रामनवमी 2026: प्रभु श्री राम से प्रेरित रंगोली से सजाएं घर

नई दिल्ली । रामनवमी के पावन अवसर पर घर को सजाना और धार्मिक रूप से महत्त्वपूर्ण प्रतीकों से सजावट करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी अवसर पर रंगोली बनाना न केवल घर की खूबसूरती बढ़ाता है, बल्कि इसे सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। 2026 में रामनवमी पर लोग पारंपरिक रंगोली से हटकर प्रभु श्री राम से जुड़ी थीम-बेस्ड रंगोली बनाने को अधिक पसंद कर रहे हैं। ऐसे रंगोली डिज़ाइन न केवल सुंदर दिखाई देते हैं, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं। सबसे सरल और प्रभावशाली डिजाइन के रूप में धनुष-बाण वाली रंगोली को अपनाया जा सकता है। इसके लिए लाल और पीले रंगों का उपयोग कर बड़े धनुष का आकार बनाएं और बीच में “जय श्री राम” लिखें। किनारों पर गेंदे के फूल सजाने से रंगोली को एक पेशेवर लुक मिलता है। यह डिजाइन बच्चों और बड़ों दोनों के लिए आसान और आकर्षक होता है। भगवान राम के आगमन के प्रतीक के रूप में चरण पादुका वाली रंगोली भी बहुत लोकप्रिय है। मुख्य द्वार पर छोटी-छोटी चरण पादुकाएं कुमकुम और सफेद चौक से बनाई जाती हैं और इनके चारों ओर फूलों की पंखुड़ियों का घेरा तैयार किया जाता है। यह डिज़ाइन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है। अगर आपको चित्र बनाना कठिन लगता है, तो नाम मंत्र वाली रंगोली एक बेहतरीन विकल्प है। गहरे नीले या केसरिया रंग के बेस पर सफेद रंग से “राम” या “जय श्री राम” लिखें। बिंदुओं की मदद से इसे सजाना बेहद आसान है। इस तरह की रंगोली केवल 5 मिनट में तैयार हो सकती है और घर के मुख्य द्वार को खूबसूरती से सजाती है। दीपक और कमल के फूल का संयोजन भी रामलला के स्वागत के लिए अत्यंत आकर्षक विकल्प है। कमल के फूल का डिजाइन बनाएं और उसके बीच में मिट्टी का दीपक जलाएं। यह डिजाइन सादगी और भव्यता का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करता है। यदि सटीक लाइन खींचना मुश्किल हो, तो चूड़ी और चम्मच का उपयोग करके गोल घेरे और उभरे हुए डिजाइन तैयार किए जा सकते हैं। रंगों के साथ-साथ ताजे गेंदे और गुलाब के फूलों का प्रयोग रंगोली को जीवंत और आकर्षक बनाता है। इन डिज़ाइनों से न केवल घर महक उठता है बल्कि आने वाले मेहमान और पड़ोसी भी आपकी रचनात्मकता की तारीफ किए बिना नहीं रह पाते। रंगोली बनाने का यह अनुभव धार्मिक, सौंदर्यात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से आनंददायक होता है। इस प्रकार, रामनवमी पर प्रभु श्री राम से प्रेरित रंगोली बनाना न केवल घर को सजाने का माध्यम है बल्कि यह श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी बनता है। चाहे धनुष-बाण हो, चरण पादुका, नाम मंत्र या दीपक-कमल का संयोजन, ये डिज़ाइन सभी उम्र के लोगों के लिए आसान और खूबसूरत विकल्प हैं। इस बार रामनवमी 2026 पर इन रंगोली डिज़ाइनों से घर को सजाएं और प्रभु श्री राम का स्वागत भव्य तरीके से करें।
गर्मियों में फटी एड़ियों और टैनिंग से राहत, घर पर करें आसान 15 मिनट पेडिक्योर

नई दिल्ली । गर्मियों में पैरों की देखभाल पर ध्यान न देने से फटी एड़ियां, टैनिंग और रूखापन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। दिनभर जूतों में बंद रहने, पसीने और धूल के कारण पैर प्रभावित होते हैं और फंगल इंफेक्शन, खुजली और बदबू जैसी परेशानियां घर करने लगती हैं। ऐसे में महंगे पार्लर की बजाय आप घर पर ही आसान और प्राकृतिक उपायों से पैरों को फ्रेश और बेबी सॉफ्ट बना सकते हैं। सबसे पहले बात करते हैं पैरों की सफाई और नमी की सही देखभाल की। नहाने के बाद अक्सर लोग शरीर तो पोंछ लेते हैं, लेकिन पैरों की उंगलियों के बीच के हिस्से गीले छोड़ देते हैं। यही नमी फंगल इंफेक्शन की असली जड़ बन जाती है। इसलिए पैरों को तौलिये से अच्छी तरह सुखाएं और अगर संभव हो तो थोड़ी देर उन्हें हवा या हल्की धूप दिखाएं। यह कदम पैरों को संक्रमण और बैक्टीरिया से बचाने में मदद करता है। फुटवियर का चयन भी बेहद महत्वपूर्ण है। गर्मियों में टाइट या सिंथेटिक जूते पहनने से बचें। ऐसे जूते चुनें जिनमें हवा का संचार आसानी से हो सके। कॉटन के मोज़े पहनना और समय-समय पर जूतों को धूप दिखाना पैरों की बदबू रोकने का सरल उपाय है। नीम का उपयोग आयुर्वेद में त्वचा की सुरक्षा के लिए सबसे प्रभावशाली माना गया है। गर्मियों में पैरों को फंगल इंफेक्शन और बैक्टीरिया से बचाने के लिए नहाने के पानी में नीम की पत्तियां डालें या नीम के तेल की 3-4 बूंदें मिलाएं। इसके एंटी-बैक्टीरियल गुण पैरों को साफ और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। पैरों की मृत त्वचा हटाने के लिए किचन में उपलब्ध प्राकृतिक स्क्रब का उपयोग करें। इसके लिए थोड़ी सी शक्कर या चीनी में नारियल तेल मिलाकर पैरों की हल्की मालिश करें। यह सप्ताह में एक बार करें। यह न केवल डेड स्किन को हटाता है बल्कि नारियल तेल पैरों को मखमली कोमलता और पोषण भी देता है। इसके साथ ही रक्त संचार भी बेहतर होता है, जिससे पैरों की त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है। इसके अलावा, फटी एड़ियों से राहत पाने के लिए पैरों को नियमित रूप से मॉइश्चराइज करना जरूरी है। रात को सोने से पहले नारियल या बादाम के तेल से एड़ियों की मालिश करें और कपड़े के सोक्स पहन लें। इससे पैरों की त्वचा नमी बनाए रखती है और टैनिंग कम होती है। नियमित सफाई, सही फुटवियर, नीम और नारियल आधारित प्राकृतिक उपाय अपनाकर आप गर्मियों में पैरों को स्वस्थ, सुंदर और फ्रेश रख सकते हैं। फटी एड़ियों, टैनिंग और खुजली जैसी परेशानियों से राहत पाने के लिए बस 15 मिनट का नियमित पेडिक्योर काफी है। इस गर्मी अपने पैरों को भी वही देखभाल दें जो आप अपने चेहरे को देते हैं और घर पर ही बेबी सॉफ्ट पैरों का अनुभव पाएं।
हफ्ते से ज्यादा खांसी है तो हो जाए सावधान टीबी का संकेत हो सकता है

नई दिल्ली: टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस आज भी भारत में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। बदलते मौसम में खांसी होना आम बात है, लेकिन हर खांसी को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। कई बार साधारण दिखने वाली खांसी किसी बड़ी बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकती है सामान्य खांसी आमतौर पर 5 से 7 दिनों में ठीक हो जाती है, जो सर्दी, वायरल इंफेक्शन या एलर्जी के कारण होती है। लेकिन अगर खांसी 2 से 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक बनी रहती है और दवाओं से आराम नहीं मिलता, तो यह टीबी का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है टीबी सिर्फ खांसी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है। इसके साथ कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं, जैसे शाम के समय हल्का बुखार, रात में ज्यादा पसीना आना, बिना कारण वजन कम होना, लगातार थकान महसूस होना और सीने में दर्द टीबी के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और दूसरों में भी फैल सकती है। इसलिए अगर खांसी के साथ ये लक्षण नजर आएं, तो देरी न करें और तुरंत जांच कराएं विशेषज्ञों के अनुसार, जागरूकता और समय पर इलाज ही टीबी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। अगर शुरुआती लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है हर खांसी को नजरअंदाज न करें। अगर यह लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे चेतावनी संकेत मानकर तुरंत मेडिकल सलाह लेना ही समझदारी है
चारधाम यात्रा: अब तक हुए 10 लाख रजिस्ट्रेशन, CM बोले- सभी श्रद्धालुओं को दर्शन कराना हमारी जिम्मेदारी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने कहा कि चारधाम यात्रा (Chardham Yatra 2026) में देश दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन कराना हमारी जिम्मेदारी है। अब तक यात्रा के लिए 10 लाख तीर्थयात्री पंजीकरण कर चुके हैं। वहीं गढ़वाल मंडल विकास निगम के विश्राम गृह में पांच करोड़ की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। मंगलवार को चारधाम यात्रा की तैयारियों पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा में देश दुनिया से श्रद्धालु आते हैं। 19 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू हो रही है। सरकार ने 2025 में धामों के कपाट बंद होने के बाद से आगामी चारधाम यात्रा की तैयारियां शुरू कर दी थीं। सड़क, अवस्थापना विकास, आवास, परिवहन व आवास की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बीते वर्ष प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर आपदा के कारण डेढ़ माह तक चारधाम यात्रा बाधित रही। इसके बावजूद पर 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। आगामी यात्रा के लिए अब तक 10 लाख श्रद्धालु पंजीकरण कर चुके हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि किसी भी श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। राज्य की भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए यात्रा चुनौतीपूर्ण होती है लेकिन प्रत्येक श्रद्धालु की सुरक्षित यात्रा सर्वोच्च प्राथमिकता है। देवभूमि आने वाले सभी श्रद्धालुओं को दर्शन कराना हमारी जिम्मेदारी है। आपदा के पूर्वानुमान की सूचना भी श्रद्धालुओं की दी जाएगी। यात्रा शुरू होने से पहले वे स्वयं भी यात्रा मार्गों पर जाकर व्यवस्था को परखेंगे। चारधाम यात्रा के दौरान सामान्य स्थिति में श्रद्धालुओं की संख्या में कैपिंग को लेकर किसी तरह के निर्देश नहीं दिए गए।
MP: सागर में डॉक्टर ने खुद ही कार में आग लगाकर की थी पत्नी की हत्या…सहयोगी के साथ गिरफ्तार

सागर। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले (Sagar district) में पत्नी की हत्या कर उसे सड़क दुर्घटना का रूप देने की साजिश का पुलिस ने खुलासा करते हुए आरोपी पति और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार सानौधा थाना क्षेत्र (Sanodha Police Station area) के चनाटौरिया टोल टैक्स प्लाजा (Chanatoriya Toll Tax Plaza) के पास कार में आग लगने की घटना को पहले हादसा बताया गया था, लेकिन जांच के दौरान यह मामला हत्या का निकला। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गढ़ाकोटा निवासी आरोपी BAMS डॉक्टर अपनी पत्नी को कार में लेकर मौके पर पहुंचा था और घटना से पहले मायके पक्ष को फोन कर पत्नी को हार्ट अटैक आने की बात कही थी। बाद में कार में आग लगने को दुर्घटना बताया था। जली हुई कार से उसकी पत्नी का कंकाल मिला था। जांच में सामने आया कि आरोपी के किसी अन्य महिला से संबंध थे, जिसके चलते पति-पत्नी के बीच विवाद होता था। इसी प्रेम-प्रसंग के चलते डॉक्टर ने घर पर ही पत्नी का गला घोंटकर हत्या कर दी और सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट कर दिए। इसके बाद उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर साजिश रची और घटना को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की। यूं खुली डॉक्टर के झूठ की पोलजांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल पर माचिस की तीली और ज्वलनशील पदार्थ मिले थे, जबकि आरोपी डॉक्टर कार में CNG ब्लास्ट होने का दावा कर रहा था। हालांकि जांच में यह बात पूरी तरह झूठी निकली। क्योंकि जांच में पता चला कि CNG के टैंक में गैस थी ही नहीं और डॉक्टर पिछले दो दिनों से पेट्रोल का उपयोग कर रहा था। आरोपी द्वारा सीसीटीवी फुटेज डिलीट करना और बार-बार बयान बदलने की वजह से भी वह पुलिस जांच के घेरे में आ गया। आरोपी डॉक्टर और दो सहयोगी गिरफ्तारपुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी डॉक्टर नीलेश कुर्मी सहित उसके सहयोगी रामकृष्ण कुर्मी और शुभम कुर्मी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी डॉक्टर ने इस अपराध में शामिल होने के लिए सहयोगियों को दो-दो लाख रुपए का लालच दिया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
US में आंशिक शटडाउन के कारण 450 अधिकारियों ने दिया इस्तीफा… एयरपोर्ट पर लगी लंबी कतारें

वाशिंगटन। अमेरिका (America) में आंशिक सरकारी शटडाउन (Partial Government Shutdown) शुरू होने के बाद से अब तक 450 से अधिक परिवहन सुरक्षा प्रशासन (TSA) अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है। वेतन न मिलने की स्थिति में कर्मचारियों की अनुपस्थिति बढ़ने से अमेरिकी हवाई अड्डों (American Airports) पर लंबी कतारें लग गई हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने इस संकट से निपटने के लिए आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) अधिकारियों को एयरपोर्ट सुरक्षा ड्यूटी पर लगाने का आदेश दिया है, जिससे कुछ सांसदों में चिंता व्यक्त की जा रही है। सीनेटर गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के बजट गतिरोध को खत्म करने के लिए एक प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं। इस समझौते में विभाग के अधिकांश कार्यों के लिए धन मुहैया कराने का प्रावधान है, जिसमें टीएसए के हवाई अड्डा कर्मचारियों को वेतन देना भी शामिल है। हालांकि, विवाद का मुख्य मुद्दा रहे अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICEA) के निष्कासन अभियानों को इस फंडिंग से बाहर रखा गया है। डीएचएस की देखरेख अब ओक्लाहोमा के सीनेटर मार्कवेन मुलिन कर रहे हैं, जिनके नामांकन को सीनेट ने सोमवार को 54-45 के मतभेद से मंजूरी दे दी। मुलिन ने खुद को स्थिर नेतृत्वकर्ता के रूप में पेश करते हुए कहा है कि विभाग को सुर्खियों से बाहर निकालना उनका प्रमुख लक्ष्य होगा। शिकागो के ओ’हेयर एयरपोर्ट पर दिखे आईसीई एजेंट्समंगलवार को शिकागो के ओ’हेयर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षा चौकी के पास हरे रंग की सामरिक जैकेट पहने संघीय अधिकारी टीएसए एजेंटों के साथ काम करते दिखे। एक अधिकारी की जैकेट पर आईसीई कर्मी की पहचान थी, जबकि दूसरे पर ‘संघीय एजेंट’ का बैज लगा था। एयरपोर्ट के पांच टर्मिनलों में से एक पर एक्स-रे मशीन के पास ये अधिकारी टीएसए टीम के साथ खड़े थे। हालांकि, ओ’हेयर पर सुरक्षा व्यवस्था सामान्य रूप से चल रही थी और देरी के कोई बड़े संकेत नहीं थे। एसोसिएटेड प्रेस के फोटोग्राफर ने पांच एजेंटों को काली जैकेट में देखा, जो होमलैंड सिक्योरिटी अधिकारी लग रहे थे। ये एजेंट बाद में एक अलग टर्मिनल से होकर बाहर खड़ी गाड़ी में बैठ गए। शटडाउन के बाद टीएसए में भारी अनुपस्थितिडीएचएस के आंकड़ों के अनुसार, 14 फरवरी से शुरू हुए शटडाउन के बाद कम से कम 458 टीएसए अधिकारी पूरी तरह इस्तीफा दे चुके हैं। सोमवार को देशभर में टीएसए के लगभग 11 प्रतिशत यानी 3200 से अधिक कर्मचारी काम पर नहीं पहुंचे। कुछ प्रमुख हवाई अड्डों पर अनुपस्थिति दर तीन से चार गुना तक बढ़ गई…– ह्यूस्टन विलियम पी. हॉबी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा: 40%– अटलांटा हार्ट्सफील्ड-जैक्सन: 37%– ह्यूस्टन जॉर्ज बुश इंटरकॉन्टिनेंटल: 36%– न्यूयॉर्क जॉन एफ. कैनेडी: 34%– न्यू ऑरलियन्स लुई आर्मस्ट्रांग: 35%– बाल्टीमोर-वाशिंगटन: 30% रिपोर्ट के अनुसार, ह्यूस्टन जॉर्ज बुश एयरपोर्ट पर मंगलवार को सामान्य स्क्रीनिंग के लिए औसत प्रतीक्षा समय चार घंटे तक पहुंच गया। मियामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने भी कुछ चेकपॉइंट्स पर प्रायोरिटी लेन अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं। ह्यूस्टन जॉर्ज बुश इंटरकॉन्टिनेंटल एयरपोर्ट ने यात्रियों को चेतावनी दी है कि सुरक्षा लाइन में लगने से पहले बाथरूम का इस्तेमाल कर लें, क्योंकि कतारें मेट्रो सुरंग तक लंबी हो सकती हैं, जहां शौचालय या खाने-पीने की सुविधा नहीं है। न्यूयॉर्क के लागार्डिया, जेएफके और न्यू जर्सी के न्यूआर्क एयरपोर्ट पर यात्रियों को मंगलवार सुबह भी ऑनलाइन लाइव प्रतीक्षा समय नहीं दिख रहा था।
बाल झड़ने और डैंड्रफ की समस्या? गर्मियों में एलोवेरा बनेगा आपका उपाय

नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम बालों और स्कैल्प के लिए कई चुनौतियां लेकर आता है। तेज धूप, पसीना और धूल के कारण बाल कमजोर पड़ने लगते हैं, झड़ने लगते हैं और स्कैल्प में खुजली व डैंड्रफ की समस्या आम हो जाती है। ऐसे समय में शैंपू-कंडीशनर से ज्यादा असरदार और प्राकृतिक उपाय के रूप में एलोवेरा को माना जाता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के विशेषज्ञों के अनुसार, एलोवेरा आयुर्वेद का सबसे भरोसेमंद और प्राकृतिक विकल्प है। यह बालों और स्कैल्प की गहराई तक सफाई करता है, जड़ों को मजबूत बनाता है और बालों को सिरे तक स्वस्थ बनाए रखता है। एलोवेरा में मौजूद प्राकृतिक एंजाइम, विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स बालों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। एलोवेरा स्कैल्प पर जमा अतिरिक्त तेल को हटाता है, जिससे तैलीय बालों की समस्या कम होती है। यह बालों की जड़ों को पोषण देता है, टूटने-झड़ने से बचाता है और बालों को रिपेयर करने में मदद करता है। इसके एंटी-फंगल गुण डैंड्रफ और अन्य फंगल इंफेक्शन को रोकते हैं। साथ ही यह खुजली को शांत करता है और गर्मियों में पसीने से होने वाली जलन और इरिटेशन से तुरंत राहत देता है। एलोवेरा से बालों की देखभाल करना बेहद आसान है। इसके लिए ताजा एलोवेरा का जेल निकालकर सीधे स्कैल्प पर लगाएं और 30-40 मिनट बाद हल्के शैंपू से धो लें। सप्ताह में 2-3 बार एलोवेरा जेल में नारियल तेल मिलाकर सिर की मालिश करने से बालों की जड़ों को अतिरिक्त पोषण मिलता है और बाल मजबूत होते हैं। इसके अलावा, एलोवेरा जेल को नींबू के रस के साथ मिलाकर लगाने से डैंड्रफ और तैलीयता कम होती है। बालों में एलोवेरा जेल को रातभर लगाकर सुबह धोने से बाल मुलायम, चमकदार और स्वस्थ बनते हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित रूप से एलोवेरा का उपयोग करने से बालों की जड़ें मजबूत होती हैं, बालों का झड़ना कम होता है और स्कैल्प स्वस्थ रहता है। यह गर्मियों में केमिकल युक्त शैंपू के विकल्प के रूप में सबसे सुरक्षित और प्राकृतिक तरीका है। एलोवेरा न केवल बालों को पोषण देता है बल्कि स्कैल्प को ठंडक और राहत भी प्रदान करता है। गर्मियों में एलोवेरा का उपयोग बालों की लंबी उम्र, उनकी मजबूती और प्राकृतिक चमक बनाए रखने के लिए अत्यंत प्रभावी है। इसे घर पर आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है और यह बालों की देखभाल को सरल, सुरक्षित और प्राकृतिक बनाता है। इस प्रकार, गर्मियों में बालों और स्कैल्प की पूरी देखभाल के लिए शैंपू-कंडीशनर की जगह एलोवेरा अपनाना न केवल फायदेमंद है बल्कि आयुर्वेदिक दृष्टि से भी यह अत्यंत प्रभावशाली उपाय है।
अंकुरित अनाज: सही तरीका और सही व्यक्ति, नहीं तो हो सकता है नुकसान

नई दिल्ली । प्रोटीन और फाइबर शरीर के लिए ऊर्जा, ताकत और मांसपेशियों के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, रोजमर्रा के आहार में इनकी पर्याप्त मात्रा शामिल करना अक्सर मुश्किल होता है। ऐसे में लोग अंकुरित अनाज यानी स्प्राउट्स का सहारा लेते हैं, क्योंकि यह पोषण का एक प्राकृतिक और समृद्ध स्रोत माना जाता है। लेकिन आयुर्वेद और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार अंकुरित आहार का सही सेवन और सही व्यक्ति के लिए ही लाभकारी होता है। अंकुरित अनाज कई तरह से शरीर को फायदा पहुंचाते हैं। इनमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स की पर्याप्त मात्रा होती है, जो शरीर की ऊर्जा बढ़ाने, मांसपेशियों को मजबूत करने और कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होती है। लेकिन यदि इसे सही तरीके से नहीं लिया जाए तो यह पाचन संबंधी समस्याओं का कारण भी बन सकता है। आयुर्वेद के अनुसार अंकुरित अनाज पचने में थोड़ा भारी होता है और अधिक सेवन से वात दोष और गैस की समस्या बढ़ सकती है। इससे शरीर में रूखापन बढ़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि स्प्राउट्स को हमेशा हल्का पकाकर, घी या तेल के साथ और सीमित मात्रा में ही लिया जाए। ऐसा करने से यह शरीर को ताकत देने के साथ पाचन को भी संतुलित रखता है। विशेष रूप से जिन लोगों का पाचन मंद है और कब्ज की समस्या रहती है, उन्हें अंकुरित आहार से बचना चाहिए। पाचन मंद होने पर अंकुरित अनाज शरीर में ठीक से पच नहीं पाता और पोषण की जगह शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा हो सकते हैं। इसी कारण बच्चे और बुजुर्गों को भी अंकुरित अनाज देने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इन उम्र में पाचन सबसे कमजोर होता है। इसके अलावा वात प्रवृत्ति वाले लोग भी इस आहार का सेवन सीमित मात्रा में ही करें। आयुर्वेद में वात दोष को बढ़ाने वाले आहार से बचने की सलाह दी जाती है, और अंकुरित अनाज वात में वृद्धि कर सकता है। इसलिए इसे हल्का पकाकर, घी या तेल के साथ, और उचित मात्रा में लेना ही फायदेमंद होता है। अंकुरित अनाज का सेवन करते समय कुछ विशेष उपाय भी ध्यान में रखने चाहिए। सबसे पहले इसे कच्चा खाने से बचें। अंकुरित अनाज को हल्का उबालकर या घी/तेल में पकाकर ही खाना चाहिए। इसके अलावा अंकुरित अनाज को तुरंत ही सेवन करना चाहिए। ज्यादा लंबे समय तक अंकुरित रहने पर इसके पोषक तत्वों पर असर पड़ सकता है। इस प्रकार, अंकुरित अनाज का सेवन शरीर के लिए लाभकारी है, लेकिन केवल सही व्यक्ति और सही तरीके से ही। नियमित रूप से नियंत्रित मात्रा में और हल्का पकाकर सेवन करने से यह ऊर्जा, ताकत और पाचन दोनों में सुधार करता है। वहीं, गलत तरीके या अधिक मात्रा में लेने पर यह पाचन और वात दोष जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए स्वास्थ्य और आयुर्वेदिक दृष्टि से स्प्राउट्स को संतुलित, समय पर और विधिपूर्वक ही आहार में शामिल करना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।
महाअष्टमी पर नवार्ण मंत्र जाप से मिलेगा विशेष फल, पूरी होंगी मनोकामनाएं

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दौरान प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इनमें महाअष्टमी का विशेष महत्व होता है, जो इस बार 26 मार्च को पड़ रही है। इस दिन मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा की जाती है और कन्या पूजन का भी विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन की गई पूजा, साधना या मंत्र जाप का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। नवरात्रि को देवी भक्ति और साधना का सबसे श्रेष्ठ समय माना गया है। इस दौरान श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं। विशेष रूप से महाअष्टमी का दिन साधना और मंत्र जाप के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इसी संदर्भ में नवार्ण मंत्र का विशेष महत्व बताया गया है। यह मंत्र नवार्ण मंत्र यानी ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे के रूप में जाना जाता है। इस मंत्र को दुर्गा साधना का अत्यंत प्रभावशाली और सिद्ध मंत्र माना गया है। नवार्ण शब्द में नव का अर्थ नौ और अर्ण का अर्थ अक्षर होता है, जो इस मंत्र के नौ अक्षरों को दर्शाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र के प्रत्येक अक्षर में देवी शक्ति का विशेष स्वरूप समाहित होता है। इसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ-साथ महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की शक्तियों से भी जोड़ा जाता है। यही कारण है कि इस मंत्र का जाप करने से साधक को मानसिक, आध्यात्मिक और भौतिक स्तर पर लाभ प्राप्त होता है। माना जाता है कि नवार्ण मंत्र का नियमित जाप करने से व्यक्ति के भीतर साहस और आत्मविश्वास का संचार होता है, भय और नकारात्मकता दूर होती है तथा जीवन में शांति और संतुलन बना रहता है। इसके साथ ही यह मंत्र तरक्की, सुख-समृद्धि और पारिवारिक सुख के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। विद्यार्थियों के लिए यह मंत्र एकाग्रता और सफलता में सहायक होता है, वहीं करियर और व्यवसाय में भी सकारात्मक परिणाम देता है। महाअष्टमी के दिन इस मंत्र का जाप विशेष रूप से फलदायी माना गया है। विधि के अनुसार प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर माता की पूजा करें और उसके बाद 108 दानों की माला से कम से कम तीन माला जाप करें। जाप करते समय मन को शांत, एकाग्र और श्रद्धा से पूर्ण रखना आवश्यक है। धार्मिक दृष्टि से यह भी माना जाता है कि यदि इस दिन नियमपूर्वक और सच्चे मन से मंत्र जाप किया जाए तो मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। इस प्रकार महाअष्टमी का दिन केवल पूजा-अर्चना का ही नहीं बल्कि आत्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का भी विशेष अवसर है। नवार्ण मंत्र की साधना के माध्यम से श्रद्धालु मां दुर्गा की कृपा प्राप्त कर अपने जीवन को सुख, शांति और समृद्धि की दिशा में अग्रसर कर सकते हैं।