महाअष्टमी पर पीएम मोदी का संदेश: मां महागौरी से मांगी सुख-समृद्धि की कामना

नई दिल्ली। जगज्जननी आदिशक्ति मां दुर्गा के पावन पर्व महाअष्टमी पर देशभर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा है। नवरात्रि के आठवें दिन मां के अष्टम स्वरूप मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और मां के आशीर्वाद की कामना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए मां महागौरी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि मां की दिव्य आभा हर किसी के जीवन में सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए। पीएम ने इस अवसर पर एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया, जिसमें मां से शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना की गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मां महागौरी की आराधना से जीवन में पवित्रता, आत्मसंयम और शक्ति का संचार होता है। उन्होंने कामना की कि मां की कृपा से सभी की इच्छाएं पूर्ण हों और जीवन में सुख, शांति और नई ऊर्जा आए। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संदेश में कहा कि महाअष्टमी शक्ति की उपासना का विशेष पर्व है। मां महागौरी का यह स्वरूप जीवन के अंधकार को दूर कर सात्त्विकता और सरलता का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कामना की कि मां की कृपा से हर घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास हो। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस पावन अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं और मां से सभी के जीवन में धन-वैभव, सुख-शांति और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। महाअष्टमी के दिन मां महागौरी की विशेष आराधना होती है, जिन्हें पवित्रता, शांति और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा, कन्या पूजन और भंडारों का आयोजन किया जाता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
ताला बाहर अंदर कारोबार जारी जेल में मालिक और पीछे से चल रही मिलावट फैक्ट्री का बड़ा खुलासा

इछावर । सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में बिलकिसगंज रोड स्थित एक बहुचर्चित पनीर फैक्ट्री इन दिनों रहस्यमय गतिविधियों को लेकर चर्चा का केंद्र बनी हुई है हैरानी की बात यह है कि जिस फैक्ट्री के संचालक किशन मोदी को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 20 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग और मिलावटखोरी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है वही फैक्ट्री अब भी लगातार संचालित हो रही है और मिलावट का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में जो तथ्य सामने आए हैं वे प्रशासनिक कार्यवाही पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं फैक्ट्री के मुख्य गेट पर ताला लटका हुआ है जिससे यह आभास होता है कि यूनिट पूरी तरह बंद है लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है बताया जा रहा है कि पीछे के रास्तों से लगातार मजदूरों का आना जाना जारी है साथ ही कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही भी बिना किसी रोक टोक के हो रही है इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए फैक्ट्री का नाम ही बदल दिया गया है पहले यह यूनिट जयश्री गायत्री फूड मिल्क मैजिक के नाम से जानी जाती थी लेकिन अब इसे हेल्थ ब्रिज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से संचालित किया जा रहा है स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सब एक सोची समझी रणनीति के तहत किया गया है ताकि बाहरी तौर पर फैक्ट्री बंद दिखाई दे और अंदर का अवैध कारोबार बिना किसी बाधा के चलता रहे फैक्ट्री के भीतर हो रही गतिविधियों को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं बताया जा रहा है कि यहां घी दूध और पनीर जैसे उत्पादों की पैकिंग का काम तेजी से किया जा रहा है जबकि पूर्व में हुई कार्रवाई के दौरान बिजली कनेक्शन भी काट दिया गया था इसके बावजूद उत्पादन जारी रहना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं इस पूरे खेल को संरक्षण प्राप्त है जब इस मामले की सच्चाई जानने का प्रयास किया गया तो फैक्ट्री परिसर में तैनात सुरक्षा गार्डों ने किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जिससे संदेह और गहरा गया गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय के भोपाल जोनल कार्यालय ने किशन मोदी को मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर मामले में गिरफ्तार किया था जांच में यह खुलासा हुआ था कि कंपनी दूध में प्राकृतिक फैट की जगह हानिकारक पाम ऑयल और अन्य रसायनों का उपयोग कर रही थी इतना ही नहीं विदेशी बाजार में निर्यात के लिए फर्जी लैब रिपोर्ट तैयार कर धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया ईडी ने इस पूरे घोटाले में 20.59 करोड़ रुपये को अपराध से अर्जित आय घोषित किया है वहीं इस पूरे मामले पर फूड विभाग की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है फूड इंस्पेक्टर सारिका गुप्ता का कहना है कि पिछली कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री बंद पाई गई थी लेकिन अब इसके दोबारा शुरू होने की जानकारी विभाग को नहीं है उन्होंने कहा कि जल्द ही टीम भेजकर सैंपल लिए जाएंगे और यह जांच की जाएगी कि वर्तमान में वहां किस प्रकार की गतिविधियां संचालित हो रही हैं यह पूरा मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ की भी गंभीर तस्वीर पेश करता है अब सवाल यह उठता है कि आखिर जिम्मेदार एजेंसियां कब तक ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई करेंगी और कब इस तरह के अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सकेगी
गर्मी में राहत का देसी उपाय: रोज पिएं आम पन्ना, मिले ठंडक और एनर्जी

नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही तेज धूप और बढ़ता तापमान शरीर पर भारी पड़ने लगता है। ऐसे में शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी हो जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स भी सलाह देते हैं कि इस मौसम में ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन किया जाए। इन्हीं में एक पारंपरिक और बेहद फायदेमंद पेय है आम पन्ना, जो न सिर्फ आपको ठंडक देता है बल्कि तुरंत ऊर्जा भी प्रदान करता है। नेशनल हेल्थ मिशन भी गर्मी के दिनों में पर्याप्त तरल पदार्थ लेने पर जोर देता है, ताकि शरीर डिहाइड्रेशन से बचा रहे। ऐसे में आम पन्ना एक बेहतरीन देसी विकल्प बनकर सामने आता है। कच्चे आम से तैयार यह पेय शरीर को अंदर से ठंडा करता है और लू के असर को कम करने में मदद करता है। आम पन्ना बनाने की प्रक्रिया भी बेहद आसान है। कच्चे आमों को उबालकर या भूनकर उनका गूदा निकाला जाता है, फिर इसमें चीनी या गुड़, भुना जीरा, काला नमक, साधारण नमक और पुदीना मिलाकर स्वादिष्ट पेय तैयार किया जाता है। इसका स्वाद जितना लाजवाब होता है, फायदे उससे कहीं ज्यादा होते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि आम पन्ना शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करता है। गर्मी में ज्यादा पसीना आने से शरीर में सोडियम और पोटैशियम की कमी हो जाती है, जिसे यह ड्रिंक संतुलित करता है। इससे थकान कम होती है और शरीर को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है। इसके अलावा, यह पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है। कच्चे आम में मौजूद फाइबर और एसिड पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं, वहीं पुदीना और जीरा गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। यही वजह है कि गर्मियों में पेट से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए आम पन्ना बेहद कारगर माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन C इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव होता है। साथ ही, यह शरीर के तापमान को संतुलित रखता है और हीट स्ट्रोक के खतरे को कम करता है। आम पन्ना त्वचा के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाते हैं। इतना ही नहीं, पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार यह लीवर को भी सपोर्ट करता है और अगर सीमित मात्रा में लिया जाए तो वजन नियंत्रण में भी सहायक हो सकता है। कैसे बनाएं आम पन्ना:2-3 कच्चे आमों को उबाल लें या भून लें। ठंडा होने पर छीलकर गूदा निकाल लें। इसमें स्वादानुसार चीनी या गुड़, भुना जीरा पाउडर, काला नमक, सादा नमक और बारीक कटा पुदीना मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे ठंडा पानी मिलाकर सर्व करें।
रामनवमी पर राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश: प्रभु राम से मिलते हैं जीवन के आदर्श

नई दिल्ली। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव रामनवमी के पावन अवसर पर देशभर में भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिला। इस खास दिन पर द्रौपदी मुर्मु, नरेंद्र मोदी, ओम बिरला समेत कई बड़े नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और भगवान राम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया के जरिए देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, समरसता और आदर्श मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें न्याय, कर्तव्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से रामराज्य की परिकल्पना के अनुरूप एक समृद्ध, न्यायपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन त्याग, तप और संयम से भरा हुआ है। उनके आदर्श हर परिस्थिति में मजबूती से खड़े रहने की प्रेरणा देते हैं और मानवता के लिए सदैव मार्गदर्शक रहेंगे। उन्होंने कामना की कि भगवान राम की कृपा से सभी का कल्याण हो और देश आत्मनिर्भर व विकसित बनने की दिशा में आगे बढ़े। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने संदेश में भगवान राम को धैर्य, त्याग और न्यायप्रियता का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनका जीवन संपूर्ण मानवता के लिए सर्वोच्च आदर्श है। उन्होंने प्रार्थना की कि समाज में अधर्म, अहंकार और अशांति का अंत हो तथा राष्ट्र निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी इस अवसर पर कहा कि भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति, आस्था और लोकमंगल के प्रतीक हैं। उनके आदर्श आज भी सुशासन, न्याय और लोककल्याण के लिए प्रेरणा देते हैं। उन्होंने सभी से कर्तव्य, संस्कार और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी देशवासियों को रामनवमी की शुभकामनाएं दीं। सभी नेताओं ने भगवान राम के आदर्शों सत्य, सेवा, समर्पण और धर्-को अपनाकर एक बेहतर समाज और राष्ट्र के निर्माण पर जोर दिया। देशभर में इस मौके पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और शोभायात्राओं का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव को उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया।
बांग्लादेश में बड़ा हादसा: अनियंत्रित बस नदी में गिरी, 18 लोगों की मौत

नई दिल्ली। बांग्लादेश में एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है, जहां एक यात्री बस अनियंत्रित होकर पद्मा नदी में गिर गई। इस भीषण दुर्घटना में अब तक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई यात्री अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसा राजबारी जिले के गोवालैंड उपजिला स्थित दौलतदिया फेरी टर्मिनल पर बुधवार शाम करीब 5:15 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस नदी पार करने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रही थी, तभी अचानक नियंत्रण खो बैठी और सीधे नदी में जा गिरी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बस कुश्तिया के कुमारखाली से ढाका जा रही थी और रास्ते में अलग-अलग स्थानों से यात्रियों को बैठाया गया था। बताया जा रहा है कि बस में कुल करीब 50 लोग सवार थे, जबकि बस की क्षमता 40 सीटों की थी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। बचाव अभियान के तहत ‘हमजा’ नामक रेस्क्यू शिप को लगाया गया, जिसने करीब छह घंटे की मशक्कत के बाद डूबी हुई बस को नदी से बाहर निकाला। देर रात करीब 11:30 बजे क्रेन की मदद से बस को पानी से बाहर निकाला गया। इसके बाद बस के अंदर से 16 शव बरामद किए गए, जिनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल थे। इससे पहले दो घायलों को अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया, जिससे कुल मृतकों की संख्या 18 हो गई। फरीदपुर फायर सर्विस के कमांडर मोहम्मद बेलाल उद्दीन ने बताया कि हादसे के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए थे। राहत दल लगातार नदी में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं और गोताखोरों की मदद से बस के आसपास तलाशी ली जा रही है। हालांकि बस के दरवाजे और खिड़कियां टूट जाने के कारण अंदर पहुंचना काफी मुश्किल हो गया था। हादसे की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है, लेकिन शुरुआती जांच में ड्राइवर द्वारा नियंत्रण खोने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। इस दर्दनाक हादसे के बाद पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं स्थानीय प्रशासन और बचाव दल पूरी मुस्तैदी से लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।
ईरान पर हमलों को ऑस्ट्रेलिया में कम समर्थन, सेना भेजने का विरोध

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के हमलों की वजह से तनाव की स्थिति बरकरार है। एक सर्वे से पता चला है कि ऑस्ट्रेलिया की केवल 26 फीसदी जनता ही ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के हमलों को सही मानती है। वहीं 50 फीसदी आबादी ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों की तैनाती को ठीक नहीं मानती। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, स्वतंत्र फर्म ‘एसेंशियल रिसर्च’ के एक मासिक पोल, ‘द एसेंशियल रिपोर्ट’ के ताजा अपडेट में बताया गया है कि 10 फीसदी लोग ईरान पर हमले शुरू करने के अमेरिका-इजरायल के फैसले को पूरी तरह से जायज हमला मानते हैं और 16 फीसदी लोग इसे ठीक-ठाक कार्रवाई करार दे रहे हैं। वहीं ऑस्ट्रेलियाई आबादी का 27 फीसदी हिस्सा इस संघर्ष के सख्त खिलाफ है। 15 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इसे नामंजूर करते हैं, जबकि बाकी लोग या तो निष्पक्ष रहने में यकीन रखते हैं या इस फैसले को लेकर असमंजस में हैं। संघर्ष में ऑस्ट्रेलिया के शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर, पोल में शामिल 50 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे ईरान में अमेरिका-इजरायल के जमीनी अभियान के समर्थन में सेना भेजने का विरोध करेंगे, जबकि 21 प्रतिशत ने कहा कि वे ऐसे कदम के पक्ष में हैं। दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलिया ने ईरान से आने वाले यात्रियों पर बैन लगाने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से यह खतरा बढ़ गया है कि शॉर्ट-टर्म वीजा खत्म होने के बाद वे घर जाने से मना कर देंगे। गृह विभाग का कहना है कि अगले छह महीनों तक ईरानी पासपोर्ट पर यात्रा करने वाले लोगों को पर्यटन या काम के लिए ऑस्ट्रेलिया आने से रोक दिया जाएगा। एक बयान में कहा गया है, “ईरान में लड़ाई की वजह से यह खतरा बढ़ गया है कि कुछ अस्थायी वीजा होल्डर्स अपने वीजा खत्म होने पर ऑस्ट्रेलिया से बाहर नहीं जा पाएंगे या शायद ही जा पाएं।” विभाग ने आगे कहा कि वीजा मामले में थोड़ी सी राहत कुछ खास मामलों में दी जाएंगी, जैसे कि ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के माता-पिता के लिए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 85,000 से ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ईरान में पैदा हुए थे और सिडनी और मेलबर्न जैसे बड़े शहरों में रहने वाले ईरानी समुदाय के पाए जाते हैं। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने मेहमान महिला फुटबॉल टीम की सात खिलाड़ियों और अधिकारियों को अपने देश में शरण दी। ऑस्ट्रेलिया के इस कदम से ईरान में भारी नाराजगी है। दरअसल, एशियन कप मैच के दौरान खेल शुरू होने से पहले खिलाड़ियों ने ईरान का राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया। इस कदम के बाद ईरान में इन खिलाड़ियों को देशद्रोही करार दिया गया। खिलाड़ियों की इस हरकत को इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ बगावत के तौर पर देखा गया। उन सात में से पांच ने बाद में ऑस्ट्रेलिया में पनाह लेने का अपना फैसला बदल दिया, जिससे यह शक और बढ़ गया कि उनके परिवार खतरे में आ गए हैं।
बदलते वैश्विक समीकरण: अमेरिका पर बढ़ा दबाव, चीन-रूस बने चुनौती

नई दिल्ली। भारत की वैश्विक कूटनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। एस. जयशंकर दो दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हो रहे हैं, जहां वे जी-7 विदेश मंत्रियों की अहम बैठक में हिस्सा लेंगे। यह दौरा न केवल भारत-फ्रांस संबंधों को मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को भी और प्रभावशाली बनाएगा। फ्रांस में होगी अहम कूटनीतिक बैठकविदेश मंत्री जयशंकर फ्रांस के अब्बे डेस वॉक्स-डी-सेर्ने में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। उन्हें फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने आमंत्रित किया है। इस दौरान जयशंकर कई देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी कर सकते हैं, जिससे भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। वैश्विक मुद्दों पर होगी गहन चर्चाइस जी-7 बैठक में दुनिया के कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसमें यूक्रेन में जारी युद्ध, पुनर्निर्माण की योजनाएं, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। साथ ही, सप्लाई चेन को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुरक्षित रखने पर भी विचार-विमर्श होगा। यूक्रेन संकट पर विशेष फोकसबैठक में यूक्रेन के पुनर्निर्माण को लेकर खास सत्र आयोजित होंगे। इसमें न्यूक्लियर सेफ्टी, ह्यूमैनिटेरियन डीमाइनिंग और फंडिंग सिस्टम पर चर्चा की जाएगी। यूरोपीय बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट जैसे संस्थानों की भूमिका पर भी जोर रहेगा, जो यूक्रेन की आर्थिक बहाली में मदद कर सकते हैं। समुद्री सुरक्षा और सप्लाई चेन पर जोरवैश्विक व्यापार के लिए समुद्री रास्तों की सुरक्षा बेहद अहम है। इस बैठक में मैरीटाइम रूट की सुरक्षा, नेविगेशन की स्वतंत्रता और सप्लाई चेन की मजबूती जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थिरता लाने के प्रयास किए जाएंगे। ग्लोबल गवर्नेंस सिस्टम में सुधार की पहलजी-7 देश वैश्विक शासन प्रणाली को और आधुनिक बनाने पर भी विचार कर रहे हैं। इसमें ऐसे नए ढांचे तैयार करने पर जोर होगा, जो बदलती वैश्विक चुनौतियों जैसे सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और संप्रभुता से जुड़े जोखिमो का बेहतर तरीके से सामना कर सकें। भारत समेत कई देशों की भागीदारीइस बैठक की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ जी-7 देश ही नहीं, बल्कि भारत, दक्षिण कोरिया, सऊदी अरब, ब्राजील और यूक्रेन जैसे कई साझेदार देश भी शामिल होंगे। यह जी-7 की बढ़ती आउटरीच और सहयोग की नीति को दर्शाता है। इवियन समिट की तैयारी का मंचयह बैठक जून में होने वाले जी-7 लीडर्स समिट (इवियन समिट) की तैयारी का अहम चरण मानी जा रही है। यहां होने वाली चर्चाएं भविष्य की वैश्विक रणनीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
उज्जैन में आस्था का संगम मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अंगारेश्वर महादेव के चरणों में टेका माथा प्रदेश की खुशहाली की कामना

उज्जैन । धार्मिक नगरी उज्जैन एक बार फिर आस्था और भक्ति के विशेष माहौल में डूबी नजर आई जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव गुरुवार सुबह श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे जहां उन्होंने पूरे विधि विधान के साथ भगवान शिव की पूजा अर्चना की मुख्यमंत्री अपने परिवार के साथ प्रातःकाल मंदिर पहुंचे और वहां पहुंचते ही उन्होंने भगवान महादेव के चरणों में माथा टेककर प्रदेश की सुख शांति और समृद्धि की कामना की मंदिर परिसर में उस समय का दृश्य अत्यंत आध्यात्मिक और भावनात्मक था जब मुख्यमंत्री ने पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक किया और श्रद्धा भाव से पूजन संपन्न किया जैसे ही पूजन प्रारंभ हुआ मंदिर परिसर हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा और वहां उपस्थित श्रद्धालु भी इस भक्ति के वातावरण में पूरी तरह लीन नजर आए मुख्यमंत्री का यह दौरा पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक विश्वास से जुड़ा हुआ था जिसमें उन्होंने अपने परिवार के साथ भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया पूजन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना करते हुए भगवान से प्रार्थना की कि मध्यप्रदेश निरंतर विकास की ओर अग्रसर हो और यहां के नागरिकों के जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहे उन्होंने विशेष रूप से प्रदेश की शांति और खुशहाली के लिए भी आशीर्वाद मांगा इस अवसर पर मंदिर में उपस्थित लोगों ने भी मुख्यमंत्री के साथ मिलकर भगवान शिव की आराधना की जिससे पूरे परिसर में एक सकारात्मक और ऊर्जावान वातावरण बन गया श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर उज्जैन का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जहां दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं इस मंदिर का महत्व विशेष रूप से शिवभक्तों के बीच अत्यधिक माना जाता है और यहां नियमित रूप से पूजा अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते रहते हैं मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर मंदिर परिसर में पहले से ही तैयारियां की गई थीं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए गए थे ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके मुख्यमंत्री के इस धार्मिक दौरे ने न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि आम जनमानस के बीच भी एक सकारात्मक संदेश दिया है कि आस्था और विश्वास भारतीय संस्कृति की मजबूत नींव हैं और जब जनप्रतिनिधि स्वयं इन परंपराओं से जुड़े रहते हैं तो समाज में भी आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है उज्जैन की पावन भूमि पर हुआ यह पूजन कार्यक्रम एक बार फिर यह दर्शाता है कि धर्म और आस्था का संबंध केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का यह दौरा भले ही अल्पकालिक रहा हो लेकिन इसने श्रद्धालुओं के बीच एक गहरी छाप छोड़ी है और लोगों ने इसे प्रदेश की उन्नति और कल्याण के लिए एक शुभ संकेत के रूप में देखा है
फ्रांस दौरे पर विदेश मंत्री जयशंकर, G7 बैठक में भारत की होगी अहम भूमिका

नई दिल्ली। भारत की वैश्विक कूटनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। एस. जयशंकर दो दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हो रहे हैं, जहां वे जी-7 विदेश मंत्रियों की अहम बैठक में हिस्सा लेंगे। यह दौरा न केवल भारत-फ्रांस संबंधों को मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को भी और प्रभावशाली बनाएगा। फ्रांस में होगी अहम कूटनीतिक बैठकविदेश मंत्री जयशंकर फ्रांस के अब्बे डेस वॉक्स-डी-सेर्ने में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। उन्हें फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने आमंत्रित किया है। इस दौरान जयशंकर कई देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी कर सकते हैं, जिससे भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। वैश्विक मुद्दों पर होगी गहन चर्चाइस जी-7 बैठक में दुनिया के कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसमें यूक्रेन में जारी युद्ध, पुनर्निर्माण की योजनाएं, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। साथ ही, सप्लाई चेन को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुरक्षित रखने पर भी विचार-विमर्श होगा। यूक्रेन संकट पर विशेष फोकसबैठक में यूक्रेन के पुनर्निर्माण को लेकर खास सत्र आयोजित होंगे। इसमें न्यूक्लियर सेफ्टी, ह्यूमैनिटेरियन डीमाइनिंग और फंडिंग सिस्टम पर चर्चा की जाएगी। यूरोपीय बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट जैसे संस्थानों की भूमिका पर भी जोर रहेगा, जो यूक्रेन की आर्थिक बहाली में मदद कर सकते हैं। समुद्री सुरक्षा और सप्लाई चेन पर जोरवैश्विक व्यापार के लिए समुद्री रास्तों की सुरक्षा बेहद अहम है। इस बैठक में मैरीटाइम रूट की सुरक्षा, नेविगेशन की स्वतंत्रता और सप्लाई चेन की मजबूती जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थिरता लाने के प्रयास किए जाएंगे। ग्लोबल गवर्नेंस सिस्टम में सुधार की पहलजी-7 देश वैश्विक शासन प्रणाली को और आधुनिक बनाने पर भी विचार कर रहे हैं। इसमें ऐसे नए ढांचे तैयार करने पर जोर होगा, जो बदलती वैश्विक चुनौतियों—जैसे सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और संप्रभुता से जुड़े जोखिमों—का बेहतर तरीके से सामना कर सकें। भारत समेत कई देशों की भागीदारीइस बैठक की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ जी-7 देश ही नहीं, बल्कि भारत, दक्षिण कोरिया, सऊदी अरब, ब्राजील और यूक्रेन जैसे कई साझेदार देश भी शामिल होंगे। यह जी-7 की बढ़ती आउटरीच और सहयोग की नीति को दर्शाता है। इवियन समिट की तैयारी का मंचयह बैठक जून में होने वाले जी-7 लीडर्स समिट (इवियन समिट) की तैयारी का अहम चरण मानी जा रही है। यहां होने वाली चर्चाएं भविष्य की वैश्विक रणनीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
स्पेस रेस में चीन की बढ़त से अमेरिका अलर्ट, अधिकारियों की सख्त चेतावनी

नई दिल्ली। अंतरिक्ष की दौड़ एक बार फिर तेज हो गई है और इस बार मुकाबला सीधे तौर पर अमेरिका और चीन के बीच नजर आ रहा है। अमेरिकी सांसदों और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) यानी पृथ्वी की निचली कक्षा में चीन तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, जिससे अमेरिका की स्पेस लीडरशिप को चुनौती मिल सकती है। आईएसएस के बाद का दौर बना चुनौतीइंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पिछले 25 सालों से मानव अंतरिक्ष मिशनों और रिसर्च का केंद्र रहा है। लेकिन अब यह स्टेशन पुराना हो रहा है और इसके अगले चरण को लेकर अमेरिका में चिंता बढ़ गई है। हाउस साइंस कमेटी के चेयरमैन ब्रायन बैबिन ने कहा कि ISS अमेरिकी स्पेस प्रोग्राम की बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब इसके बाद की योजना बेहद सावधानी से बनानी होगी। चीन की बढ़ती मौजूदगी से बढ़ी टेंशनचीन ने तियांगोंग स्पेस स्टेशन के जरिए लो अर्थ ऑर्बिट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कर ली है। 2022 में लॉन्च हुए इस स्टेशन पर लगातार अंतरिक्ष यात्री काम कर रहे हैं। अमेरिकी सांसद माइक हरिडोपोलोस ने कहा कि अमेरिका को इस क्षेत्र में अपनी लीड बनाए रखने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे। सुरक्षा और तकनीकी जोखिम भी बड़ी चिंताएयरोस्पेस सेफ्टी एक्सपर्ट चार्ल्स जे. प्रीकोर्ट ने चेतावनी दी कि ISS अब अपने सबसे जोखिम भरे दौर में है। पुराने होते सिस्टम और तकनीकी घिसावट के कारण खतरे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार सुरक्षित ऑपरेशन के लिए कड़ी इंजीनियरिंग और रिस्क मैनेजमेंट जरूरी है। ‘स्पेस गैप’ का खतरा विशेषज्ञों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि ISS से कमर्शियल स्पेस प्लेटफॉर्म पर ट्रांजिशन के दौरान अमेरिका की मानव अंतरिक्ष क्षमता में गैप आ सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो इसका असर रिसर्च और भविष्य के मिशनों पर पड़ेगा। तेजी से बढ़ रहा स्पेस बिजनेसकमर्शियल स्पेस सेक्टर भी तेजी से विस्तार कर रहा है। कमर्शियल स्पेस फेडरेशन के अध्यक्ष डेविड कैवोसा के मुताबिक, वैश्विक स्पेस मार्केट पहले ही 57,000 करोड़ डॉलर का हो चुका है और 2035 तक इसके 1.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में इस क्षेत्र में देरी या नीति की अस्पष्टता निवेश को प्रभावित कर सकती है। नासा की नई रणनीतिनासा अब ISS के बाद के दौर के लिए कमर्शियल स्पेस स्टेशनों पर फोकस कर रहा है। स्पेस ऑपरेशंस के अधिकारी जोएल आर. मोंटालबानो ने कहा कि एजेंसी 2030 तक एक मजबूत कमर्शियल स्पेस इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है, जहां वह खुद भी एक ग्राहक के रूप में शामिल होगी। निर्णायक होंगे आने वाले सालअमेरिकी सांसदों का मानना है कि अगले कुछ साल यह तय करेंगे कि लो अर्थ ऑर्बिट में किसकी बादशाहत होगी। दशकों तक लगातार अंतरिक्ष में मौजूदगी के बाद अगर अमेरिका के मिशनों में कोई गैप आता है, तो इसका सीधा फायदा चीन को मिल सकता है।