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MP: अगले साल भोपाल में होगा राष्ट्रीय सेना दिवस समारोह का भव्य आयोजन

भोपाल। मध्य प्रदेश के इतिहास में 15 जनवरी 2027 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सेना प्रमुख (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी (General Upendra Dwivedi) के साथ बैठक के बाद ऐलान किया कि 2027 का राष्ट्रीय सेना दिवस समारोह भोपाल में आयोजित किया जाएगा। दरअसल, सेना दिवस हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है. यह दिन 1949 में जनरल सर एफआरआर बुचर से सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ के तौर पर केएम करिअप्पा के पदभार संभालने की याद में मनाया जाता है। CM यादव ने कहा कि यह भव्य समारोह राज्य के नागरिकों को देश की समृद्ध सैन्य विरासत से परिचित कराएगा और युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा। यादव ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेना ने हर मौके पर अदम्य साहस, वीरता और शक्ति का प्रदर्शन किया है. राज्य के नागरिकों को सेना की समृद्ध सैन्य विरासत से परिचित कराने और राज्य के युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से 15 जनवरी 2027 को भोपाल में एक विशेष परेड आयोजित की जाएगी.” मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल में इन सेना दिवस कार्यक्रमों में शामिल होने का अनुभव 26 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाले गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों जैसा ही होगा. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार इन कार्यक्रमों के लिए सेना को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी. सीएम यादव ने कहा, “इस अवसर पर सेना ‘शौर्य संध्या’ का आयोजन करेगी. इसमें सेना के हथियारों, संसाधनों और उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, साथ ही सैन्य अभ्यासों का प्रदर्शन भी किया जाएगा. इस मौके पर रिटायर्ड सैनिकों को भी सम्मानित किया जाएगा. सभी गतिविधियां उसी भव्यता और गरिमा के साथ आयोजित की जाएंगी, जैसी 26 जनवरी को नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान देखने को मिलती हैं.” मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इन समारोहों में हिस्सा लेंगे. इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनता को सैन्य परेड से जोड़ना है, साथ ही सेना और नागरिक प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल और आपसी विश्वास को बढ़ावा देना भी है. 1 नवंबर से ही शुरू हो जाएगा उत्सव15 जनवरी को होने वाले मुख्य समारोह से जुड़ी कुछ गतिविधियां 1 नवंबर से ही शुरू हो जाएंगी. 1 नवंबर को मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस मनाया जाता है.मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर ‘मेरी माटी’ अभियान के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से मिट्टी लाई जाएगी. भोपाल स्थित ‘शौर्य स्मारक’ में एक ‘संकल्प वृक्ष’ लगाया जाएगा.” क्यों मनाया जाता है सेना दिवस?बता दें कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों को विकेंद्रीकृत करने की पहल 2023 में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के विजन को मबूत करना और भारतीय सेना में देशव्यापी जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना था, साथ ही सेना और नागरिकों के बीच संबंधों को भी मजबूत करना था. उन्होंने बताया कि इसके तहत, आर्मी डे 2023 में बेंगलुरु, 2024 में लखनऊ, 2025 में पुणे और 2026 में जयपुर में आयोजित किया गया.

UPA सरकार ने नहीं की देश की चिंता… कांग्रेस पर बरसे PM मोदी, मिडिल ईस्ट तनाव पर की खुलकर बात

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को एक निजी न्यूज चैनल के शिखर सम्मेलन में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार (UPA Government) ने देश की चिंता नहीं, बल्कि अपनी सत्ता बचाने की फिक्र में रहकर गलत फैसले लिए। पीएम मोदी ने विशेष रूप से यूपीए काल में जारी किए गए तेल बांडों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए आने वाली पीढ़ियों पर भारी वित्तीय बोझ डाला। वहीं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने अपने पत्ते खोले और साफ-साफ बताया कि वे किसके साथ हैं। कांग्रेस पर जमकर बरसेप्रधानमंत्री ने बताया कि 2004 से 2010 के बीच कांग्रेस सरकार ने 1.48 लाख करोड़ रुपये के तेल बांड जारी किए थे। उन्होंने कहा कि उस समय पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें संकट में थीं, लेकिन कांग्रेस देश की नहीं, अपनी सत्ता की चिंता कर रही थी। पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हवाले से कहा कि उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि यह फैसला गलत था और इससे आने वाली पीढ़ियों पर कर्ज का बोझ पड़ेगा। पीएम मोदी ने ‘रिमोट कंट्रोल’ से सरकार चलाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग दूर से सरकार चला रहे थे, उन्होंने सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय लिया, क्योंकि उस समय कोई जवाबदेही नहीं थी। उन्होंने खुलासा किया कि इन बांडों का भुगतान 2020 के बाद शुरू हुआ और ब्याज सहित कुल राशि 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस के इस ‘पाप’ को धोने का काम किया है, जिसकी कीमत कम नहीं रही। कई गुटों में बंटी है दुनियावैश्विक परिदृश्य पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया कई गुटों में बंटी हुई है, लेकिन भारत ने मजबूत और व्यापक साझेदारियां बनाई हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं के बीच भारत ने खाड़ी देशों से लेकर वैश्विक पश्चिम और दक्षिण तक सभी के साथ विश्वसनीय साझेदारी कायम की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पूछते हैं कि हम किसके साथ हैं? मेरा जवाब है- हम भारत के साथ हैं। हम भारत के हितों, शांति और संवाद के साथ हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला लड़खड़ा रही है, लेकिन भारत ने विविधीकरण और लचीलेपन का मॉडल पेश किया है। ऊर्जा, उर्वरक और आवश्यक वस्तुओं के मामले में सरकार ने नागरिकों को न्यूनतम परेशानी देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। कोरोना महामारी के बाद से लगातार चुनौतियां आईं, लेकिन 140 करोड़ भारतीयों के एकजुट प्रयास से देश हर विपदा से पार पा रहा है। उन्होंने हाल की 23 दिनों की उथल-पुथल का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध जैसी स्थिति में भी भारत ने अपनी कूटनीति, निर्णय क्षमता और संकट प्रबंधन की ताकत दिखाई है। दुनिया भारत की नीति और रणनीति से आश्चर्यचकित है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि भारत प्रगति, विकास और विश्वास के साथ मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

भारत के LPG और कच्चे तेल के टैंकरों ने पार किया होर्मुज… जल्द पहुंचेंगे बंदरगाह

नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध (US-Israel and Iran War) की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद होने से भारत सहित कई देशों में ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस बीच अब भारत (India) के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक UAE से दो LPG कैरियर और सऊदी अरब से एक कच्चे तेल का कैरियर भारत के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं ताकि देश में ऊर्जा आपूर्ति की कमी को पूरा किया जा सके। वहीं नौसेना प्रमुख दिनेश त्रिपाठी ने बढ़ते हुए शिपिंग संकट के चलते ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के अपने आधिकारिक दौरे को रद्द कर दिया है। जानकारी के मुताबिक भारतीय झंडे वाले जहाज पाइन गैस और जग वसंत लगभग एक साथ ही चल रहे थे। दोनों जहाज सोमवार सुबह 6 बजे UAE के बंदरगाहों से भारत के लिए रवाना हुए। ईरान ने इन दोनों LPG जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की मंजूरी भी दे दी है। वहीं ओमान की खाड़ी में भारतीय नौसेना के युद्धपोत इन LPG जहाजों को 24 घंटे तक सुरक्षा दे रहे हैं। जहाज में कितना LPG?बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेस में बताया कि दोनों जहाज पर लगभग 92,000 टन एलपीजी है। उन्होंने कहा, ”यात्रा शुरू हो चुकी है।’’ शिपिंग मंत्रालय के अनुसार जग वसंत के 26 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना है, जबकि पाइन गैस 28 मार्च को न्यू मैंगलोर पहुंच सकता है। इन जहाजों पर क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविक भी सवार हैं। सऊदी से आ रहा तेल टैंकरइसके अलावा, MT Kallista नाम का एक कच्चे तेल का कैरियर सऊदी अरब के यान्बू बंदरगाह पर तेल भर रहा है और मंगलवार को जेद्दा बंदरगाह होते हुए भारत के पारादीप बंदरगाह के लिए रवाना होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के समन्वय से, पनामा के झंडे वाले यह जहाज भी अदन की खाड़ी से गुजरेगा और भारतीय नौसेना इसकी हिफाजत करेगी। भारतीय टैंकरों ने ईरान को दी फीस?भले ही रिपोर्ट्स में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान द्वारा मोटी फीस लिए जाने की खबरें थीं, लेकिन भारत ने अपने LPG टैंकरों को गुजरने की अनुमति देने के लिए ईरान को कोई पैसा नहीं दिया है। भारत में ईरानी दूतावास ने सोमवार को ऐसी रिपोर्टों का खंडन किया है। इस बीच केंद्र सरकार ने भारतीय नौसेना से कहा है कि वह भारतीय झंडे वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी के आसपास अपने कोलकाता-श्रेणी के विध्वंसक जहाजों को तैनात करे। वहीं भारतीय झंडे वाले सभी जहाज़ों के कप्तानों से लगातार संपर्क किया जा रहा है, ताकि उन्हें बताया जा सके कि भारत संकट के समय उनके साथ खड़ा है। कितने टैंकर फंसे?बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध कुल मिलाकर लगभग 500 टैंकर जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इनमें 108 कच्चे तेल के टैंकर, 166 तेल उत्पाद टैंकर, 104 रासायनिक/उत्पाद टैंकर, 52 रासायनिक टैंकर और 53 अन्य प्रकार के टैंकर शामिल हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान संभवत: सत्यापन के बाद चुनिंदा जहाजों को जलडमरूमध्य से जाने की अनुमति दे सकता है।

बंगाल के भवानीपुर-नंदीग्राम में हुमायूं की एंट्री ने बढ़ाई राजनीतिक गर्माहट, वोट बिखराव से सियासी खेल होगा जटिल

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में भवानीपुर और नंदीग्राम सीटों पर हुमायूं कबीर की एंट्री ने मुकाबले को और जटिल बना दिया है। आम जनता उन्नयन पार्टी एजेयूपी के उम्मीदवार इन दोनों हाईप्रोफाइल सीटों पर चुनावी समीकरण को त्रिकोणीय बना रहे हैं, जिससे वोटों के बिखराव की संभावना बढ़ गई है। नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी की सभा के बाद तृणमूल कांग्रेस के पवित्र कर के घर के बाहर ‘चोरचोर’ के नारे लगने से सियासी तापमान और बढ़ गया है। वहीं, मतदाता सूची संशोधन एसआईआर की सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी होने से पहले लाखों नामों के जोड़-घटाव को लेकर चुनाव आयोग अलर्ट मोड पर है। इस बार मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि जमीनी तनाव, वोटिंग गणित और प्रशासनिक सतर्कता के बीच तय होगा। हाईवोल्टेज सीटें: भवानीपुर और नंदीग्राम भवानीपुर और नंदीग्राम हमेशा से तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच प्रत्यक्ष मुकाबले की सीट रही हैं। अब हुमायूं कबीर ने भवानीपुर में पूनम बेगम और नंदीग्राम में शाहिदुल हक को उतारकर इन सीटों को त्रिकोणीय संघर्ष का मैदान बना दिया है। भवानीपुर में मुस्लिम और अल्पसंख्यक वोट निर्णायक भवानीपुर में ममता बनर्जी की प्रतिष्ठा दांव पर है। इस सीट पर मुस्लिम और अल्पसंख्यक वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता है, जो अब तक तृणमूल के साथ रहा है। एजेयूपी की एंट्री से इस वोट बैंक में सेंध लग सकती है। यदि हुमायूं का प्रभाव स्थानीय स्तर पर मजबूत नहीं रहा, तो तृणमूल को बड़ा नुकसान नहीं होगा, लेकिन मामूली वोट कटाव भी करीबी मुकाबले में भाजपा के लिए लाभदायक साबित हो सकता है। नंदीग्राम में बहुकोणीय मुकाबलानंदीग्राम में पहले से शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी के बीच सीधी टक्कर रही है। अब एजेयूपी की एंट्री विपक्षी वोटों के बिखराव की संभावना बढ़ा रही है। मुस्लिम और ग्रामीण वोट बैंक पहले ही विभाजित है, और हुमायूं का उम्मीदवार इसे और जटिल बना सकता है, जिससे भाजपा को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है, खासकर तब जब तृणमूल विरोधी वोट एकजुट न हों। विश्लेषकों का कहना है कि छोटी पार्टियों का प्रभाव सीधे जीत पर कम होता है, लेकिन 2-5% वोट शेयर के जरिए वे चुनाव के नतीजों की दिशा बदल सकते हैं। भवानीपुर में यह तृणमूल के लिए चुनौती और नंदीग्राम में भाजपा के लिए अप्रत्यक्ष लाभ साबित हो सकता है।

विदेश मंत्री जयशंकर का बड़ा बयान, बोले- बदलती परिस्थितियों में और गहरे हुए भारत-रूस के संबंध

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) ने भारत और रूस के संबंधों (India-Russia relations) को लेकर सोमवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘आज की बदलती परिस्थितियों में हमारी भागीदारी और गहरी होती जा रही है।’ जयशंकर ने कहा कि 2030 तक दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिए गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने की जरूरत है। उन्होंने रूस के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। विदेश मंत्री ‘भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर’ शीर्षक वाले ऑनलाइन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। वहीं, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि रूस इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे का स्वागत करने के लिए उत्सुक है। एस जयशंकर ने कहा कि विकसित हो रही बहुध्रुवीय व्यवस्था के लिए भारत और रूस के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता है, जिसमें ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO), जी20 और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से सहयोग शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत, रूस के साथ मिलकर साझा चुनौतियों का संतुलित और समावेशी तरीके से समाधान करने के लिए तत्पर है। भारत-रूस के मजबूत होते रिश्तेजयशंकर ने कहा, ‘भारत और रूस के बीच विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित एक विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है। दशकों से हमारे पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति को आगे बढ़ाया है।’ विदेश मंत्री ने पिछले वर्ष दिसंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा से निकले नतीजों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्ष वर्तमान वार्षिक व्यापार को 68.7 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक संतुलित और सतत तरीके से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’ विदेश मंत्री ने कहा, ‘हमें भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और गैर-टैरिफ बाधाओं व विनियामक अड़चनों को दूर करने की जरूरत है। साथ ही, कुशल भारतीय कार्यबल का उपयोग करने के प्रयासों को जारी रखना चाहिए।’ पश्चिम एशिया में जारी संकट के मद्देनजर विदेश मंत्री की ये टिप्पणियां अहम हैं। दिसंबर में पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई वार्ता के बाद भारत और रूस ने कई उपायों की घोषणा की, जिनमें एक मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने व 2030 तक वार्षिक व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिए 5 वर्षीय खाका शामिल है। रूस की ओर से क्या कहा गयाजयशंकर ने रूस को नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत का सर्वोत्तम भागीदार बताया। उन्होंने कहा, ‘चूंकि भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 गीगावॉट तक बढ़ाना है, मुझे विश्वास है कि परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए रूस में उसे एक विश्वसनीय भागीदार मिलेगा।’ लावरोव ने कहा कि रूस-भारत की समय-परीक्षित मित्रता आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित अंतरदेशीय संबंधों का आदर्श उदाहरण है। उन्होंने कहा, ‘रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में अपनी राह के तहत स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने और राष्ट्रीय हितों को लगातार प्राथमिकता देने के लिए भारत अत्यंत सम्मान का पात्र है। रूस और भारत की सदियों पुरानी मित्रता इस बात का आदर्श उदाहरण है कि समानता, आपसी विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे के हितों का ध्यान रखते हुए अंतरराज्यीय संबंध कैसे बनाए जा सकते हैं और बनाए जाने चाहिए।’

Inter-Religious विवाह में महिलाओं की धार्मिक पहचान के मामले में SC कर रहा सुनवाई

नई दिल्ली। क्या अंतर-धार्मिक विवाह (Inter-Religious Marriage) करने पर महिलाओं को उनकी धार्मिक पहचान से वंचित किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस मामले पर सुनवाई कर रहा है। ताजा केस पारसी समुदाय से जुड़ा है, जहां याचिकाकर्ता दीना बुढ़राजा ने नागपुर पारसी पंचायत के नियम 5(2) को चुनौती दी है। इस नियम के अनुसार, अगर कोई पारसी महिला गैर-पारसी से विवाह करती है तो उसकी धार्मिक पहचान समाप्त कर दी जाती है और उसे अगियारी जैसे धार्मिक स्थलों में प्रवेश से वंचित कर दिया जाता है। वहीं, पारसी पुरुषों पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है। याचिका में दावा किया गया कि यह नियम लिंग आधारित भेदभावपूर्ण है। साथ ही, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता), 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) तथा 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई की। इसने केंद्र सरकार, नागपुर पारसी पंचायत, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार और चैरिटी कमिश्नर को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवान ने तर्क दिया कि यह नियम असंवैधानिक है क्योंकि यह केवल महिलाओं को लक्षित करता है और समुदाय की परंपराओं के नाम पर लैंगिक असमानता को बढ़ावा देता है। कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहाअदालत ने माना कि यह मामला महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठाता है और पारसी समुदाय में ऐसे मुद्दे पहले भी बार-बार अदालत में आए हैं। यह नियम नागपुर अगियारी के प्रबंधन से संबंधित है, जो पारसी धार्मिक स्थल है। यह मामला पारसी व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ा है, जहां समुदाय की परंपराएं विवाह और धार्मिक पहचान को नियंत्रित करती हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि अंतर-धार्मिक विवाह करने वाली महिला को उसकी जन्मजात धार्मिक पहचान से अलग नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा के खिलाफ है। विशेष विवाह अधिनियम जैसे कानून अंतर-धार्मिक विवाह की इजाजत देते हैं, जहां दोनों पक्ष अपनी धार्मिक पहचान बनाए रख सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी ऐसे मामलों में कहा है कि विवाह से महिला की धार्मिक पहचान स्वतः पति की धर्म में विलय नहीं होती, जब तक वह स्वेच्छा से परिवर्तन न करे। इस मामले में भी समान सिद्धांत लागू हो सकता है। वर्तमान में मामला प्रारंभिक चरण में है, जहां नोटिस जारी होने के बाद संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला न केवल पारसी समुदाय बल्कि पूरे देश में अंतर-धार्मिक विवाहों और लैंगिक समानता के मुद्दे पर प्रभाव डालेगा।

कम उम्र में सफेद बाल? पित्त दोष हो सकता है वजह, जानें आयुर्वेदिक कारण और असरदार उपाय

नई दिल्ली:आज के समय में कम उम्र में ही बालों का सफेद होना एक आम समस्या बनती जा रही है। पहले जहां सफेद बालों को बढ़ती उम्र की निशानी माना जाता था, वहीं अब यह युवाओं में भी तेजी से देखने को मिल रहा है। आयुर्वेद के अनुसार इसका एक बड़ा कारण पित्त दोष का असंतुलन है, जो शरीर में कई तरह की समस्याओं को जन्म देता है। आयुर्वेद में बताया गया है कि जब पित्त दोष बढ़ जाता है, तो इसका सीधा असर बालों के रंगद्रव्य यानी मेलानिन पर पड़ता है। इससे बाल समय से पहले सफेद होने लगते हैं। इसके अलावा गलत खान-पान, अत्यधिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और नींद की कमी भी इस समस्या को बढ़ावा देते हैं। यही कारण है कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, सफेद बालों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले पित्त को संतुलित करना जरूरी है। इसके लिए खान-पान में सुधार करना बेहद अहम भूमिका निभाता है। ज्यादा मसालेदार, तैलीय और खट्टे भोजन से दूरी बनानी चाहिए। चाय, कॉफी और अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ भी पित्त को बढ़ाते हैं, इसलिए इनका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। इसके साथ ही आहार में पोषक तत्वों को शामिल करना भी जरूरी है। आयुर्वेद में आंवला, चुकंदर, घी, काली मुनक्का, शतावरी और त्रिफला जैसे तत्वों को बेहद फायदेमंद माना गया है। ये न केवल शरीर को अंदर से पोषण देते हैं, बल्कि बालों की जड़ों को भी मजबूत बनाते हैं। बाहरी देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। बालों में नियमित रूप से तेल लगाना बहुत लाभकारी होता है। खासतौर पर नारियल तेल और भृंगराज तेल से हफ्ते में दो बार मालिश करने से बालों को पोषण मिलता है और सफेद बालों की गति को धीमा किया जा सकता है। यह उपाय बालों को मजबूत और चमकदार बनाने में भी मदद करता है। मानसिक तनाव भी इस समस्या का एक बड़ा कारण है। आजकल की व्यस्त जीवनशैली में लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, जिससे शरीर और दिमाग दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है। गुस्सा, चिड़चिड़ापन और लगातार तनाव बालों की सेहत को खराब कर देते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी दिनचर्या में सुधार करें, समय पर सोएं और खुद को मानसिक रूप से शांत रखने की कोशिश करें। योग, ध्यान और प्रकृति के बीच समय बिताना भी इस दिशा में काफी मददगार साबित हो सकता है। खुली हवा में टहलना और सकारात्मक सोच अपनाना न केवल मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि बालों की सेहत पर भी अच्छा असर डालता है। सफेद बालों की समस्या को रोकने के लिए केवल बाहरी उपाय ही नहीं, बल्कि अंदर से संतुलन बनाए रखना जरूरी है। सही खान-पान, संतुलित जीवनशैली और आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर आप इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।

पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का खुलासा, दिल्‍ली-हरियाणा रेलवे स्टेशनों पर लगाए थे कैमरे, अब तक 22 आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली। पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक और अहम खुलासा किया है। गाजियाबाद पुलिस ने फरीदाबाद से नौशाद अली उर्फ लालू को गिरफ्तार किया है, जो पेट्रोल पंप पर पंचर की दुकान चलाने की आड़ में जासूसी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। पुलिस के अनुसार, इस मामले में गिरोह के सरगना सुहेल समेत अब तक कुल 22 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। नौशाद के अलावा मथुरा की एक महिला और एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें इस नेटवर्क से सुहेल ने जोड़ा था। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों के ठिकानों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर WhatsApp ग्रुप के जरिए पाकिस्तान भेजता था। इसके बदले उन्हें हर फोटो के लिए 4 से 6 हजार रुपये तक मिलते थे। सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह सामने आई कि गिरोह ने दिल्ली और हरियाणा के कई रेलवे स्टेशनों पर गुप्त कैमरे लगा रखे थे। इन कैमरों की लाइव स्ट्रीमिंग का एक्सेस पाकिस्तान में बैठे लोगों को दिया गया था, जिससे वे सीधे संवेदनशील स्थानों की निगरानी कर रहे थे। 50 सोलर कैमरे लगाने की थी साजिश पुलिस ने बताया कि यह नेटवर्क देशभर में करीब 50 सोलर कैमरे लगाने की योजना बना रहा था। कुछ स्थानों पर कैमरे पहले ही लगाए जा चुके थे। दिल्ली और सोनीपत में लगाए गए कैमरों को बरामद कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। जांच में यह भी पता चला कि नौशाद मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है और उसे कोलकाता से बुलाकर फरीदाबाद में दुकान खुलवाई गई थी। फिलहाल पुलिस इस जासूसी नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश जारी है कि इसके तार देश और विदेश में किन-किन जगहों से जुड़े हैं।

मार्च-अप्रैल में ट्रिप का प्लान? इन जगहों से दूरी ही बेहतर, वरना खराब हो सकता है पूरा मजा!

नई दिल्ली:मार्च और अप्रैल का महीना भारत में घूमने-फिरने के लिहाज से काफी लोकप्रिय माना जाता है। स्कूल-कॉलेज की परीक्षाएं खत्म होने लगती हैं और छुट्टियों का माहौल बन जाता है, ऐसे में ज्यादातर परिवार ट्रिप प्लान करने लगते हैं। लेकिन हर जगह इस मौसम में घूमने के लिए सही नहीं होती। कई डेस्टिनेशन ऐसे हैं जहां इस दौरान या तो भीषण गर्मी पड़ती है या फिर इतनी ज्यादा भीड़ हो जाती है कि आपका पूरा ट्रैवल एक्सपीरियंस खराब हो सकता है। सबसे पहले बात करें राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों की, खासकर जैसलमेर, बीकानेर और बाड़मेर जैसे शहरों की। मार्च की शुरुआत से ही यहां तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और दिन में पारा 35 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है। तेज धूप और गर्म हवाएं बाहर घूमना मुश्किल बना देती हैं। ऐसे में अगर आप आरामदायक ट्रिप चाहते हैं तो इन जगहों को इस समय टालना ही बेहतर रहेगा। दूसरा नाम आता है मसूरी का, जिसे ‘क्वीन ऑफ हिल्स’ कहा जाता है। आमतौर पर यह एक बेहतरीन हिल स्टेशन है, लेकिन मार्च-अप्रैल में यहां टूरिस्ट सीजन पीक पर होता है। स्कूल की छुट्टियों के कारण यहां भारी भीड़ उमड़ती है। मॉल रोड पर चलना भी मुश्किल हो जाता है, होटल महंगे हो जाते हैं और ट्रैफिक जाम आम बात बन जाती है। अगर आप शांति और सुकून की तलाश में हैं, तो इस समय मसूरी जाना निराश कर सकता है। तीसरी जगह है आगरा, जो अपने ऐतिहासिक महत्व और ताजमहल के लिए दुनियाभर में मशहूर है। लेकिन मार्च और अप्रैल में यहां की गर्मी परेशान कर सकती है। धूप इतनी तेज होती है कि दिन में घूमना मुश्किल हो जाता है, खासकर अगर आप लंबे समय तक बाहर रहना चाहते हैं। भीड़ और गर्म मौसम का कॉम्बिनेशन ट्रिप का मजा कम कर सकता है। इन सबके अलावा एक और बात ध्यान रखने वाली है कि इन महीनों में कई जगहों पर होटल और ट्रांसपोर्ट की कीमतें भी बढ़ जाती हैं, जिससे आपका बजट भी बिगड़ सकता है। इसलिए ट्रिप प्लान करते समय सिर्फ जगह की खूबसूरती नहीं, बल्कि मौसम, भीड़ और सुविधा को भी ध्यान में रखना जरूरी है। अगर आप सच में इस समय एक अच्छा ट्रैवल अनुभव चाहते हैं, तो ऐसी जगहों का चुनाव करें जहां मौसम सुहावना हो, भीड़ कम हो और आप आराम से घूम सकें। सही प्लानिंग और सही डेस्टिनेशन का चुनाव ही आपकी छुट्टियों को यादगार बना सकता है।

परमाणु हथियारों पर उत्तर कोरिया का अमेरिका को कड़ा संदेश, जाने क्‍या बोले किम जोंग उन ?

प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने संसद सुप्रीम पीपुल्स असेंबली में अपने संबोधन के दौरान देश की सुरक्षा और आर्थिक नीतियों को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने साफ कर दिया कि उत्तर कोरिया अब परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थायी और अपरिवर्तनीय स्थिति में है और इस दिशा में उसकी नीति और सख्त की जाएगी। किम ने अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि उनका देश अपने परमाणु बल को लगातार मजबूत करता रहेगा। उन्होंने दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए रक्षा खर्च को वर्ष 2026 के बजट में बढ़ाकर कुल व्यय का 15.8% कर दिया है। राज्य मीडिया केसीएनए के मुताबिक, सोमवार को संसद को संबोधित करते हुए किम ने कहा कि परमाणु शक्ति बनाए रखते हुए विकास करना ही देश की सबसे सही रणनीति है। परमाणु हथियारों पर कोई समझौता नहीं किम जोंग उन ने परमाणु निरस्त्रीकरण के बदले आर्थिक सहायता या सुरक्षा गारंटी के प्रस्तावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों की मौजूदगी ने युद्ध को रोका है और इससे देश को आर्थिक विकास, निर्माण कार्य और लोगों के जीवन स्तर को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिला है। उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास सामरिक परमाणु संसाधन तैनात कर क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया। हालांकि किम ने दावा किया कि अब उत्तर कोरिया खुद को सुरक्षित महसूस करता है और जरूरत पड़ने पर जवाब देने में सक्षम है। दक्षिण कोरिया को बताया मुख्य दुश्मनकिम ने दशकों पुरानी शांतिपूर्ण पुनर्मिलन की नीति से हटते हुए दक्षिण कोरिया को अपना सबसे बड़ा शत्रु घोषित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि देश की संप्रभुता से छेड़छाड़ की गई तो बिना किसी हिचकिचाहट के कड़ा जवाब दिया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रुख अब उत्तर कोरिया के कानून का हिस्सा बन चुका है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।आर्थिक विकास के लिए नई योजनासुरक्षा के साथ-साथ किम ने नई पंचवर्षीय विकास योजना भी पेश की, जिसमें उद्योगों के आधुनिकीकरण, बिजली और कोयला उत्पादन बढ़ाने तथा देशभर में आवास निर्माण पर जोर दिया गया है। बजट में परमाणु युद्ध क्षमता को और मजबूत करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसी दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का संदेश भी पढ़ा गया, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की बात कही गई। केसीएनए के अनुसार, इस सत्र में संविधान संशोधन को मंजूरी दी गई और नई आर्थिक योजना को लागू करने के लिए कानून पारित किया गया। आर्थिक चुनौतियां बरकरार अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर कोरिया अभी भी दुनिया के सबसे गरीब देशों में शामिल है। भारी प्रतिबंधों और संसाधनों की कमी के कारण वहां की बड़ी आबादी सरकारी राशन और अनौपचारिक बाजारों पर निर्भर है।