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कुछ मिनटों की स्क्रीन टाइम, लेकिन पहचान की गारंटी: संध्या मृदुल की कहानी..

नई दिल्ली: फिल्मी दुनिया में अक्सर यही माना जाता है कि बड़ा रोल ही बड़ी पहचान दिलाता है, लेकिन कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो छोटे किरदार में भी दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ जाते हैं। संध्या मृदुल इन्हीं कलाकारों में से एक हैं। साल 2002 में आई फिल्म साथिया में सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद उन्होंने अपने दमदार अभिनय से लोगों का ध्यान खींचा। रानी मुखर्जी के किरदार की बहन दीना के रूप में संध्या ने एक छोटे रोल में भी ऐसा प्रभाव छोड़ा कि दर्शकों और क्रिटिक्स ने उन्हें नोटिस करना शुरू कर दिया। यही वह फिल्म थी जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी और उन्हें इंडस्ट्री में एक मजबूत कलाकार के रूप में स्थापित किया। संध्या मृदुल का जन्म मुंबई में हुआ। उनके पिता पी.आर. मृदुल पेशे से वकील थे और बाद में जज बने। बचपन में ही परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया और पढ़ाई के लिए उन्हें जयपुर भेजा गया। संध्या के जीवन में बड़ा झटका तब आया जब 14 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उनके बड़े भाई ने उनकी जिम्मेदारी संभाली। पढ़ाई में संध्या ने हमेशा उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने गणित में ग्रेजुएशन किया और पोस्ट ग्रेजुएशन मार्केटिंग में की, इसके बाद उन्होंने कॉर्पोरेट जॉब भी की। साधारण नौकरी से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखना आसान नहीं था, लेकिन किस्मत ने उनका साथ दिया। टीवी शो स्वाभिमान से उनके करियर की शुरुआत हुई। इसके बाद बनेगी अपनी बातकोशिश और हू ब हू जैसे धारावाहिकों ने उन्हें टीवी की दुनिया में मजबूत पहचान दिलाई। टीवी के बाद संध्या मृदुल ने फिल्मों की ओर रुख किया। साथिया के बाद उन्होंने साल 2005 में आई पेज 3 में एयर होस्टेस का किरदार निभाया, जिसे क्रिटिक्स ने खूब सराहा। इसके बाद उन्होंने हनीमून ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेडडेडलाइन: सिर्फ 24 घंटे और द ग्रेट इंडियन बटरफ्लाई जैसी फिल्मों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई। संध्या सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं रहीं। उन्होंने टीवी और वेब सीरीज में भी काम किया और हर प्लेटफॉर्म पर अपनी छाप छोड़ी। झलक दिखला जा में फर्स्ट रनर-अप रहने से उनकी लोकप्रियता और बढ़ी। उनकी मेहनत और प्रतिभा के लिए उन्हें कई अवॉर्ड्स और नॉमिनेशन भी मिले, जिनमें पेज 3 के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का सम्मान शामिल है। अपने करियर के दौरान संध्या ने कई मुश्किलों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने हमेशा अलग और चुनौतीपूर्ण किरदारों को चुना और अपनी एक्टिंग से दर्शकों को प्रभावित किया। संध्या मृदुल की कहानी यह साबित करती है कि छोटा रोल भी बड़ा प्रभाव छोड़ सकता है, बशर्ते उसमें प्रतिभा और मेहनत हो।

जुलाई से नया नियम लागू: मिस-सेलिंग पर RBI का शिकंजा, ग्राहकों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी हल्दी कंपनियों के बीच ‘मिस-सेलिंग’ पर सहमति की तैयारी की है। प्रस्तावित नए नियम जुलाई 2026 से लागू हो सकते हैं, जैसे मुख्य उद्देश्य निवेशकों को गलत या बुनियादी जानकारी हासिल करने वाले वित्तीय योजनाओं पर रोक लगाना है। इन प्रावधानों के लागू होने के बाद यदि किसी ग्राहक को पता चलता है कि उसके साथ धोखे से कोई उत्पाद निकाला गया है, तो वह शिकायत करेगा और जांच के मामले में सही पाए जाने पर बैंक को पूरा पैसा लौटाना होगा। मिस-सेलिंग क्या है? आसान भाषा में‘मिस-सेलिंग’ का मतलब ग्राहक की ज़रूरत, प्रोफ़ाइल या समझ के आधार पर वित्तीय उत्पाद युवाओं के लिए गलत जानकारी है। ऐसा अक्सर होता है जब बैंक कर्मचारी अपने निवेशकों या इंसेंटिव के दबाव में निवेशकों को बीमा, फंड फंड या अन्य थर्ड पार्टी उत्पाद बेचते हैं। कई बार रिस्क, लॉक-इन होम या रिटर्न से जुड़ी अहम जानकारी छिपा ली जाती है। उदाहरण के तौर पर पर-एफडी ने ग्राहकों को यूलिप से “सेफ इन्वेस्टमेंट” में शामिल कियालोन के साथ इंश्योरेंश जॉइंट देनाबुजुर्ग व्यक्ति को लंबी अवधि की स्थायित्व थमा देना ये सभी मिस-सेलिंग के क्लासिक केस माने जाते हैं। जुलाई 2026 से क्या बदला जाएगा? भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्रस्तावित पदासीन पदों के लिए आवेदकों के लिए स्पष्ट और बंधनकारी प्रणाली बनाई जाएगी। यदि ग्राहक को समय सीमा निर्धारित नहीं है, तो वह 30 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज कर सकता है। अगर जांच में मिस-सेलिंग साबित होती है, तो-उत्पादों को रद्द करना होगाग्राहक को पूरी रकम लौटानी होगीहुए नुकसान की खोज भी करनी होगीइसके अलावा, बैंकों को अपने कर्मचारियों को ऐसे उत्पाद बेचने के लिए गलत प्रोत्साहन देने से भी रोकना होगा। सिस्टम से सुपरमार्केट प्लांटनए स्नातक के अधीन संस्थानों को हर स्टायर्ड पार्टी उत्पाद की बिक्री के लिए 30 दिन के अंदर ग्राहक से अंतिम संस्कार लेना अनिवार्य होगा। इस डेटा के आधार पर हर 6 महीने में रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें सिस्टम में टुकड़े और टुकड़े होंगे। बदनसीब की वजहपिछले कुछ वर्षों में बैंकों की ऑर्थोडॉक्स पार्टी के उत्पादों की कमाई तेजी से बढ़ी है। उदाहरण के तौर पर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने वित्त वर्ष 2024-25 में इस माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का कमीशन कमाया। इसी प्रवृत्ति को देखते हुए सरकार और जनरल जनरल को अब सबसे ज्यादा छूट दी गई है। हाल ही में निर्मला सीतारमण ने भी बैंकों को अपने मूल कार्य-जमा और कर्ज-पर ध्यान देने की सलाह दी थी। वेबसाइट के लिए क्या जरूरी है?ऐसे विंटेज को भी रहने की ज़रूरत है। किसी भी वित्तीय उत्पाद के रिकॉर्ड्स से पहले— सभी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ेंजोखिम और ऑटोमोबाइल को मंजूरीकेवल मूल्यवान वादों पर भरोसा न करेंआवश्यकता है लिखित जानकारी लेने की यदि आपको लगता है कि आपके साथ कुछ गलत हुआ है, तो आप अपने बैंक की वेबसाइट या संबंधित लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं। वाद-विवाद के हित में बड़ा कदमभारतीय रिज़र्व बैंक का यह कदम नेटवर्क सिस्टम में निवेशकों की रक्षा करने की दिशा को बढ़ाना और महत्व देना माना जा रहा है। इससे मिस-सेलिंग जैसी समस्याओं पर काफी हद तक लगाम लगने की उम्मीद है।

KKR vs MI: 35 मुकाबलों में किस टीम का रहा दबदबा? जानिए पूरा रिकॉर्ड

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में जब मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स का मुकाबला होगा- तो मुकाबला सिर्फ दो मैचों के बीच नहीं बल्कि इतिहास के बीच और स्थिर फॉर्म के बीच भी होगा। अब तक दोनों टीमों के बीच कुल 35 मैच खेले जा चुके हैं, जिसमें मुंबई इंडियंस ने 24 गोलकीपर की स्पष्ट बढ़त बनाई है, जबकि केकर को सिर्फ 11 जीत ही मिल पाई हैं। प्रारंभिक प्रारंभिक में एमआई का पूर्ण तरह का बाज़ारआईपीएल के शुरुआती सीज़न में मुंबई इंडियंस ने केकेआर पर पूरी तरह से सुपरमार्केट बनाया। 2008 और 2009 में ऑल सब्जेक्ट मुंबई ने जीत हासिल की। इसके बाद 2010 और 2011 में भी टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और जीत हासिल की। उस दौर में केकेआर की मुंबई के सामने पहली नजर थी। बीच के सीज़न में केकेआर ने दी टक्कर2012 से 2015 के बीच कोलकाता नाइट राइडर्स ने वापसी के संकेत दिये। खास तौर पर 2014 और 2015 में खेले गए 4 मैचों में से 3 में जीत हासिल कर केकेआर ने दिखाया कि वह अब ग्रुप में शामिल हो सकते हैं। इस दौरान टीम ने अपना सामान भी रखा। 2016-2018: फिर एमआई का अनडोर राज2016 से 2018 के बीच मुंबई इंडियंस ने केकेआर के खिलाफ लगातार 7 गोलकीपर से अपनी बादशाहत साबित की। यह दौर पूरी तरह से मुंबई के नाम पर रखा जा रहा है, जहां केकर को जीत के लिए परेशान होना पड़ा। हाल के प्राचीन में नवीनतम रुझानअगर पिछले 4 सीजन की बात करें तो कहानी में कुछ अलग नजर आती है। इस दौरान खेले गए 6 मुकाबलों में से 4 मैचों में कोलकाता नाइट राइडर्स ने जीत हासिल की है। इससे साफ है कि केकेआर अब मजबूत कंपनी लौट आई है और मुंबई को चुनौती दे रही है। एमआई आगे, केकेआर पीछे लेकिन मजबूतमुंबई इंडियंस आईपीएल की सबसे सफल रेस में से एक है और 2013, 2015, 2017, 2019 और 2020 में कुल 5 खिताब जीते हैं। वहीं कोलकाता नाइट राइडर्स ने 2012, 2014 और 2024 में 3 बार ट्रॉफी अपने नाम की है। दोनों ग्राफिक्स के पास के मैच विनर प्लेयर्स की भरमार है, जो ग्लूकोज़ को चकमा देते हैं। स्टार खिलाड़ियों से भरी स्क्वॉडमुंबई इंडियंस के वैज्ञानिक हार्दिक पंड्या कर रहे हैं, जबकि टीम में रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव और जसप्रित बुमरा जैसे मैच विनर खिलाड़ी मौजूद हैं। दूसरी ओर केकर के पास अजिंक्य रहाणे, सुनील नरेन और रिंकू सिंह जैसे खिलाड़ी हैं, जो किसी भी मैच का रुख बदल सकते हैं। इतिहास एमआई के साथ, फॉर्म केकेआर के पक्ष मेंकुल मिलाकर आंकड़े मुंबई इंडियंस के पक्ष में हैं, लेकिन कोलकाता नाइट राइडर्स के प्रदर्शन के आधार पर कोई भी दस्तावेज नहीं लिया जा सकता है। ऐसे में आईपीएल 2026 का यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने की पूरी उम्मीद है।

सुसनेर से कुरावर जा रही बस बनी हादसे का शिकार तेज रफ्तार ने ली एक जान

शाजापुर । मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ते सड़क हादसे एक बार फिर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं और ताजा मामला आगर मालवा जिले से सामने आया है जहां तेज रफ्तार का कहर एक और जान ले गया। सुसनेर से कुरावर जा रही एक निजी यात्री बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई जिससे मौके पर अफरा तफरी और चीख पुकार मच गई। इस दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि एक दर्जन से अधिक यात्री घायल हो गए जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार यह बस सुसनेर से कुरावर की ओर जा रही थी तभी बड़ागांव के पास चालक बस पर नियंत्रण खो बैठा और वाहन सड़क किनारे पलट गया। बस के पलटते ही यात्रियों में चीख पुकार मच गई और कई लोग अंदर ही फंस गए। आसपास के ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया और स्थानीय लोगों की मदद से बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया। घटना के तुरंत बाद सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को नलखेड़ा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो पाई है और पुलिस उसकी शिनाख्त करने में जुटी हुई है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में बस की तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है हालांकि तकनीकी खराबी या अन्य कारणों की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में लगातार हो रहे ऐसे हादसे यह संकेत देते हैं कि यातायात नियमों का पालन और वाहनों की नियमित जांच बेहद जरूरी है। खासकर निजी बसों में ओवरस्पीडिंग और लापरवाही से वाहन चलाने की घटनाएं आम होती जा रही हैं जो यात्रियों की जान के लिए खतरा बन रही हैं। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन सख्ती दिखाते हुए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे और लोगों में भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए ताकि इस तरह के दर्दनाक हादसों को रोका जा सके। फिलहाल इस दुर्घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है और लोग घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

शेयर बाजार पर दबाव बरकरार: विदेशी निवेशकों की बिकवाली से लगातार पांचवीं साप्ताहिक गिरावट

नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का नाम थमाने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बहुलता और विदेशी उपभोक्ताओं की लगातार बिकवाली रही। सप्ताह के आखिरी प्रमुख दिन निफ्टी 50 2.09% बढ़त के साथ 22,819.60 पर बंद हुआ, जबकि पूरे सप्ताह में इसमें 0.52% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि पिछले एक महीने में शेयरधारकों को करीब 8.23% का नुकसान हुआ है, लेकिन जिन निवेशकों की चिंता काफी बढ़ गई है। गोदाम और बैंक में भी भारी दबाववहीं बीएसई सेंसेक्स में भी गिरावट साफ नजर आई और यह शुक्रवार को 1,690 अंक 2.25% 73,583.22 पर बंद हुआ। पूरे हफ्ते में करीब 1.94% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एक महीने में यह 8.29% तक टूट गई। नेटवर्क सेक्टर की बात करें तो निफ्टी बैंक सबसे ज्यादा दबाव में रहा और शुक्रवार को 2.67% 52,274 के करीब बंद हुआ। पूरे सप्ताह में इसमें 2.16% की गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक तनाव और सरकारी कच्चे तेल का असरबाजार पर सबसे बड़ा असर संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का है, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड की पार्टनरशिप 98 से 115 डॉलर प्रति शेयर के बीच बनी हुई है, जिसने स्थिरता और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। कच्चे कच्चे तेल का सीधा असर भारत जैसे मजबूत देश पर पड़ता है, जिससे आरएमबी भी दबाव में आ गई। सेक्टर में मिलाजुला रुख, मेटल और पीएसयू बैंक सबसे खराबसेक्टोरल परफॉर्मेंस की बात तो मेट्रिक मेटल और पीएससीयू बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। वहीं आईटी और फार्मास्युटिकल सेक्टर में छोटी-छोटी जगहें दिखाई दीं, जहां आईटी में 1.17% और फार्मास्युटिकल में 0.11% की बढ़त दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी प्रेशर में रहे—निफ्टी मिडकैप100 में 1.38% और स्मॉलकैप100 में 0.63% की गिरावट दर्ज की गई। FII की बिकवाली, DII का सहाराबाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली रही। सप्ताह भर में करीब 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये की बिक्री बढ़ी, जबकि मार्च में यह आंकड़ा 1.13 लाख रुपये करोड़ से ज्यादा तक पहुंच गया। वहीं घरेलू उद्यमों (डीआईआई) ने 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला। क्या? अहम किरदार पर टिकी नजरनिफ्टी 50 22,850-22,750 के अहम सपोर्ट जोन पर टिकने की कोशिश कर रहा है। ऊपर की तरफ 23,000-23,100 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है। वहीं निफ्टी बैंक के लिए 52,000-51,800 का सपोर्ट जोन है, जबकि 53,000-53,600 के लेवल पर सपोर्ट मिल सकता है। प्रकाशन- जारी रहने के संकेतविशेषज्ञ का मानना ​​है कि जब तक वैश्विक तनाव और कच्चे तेल के कारखाने में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालाँकि घरेलू निवेश और बाज़ारों में सुधार से बाज़ार को आगे सहारा मिल सकता है।

हबल स्पेस टेलीस्कोप: ब्रह्मांड की ‘टाइम मशीन’ जो दिखाती है अरबों साल पुरानी दुनिया

नई दिल्ली ब्रह्मांड के रहस्यों का पता लगाने में इंसान की सबसे बड़ी सुविधा में से एक है हबल स्पेस टेलीस्कोप। इसे अक्सर “टाइम्समशीन” कहा जाता है, क्योंकि यह हमें अरबों वर्षों पुराने ब्रह्मांडों की तस्वीरें दिखाता है। असल में, जब हबल दूर स्थित पोजीशन और ग्लासों की रोशनी को स्थापित किया जाता है, तो वह लाखों-करोड़ों साल पहले रोशन होती है। यानी हम जो घटित होते देख रहे हैं, वह पिंड वर्तमान नहीं बल्कि अतीत घटित है।रोशनी का सफर ही है टाइम स्टोर्स का राजखगोल विज्ञान में ‘प्रकाश-वर्ष’ की दूरी की इकाई है, जो बताती है कि प्रकाश एक वर्ष में कितनी दूरी तय करता है। रोशनी की गति लगभग 3 लाख किमी/सेकंड है। उदाहरण के लिए, सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक पहुँचने में करीब 8 मिनट लगते हैं, यानी हम सूरज को हमेशा 8 मिनट पुराने देखते हैं। जब बात बहुत दूर स्थित बिल्डरों और इलेक्ट्रॉनिक्स की होती है, तो यह समय लाखों अरब वर्षों तक पहुंच जाता है। यही कारण है कि हबल स्पेस टेलीस्कोप हमें ब्रह्मांड के इतिहास की झलक दिखाता है। पृथ्वी से ऊपर, साफ़ नज़र और अद्भुत दृश्यहबल स्पेस टेलीस्कोप पृथ्वी की सतह से लगभग 550 किमी ऊपर मठ कक्षा में स्थित है और लगभग 95 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर लगाया गया है। पृथ्वी के ऊपर बने चक्रवात के कारण इस पर प्रदूषण, प्रदूषण या प्रकाश प्रदूषण का प्रभाव नहीं पड़ता है। यही वजह है कि ये बेहद साफा और प्रवासी तस्वीरें ले पाता है। यह सिर्फ एक टेलीस्कोप नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण अंतरिक्ष वेधशाला है, जिसे देखने का हमारा नजरिया ही बदल गया। ब्रह्मांड के प्रारंभिक दौर की झलकहबल की नजर इतनी दूर तक फैली हुई है कि हमें ब्रह्मांड के जन्म की करीबी घटनाएं दिखाई दे सकती हैं। उदाहरण के तौर पर GN-z11 नाम की आकाशगंगा, कीमत रोशनी हम तक की पहुंच में करीब 13.4 अरब साल लगी। यानी हम उसे वैसे ही देख रहे हैं, जैसी वह 40 करोड़ साल बाद बिग बैंग की थी। इसी तरह इयरेंडेल नाम का तारा, जिसका नाम लाइट लगभग 12.9 अरब साल पुराना है, हबल द्वारा देखा गया सबसे दूर का तारा इसमें शामिल है। ब्रह्मांडीय खजाना के लिएहबल से मिले डेटा ने ब्रह्मांड के विकास, आकाशगंगाओं के निर्माण और डार्क मैटर जैसे रहस्यों को समझने में मदद की है। इसे “कॉस्मिक आर्कियोलॉजी” यानी ब्रह्मांडीय पुरातत्व के प्रमुख उपकरण माना जाता है। वैज्ञानिक इन आंकड़ों और आँकड़ों के माध्यम से ब्रह्मांड के इतिहास को खोजते हैं और उनके अनसुलझे प्रश्नों के उत्तर खोजते हैं। निष्कर्ष: अतीत की खिड़की, भविष्य की समझहबल स्पेस टेलीस्कोप सिर्फ एक वैज्ञानिक उपकरण नहीं है, बल्कि मानव जिज्ञासा और खोज का प्रतीक है। यह हमें न सिर्फ यह बताता है कि ब्रह्मांड कैसा था, बल्कि यह भी समझने में मदद करता है कि हम इसमें कहां हैं।

नोएडा एयरपोर्ट बनेगा गेमचेंजर! बेहतर कनेक्टिविटी से कारोबार और रोजगार को रफ्तार

नई दिल्ली करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण अब देश को समर्पित हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन करते हुए इसे भारत के विकास क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। यमुना एक्सप्रेसवे के पास स्थित यह हवाई अड्डा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का दूसरा प्रमुख सिविल हवाई अड्डा बन गया है, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में हवाई यात्रा का दबाव कम होगा और यात्रा पहले से अधिक सशक्त बनेगी। प्रोजेक्ट में क्रांतिकारी परिवर्तन, मल्टी-मॉडल हब के रूप में विकासनोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को एक मल्टी-मॉडल बिजनेस हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां सड़क, रेल और मेट्रो सुविधाओं का बेहतरीन संगम होगा। यह हवाई अड्डा न सिर्फ दिल्ली-मैदान, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के लिए भी बड़ा पर्यटक केंद्र बनेगा। यहां के माध्यम से एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित रेल लिंक बेहद आसान होगा, जिससे यात्रियों के साथ-साथ सहयोगियों को भी लाभ मिलेगा। आधुनिक तकनीक से लैस ‘ऑल वेडर’ एयरपोर्टइस हवाई अड्डे को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से ‘ऑल वेडर ऑपरेशन’ की शुरुआत मिली है। इसका मतलब यह है कि यहां राक्षसी नेविगेशन सिस्टम, रनवे लाइटिंग और एयर रिमोट कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं, जिससे खराब मौसम या कम दृश्यता में भी उड़ान ऑपरेशन ऑपरेशन रूप से जारी रहता है। 3,900 मीटर वजनी रनवे बड़े वीडियो-बॉडी चित्रों को संलग्न करने में सक्षम है और दोनों सिरों पर आईएलएस सिस्टम स्थापित किया गया है, जो अधिक सुरक्षित और आसान सुविधा प्रदान करता है। क्षमता और बुनियादी ढांचे: भविष्य की इंजीनियरों के स्कूल की तैयारीपहले चरण में इस एयरपोर्ट की यात्री क्षमता 1.2 करोड़ रखी गई है, जिसे भविष्य में 7 करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही यहां कार्गो हैंडलिंग की क्षमता भी काफी बड़ी है, जो हर साल 2.5 लाख टन से अधिक कार्गो हैंडलिंग कर सकती है। खास बात यह है कि यह देश का पहला एयरपोर्ट होगा, जहां इन-हाउस बात एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे एयरलाइंस की लागत और समय दोनों की बचत होगी। उद्योग और रोजगार को मिलेगा बड़ा सहारानोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं है, बल्कि आर्थिक विकास का नया इंजन साबित हो रहा है। इसके माध्यम से निवेश, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे। उत्तर प्रदेश में पहले ही एक्सप्रेसवे, मेट्रो और रैपिड रेल जैसी कंपनियां प्रमुखता से काम कर रही हैं, और अब इस एयरपोर्ट के साथ देश में सबसे ज्यादा एयरपोर्ट वाले राज्य शामिल हो गए हैं। निष्कर्ष: भारत के एविएशन सेक्टर की नई उड़ानअंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे की शुरुआत न सिर्फ एनसीआर की ओर से मजबूत होगी, बल्कि यह भारत को वैश्विक एविएशन हब की दिशा में बनाना भी एक बड़ा कदम है। आने वाले वर्षों में यह एयरपोर्ट देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाएगा।

विकसित भारत 2047 की दिशा में बड़ा कदम भोपाल में जुटेंगे तीन राज्यों के युवा विधायक

भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रही है जहां 30 और 31 मार्च 2026 को युवा विधायकों का एक विशेष और अनूठा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। मध्य प्रदेश विधानसभा की इस पहल में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के 55 से अधिक युवा विधायक एक मंच पर एकत्रित होंगे और लोकतंत्र तथा देश के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श करेंगे। खास बात यह है कि इस सम्मेलन में शामिल सभी जनप्रतिनिधियों की आयु 45 वर्ष से कम है जिससे यह आयोजन पूरी तरह युवा नेतृत्व और उनकी सोच पर केंद्रित रहेगा। दो दिवसीय इस सम्मेलन का उद्घाटन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इस अवसर पर नरेन्द्र सिंह तोमर और रमन सिंह जैसे वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहेंगे जो युवा विधायकों का मार्गदर्शन करेंगे। वहीं समापन सत्र में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की मौजूदगी इस सम्मेलन को और अधिक महत्वपूर्ण बनाएगी। इस सम्मेलन में तीनों राज्यों से युवा विधायकों की भागीदारी भी संतुलित और व्यापक है। मध्यप्रदेश से 18, छत्तीसगढ़ से 15 और राजस्थान से 22 विधायक इसमें शामिल होंगे। यह आयोजन न केवल संख्या के लिहाज से बड़ा है बल्कि इसके उद्देश्यों की दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि पहली बार इस तरह तीन राज्यों के युवा जनप्रतिनिधियों को एक साझा मंच दिया जा रहा है जहां वे अपने अनुभवों और विचारों का आदान-प्रदान कर सकेंगे। सम्मेलन के दौरान दो प्रमुख विषयों पर गहन चर्चा और मंथन किया जाएगा जिनमें लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका और विकसित भारत 2047 का विजन शामिल है। इन सत्रों में युवा विधायक अपने अपने क्षेत्रों में किए गए नवाचार, सफल योजनाओं और जमीनी अनुभवों को साझा करेंगे। इसके साथ ही वे उन चुनौतियों पर भी चर्चा करेंगे जो भविष्य में शासन और नीति निर्माण के दौरान सामने आ सकती हैं। इस तरह यह मंच केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि व्यावहारिक समाधान खोजने का भी प्रयास करेगा। विधानसभा सचिवालय के अनुसार यह सम्मेलन विधान परिषद भवन में आयोजित किया जाएगा जहां विभिन्न सत्रों के माध्यम से युवा नेतृत्व को सशक्त बनाने पर जोर दिया जाएगा। यह आयोजन संसदीय प्रणाली को समझने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कुल मिलाकर यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि देश के भविष्य की राजनीति को आकार देने की दिशा में एक सार्थक पहल है। यहां लिए गए विचार और सुझाव आने वाले वर्षों में नीति निर्माण और विकास के एजेंडे को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि युवा विधायक इस मंच से किस तरह के विचार और विजन देश के सामने रखते हैं और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अपनी भूमिका को कैसे परिभाषित करते हैं।

मुनमुन सेन बर्थडे स्पेशल: 80 के दशक की ‘बोल्ड बाला’ जिसने हिंदी सिनेमा को किया चुनौतीपूर्ण

नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के 80 के दशक में महिलाएं अपने करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाना मुश्किल मानती थीं। शादी और बच्चों के बाद बड़े कलाकारों के साथ काम करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता था। ऐसे में मुनमुन सेन ने इन सभी रूढ़िवादी नियमों को तोड़ते हुए अपनी पहचान बनाई। 28 मार्च को जन्मी मुनमुन सेन ने हिंदी और बंगाली सिनेमा में अपनी अलग छवि बनाई और उन्हें इंडस्ट्री कीबोल्ड बाला कहा गया। सिनेमा में आने का मुनमुन का कोई प्रारंभिक इरादा नहीं था। उनकी मां, सुचित्रा सेन, चाहती थीं कि उनकी बेटी फिल्मों से दूर रहे। लेकिन शादी और दो बच्चों की मां बनने के बाद मुनमुन ने खुद की पहचान बनाने के लिए फिल्मों का रुख किया। पति के सहयोग से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा और पहला किरदार ही उन्हें सुर्खियों में ला गया। उनकी पहली फिल्मअंदर बाहर में उनका छोटा सा किरदार भी दर्शकों को प्रभावित करने के लिए काफी था। मुनमुन सेन ने इस फिल्म में आधुनिक और निडर महिला की भूमिका निभाई, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने100 डेज जख्मी दिल तेलुगु फिल्म सिरिवे नेलाअमर कंटक औरशीशा जैसी फिल्मों में काम किया। मुनमुन सेन की फिल्मों में बोल्ड और निडर भूमिकाओं के कारण उनका नाम हमेशा चर्चा में रहा। बंगाल में उनके बोल्ड किरदारों पर विरोध हुआ और उनके विवादित फोटोशूट ने इस बहस को और भी बढ़ा दिया। कई मैगजीन के लिए सेंसेशनल पोज देने के बावजूद मुनमुन ने अश्लीलता के आरोपों को बेखौफ झेला और 80-90 के दशक की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शुमार रहीं। सिर्फ फिल्मी करियर ही नहीं, उनकी निजी जिंदगी भी हमेशा मीडिया और दर्शकों के बीच चर्चाओं का विषय रही। उनके नाम कई अफेयर्स जुड़े, जिनमें पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर और प्रधानमंत्री इमरान खान, प्रोड्यूसर रोमू सिप्पी और विक्टर बनर्जी शामिल हैं। लेकिन मुनमुन सेन ने हमेशा बेबाकी से अफेयर्स की खबरों को नकारा और इमरान खान को अपना करीबी दोस्त बताया। मुनमुन सेन की कहानी यह दिखाती है कि एक महिला चाहे शादीशुदा हो या मां, अगर हिम्मत और आत्मविश्वास हो तो सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है। उनके निडर किरदार और बोल्ड फिल्म च्वाइस ने हिंदी सिनेमा के उस समय के रूढ़िवादी नजरिए को चुनौती दी और उन्हें इंडस्ट्री की सबसे चर्चित और यादगार अभिनेत्रियों में शामिल किया।

मुंबई इंडियंस के लिए खुशखबरी! बुमराह कैंप से जुड़े, KKR के खिलाफ दिख सकते हैं एक्शन में

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के ट्रेलर से ठीक पहले मुंबई इंडियंस के खेमे से बड़ा टेलिविजन सामने आया है। टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रित बुमरा मुंबई पहुंच गए हैं और टीम में शामिल हो गए हैं। ऐसे में रविवार को कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ होने वाले क्लब में उनका प्रदर्शन काफी बढ़ गया है। हालांकि फाइनल डिसीजन मैच से पहले ही ले लिया गया था, लेकिन टीम से जुड़े ब्यौरे के मुताबिक सुपरस्टार पूरी तरह से फिट नजर आ रहे हैं। वर्कशॉप के बाद पूरी तरह से तैयारसंगीतकार पिछले कुछ दिनों से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के एक्सीलेंस सेंटर में स्थित थे, जहां उनका वर्कशॉप बनाया जा रहा था। यह एक नियमित प्रक्रिया थी, जिससे उनकी फिटनेस पर नज़र बनी रहती थी। एथोट के अनुसार, उन्होंने हाल ही में पूरी तरह से नामांकन दाखिल किया है और अब वह मैच के लिए तैयार हैं। ऐसे में उनकी वापसी में मुंबई का आक्रमण और भी खतरनाक नजर आ रहा है। एमआई बनाम केकेआर में वनखेड़े नज़ारें प्रशंसक पररविवार को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच सीजन का दूसरा मुकाबला खेला जाएगा। दोनों टीमों ने शुक्रवार रात अभ्यास और शनिवार को एक और अभ्यास सत्र तय किया। इस दौरान सभी की नजरें, बॉलर की फिटनेस और उनकी जगह-जगह की चुनौती। यदि वह प्रतिस्पर्धा करता है, तो केकेआर के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। पिछले सीज़न की सीख, इस बार की बेहतर शुरुआत की तैयारीआईपीएल 2025 में मुंबई इंडियंस का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। टीम 14 में से 8 ग्रुप ने ही जीत हासिल की और प्लेऑफ में किसी तरह चौथे स्थान पर रहे। हालांकि पांच बार की चैंपियन टीम इस बार बेहतर शुरुआत कर टॉप-2 में जगह बनाने का लक्ष्य लेकर उतरेगी। स्टूडियो की वापसी इस मिशन को स्थान देने का काम करती है। आगे का नाटक भीकेकेआर का पहला मुकाबला मॉस्को के बाद मुंबई इंडियंस से 4 अप्रैल को दिल्ली कैपिटल्स से, 7 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स से और 12 अप्रैल को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ खेलेगी। ऐसे में शुरुआती मैचों में म्यूजिकल टीम के लिए बेहद अहम रहने वाली है।