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T20 सीरीज का रोमांच खत्म, साउथ अफ्रीका ने NZ को पांचवें मैच में दी करारी शिकस्त

नई दिल्ली। साउथ अफ्रीका की नेशनल क्रिकेट टीम ने हेग ओवल में खेले गए पांचवें और निर्णायक टी20 मुकाबले में न्यूजीलैंड की नेशनल क्रिकेट टीम को 33 रन से हराकर सीरीज 3-2 से अपने नाम कर ली। न्यूजीलैंड को 188 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य मिला था, लेकिन दबाव और साउथ अफ्रीका की कैसी हुई गेंदबाजी के सामने कीवी टीम का टॉप ऑर्डर कमजोर साबित हुआ। 20 ओवर में न्यूजीलैंड ने 8 विकेट खोकर केवल 154 रन ही बनाए, जिससे सीरीज साउथ अफ्रीका के पक्ष में खत्म हुई। न्यूजीलैंड के लिए बेवोन जैकब्स ने सबसे ज्यादा 36 रन बनाए, जिसमें 19 गेंदों पर 3 विकेट और 2 चौके शामिल थे। इसके अलावा टॉम रॉबिनसन ने 25 और डेन क्लिवर ने 22 रन की पारी खेली। कप्तान जिमी निशाम ने 24 रन जोड़े, लेकिन यह प्रयास टीम की हार रोकने के लिए काफी नहीं था। दक्षिण अफ्रीका की पारी की शुरुआत में टोनी डे जॉर्जी 12 रन बनाकर 21 के स्कोर पर आउट हुए, लेकिन वियान मुल्दर और रूबिन हरमन ने दूसरे विकेट के लिए 55 रन की साझेदारी कर टीम को बढ़त दी। मुल्दर 31 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद कॉनर एस्टरहुइजन और रूबिन हरमन ने तीसरे विकेट के लिए 49 रन जोड़े। हरमन 39 रन बनाकर आउट हुए। अंतिम चरण में एस्टरहुइजन और डियान फॉरेस्टर ने चौथे विकेट के लिए 27 गेंदों में 61 रन की तूफानी साझेदारी की। एस्टरहुइजन ने 33 गेंदों में 75 रन बनाए, जिसमें 6 विकेट और 5 चौके शामिल थे। फॉरेस्टर 21 रन बनाकर नाबाद रहे। दक्षिण अफ्रीका ने 4 विकेट पर 187 रन का मजबूत स्कोर बनाया। गेंदबाजी में दक्षिण अफ्रीका के लिए गेराल्ड कोएट्जी, ओटनिल बार्टमैन और वियान मुल्दर ने 2-2 विकेट लिए, जबकि कप्तान केशव महाराज ने 1 विकेट हासिल किया। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर दक्षिण अफ्रीका ने न्यूजीलैंड की धरती पर पहली बार टी20 सीरीज अपने नाम की।

सपोर्टिंग किरदारों से तंग आए समीर सोनी बोले अब या तो हीरो बनूंगा या एक्टिंग छोड़ दूंगा

नई दिल्ली:बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार हैं जो सालों तक मेहनत करने के बावजूद वो मुकाम हासिल नहीं कर पाते जिसके वे हकदार होते हैं। उन्हीं में से एक नाम है समीर सोनी का जिन्होंने करीब 25 साल तक इंडस्ट्री में काम किया लेकिन उन्हें हमेशा सपोर्टिंग रोल में ही देखा गया। अब इतने लंबे इंतजार के बाद उन्होंने अपने करियर को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। हाल ही में समीर सोनी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए साफ तौर पर कहा कि अब वह सपोर्टिंग किरदार नहीं निभाना चाहते। उन्होंने लिखा कि 25 साल तक इंतजार करने के बाद अब समय आ गया है कि उन्हें लीड रोल मिले। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें मुख्य भूमिका नहीं मिलती है तो वह एक्टिंग छोड़ने तक का फैसला कर सकते हैं। उनके इस बयान ने फैंस और इंडस्ट्री दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। समीर सोनी का यह फैसला सिर्फ एक नाराजगी नहीं बल्कि उनके लंबे संघर्ष और अंदरूनी भावनाओं का परिणाम माना जा रहा है। उन्होंने अपने करियर में बेटे भाई पति और पिता जैसे कई किरदार निभाए लेकिन कभी भी कहानी के केंद्र में नहीं रहे। अब वह खुद को एक लीड एक्टर के रूप में साबित करना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने यह सख्त रुख अपनाया है। अगर उनके करियर पर नजर डालें तो उन्होंने टीवी से अपनी पहचान बनाई। समंदर जस्सी जैसी कोई नहीं और परिचय नई जिंदगी के सपनों का जैसे शोज में उन्होंने शानदार काम किया और घर घर में पहचाने गए। इसके बाद उन्होंने फिल्म चाइना गेट से बॉलीवुड में कदम रखा। हालांकि फिल्मों में भी उन्हें ज्यादातर सपोर्टिंग रोल ही मिले। फिल्म बागबान में अमिताभ बच्चन के बेटे के रूप में उनकी भूमिका को काफी सराहा गया और यह उनके करियर का एक अहम मोड़ साबित हुआ। इसके अलावा उन्होंने फैशन विवाह और स्टूडेंट ऑफ द ईयर जैसी फिल्मों में भी काम किया और अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई। साल 2010 में उन्होंने बिग बॉस 4 में हिस्सा लेकर भी दर्शकों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनकी पर्सनल लाइफ भी काफी दिलचस्प रही है। उनकी शादी नीलम कोठारी से हुई है जो 80 और 90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री रही हैं। दोनों की लव स्टोरी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। दोनों पहले अपने अपने रिश्तों में असफल रहे लेकिन बाद में एक दूसरे में सच्चा प्यार मिला और उन्होंने शादी कर ली। समीर सोनी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इंडस्ट्री में कंटेंट और किरदारों की विविधता पर लगातार चर्चा हो रही है। उनका यह कदम यह भी दिखाता है कि अब कलाकार सिर्फ काम करने के लिए नहीं बल्कि सही पहचान और सम्मान के लिए भी आवाज उठा रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उनका यह फैसला उनके करियर को नई दिशा देता है या वह सच में एक्टिंग को अलविदा कह देते हैं।

सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के 5 दिन बाद भाजपा विधायक गिरफ्तार, पटियाला पुलिस ने दो दिन के ऑपरेशन में दबोचा

शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से आम आदमी पार्टी के विधायक हरमीत पठानमाजरा को दो साल पुराने रेप केस में फरार चलने के छह महीने बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। पंजाब के पटियाला पुलिस की टीम ने यह कार्रवाई ग्वालियर-शिवपुरी बायपास पर की। हरमीत पठानमाजरा पंजाब की सनौर सीट से पहली बार विधायक बने थे और उन्हें पहले भगोड़ा घोषित किया जा चुका था। सूत्रों के अनुसार आरोपी विधायक पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए ऑस्ट्रेलिया भाग गए थे। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए भारत लौटने के पांच दिन बाद पटियाला पुलिस ने दो दिन के लगातार ऑपरेशन के बाद उन्हें दबोच लिया। गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ तीन साथी भी हिरासत में लिए गए। सभी आरोपियों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पंजाब ले जाया गया। शिवपुरी एसपी अमन सिंह राठौड़ ने बताया कि इस मामले में शिवपुरी पुलिस को कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई थी। पटियाला पुलिस ने यह कार्रवाई पूरी तरह सुनियोजित तरीके से की थी और दो दिन की ट्रैकिंग के बाद विधायक को गिरफ्तार कर सीधे पंजाब ले गई। हरमीत पठानमाजरा के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर भी जारी किया गया था। उनके खिलाफ पहले कोर्ट द्वारा भगोड़ा घोषित किया गया था। पटियाला एसएसपी वरुण शर्मा ने बताया कि क्योंकि विधायक भगोड़ा घोषित थे इसलिए स्थानीय पुलिस को कार्रवाई की जानकारी देना आवश्यक नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर विधायक भगोड़ा घोषित नहीं होते तो स्थानीय पुलिस को अवश्य सूचित किया जाता। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के पांच दिन बाद ही की गई थी। पटियाला पुलिस ने दो दिन की निगरानी के बाद उन्हें ग्वालियर से शिवपुरी की ओर आने वाले बायपास पर दबोच लिया। उनके साथ मौजूद तीन साथियों को भी हिरासत में ले लिया गया। अब सभी आरोपियों को पंजाब ले जाकर मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस गिरफ्तारी ने विधायकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच भगोड़ा मामलों की संवेदनशीलता को फिर से उजागर किया है। पुलिस ने यह साफ किया कि आरोपियों के भागने और विदेश जाने की स्थिति में राष्ट्रीय और राज्य स्तर की कार्रवाई एक साथ की जा सकती है। इस प्रकार की सुनियोजित कार्रवाई कानून व्यवस्था के मजबूत संकेत के रूप में देखी जा रही है। शिवपुरी से यह गिरफ्तारी यह भी दिखाती है कि पुलिस टीमें राज्य की सीमाओं के पार जाकर भी अभियुक्तों को पकड़ने में सक्षम हैं। मामले की कानूनी प्रक्रिया अब पंजाब में चल रही है और सभी आरोपियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

क्रिकेट में नाम किया रोशन! केदार जाधव ने वनडे में हासिल की बड़ी उपलब्धि

नई दिल्ली। केदार जाधव एक ऐसे प्रतिभाशाली ऑलराउंडर रहे जिन्होंने अपने सीमित मौके का पूरा फायदा उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई। दाएं हाथ के मध्यक्रम के बल्लेबाज और दाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज के रूप में खेलते हुए जाधव का जन्म 26 मार्च 1985 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ था। उनका अनोखा गेंदबाजी एक्शन और आक्रामक बल्लेबाजी स्टाइल उन्हें भारतीय टीम में खास बनाता था। घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें 29 साल की उम्र में पहली बार भारतीय टीम में अवसर मिला। उन्होंने नवंबर 2014 में वनडे और जुलाई 2015 में टी20 में डेब्यू किया, जबकि टेस्ट में खेलने का मौका उन्हें कभी नहीं मिला। वनडे फॉर्मेट में शानदार प्रदर्शन केदार जाधव को टी20 में कम मौके मिले, लेकिन वनडे में उन्होंने 73 मैचों में अपनी छाप छोड़ी। इस दौरान उन्होंने 52 पारियों में 1,389 रन बनाए, औसत 42.09 और स्ट्राइक रेट 101.60 के साथ 2 शतक और 6 अर्धशतक लगाए। उनका सर्वोच्च स्कोर इंग्लैंड के खिलाफ 120 रन रहा, जिसमें 76 गेंदों में 12 चौके और 4 छक्के शामिल थे। इस पारी के दम पर भारत ने 351 रन का लक्ष्य 11 गेंद पहले 3 विकेट से हासिल किया। जाधव वनडे में भारतीय टीम के पहले खिलाड़ी हैं जिन्होंने छह नंबर या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए 2 शतक बनाए। इसके अलावा उन्होंने वनडे में 27 विकेट भी लिए। टी20 और आईपीएल में योगदान जाधव ने 9 T20 मैच खेले और 6 पारियों में 1 अर्धशतक की मदद से 122 रन बनाए। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड में 8 फरवरी 2020 को हुआ। आईपीएल में जाधव ने दिल्ली डेयरडेविल्स, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, चेन्नई सुपर किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हुए 95 मैचों की 81 पारियों में 1,208 रन बनाए और 4 अर्धशतक जड़े। उनका आखिरी आईपीएल सीजन 2023 में रहा। क्रिकेट से संन्यास और नई दिशा 3 जून 2024 को केदार जाधव ने क्रिकेट को अलविदा कहा। संन्यास लेने के बाद वह कमेंट्री और क्रिकेट विश्लेषण के क्षेत्र में करियर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। उनके करियर ने सीमित अवसरों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिचय दिया और युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।

ल्प लॉ के फाइनल ईयर में पहली फिल्म 700 रुपए फीस से शुरू हुई फारूख शेख की प्रेरक कहानी

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं जिन्होंने अपने अभिनय और सादगी से एक अलग पहचान बनाई उन्हीं में से एक थे फारूख शेख जिनका जन्म 25 मार्च 1948 को गुजरात के सूरत जिले के अमरोली में हुआ था अपने करियर की शुरुआत उन्होंने एक ऐसे समय में की जब सिनेमा में समानांतर सिनेमा की एक नई धारा आकार ले रही थी और फारूख शेख इस धारा के प्रमुख चेहरों में से एक बनकर उभरे फारूख शेख की शिक्षा मुंबई में हुई उन्होंने सेंट मैरी स्कूल से स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद सेंट जेवियर कॉलेज में दाखिला लिया और फिर सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की डिग्री प्राप्त की यह दिलचस्प है कि वे लॉ के फाइनल ईयर में पढ़ रहे थे जब उन्हें अपनी पहली फिल्म में काम करने का मौका मिला उनकी पहली फिल्म गर्म हवाथी जिसे निर्देशक एमएस सथ्यू ने बनाया था इस फिल्म को भारतीय न्यू वेव सिनेमा की एक महत्वपूर्ण फिल्म माना जाता है इस्मत चुगताई की कहानी पर आधारित यह फिल्म विभाजन के बाद के दौर में एक मुस्लिम परिवार के संघर्ष और पहचान के संकट को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाती है इस फिल्म में उनके साथ बलराज साहनी जैसे दिग्गज कलाकार थे और इस फिल्म के लिए उन्हें मात्र सात सौ पचास रुपये की फीस मिली थी गर्म हवाके बाद फारूख शेख ने पीछे मुड़कर नहीं देखा उन्होंने शतरंज के खिलाड़ीजैसी फिल्म में सत्यजीत रे के निर्देशन में काम किया जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई इसके बाद गमनमें उनका अभिनय बेहद प्रभावशाली रहा जिसमें उन्होंने एक ऐसे टैक्सी ड्राइवर की भूमिका निभाई जो मुंबई में संघर्ष करता है और अंततः अपने घर वापस नहीं लौट पाता यह किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है फारूख शेख केवल एक अभिनेता ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन एंकर भी थे उन्होंने रेडियो पर क्विज शो होस्ट किए और दूरदर्शन के कार्यक्रम युवा दर्शनऔर यंग वर्ल्डके माध्यम से घर घर में लोकप्रियता हासिल की उनकी मधुर आवाज और सादगी भरा अंदाज दर्शकों को बेहद पसंद आता था उनकी फिल्मों में नूरीचश्मे बुद्दूरकथासाथ साथकिसी से न कहनारंग बिरंगीएक पलअंजुमनफासलेऔर बाजारजैसी कई यादगार फिल्में शामिल हैं इनमें चश्मे बुद्दूरको खासतौर पर दर्शकों ने बहुत पसंद किया और यह उनकी सबसे लोकप्रिय फिल्मों में से एक बन गई फारूख शेख का फिल्मी करियर 1977 से 1989 तक सक्रिय रहा इसके बाद उन्होंने टेलीविजन में काम करना शुरू किया और 1988 से 2000 तक टीवी पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई बाद में 2008 में उन्होंने एक बार फिर फिल्मों में वापसी की और लाहौरये जवानी है दीवानीशंघाईऔर क्लब 60जैसी फिल्मों में काम करके अपनी प्रतिभा का परिचय दिया अपने पूरे करियर में फारूख शेख ने जिस तरह के किरदार निभाए वे यथार्थ के बेहद करीब थे और उन्होंने अपने अभिनय से सिनेमा को एक नई दिशा दी 28 दिसंबर 2013 को दुबई में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया लेकिन उनके अभिनय और सादगी की छाप आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में जिंदा है

पूर्व नपा अध्यक्ष पर हमला, पिपलौदा में प्रदर्शन और सड़क जाम, पुलिस ने दर्ज की FIR

रतलाम । रतलाम जिले के पिपलौदा में मंगलवार को सड़क पर बैठकर चक्काजाम करने के मामले में पुलिस ने करणी सेना परिवार के प्रमुख जीवनसिंह शेरपुर सहित पांच नामजद और लगभग 30 से 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह प्रदर्शन पिपलौदा नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष श्याम बिहारी पटेल पर 19 मार्च को हुए चाकू हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर किया गया था। पूर्व नपा अध्यक्ष पर हुए हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी न होने के विरोध में समर्थकों, समाजजनों और करणी सेना के लोगों ने नगर बंद का आव्हान किया। मंगलवार को दोपहर तक पिपलौदा बंद रहा और नाका रोड पर प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया, जिससे राहगीरों और स्थानीय व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने दावा किया कि आरोपियों को गिरफ्तार करने की कार्रवाई की जा रही है। लगभग दो घंटे बाद यह चक्काजाम समाप्त हुआ। पुलिस ने पिपलौदा थाना में दर्ज एफआईआर में ग्राम नवेली निवासी दिलीप सिंह की रिपोर्ट के आधार पर पांच नामजद और करीब 30 से 40 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। नामजद आरोपियों में करणी सेना परिवार प्रमुख जीवनसिंह शेरपुर, हनी कटारिया, राहुल खारोल, असलम मेव और बसंतीलाल राठौर शामिल हैं। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 126(2) और 3(5) बीएनएस (BNS) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले की पृष्ठभूमि 19 मार्च की रात की घटना है जब पिपलौदा नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष श्याम बिहारी पटेल पर चाकू से हमला किया गया था। पुलिस ने उस समय जितेंद्र राठौर उर्फ जीतू अन्ना और उसके साथी के खिलाफ जानलेवा हमले का केस दर्ज किया था। हालांकि, हमले के कई दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी। इसी गिरफ्तारी की मांग को लेकर समर्थक और करणी सेना ने प्रदर्शन किया। पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान बनाए गए फोटो और वीडियो के आधार पर अज्ञात आरोपियों की पहचान कर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। पिपलौदा थाना प्रभारी रमेश कोली ने बताया कि पांच नामजद और अज्ञात लगभग 40 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है और वीडियो व तस्वीरों से शिनाख्त की जा रही है। इस घटना ने पिपलौदा में सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था की संवेदनशीलता को फिर से उजागर किया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि सभी आरोपियों को जल्द ही न्यायालय में पेश किया जाएगा और मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है। इस मामले में स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने भी आपत्ति जताई कि चक्काजाम से उनकी रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ा। रतलाम के पिपलौदा में यह मामला न केवल स्थानीय राजनीति और सामाजिक संगठनों की सक्रियता को दिखाता है बल्कि कानून के उल्लंघन और प्रदर्शन की सीमा पर भी सवाल उठाता है। अब पुलिस की सक्रियता और सबूतों के आधार पर अज्ञात आरोपियों की पहचान इस मामले के अगले कदम को तय करेगी।

सौरभ शुक्ला बोले जिंदगी में परफेक्शन नहीं अपूर्णता में ही छुपी है असली ताकत

नई दिल्ली :अभिनेता और फिल्ममेकर सौरभ शुक्ला ने जीवन और रिश्तों को लेकर एक गहरा और विचारोत्तेजक दृष्टिकोण साझा किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस दुनिया में परफेक्शन जैसी कोई चीज नहीं होती और इंसान स्वभाव से अपूर्ण होता है। उनके अनुसार यही अपूर्णता जीवन को आगे बढ़ने का अवसर देती है और इसमें सुधार की हमेशा गुंजाइश बनी रहती है। आईएएनएस से बातचीत में सौरभ शुक्ला ने कहा कि अगर कोई चीज पूरी तरह से परफेक्ट हो जाए तो उसमें आगे बढ़ने या कुछ नया सीखने की संभावना समाप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि अपूर्णता ही वह तत्व है जो इंसान को लगातार बेहतर बनने के लिए प्रेरित करता है। उनके मुताबिक परफेक्शन भले ही सुनने में आकर्षक लगे, लेकिन वास्तव में यह एक स्थिर और बोरिंग स्थिति है, जबकि अपूर्णता जीवन को गतिशील बनाए रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि इंसान अक्सर अपने जीवन में परफेक्ट रिश्तों या परफेक्ट शादी की तलाश करता है, लेकिन यह एक भ्रम है। वास्तविकता यह है कि हर रिश्ता अपूर्ण होता है और उसकी असली खूबसूरती भी इन्हीं खामियों को स्वीकार करने में है। जब हम अपने साथी की कमियों को समझते हैं और उन्हें स्वीकार करते हैं, तभी एक मजबूत और गहरा रिश्ता बनता है। सौरभ शुक्ला ने रिश्तों में ईमानदारी को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि किसी भी रिश्ते में पारदर्शिता और सच्चाई का होना बेहद जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति अपने रिश्ते में सच को छुपाता है, तो भले ही वह बात उस समय संभल जाए, लेकिन भविष्य में यह बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि जब सच्चाई सामने आती है तो सबसे ज्यादा दर्द इस बात का होता है कि आपको पहले ही यह नहीं बताया गया। उन्होंने आगे कहा कि रिश्तों में झूठ या छुपाव धीरे धीरे भरोसे को कमजोर करता है। इससे शक पैदा होता है और व्यक्ति हर बात पर संदेह करने लगता है। ऐसे में रिश्ता कमजोर हो जाता है और उसकी नींव हिल जाती है। सौरभ शुक्ला ने कहा कि रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए ईमानदारी और खुलापन सबसे जरूरी तत्व हैं। उन्होंने एक दार्शनिक दृष्टिकोण रखते हुए यह भी कहा कि इंसान के नजरिए से इस जीवन में एक ही चीज को पूरी तरह परफेक्ट माना जा सकता है और वह है मृत्यु। उनके अनुसार जीवन के बाद क्या होता है, यह किसी को नहीं पता, लेकिन जीवन में अपूर्णता ही हमें आगे बढ़ने और सीखने का अवसर देती है। सौरभ शुक्ला ने अपने फिल्मी करियर का जिक्र करते हुए भी कहा कि उनकी हाल ही में रिलीज फिल्म में भी यही थीम देखने को मिलती है, जहां रिश्तों में छिपे सच और उससे पैदा होने वाले बदलावों को दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि जीवन की तरह फिल्मों में भी असली कहानी तब शुरू होती है जब किरदार अपनी कमजोरियों और सच्चाइयों का सामना करते हैं। उनके विचार जीवन के इस सरल लेकिन गहरे सत्य को उजागर करते हैं कि परफेक्शन की तलाश छोड़कर जब हम अपनी अपूर्णताओं को अपनाते हैं, तभी जीवन में असली संतुलन और संतोष संभव होता है।

पुजारी परिवार में हलचल, पत्नी ने लगाए गंभीर दहेज प्रताड़ना और उत्पीड़न के आरोप

इंदौर । इंदौर के खजराना गणेश मंदिर के पुजारी पुनीत भट्ट के परिवार का पारिवारिक विवाद अब सार्वजनिक हो गया है। पुजारी की दूसरी पत्नी इंदिरा भट्ट ने अपने पति और ससुराल पर दहेज प्रताड़ना, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न, घर से निकालने की साजिश और तलाक के लिए धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इंदिरा का कहना है कि उनके खिलाफ ऑपरेशन एग्जिट चलाया गया और उनके पति ने इस मामले में सीधे उनका विरोध किया। इंदिरा ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उनका रिश्ता सामान्य प्रक्रिया से नहीं बल्कि जल्दबाजी में तय हुआ। उनकी पहली मुलाकात से लेकर शादी तक का समय महज 17 दिन का था। वह उस समय वर्किंग महिला थीं और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि शादी की सारी व्यवस्थाएं उनके पति संभाल लेंगे। इंदिरा कहती हैं कि शादी से पहले उज्जैन में पांच घंटे की मुलाकात और बातचीत के बाद शादी हुई और उन्हें लगा कि स्वयं खजराना गणेश जी की कृपा उनके ऊपर है। हालात तब बदल गए जब पुनीत भट्ट के दत्तक पुत्र उदित की पत्नी गर्भवती हुई। इंदिरा का आरोप है कि संतान की चाह में ही उन्हें शादी के लिए चुना गया था। जुलाई 2025 में यह पुष्टि होने के बाद उनकी अहमियत परिवार के लिए खत्म हो गई। इंदिरा ने बताया कि उनके खिलाफ FIR उसी समय दर्ज करवाई गई जब बेटे के घर गर्भवती पत्नी के पेट में लात मारने का झूठा आरोप लगाया गया। 19 सितंबर 2025 को पुनीत भट्ट ने उन्हें आश्वासन दिया कि मामला संभाल लिया जाएगा। लेकिन अगले ही दिन घर पर ताला लगा हुआ मिला और उनके जेवर और नकद राशि भी ननद ने हड़प ली। कहानी का नाटकीय मोड़ तब आया जब 29 दिसंबर को इंदिरा कार से जा रही थीं और पुनीत भट्ट ने बीच सड़क में उनकी गाड़ी रोककर तलाक की धमकी दी। इंदिरा ने बताया कि उनके पति ने माफी मांगी और कहा कि बस आपसी सहमति से तलाक दे दो। दूसरी ओर पुनीत भट्ट ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह एक गहरी साजिश है और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए बनाया गया मामला है। पुनीत ने बताया कि उनकी पहली पत्नी का निधन 2020 में हुआ और यह दूसरी शादी देवास निवासी रिश्तेदार के माध्यम से हुई। उन्होंने दावा किया कि शादी के बाद इंदिरा ने उनके साथ “साइकोलॉजिकल गेम” खेलना शुरू कर दिया और तलाक की पहल खुद इंदिरा ने की थी। एसीपी खजराना कुंदन मंडलोई ने बताया कि जनसुनवाई में शिकायत प्राप्त हुई है जिसमें दावा किया गया कि पुनीत भट्ट ने दहेज के रूप में फॉर्च्यूनर कार और करीब एक करोड़ रुपये की मांग की थी। वहीं, इस महिला के खिलाफ पहले भी मारपीट का आरोप दर्ज किया जा चुका है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और सभी पक्षों के बयानों के आधार पर कार्रवाई करेगी। इस तरह खजराना मंदिर के पुजारी परिवार का विवाद अब सार्वजनिक हो गया है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

GWALIOR FIRE NEWS: ग्वालियर के केमिकल गोदाम में लगी आग; सर्जिकल वेस्ट से भड़की आग, दमकल ने एक घंटे में पाया काबू!

GWALIOR FIRE CASE

HIGHLIGHTS: राजश्री अपार्टमेंट में केमिकल गोदाम से आग भड़की 20 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला गया दमकल की 3 गाड़ियां और 1 केमिकल फॉर्म गाड़ी लगी आग बुझाने में प्रारंभिक आशंका शॉट सर्किट से आग लगी अपार्टमेंट में रखे गैस सिलेंडर और स्याही के ड्रम सुरक्षित बाहर निकाले गए GWALIOR FIRE NEWS: मध्यप्रदेश। ग्वालियर के खुर्दे वाला मोहल्ला स्थित राजश्री अपार्टमेंट में सुबह 11 बजे आग लग गई। बता दें कि आग अपार्टमेंट के ग्राउंड फ्लोर में स्थित केमिकल गोदाम से शुरू होकर पहली मंजिल तक पहुंच गई। जिसके बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने तुरंत अपार्टमेंट में रहने वाले लगभग 20 परिवारों को बाहर निकाला और घरों में रखे गैस सिलेंडर बाहर कर लिए गए। दमकल की तीन गाड़ियों ने पानी और एक गाड़ी केमिकल फॉर्म की मदद से करीब एक घंटे में आग पर काबू पाया। 7 महीने से फरार AAP विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा गिरफ्तार, रेप और धोखाधड़ी का आरोप आग लगने का कारण और नुकसान गोदाम में स्याही और सर्जिकल वेस्ट रखा गया था। प्रारंभिक आशंका है कि आग शॉट सर्किट से भड़की। स्थानीय लोगों ने पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग तेजी से फैल गई। अपार्टमेंट के संकरे रास्ते के कारण दमकल को पहुंचने में कठिनाई हुई, लेकिन समय रहते आग पर काबू पाया गया। Travel Tips: बिना देरी के निकल जाएं इन जगहों पर, सुंदर हरा -भरा दिखेगा नजारा रहवासियों की प्रतिक्रिया रहवासी लक्ष्मी राठौर ने बताया कि वे पूरी तरह फंस गए थे और बच्चों को एक-एक करके बाहर निकाला गया। रेशमा ने कहा कि यह स्थिति बेहद डरावनी थी और कई बार केमिकल गोदाम हटाने की मांग की गई, लेकिन कोई सुन नहीं पाया। गोदाम शिल्पा मेडिकल का बताया गया है। TV मार्केट में नया ट्रेंड-कम ग्रोथ के बावजूद QLED और बिग स्क्रीन का जलवा प्रशासन की कार्रवाई और राहत कार्य ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा कि आगजनी में लापरवाही सामने आई तो कार्रवाई होगी। उन्होंने पुष्टि की कि सभी परिवार सुरक्षित हैं और राहत कार्य जारी है। एसडीआरएफ की टीम घटना स्थल पर मौजूद है।

ममता के किले पर निशाना! नंदीग्राम से उठे Suvendu Adhikari की सियासी तैयारी

नई दिल्ली नंदीग्राम आंदोलन से उभरकर बड़े नेता बने सुवेंदु अधिकारी अब ममता बनर्जी के खिलाफ आक्रामक रुख में नज  आ रहे हैं। जानिए उनका पूरा राजनीतिक सफर, बड़े फैसले और हालिया विवाद।  पश्चिम बंगाल की राजनीति में सुवेंदु अधिकारी एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जिनकी पहचान संघर्ष, आंदोलन और बड़े राजनीतिक फैसलों से बनी है। नंदीग्राम आंदोलन से उभरकर राज्य की राजनीति में बड़ा चेहरा बने अधिकारी ने उसी जमीन पर अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी ममता बनर्जी को हराकर इतिहास रच दिया था। नंदीग्राम से शुरू हुआ सफरसाल 2007 में Nandigram में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ था। उस समय सुवेंदु अधिकारी Trinamool Congress के नेता थे और आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को संगठित किया और आंदोलन को मजबूत बनाया। यही आंदोलन उनके राजनीतिक करियर की नींव बना। 2021 विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से उन्होंने सीधे Mamata Banerjee को चुनौती दी। यह मुकाबला बेहद कांटे का रहा और पूरे देश की नजरें इस सीट पर टिकी रहीं। आखिरकार सुवेंदु अधिकारी ने मामूली अंतर से जीत हासिल की। यह जीत इसलिए खास थी क्योंकि ममता बनर्जी ने अपनी पारंपरिक सीट छोड़कर यहां से चुनाव लड़ा था। एक समय सुवेंदु अधिकारी Trinamool Congress के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे, लेकिन 2020 में उन्होंने पार्टी छोड़कर BJP का दामन थाम लिया। यह फैसला जोखिम भरा था, लेकिन इसी के बाद वह राज्य की राजनीति में एक मजबूत विपक्षी चेहरा बनकर उभरे। हालिया घटनाओं से बढ़ी नाराजगीहाल के दिनों में कई घटनाओं को लेकर सुवेंदु अधिकारी ने नाराजगी जताई है। जनवरी 2026 में पश्चिम मेदिनीपुर के चंद्रकोना में उनके काफिले पर हमला हुआ, जिसके बाद उन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाए। उन्होंने पुलिस पर भी निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया। इसके अलावा मार्च 2026 में नंदीग्राम में मूर्ति से छेड़छाड़ की घटना पर भी उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी और राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।पहले भी कूचबिहार की घटना को लेकर उन्होंने अपनी सुरक्षा पर खतरे की बात कही थी। सुवेंदु अधिकारी को आज बागी नेता और आक्रामक विपक्षी चेहरे के रूप में देखा जाता है। विधानसभा में उनके तीखे बयान और सरकार पर हमले अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। जमीनी नेता की पहचानउनका राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू हुआ है। नंदीग्राम आंदोलन के दौरान उन्होंने सीधे जनता के बीच रहकर काम किया, जिससे उनकी मजबूत पकड़ बनी। यही वजह है कि उन्हें आज भी एक “ग्रासरूट लीडर” माना जाता है। नंदीग्राम से शुरू हुआ Suvendu Adhikari का सफर उन्हें पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में ले आया। जहां एक ओर उन्होंने बड़े राजनीतिक दांव खेलकर अपनी पहचान बनाई, वहीं दूसरी ओर मौजूदा घटनाओं को लेकर उनकी नाराजगी यह दिखाती है कि राज्य की राजनीति में टकराव और सियासी गर्मी अभी भी बरकरार है।