सागर में डंपरों का खूनी तांडव: 24 घंटे में पांच युवकों की दर्दनाक मौत

सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में बीते 24 घंटे मौत का पैगाम लेकर आए। शहर की सड़कों पर यमदूत बनकर दौड़ रहे भारी वाहनों ने पांच हंसते-खेलते परिवारों के चिराग बुझा दिए। रफ्तार के इस खूनी खेल में दो अलग-अलग घटनाओं ने न केवल शहर को शोक में डुबो दिया है, बल्कि प्रशासन की लचर व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलम यह था कि हादसों का मंजर इतना खौफनाक था कि जिसने भी देखा, उसका दिल दहल उठा। पहली हृदयविदारक घटना सागर के बंडा रोड पर घटित हुई। यहाँ एक तेज रफ्तार डंपर ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए बाइक पर सवार तीन युवकों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो डंपर की गति इतनी अधिक थी कि बाइक सवारों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पुलिस के अनुसार, ये तीनों मृतक बंडा क्षेत्र के ही निवासी थे, जो किसी काम से बाहर निकले थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि घर वापसी का रास्ता मौत की गली से होकर गुजरेगा। अभी बंडा रोड की घटना की स्याही सूखी भी नहीं थी कि देर रात सागर शहर के खेल परिसर के पास एक और वीभत्स हादसा हो गया। यहाँ से गुजर रहे एक अनियंत्रित ट्राले क्रमांक RJ 06 GD 2973 ने बाइक सवार दो युवकों को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। यह हादसा इतना भयावह था कि दोनों युवक ट्राले के पहियों के नीचे आ गए। टक्कर के बाद का दृश्य इतना विचलित करने वाला था कि सड़क पर मांस के टुकड़े बिखरे पड़े थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने इकट्ठा किया। मृतकों की पहचान गोपालगंज निवासी के रूप में हुई है। हादसे की खबर मिलते ही गोपालगंज और कोतवाली पुलिस सहित सीएसपी ललित कश्यप दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को नियंत्रित किया और शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बाइक सवार अपनी सही दिशा में जा रहे थे, लेकिन पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें बेरहमी से कुचल दिया। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है। हैरानी की बात यह है कि सागर के मुख्य मार्गों पर भारी वाहनों का बेखौफ दौड़ना अब एक आम बात हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पीली कोठी से डिग्री कॉलेज चौराहे के बीच का मार्ग ‘डेथ जोन’ बनता जा रहा है। यहाँ आए दिन सड़क हादसे होते हैं, कई मासूम अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। शहर के बीचों-बीच से गुजरने वाले इन भारी वाहनों पर न तो गति सीमा का नियंत्रण है और न ही इनके प्रवेश के समय का कोई सख्ती से पालन हो रहा है। इन पांच मौतों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो सागर की सड़कें इसी तरह मासूमों के खून से लाल होती रहेंगी। फिलहाल, पुलिस ने मामलों को जांच में लिया है, लेकिन सवाल वही बरकरार है इन मौतों का जिम्मेदार आखिर कौन है? वह डंपर चालक जो अपनी रफ्तार के नशे में था या वह तंत्र जिसने इन भारी वाहनों को शहर की छाती पर तांडव करने की खुली छूट दे रखी है?
स्पेस रेस में चीन की बढ़त पर अमेरिका चिंतित, अधिकारियों ने दी चेतावनी

नई दिल्ली। अंतरिक्ष की दौड़ एक बार फिर तेज हो गई है और इस बार मुकाबला सीधे तौर पर अमेरिका और चीन के बीच नजर आ रहा है। अमेरिकी सांसदों और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) यानी पृथ्वी की निचली कक्षा में चीन तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, जिससे अमेरिका की स्पेस लीडरशिप को चुनौती मिल सकती है। आईएसएस के बाद का दौर बना चुनौतीइंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पिछले 25 सालों से मानव अंतरिक्ष मिशनों और रिसर्च का केंद्र रहा है। लेकिन अब यह स्टेशन पुराना हो रहा है और इसके अगले चरण को लेकर अमेरिका में चिंता बढ़ गई है। हाउस साइंस कमेटी के चेयरमैन ब्रायन बैबिन ने कहा कि ISS अमेरिकी स्पेस प्रोग्राम की बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब इसके बाद की योजना बेहद सावधानी से बनानी होगी। चीन की बढ़ती मौजूदगी से बढ़ी टेंशनचीन ने तियांगोंग स्पेस स्टेशन के जरिए लो अर्थ ऑर्बिट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कर ली है। 2022 में लॉन्च हुए इस स्टेशन पर लगातार अंतरिक्ष यात्री काम कर रहे हैं। अमेरिकी सांसद माइक हरिडोपोलोस ने कहा कि अमेरिका को इस क्षेत्र में अपनी लीड बनाए रखने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे। सुरक्षा और तकनीकी जोखिम भी बड़ी चिंताएयरोस्पेस सेफ्टी एक्सपर्ट चार्ल्स जे. प्रीकोर्ट ने चेतावनी दी कि ISS अब अपने सबसे जोखिम भरे दौर में है। पुराने होते सिस्टम और तकनीकी घिसावट के कारण खतरे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार सुरक्षित ऑपरेशन के लिए कड़ी इंजीनियरिंग और रिस्क मैनेजमेंट जरूरी है। ‘स्पेस गैप’ का खतराविशेषज्ञों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि ISS से कमर्शियल स्पेस प्लेटफॉर्म पर ट्रांजिशन के दौरान अमेरिका की मानव अंतरिक्ष क्षमता में गैप आ सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो इसका असर रिसर्च और भविष्य के मिशनों पर पड़ेगा। तेजी से बढ़ रहा स्पेस बिजनेसकमर्शियल स्पेस सेक्टर भी तेजी से विस्तार कर रहा है। कमर्शियल स्पेस फेडरेशन के अध्यक्ष डेविड कैवोसा के मुताबिक, वैश्विक स्पेस मार्केट पहले ही 57,000 करोड़ डॉलर का हो चुका है और 2035 तक इसके 1.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में इस क्षेत्र में देरी या नीति की अस्पष्टता निवेश को प्रभावित कर सकती है। नासा की नई रणनीतिनासा अब ISS के बाद के दौर के लिए कमर्शियल स्पेस स्टेशनों पर फोकस कर रहा है। स्पेस ऑपरेशंस के अधिकारी जोएल आर. मोंटालबानो ने कहा कि एजेंसी 2030 तक एक मजबूत कमर्शियल स्पेस इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है, जहां वह खुद भी एक ग्राहक के रूप में शामिल होगी। निर्णायक होंगे आने वाले सालअमेरिकी सांसदों का मानना है कि अगले कुछ साल यह तय करेंगे कि लो अर्थ ऑर्बिट में किसकी बादशाहत होगी। दशकों तक लगातार अंतरिक्ष में मौजूदगी के बाद अगर अमेरिका के मिशनों में कोई गैप आता है, तो इसका सीधा फायदा चीन को मिल सकता है।
उबलता पानी और जहरीली गैसें: ‘डालोल’ क्यों है धरती का सबसे खतरनाक इलाका?

नई दिल्ली। दुनिया में कई जगहें अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं, लेकिन कुछ स्थान ऐसे भी हैं जो रहस्य और खतरे का अनोखा संगम हैं। डालोल ऐसा ही एक इलाका है, जो इथियोपिया के डानाकिल डिप्रेशन में स्थित है। यह जगह पृथ्वी के सबसे गर्म, अम्लीय और खतरनाक स्थानों में गिनी जाती है, जहां प्रकृति अपने सबसे भयावह रूप में नजर आती है। ज्वालामुखी के मुंह पर बसा ‘नरक जैसा’ इलाकाडालोल दरअसल नमक से भरे एक ज्वालामुखी क्रेटर के ऊपर बसा है। यहां लगातार हाइड्रोथर्मल गतिविधियां होती रहती हैं, जिससे उबलता पानी, जहरीली गैसें और खनिज सतह पर निकलते रहते हैं। जमीन से निकलते ये उबलते झरने किसी उबलते हुए “पृथ्वी के जख्म” जैसे लगते हैं। तापमान इतना ज्यादा होता है कि कई जगह पानी 90 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तक पहुंच जाता है। रंगों का मायाजाल, लेकिन बेहद खतरनाकNASA के अनुसार, डालोल का इलाका देखने में बेहद रंगीन और आकर्षक लगता है—पीला रंग सल्फर से, लाल आयरन ऑक्साइड से और हरा कॉपर सॉल्ट से बनता है। लेकिन यह खूबसूरती बेहद खतरनाक है, क्योंकि यहां का पानी अत्यधिक अम्लीय (pH 0.25 तक) और बेहद नमकीन है। जमीन पर बनी नमक की चिमनियां और रंग-बिरंगे झरने इसे किसी दूसरे ग्रह जैसा बना देते हैं। जहरीली हवा, जहां इंसानों का रहना लगभग नामुमकिनइस क्षेत्र की हवा में क्लोरीन और सल्फर जैसी जहरीली गैसें मौजूद रहती हैं। यही कारण है कि यहां लंबे समय तक इंसानों का रहना लगभग असंभव माना जाता है। इसके बावजूद, यह इलाका पूरी तरह निर्जीव नहीं है। मौत के बीच जीवन की खोजवैज्ञानिकों के लिए डालोल किसी खजाने से कम नहीं है। स्पेन के एस्ट्रोबायोलॉजी सेंटर के डॉ. फेलिप गोमेज की टीम ने यहां ऐसे सूक्ष्म जीव (बैक्टीरिया) खोजे हैं जो अत्यधिक गर्मी, अम्लता और नमक के बीच भी जीवित रह सकते हैं। ये बैक्टीरिया सामान्य जीवों से 20 गुना तक छोटे हैं और बेहद कठिन परिस्थितियों में भी पनपते हैं। इससे यह सवाल उठता है कि जीवन कितनी चरम परिस्थितियों में संभव हो सकता है। मंगल ग्रह से कनेक्शनवैज्ञानिक डालोल को मंगल ग्रह के पुराने वातावरण का मॉडल मानते हैं। यहां की हाइड्रोथर्मल गतिविधियां, खनिज और अम्लीय स्थितियां मंगल के कुछ क्षेत्रों से काफी मिलती-जुलती हैं। इसी वजह से इस इलाके का अध्ययन अंतरिक्ष में जीवन की संभावनाओं को समझने में मदद करता है। पृथ्वी का सबसे गर्म और अनोखा इलाकासमुद्र तल से 125 मीटर नीचे स्थित डालोल का औसत तापमान सालभर 34-35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है। यह पृथ्वी के सबसे गर्म बसे हुए इलाकों में से एक माना जाता है। यहां जिंक, मैंगनीज, सल्फाइड और रॉक सॉल्ट जैसे खनिज लगातार बनते रहते हैं, जो इसे भूवैज्ञानिक रूप से बेहद खास बनाते हैं। रहस्य और खतरे का अनोखा संगमडालोल सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि प्रकृति की चरम सीमाओं का जीवंत उदाहरण है। जहां एक तरफ यह इलाका जीवन के लिए लगभग असंभव है, वहीं दूसरी ओर यहां मौजूद सूक्ष्म जीव यह साबित करते हैं कि जीवन हर मुश्किल परिस्थिति में अपना रास्ता खोज ही लेता है।
FY2026 में क्रेडिट ग्रोथ में उछाल: रिटेल और MSME सेक्टर बने सहारा

नई दिल्ली। भारत में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ ने जोरदार रफ्तार पकड़ी है। यस बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुल कर्ज वितरण (क्रेडिट फ्लो) में 61 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह उछाल मुख्य रूप से रिटेल ग्राहकों और MSME सेक्टर की मजबूत मांग की वजह से आया है, जिसने अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है। रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में कुल क्रेडिट फ्लो बढ़कर 25.1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो लगभग 26.1 लाख करोड़ रुपए के डिपॉजिट के बराबर है। रिटेल, MSME और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग इस ग्रोथ का प्रमुख आधार रही। हालांकि, डिपॉजिट ग्रोथ की गति धीमी रहने से बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी पर हल्का दबाव भी देखने को मिला है। इसी के चलते क्रेडिट-डिपॉजिट (C/D) रेशियो बढ़कर 82.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पिछले एक दशक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। यह संकेत देता है कि बैंक अब ज्यादा आक्रामक तरीके से कर्ज दे रहे हैं, जबकि जमा की रफ्तार उतनी तेज नहीं है। रिटेल लोन इस ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बनकर उभरा है। पर्सनल लोन की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गई है। टैक्स में राहत और GST से जुड़े फायदों के चलते लोगों की आय में बढ़ोतरी हुई है, जिससे उनकी कर्ज लेने की क्षमता भी मजबूत हुई है। खास बात यह है कि इस बार वाहन लोन ने हाउसिंग लोन को पीछे छोड़ दिया है और क्रेडिट ग्रोथ का सबसे बड़ा ड्राइवर बनकर सामने आया है। दूसरी ओर, लोन लेने के ट्रेंड में भी बदलाव देखने को मिला है। अब लोग अनसिक्योर्ड (बिना गारंटी) लोन की बजाय सिक्योर्ड लोन की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं, जिससे बैंकिंग सिस्टम में जोखिम भी कम हो सकता है। इंडस्ट्रियल क्रेडिट में भी सुधार दर्ज किया गया है, जिसमें MSME सेक्टर की अहम भूमिका रही है। यह सेक्टर अब कुल औद्योगिक कर्ज का करीब एक-तिहाई हिस्सा बन चुका है। सरकार की क्रेडिट गारंटी स्कीम और MSME की नई परिभाषा ने इस सेगमेंट को मजबूती दी है। माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज ने 2.38 लाख करोड़ रुपए का कर्ज जोड़ा, जबकि मीडियम एंटरप्राइज ने 63,000 करोड़ रुपए का योगदान दिया। हालांकि, रिपोर्ट में भविष्य को लेकर थोड़ी चिंता भी जताई गई है। FY27 में क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसके पीछे बढ़ती तेल कीमतें, कमजोर निर्यात और खाद्य महंगाई जैसे कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। साथ ही, GST से मिलने वाले फायदों का असर कम होने से भी लोन की मांग प्रभावित हो सकती है।
केंद्र का बड़ा प्लान: रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन 5,000 टन तक पहुंचाने की तैयारी

नई दिल्ली। भारत ने रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि देश में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों से बनने वाले स्थायी चुंबकों की घरेलू उत्पादन क्षमता वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 5,000 टन करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम इलेक्ट्रिक व्हीकल, रक्षा और हाई-टेक सेक्टर के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। क्या बोले Jitendra Singh?केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत दुर्लभ खनिजों और लिथियम की खोज में तेजी ला रहा है। सरकार का फोकस न सिर्फ इन खनिजों की खोज पर है, बल्कि इनके प्रोसेसिंग और उपयोग के लिए मजबूत घरेलू इकोसिस्टम तैयार करना भी है। मांग तेजी से बढ़ रही, चुनौती भी बड़ीसरकार के मुताबिक, इस समय देश में दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबकों की जरूरत करीब 4,000 टन है, जो 2030 तक बढ़कर लगभग 8,000 टन तक पहुंच सकती है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके। नए प्रोजेक्ट्स से मिलेगी रफ्तारसरकार ने इस दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं: नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) चुंबकों की प्रायोगिक परियोजना शुरूविशाखापत्तनम में समैरियम-कोबाल्ट चुंबक प्लांट चालूशुरुआती उत्पादन क्षमता 500 टन/वर्ष, जिसे बढ़ाकर 2,000 टन और फिर 5,000 टन करने की योजना ये प्रोजेक्ट भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिलाने में मदद करेंगे। किन सेक्टरों के लिए जरूरी हैं ये खनिज? दुर्लभ पृथ्वी तत्व और लिथियम कई उभरती तकनीकों की रीढ़ माने जाते हैं, जैसे: इलेक्ट्रिक वाहन (EV)नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर, विंड)इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टररक्षा और एयरोस्पेसअंतरिक्ष तकनीक इनकी मांग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदमसरकार का लक्ष्य एक मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाना है, जिससे भारत इन महत्वपूर्ण खनिजों के लिए दूसरे देशों पर कम निर्भर रहे। इसके लिए अलग-अलग मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं और खनन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जा रहा है। क्यों है यह रणनीतिक कदम?वैश्विक स्तर पर दुर्लभ पृथ्वी खनिजों पर कुछ ही देशों का दबदबा है। ऐसे में भारत का यह कदम न सिर्फ आर्थिक बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी विकास और औद्योगिक क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।
LIC को झटका: वित्त वर्ष 2022 के लिए इनकम टैक्स विभाग का डिमांड नोटिस

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India (एलआईसी) को इनकम टैक्स विभाग से बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने जानकारी दी है कि उसे वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारी भरकम डिमांड नोटिस मिला है, जिसमें टैक्स और ब्याज मिलाकर कुल रकम 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है। कितना है टैक्स डिमांड?एलआईसी के मुताबिक Income Tax Department की असेसमेंट यूनिट ने: 6,146.71 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में953.25 करोड़ रुपये ब्याज के रूप मेंकी मांग की है। यह डिमांड टैक्स अधिकारियों द्वारा मूल्यांकन के दौरान किए गए कुछ समायोजनों (adjustments) के कारण सामने आई है। किन वजहों से बना मामला?इनकम टैक्स विभाग ने एलआईसी की कुछ वित्तीय गणनाओं और दावों को स्वीकार नहीं किया। प्रमुख मुद्दे इस प्रकार हैं: अंतरिम बोनस को आय (Income) के रूप में शामिल करनाजीवन सुरक्षा कोष (Life Fund) से हुए नुकसान को आय में जोड़नानेगेटिव रिजर्व को आय माननाधारा 80M के तहत दावा की गई कटौतियों को खारिज करनाTDS जमा करने में देरी से जुड़े ब्याज खर्च को अस्वीकार करनाइन सभी कारणों से कंपनी पर यह अतिरिक्त टैक्स बोझ डाला गया है। एलआईसी ने क्या कहा?एलआईसी ने साफ किया है कि वह इस आदेश से सहमत नहीं है और इसे चुनौती देगी। कंपनी जल्द ही आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील दायर करेगी और कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपना पक्ष रखेगी। कंपनी का यह भी कहना है कि इस नोटिस का उसके रोजमर्रा के कारोबार या संचालन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। निवेशकों के लिए राहत की खबरदिलचस्प बात यह रही कि इस बड़े डिमांड नोटिस के बावजूद बाजार में निवेशकों का भरोसा बरकरार दिखा। National Stock Exchange of India पर एलआईसी का शेयर 20.90 रुपये (2.75%) की बढ़त के साथ 779.60 रुपये पर बंद हुआ। नियमों के तहत किया खुलासाएलआईसी ने यह जानकारी Securities and Exchange Board of India के LODR (लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट) नियमों के तहत शेयर बाजार को दी है। इन नियमों के मुताबिक, सूचीबद्ध कंपनियों को ऐसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों की जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य होता है। आगे क्या होगा?अब यह मामला अपील प्रक्रिया में जाएगा, जहां एलआईसी और टैक्स विभाग दोनों अपने-अपने तर्क पेश करेंगे। अंतिम फैसला आने में समय लग सकता है, लेकिन यह मामला बीमा सेक्टर और टैक्स कानूनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
इजरायल-अमेरिका और ईरान तनाव से महंगा हुआ तेल, नेपाल-बांग्लादेश ने बढ़ाईं कीमतें

नई दिल्ली। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते कई देशों ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं, जबकि कुछ जगहों पर ईंधन की राशनिंग तक शुरू हो गई है। नेपाल में पेट्रोल-डीजल महंगानेपाल में नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) ने पेट्रोल, डीजल और केरोसीन की कीमतों में 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नई दरें आधी रात से लागू हो गई हैं। पेट्रोल: 184.50 से 187 रुपये/लीटर (कैटेगरी के अनुसार)डीजल/केरोसीन: 164.50 से 167 रुपये/लीटर एनओसी ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी के कारण घरेलू कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया था। बांग्लादेश में जेट फ्यूल 80% महंगाबांग्लादेश में हालात और ज्यादा गंभीर हैं। Bangladesh Energy Regulatory Commission ने जेट फ्यूल की कीमतों में करीब 80% की भारी बढ़ोतरी की है। घरेलू उड़ानों के लिए: 112.41 टका से बढ़कर 202.29 टका/लीटरअंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए: 0.738 डॉलर से बढ़कर 1.3216 डॉलर/लीटर इस बढ़ोतरी का सीधा असर हवाई यात्रा और कार्गो लागत पर पड़ेगा। पाकिस्तान और यूरोप भी प्रभावितपाकिस्तान में पहले से आर्थिक संकट के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 20-25% तक उछाल दर्ज किया गया है। वहीं जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों में गैस और पेट्रोल के दाम 10-15% तक बढ़ गए हैं। थाईलैंड में शुरू हुई राशनिंगथाईलैंड में हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि पेट्रोल पंपों पर राशनिंग लागू करनी पड़ी है। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति को सीमित मात्रा में ही ईंधन दिया जा रहा है, ताकि सप्लाई संतुलित बनी रहे। क्या है राशनिंग का मतलब?जब किसी देश में ईंधन की भारी कमी हो जाती है या कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो सरकार या पेट्रोल पंप यह तय कर देते हैं कि एक व्यक्ति एक बार में कितना तेल खरीद सकता है। इससे सीमित संसाधनों का संतुलित वितरण किया जाता है। आगे क्या असर पड़ेगा?विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो: तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैंमहंगाई में तेजी आएगीट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स महंगे होंगेआम लोगों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण तेल महंगा हो रहा है, जिससे नेपाल, बांग्लादेश समेत कई देशों में ईंधन कीमतें बढ़ीं और कुछ जगह राशनिंग तक शुरू हो गई।
वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी ऊर्जा चिंता, जानें कैसे बढ़ाएं गाड़ी का माइलेज, ये हैं आसान उपाय

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल बाजार की अनिश्चितता के बीच ऊर्जा सुरक्षा फिर से चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने संबोधन में कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि मौजूदा हालात लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं और लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। चुनौतीपूर्ण समय और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर असर प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ईरान-इस्राइल-अमेरिका के बीच तनाव और महामारी के दौर की तुलना की। उन्होंने कहा कि दोनों ही परिस्थितियों में वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई, भले ही वजह अलग रही। उन्होंने स्पष्ट किया, इस युद्ध के कारण, वैश्विक स्तर पर बनी कठिन स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है। हमें हर स्थिति के लिए तैयार और एकजुट रहना होगा। अफवाह फैलाने वालों को सफल नहीं होने देना चाहिए। हालांकि पीएम ने किसी लॉकडाउन की घोषणा नहीं की, लेकिन उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर पावर लॉकडाउन जैसी चर्चाएं बढ़ गईं। अन्य देशों में ऊर्जा संकट के कदम विशेषज्ञों के अनुसार, कई देशों में ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अलग-अलग उपाय अपनाए जा रहे हैं:-श्रीलंका: स्कूल और गैर-जरूरी सरकारी दफ्तरों में छुट्टीबांग्लादेश: ऑनलाइन क्लास और तय बिजली कटौतीपाकिस्तान और फिलीपींस: सरकारी कर्मचारियों के लिए 4-दिन का वर्क वीकवियतनाम: रिमोट वर्क को बढ़ावाइन उदाहरणों से साफ है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बचत को लेकर चिंता बढ़ रही है। भारत में स्थिति और सावधानियां विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल भारत में लॉकडाउन जैसी स्थिति नहीं है। फिर भी ईंधन की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में संभावित रुकावट के बीच हर लीटर ईंधन का अधिकतम उपयोग करना जरूरी हो जाता है। माइलेज बढ़ाने के आसान तरीके ड्राइविंग स्टाइल बदलें: अचानक एक्सीलेरेशन, बार-बार ब्रेक लगाना और तेज लेन बदलना ईंधन ज्यादा खर्च करता है। स्मूद ड्राइविंग से बचत होती है। स्थिर स्पीड बनाए रखें: बार-बार स्पीड बदलने से इंजन पर दबाव बढ़ता है। हाईवे पर समान रफ्तार और शहर में ट्रैफिक को समझकर चलना बेहतर माइलेज देता है। इंजन आइडलिंग कम करें: लंबे समय तक गाड़ी चालू रखना ईंधन बर्बाद करता है। सिग्नल या इंतजार के दौरान इंजन बंद करना लाभकारी है। वाहन की सही देखभाल: सही टायर प्रेशर, साफ एयर फिल्टर और समय पर इंजन ऑयल बदलना ईंधन की खपत कम करता है। वजन और ट्रिप प्लानिंग: गाड़ी में अनावश्यक वजन हटाएं, एक ही ट्रिप में कई काम निपटाएं और भीड़भाड़ वाले समय से बचें। सावधान और स्मार्ट ड्राइविंग की जरूरत भले ही वैश्विक हालात ईंधन की कीमत और उपलब्धता को प्रभावित करें, सही ड्राइविंग आदतें अपनाकर खर्च को नियंत्रित किया जा सकता है। छोटे-छोटे बदलाव से न सिर्फ माइलेज बढ़ेगा, बल्कि आपकी जेब पर भी कम असर पड़ेगा।
रिपोर्ट का दावा: भारत में इस साल हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी रहेगी स्थिर

नई दिल्ली। भारत में घर खरीदने का सपना देखने वालों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। CBRE South Asia Pvt. Ltd. की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में देश में हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी यानी घर खरीदने की क्षमता स्थिर रहने की संभावना है। बढ़ती आय और सरकार की सहायक नीतियों के चलते प्रॉपर्टी की ऊंची कीमतों का असर काफी हद तक संतुलित हो सकता है, जिससे मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। आय बढ़ेगी, EMI का बोझ होगा कमरिपोर्ट ‘इंडिया रेसिडेंशियल मार्केट आउटलुक 2026’ में कहा गया है कि 2021 के बाद पहली बार ऐसा होगा जब लोगों की आय प्रॉपर्टी की कीमतों से तेज गति से बढ़ेगी। इसका सीधा फायदा होम बायर्स को मिलेगा क्योंकि उनकी EMI का बोझ कम होगा और वे आसानी से घर खरीदने का फैसला ले सकेंगे। बड़े शहरों में दिखेगा असरइस रिपोर्ट में मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों का विश्लेषण किया गया है। 2021 से 2024 के बीच इन शहरों में प्रॉपर्टी कीमतों और ब्याज दरों में तेजी के कारण अफोर्डेबिलिटी पर दबाव बढ़ा था, लेकिन अब हालात सुधरने की उम्मीद जताई गई है। बदल रहा है रियल एस्टेट का ट्रेंडविशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कम होती ब्याज दरें, धीमी कीमत वृद्धि और बढ़ती आय—ये तीनों मिलकर हाउसिंग डिमांड को मजबूत बनाएंगे। 2026 से 2028 के बीच EMI और आय का अनुपात स्थिर रहने से बाजार में संतुलन बनेगा और खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा। प्रीमियम और लग्जरी घरों की बढ़ी मांगरिपोर्ट में एक और दिलचस्प ट्रेंड सामने आया है-लोग अब प्रीमियम और लग्जरी घरों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। कुल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी करीब 27% रही, जबकि इस सेगमेंट में बिक्री सालाना आधार पर 30% से ज्यादा बढ़ी है। यह संकेत देता है कि खरीदार अब बेहतर सुविधाओं और लाइफस्टाइल को प्राथमिकता दे रहे हैं। 2030 तक और मजबूत होगा सेक्टररिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2030 तक अपर-मिडिल इनकम देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को और मजबूती मिलेगी। बढ़ती आय, शहरीकरण और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण हाउसिंग सेक्टर में लंबे समय तक ग्रोथ बनी रहने की संभावना है। निवेश और खरीदारों के लिए सुनहरा मौकाकुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियां घर खरीदने वालों और निवेशकों दोनों के लिए अनुकूल होती दिख रही हैं। अगर ब्याज दरें नियंत्रित रहती हैं और आय में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में घर खरीदना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान हो सकता है।
Dodachura Smuggling Case : 1900 KG डोडाचूरा केस में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष के बेटे सहित दो को 14 साल की जेल, 1 लाख जुर्माना !

HIGHLIGHTS: 1900 किलो डोडाचूरा तस्करी का मामला दो आरोपियों को 14-14 साल की सजा ट्रक से 76 बोरियों में बरामद हुआ मादक पदार्थ 1-1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया दो अन्य आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी Dodachura Smuggling Case : मध्यप्रदेश। ग्वालियर की विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) अदालत ने वर्ष 2022 में पकड़े गए 1900 किलोग्राम डोडाचूरा तस्करी मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने विवेक पोरवाल और संदीप सिंह तोमर को दोषी करार देते हुए 14-14 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 1-1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। मीराबाई चानू का बयान: खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से आदिवासी खिलाड़ियों को नई पहचान ट्रक से बरामद हुआ था भारी मात्रा में मादक पदार्थ यह मामला मोहना थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस को सूचना मिलने के बाद एबी रोड स्थित चराई मौजा के पास घेराबंदी कर एक ट्रक को रोका गया। तलाशी के दौरान ट्रक से भारी मात्रा में डोडाचूरा बरामद किया गया। Chaitra Purnima 2026: कब है चैत्र पूर्णिमा ? जानें व्रत, स्नान-दान और मुहूर्त की सही तिथि 76 बोरियों में छिपाकर रखी गई थी खेप जांच में सामने आया कि ट्रक में भूसी के नीचे 76 बोरियों में मादक पदार्थ छिपाकर रखा गया था। प्रत्येक बोरी में लगभग 25 किलोग्राम डोडाचूरा था, कुल मिलाकर 1900 किलोग्राम की बड़ी खेप बरामद हुई। SA vs NZ: रन कम, विकेट ज्यादा! जानें किस गेंदबाज ने मचाया धमाल साजिश में शामिल थे कई आरोपी पुलिस ने पूछताछ के आधार पर ब्रजेश सिंह सिकरवार, विवेक पोरवाल, हरीसिंह उर्फ हरीश अंजना और देवकीनंदन पटेल को आरोपी बनाया था। इन पर तस्करी की साजिश रचने का आरोप था। GWALIOR PETROL CRISES :पेट्रोल संकट की अफवाह या हकीकत; ग्वालियर में पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भीड़, क्या सच में खत्म हो रहा है तेल? दो को सजा, दो को बरी अदालत ने विवेक पोरवाल और संदीप सिंह तोमर को एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15 के तहत दोषी मानते हुए सजा सुनाई। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में हरीसिंह उर्फ हरीश अंजना और देवकीनंदन पटेल को दोषमुक्त कर दिया गया।