PM मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर श्रीलंका के राष्ट्रपति से की फोन पर बात, जानें किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके (Sri Lankan President Anura Kumara Dissanayake) से मंगलवार को फोन पर बातचीत की। इस चर्चा में पश्चिम एशिया (West Asia.) की बदलती स्थिति पर विस्तार से विचार विमर्श हुआ। खासतौर पर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहे असर को लेकर गहरी चिंता जताई गई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। बातचीत के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच ऊर्जा सहयोग से जुड़ी प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई। दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने का फैसला किया। क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। यह सहयोग दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाया जाएगा। भारत और श्रीलंका को निकट और विश्वसनीय साझेदार बताया गया। दोनों नेताओं ने साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। एनर्जी सप्लाई पर हुई चर्चावैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में हो रही बाधाओं से निपटने के लिए रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। यह साझेदारी दोनों देशों की सुरक्षा और विकास के लिए अहम है। इस चर्चा से भारत-श्रीलंका संबंधों में नई ऊर्जा मिली है। दोनों पक्षों ने भविष्य में भी नियमित संपर्क बनाए रखने और व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। क्षेत्रीय शांति और प्रगति के लिए यह साझा प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत और श्रीलंका के संबंध बेहद पुराने हैं, जो सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत पर आधारित हैं। श्रीलंकाई गृहयुद्ध और भारतीय शांति सेना (IPKF) के हस्तक्षेप से तनाव बढ़ा, लेकिन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने आर्थिक सहयोग को मजबूत किया। बीते वर्षों में, श्रीलंकाई आर्थिक संकट में भारत ने लगभग 4 अरब डॉलर की सहायता (क्रेडिट लाइन, करेंसी स्वैप, ईंधन और खाद्य सामग्री) देकर पड़ोस प्रथम नीति का सबूत दिया। कोविड महामारी में ऑक्सीजन और वैक्सीन सहायता भी प्रदान की गई। हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय यात्राओं, रक्षा समझौते, ऊर्जा कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान और व्यापार से संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचे हैं।
कॉम्पटीशन खत्म अब साथ मिलकर काम RVNL IRCON मर्जर से क्या बदलेगा
नई दिल्ली: देश में इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। रेलवे सेक्टर की दो प्रमुख सरकारी कंपनियां Rail Vikas Nigam Limited और IRCON International को मर्ज करने की तैयारी चल रही है। इस प्रस्तावित विलय का मकसद दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा खत्म कर उन्हें एक मजबूत और एकीकृत इकाई के रूप में खड़ा करना हैअब तक स्थिति यह रही है कि ये दोनों कंपनियां कई प्रोजेक्ट्स में एक दूसरे के खिलाफ बोली लगाती रही हैं। इससे न केवल रेट कम हो जाते हैं बल्कि संसाधनों का बिखराव भी होता है। सरकार का मानना है कि मर्जर के बाद यह डुप्लिकेशन खत्म होगा और दोनों कंपनियों की ताकत एक जगह केंद्रित होगी विलय के बाद बनने वाली नई कंपनी की क्षमता काफी बड़ी होगी। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक आरवीएनएल का मार्केट कैप करीब 53877 करोड़ रुपये है जबकि इरकॉन की वैल्यू करीब 11159 करोड़ रुपये है। दोनों के एक साथ आने पर ज्वाइंट ऑर्डर बुक डेढ़ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। इससे यह नई इकाई देश की बड़ी इंफ्रा कंपनियों को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में आ जाएगी इस फैसले का असर शेयर बाजार में भी तुरंत देखने को मिला। मर्जर की खबर आते ही दोनों कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की गई। निवेशकों को उम्मीद है कि बड़ी और मजबूत कंपनी बनने से वैल्यूएशन और ग्रोथ दोनों में सुधार होगा सरकार के इस कदम को रणनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। हाल ही में Nirmala Sitharaman द्वारा पीएसयू सेक्टर में सुधार के संकेत दिए गए थे। यह मर्जर उसी दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है जिसमें सरकारी कंपनियों को मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर है मर्जर के बाद सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नई कंपनी बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स को आसानी से संभाल सकेगी। देश के भीतर रेलवे नेटवर्क के विस्तार के साथ साथ विदेशों में भी बड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने में मदद मिलेगी। साथ ही मैनपावर और टेक्निकल क्षमता दोनों में इजाफा होगा जिससे प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे किए जा सकेंगे हालांकि यह प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं होगी। इसके लिए कई स्तरों पर मंजूरी लेनी होगी जिसमें मंत्रालयों की स्वीकृति और कैबिनेट की अंतिम मुहर शामिल है। लेकिन अगर यह योजना सफल होती है तो भारतीय रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है सरकार का फोकस साफ है रेलवे को न केवल देश के भीतर मजबूत बनाना बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारतीय कंपनियों की पकड़ मजबूत करना। RVNL और IRCON का यह संभावित विलय उसी बड़े विजन की ओर एक अहम कदम माना जा रहा है
63 गेंदों में 120 रन ठोक धोनी से छीनी जीत फिर अचानक गायब हो गया IPL का ये हीरो

नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग को अक्सर किस्मत बदलने वाली लीग कहा जाता है जहां एक शानदार प्रदर्शन खिलाड़ी को रातोंरात स्टार बना देता है। लेकिन हर कहानी का अंत खुशहाल नहीं होता। कुछ खिलाड़ी ऐसे भी होते हैं जो एक समय चमकते हैं और फिर अचानक गुमनामी में खो जाते हैं। ऐसी ही कहानी है Paul Valthaty की साल 2011 का आईपीएल सीजन इस खिलाड़ी के नाम रहा। 13 अप्रैल 2011 को Kings XI Punjab और Chennai Super Kings के बीच मोहाली में मुकाबला खेला गया। चेन्नई की टीम उस समय MS Dhoni की कप्तानी में थी और उन्होंने पहले बल्लेबाजी करते हुए 188 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया था। उस दौर में यह स्कोर जीत के लिए काफी माना जाता था लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने सबको हैरान कर दिया। पंजाब की ओर से ओपनिंग करने उतरे पॉल वल्थाटी ने अकेले दम पर मैच पलट दिया। उन्होंने 63 गेंदों में नाबाद 120 रन ठोक दिए जिसमें 19 चौके और 2 छक्के शामिल थे। उनकी इस विस्फोटक पारी की बदौलत पंजाब ने 19.1 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। यह पारी आज भी आईपीएल इतिहास की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है वल्थाटी सिर्फ एक मैच के हीरो नहीं थे। पूरे 2011 सीजन में उन्होंने 14 मैचों में 463 रन बनाए और 7 विकेट भी लिए। उस समय वह ऑरेंज कैप की दौड़ में भी शामिल थे और बड़े खिलाड़ियों को टक्कर दे रहे थे। ऐसा लग रहा था कि भारतीय क्रिकेट को एक नया सितारा मिल गया है लेकिन किस्मत ने अचानक करवट बदल ली। शानदार सीजन के बाद वल्थाटी को कलाई में गंभीर चोट लग गई। उन्होंने वापसी की कोशिश जरूर की लेकिन पुरानी लय हासिल नहीं कर सके। 2012 में उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा और 2013 में भी वह कुछ खास नहीं कर पाए। इसके बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया और फिर किसी फ्रेंचाइजी ने उन्हें मौका नहीं दिया धीरे धीरे वह आईपीएल और क्रिकेट की मुख्यधारा से गायब हो गए। एक समय जो खिलाड़ी सुर्खियों में था वह अब फैंस की यादों में भी धुंधला पड़ गया हालांकि क्रिकेट से उनका रिश्ता पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अब वह अमेरिका में कोचिंग के जरिए अपनी नई पारी खेल रहे हैं और युवा खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। उन्होंने खेल से संन्यास के बाद नौकरी भी की और क्रिकेट प्रशासन से भी जुड़े पॉल वल्थाटी की कहानी क्रिकेट की उस सच्चाई को दिखाती है जहां सफलता और असफलता के बीच की दूरी बहुत कम होती है। एक पारी आपको आसमान पर पहुंचा सकती है और एक चोट आपको जमीन पर ला सकती है यह कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं बल्कि उस अनिश्चितता की है जो क्रिकेट जैसे खेल को इतना रोमांचक और भावनात्मक बनाती है
पश्चिम एशिया तनाव में भी चीन में पेट्रोल-LPG की हो रही भरपूर सप्लाई…. जिनपिंग ने ढूंढा नया रास्ता!

बीजिंग। मिडल ईस्ट (Middle East) में छिड़ी भीषण जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की तालाबंदी ने दुनिया के कई देशों में हाहाकार मचा दिया है. तेल संकट से जूझ रहे देशों में चीन (China) भी शामिल होता लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने एक रास्ता ढूंढ़ लिया है. ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा देखते हुए बीजिंग (Beijing) ने पुराने ट्रे़ड रास्तों का विकल्प ढूंढना शुरू कर दिया है. ऐसे में म्यांमार चीन के लिए सिर्फ एक पड़ोसी नहीं, बल्कि हिंद महासागर में उतरने का सबसे सुरक्षित ‘बैकडोर’ बन गया है. चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारा (CMEC) अब केवल व्यापार का जरिया नहीं, बल्कि एक रणनीतिक ढाल बन चुका है। बड़ी-बड़ी पाइपलाइनें: चीन ने म्यांमार के क्यायुकफ्यू बंदरगाह से लेकर चीन के कुनमिंग शहर तक दो बड़ी-बड़ी पाइपलाइनें बिछाई हैं. इनका सबसे बड़ा मकसद ‘मलक्का डिलेमा’ से बचना है. कच्चा तेल: यह पाइपलाइन सालाना 2.2 करोड़ टन यानी लगभग 2,40,000 बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल ले जाने की क्षमता रखती है. खाड़ी देशों और अफ्रीका से आने वाले बड़े टैंकर म्यांमार के तट पर तेल उतारते हैं, जो पाइपलाइन के जरिए सीधे चीन पहुंचता है. नैचुरल गैस: इसके साथ ही एक गैस पाइपलाइन भी है जो सालाना 12 अरब क्यूबिक मीटर गैस सप्लाई करती है. इसमें म्यांमार के अपने अपतटीय क्षेत्रों की गैस भी शामिल है. हिंद महासागर में चीन की बिसातचीन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए ‘मोतियों की माला’ (String of Pearls) की नीति को और मजबूत कर रहा है. मालदीव में चीन ने इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘फ्रेंडशिप ब्रिज’ जैसे प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश किया है ताकि भारत के प्रभाव को कम किया जा सके। भारत ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर नया एयरपोर्ट और मिलिट्री बेस बनाकर चीन की घेराबंदी तेज कर दी है. यह बेस बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य के बीच एक ‘नेचुरल बैरियर’ की तरह काम करेगा. म्यांमार: चीन का ‘ट्रम्प कार्ड’सारे रास्तों के बंद होने पर म्यांमार ही वो एकमात्र रास्ता है जो चीन को सीधे बंगाल की खाड़ी से जोड़ता है. चीन ने इसके लिए कई तरह की चालें चली हैं, जिसमें से एक म्यांमार के आंतरिक संघर्षों में एक ‘मध्यस्थ’ की भूमिका भी है, ताकि CMEC के प्रोजेक्ट्स सुरक्षित रहें. चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वाशिंगटन में भी अब चर्चा शुरू हो गई है कि क्या म्यांमार पर लगाए गए प्रतिबंध उसे पूरी तरह चीन की गोद में धकेल रहे हैं?
कन्या पूजन में लांगूर क्यों बुलाया जाता है? जानिए इसका पौराणिक महत्व

नई दिल्ली। हिन्दू धर्म में नवरात्रि का पर्व बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि शुरू हुई और 27 मार्च 2026 को इसका समापन होगा। 26 मार्च को अष्टमी और 27 मार्च को नवमी मनाई जाएगी। नवमी के दिन हवन और कन्या पूजन का आयोजन होता है। यह व्रत और पूजा कन्या पूजन के बिना अधूरी मानी जाती है।कन्या पूजन का तरीका कन्या पूजन में 2 से 9 साल तक की छोटी लड़कियों को बुलाया जाता है। उन्हें देवी दुर्गा का रूप मानकर पूजा जाता है। पूजा के दौरान इन कन्याओं को सम्मानपूर्वक खीर-पूड़ी और हलवे का भोजन कराया जाता है इसके बाद उन्हें भेंट दी जाती है। लांगूर कौन होता है? कन्या पूजन में कन्याओं के साथ एक छोटे लड़के को भी बुलाना जरूरी होता है जिसे लांगूर कहा जाता है। जिस तरह कन्याएं देवी दुर्गा का रूप मानी जाती हैं वैसे ही यह लड़का भैरवनाथ का रूप माना जाता है। उसे लंगूर लंगूरिया या बटुक भी कहा जाता है। बिना लांगूर के बुलाए कन्या पूजन पूरी नहीं माना जाता।लांगूर के पूजन का पौराणिक कारण कथा के अनुसार जब भगवान शिव ने माता दुर्गा की रक्षा के लिए भैरव का रूप धारण किया था तब माता दुर्गा ने वरदान दिया कि जो भी भक्त मेरी पूजा करेगा उसे भैरव की भी पूजा करनी होगी। इसलिए कन्या पूजन में लड़के को भैरव का रूप मानकर पूजा किया जाता है ताकि पूजा पूर्ण हो सके। भैरव देवता का महत्व कई प्रसिद्ध देवीधामों में भैरव का मंदिर होता है जैसे वैष्णो देवी मंदिर में। यहाँ तक कि मंदिर दर्शन तब तक अधूरे माने जाते हैं जब तक भैरव बाबा के दर्शन नहीं किए जाते। सुख-समृद्धि और सुरक्षा का संदेश बाबा काल भैरव को शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करने वाला देवता माना जाता है। मान्यता है कि कन्या पूजन में बटुक या लांगूर को बुलाकर पूजन और भोजन कराने से घर में सुख समृद्धि आती है और सुरक्षा बनी रहती है। Disclaimer: यह खबर केवल जागरूकता के लिए लिखी गई है। इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली गई है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।
IPL 2026 में तेज गेंदबाज क्यों हो रहे चोटिल? Royal Challengers Bengaluru अधिकारी ने खोला राज

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 से पहले तेज गेंदबाज की चोट ने सभी टीमों की चिंता बढ़ा दी है। इंडियन प्रीमियर लीग के इस सीजन में कई बड़े नाम चोटिल होने के कारण या तो आउट हो गए हैं या शुरुआती मैचों में नहीं खेल पाएंगे। इसमें जसप्रित बुमरा, जोश हेज़लवुड, पैट कमिंस और मिचेल स्टार्क जैसे स्टार खिलाड़ी शामिल हैं। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के क्रिकेट डायरेक्टर मो बोबट ने इस समस्या का बड़ा कारण बताया है। बेस्ट क्रिकेट कैलेंडर बना सबसे बड़ी वजहमो बोबट के मुताबिक, तेज गेंदबाज के कॉन्सटेंट होने की सबसे बड़ी दुनिया अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट की सबसे बड़ी साजिश है। प्लेयर्स को साल भर अलग-अलग अलग-अलग गेम और सीरीज़ वाले गेम्स मिलते हैं, जिससे उनके शरीर पर लगातार दबाव बना रहता है। प्रमाणित पर प्रमाणित नामांकन के लिए और यह भी निजीकरण होता है, क्योंकि उनके अध्ययन में शारीरिक मेहनत और फिटनेस की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। लगातार मैच मैच से उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिलता, जिससे चोट का खतरा बढ़ जाता है। विचारधारा की रणनीति पर असर पड़ रहा हैइन दस्तावेजों का सुसंगत सुसंगतता की रणनीति और संतुलन पर ध्यान दिया जा रहा है। आरसीबी को भी अपने स्टार सहयोगी जोश हेजलवुड के शुरुआती शुरुआती मैचों में नहीं जाना चाहिए। वहीं, नैथन ऐलिस पूरे टूर्नामेंट में आउट हो चुके खिलाड़ी हैं। ऐसे में टीमों को अपने फार्मूले में बदलाव करना पड़ रहा है, जिससे प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। बोबट ने कहा कि यह स्थिति सिर्फ एक टीम की नहीं है, बल्कि लगभग सभी टीमों के लिए चुनौती बन गई है। समाधान आसान नहीं, बेहतर क्षमता ही रास्तामो बोबट ने सोचा कि इस समस्या का कोई आसान समाधान नहीं है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि फ़्रैंचाइज़ी और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड के बीच बेहतर तालमेल और संवाद ज़रूरी है। इसमें मेडिकल परीक्षाओं की भूमिका भी अहम है, जो खिलाड़ियों की फिटनेस पर लगातार नजर रखते हैं। उन्होंने हवाला देते हुए कहा कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के शानदार प्रदर्शन की वजह से ही हेजलवुड की वापसी बेहतर तरीके से की जा सकी। तेजस्वी चुनौती के लिएविशेषज्ञ का मानना है कि अगर क्रिकेट कैलेंडर इसी तरह से जुड़ा रहा, तो भविष्य में सूची की सूची जारी की जा सकती है और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में खिलाड़ियों के वर्कलोड और फिटनेस पर खास ध्यान देना होगा, ताकि वे लंबे समय तक खेल में बने रहें।
बेंच पर बैठा खिलाड़ी बना अरबों की टीम का मालिक आर्यमान बिड़ला की चौंकाने वाली कहानी

नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के आगाज से ठीक पहले Royal Challengers Bengaluru ने ऐसा कदम उठाया है जिसने क्रिकेट और बिजनेस दोनों दुनिया को चौंका दिया है। टीम की मालिकाना हक में बदलाव हुआ है और अब इसकी कमान एक ऐसे शख्स के हाथ में है जो कभी खुद मैदान पर मौका पाने के लिए तरसा था। साल 2018 की आईपीएल नीलामी में Rajasthan Royals ने आर्यमान बिड़ला को 30 लाख रुपये में खरीदा था। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 20 साल थी और उम्मीद थी कि उन्हें जल्द ही मौका मिलेगा। लेकिन पूरा सीजन गुजर गया और वह एक भी मैच नहीं खेल पाए। मैदान पर उतरने का सपना अधूरा ही रह गया। इस निराशा के बाद उन्होंने 2019 में क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया। यह फैसला आसान नहीं था लेकिन उन्होंने अपने परिवार के बिजनेस को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना। उनके पिता Kumar Mangalam Birla के नेतृत्व में Aditya Birla Group पहले से ही देश की बड़ी कंपनियों में शामिल था और आर्यमान ने इसी दुनिया में अपनी नई पहचान बनानी शुरू की। समय बदला और किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। आदित्य बिड़ला ग्रुप ने अन्य निवेशकों के साथ मिलकर RCB को लगभग 16660 करोड़ रुपये में खरीद लिया। यह सौदा आईपीएल इतिहास के सबसे बड़े सौदों में शामिल हो गया। इस ऐतिहासिक डील के बाद आर्यमान बिड़ला को टीम का चेयरमैन बनाया गया। क्रिकेट से उनका रिश्ता पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था। उन्होंने मध्य प्रदेश के लिए घरेलू क्रिकेट खेला और रणजी ट्रॉफी में भी नजर आए। खास बात यह है कि वह मौजूदा RCB कप्तान Rajat Patidar के साथ ओपनिंग भी कर चुके हैं। उनके फर्स्ट क्लास करियर में 9 मैचों में 414 रन शामिल हैं जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक भी है। अब उनकी नई भूमिका मैदान के अंदर नहीं बल्कि बोर्डरूम में है जहां वह टीम की रणनीति और भविष्य को दिशा देंगे। यह सफर सिर्फ एक खिलाड़ी का नहीं बल्कि उस सोच का उदाहरण है जहां असफलता अंत नहीं बल्कि नई शुरुआत बन जाती है। आर्यमान बिड़ला की कहानी यह बताती है कि अगर एक रास्ता बंद हो जाए तो दूसरा रास्ता और भी बड़ा अवसर लेकर आ सकता है। कभी डेब्यू के लिए इंतजार करने वाला यह खिलाड़ी आज पूरी टीम का मालिकाना संभाल रहा है और आईपीएल के सबसे बड़े मंच पर अपनी नई पारी शुरू कर चुका है।
‘हैवान’ के लिए अक्षय कुमार की दिलचस्प कोशिश, लेकिन प्रियदर्शन ने नहीं दिया मौका
नई दिल्ली। अक्षय कुमार और डायरेक्टर प्रियदर्शन की जोड़ी ने कई हिट फिल्में दी हैं। दोनों के नाम गरम मसाला, हेरा फेरी जैसी फिल्में हैं। और अब आने वाले दिनों में भूत बंगला और हैवान में दोनों का काम नजर आने वाला है। अब हाल में डायरेक्टर ने बताया कि उन्होंने कभी अक्षय को कोई स्क्रिप्ट नहीं सुनाई। दोनों के बीच बस बातचीत होती है और वो फिल्म का हिस्सा बन जाते हैं। प्रियदर्शन ने कहा कि हैवान के लिए खुद अक्षय ने उनसे रोल मांगा था। दोनों के बीच बातचीत हुई और अक्षय को फिल्म मिल गई। अक्षय ने खुद मांगा रोलन्यूज18 के साथ बातचीत में प्रियदर्शन ने बताया कि भूत बंगला की शूटिंग के दौरान अक्षय कुमार ने उनसे पूछा था कि वो अगली कौनसी फिल्म बना रहे हैं। डायरेक्टर ने उनसे कह दिया कि वो फिल्म बना रहे हैं लेकिन उन्हें विलेन नहीं मिल रहा है। अक्षय जो जब फिल्म के बारे अक्षय को पता चला तो वो इसका हिस्सा बन गए। प्रियदर्शन ने कहा कि वो बहुत हैरान थे। फिल्म के बारे में कोई डिटेल में डिस्कशन नहीं हुआ। मैंने अक्षय को कभी फिल्म नरेट नहीं की। मैं उन्हें बस कहानी और किरदार बता देता हूं। वो हमेशा मुझसे पूछते हैं कि मैं कितना एक्साइटेड हूं। अगर मैं उन्हें कहता हूं कि मैं एक्साइटेड हूं तो वो खुश नहीं होंगे। अगर मैंने कह दिया कि मैं बहुत एक्साइटेड हूं तो वो कहेगा चलिए फिल्म बनाते हैं सर। अब कॉमेडी फिल्म नहीं बनाना चाहते प्रियदर्शनडायरेक्टर प्रियदर्शन ने कहा कि वो अब पूरी तरह से कॉमेडी फिल्म नहीं बनाना चाहते। हैवान में भी कुछ सीन कॉमेडी के हैं। लेकिन वो एक थ्रिलर फिल्म है। डायरेक्टर ने कहा कि उन्हें काम करते हुए 45 साल हो गए हैं। अब वो थोड़ा स्लो होना चाहते हैं। ओप्पम का हिंदी रीमेकबता दें, अक्षय कुमार की हैवान एक मलयालम फिल्म ओप्पम की हिंदी रीमेक है। इस फिल्म की कहानी एक ऐसे कैदी पर आधारित है जो सजा सुनाने वाले जज और उनकी बेटी को मार देना चाहता है। लेकिन इसमें बिल्डिंग का लिफ्टमैन भी है जो जज की बेटी को बचाने की कोशिश करता है। खास बात ये है कि ये किरदार अंधा है। इस किरदार को सैफ अली खान निभाने वाले हैं। फिल्म हैवान इस साल अगस्त में दस्तक देने वाली है।
‘Sabarmati Report’ के बाद Ekta Kapoor का बड़ा ऐलान-अब आएगी ‘The Terror Report’

नई दिल्ली। टीवी और फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री एकता कपूर ने अपनी नई फिल्म द टेरर रिपोर्ट का ऐलान कर दिया है। ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की सफलता के बाद अब यह फिल्म पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कीमिया पीओके पर आधारित होगी। एकता कपूर ने सोशल मीडिया पर फिल्म का टीजर शेयर करते हुए बताया कि इस बार की कहानी और भी ज्यादा बोल्ड, निडर और दमदार होगी। फिल्म के निर्देशक विष्णुवर्धन होंगे, जो इससे पहले ‘शेरशाह’ जैसी हिट फिल्म दे चुके हैं। पिछली फिल्म की झलक में प्रदर्शित अनाउंस वीडियोफिल्म के अनाउंसमेंट वीडियो की शुरुआत ‘साबरमती रिपोर्ट’ के कुछ अहम सीन और डायलॉग्स से होती है। इसमें नरेंद्र मोदी को अपनी टीम के साथ फिल्म देखते हुए भी दिखाया गया है। साथ ही योगी आदित्यनाथ का बयान भी शामिल है, जिसमें उन्होंने फिल्म को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री करने का ऐलान किया था। पिछली फिल्म की कहानी और रिसर्च के लिए काफी एक्टर मिले थे, जिसमें विक्रांत मैसी के अभिनय को भी काफी पसंद किया गया था। ऐसे में अब ‘द टेरर रिपोर्ट’ लेकर दर्शकों के बारे में विस्तार से बताया गया है। 1998 से 2025 तक की कहानियों पर आधारित कहानी‘डी टेरर रिपोर्ट’ की कहानी 1998 से 2025 तक की उन घटनाओं को दर्शाती है, जो पीओके और उससे जुड़े ऑपरेशनों की कहानी हैं- गिरजाघर। फिल्म में व्हेल, सुरक्षा संचालन और वैज्ञानिक विद्वानों को बड़े पैमाने पर दिखाया गया है। अनाउंसमेंट वीडियो में संकेत दिया गया है कि यह कहानी उन अनसुने बयानों को सामने लाएगी, जिसमें अब तक बड़े पैमाने पर प्रदर्शन नहीं किया गया है। फ़िल्म के क्वेश्चन एक गंभीर और वास्तविक विषय को दर्शकों तक पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं। स्टार कास्ट और रिलीज डेट का इंतजारएनालॉग फिल्म की स्टार कास्ट और रिलीज डेट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, फिल्म के प्रोडक्शन में शोभा कपूर, तनुज गर्ग, अतुल कस्बेकर और सुधीर चौधरी जैसे नाम जुड़े हुए हैं। ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की सफलता के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘द टेरर रिपोर्ट’ पर दर्शकों की उम्मीदें कितनी खराब हैं।
भूटान का पारो फेस्टिवल संस्कृति आस्था और रंगों का अद्भुत उत्सव..

नई दिल्ली: भूटान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां मनाए जाने वाले विभिन्न त्योहार लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं और सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं। इन्हीं में से सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध उत्सव है पारो त्शेचू फेस्टिवल यह उत्सव हर साल वसंत ऋतु में मनाया जाता है, आमतौर पर अप्रैल के शुरुआती दिनों में। इस वर्ष यह फेस्टिवल 29 मार्च से 2 अप्रैल तक आयोजित किया जा रहा है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भूटान की आस्था, संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रदर्शन है पारो त्शेचू के दौरान भिक्षु और स्थानीय लोग पारंपरिक मुखौटे पहनकर नृत्य करते हैं और बौद्ध मंत्रों का जाप करते हैं। यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक मान्यताओं और कहानियों को दर्शाता है इस उत्सव में लोग रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में शामिल होते हैं, जिससे पूरा वातावरण जीवंत और आकर्षक बन जाता है। यहां होने वाले मुखौटा नृत्य प्राचीन बौद्ध कथाओं और ऐतिहासिक घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं इस फेस्टिवल में गुरु पद्मसंभव की कहानियों को भी दर्शाया जाता है, जिन्होंने भूटान में बौद्ध धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। माना जाता है कि उन्होंने भूटान के सम्राट को ठीक करने में मदद की थी और इसी से तिब्बती बौद्ध धर्म की शुरुआत हुई पारो त्शेचू फेस्टिवल केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भूटान की संस्कृति, आस्था और विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाला एक भव्य उत्सव है