मध्यप्रदेश में आग का कहरः खेतों से शहर तक भड़की लपटें, किसानों की मेहनत राख

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में तापमान बढ़ने के साथ ही आगजनी की घटनाओं ने भयावह रूप लेना शुरू कर दिया है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से सामने आई घटनाओं ने न केवल प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि आमजन और खासकर किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। भोपाल से लेकर बैतूल, ग्वालियर, झाबुआ, छिंदवाड़ा और नर्मदापुरम तक आग ने ऐसा तांडव मचाया कि देखते ही देखते लाखों की संपत्ति जलकर खाक हो गई। भोपाल जिले के ग्राम कुठार में खड़ी गेहूं की फसल में अचानक आग भड़क उठी। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैली और करीब 15 एकड़ में खड़ी फसल जलकर राख हो गई। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर पानी और ट्रैक्टर ट्रॉली की मदद से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक भारी नुकसान हो चुका था। किसानों की सालभर की मेहनत कुछ ही पलों में खत्म हो गई और वे अब मुआवजे की उम्मीद में प्रशासन की ओर देख रहे हैं। उधर ग्वालियर में एक इलेक्ट्रिक वाहन चलते-चलते आग की चपेट में आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन की बैटरी में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी और कुछ ही देर में पूरा वाहन धू-धू कर जलने लगा। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसने EV सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। झाबुआ जिले के रायपुरिया में एक खेत में लगे मोबाइल टावर में आग लगने से हड़कंप मच गया। टावर से उठती लपटों को देखकर आसपास के ग्रामीण और दुकानदार मौके पर इकट्ठा हो गए। आग में टावर पर लगे महंगे उपकरण और केबल जलकर नष्ट हो गए। पेटलावद से फायर ब्रिगेड पहुंची, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। क्षेत्र में स्थायी फायर ब्रिगेड की व्यवस्था न होने से लोगों में आक्रोश भी देखने को मिला। छिंदवाड़ा में छोटा तालाब क्षेत्र स्थित तिलक मार्केट में एक मशीनरी टूल्स की दुकान में देर रात आग लग गई। धुएं के गुबार से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही तीन दमकल वाहन मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। प्रारंभिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। नर्मदापुरम के इटारसी में रेलवे स्टेशन के सामने स्थित एक भोजनालय में भी आग लगने की घटना सामने आई। स्थानीय लोगों की सतर्कता से तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई, जिसके बाद आग पर समय रहते नियंत्रण पा लिया गया। हालांकि आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है और पुलिस जांच कर रही है। सबसे भयावह स्थिति बैतूल जिले में देखने को मिली, जहां आग ने कई गांवों में तबाही मचा दी। शाहपुर ब्लॉक के सांगवानी गांव में 13 किसानों की करीब 20 एकड़ गेहूं की फसल जल गई। लगभग 300 क्विंटल गेहूं आग की भेंट चढ़ गया। सिलपटी गांव में भी 5 एकड़ फसल नष्ट हो गई। आग इतनी तेजी से फैली कि किसान अपनी जान बचाकर भागने को मजबूर हो गए। जिले के आठ गांवों में फैली इस आग ने किसानों को आर्थिक रूप से तोड़कर रख दिया है। लगातार बढ़ती इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि गर्मी के मौसम में आगजनी की रोकथाम के लिए ठोस और त्वरित उपायों की आवश्यकता है। प्रशासन द्वारा नुकसान का आंकलन किया जा रहा है, लेकिन प्रभावित लोग जल्द से जल्द राहत और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
होर्मुज पर ट्रंप की नीति से भड़के अमेरिकी सांसद, युद्ध खर्च पर भी उठाए सवाल

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। डेमोक्रेटिक सांसद क्रिस मर्फी ने ट्रंप की रणनीति पर तीखा हमला करते हुए इसे “पागलपन” करार दिया है। मर्फी ने कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज स्ट्रेट खुला हुआ था, लेकिन अब अमेरिका उस समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रहा है जिसे उसने खुद पैदा किया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ संघर्ष पर अमेरिका प्रतिदिन करीब दो अरब डॉलर खर्च कर रहा है, जो बेहद बड़ी राशि है। सांसद ने यह भी कहा कि युद्ध में अमेरिकी नागरिकों की जान जा रही है और देश में कई परिवार अपने प्रियजनों को खो चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर संघर्ष जारी रहा तो ऐसी संख्या और बढ़ सकती है। साथ ही वैश्विक स्तर पर ईंधन और अन्य वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल का भी जिक्र किया। होर्मुज पर बढ़ा तनाव अमेरिका और Israel के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्ती बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान कुछ मित्र देशों के जहाजों को ही गुजरने दे रहा है और अन्य टैंकरों पर हमले या शुल्क लगाने की चेतावनी दे रहा है। इस बीच ट्रंप ने ईरान को जलडमरूमध्य खोलने के लिए दी गई समयसीमा बढ़ाते हुए कहा कि फिलहाल ईरानी ऊर्जा संयंत्रों पर बमबारी टाली जाएगी। हालांकि दोनों देशों के बीच युद्धविराम वार्ता अभी भी गतिरोध में बताई जा रही है। ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps ने दावा किया कि उसने होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे तीन जहाजों को चेतावनी देकर वापस भेज दिया। गार्ड्स के अनुसार यह मार्ग “दुश्मन देशों” से जुड़े जहाजों के लिए बंद है। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य जमावड़े के बीच अमेरिका ने अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं, जबकि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में Hezbollah के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए और सैनिक भेजे हैं। इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
गोल्ड की कीमतों में जोरदार तेजी, चांदी रही सुस्त—जानिए बाजार का हाल

नई दिल्ली विश्वव्यापी और कच्चे तेल की सीमा में गिरावट के बीच इस सप्ताह सोने ने शानदार वापसी की। सोने की कीमत में करीब 5.77% की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी में हल्की गिरावट देखने को मिली। बाजार में रिलीज- विज्ञापन के बावजूद सोने का टिकाऊ मजबूत बना हुआ है। बाबक्स पर क्या चल रहा है?शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एमसीएक्स) पर गोल्ड अप्रैल फ्यूचर्स में 0.15% की बढ़ोतरी हुई और यह करीब 1,44,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। वहीं मई सिल्वर फ्यूचर्स 0.09% ग्रुप करीब 2,27,750 रुपए प्रति किराए पर कारोबार करता है। लैपटॉपजे के आंकड़े में भी तेजी से साफइंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 999 करोड़ रुपये वाले सोने का भाव शुक्रवार को 1,42,942 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा, जो सप्ताह की शुरुआत में 1,35,141 रुपये था। यानी पूरे सप्ताह में मजबूत उछाल देखने को मिला। क्यों टूटे सोने के दाम? समझें कारणवैश्विक तनाव और अनिश्चितता के सुरक्षित निवेश के विशेष रूप से सोने की मांग की गारंटीकॉन्स्टेबल सोने की दुकान सेंट्रल द्वाराकच्चे तेल की उपज से उपज का दबाव कुछ कम हुआ हालाँकि, मजबूत अमेरिकी डॉलर और बोल्ड बॉन्ड यील्ड ने बीच-बीच में सोने की तेजी को तोड़ने की भी कोशिश की। कच्चे तेल की गिरावट का असरब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत इस सप्ताह करीब 120 डॉलर से बढ़कर 93 डॉलर प्रति शेयर तक बढ़ गई। इसी तरह की संगति को लेकर चिंता कुछ कम हुई और सोने को गुड़िया स्तर से शुरू करने में मदद मिली। आगे क्या ट्रेंड?विशेषज्ञ के अनुसार, प्रमाणन गोल्ड के लिए 1,36,000-1,40,000 रुपये का स्तर मजबूत समर्थन माना जाता है, जबकि 1,55,000-1,60,000 रुपये के बीच मजबूत समर्थन है। आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति, कच्चे तेल के बांध और केंद्रीय बैंकों के न्याय बाजार की दिशा तय होगी। रिलीज़- अपलोड जारी रह सकता है, लेकिन लॉन्ग स्टार में सोने की स्टोरेज जारी रह सकती है। सुरक्षित निवेश वास्तव में विश्वसनीय बना हुआ हैविश्वसनीयता के बीच गोल्ड एक बार फिर से अन्नू की पहली पसंद बनी दिख रही है, जबकि सिल्वर इंडिकेटेड आइटम में बिजनेस कर रही है।
आयुर्वेद के अनुसार नहाने का सही तरीका: दोष के हिसाब से चुनें पानी का तापमान

नई दिल्ली स्नान सिर्फ शरीर की सफाई नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य से शरीर का अहम हिस्सा है। आयुर्वेद के अनुसार सही तरीकों से स्नान करने से शरीर के दोष वात, पित्त और कफ बने रहते हैं। हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है, संस्थान के पानी का तापमान भी एक जैसा होना चाहिए। गुनगुना पानी सबसे अच्छा हैयदि आपके शरीर में रूखापन, ठंडे हाथ-पैर, जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं बनी हुई हैं, तो यह वात दोष का संकेत हो सकता है। गुनगुने पानी से स्नान करेंसंस्थान के बाद तेल से अभ्यंग (मालिश) जरूर करेंइससे शरीर का रूखापन कम होगा और त्वचा को पोषण मिलेगा गुनगुना पानी वात को शांति देता है और शरीर को आराम का अनुभव कराता है। कफ प्रकृति: गर्म पानी से मिलेगा फायदायदि शरीर में भारीपन, सुस्ती, बार-बार सर्दी या बलगम की समस्या रहती है, तो यह कफ दोष बढ़ने का संकेत है। गर्म पानी से स्नान करेंसुबह का समय नहाना बहुत खतरनाक हैठंडा पानी से परहेज़, क्योंकि इससे कफ और बढ़ सकता है गर्म पानी शरीर को सक्रिय करता है और कफ को कम करने में मदद करता है। पित्त प्रकृति: सामान्य या ठंडा पानी सहीयदि आपको गर्मी अधिक लगती है, पसीना अधिक आता है, मुंहासे या जलन की समस्या रहती है, तो यह पित्त दोष का संकेत है। सामान्य या साधारण ठंडे पानी से स्नान करेंबहुत ज्यादा ठंडा पानी का उपयोग न करेंइससे शरीर का सबसे अच्छा स्टॉक रहता है यह विधि शरीर की गर्मी को शांत करती है और पित्त को नियंत्रित करती है। स्नान से जुड़े कुछ जरूरी नियमबहुत ज्यादा ठंडा या बहुत ज्यादा गर्म पानी रोज न लेंभोजन के तुरंत बाद स्नान न करेंसुबह स्नान करना सबसे अच्छा माना जाता हैमौसम और शरीर की स्थिति के अनुसार पानी की तापमान में गिरावट शरीर की प्रकृति की प्रशंसा, संभवतः पूरा लाभआयुर्वेद के अनुसार अगर आप अपनी प्रकृति के अनुसार स्नान करते हैं, तो यह सिर्फ शरीर को साफ नहीं करता है, बल्कि कई शर्तों से भी सिखाता है।
बार-बार सिर दर्द से हैं परेशान? इसकी वजह हो सकती है आपकी डाइजेशन प्रॉब्लम

नई दिल्ली हम अक्सर सिर दर्द को लेकर तनाव, थकान या अधिक काम का नतीजा मान लेते हैं, लेकिन अगर समस्या बार-बार हो रही है तो इसका एक बड़ा कारण खराब पाचन भी हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में पाचन तंत्र और मस्तिष्क का गहरा संबंध होता है। जब पेट सही तरीकों से काम नहीं करता तो इसका असर सिर पर भी दिखने लगता है। पाचन क्रिया तो सिर दर्द क्यों होता है?जब पाचन क्रिया खराब होती है तो शरीर में गैस, कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। इससे शरीर के दोष-वात, पित्त और कफ-असंतुलित हो जाते हैं, जो धीरे-धीरे मस्तिष्क के तंत्रिकाओं को प्रभावित करते हैं। इसके परिणामस्वरूप बार-बार सिर दर्द, भारीपन या चक्कर जैसे चित्र सामने आते हैं। आयुर्वेद में यह सिर्फ सिर की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे शरीर का संकेत है कि अंदर कुछ समानता है। पेन किलर नहीं, जड़ पर काम करोअक्सर लोगों को सिर दर्द होता ही है, पेनकिलर लेकर तुरंत राहत पा लेते हैं, लेकिन यह सिर्फ अस्थायी समाधान है। अगर वास्तविक वसा पाचन है, तो दवा से दर्द दब जाएगा, लेकिन समस्या बार-बार खत्म हो जाएगी। इसलिए जरूरी है कि पेट को ठीक किया जाए। आयुर्वेदिक उपाय जो दिला सकता है राहतनासिका क्रिया: नाक में औषधीय तेल की कुछ बूंदें गिराने से मस्तिष्क पर दबाव कम होता है और पित्त की मात्रा होती है।धनिया-मिश्री का पानी: रात में रात भर पीने से कब्ज में आराम मिलता है और पाचन सुदृढ होता है।सोंठ का लेप: सोंठ (सुखी अदरक) को पानी में वृद्धावस्था में लगाने से सिर दर्द में आराम मिल सकता है। खान-पान से क्या है कनेक्शन?ग़लत खान-पान जैसे अधिकतर ताल-भुना, क्षार या देर रात का खाना पाचन को ख़राब करता है। इससे गैस और कोष्ठबद्धता होती है, जो सिर दर्द का कारण बन सकती है। इसलिए— प्रभाव और सुपाच्य भोजन करेंसमय पर खाना बनानाअधिक पानी पियेदेर रात भारी भोजन से गोद लेना कब किराया लेना जरूरी है?यदि सिर दर्द लगातार बना रहता है, बहुत तेज होता है या अन्य लक्षण (जैसे उल्टी, चक्कर आना, नजरें धुंधली होना) भी साथ में हैं, तो इसे दांतों में न लें और डॉक्टर से सलाह जरूर लें। यह किसी अन्य गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। पेट ठीक है तो सिर भी ठीक हैसिर दर्द को केवल सिर तक सीमित सीमा तक गलत माना जा सकता है। सही पाचन, संतुलित आहार और कठिनाइयों से इस समस्या को काफी हद तक बचाया जा सकता है।
तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल से राहत के आसान उपाय, अपनाएं ये प्राकृतिक तरीके

नई दिल्ली आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव की स्थिति आम बात है। काम और निजी जिंदगी में चल रही उठा-पटक के बीच जिंदगी को मापना कर पाना मुश्किल होता है, और तनाव को झेलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में चाहते हैं कि जब भी शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर बढ़े तो शरीर के बाकी हार्मोन भी असंतुलित हो जाएं। ऐसे में अगर लंबे समय तक लगातार यही लेवल बना रहे तो इससे शरीर को भारी नुकसान हो सकता है। कोर्टिसोल को सरल भाषा में तनाव हार्मोन के नाम से जाना जाता है। यह दोनों किडनी के ऊपर बनी एक ग्रंथि है, जिसे एड्रेनल ग्रंथि कहा जाता है। इसकी सक्रियता अगर शरीर में ज्यादा होती है तो यह शरीर और दिमाग दोनों के लिए नुकसानदायक बन जाता है। यह खराब आदत, तनाव, कम नींद, खराब खाना और कम शारीरिक स्थिति से अधिक बनना लगता है। इससे चिंता, वजन कम होना, कमजोरी महसूस होना, सिर भारी होना और नींद में परेशानी बनी रहती है, लेकिन आयुर्वेद में कॉर्टिसोल को कम करने के प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं। गहरी नींद के लिए कोर्टिसोल को कम करना बहुत जरूरी है। अच्छी और गहरी नींद लेने से शरीर में भरपूर हार्मोन बनता है, जो कॉर्टिसोल को कम करने में मदद करता है। रोजाना कम से कम 8-10 घंटे की नींद जरूर लें। इससे मन तन और दोनों प्रभाव महसूस होते हैं। अपरिभाषित में इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाएं। साथ ही, बार-बार खाने से बचें और तय समय पर खाना बनाएं, जिससे पेट को खाना पचाने के लिए पूरा समय मिले और पोषण भी पूरे शरीर को मिले। आंतरायिक फास्टिंग कोर्टिसोल को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। कोर्टिसोल को कम करने के लिए धूप और विटामिन डी का बड़ा रोल है। प्रतिदिन 10 मिनट की धूप जरूर लें। इससे शरीर में विटामिन डी की कमी पूरी तरह से होती है और कोर्टिसोल का प्रभाव शरीर पर कम दिखाई देता है। इसके साथ ही सॉसेज युक्त आहार लेना भी होता है। अपने आहार में केला, नारियल पानी, हरी सब्जी, टमाटर और मूंगफली को जरूर शामिल करें।
पनीर का सेवन हर किसी के लिए सही नहीं! जानिए किन लोगों को करना चाहिए परहेज

नई दिल्ली शाकाहारी लोगों के लिए पनीर प्रोटीन एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है। स्वाद और पोषण से भरपूरता के कारण यह बच्चों से लेकर युवाओं तक सभी को पसंद आता है। लेकिन हर सामान हर किसी के लिए हर समय सही नहीं होता। आयुर्वेद के अनुसार सही तरीके से खाया जाए तो अमृत समान होता है, अन्यथा यह पाचन संबंधी घटक भी पैदा हो सकता है। किन लोगों को पनीर खाने से बचना चाहिए?सबसे पहले उन लोगों की बात करें जिनमें पनीर सीमित मात्रा में या डॉक्टर की सलाह से ही खाना चाहिए- यूरिक एसिड बढ़ा हुआ हो: जिन लोगों को हाई यूरिक एसिड की समस्या है, उन्हें कम खाना खाना चाहिए। अधिक प्रोटीनयुक्त यूरिक एसिड को बढ़ाया जा सकता है, जिससे जोड़ों में दर्द बढ़ सकता है।फ़्रैंच पाचन वाले लोग: फ़्लोचाडा डी फ़ाल्कन है, उन्हें भारी मात्रा में चीज़ मिल सकती है। कच्ची चीज़ में पेट में गैस, दर्द और अपच की वजह बन सकती है।कफ या सांस की समस्या: साइनसाइटिस या बार-बार खांसी-जुकाम से परेशान लोगों को खाना कम खाना चाहिए, क्योंकि इसमें कफ हो सकता है।मोटापा और उच्च कोलेस्ट्रॉल: मोटापे या उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। पनीर खाने का सही तरीका क्या है?पनीर बनाने के लिए उसका सही सेवन अत्यंत आवश्यक है- हमेशा ताज़ा और घर का बना हुआ पनीर ही आकर्षककच्ची चीज़ खाने से बचते हुए, इसे पकाकर ही सेवन करेंपाचन के लिए अदरक, काली मिर्च और हल्दी जैसे पाउडर के साथ प्रभावीअधिक तला-भुना या भारी ग्रेवी वाला पनीर नियमित रूप से न स्थिर पनीर खाने का सही समयआयुर्वेद के अनुसार पनीर का सेवन दिन के समय में आदर्श में करना सबसे अच्छा माना जाता है। रात में पनीर खाने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि उस समय पाचन शक्ति कम हो जाती है और इससे पेट में भारीपन, गैस और अपच का कारण बन सकता है। क्यों होती है पनीर से परेशानी?पनीर “गुरु” (भारी) खाद्य पदार्थों में आता है, यानी इसे पचाने में समय लगता है। गलत समय, गलत मात्रा या गलत तरीके से खाना खाने से खट्टी डकार, गैस और पेट दर्द जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। सही तरीके अपनाएँ, लाभ लाभपनीर सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसकी सही मात्रा, सही समय और सही तरीके से खाना जरूरी है। अगर आप अपने शरीर की जरूरत और पाचन क्षमता के अनुसार इसका सेवन करेंगे, तो यह आपको पोषण भी देगा और नुकसान से भी बचाएगा।
दिल्ली का नया बजट 2026-27: राजधानी में तेजी से डिलीवरी और प्रशासनिक सुधारों का रोडमैप

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा के सत्र के अंतिम दिन 2026-27 का बजट सर्वसम्मति से पास हो गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट पेश करते हुए स्पष्ट किया कि अब राजधानी में काम करने का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। उनका संदेश साफ था, यह नई सरकार है और काम करने का तरीका भी नया है। अब फोकस सिर्फ डिलीवरी पर होगा। सीएम ने भरोसा दिलाया कि अधूरे प्रोजेक्ट पूरे किए जाएंगे, जनता के पैसे का सही हिसाब होगा और हर नागरिक को उसका हक मिलेगा। रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की बुनियादी सुविधाएं अब उनकी सरकार की प्राथमिकता हैं। अब दिल्ली को बहाने नहीं, परिणाम चाहिए। अब हेडलाइन्स नहीं, गाइडलाइन्स के साथ काम होगा और हर नागरिक को उसका अधिकार दिलाना हमारी जिम्मेदारी है। यह बयान प्रशासनिक बदलाव और तेज कामकाज का संकेत देता है। इस बजट की सबसे बड़ी खासियत पूंजीगत खर्च यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर पर जोर है। सीएम ने कहा, दिल्ली के सर्वांगीण विकास के लिए इस बार पूंजीगत खर्च पर अब तक का सबसे बड़ा बजट आवंटन किया गया है। उनका कहना है कि यह बजट केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में काम आएगा। सीएम ने पिछली सरकार पर भी निशाना साधते हुए बताया कि दिल्ली पर ₹47,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज छोड़ा गया, जिसमें ₹27,547 करोड़ अब भी बकाया है। उन्होंने आरोप लगाया, PWD के एक प्रोजेक्ट में बिना काम हुए ₹250 करोड़ का भुगतान कर दिया गया, जो गंभीर अनियमितता को दिखाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सरकार खिलाड़ियों, EWS वर्ग, स्कॉलरशिप, अवॉर्ड्स और किशोरी योजना से जुड़े लंबित भुगतान को साफ कर रही है। बजट में कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया गया है। सीएम ने बताया कि मुनक नहर के साथ ₹5,000 करोड़ की एलिवेटेड रोड बनाई जा रही है, जिससे ट्रैफिक जाम में राहत मिलेगी। इसके अलावा मेट्रो विस्तार, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) ट्रांजिशन और सड़कों के बड़े निर्माण पर भी जोर दिया गया है। ग्रीन और एडमिनिस्ट्रेटिव सुधार भी इस बजट का अहम हिस्सा हैं। दिल्ली में पहली बार 4,200 हेक्टेयर रिज एरिया को फॉरेस्ट लैंड घोषित किया गया है और अगले चार साल में 35 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासनिक सुधारों के तहत लाइसेंस प्रक्रिया आसान होगी, फायर NOC डिजिटल किया जाएगा और 1.5 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टीज को बिजली कनेक्शन देने की योजना है। इस बजट के साथ सीएम रेखा गुप्ता ने यह साफ कर दिया कि अब बहाने नहीं, सिर्फ परिणाम होंगे। जमीनी बदलाव, बुनियादी सुविधाओं की तेजी और प्रशासनिक सुधार दिल्ली के नागरिकों को सीधा लाभ पहुंचाएंगे और राजधानी के विकास की दिशा को नई गति देंगे।
जमाखोरी पर बड़ा एक्शन LPG जब्ती और FIR तेज मांग से पेट्रोल डीजल व्यवस्था पर दबाव

भोपाल । मध्यप्रदेश में गैस सिलेंडर और पेट्रोल डीजल की आपूर्ति को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जमाखोरी और अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। राजधानी भोपाल सहित प्रदेशभर में अब तक 9 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है जबकि 2888 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत की गई है जिसका उद्देश्य जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाना है। प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया गया जिसमें अब तक 2046 स्थानों पर छापेमारी और निरीक्षण किया गया। इन कार्रवाइयों के दौरान बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर अवैध रूप से संग्रहित पाए गए जिन्हें तुरंत जब्त कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में एलपीजी और पेट्रोल डीजल का कुल स्टॉक पर्याप्त है और आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि दूसरी ओर जमीनी स्थिति कुछ जिलों में अलग नजर आ रही है। पेट्रोल और डीजल की सामान्य दैनिक बिक्री जहां लगभग 18548 लाख लीटर रहती है वहीं हाल के दिनों में कई जिलों में इसकी मांग 2 से 2.5 गुना तक बढ़ गई है। इस अचानक बढ़ी मांग के चलते कई पेट्रोल पंपों पर लंबी लंबी कतारें देखी गईं और कुछ स्थानों पर अस्थायी रूप से स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति भी बन गई। सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के लिए वितरण केंद्रों पर अतिरिक्त समय तक काम किया जा रहा है ताकि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाया जा सके। इसी बीच पेट्रोल पंप संचालकों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। पेट्रोलियम कंपनियों ने अब तक दी जाने वाली क्रेडिट सुविधा को बंद कर दिया है जिसके तहत पंप संचालकों को भुगतान के लिए एक सप्ताह का समय मिलता था। इस व्यवस्था के खत्म होने से कई पेट्रोल पंपों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है और कुछ पंपों पर ईंधन की उपलब्धता संकट के स्तर तक पहुंच गई है। पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि तेल कंपनियां न तो उधारी की सुविधा दे रही हैं और न ही पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित कर रही हैं जिससे पंप संचालकों के सामने संचालन का संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश में कुल करीब 4500 पेट्रोल पंप संचालित हैं जिनमें से लगभग 260 केवल भोपाल में हैं। ऐसे में यदि सप्लाई और भुगतान की स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। कुल मिलाकर एक तरफ प्रशासन जमाखोरी पर सख्ती दिखा रहा है तो दूसरी ओर बढ़ती मांग और बदली हुई सप्लाई व्यवस्था ने स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और तेल कंपनियां मिलकर इस संकट का समाधान कैसे निकालती हैं ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
ऊर्जा सेक्टर में बूस्ट: Coal India का 3,300 करोड़ का निवेश, 8 नई वाशरी स्थापित

नई दिल्ली। देश की प्रमुख कोयला कंपनी Coal India Limited ने कोकिंग कोल की गुणवत्ता सुधारने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए बड़ा निवेश ऐलान किया है। कंपनी करीब 3,300 करोड़ रुपये खर्च कर 8 नई कोकिंग कोल वॉशरियां स्थापित करेगी। इस कदम को भारत के स्टील सेक्टर को मजबूत करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य है कि इन वॉशरियों को 2029-30 तक चालू कर दिया जाए। क्षमता में होगा बड़ा इजाफा, दोगुनी से ज्यादा बढ़ेगी ताकतनई वॉशरियों की कुल क्षमता 21.5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTY) होगी। फिलहाल Coal India Limited के पास 10 वॉशरियों का नेटवर्क है, जिसकी कुल क्षमता 18.35 MTY है। यानी आने वाले वर्षों में कंपनी अपनी वॉशिंग क्षमता को दोगुने से भी अधिक बढ़ा देगी। इससे न सिर्फ उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि कोयले की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। क्या होती है कोकिंग कोल वॉशरी?कोकिंग कोल वॉशरी एक ऐसा संयंत्र होता है, जहां कच्चे कोयले से राख, मिट्टी और पत्थर जैसी अशुद्धियों को हटाया जाता है। इससे कोयले की गुणवत्ता बेहतर होती है और वह स्टील उत्पादन के लिए उपयुक्त बन जाता है। भारत में कोयले में राख की मात्रा 25% से 45% तक होती है, जो इसकी गुणवत्ता को प्रभावित करती है। ऐसे में वॉशरियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। कहां लगेंगी नई वॉशरियां? नई बनने वाली 8 वॉशरियों में से-5 वॉशरियां (14.5 MTY) Central Coalfields Limited के तहत स्थापित की जाएंगी3 वॉशरियां (7 MTY) Bharat Coking Coal Limited के अंतर्गत विकसित होंगी इसके अलावा कंपनी मौजूदा वॉशरियों के आधुनिकीकरण और नवीनीकरण पर भी करीब 300 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जिससे उनकी दक्षता और उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके। पुरानी परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण और निजी साझेदारीCoal India Limited राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के तहत अपनी पुरानी वॉशरियों का भी उपयोग बढ़ाने की योजना बना रही है। कुछ बंद पड़ी इकाइयों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही कंपनी Tata Steel जैसी निजी कंपनियों के साथ मिलकर तकनीकी सहयोग बढ़ा रही है, ताकि वॉशिंग क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सके। आयात में कमी और विदेशी मुद्रा की बचतभारत में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल की कमी के कारण भारी मात्रा में आयात करना पड़ता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है। Coal India Limited की यह पहल आयात निर्भरता कम करने, लागत घटाने और घरेलू स्टील उद्योग को सस्ता व बेहतर कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद करेगी। आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदमयह निवेश न सिर्फ कोल सेक्टर बल्कि पूरे औद्योगिक ढांचे को मजबूती देगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी बढ़ावा मिलेगा।