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एजुकेशन लोन रिजेक्शन: मध्य प्रदेश के मेधावी छात्रों का भविष्य अधर में

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश से शिक्षा के क्षेत्र में चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। प्रदेश के मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता देने के दावों के बावजूद शिक्षा ऋण एजुकेशन लोन के लिए आवेदन करने वाले लगभग आधे छात्र खाली हाथ रहे। लोकसभा में प्रस्तुत ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 22,728 छात्रों ने लोन के लिए आवेदन किया, लेकिन केवल 12,547 को ही लोन मिल सका। यानी करीब 45 प्रतिशत छात्रों के आवेदन रिजेक्ट हुए या लंबित रहे। विशेष रूप से 8,065 छात्रों ने अपना आवेदन वापस ले लिया, जो जटिल प्रक्रिया, देरी या बैंक की शर्तों के कारण उम्मीद छोड़ देने का संकेत देता है। इसके अलावा, 1,032 आवेदन सीधे रिजेक्ट हो गए और 1,084 आवेदन अब भी लंबित हैं, जिससे छात्र और उनके परिवार अनिश्चितता में फंसे हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार कम आय वर्ग के परिवारों के छात्रों को सबसे ज्यादा लाभ मिला है। 4.5 लाख रुपये तक की आय वाले परिवारों के 9,505 छात्रों को लोन स्वीकृत किया गया। 4.5 लाख से 8 लाख की आय वाले 1,118 छात्रों और 8 लाख से अधिक आय वाले 1,924 छात्रों को ही लोन मिला। यह दर्शाता है कि उच्च आय वर्ग के लिए बैंक अपेक्षाकृत कम लोन देते हैं। सरकार ने कम आय वर्ग के छात्रों के लिए विशेष योजना भी बनाई है। केंद्रीय क्षेत्र ब्याज सब्सिडी योजना CSIS के तहत 4.5 लाख तक की आय वाले छात्रों को 100 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाती है। वहीं, नई पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के अंतर्गत 8 लाख रुपये तक की आय वाले मेधावी छात्रों को 10 लाख रुपये तक के ऋण पर 3 प्रतिशत ब्याज छूट मिलती है। बैंकों द्वारा आवेदन रिजेक्ट करने के पीछे कई कारण हैं। इसमें मुख्य कारण हैं छात्र के अभिभावक का खराब क्रेडिट स्कोर, कॉलेज या पाठ्यक्रम का QHEI मानक में न होना, आय प्रमाण पत्र या KYC दस्तावेजों में खामियां। हालांकि अब 7.5 लाख तक के लोन के लिए गारंटी जरूरी नहीं है, बैंक अक्सर सुरक्षा की मांग करते हैं। विश्लेषण से पता चलता है कि गरीब और कम आय वर्ग पर इसका सबसे अधिक असर पड़ता है। देश भर में सबसे ज्यादा लोन आवेदन इसी वर्ग से आते हैं, लेकिन बैंक की कड़ी शर्तें और तकनीकी कमियां उनके लिए चुनौती बन जाती हैं। लोकसभा में चर्चा के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि बैंक छोटे लोन देने में हिचकते हैं क्योंकि इनमें जोखिम और रिकवरी की चुनौती अधिक होती है। छात्रों के लिए यह स्थिति उनकी उच्च शिक्षा और करियर योजना के लिए गंभीर बाधा बन रही है।

युद्ध की मार सबसे ज्यादा बच्चों, पर मध्य पूर्व में बढ़ता मानवीय संकट….

नई दिल्ली:मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष ने एक बार फिर मानवीय संकट को गहरा कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष UNICEF ने चिंता जताते हुए बताया है कि इस हिंसा में अब तक 2100 से अधिक बच्चे या तो मारे जा चुके हैं या घायल हुए हैं। संगठन के उप कार्यकारी निदेशक टेड चैबन ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि संघर्ष के 23 दिन बीतने के बावजूद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार हर दिन औसतन 87 बच्चे इस संघर्ष का शिकार बन रहे हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। ईरान में 206 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि लेबनान में 118, इजरायल में 4 और कुवैत में 1 बच्चे की जान गई है। इसके अलावा लगातार बमबारी और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के आदेशों के चलते लाखों परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार ईरान में लगभग 32 लाख लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें करीब 8 लाख 64 हजार बच्चे शामिल हैं। वहीं लेबनान में 10 लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ चुके हैं, जिनमें लगभग 3 लाख 70 हजार बच्चे हैं। इससे स्पष्ट है कि युद्ध का सबसे बड़ा असर मासूमों और उनके भविष्य पर पड़ रहा है। टेड चैबन ने चेतावनी दी कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। उन्होंने कहा कि पहले से ही मध्य पूर्व में लगभग 4 करोड़ 48 लाख बच्चे ऐसे हालात में रह रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में संघर्ष से प्रभावित हैं। ऐसे में मौजूदा हिंसा इनकी स्थिति को और भी बदतर बना सकती है। लेबनान की स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि वहां 350 से ज्यादा सरकारी स्कूलों को अस्थायी राहत शिविर में बदल दिया गया है, जिससे लगभग 1 लाख बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। इसके साथ ही पानी की व्यवस्था बाधित हुई है और कई स्वास्थ्यकर्मियों की भी जान जा चुकी है, जो राहत कार्यों को और कठिन बना रहा है। UNICEF ने अब तक 250 से अधिक शिविरों और दूर-दराज के इलाकों में करीब 1 लाख 51 हजार लोगों तक सहायता पहुंचाई है। साथ ही 46 हजार लोगों को स्वच्छ पानी और सैनिटेशन की सुविधा दी जा रही है, लेकिन संगठन ने यह भी कहा कि जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं और संसाधन सीमित पड़ रहे हैं। अंत में टेड चैबन ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने की अपील की और कहा कि इस संघर्ष को रोकने के लिए एक राजनीतिक समाधान बेहद जरूरी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस संकट पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की।

नवरात्रि 2026: मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए सोलह श्रृंगार और आवश्यक पूजा सामग्री

नई दिल्ली । नवरात्रि के पावन अवसर पर माता दुर्गा की आराधना केवल श्रद्धा ही नहीं, बल्कि समर्पण और भाव का उत्सव भी है। शास्त्रों के अनुसार जब भक्त मां के दरबार में जाता है, तो वह केवल वस्तुएं नहीं, बल्कि अपनी आस्था और कृतज्ञता भी अर्पित करता है। इसलिए मंदिर में खाली हाथ जाना उचित नहीं माना जाता। पूजा के दौरान स्वच्छ वस्त्र पहनना, पुरुषों का तिलक और महिलाओं का सिर ढकना भी अनिवार्य माना जाता है। माता के सोलह श्रृंगार का महत्व देवी पुराण के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए सोलह श्रृंगार अर्पित किए जाते हैं। इन श्रृंगारों में शामिल हैं: लाल चुनरी चूड़ी इत्र सिंदूर बिछिया महावर मेहंदी काजल गजरा कुमकुम बिंदी माला या मंगलसूत्र पायल नथ कान की बाली फूलों की वेणी यह श्रृंगार सौभाग्य, सुंदरता और भक्त के समर्पण का प्रतीक माना जाता है। अर्पित वस्तुओं का महत्वअक्षत (चावल): अखंडता और समृद्धि का प्रतीक लाल पुष्प: शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार चुनरी: श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक, जीवन में सुरक्षा और सौभाग्य लाती है सिक्का: दान और त्याग का संकेत, आर्थिक स्थिरता की कामना ऋतु फल: प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, स्वास्थ्य और संतुलन का संदेश इन अर्पणों का वास्तविक महत्व उनके पीछे छिपे भाव में होता है। सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। नवरात्रि में माता को समर्पण और भक्ति भाव के साथ श्रृंगार और अर्पण करने से मनोबल बढ़ता है, घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और भक्त का जीवन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध बनता है।

चैत्र शुक्ल नवमी 2026: राम जन्मोत्सव की पूजा का सही समय और विधि

नई दिल्ली । भारत के हर कोने में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव यानी राम नवमी का पर्व बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। साल 2026 में यह तिथि दो दिनों तक रहने के कारण लोगों में व्रत और पूजन की सही तारीख को लेकर भ्रम उत्पन्न हो गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार नवमी तिथि इस बार 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे से शुरू होकर 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। लेकिन सूर्योदय के समय नवमी तिथि विद्यमान रहने के कारण 27 मार्च को राम नवमी मनाना अधिक शुभ माना जा रहा है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:13 बजे से दोपहर 1:41 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस समय में भगवान राम का पूजन और व्रत विधिपूर्वक संपन्न किया जा सकता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेतायुग में पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ने पर देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने अयोध्या के राजा दशरथ के घर जन्म लेने का निर्णय लिया। राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ से प्राप्त खीर को कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा ने ग्रहण किया, और इस प्रकार चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। वाल्मीकि रामायण के अनुसार जन्म के समय पांच ग्रह अपनी उच्च राशि में स्थित थे, जो उनके दिव्य स्वरूप और प्रभाव को दर्शाता है। साथ ही, चैत्र नवरात्रि के अवसर पर मां दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है। नवरात्रि में श्रद्धालु मां को सोलह श्रृंगार अर्पित करते हैं। इसमें लाल चुनरी, चूड़ी, इत्र, सिंदूर, बिछिया, महावर, मेहंदी, काजल, गजरा, कुमकुम, बिंदी, माला या मंगलसूत्र, पायल, नथ, कान की बाली और फूलों की वेणी शामिल हैं। ये श्रृंगार माता के सौभाग्य, सुंदरता और भक्त के समर्पण का प्रतीक हैं। अर्पित की जाने वाली वस्तुओं का भी विशेष महत्व है। अक्षत चावल, अखंडता और समृद्धि का प्रतीक है, लाल पुष्प शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, चुनरी श्रद्धा और सम्मान दर्शाती है, सिक्का दान और त्याग का संकेत देता है, जबकि ऋतु फल प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देते हैं। सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है। इस साल 2026 में राम नवमी और चैत्र नवरात्रि का संगम भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्त्व रखता है, इसलिए तय मुहूर्त और विधि के अनुसार पूजन और व्रत करना अत्यंत शुभ माना गया है।

ईरान तनाव के बीच अमेरिका की कूटनीति तेज भारत, कनाडा केन्या से अहम बातचीत

नई दिल्ली:मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच मार्को रुबियो के नेतृत्व में अमेरिका ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। इस क्रम में उन्होंने भारत कनाडा और केन्या के शीर्ष नेताओं से बातचीत कर ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचार साझा किए। भारत के साथ हुई बातचीत में एस जयशंकर के साथ मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति और बदलते हालात पर चर्चा की गई। दोनों देशों ने आपसी रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक स्थिरता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। अमेरिका ने इस दौरान वैश्विक सुरक्षा और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने पर जोर दिया। साथ ही हैती में शांति बहाली के प्रयासों और वहां की स्थिति पर भी विचार साझा किए गए। केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो के साथ हुई बातचीत में अमेरिका ने ईरान के मुद्दे पर केन्या के रुख की सराहना की। दोनों नेताओं ने खाड़ी देशों के खिलाफ ईरान की गतिविधियों की निंदा पर चर्चा की और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इस दौरान अमेरिका ने हैती में शांति स्थापित करने के लिए केन्या के योगदान की भी सराहना की। अमेरिका की यह पहल इस बात का संकेत है कि वह अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का समाधान ढूंढने की दिशा में काम कर रहा है। एशिया अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के प्रमुख साझेदार देशों के साथ संवाद बढ़ाकर अमेरिका अपनी कूटनीतिक पकड़ को और मजबूत करना चाहता है। यह कूटनीतिक सक्रियता दर्शाती है कि अमेरिका ईरान और मध्य पूर्व के मुद्दों को लेकर बेहद गंभीर है और वह अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर एक संयुक्त रणनीति के तहत आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।

जबलपुर हाईकोर्ट का सख्त रुख: VC नियुक्ति पर जवाब न देने पर नोटिस और जुर्माना

जबलपुर । जबलपुर से बड़ी खबर सामने आई है जहां रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में कुलगुरु की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने जवाब पेश न किए जाने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने संबंधित पक्ष पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और जवाब प्रस्तुत करने की अंतिम मोहलत दी है। बताया जा रहा है कि कोर्ट ने अप्रैल 2025 में नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसके बावजूद कई महीने बीत जाने के बाद भी कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। मामला NSUI के जबलपुर जिला अध्यक्ष सचिन रजक द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में कुलगुरु की नियुक्ति को चुनौती दी गई है और आरोप लगाया गया है कि इस नियुक्ति प्रक्रिया में UGC के नियमों की अनदेखी की गई। नियमों के अनुसार कुलगुरु पद के लिए पीएचडी के बाद कम से कम 10 वर्षों का शैक्षणिक अनुभव होना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में इस अनिवार्यता की पालना नहीं की गई जिससे नियुक्ति विवादास्पद बन गई है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में समय पर जवाब न देने से न्याय प्रक्रिया बाधित होती है। इसी वजह से कोर्ट ने संबंधित पक्ष को जुर्माना लगाया और 6 अप्रैल को अगली सुनवाई तय की है। इस सुनवाई में कुलगुरु नियुक्ति प्रक्रिया और नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर विस्तार से विचार होगा। इस कार्रवाई से यह संदेश भी दिया गया है कि कोर्ट किसी भी पक्ष की लापरवाही या जवाब न देने की स्थिति को बर्दाश्त नहीं करेगा। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को भी चेतावनी मिल गई है कि नियमानुसार और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए। इसी बीच जबलपुर और विश्वविद्यालय प्रशासन में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इससे शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुशासन पर सवाल उठ रहे हैं। कोर्ट की सख्ती अब पूरे विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए एक संकेत के रूप में देखी जा रही है कि नियमों का पालन करना और जवाबदेही तय समय पर देना अनिवार्य है।

सीएम मूवमेंट में अव्यवस्था पर डीसीपी सख्त तीन जवानों पर गिरी कार्रवाई की गाज

इंदौर । इंदौर में मुख्यमंत्री के काफिले के दौरान हुई लापरवाही ने यातायात व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीआईपी मूवमेंट जैसे अत्यंत संवेदनशील समय में जहां हर सेकंड की योजना और समन्वय अहम होता है वहीं इस दौरान सामने आई अव्यवस्था ने पूरे महकमे को झकझोर दिया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए ट्रैफिक विभाग ने तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई की है जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप की स्थिति बन गई है। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री के काफिले के लिए पहले से तय ट्रैफिक प्लान बनाया गया था और संबंधित पुलिसकर्मियों को उनकी जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से सौंप दी गई थीं। इसके बावजूद मौके पर यातायात को निर्धारित योजना के अनुसार नियंत्रित नहीं किया जा सका। परिणामस्वरूप कुछ समय के लिए सड़कों पर अव्यवस्था फैल गई और आम लोगों के साथ साथ काफिले की आवाजाही भी प्रभावित हुई। इस चूक को सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद गंभीर माना गया है। घटना सामने आते ही वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत रिपोर्ट तलब की और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ड्यूटी पर तैनात तीन पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती। उनकी इस चूक के कारण ही ट्रैफिक मैनेजमेंट बिगड़ा और स्थिति नियंत्रण से बाहर होती नजर आई। इसके बाद यातायात डीसीपी ने बिना किसी देरी के तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए। कार्रवाई के तहत संबंधित तीन पुलिसकर्मियों की 25 प्रतिशत वेतन कटौती की गई है जो अपने आप में एक सख्त और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। डीसीपी ने साफ तौर पर कहा है कि वीआईपी ड्यूटी में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री का काफिला हो या कोई अन्य विशेष मूवमेंट हर स्थिति में पुलिसकर्मियों को पूरी जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ अपनी ड्यूटी निभानी होगी। इस घटना के बाद पुलिस विभाग ने सभी कर्मचारियों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि भविष्य में यदि इस तरह की कोई लापरवाही सामने आती है तो केवल वेतन कटौती तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी बल्कि इससे भी अधिक कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस सख्त रुख का उद्देश्य स्पष्ट रूप से पुलिस बल में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इंदौर में हुई यह कार्रवाई अब पूरे पुलिस महकमे के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। यह संदेश दिया गया है कि जिम्मेदारी में चूक करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि वीआईपी मूवमेंट जैसे मामलों में कोई भी छोटी सी लापरवाही बड़े परिणाम ला सकती है इसलिए हर स्तर पर सतर्कता और समन्वय बेहद जरूरी है।

ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना हुआ महंगा Swiggy ने बढ़ाई डिलीवरी फीस..

नई दिल्ली:फूड डिलीवरी सेक्टर में एक बार फिर कीमतों का बोझ बढ़ गया है। Swiggy ने अपने प्लेटफॉर्म पर लगने वाली फीस में बढ़ोतरी कर दी है जिससे अब ग्राहकों को हर ऑर्डर पर पहले से ज्यादा पैसे देने होंगे। कंपनी के अनुसार प्लेटफॉर्म फीस को बढ़ाकर अब 17.58 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया गया है जिसमें जीएसटी भी शामिल है। पहले यह फीस 14.99 रुपये थी। इस तरह करीब 2.59 रुपये यानी लगभग 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्विगी का कहना है कि यह बढ़ोतरी प्लेटफॉर्म के संचालन और रखरखाव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई है। कंपनी लगातार अपने नेटवर्क को मजबूत करने और डिलीवरी अनुभव को बेहतर बनाने पर काम कर रही है जिसके चलते यह बदलाव किया गया है। यह पहली बार नहीं है जब स्विगी ने प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की है। इससे पहले अगस्त 2025 में भी कंपनी ने फीस बढ़ाकर 12 रुपये से करीब 14-15 रुपये के स्तर तक पहुंचा दिया था। अब एक बार फिर बढ़ोतरी ने ग्राहकों की जेब पर असर डालना शुरू कर दिया है। इसी तरह Zomato ने भी हाल ही में अपनी प्लेटफॉर्म फीस में इजाफा किया था। कंपनी ने फीस में करीब 19.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 12.5 रुपये से बढ़ाकर 14.90 रुपये कर दिया था। जीएसटी जोड़ने के बाद यह राशि करीब 17.58 रुपये प्रति ऑर्डर तक पहुंच गई है। फूड डिलीवरी कंपनियों द्वारा यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब एलपीजी की कीमतों में भी वृद्धि हुई है जिससे रेस्तरां की लागत बढ़ गई है। इससे पूरे फूड डिलीवरी इकोसिस्टम पर दबाव बढ़ा है और इसका असर ग्राहकों तक पहुंच रहा है। बाजार में इस खबर के बीच स्विगी के शेयरों में हल्की तेजी देखी गई। दोपहर 12:30 बजे कंपनी का शेयर करीब 2.55 प्रतिशत की बढ़त के साथ 279.55 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। हालांकि पिछले कुछ समय में शेयर में गिरावट का रुख रहा है और बीते एक हफ्ते में यह 5 प्रतिशत से ज्यादा फिसल चुका है। वहीं एक महीने में करीब 10 प्रतिशत और पिछले छह महीनों में 36 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। कुल मिलाकर फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती फीस ग्राहकों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये कंपनियां अपनी कीमतों को और बढ़ाती हैं या फिर प्रतिस्पर्धा के चलते कुछ राहत देती हैं। 🏷️ Tags swiggy news, zomato update, food delivery India, platform fee increase, stock market news

एचडीएफसी बैंक में बड़ा कदम इस्तीफे की जांच के लिए बाहरी लॉ फर्म की नियुक्ति

नई दिल्ली:HDFC Bank ने अपने पूर्व अंशकालिक अध्यक्ष और स्वतंत्र निदेशक अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। बैंक ने इस पूरे मामले की जांच के लिए बाहरी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनी फर्मों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। यह निर्णय बैंक के बोर्ड की 23 मार्च को हुई बैठक में लिया गया। बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस जांच का उद्देश्य इस्तीफे की परिस्थितियों को स्पष्ट करना और गवर्नेंस से जुड़े मानकों को और मजबूत बनाना है। कानूनी फर्मों को निर्देश दिया गया है कि वे चक्रवर्ती के इस्तीफा पत्र की गहराई से समीक्षा करें और एक तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। गौरतलब है कि अतानु चक्रवर्ती ने 18 मार्च को तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफे में उन्होंने संकेत दिया था कि पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थे। हालांकि उन्होंने किसी विशिष्ट घटना का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया। बाद में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा किसी गड़बड़ी या कदाचार के कारण नहीं बल्कि विचारधाराओं और दृष्टिकोण में मतभेद के चलते लिया गया है। वे वर्ष 2021 में बैंक के बोर्ड में शामिल हुए थे और अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल रहे। इस बीच Reserve Bank of India ने बैंक के संचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए अंतरिम अंशकालिक अध्यक्ष नियुक्त करने की मंजूरी दी है। उन्होंने यह संकेत भी दिया है कि चक्रवर्ती के जाने के बाद बैंक के संचालन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि बाहरी जांच का उद्देश्य केवल पारदर्शिता और मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस को सुनिश्चित करना है। यह कदम निवेशकों और ग्राहकों के भरोसे को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ ही रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक ने अपने विदेशी कारोबार से जुड़े एनआरआई ग्राहकों को हाई-रिस्क एटी1 बॉन्ड की बिक्री के मामले में भी सख्त कार्रवाई की है। आंतरिक जांच के बाद बैंक ने तीन कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। शेयर बाजार में HDFC Bank के शेयर में हलचल देखने को मिली। मंगलवार दोपहर 12 बजे बैंक का शेयर 1.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 757.45 रुपये पर कारोबार कर रहा था। हालांकि बीते एक सप्ताह में शेयर में 9 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।  यह मामला बैंक के भीतर गवर्नेंस और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच एक अहम कदम माना जा रहा है। बाहरी जांच के बाद आने वाली रिपोर्ट से ही इस पूरे प्रकरण पर और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स की सबसे बड़ी चुनौती मिडिल ऑर्डर बन सकता है

नई दिल्ली: Indian Premier League के आगामी सीजन में Lucknow Super Giants एक बार फिर अपने पहले खिताब की तलाश में मैदान में उतरेगी। टीम की कमान ऋषभ पंत के हाथों में है और फैंस को इस बार उनसे बड़े प्रदर्शन की उम्मीद है। हालांकि टीम का संतुलन देखते हुए मिडिल ऑर्डर एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ सकता है। पिछले सीजन में लखनऊ सुपर जायंट्स का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा था। टीम ने 14 में से केवल 6 मुकाबले जीते और प्लेऑफ में जगह बनाने में असफल रही। इस बार टीम ने कई बदलाव किए हैं और टॉप ऑर्डर को काफी मजबूत किया है। एडेन मार्करम निकोलस पूरन और मिचेल मार्श जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी से टीम की बल्लेबाजी को मजबूती मिली है। इन खिलाड़ियों ने पिछले सीजन में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया था। लेकिन चिंता की बात टीम का मिडिल ऑर्डर है जहां अनुभव की कमी साफ दिखाई देती है। कप्तान पंत के साथ आयुष बदोनी अब्दुल समद और शाहबाज अहमद जैसे खिलाड़ियों को जिम्मेदारी निभानी होगी। इसके अलावा युवा बल्लेबाज मैथ्यू ब्रीत्जके से भी टीम को अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। गेंदबाजी के मामले में लखनऊ सुपर जायंट्स काफी मजबूत नजर आ रही है। मोहम्मद शमी आवेश खान मयंक यादव और एनरिक नॉर्टजे किसी भी मजबूत बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त करने की क्षमता रखते हैं। स्पिन विभाग की जिम्मेदारी दिग्वेश राठी के कंधों पर होगी जिन्होंने पिछले सीजन में अपनी गेंदबाजी से प्रभावित किया था। टीम के लिए एक और चिंता वानिंदु हसरंगा की फिटनेस है। अगर वे पूरी तरह फिट रहते हैं तो टीम को संतुलन मिलेगा और मिडिल ऑर्डर की कमजोरी कुछ हद तक कम हो सकती है। लखनऊ की सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि उनकी बल्लेबाजी विदेशी खिलाड़ियों पर काफी निर्भर नजर आती है। पिछले सीजन में यही कमजोरी टीम को भारी पड़ी थी और इस बार भी अगर मिडिल ऑर्डर ने जिम्मेदारी नहीं निभाई तो टीम का खिताब जीतने का सपना अधूरा रह सकता है। लखनऊ सुपर जायंट्स के पास एक मजबूत टीम है लेकिन खिताब जीतने के लिए उन्हें अपने मिडिल ऑर्डर को बेहतर करना होगा। अगर यह कमी दूर हो जाती है तो टीम आईपीएल 2026 में खिताब की प्रबल दावेदार बन सकती है। 🏷️ Tags