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मां जगदम्बा की पूजा से लेकर शरीर की देखभाल तक, दूब घास का अद्भुत उपयोग

नई दिल्ली । घास का महत्व केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य और शरीर की देखभाल में भी अहम भूमिका निभाती है। विशेष रूप से दूब घास, जिसे आयुर्वेद में ‘अमृता’ की उपाधि दी गई है, शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी मानी जाती है। नवरात्रि में मां जगदम्बा की पूजा में दूब घास का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि बिना दूब के पूजन अधूरा माना जाता है। घर में कन्या पूजन के समय भी दूब घास का इस्तेमाल पैर छूने और सम्मान के लिए किया जाता है। धार्मिक महत्व के अलावा दूब घास के गुणों को आयुर्वेद में कई तरह से दर्शाया गया है। यह कफ और वात को संतुलित करने वाली औषधि मानी जाती है। यदि शरीर में वात या कफ असंतुलित हैं तो दूब घास का उचित सेवन इन दोषों को संतुलित करने में मदद करता है। लेकिन इसके सही उपयोग से पहले इसके आंतरिक और बाहरी गुणों को जानना बेहद आवश्यक है। बाहरी उपयोग: दूब घास में रक्त को रोकने की क्षमता होती है। चोट लग जाने पर यदि रक्त नहीं रुक रहा है या पुराने घाव में बार-बार खून आता है, तो दूब का लेप किया जा सकता है। यह घाव को भरने और संक्रमण से बचाने में भी मदद करता है। गर्मियों में नाक से खून आना या सिरदर्द जैसी समस्याओं में दूब के रस को नाक में डालना आराम देता है। इसके अलावा, मुल्तानी मिट्टी के साथ मिलाकर सूंघने से भी राहत मिलती है। यदि गर्मियों में त्वचा जलने लगती है, तो दूब का लेप त्वचा को ठंडक और आराम प्रदान करता है।आंतरिक उपयोग: दूब घास का आंतरिक सेवन पेट संबंधी परेशानियों और मासिक धर्म के दर्द में लाभकारी होता है। इसके लिए दूब का रस लेने से पहले चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है। आयुर्वेद में इसे पाचन सुधारने और शरीर को पोषण देने वाला उपाय माना गया है। सीमित मात्रा में इसका नियमित सेवन शरीर को ऊर्जा, मजबूती और आंतरिक शांति प्रदान करता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि दूब घास का अधिक सेवन या गलत तरीके से इस्तेमाल करने से प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकते हैं। इसलिए बाहरी या आंतरिक उपयोग में आयुर्वेदिक और चिकित्सकीय मार्गदर्शन को अपनाना आवश्यक है। इस प्रकार दूब घास का महत्व सिर्फ धार्मिक पूजा में ही नहीं, बल्कि शरीर और स्वास्थ्य के लिए भी अद्वितीय है। बाहरी लेप के रूप में इसका प्रयोग चोट, जलन और रक्तस्राव में राहत देता है, वहीं आंतरिक रूप में इसका सेवन पेट, मासिक धर्म और दोष संतुलन के लिए उपयोगी है। नवरात्रि या किसी भी दिन इसे सही तरीके से अपनाकर व्यक्ति स्वास्थ्य और आध्यात्मिक लाभ दोनों प्राप्त कर सकता है।

घर पर बनाएं स्वादिष्ट दानेदार सूजी का हलवा भंडारे जैसा स्वाद पाएं आसान टिप्स के साथ

नई दिल्ली:  नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद खास माना जाता है। इस दौरान कन्या पूजन के साथ बनाए जाने वाले भोग में सूजी का हलवा विशेष स्थान रखता है। सूजी का हलवा को आमतौर पर भंडारे जैसा स्वादिष्ट और दानेदार बनाने की कोशिश की जाती है लेकिन घर पर वही स्वाद और बनावट पाना कई लोगों के लिए मुश्किल होता है। दरअसल भंडारे जैसा हलवा बनाने के पीछे कुछ खास तकनीक और सही अनुपात का बड़ा योगदान होता है। अगर सामग्री और प्रक्रिया का सही ध्यान रखा जाए तो घर पर भी हलवाई जैसा स्वाद और बनावट हासिल की जा सकती है। सबसे पहले सामग्री का सही संतुलन जरूरी होता है। इसके लिए एक कप सूजी एक कप देसी घी एक कप चीनी और तीन कप पानी लिया जाता है। यह अनुपात हलवे को न तो ज्यादा सूखा बनने देता है और न ही चिपचिपा। इसी के साथ चाशनी तैयार करने में भी एक अहम भूमिका होती है। पानी में चीनी इलायची और केसर डालकर हल्की चाशनी तैयार की जाती है लेकिन इसे एक तार की चाशनी तक नहीं पकाना चाहिए। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण आता है सूजी को भूनना। एक भारी तले वाले पैन में देसी घी गर्म करके उसमें सूजी डाली जाती है। इस दौरान अगर सूजी के साथ थोड़ी मात्रा में बेसन मिलाया जाए तो हलवे का रंग और बनावट और भी बेहतर हो जाती है। सूजी को धीमी आंच पर तब तक भूनना चाहिए जब तक वह सुनहरी भूरी न हो जाए और उसमें से घी अलग होता दिखे। इस प्रक्रिया में जल्दबाजी करने से हलवे का स्वाद बिगड़ सकता है। जब सूजी अच्छे से भुन जाए तो तैयार की गई गर्म चाशनी को धीरे-धीरे उसमें मिलाया जाता है। इस समय सावधानी रखना जरूरी है क्योंकि मिश्रण उछल सकता है। लगातार चलाते रहने से गुठलियां नहीं बनतीं और हलवा एकसार बनता है। हलवे में स्वाद और पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इसमें काजू और बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स डाले जाते हैं। अंत में एक चम्मच घी डालने से हलवे में एक सुंदर चमक आती है। इसके बाद इसे ढककर कुछ मिनट के लिए धीमी आंच पर छोड़ दिया जाता है जिससे सूजी के दाने अच्छी तरह फूल जाते हैं और हलवा दानेदार बन जाता है। इस तरह कुछ आसान टिप्स और सही विधि अपनाकर आप घर पर भी भंडारे जैसा स्वादिष्ट और दानेदार सूजी का हलवा बना सकते हैं। यह न केवल स्वाद में बेहतरीन होता है बल्कि पूजा के लिए एक शुद्ध और पारंपरिक प्रसाद के रूप में भी खास माना जाता है।

कल है दुर्गा अष्टमी 2026 इस शुभ मुहूर्त में करें कन्या पूजन मिलेगा मां महागौरी का आशीर्वाद

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्र का पावन पर्व अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और अब भक्तों को महाअष्टमी का बेसब्री से इंतजार है। दुर्गा अष्टमी का दिन नवरात्र के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है और कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से पूजा करने पर जीवन में सुख समृद्धि और खुशहाली आती है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। ऐसे में महाअष्टमी का पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन करना अत्यंत फलदायी माना गया है। कन्या पूजन के लिए इस बार तीन प्रमुख शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 16 मिनट से लेकर 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त सुबह 10 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से लेकर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। इन सभी समयों में श्रद्धालु कन्या पूजन कर सकते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। इस वर्ष दुर्गा अष्टमी पर विशेष योग का भी संयोग बन रहा है जो इसे और अधिक शुभ बना रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है। यह योग शाम 4 बजकर 19 मिनट से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह तक रहेगा। ऐसे योग में किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है और जीवन में सफलता के मार्ग खुलते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र में अष्टमी और नवमी दोनों दिन कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जहां कन्याओं का सम्मान होता है वहां देवी का वास होता है। इसलिए इस दिन नौ कन्याओं को माता का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। उन्हें भोजन के रूप में हलवा पूरी और चने का प्रसाद दिया जाता है और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। कन्या पूजन केवल एक धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक भी है। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि समाज में महिलाओं का सम्मान और आदर करना कितना महत्वपूर्ण है। इस प्रकार दुर्गा अष्टमी का दिन श्रद्धा भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस शुभ अवसर पर सही मुहूर्त में कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

न्यायपालिका पर दबाव की कोशिश पर CJI का कड़ा संदेश कानून से बच नहीं पाएंगे दोषी

नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और दबाव बनाने की कोशिश का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक केस से जुड़े व्यक्ति ने सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant के परिवार से संपर्क करने की हिम्मत दिखाई इस घटना पर चीफ जस्टिस ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संदेश दिया कि ऐसे तत्वों को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा चाहे वे देश के बाहर ही क्यों न हों मामला उस समय सामने आया जब एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था जिसने सामान्य श्रेणी से होने के बावजूद बौद्ध धर्म अपनाने के बाद अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने का लाभ मांगा था इस पर अदालत ने पहले ही हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि वह अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र से जुड़े नियमों और दिशा निर्देशों को कोर्ट में प्रस्तुत करे सुनवाई के दौरान Surya Kant ने भरी अदालत में इस घटना का खुलासा किया उन्होंने बताया कि संबंधित व्यक्ति ने उनके भाई को फोन कर उनके द्वारा दिए गए आदेश पर सवाल उठाए यह न केवल एक गंभीर हस्तक्षेप था बल्कि न्यायपालिका की गरिमा को चुनौती देने जैसा भी था इस घटना से नाराज चीफ जस्टिस ने कहा कि वह पिछले 23 वर्षों से ऐसे दबाव और हस्तक्षेप करने वाले तत्वों से निपटते आ रहे हैं और इस तरह की हरकतों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा उन्होंने दो टूक कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह उस व्यक्ति को देश के बाहर से भी पकड़ लेंगे चीफ जस्टिस ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की संभावना पर भी विचार करने का निर्देश दिया उन्होंने हरियाणा सरकार के वकील को निर्देश दिया कि उस व्यक्ति से इस हरकत के लिए जवाब मांगा जाए और स्पष्ट किया जाए कि उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए यह मामला न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है और चीफ जस्टिस का यह सख्त रुख इस बात का संकेत है कि न्याय प्रणाली पर किसी भी तरह का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा Tags CJI Surya Kant Supreme Court India judicial independence contempt of court India legal news judiciary pressure case India

सरकार का बड़ा फैसला उड़ान स्कीम से देश के 100 नए एयरपोर्ट्स विकसित होंगे कनेक्टिविटी होगी मजबूत

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना यानी उड़ान योजना के संशोधित संस्करण को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत 28,840 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय तय किया गया है और इसका उद्देश्य देश के छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों में हवाई संपर्क को मजबूत करना है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी और इसका मुख्य फोकस उन क्षेत्रों पर होगा जहां अभी तक हवाई सेवाएं सीमित या उपलब्ध नहीं हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के जरिए देश के 100 नए एयरपोर्ट विकसित किए जाएं, जिससे टियर 2 और टियर 3 शहरों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना से न केवल हवाई यात्रा सस्ती और सुलभ होगी बल्कि दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच भी बेहतर होगी। इससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कैबिनेट के अनुसार इस योजना के तहत हवाई अड्डों के संचालन और रखरखाव के लिए भी सहायता दी जाएगी ताकि वे आर्थिक रूप से टिकाऊ बन सकें। इसके लिए प्रति हवाई अड्डा 3.06 करोड़ रुपये और हेलीपोर्ट के लिए 0.90 करोड़ रुपये की सहायता देने का प्रस्ताव है। लगभग 441 हवाई अड्डों के लिए यह सहायता दी जाएगी। इसके अलावा सरकार ने पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड बनाने का भी प्रस्ताव रखा है। इससे आपातकालीन सेवाओं और अंतिम मील कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जा सकेगा। इस योजना के तहत 15 करोड़ रुपये प्रति हेलीपैड की लागत तय की गई है। सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप है और इसका उद्देश्य देश के एयरोस्पेस सेक्टर को मजबूत करना है। साथ ही ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में भी यह योजना अहम भूमिका निभाएगी। योजना के तहत एयरलाइन ऑपरेटरों को वित्तीय सहायता भी दी जाएगी जिसे विजिबिलिटी फंड यानी वीजीएफ के रूप में जाना जाता है। इसके लिए 10,043 करोड़ रुपये का प्रावधान अगले 10 वर्षों में किया गया है ताकि एयरलाइंस कम लाभ वाले मार्गों पर भी सेवाएं जारी रख सकें। इसके साथ ही छोटे विमानों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने पवन हंस के लिए दो हेलीकॉप्टर और एलायंस एयर के लिए दो विमान खरीदने का भी प्रस्ताव रखा है। इससे देश में हवाई सेवाओं का नेटवर्क और मजबूत होगा।

ALL INDIA RDIO CHANGES: आकाशवाणी में बड़ा बदलाव अब बजेगा ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण All India Radio

  ALL INDIA RDIO CHANGES: नई दिल्ली: भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत संचालित All India Radio यानी आकाशवाणी ने अपने सुबह के प्रसारण में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है अब तक जहां सुबह की शुरुआत प्रतिष्ठित धुन और उसके बाद ‘वंदे मातरम’ के दो छंदों वाले संस्करण से होती थी वहीं अब इसकी जगह राष्ट्रीय गीत का पूरा संस्करण प्रसारित किया जाएगा यह बदलाव 26 मार्च 2026 से लागू हो रहा है आजादी के बाद से आकाशवाणी की यह परंपरा रही है कि वह अपने सुबह के कार्यक्रम की शुरुआत एक खास धुन से करता है और उसके बाद ‘वंदे मातरम’ का छोटा संस्करण बजाया जाता था जिसकी अवधि लगभग 65 सेकंड होती थी लेकिन गृह मंत्रालय द्वारा 28 जनवरी 2026 को जारी नए दिशानिर्देशों के बाद अब इस परंपरा में बदलाव किया गया है नए नियम के अनुसार अब राष्ट्रीय गीत के छह छंदों वाला पूर्ण संस्करण हर दिन प्रसारित किया जाएगा इस नए संस्करण की अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है और इसकी प्रस्तुति प्रसिद्ध हिंदी शास्त्रीय गायक Pandit Chandrashekhar Vaze द्वारा राग देश में की गई है उनकी आवाज में गाया गया यह संस्करण देशभक्ति की भावना और संगीत की गहराई को और अधिक प्रभावी बनाता है अब श्रोता पूरे गीत के माध्यम से ‘वंदे मातरम’ की मूल भावना और उसकी भावनात्मक शक्ति को बेहतर तरीके से अनुभव कर सकेंगे इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब देशभर के अलग अलग राज्यों के लिए ‘वंदे मातरम’ के क्षेत्रीय संस्करण भी तैयार किए जाएंगे इन संस्करणों में स्थानीय संगीत वाद्ययंत्रों और शास्त्रीय धुनों का उपयोग किया जाएगा जिससे हर क्षेत्र के लोग अपनी भाषा और संगीत के अंदाज में इस गीत को सुन और महसूस कर सकेंगे यह कदम भारत की सांस्कृतिक विविधता को सम्मान देने और उसे और अधिक समृद्ध बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है आकाशवाणी का यह नया कदम न केवल राष्ट्रीय गीत को एक नए स्वरूप में प्रस्तुत करेगा बल्कि नई पीढ़ी को भी इसकी पूरी गहराई से परिचित कराएगा इससे श्रोताओं को एक समग्र और समृद्ध देशभक्ति का अनुभव मिलेगा और सुबह की शुरुआत पहले से कहीं अधिक प्रेरणादायक और ऊर्जावान बन जाएगी

RAMNAVAMI HOLIDAY : रामनवमी पर बड़ा फैसला 26 के साथ 27 मार्च को भी अवकाश Yogi Adityanath का ऐलान

    RAMNAVAMI HOLIDAY : नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में रामनवमी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने एक बड़ा और जनभावनाओं को ध्यान में रखने वाला निर्णय लिया है सरकार ने अब 26 मार्च के साथ साथ 27 मार्च 2026 को भी सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया है यह फैसला खासतौर पर उन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लिया गया है जो रामनवमी के अवसर पर बड़े पैमाने पर मंदिरों में दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं रामनवमी का मुख्य पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा और उस दिन पहले से ही छुट्टी तय थी लेकिन प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे अयोध्या मथुरा और वाराणसी में भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और सरकार ने अतिरिक्त अवकाश देने का निर्णय लिया है इस फैसले से लाखों श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन करने का अवसर मिलेगा और यात्रा के दौरान होने वाली भीड़ और दबाव को भी कम किया जा सकेगा सरकार का मानना है कि त्योहारों के दौरान मंदिरों में उमड़ने वाली भीड़ से न सिर्फ यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है बल्कि सुरक्षा बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है ऐसे में दो दिन की छुट्टी से श्रद्धालु आराम से अपने समय के अनुसार दर्शन पूजन कर सकेंगे और किसी तरह की जल्दबाजी या भीड़भाड़ से बचा जा सकेगा मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं खासकर अयोध्या जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जहां देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं प्रशासन को भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष प्रबंध करने के आदेश दिए गए हैं साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है यह निर्णय न केवल श्रद्धालुओं के लिए राहत लेकर आया है बल्कि सरकारी कर्मचारियों को भी अपने परिवार के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने का अवसर देगा आस्था और सुविधा के संतुलन को ध्यान में रखते हुए लिया गया यह कदम प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है रामनवमी जैसे बड़े पर्व पर लगातार दो दिन का अवकाश घोषित करना इस बात का संकेत है कि सरकार धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करते हुए आम जनता की सुविधा को भी प्राथमिकता दे रही है इस फैसले से त्योहार के दौरान होने वाली भीड़ और अव्यवस्था को नियंत्रित करने में प्रशासन को भी काफी मदद मिलेगी

NAKKI MATA TEMPLE: मंडला की पहाड़ियों में विराजमान नक्खी माता हर मुराद होती है पूरी सदियों पुरानी आस्था

  NAKKI MATA TEMPLE: मंडला । चैत्र नवरात्र 2026 के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के मंडला जिले में स्थित नक्खी माता मंदिर एक बार फिर श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मंडला निवास मार्ग पर बसे ग्राम बकौरी की पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यहां से जुड़ी जनश्रुतियां और चमत्कारिक मान्यताएं इसे विशेष बनाती हैं। प्राकृतिक सुंदरता से घिरे इस मंदिर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को अद्भुत शांति और ऊर्जा का अनुभव होता है। मान्यता है कि यहां विराजमान मां नक्खी माता स्वयं प्रकट हुई हैं और यह प्रतिमा मानव निर्मित नहीं है। यही कारण है कि इस मंदिर की महिमा दूर दूर तक फैली हुई है और सालभर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। कोई संतान सुख की कामना लेकर आता है तो कोई अपने जीवन में सुख समृद्धि और शांति की प्रार्थना करता है। चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान इस मंदिर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठता है। गांव के लोग मिलकर जवारे बोते हैं और कलश स्थापना के साथ माता का विशेष श्रृंगार किया जाता है। ढोल नगाड़ों और जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठता है और हर ओर भक्ति का उत्साह दिखाई देता है। खास बात यह है कि पहाड़ी पर स्थित होने के बावजूद श्रद्धालु सीधे अपने वाहनों से मंदिर तक पहुंच सकते हैं जिससे बुजुर्ग और दूरदराज से आने वाले भक्तों को सुविधा मिलती है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार जब से मां नक्खी माता इस गांव में विराजमान हुई हैं तब से गांव पर कभी कोई बड़ा संकट नहीं आया। ग्रामीण इसे देवी की कृपा मानते हैं और हर सुख दुख में सबसे पहले मां के दरबार में पहुंचते हैं। मंदिर में स्थापित पाषाण प्रतिमा के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालु भावविभोर हो जाते हैं और उन्हें मानसिक शांति का अनुभव होता है। इस मंदिर का इतिहास भी बेहद रोचक है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर का जीर्णोद्धार वर्ष 1997 में किया गया जिसके बाद इसे भव्य स्वरूप प्रदान किया गया। मंदिर के गुंबद को विशेष चौपहला आकार दिया गया और परिसर का विस्तार कर श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाएं विकसित की गईं। मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध जनश्रुति लोगों की आस्था को और गहरा करती है। कहा जाता है कि सैकड़ों वर्ष पहले जब लुटेरे इस गांव पर हमला करने पहुंचे तब देवी ने एक छोटी कन्या का रूप धारण कर गांव वालों को खतरे की सूचना दी। जब लुटेरे उस कन्या पर हमला करने दौड़े तो उसका शरीर पत्थर का हो गया। क्रोधित लुटेरों ने उस पत्थर की मूर्ति की नाक काट दी। तभी से देवी को नक्खी माई के नाम से जाना जाने लगा और यह प्रतिमा स्वयं प्रकट मानी जाती है। आज नक्खी माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि आस्था विश्वास और भक्ति का जीवंत प्रतीक बन चुका है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु अपने साथ एक उम्मीद लेकर आता है और मां के आशीर्वाद के साथ लौटता है। अगर आप भी इस नवरात्र में आध्यात्मिक शांति और दिव्यता का अनुभव करना चाहते हैं तो इस पावन धाम के दर्शन आपके लिए एक विशेष अनुभव साबित हो सकते हैं।

BHIND BOMB THERAT: डाकघर को बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस ने घेरा इलाका; सर्चिंग में कुछ नहीं मिला

BHIND BOMB THREAT

HIGHLIGHTS: भिंड डाकघर की पासपोर्ट शाखा में धमकी भरा ई-मेल मिला पूरे परिसर को तुरंत खाली कराया गया बम और डॉग स्क्वॉड ने सघन सर्चिंग की बाजार बंद, यातायात रोका गया जांच में अभी तक कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली BHIND BOMB THERAT: ग्वालियर। भिंड के मुख्य डाकघर स्थित पासपोर्ट शाखा में बुधवार सुबह एक धमकी भरा ई-मेल मिलने से अफरा-तफरी मच गई। मेल में डाकघर को बम से उड़ाने की बात कही गई थी। सूचना मिलते ही अधिकारियों ने तुरंत पूरे परिसर को खाली करवा दिया। One Day Panchayat Adhyaksh : कौन हैं कामिनी बघेल? जो बनीं एक दिन की पंचायत अध्यक्ष और अफसरों की लगा दी क्लास ! पुलिस और बम स्क्वॉड की सघन जांच सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया। कोतवाली और देहात थाना पुलिस के साथ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक Sanjeev Pathak मौके पर पहुंचे। बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड की टीम ने पूरे परिसर में सर्चिंग अभियान चलाया, लेकिन कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। एनिमल को पीछे छोड़ धुरंधर 2 बनी बॉक्स ऑफिस की नई बादशाह रणवीर सिंह का जलवा कायम बाजार बंद, यातायात रोका गया सुरक्षा के मद्देनजर डाकघर के आसपास का इलाका सील कर दिया गया। मुख्य मार्गों पर यातायात रोक दिया गया और आसपास के बाजार भी बंद करा दिए गए। अचानक भारी पुलिस बल की तैनाती से क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। भारत-इजरायल साझेदारी से IMEC मजबूत, चीन की पकड़ को संतुलित करने की रणनीति मेल की जांच जारी प्रारंभिक जांच में कोई खतरा नहीं मिला है, लेकिन पुलिस अब ई-मेल के स्रोत और उसकी सच्चाई की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार मामले की पूरी पड़ताल की जा रही है और उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी गई है।  

BHOPAL CYBER FRAUD : भोपाल में बड़ा घोटाला कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर के फर्जी साइन से 2 करोड़ 26 लाख की सेंध

  BHOPAL CYBER FRAUD : भोपाल । भोपाल में एक बड़े वित्तीय घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी खातों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला शहरी विकास अभिकरण DUDA के खाते से 2 करोड़ 26 लाख रुपये से अधिक की राशि फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से निकाल ली गई। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने पांच निजी फर्मों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस चौंकाने वाले मामले में आरोप है कि भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह और डिप्टी कलेक्टर निधि चौकसे के फर्जी हस्ताक्षर तैयार कर सरकारी खाते से बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी गई। यह पूरी घटना तब सामने आई जब 17 मार्च को डिप्टी कलेक्टर निधि चौकसे ने खुद क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उनके आधार पर बैंक खाते से राशि निकालकर अलग अलग निजी फर्मों के खातों में भेज दी गई। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने डिजिटल सिस्टम और दस्तावेजी प्रक्रिया की कमजोरियों का फायदा उठाया। फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजों का उपयोग कर इस साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया गया। जिन पांच फर्मों के खातों में यह राशि ट्रांसफर की गई है उनके खिलाफ क्राइम ब्रांच ने FIR दर्ज कर ली है और अब इन फर्मों से जुड़े लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। क्राइम ब्रांच की टीम इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए हर पहलू की जांच कर रही है। बैंकिंग ट्रांजेक्शन की डिटेल खंगाली जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस पूरे नेटवर्क में कौन कौन शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि इस घोटाले में एक संगठित गिरोह की भूमिका हो सकती है जो सरकारी दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की नकल कर बड़े स्तर पर धोखाधड़ी को अंजाम देता है। यह मामला न केवल आर्थिक नुकसान का है बल्कि प्रशासनिक विश्वसनीयता और सरकारी तंत्र की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। डिजिटल साइन और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली की कमजोरियां इस घटना के बाद चर्चा में आ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अधिक सख्त और तकनीकी रूप से मजबूत सुरक्षा उपाय अपनाने की आवश्यकता है। फिलहाल क्राइम ब्रांच की जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस मामले में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। यह घटना सरकारी संस्थाओं के लिए एक चेतावनी है कि वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है।