्ति बाधित होने से भारत में यूरिया की कमी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के अनुसार होर्मुज तनाव के चलते देश के यूरिया संयंत्रों में उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत घट गया है। यूरिया उत्पादन में कटौती एक रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलसंधि के माध्यम से एलएनजी आपूर्ति में रुकावट के कारण ईंधन की उपलब्धता कम हो गई। इसका असर सीधे भारत के यूरिया संयंत्रों पर पड़ा और उत्पादन में लगभग आधी कटौती करनी पड़ी। सप्लायर्स ने फोर्स मेज्योर का हवाला दिया, जिससे पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड को भी अपने रिसीविंग टर्मिनल पर इसी तरह का कदम उठाना पड़ा। गैस की कम आपूर्ति का असर सप्लाई चेन पर भी देखने को मिला। गैल इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने रासगैस कॉन्ट्रैक्ट के तहत संचालित यूरिया संयंत्रों को गैस की आपूर्ति कम कर दी। कम उत्पादन, बढ़ा घाटा उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गैस की आपूर्ति सामान्य स्तर की तुलना में केवल 60-65 प्रतिशत रह गई है। ईंधन की कमी के कारण प्लांटों ने यूरिया उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत की कटौती की। इसके लिए संयंत्रों को अधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे वित्तीय नुकसान भी हो रहा है। एक प्लांट प्रबंधक के अनुसार, अचानक लोड परिवर्तन बड़े यूरिया और अमोनिया संयंत्रों के लिए संभव नहीं हैं। इससे उपकरण खराब होने, प्लांट ठप होने और परिचालन कर्मियों की सुरक्षा पर भी खतरा रहता है।भारत में यूरिया भंडार भारत दुनिया के सबसे बड़े यूरिया उपभोक्ताओं में से एक है। लंबे समय तक उत्पादन में व्यवधान रहने से खरीफ की बुवाई से पहले यूरिया की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, 19 मार्च 2026 तक देश में 61.14 लाख टन यूरिया का भंडार था, जबकि एक साल पहले यह 55.22 लाख टन था। इस आंकड़े से फिलहाल कुछ राहत मिलती है।

ट्रंप की करीबी का दावा—‘पत्नी की वजह से भड़क सकता है तीसरा विश्व युद्ध’, ईरान-इजरायल तनाव पर तीखे बयान

वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की राजनीति में भी तीखी बयानबाजी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की करीबी मानी जाने वाली टिप्पणीकार Candace Owens ने दावा किया है कि मौजूदा हालात तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X (social media platform) पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस युद्ध को कुछ प्रभावशाली लोग बढ़ावा दे रहे हैं और इससे वैश्विक संकट पैदा हो सकता है। नेतन्याहू पर युद्ध भड़काने का आरोप ओवेन्स ने Benjamin Netanyahu पर आरोप लगाया कि ईरान के साथ तनाव को जानबूझकर बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि युद्ध को लेकर आम जनता का समर्थन नहीं है, बल्कि कुछ समूह इसे आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह इजरायल या किसी भी युद्ध का समर्थन नहीं करती हैं। ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम तनाव के बीच United States और Iran ने एक-दूसरे के अहम ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। तेहरान ने कहा कि यदि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ तो Strait of Hormuz को बंद किया जा सकता है। इससे पहले ट्रंप ने समुद्री मार्ग खुला रखने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। इजरायल का पलटवार इस बीच Israel के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेंगे। उन्होंने Dimona और Arad का दौरा कर हमलों की स्थिति का जायजा लिया। उनका आरोप है कि ईरान ने रिहायशी इलाकों और संवेदनशील स्थलों को निशाना बनाया। ईरान का जवाब ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने ट्रंप के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान किसी दबाव में आने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि होर्मुज क्षेत्र अन्य देशों के लिए खुला रहेगा, लेकिन ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने वालों को जवाब दिया जाएगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते इस टकराव ने वैश्विक राजनीति में नई चिंता पैदा कर दी है और कई विश्लेषक इसे बड़े संघर्ष की आशंका से जोड़कर देख रहे हैं।

कहां हैं मोजतबा खामेनेई? नए सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी पर CIA-मोसाद सतर्क

नई दिल्ली। ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei की सार्वजनिक अनुपस्थिति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। बताया जा रहा है कि उनके पिता Ali Khamenei की हत्या के बाद 9 मार्च को उन्हें ईरान का तीसरा सुप्रीम लीडर घोषित किया गया था, लेकिन तब से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। इस स्थिति ने Central Intelligence Agency (CIA) और Mossad जैसी खुफिया एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। नवरोज पर नहीं आया वीडियो संदेश फारसी नववर्ष Nowruz के मौके पर आमतौर पर सुप्रीम लीडर देश को संबोधित करते हैं, लेकिन इस बार केवल लिखित बयान जारी किया गया। उनके आधिकारिक चैनल पर कुछ पुरानी तस्वीरें साझा की गईं, जिससे उनकी मौजूदगी और स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ‘जीवित होने के संकेत’, लेकिन ठोस प्रमाण नहीं अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के अनुसार, कुछ संकेत मिले हैं कि ईरानी अधिकारी उनसे मुलाकात की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि वे वास्तव में आदेश दे रहे हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने इस स्थिति को “बेहद अजीब” बताया और कहा कि इतने बड़े पद पर किसी की सक्रियता का कोई स्पष्ट संकेत न मिलना असामान्य है। संभावित कारणों पर चर्चा रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसियां साझा की गई तस्वीरों की जांच कर रही हैं कि वे हाल की हैं या नहीं। इस बीच Masoud Pezeshkian ने नवरोज पर वीडियो संदेश जारी किया, जबकि मोजतबा खामेनेई सामने नहीं आए। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा कारणों से उन्हें सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाया जा रहा हो सकता है। तेल अवीव स्थित Institute for National Security Studies से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा युद्ध जैसे हालात में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी जोखिम भरी हो सकती है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि स्वास्थ्य या चोट से जुड़ी वजहों के कारण वे सामने नहीं आ रहे हों। सत्ता संतुलन पर उठे सवाल बताया जा रहा है कि Israel ने उन्हें संभावित लक्ष्य सूची में ऊपर रखा है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या वास्तव में सत्ता की कमान उनके हाथ में है या Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) जैसे शक्तिशाली सैन्य संगठन निर्णय ले रहे हैं। खुफिया एजेंसियां उनकी गतिविधियों से जुड़े हर संकेत पर नजर बनाए हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति ईरान की आंतरिक राजनीति और चल रहे संघर्ष की दिशा पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।

मिडिल ईस्ट में कब खत्म होगी जंग? ईरान ने अमेरिका से युद्ध खत्म करने को रख दीं 6 शर्तें ते

तेहरान। ईरान ने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध समाप्त करने के लिए नए कानूनी और रणनीतिक ढांचे के हिस्से के रूप में छह शर्तें रखी हैं। यह युद्ध रविवार को अपने 23वें दिन में प्रवेश कर गया। ईरान की ओर से रखी गयी शर्तें हैं- होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया कानूनी ढांचा तैयार करना, युद्ध की पुनरावृत्ति रोकने की गारंटी, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करना, ईरान के इस्लामी गणराज्य को हर्जाने का भुगतान करना, सभी क्षेत्रीय मोर्चों पर युद्धों को समाप्त करना और ईरान के प्रति शत्रुता रखने वाले मीडिया जगत के लोगों पर मुकदमा चलाना और उनका प्रत्यर्पण करना। ईरान के ये प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के एक दिन बाद आये हैं, जिसमें उन्होंने शनिवार को कहा था कि अमेरिका पश्चिम एशिया में सैन्य प्रयासों को ‘समेटने’ के लक्ष्यों को पूरा करने के ‘बहुत करीब’ है। उन्होंने संकेत दिया कि वह पश्चिम एशिया के अभियानों को खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने अज्ञात वरिष्ठ राजनीतिक और सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि ईरान अमेरिका-इजरायल के खिलाफ अपने रक्षात्मक युद्ध में पूर्व-नियोजित, बहु-चरणीय योजना लागू कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह रणनीति महीनों पहले विकसित की गयी थी और इसे उच्च रणनीतिक धैर्य के साथ अंजाम दिया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि पूरे क्षेत्र में अमेरिकी-इजरायली हवाई रक्षा प्रणालियों और रडार बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने और नष्ट करने के बाद ईरान ने अब इजरायली सत्ता के हवाई क्षेत्र पर ‘पूर्ण नियंत्रण’ स्थापित कर लिया है। अधिकारी ने कहा कि ईरान ‘आक्रमणकारी को सजा देने’ की अपनी नीति तब तक जारी रखने का इरादा रखता है, जब तक वह अमेरिका-इजरायली आक्रामकता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ‘ऐतिहासिक सबक’ नहीं सिखा देता। अधिकारी ने आगे बताया कि कई क्षेत्रीय पक्षों और मध्यस्थों ने युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से ईरान को प्रस्ताव भेजे हैं। ईरान ने उनके सामने ऐसी शर्तें रखी हैं, जिन्हें किसी भी समझौते पर पहुंचने से पहले पूरा किया जाना और गंभीरता से लिया जाना जरूरी है। युद्ध के दो-तीन हफ्ते चलने की और उम्मीद वहीं, ‘एक्सियोस’ ने व्हाइट हाउस के करीबी सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि वह संघर्ष को समेटने पर विचार कर रहे हैं, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया कि वे अभी दो-तीन सप्ताह और सैन्य अभियानों की उम्मीद कर रहे हैं। इसके समानांतर सलाहकारों ने बातचीत के लिए जमीन तैयार करना शुरू कर दिया है, ताकि यदि कोई अवसर मिले तो उसका लाभ उठाया जा सके। पर्दे के पीछे काम करते हुए विशेष दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ पहले से ही तेहरान के अधिकारियों के साथ कूटनीतिक संपर्क की शुरुआती योजना बनाने में जुटे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि ईरान के साथ किसी भी समझौते के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खुलवाना, इस्लामिक गणराज्य के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के विशाल भंडार का समाधान करना और उसके परमाणु व मिसाइल कार्यक्रमों के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रॉक्सी मिलिशिया और आतंकी समूहों के समर्थन पर दीर्घकालिक सीमाएं तय करना आवश्यक होगा।

अब क्यों नहीं दिखता फिल्मों में प्यार? जावेद अख्तर का बयान कर देगा हैरान

नई दिल्ली।  क्या सच में फिल्मों से वो जादुई रोमांस गायब हो रहा है, जिसे देखकर दिल देखने जैसा लगता था? इस सवाल का बेहद दिलचस्प और दिलचस्प जवाब दिया है दिग्गज लेखक जावेद अख्तर ने। उनका मानना ​​है कि आधुनिक तकनीक, खासकर प्रौद्योगिकी, ने सिर्फ हमारी जिंदगी नहीं बल्कि फिल्मों के रोमांस को भी गहराई से बदल दिया है। एक कार्यक्रम के दौरान आमिर खान के साथ बातचीत में जावेद अख्तर ने कहा कि टेक्नोलॉजी ने रोमांस की आत्मा को ही खत्म कर दिया है। ‘इंतजार में था असली रोमांस’जावेद अख्तर के मुताबिक, रियल रोमांस ‘मिलने’ में नहीं, बल्कि ‘इंतजार’ में होता है। उन्होंने कहा कि पहले प्रेम कहानियों में दूरी और असमानता थी, जो भावनाओं को गहराई तक ले जाती थी। आज के दौर में जब एक क्लिक पर कोई भी इंसान सामने आता है, तो वो बेसब, वो परेशान और वो कल्पना कहीं खो गया है, जो रोमांस की जान हुआ करता था। रोमियो-जूलियट का उदाहरण चर्चा का केंद्र बनाअपनी बात को कॉमिक्स के लिए जावेद अख्तर ने मशहूर प्रेम कहानी रोमियो और जूलियट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “अगर रोमियो और जूलियट के पास आज होता है, तो क्या रोमियो अनोखी रात में जूलियट की मूर्ति के नीचे घंटों खड़े रहते हैं?इस सवाल में वहां मौजूद लोगों को जबरदस्ती कर दिया गया और हॉल तालियों से गूंज उठाया गया। कल्पना ख़त्म, तो जादू भी ख़त्मजावेद अख्तर ने आगे कहा कि पहले प्रेम में कल्पना की बड़ी भूमिका थी। दूरी की वजह से एक साधारण चेहरा भी बेहद खूबसूरत लग रहा था, क्योंकि उसे देखने पर तसल्ली नहीं मिलती थी।लेकिन आज के समय में वीडियो कॉल और सोशल मीडिया ने इस कल्पना को ख़त्म कर दिया है। जब सब कुछ तुरंत उपलब्ध हो जाता है, तो रहस्य और आकर्षण भी कम हो जाते हैं। आमिर खान ने भी रखी दौलतइस चर्चा के दौरान आमिर खान भी जावेद अख्तर की बातों से पूरी तरह सहमत नजर आए। दोनों के बीच पुरानी दोस्ती रही है और कई बार वे एक-दूसरे के काम की पहचान करते हैं। वर्क फ्रंट: आमिर की फिल्मों का इंतजारकाम की बात करें तो आमिर खान इन दिनों अपनी फिल्म लाहौर 1947 को लेकर चर्चा में हैं। इसके अलावा उनके बेटे जुनैद खान की फिल्म एक दिन भी फिल्म में बनी हुई है, जिसमें आमिर के कैमियो की शूटिंग चल रही है।